उपदेश

विषय १ : पाप

[1-2] मनुष्य जन्म से ही पापी है (मरकुस ७:२०-२३)

(मरकुस ७:२०-२३)
“फिर उसने कहा, “जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं”। 
 
 
लोग उलझन में है और अपने भ्रम के मुताबिक़ जीवन जी रहे है
 
उद्धार पाने की सबसे अधिक
संभावना किसकी है?
वह जो खुद को बहुत बड़ा
 पापी मानता है

सबसे पहले, मैं आपको एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। आप खुद को किस रीति से देखते है? क्या आप सोचत है की आप अच्छे या बुरे है? आप क्या सोचते है? 
सभी लोग अपनें भ्रम में जी रहा है। आप जितना सोचते है उतने बुरे नहीं है, ओर जितना सोचते है उतने अच्छे भी नहीं है। 
तो फिर विश्वास का अच्छा जीवन कौन जी सकता है? क्या वह व्यक्ति जो अपने आप को बहुत ही अच्छा मानती है? या फिर वो व्यक्ति जो अपने आप को बुरा मानता है? 
यह बाद का है। मुझे आपको दूसरा प्रश्न पूछने दीजिए। उद्धार पाने की सबसे ज्यादा संभावना किस की है – वह जिन्होंने बहुत पाप किए है या फिर वो जिन्होंने बहुत कम पाप किए है? जो व्यक्ति स्वीकार करता है की उसने अनगिनत पाप किए है वो उद्धार पाने के लिए संभवित है क्योंकि वह स्वीकार करता है की वो पापी है। ऐसे व्यक्ति यीशु के द्वारा तैयार किए गए छुटकारे के वचनों को स्वीकार कर सकते है। 
जब हम सचमुच अपने आप को देखते है, तब हमें पता चलता है की हम केवल पापो का एक ढेर है। मनुष्य कौन है? मनुष्य ‘कुकर्म करनेवालों का वंश’ है, यशायाह ५९ में लिखा है की, मनुष्य का मन हर प्रकार के अधर्म से भार हुआ है। इसलिए, यह स्पष्ट होता है की मनुष्य पापो का ढेर है। लेकिन, अगर हम मनुष्य को पापो के ढेर के रूप में देखे तो कई लोग इस बात से सहमत नहीं होंगे। पर इंसान ‘कुकर्म करनेवालों का वंश’ है ये परिभाषा सही है। अगर हम ईमानदारी से खुद को देखे, तो हमें स्पष्टरूप से दिखाई देगा की हम दुष्ट है। जो लोग अपने आप से ईमानदार है वो यही निष्कर्ष पर आएँगे। 
फिर भी, ऐसा लगता है की कई लोग यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है की वो पापो का ढेर है। कुछ लोग आरामदायक जीवन जी रहे है क्योंकि वो लोग अपने आप को पापी मानते ही नहीं है। हम कुकर्म करने वाले लोग है, इसीलिए हमने पापी सभ्यता का निर्माण किया है। अगर ये सच नहीं होता, तो फिर हम पाप करने से शर्मिंदा होते। मगर, हम में से कई लोग पाप करने से शर्मिंदा नहीं होते। 
फिर भी, उनकी अंतरात्मा को पता है। हरेक व्यक्ति के पास अंतरात्मा है जो उनको कहता है की, “यह शर्मनाक है”। आदम और हव्वाने पाप करने के बाद अपने आप को पेड़ो के पीछे छिपा लिया। आज, कई पापी लोग हमारी नीच संस्कृति के पीछे छिप गए है – हमारी पाप की संस्कृति। वह परमेश्वर के न्याय से बचने के लिए अपने पापी साथियों के बिच छिप जाते है। 
लोग अपने ही भ्रम से धोख़ा खाते है। वह अपने आप को दूसरो से ज्यादा धर्मी मानते है। इसीलिए, जब वो बुरी खबर सुनते है, तब गुस्से में चिल्लाते है, “कोई व्यक्ति इस तरह की बात कैसे कर सकता है?” कोई बीटा अपने माता-पिता के साथ ऐसा कैसे कर सकता है?” वे खुद मानते है की वे ऐसी बाते नहीं कर सकते। 
प्रिय मित्रो, आप के लिए खुद को जानना इतना कठिन है। वास्तव में हमें खुद को जानने के लिए, सबसे पहले पापो की माफ़ी प्राप्त करनी होगी। अपने मनुष्य स्वभाव के बारे में जानकारी प्राप्त करने में हमें लंबा समय लगेगा, और हम में से कई लोग तो ऐसे है जो मरते दम तक इस बातको नहीं जान पाएँगे। 
 
 
खुद को जाने 
 
जो खुद को नहीं जानते वो किस रीति से 
जीवन जीते है?
वह अपने पापो को छुपाकर कपटियो
 के भातिं जीवन जीते है।

कई बार हमारा सामना ऐसे लोगो से होता है जो सचमुच अपने आप को नहीं जानते। सोक्रेटिस ने कहा, “अपने आप को पहेचानिए”। हालाकि, हम में से कई लोग नहीं जानते की हमारे ह्रदय में क्या है: हत्या, चोरी, लोभ, दुष्टता, छल, कपट, कुदृष्टि...आदि। 
जो अपने आप को नहीं जानता उसके होंठो पर सांप का जहर होता है, लेकिन वो अच्छाई की बात करता है। इसका कारण यह है की व्यक्ति यह नहीं जानता की वह एक अनिवार्य पापी के रूप में पैदा हुआ है। 
इस दुनिया में कई ऐसे लोग है जो अपने वास्तविक स्वभाव के बारे में जानते ही नहीं है। उन्होंने अपने आपको धोख़ा दिया है और पूरी तरह से अपने ही धोखें में लपेट कर अपने जीवन का अंत करते है। वो नहीं जानत है की अपने ही धोखें के कारण वो खुद को नरक में फेंक रहे है। 
 
 
लोग लगातार जीवनभर पाप उगलते रहते है
 
क्यों वह नरक मे जाते है?
क्योंकि वह अपने आप को नहीं जानते है।

आए मरकुस ७:२१-२३ देखे, “क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं”। मनुष्य का मन उसकी माँ के गर्भ से ही बुरे विचारों से भरा होता है। 
आइए हम कल्पना करे की व्यक्ति का मन शीशे के प्याले से बना हुआ है और कोई गंदे तरल पदार्थ से यानी की हमारे पापो से लबालब भरा हुआ है। जब यह व्यक्ति आगे-पीछे जाएगा तो क्या होगा? गंदा तरल पदार्थ (पाप) चारो ओर फ़ैल जाएगा। जैसे जैसे व्यक्ति आगे-पीछे होगा वैसे वैसे पाप चारो ओर फैलता जाएगा। 
हम, जो पापो का ढेर है, अपना जीवन ऐसे ही बिताते है। हम जहा कही भी जाते है वहाँ पाप करते है। हम जीवनभर पाप करते है क्योंकि हम पापो का ढेर है। 
समस्या यह है की हमें पता नहीं है की हम पापो का ढेर है, दुसरे शब्दों में कहे तो, हम पाप का बीज है। हम पापो का ढेर है और जन्म से ही हमारे हृदय में पाप है। 
पाप का ढेर छलकने के लिए तैयार है। फिर भी, लोग मानते नहीं है की वह स्वाभाविक रूप से पापो से भरे हुए है। वो सोचते है की दुसरे लोग उनको पाप करने के लिए नेतृत्व करते है, वह खुद पापी नहीं है। 
जब इंसान पाप करता है तब वह सोचता है की पापो को साफ़ करने के लिए उन्हें केवल खुद को साफ़ करने की जरुरत है। वे हर बार पाप करने के बाद खुद को साफ़ करते रहेते है और खुद को कहेते है की इसमे उनकी कोई गलती नहीं है। हम अपने आप को साफ़ करते है तो क्या इसका मतलब यह है की हम बार बार गिराए? हमें उसे बार बार साफ़ करना पड़ेगा। 
जब प्याला पाप से भर जाता है तब बार बार वो छलकता रहता है। बहार से साफ़ करने का कोई मतलब नहीं। जब तक प्याला पापो से भरा हुआ है तब तक हम धार्मिक कर्म करने के द्वारा अपने आप को बहार से भले ही चाहे जीतनी बार साफ़ करलें उसका कोई अर्थ नहीं। 
हमने इतने सारे पापो के साथ जन्म लिया है की अब हमारा हृदय खाली नहीं होगा, फिर चाहे हम कितने ही पाप रास्तें में फेंक क्यों न दे। इसलिए, हम जीवनभर पाप करते ही रहतें है। 
जब तक किसी व्यक्ति को यह पता नहीं चलता की वो पापो का ढेर है, तब तक वो इंसान अपना पापी स्वभाव छुपता रहेगा। हरेक मनुष्य के हृदय में पाप है और वो बहार की सतह साफ़ करने से नहीं जाता है। जब हम छोटा पाप बिखेरते है, तब हम कपडे से उसे साफ़ करते है। जब हम फिरसे बिखेरते है, तब हम पोछे से...तोलिए से और फिर कम्बल से साफ़ करते है। हम ऐसी उम्मीद रखते है की यदि हम बार बार इसे साफ करेंगे तो वह साफ़ हो जाएगा, लेकिन वास्तव में वो बार बार बिखरता रहेगा। 
आप को क्या लगता है ऐसा कब तक चलेगा? ऐसा हमारे मृत्यु तक चलेगा। इंसान अपनी मौत के दिन तक पाप करता रहता है। इसीलिए हमें छूटकारा पाने के लिए यीशु पर विश्वास करना पड़ेगा। छूटकारा पाने के लिए हमें सबसे पहले खुद को पहचानना होगा।
 
कौन यीशु का आभारपूर्वक 
प्रेम पा सकता है?
जो पापी अंगीकार करे की उसने बहुत ही बुरे
काम किए है

आइए हम दो इंसानों को देखते है जो गंदे तरल पदार्थ से भरे हुए दो शीशे के प्याले जैसे है। दोनों प्याले पाप से भरे हुए है। उसमे से एक अपनी तरफ देख के कहेता है, “ओह, में कितना पापी व्यक्ति हूँ”। फिर, वो छोड़कर किसी ऐसे व्यक्ति की खोज करेगा जो उसे मदद कर सके। 
लेकिन दूसरा सोचता है की वो वास्तव में दुष्ट नहीं है। वो अपने अंदर के पाप के ढेर को देख नहीं सकता और सोचता है की वो पापी नहीं है। वो जीवन भर बिखरा हुआ साफ़ करता रहेता है। वह एक तरफ साफ़ करता है और फिर दूसरी तरफ...उसके बाद तुरंत तीसरी ओर घुमाता है.... 
ऐसे कई लोग है जो सावधानी से अपना जीवन जीते है, चारो ओर न बिखरे इस लिए वो जितना हो सके उतना कम पाप करने की कोशिश करते है। लेकिन उनके हृदय में अभी भी पाप है, ऐसा करने से क्या लाभ होगा? सचेत रहेने से वो स्वर्ग के नजदीक नहीं जाएंगे, लेकिन ‘सचेत रहेना’ उनको नरक की ओर लेकर जाएगा। 
प्रिय मित्रो, ‘सचेत रहेना’ केवल नरक की ओर ही लेकर जाता है। हमें यह सबक हृदय में रखना चाहिए। जब इंसान सचेत होता है, तब उनके पाप ज्यादा बिखरते नहीं है, लेकिन फिर भी वो पापी तो है ही। 
मनुष्य के ह्रदय में क्या है? पाप? अनैतिकता? हां! चोरी? हां! अहंकार? हां! 
हम मदद नहीं कर सकते लेकिन अंगीकार कर सकते है की हम पापो के ढेर है, ख़ास तौर पर तब जब हमें कोई सिखाता नहीं है लेकिन फिर भी हम खुद को कुकर्म करते हुए देख सकते है। 
शायद जब हम छोटे हो तब हमें यह बात स्पष्ट न लगे। लेकिन जब हम बड़े हो जाते है तब? जब हम स्कूल, कॉलेज जाते है और आगे बढ़ाते जाते है तब हमें समझ में आता है की हमारे अन्दर जो कुछ भी है वो पाप है। क्या ये सच नहीं है? ईमानदारी से कहूं तो हमारे पापी स्वभाव को छिपाना असंभव है। सही है ना? हम पाप बिखेरते ही रहेते है। फिर हमें पछतावा होता है, “मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था”। हालाकि, वास्तव में बदलना हमें असंभव लगता है। ऐसा क्यों? क्योंकि हम सब पापो के ढेर के साथ पैदा हुए है। 
हम केवल सचेत रहेने से शुध्ध नहीं हो सकते। संपूर्ण छूटकारा पाने के लिए हमें यह जानने की जरुरत है की हमने पापो के ढेर के रूप में जन्म लिया है। केवल वही पापी उद्धार पाएगा जो यीशु द्वारा तैयार किए गए छुटकारे को स्वीकार करता है।
जो ऐसा सोचते है की, “मैंने ज्यादा गलत या पाप नहीं किया”, वो लोग इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे की यीशु ने उनके सारे पापो को ले लिया है और इसलिए वो नरक में जाने के लिए नियुक्त किए गए है। हमें जानना चाहिए की हम में से हरेक व्यक्ति के अंदर पाप का ढेर है क्योंकि हम उसके साथ ही पैदा हुए है। 
यदि कोई सोचता है की, “मैंने कोई ज्यादा गलत काम नहीं किया लेकिन केवल इस छोटे पाप से छूटकारा मिल जाए तो”, क्या वो पाप से आज़ाद हो जाएगा? ऐसा कभी नहीं होगा। 
जो इंसान छूटकारा पा सकता हैं वो जनता है की वो पापो का ढेर है। वह संपूर्ण रीति से विश्वास करता है की यीशु ने यर्दन में बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापो को ले लिया और जब वो हमारे लिए मरा तब उसने पापो का मूल्य अदा कर दिया। 
हमें छूटकारा मिला हो या ना मिला हो, लेकिन हम सब भ्रम में ही जी रहे है। हम पाप का ढेर है। हम केवाल तब ही छूटकारा पा सकते है जब हम विश्वास करे की यीशु ने हमारे सारे पापो को ले लिया है। 
 
 
परमेश्वरने ‘थोडा सा पाप’ रखने वाले को भी छूटकारा नहीं दिया 
 
कौन परमेश्वर को धोख़ा देता है?
वह जो प्रतिदिन के पापो के लिए माफ़ी मांगता है

जिनके अन्दर ‘थोड़ा सा भी पाप’ है उनको परमेश्वरने छूटकारा नहीं देता। जो कहते है की, “परमेश्वर, मेरे अन्दर केवल एक छोटा सा पाप है” उनकी ओर परमेश्वर देखता भी नहीं है। वो उन लोगो पर दया करता है जो कहते है की, “परमेश्वर, में पापो का ढेर हूं। में नरक में जा रहा हूं। कृपा करके मुझे बचाइए”। संपूर्ण पापी जो कहते है, “परमेश्वर, अगर तू मुझे बचाएगा तो ही में बच पाउँगा। अब में और पश्चाताप की प्रार्थना नहीं कर सकता क्योंकि मैं जानता हूं की में बार बार पाप करता हूं। कृपा करके मुझे बचा”। 
परमेश्वर उनको बचाता है जो पूर्णरूप से उस पर निर्भर है। मैं भी हरदिन पश्चाताप की प्रार्थना करता था, लेकिन पश्चाताप की प्रार्थना ने मुझे कभी पापो से आज़ाद नहीं किया। इसलिए, में परमेश्वर के आगे घुटनों के बल गिर गया और प्रार्थना की, “परमेश्वर, कृपा करके मुझ पर दया कीजिए और मेरे सारे पापो से मुझे बचाइए”। जो व्यक्ति इस रीति से प्रार्थना करेगा वह बच जाएगा। वो परमेश्वर के छुटकारे और युहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करेंगे। वो बच जाएंगे। 
परमेश्वर केवल उन लोगो को बचाएगा जो खुद को पहचानते है की वह पापो का ढेर है और कुकर्म करनेवालों के वंश है। जो कोई भी कहता है की, “मैंने केवल छोटा सा पाप किया है। कृपा करके मुझे माफ़ कीजिए” वो अभी भी पापी है और परमेश्वर उनको नहीं बचा सकता। परमेश्वर केवल उन लोगो को बचाता है जो अंगीकार करते है की वो पूर्णरूप से पापो के ढेर है। 
यशायाह ५९:१-२ में लिखा है, “सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्‍वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उसका मुख तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता”। 
हम पापो के ढेर के साथ पैदा हुए है इसलिए परमेश्वर हमें प्रेम भरी निगाहों से नहीं देखता है। इसलिए नहीं की उसका हाथ छोटा हो गया है, या उसके कानो ने सुनना बंद कर दिया है इसलिए वो हमारी माफ़ी की प्रार्थना सुन न सके। 
परमेश्वर हमें कहता है, “परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्‍वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उसका मुख तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता”। क्योंकि हमारे हृदय में बहुत सारे पाप है, इसलिए हम स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर सकते, भले ही दरवाजा खुल्ला क्यों न हो। 
अगर हम जो पाप के ढेर से भरे हुए है, बार बार पाप करने के बाद माफ़ी मांगेगे तो पर्वेश्वर को अपने बेटे को बार बार मारना पड़ेगा। परमेश्वर नहीं चाहता की वो ऐसा करे। वो कहता है, “तुम हरदिन अपने पापो के साथ मेरे पास मत आओ। तुम्हें अपने सारे पापो से छुडाने के लिए मैंने मेरे बेटे को भेजा है। आपको केवल यह समझना है की उसने आपके पाप कैसे ले लिए और उस सत्य को स्वीकार करना है। और फिर उद्धार पाने के लिए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना है। मेरे लोगो, मैंने तुम्हें दिया हुआ ये सबसे महान प्रेम है। 
परमेश्वर हमें कहता है की, “मेरे बेटे पर विश्वास करो और अपने पापो की माफ़ी पाओ। मैंने, तुम्हारे परमेश्वरने, तुम्हारे सारे पाप और अपराधो के प्रायश्चित के लिए मेरे बेटे को भेजा है। मेरे बेटे पर विश्वास करो और उद्धार प्राप्त करो। 
जो नहीं जानते है की वो खुद पापो का ढेर है वो अपने छोटे पापो के लिए भी माफ़ी माँगते है। उनके पाप कितने भयंकर है वो जाने बिना वो लोग परमेश्वर के आगे जाते है और प्रार्थना करते है, “कृपा करके इस छोटे पाप के लिए मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं दुबारा ऐसा नहीं करूंगा”। 
वो लोग ऐसी प्रार्थना करके खुद को भी धोख़ा देते है। हम केवल एक बार पाप नहीं करते, लेकिन मरते दम तक करते है। हमें अपने जीवन के आखरी दिन तक माफ़ी मांगनी पड़ेगी, क्योंकि हम पाप करना बंद नहीं कर शकते और हमारा शरीर मौत तक पाप की गुलामी करेगा। 
एक छोटे पाप की माफ़ी पाप की समस्या को सुलझा नहीं सकती क्योंकि हम हरदिन अनगिनत पाप करते है। इसलिए, पाप से स्वतंत्र होने का केवल एक ही रास्ता है की हम अपने पाप यीशु पर डाल दे। 
 
मनुष्य का स्वभाव कैसा है?
पापो का ढेर

बाइबल मनुष्य के पापो को गिनती में लेता है: “क्योंकि तुम्हारे हाथ हत्या से और तुम्हारी अंगुलियाँ अधर्म के कर्मों से अपवित्र हो गईं हैं, तुम्हारे मुँह से तो झूठ और तुम्हारी जीभ से कुटिल बातें निकलती हैं। कोई धर्म के साथ नालिश नहीं करता, न कोई सच्‍चाई से मुक़द्दमा लड़ता है; वे मिथ्या पर भरोसा रखते हैं और झूठी बातें बकते हैं; उसको मानो उत्पात का गर्भ रहता, और वे अनर्थ को जन्म देते हैं। वे साँपिन के अण्डे सेते और मकड़ी के जाले बनाते हैं; जो कोई उनके अण्डे खाता वह मर जाता है, और जब कोई एक को फोड़ता तब उसमें से सपोला निकलता है। उनके जाले कपड़े का काम न देंगे, न वे अपने कामों से अपने को ढाँप सकेंगे। क्योंकि उनके काम अनर्थ ही के होते हैं, और उनके हाथों से उपद्रव का काम होता है। वे बुराई करने को दौड़ते हैं, और निर्दोष की हत्या करने को तत्पर रहते हैं; उनकी युक्‍तियाँ व्यर्थ हैं, उजाड़ और विनाश ही उनके मार्गों में हैं। शान्ति का मार्ग वे जानते ही नहीं; और न उनके व्यवहार में न्याय है; उनके पथ टेढ़े हैं, जो कोई उन पर चले वह शान्ति न पाएगा” (यशायाह ५९:३-८)। 
इंसानों की अंगुलियाँ अधर्म के कामों से अपवित्र हो गईं है और वो अपने जीवनभर जो कुछ भी करते है वह पाप से भरा हुआ होता है। और हमारी जीभ “झूठ बोली” है। हमारे मुँह से जो कुछ भी निकालता है वो सब झूठ है। 
“जब शैतान झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है” (युहन्ना ८:४४)। जो नया जन्म पाए हुए नहीं है वो कहेंगे, “मैं तुजसे सच कहेता हूं...में सचमे कहेता हूं। मैं जो कुछ भी कहता हूं सच कहता हूं...” लेकिन वो जो कुछ भी कहते है वह झूठ है। जैसे लिखा है वैसे ही। “जब शैतान झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है”। 
इंसान खोखले शब्दों पर विश्वास करता है और झूठ बोलता है। मनुष्य दुष्टता को पहन लेता है और अन्याय को जन्म देता है। वे साँपिन के अण्डे सेते और मकड़ी के जाले बनाते है। परमेश्वर कहता है, “जो कोई उनके अण्डे खाता वह मर जाता है, और जब कोई एक को फोड़ता तब उसमें से सपोला निकलता है”। परमेश्वर कहता है की तुम्हारे हृदय में साँपिन के अण्डे है। साँपिन के अण्डे! तुम्हारे हृदय में दुष्टता है। इसीलिए हमें पानी और लहू के सुसमाचार पर विश्वास करके छूटकारा पाने की आवश्यकता है। 
जब भी में परमेश्वर के बारे में बात करना शुरू करता हूं, तब ऐसे लोग भी होते है जो कहते है, “ओह, प्रिय! कृपया परमेश्वर के बारे में मुझसे बात मत कर। हर बार में कुछ करने की कोशिश करता हूं, पाप छलक कर बहार आ जाता है। वे बहार उमड़ पड़ते है। मैं कही पर भी पाप छलकाए बिना एक कदम भी नहीं चल सकता। मैं कुछ भी नहीं कर सकता। में पापो से भार हुआ हूं। में बेबस बन जाता हूं। इसलिए मेरे सामने परमेश्वर की बात न करो”। 
यह मनुष्य अच्छी तरह जानता है की वो पापो का ढेर है, लेकिन वो यह बात नहीं जानता की परमेश्वर ने अपने प्रेम के सुसमाचार से उसे पूरी रीति से बचा लिया है। जो जानते है की वो पापो का ढेर है केवल वही लोग बच पाएंगे। 
वास्तव में हर इंसान इस व्यक्ति के जैसा ही है। प्रत्येक मनुष्य जहा जाता है वहाँ पाप बिखेरता है। पाप छलकते है क्योंकि हर एक मनुष्य पापो का ढेर है। ऐसे अस्तित्व से बचने का एक मात्र रास्ता है परमेश्वर की सामर्थ्य। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है? जो लोग दुःख में, सुख में, या आरामदेह जिंदगी में पापो को बिखेरते रहते है वह केवल यीशु के द्वारा ही बच सकते है। यीशु हमें बचाने के लिए आया। 
उसने आपके सारे पापो को पूरी तरह मिटा दिया है। आप पापो का ढेर है यह अंगीकार करे और उद्धार पाए।