उपदेश

विषय ३ : पानी और आत्मा का सुसमाचार

[3-3] यीशु मसीह पानी, खून, और आत्मा से आया (१ यूहन्ना ५:१-१२)

(१ यूहन्ना ५:१-१२)
“जिसका यह विश्‍वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्‍वर से उत्पन्न हुआ है; और जो कोई उत्पन्न करनेवाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता हैं जो उससे उत्पन्न हुआ है। जब हम परमेश्‍वर से प्रेम रखते हैं और उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, तो इसी से हम जानते हैं कि हम परमेश्‍वर की सन्तानों से प्रेम रखते हैं। क्योंकि परमेश्‍वर से प्रेम रखना यह है कि हम उसकी आज्ञाओं को मानें; और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं। क्योंकि जो कुछ परमेश्‍वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्‍त करता है; और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्‍त होती है हमारा विश्‍वास है। संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका यह विश्‍वास है कि यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र है। यही है वह जो पानी और लहू के द्वारा आया था, अर्थात् यीशु मसीह : वह न केवल पानी के द्वारा वरन् पानी और लहू दोनों के द्वारा आया था। और जो गवाही देता है, वह आत्मा है; क्योंकि आत्मा सत्य है। गवाही देनेवाले तीन हैं, आत्मा, और पानी, और लहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं। जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्‍वर की गवाही तो उससे बढ़कर है; और परमेश्‍वर की गवाही यह है कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है। जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है वह अपने ही में गवाही रखता है। जिसने परमेश्‍वर पर विश्‍वास नहीं किया उसने उसे झूठा ठहराया, क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्‍वास नहीं किया जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। और वह गवाही यह है कि परमेश्‍वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।”
 
 
यीशु किस के द्वारा आया था?
पानी, लहू, और पवित्र आत्मा

क्या यीशु पानी के द्वारा आया था? हाँ, वह आया था। वह अपने बपतिस्मा के द्वारा आया था। पानी यरदन नदी में यूहन्ना बपतिस्मा के द्वारा यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है। वह छुटकारे का बपतिस्मा था जिसके द्वारा उसने जगत के सारे पापों को उठा लिया था।
क्या यीशु लहू के द्वारा आया था? हाँ, वह आया था। वह मनुष्य के रूप में देह में आया और जगत के सारे पापों को उठाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया, फिर क्रूस पर लहू बहाने के द्वारा उसने पापो का मूल्य चुका दिया। 
क्या यीशु आत्मा के द्वारा आया था? हाँ, वह आया था। यीशु परमेश्वर था, लेकिन पापियों का उद्धारकर्ता बनने के लिए वह शरीर में आत्मा बनके आया था। 
बहुत सारे लोग विश्वास नहीं करते की यीशु पानी, लहू और आत्मा के द्वारा आया। केवल थोड़े ही है जो विश्वास करते है की यीशु वास्तव में राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी चकित है की, ‘क्या यीशु वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है या मनुष्य का पुत्र है?’ और बहुत से धर्मशास्त्री और सेवक भी यीशु को परमेश्वर, उद्धारकर्ता और सम्पूर्ण व्यक्ति मानने के बदले केवल एक मनुष्य मानते है। 
लेकिन परमेश्वर ने कहा है की जो कोई विश्वास करेगा की यीशु राजाओं का राजा, सच्चा परमेश्वर और सच्चा उद्धारकर्ता है वे लोग उससे जन्म लेंगे। जो लोग परमेश्वर को प्रेम करते है वह यीशु को प्रेम करते है और जो लोग सच्ची रीति से परमेश्वर पर विश्वास करते है वे उसी रीति से यीशु पर विश्वास करते है। 
मनुष्य नया जन्म पाए बगैर संसार पर जय नहीं पा सकता। इसलिए, प्रेरित यूहन्ना ने हमें कहा है की केवल सच्चे मसीही लोग ही संसार पर जय पा सकते है। क्यों विश्वासी व्यक्ति संसार पर जय पा सकेगा उसका कारण है की उनका विश्वास पानी, रक्त, और आत्मा पर है। संसार पर जय पाने का सामर्थ्य मनुष्य की इच्छा, प्रयास या आवेग से नहीं मिलता। 
“यदि मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की बोलियाँ बोलूँ और प्रेम न रखूँ, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झाँझ हूँ। 2और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूँ, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूँ, और मुझे यहाँ तक पूरा विश्‍वास हो कि मैं पहाड़ों को हटा दूँ, परन्तु प्रेम न रखूँ, तो मैं कुछ भी नहीं। 3यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूँ, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूँ, और प्रेम न रखूँ, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं” (१ कुरिन्थियों १३:१-३)। 
‘प्रेम’ यहाँ दर्शाता है की यीशु पानी, लहू और आत्मा के द्वारा आया। बाइबल में ‘प्रेम’ शब्द हंमेशा ‘सत्य से प्रेम’ (२ थिस्सलुनीकियो २:१०) को दर्शाता है। वास्तव में परमेश्वर का प्रेम अपने इकलौते बेटे के द्वारा प्रगट होता है (१ यूहन्ना ४:९)। 
 
 
जो लोग पानी और लहू पे विश्वास करते है केवल वही संसार पर जय पा सकता है
 
कौन संसार पे जय पा सकता है?
वे जो यीशु के बपतिस्मा के छुटकारे, उसके लहू 
और आत्मा पर विश्वास करता है

१ यूहन्ना ५:५-६ में लिखा है, “संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका यह विश्‍वास है कि यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र है। यही है वह जो पानी और लहू के द्वारा आया था, अर्थात् यीशु मसीह : वह न केवल पानी के द्वारा वरन् पानी और लहू दोनों के द्वारा आया था।” 
साथी मसीही, जिसने शैतान और संसार पर जय पाया है वह यीशु मसीह है। जो लोग मसीह के पानी, लहू और आत्मा पर विश्वास करते है वे भी संसार पर जय पा सकते है। यीशु ने संसार पर कैसे जय पाई? छुटकारे के पानी, लहू और आत्मा के द्वारा।
बाइबल में ‘पानी’ ‘यीशु के बपतिस्मा’ को दर्शाता है (१ पतरस ३:२१)। यीशु देह में होकर इस जगत में आया। वह जगत के पापियों को बचाने के लिए आया; उसने सारे पापियों के पापों को उठा ने के लिए बपतिस्मा लिया और उस पापों के प्रायश्चित के लिए वह क्रूस पर मरा। 
क्रूस पर का लहू इस वास्तविकता को दर्शाता है की वह मनुष्य की देह में इस जगत में आया था। वह पापियों को बचाने के लिए पापी शरीर के रूप में आया और पानी से बपतिस्मा लिया। इसलिए, यीशु पानी और लहू के द्वारा हमारे पास आया। दुसरे शब्दों में, खुद के बपतिस्मा के पानी और मृत्यु के लहू के द्वारा उसने जगत के सारे पापों को उठा लिया। 
शैतान कैसे संसार पर हुकूमत करता है? शैतान ने मनुष्यजाति को परमेश्वर के वचन पे संदेह करने के लिए प्रेरणा दी और उनके दिल में अनाज्ञाकारिता के बिज बो दिए। शैतान ने लोगो को परमेश्वर के वचनों के प्रति अनाज्ञाकारी बनाके अपने सेवको की ओर मोड़ दिया। 
यीशु इस जगत में आया और बपतिस्मा के पानी और क्रूस पर के अपने लहू के द्वारा इस जगत के पापों को मिटा दिया; उसने शैतान पर जय पाया और जगत के सारे पापों को मिटा दिया।
ऐसा हुआ क्योंकि यीशु मसीह पापोयों का उद्धारकर्ता था। वह हमारा उद्धारकर्ता बना क्योंकि वह पानी और लहू से आया था। 
 
 
यीशु ने अपने छुटकारे के बपतिस्मा से जगत के सारे पापों को उठा लिया 
 
यीशु ने संसार पर जय पाया है 
उसका क्या मतलब है?
उसका मतलब है की उसने जगत के 
सारे पापों को उठा लिए है।

जब से जगत के सारे पापों को उठाने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया और पापों के प्रायश्चित के लिए मर गया, तब से वो हमारे सारे पापों से हमें छुडाने के लिए सक्षम बना। क्योंकि जब यीशु ने सारी मनुष्यजाति के प्रतिनिधि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया तब जगत के सारे पापों को उस पर डाला गया। यीशु ने पाप के मूल्य के रूप में खुद का जीवन क्रूस पर दे दिया। उसने अपने मृत्यु और पुनरुत्थान से शैतान के सामर्थ्य पर जय पाई। यीशु ने अपने मृत्यु के द्वारा हमारे सारे पापों का मूल्य चूकाया।
 
 
यीशु अपने बपतिस्मा के पानी और क्रूस पर के लहू के द्वारा पापोयों के पास आया 
 
उसने शैतान के सामर्थ्य पर 
किस तरह जय पाया?
अपने बपतिस्मा, लहू और आत्मा के द्वारा

प्रेरित यूहन्ना ने कहा की छूटकारा केवल पानी से नहीं, लेकिन पानी और लहू दोनों से है। इसलिए, जैसे यीशु ने सारे पापों को उठा लिए थे और हमारे पापों को हंमेशा के लिए दूर किए थे, इसलिए प्रत्येक पापी उसमे विश्वास करने के द्वारा और उसके वचनों के प्रति विश्वासयोग्य रहने के द्वारा उद्धार पा सकेगा। 
जब यीशु इस जगत में आया, तब उसने केवल हमारे पापों को ही नहीं उठाया, लेकिन क्रूस पर मृत्यु तक अपना लहू बहाके उसका मूल्य भी चुकाया है। उसने यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिए और क्रूस पर उसका दाम भी चूकाया; उसने हमारे पापों की किंमत अपनी मौत से चुकाई। परमेश्वर की न्यायी व्यवस्था जो हकती है की ‘पाप की मजदूरी तो मृत्यु है’ (रोमियों ६:२३) यह परिपूर्ण हुआ था। 
संसार पर जय पाने के द्वारा यीशु का क्या मतलब था? जो विश्वास संसार पर जय पाता है वो छुटकारे के सुसमाचार का विश्वास है, जो यीशु ने हमें पानी और लहू के द्वारा दिया है। वह शरीर में आया और अपने पानी के बपतिस्मा और क्रूस पर की मौत से उद्धार की गवाही दी। 
यीशु ने संसार पर जय पाया है, अर्थात् शैतान पर। आरम्भ की कलीसिया के शिष्य उस समय के रोमन साम्राज्य और संसार के प्रलोभन में गिरे बिना सताव के समय में भी मज़बूती से खड़े थे। 
यह केवल उनके विश्वास का परिणाम था की यीशु पानी (हमारे सारे पापों को उठाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया), और क्रूस (उसने हमारे सारे पापों का मौली अपनी मृत्यु से चूकाया) पर अपने लहू के द्वारा आया। 
यीशु आत्मा (वह मनुष्य के देह में) में आया, और उसने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर के अपने लहू के द्वारा पापियों के पापों को उठा लिया जिससे हम सब जिनको छूटकारा पाना है वो संसार पर जय पा सके।
 
 
उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठाने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है – १ पतरस ३:२१
 
उद्धार का प्रतिक क्या है?
यीशु का बपतिस्मा

१ पतरस ३:२१ में कहा है, “उसी पानी का दृष्‍टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्‍वर के वश में हो जाने का अर्थ है।” प्रेरित पतरस ने गवाही दी की यीशु उद्धारकर्ता था और वह बपतिस्मा के पानी और लहू के द्वारा आया था। 
परिणाम के तौर पर हमें यीशु पे विश्वास करना चाहिए जो पानी और लहू के द्वारा आया था। और हमें जानना चाहिए की यीशु के बपतिस्मा का पानी हमारे उद्धार का प्रतिक है। प्रेरित पतरस हमें कहता है की बपतिस्मा का ‘पानी,’ ‘लहू,’ और ‘आत्मा’ छुटकारे के मुख्य कारण है। 
उसके किसी भी चेले ने यीशु के बपतिस्मा के बिना क्रूस पर उसके लहू में विश्वास नहीं किया था। केवल लहू पर विश्वास करना आधा विश्वास करने के समान है। अधूरा या अपूर्ण सत्य पर का विश्वास समय बिताने के बाद मुरझा जाता है। लेकिन जो लोग पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है उनका विश्वास समय बिताने के साथ मज़बूत होता जाता है। 
फिर भी, केवल लहू के सुसमाचार की आवाज इन दिनों में ज्यादा मज़बूत बनती जा रही है। ऐसा क्यों? लोग सत्य के वचन, पानी और आत्मा के छुटकारे को नहीं जानते, इसलिए वे नया जन्म नहीं पा सकते। 
एक समय पर, पश्चिम की कलीसिया अंधश्रद्धा का भोग बन गई थी। थोड़े समय के लिए ऐसा लगा की वह आबाद हो रही है, लेकिन शैतान के सेवको ने विश्वास को अंधविश्वास में बदल दिया। 
अंधश्रद्धा यानी की ऐसा विश्वास करना की एक कागज़ या लकड़ी पर क्रूस बनानेसे शैतान भाग जाएगा, और जो कोई यीशु के लहू में विश्वास का अंगीकार करेगा तो शैतान वहाँ से भाग जाएगा। ऐसे और दुसरे बहुत सारे अंधविश्वास के द्वारा शैतान ने धोखे से लोगो को ऐसा विश्वास करवाया की उनको केवल यीशु के लहू में ही विश्वास करने की जरुरत है। शैतान ने ऐसा कहने के द्वारा लहू से डराने का नाटक करता है की यीशु ने पापियों के लिए जो किया वो यह है की उसने क्रूस पर अपना लहू बहाया है। 
हालाँकि, पतरस और सारे शिष्यों ने यीशु के बपतिस्मा और क्रूस के लहू के सच्चे सुसमाचार की गवाही दी है। लेकिन, आजके दिनों में मसीही लोग किस की गवाही देते है? वे केवल यीशु के लहू की गवाही देते है। 
हमें बाइबल में लिखे वचनों पर विश्वास करना चाहिए और आत्मा, यीशु के बपतिस्मा, और उसके लहू के उद्धार पर विश्वास करना चाहिए। यदि हम यीशु के बपतिस्मा को नकार देंगे और केवल ऐसी गवाही देंगे की यीशु हमारे लिए क्रूस पर मरा, तो हमारा उद्धार परिपूर्ण नहीं हो सकता। 
 
 
परमेश्वर के पानी के उद्धार के लिए ‘गवाही के शब्द’
 
परमेश्वर ने हमें बचाया है 
उसका सबूत क्या है?
पानी, लहू और आत्मा

१ योहान्ना ५:८ कहता है, “गवाही देनेवाले तीन है।” पहला आत्मा, दूसरा यीशु के बपतिस्मा का पानी, और तीसरा उसका क्रूस पर का लहू। यह तीनो चीजें एक ही है। यीशु इस जगत में हम सबको पापों से बचाने के लिए आया। उसने अकेले ही बपतिस्मा, लहू, और आत्मा से यह कार्य किया है। 
‘क्योंकि गवाही देनेवाले तिन है’ यह तिन चीजे है जो साबित कराती है की परमेश्वर ने हमें बचाया हैऊ। यह तिन सबूत यीशु का पानी, उसका लहू, और आत्मा है। यह तिन चीजे है जो परमेश्वर ने जगत में हमारे लिए किया। 
यदि इन तिन मेसे किसी एक चीज को भी निकाल दिया जाए, तो उद्धार परिपूर्ण नहीं हो सकता। गवाही देनेवाले तीन है: आत्मा, पानी, और लहू। 
यीशु मसीह जो हमारे पास देह में आया वह परमेश्वर, आत्मा, और पुत्र है। वह मनुष्य देह में आत्मा के रूप में इस जगत में आया और जगत के सारे पापों को उठा ने के लिए पानी का बपतिस्मा लिया। और उसने सारे पापों अपने शरीर पर उठा कर हम पापियों को बचाने के लिए क्रूस पर मरते दम तक लहू बहाया। उसने सारे पापों की पूरी किंमत चुका दी है। यह पानी, लहू, और आत्मा के द्वारा सम्पूर्ण छुटकारे का सुसमाचार है। 
यदि उसमे से एक को भी निकाल दिया होता, तो ये हमें सरे पापों से बचाता परमेश्वर के उद्धार का नकार करना होता। यदि आज हम अधिकाँश विश्वासियों के साथ सहमत हो, तो हम कहेंगे की ‘गवाही देनेवाले दो है: लहू और आत्मा।’ 
लेकिन प्रेरित यूहन्ना कहता है की गवाही देनेवाले तीन है: यीशु के बपतिस्मा का पानी, क्रूस पर का लहू, और आत्मा। प्रेरित यूहन्ना अपनी गवाही में बहुत ही स्पष्ट था। 
जो विश्वास पापोयों को छूटकारा देता है वह आत्मा, पानी, और लहू परा का विश्वास है। कौन सा विश्वास मनुष्य को संसार पर जित पाने के लिए सक्षम बनाता है? और हम ऐसा विश्वास कहा से पा सकते है? वह यही बाइबल में ही है। वह यीशु पर विश्वास करना है जो पानी, लहू, और आत्मा से आया। उसमे विश्वास करके उद्धार और अनंत जीवन पाए। 
 
क्या यीशु के बपातिस्मा के बिना परमेश्वर का 
उद्धार सम्पूर्ण है?
नहीं

मेरे नए जन्म के बहुत समय पहले, मैं भी ऐसा मसीही था जो केवल क्रूस पर के लहू और आत्मा में विश्वास करता था। मैं विश्वास करता था की वह आत्मा के रूप में पृथ्वी पर आया और मेरे लिए क्रूस पर मरा और मुझे सारे पापों से बचाया। मैं केवल दो बातो पर विश्वास करता था और ऐसी धारणा के साथ सबा को प्रचार करता था। 
मैंने यीशु के जैसे खोई हुई आत्माओं के लिए कार्य करने और मरने के लिए मिशनरी बनने धर्मविज्ञान का अभ्यास करने की योजना बनाई थी। मैंने सारे प्रकार की भव्य चीजो की योजनाए बनाई थी। 
लेकिन, जब तक मैं केवल दो चीजो पर विश्वास करता था, तब तक मेरे दिल में पाप रहता था। परिणाम स्वरुप, मैं संसार पर जित न पा सका। जब मैं केवल लहू और आत्मा में विश्वास करता था, तब मेरे दिल में अभी भी पाप था। 
यीशु पर विश्वास करने के बावजूद भी मेरे दिल में पाप था क्योंकि मैं पानी यानी की यीशु के बपतिस्मा के बारे में जानता नहीं था। जब तक मैं बपतिस्मा का पानी, लहू और आत्मा से छूटकारा नहीं पाया तब तक मेरा छूटकारा परिपूर्ण नहीं हुआ था। 
मैं शरीर के पापो को जित नहीं पाया उसका कारण यह था की मैं यीशु के बपतिस्मा का मतलब नहीं समझ पाया था। आज कई लोग यीशु में विश्वास करने के बावजूद शरीर के पाप करते है। उनके दिल में अभी पाप है और वे यीशु के प्रति उनके पहले जैसा प्रेम पाने के सारे प्रयास करते है। 
वे अपना पहले जैसा उत्साह फिर से नहीं पा सकते क्योंकि उनके पापों को कभी पानी से पूरी रीति से साफ़ नहीं किए गए। उनको एहसास नहीं होता की जब येशु ने बपतिस्मा लिया तब उनके सारे पाप उसके ऊपर चले गए थे, और एक बार गिरने के बाद वे फिर से अपना विश्वास प्राप्त नहीं कर सकते। 
मैं आप सब को यह बात स्पष्ट करना चाहता हूँ। जब हम यीशु में विश्वास करते है तब हम विश्वास में जी सकते है और संसार पर जय पा सकते है। हम चाहे कितने भी अधूरे हो, इस जगत में चाहे कितने भी पाप करते हो, लेकिन जब हम ऐसा विश्वास करते है की यीशु हमारा उद्धारकर्ता है और उसके बपतिस्मा और लहू बहाने के द्वारा उसने हमें पापों से पुरु तरह मुक्त किया है तब ही हम विजयी बन सकते है। 
लेकिन यदि हम उसके बपतिस्मा के पानी के बगैर विश्वास करे तब तक हम सम्पूर्ण छूटकारा नहीं पा सकते। प्रेरित यूहन्ना ने हमसे कहा है की जो विश्वास संसार पर जय दिला सकता है वह यीशु मसीह के ऊपर का विश्वास है जो बपतिस्मा के पानी, लहू और आत्मा के द्वारा आया था। 
परमेश्वर ने अपना इकलौता बेटा हमारे पास भेजा जिससे की जो कोई भी उसके बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करे वो छूटकारा पाए। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिया। यीशु, परमेश्वर का पुत्र आत्मा में (मनुष्य देह में) हमारे पास आया। और पापों का दाम चुकाने के लिए क्रूस पर उसने लहू बहाया। इस तरह यीशु ने सारी मनुष्यजाति को छूटकारा दिया। 
जो विश्वास हमें संसार पर जय पाने का नेतृत्व करता है वह ऐसे सत्य पर विश्वास करने से मिलता है की यीशु पानी, लहू, और आत्मा से हमारे पास आया और हमें सारे पापों से मुक्त किया। 
यदि पानी का बपतिस्मा और क्रूस का लहू नहीं होते तो कोई भी सच्चा उद्धार नहीं होता। तिन में से किसी भी एक घटक के बिना हमारे पास सच्चा विश्वास नहीं हो सकता। सच्चा उद्धार पानी, लहू और आत्मा के बिना प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए, हमें पानी, लहू और आत्मा में विश्वास करना चाहिए। इस बात को जानो और आप भी सच्चा विश्वास प्राप्त करेंगे।
 
 
मैं तुमसे कहता हूँ की पानी, लहू, और आत्मा की गवाही के बगैर वह सच्चा उद्धार नहीं है
 
उद्धार की गवाही के तिन मुख्य घटक क्या है?
पानी, लहू, और आत्मा

कोई भी व्यक्ति ऊपर के प्रश्न को इस प्रकार सोच सकता है। “योशु मेरा उद्धारकर्ता है। मैं क्रूस के लहू पर विश्वास करता हूँ और शहीद की तरह मरना चाहता हूँ। मेरे दिल में पाप होने के बावजूद भी मैं यीशु पर विश्वास करता हूँ। मैंने पूरे दिल से पछतावा किया है और हरदिन अच्छी, न्यायी, और सेवाभाव से काम करने के लिए कड़ी महेनत की है। मैंने अपना जीवन और सारी सम्पति आप को दे दी है। मैंने शादी भी नहीं की। परमेश्वर मुझे कैसे नहीं पहिचाने गा? यीशु मेरे लिए क्रूस पर मरा था। हमारे पवित्र परमेश्वर मनुष्य बनके आए और हमारे लिए अक्रूस पर मरे। मैंने आप पर विश्वास किया है, आपके लिए बलिदान दिया है, और आपके लिए मेरा कार्य विश्वासयोग्यता से किया। फिर भी मैं अयोग्य हो सकता हूँ और अभी भी मेरे दिल में थोड़ा पाप है, लेकिन क्या यीशु इसके लिए नरक में भेजेगा? नहीं, वह नहीं भेजेगा।” 
इस व्यक्ति के जैसे कई ओर भी लोग है। वो वही है जो विश्वास नहीं करते की जगत के पापों को उठाने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया था। जब यह नामधारी मसीही जो यीशु पर विश्वास करते है और अभी भी उनमे पाप है, वे कहा जाएंगे? वे नरक में जाएंगे। वे केवल पापी है! 
वे जो अपने मन में सोचते है की परमेश्वर को भी यह सोचना चाहिए, वे नरक में जाएंगे। इसके अलावा, कुछ लोग कहते है की जब यीशु क्रूस पर मरा तब उसने सारो पापों को ले लिया था, इसलिए अब जगत में कोई पाप नहीं है। हालाँकि, यह केवल लहू और आत्मा के बारे में ही बात करता है। यह ऐसा विश्वास नहीं है जो लोगो को सम्पूर्ण विश्वास की ओर लेकर जाए। 
हमें ऐसा विश्वास करना चाहिए की यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापो को उठा लिया, उसका नया हुआ, और हमारे लिए क्रूस पर मरा, और उसकी मौत के बाद तीसरे दिन फिर से जीवित हुआ। 
ऐसे विश्वास के बगैर, सम्पूर्ण छूटकारा सम्भव नहीं है। यीशु मसीह ने बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, और पुनरुत्थित हुए। यीशु मसीह हमारे पास पानी, लहू, और आत्मा से आये। उसने जगत के सारे पापों को उठा लिया। 
पृथ्वी पर उसके उद्धार की गवाही देनेवाले तिन महत्वपूर्ण तत्व है: आत्मा, पानी और लहू। 
पहला, पवित्र आत्मा गवाही देता है की यीशु परमेश्वर है और वह मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया। 
दूसरा तत्व ‘पानी’ की गवाही है। पानी यरदन नदी में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु का बपतिस्मा है, जिस के द्वारा हमारे पापों को यीशु पर डाला गया। जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब हमारे सारे पाप उस पर डाले गए (मत्ती ३:१५)। 
तीसरी गवाही ‘लहू’ है जो हमारे बदले यीशु ने न्याय को स्वीकार लिया उसे दर्शाता है। यीशु हमारे लिए मरा और हमारे बदले में उसने अपने पिता का न्याय स्वीकार किया और हमें नया जीवन देने के लिए तीसरे दिन जीवित हुआ। 
हमारे छुटकारे के सबूत के तौर पर जो लोग परमेश्वर के पुत्र के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करते है उनके दिलों में परमेश्वर पवित्र आत्मा भेजता है। 
जो लोग नया जन्म पाए है उनके पास वचन है जिसके द्वारा वे संसार पर जय पा सकते है। छूटकारा पाया हुआ व्यक्ति शैतान पर, झूठें भविष्यवक्ता और रूकावटो या संसार के दबावों पर जय पाएंगे। हमारे पास यह सामर्थ्य होने का कारण यह है की हमारे दिल में तिन गवाही है: यीशु का पानी, उसका लहू, और आत्मा। 
 
हम संसार और शैतान पर जय 
कैसे पा सकते है?
तिन गवाहियो में विश्वास करने के द्वारा

हम शैतान और संसार पर जय पा सकते है क्योंकि हम आत्मा, पानी, और लहू पर विश्वास करते है। जो लोग बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करते है वह झूठें भविष्यवक्ताओं की भ्रम के ऊपर जय पा सकता है। जय पाने के लिए हमारी सामर्थ्य का विश्वास पानी, लहू और आत्मा पर निर्भर है। क्या आप यह विश्वास करते है? 
यदि आप यीशु के बपतिस्मा, और उसके लहू के द्वारा छूटकारा मिलाता है ऐसा विश्वास नहीं करते और यीशु ही परमेश्वर का पुत्र और उद्धारकर्ता है ऐसा नहीं मानते तो आप ना तो नया जन्म पा सकते है और ना तो संसार पर जय पा सकते है। क्या आपके दिल में ऐसा विश्वास है? 
क्या आपके दिल में आत्मा और पानी है? क्या आप विश्वास करते है की आपके सारे पापों को यीशु पर डाले गए है? क्या आपके दिल में क्रूस पर का लहू है? 
यदि आप के दिल यीशु का पानी और लहू पर विश्वास है, और यदि आप विश्वास करते है की यीशु आपके लिए क्रूस पे मरा और आपका न्याय उसने अपने ऊपर ले लिया तो आप संसार को जित पाएंगे। 
प्रेरित यूहन्ना ने संसार पर जय पाया क्योंकि उसके दिल में यह तिन जरुरी तत्व थे। उसने विश्वास में अपने भाइयों को जो कठिनाई का सामना कर रहे थे और उनके कार्यो में धमकियों का सामना कर रहे थे उनको भी छुटकारे के बारे में बात की थी। उसने गवाही दी, “इस तरह तुम भी संसार पर जय पा सकते हो। यीशु आत्मा, पानी, और लहू के द्वारा आया था। जैसे उसने संसार को जीता, उस तरह तुम भी जगत को जितने के लिए सक्षम हो। विश्वासु के लिए संसार को जितने का एकमात्र मार्ग केवल यही है।” 
१ यूहन्ना ५:८ में कहा है, “गवाही देनेवाले तीन है, आत्मा, और पानी, और लहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत है।” कई लोग अभी केवल लहू और आत्मा की ही बात करते है, लेकिन वे यीशु के बपतिस्मा को निकाल देते है। यदि वे ‘पानी’ को निकाल से तो आज भी वो शैतान से दोखा खाएंगे। उनको अपने भ्रम से बहार आके पछतावा करना चाहिए; नया जन्म पाने के लिए उन्हें यीशु के बपतिस्मा के पानी पर विश्वास करना होगा। 
यीशु के पानी और लहू पर विश्वास किए बिना कोई भी संसार पर जय नहीं पा सकता। मैं आपको फ़िरसे कहता हूँ, कोई भी नहीं! हमें पानी और लहू को हमारे सामर्थी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके युध्ध करना होगा। उसके वचन आत्मा की तरवार और ज्योति है। 
अभी भी ऐसे कई लोग है जो यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास नहीं करते जिससे उनके सारे पाप धुल गए है। इस लिए, जब यीशु उनको कहता है, ‘उठ, प्रकाशमान हो,’ तब वे थोड़े से भी प्रकाशमान नहीं हुए। अभी भी उनके दिलो में पाप है। भले ही वे यीशु में विश्वास करते हो फ़िरभी वे नरक में जाएंगे।
 
 
यीशु के बपतिस्मा और लहू का सुसमाचार निश्चित रूप से प्रमाणित होना चाहिए जिससे लोग सुन सके, विश्वास कर सके, और बच सके
 
क्या उसके बपतिस्मा पर विश्वास
एक अंधविश्वास है?
नहीं, वह अंधविश्वास नहीं है। 
वह सत्य है।

जब हम सुसमाचार की गवाही देते है, तब यह स्पष्ट होना चाहिए। यीशु आत्मा, बपतिस्मा (जिसने हमारे सारे पापो को ले लिया), और लहू (जिसने हमारे सारे पापों का मूल्य चूकाया) के द्वारा आया। हमें इन तीनो में विश्वास करना चाहिए। 
यदि विश्वास नहीं करते, तो हम कोई सुसमाचार का प्रचार नहीं करते लेकिन कोई आम धर्म का प्रचार करते है। कई मसीही लोग मसिहत को केवल एक धर्म गिनाते है, लेकिन मसिहत किसी धर्म के रूप में नहीं है। वह सत्य के ऊपर बाँधा हुआ छुटकारे का विश्वास है, परमेश्वर की ओर देखने का विश्वास। वह एक धर्म नहीं बन सकता। 
धर्मं का सर्जन मनुष्य करता है। जब की विश्वास परमेश्वर की ओर से मनुष्य के लिए उद्धार की योजना है। यह अन्तर है। यदि आप इस सत्य को ध्यान में नहीं लेंगे तो, अप मसिहत के साथ दुसरे धर्मो की तरह पेश आएँगे, और नैतिकता और नीतिशास्त्र के जैसे प्रचार करेंगे।
यीशु मसीह धर्म की स्थापना करने के लिए इस संसार में नहीं आए थे। उसने कभी भी ईसाई धर्म की स्थापना नहीं की थी। क्यों आप विश्वास करते हो की वह एक धर्म है? यदि वह सब एक समान ही होते, तो फिर बौध्ध धर्म में विश्वास क्यों नहीं करते? क्या आप ऐसा सोच रहे है की मैं जो कह रहा हूँ वह गलत है? 
कुछ लोग यीशु में धर्म की रीति से विश्वास करते है, और अन्त में कहते है, “क्या अन्तर है? स्वर्ग, निरवाना....यह सब एक समान ही है, केवल उनके नाम अलग अलग है। कुछ भी हो लेकिन अन्त में तो सबको एक ही जगह जाना है।” 
साथी मसीहियो, हमें सत्य में स्थिर खड़ा रहना चाहिए। और हमें ‘उठाना और प्रकाशमान’ होना है। हमें बिना सन्कोच के इस सत्य को बोलना चाहिए। 
जब कोई कहता है की, “वही केवल स्वर्ग में जाने का एकमात्र मार्ग नहीं हो सकता,” तब आपको स्पष्ट आवाज में कहना चाहिए, “हाँ! वही एकमात्र मार्ग है। जब आप यीशु मसीह में विश्वास करेंगे जो पानी, लहू, और आत्मा से आया केवल तभी आप स्वर्ग में जा सकते है।” आपको इतना प्रकाशमान होना चाहिए जिससे दूसरी आत्माएं भी छुटकारे का वचन सुन के, नया जन्म पाके, स्वर्ग में जा सके। 
 
 
सच्चा विश्वास रखे:
यीशु पर एकतरफा प्रेम रखने वाले लोग जो यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के छुटकारे के बारे में नहीं जानते वे नाश हो जाएंगे 
 
कौन यीशु पर विश्वास करने के बावजूद नाश होगा?
वे लोग जो यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास नहीं करते

केवल मनस्वी रीति से यीशु में विश्वास करने का दावा करना यीशु के लिए एकतरफा प्रेम और मसीही-धर्मवादी बनने का छोटा रास्ता है। 
पसिफ़िक महासागर में से गुजर रहा ज़हाज महासागर में डूब गया और कुछ लोग रबर की नाव पर बैठके बच गए। उन्होंने आपातकाल संदेश भेजा, लेकिन समुन्दर के तुफान की वजह से आसपास से गुजर ने वाले ज़हाज उनको बचाने के लिए नहीं आ सके। फिर ज़हाज के बदले में हेलिकोप्टर आया और एक रस्सी नीचें फेंकी। यदि उन में से कोई रस्सी को अपनी कमर पे बाँधने के बजाए केवल हाथों से पकड़ के रखे तो, वह उस व्यक्ति के जैसा बनेगा जो परमेश्वर को एकतरफा प्रेम करता है। वह अपनी इच्छा के मुताबिक़ परमेश्वर पर विश्वास करता है। वह अभी तक सुरक्षित नहीं है, लेकिन वो कहता है, “मैं विश्वास करता हूँ, मुझे बचा ले। मैं विश्वास करता हूँ इस लिए ऐसा मानता हूँ की मैं बच जाउंगा।” 
जो लोग यीशु के बपतिस्मा और लहू के सत्य को समझ नहीं सकते वे ऐसा मानते है की केवल रस्सी पकडे रहने से वह बच जाएंगे। 
लेकिन जैसे उसको ऊपर खींचा जाता है वैसे रस्सी पर से उसकी पकड़ छूटने लगाती है। वह केवल अपनी शक्ति से ही रस्सी को पकड़ के रखेगा। लेकिन अन्त तक रस्सी पकड़ के रखना उसके लिए मुश्किल बनाता जाएगा। जब शक्ति ख़तम हो जाएगी, तब वह अपनी पकड़ छोड़ देगाऔर महासागर में गिर जाएगा। 
यीशु पर एकतरफा प्रेम ऐसा होता है। कई लोग शायद कहेंगे की वे परमेश्वर और यीशु में विश्वास करते है; वो यीशु पर विश्वास करते है जो आत्मा से आया, लेकिन यह तो पूरे समीकरण का एक भाग है। वो न तो वास्तव में विश्वास कर सकते है न तो सम्पूर्ण सुसमाचार में जी सकते है। इसलिए वे बार बार अपने आप को ऐसा कहने के दबाव करेंगे की वे उसमे ‘विश्वास’ करते है। 
विश्वास करना और विश्वास करने की कोशिश करना दोनों अलग बाते है। वो कहते है की वे अन्त तक यीशु के पीछे चलेंगे लेकिन उनके दिल में बचे हुए पाप की वजह से उनको आख़री दिन में बहार फेंक दिया जाएगा। यीशु अपने बपतिस्मा, लहू, और आत्मा के द्वारा आया ऐसा जाने बिना वह यीशु से प्रेम करते है। यदि वह केवल यीशु को उसके लहू की वजह से ही प्रेम करते है, तो व् नरक में जाएंगे। 
सच्चा सुसमाचार, पानी और आत्मा के सुसमाचार की रस्सी से अपनी आत्मा को बाँध लो। जब यीशु उद्धार की रस्सी निचे फेंके, तब जो अपने आप को पानी, पाहू, और आत्मा से बाँध लेगा वे उद्धार पाएंगें 
हेलिकॉप्टर में से बचाने वाला लाउडस्पीकर पर ऊँची आवाज में बोला, “कृपया करके मुझे ध्यान से सुनो। जब में रस्सी निचे डालू, तब उसे अपनी कमर और कंधे के भाग से कसकर बांधना। उसके बाद तुम जहा हो वाही खड़े रहना। अपने हाथों से रस्सी को पकड़ के लटकना मत। केवल अपनी कमर से बांधना और आराम करना। उसके बाद आप बच जाएंगे। 
पहले व्यक्ति ने सूचना का पालन किया और खुद को रस्सी से बाँध दिया, और वह बच गया। लेकिन दुसरे व्यक्ति ने कहा, “चिंता मत करो। मैं बहुत ही शक्तिशाली हूँ। मैं आरोग्य केन्द में सेवा करता था। देखो! आप मेरे स्नायुओं को देख सकते हो? मैं कई माइल तक लटक सकता हूँ।” जब रस्सी को ऊपर खींचा गया तब उसने रस्सी को अपने हाथों से पकड़ा था। 
शुरू में दोनों व्यक्ति को ऊपर खींचा गया। जिस व्यक्ति ने सूचना को सुना था और खुद को रस्सी से बाँधा था उसे किसी भी प्रकार की परेशानी के बिना ऊपर खिंच लिया गया। वह बेशुध्ध हो गया था लेकिन उसे ऊपर खिंच लिया गया। 
जिस व्यक्ति को खुद के बल पर घमंड था उसने धीरे धीरे अपनी पकड़ को खोया और इसी कारण उसका बल समाप्त हो गया। न सुनने की वजह से और सूचनाओं को नकार ने की वजह से वह मर गया। 
सम्पूर्ण छूटकारा पाने के लिए, व्यक्ति को उसके बपतिस्मा के पानी और लहू के छुटकारे पर विश्वास करना होगा जिसने पाप से सारी आत्माओं को बचाव किया है। जो लोग पूरे मन से वचन पर विश्वास करते है उनके लिए उद्धार है: “मैं यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा मेरे बपतिस्मा और क्रूस पर मौत तक अपने लहू को बहाकर आपको बचाया है।” 
जो लोग केवल लहू में विश्वास करते है वे कहते है, “चिंता मत करो, मैं विश्वास करता हूँ। मैं अपनी आख़री साँस तब यीशु का धन्यवादित रहूँगा। मैं अन्त तक यीशु के पीछे चलूँगा और लहू पर मेरा विश्वास संसार पर जय पाने के लिए और जीवनभर पापों से छूटकारा पाने के लिए पर्याप्त है।” 
हालाँकि, यह पर्याप्त नहीं है। जिन लोगो को परमेश्वर अपने लोग मानता है वे तीनो गवाही पर विश्वास करेंगे: यानी की यीशु आत्मा के द्वारा आया, उसने बपतिस्मा लिया (यरदन नदी में बपतिस्मा के द्वारा यीशु ने सारे पापों को उठा लिया), सबके पापों का मूल्य चुकाने के लिए वह क्रूस पर मरा, और मृत्यु के बाद तीसरे दिन उसने पुनरुत्थान पाया। 
आत्मा केवल उन लोगों के पास आता है जो इन तीनो में विश्वास करते है। मैंने आपको पानी और लहू के द्वारा बचाया है। मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ।” 
लेकिन जो इन तीनो में विश्वास नहीं करते, उनको परमेश्वर उद्धार नहीं देता। इन तीनो में से एक को भी निकाल दिया जाए तो परमेश्वर कहता है, “नहीं, तुम्हारा उद्धार नहीं हुआ है।” उसके सारे शिष्य इन तीनो में विश्वास करते थे। यीशु कहता है की उसका बपतिस्मा उद्धार का प्रतिक है, और उसका लहू न्याय का प्रतिक है। 
 
 
प्रेरित पौलुस और पतरस ने भी यीशु के बपतिस्मा और लहू दोनों की गवाही दी 
 
यीशु के चेलों ने किसके बारे में 
गवाही दी?
यीशु के बपतिस्मा और उसके 
लहू के बारे में

क्या प्रेरित पौलुस ने यीशु के बपतिस्मा के बारे में बात की थी? आइए देखते है की उसने यीशु के बपतिस्मा के बारे में कितनी बार बात की थी। उसने रोमियों ६:३ में कहा है, “क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया।” और ६:५ में, “क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएँगे।” 
उसने गलातियों ३:२७ में भी कहा है, “और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।” यीशु के सारे प्रेरितों ने ‘पानी,’ यीशु के बपतिस्मा की गवाही दी है। “उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठाने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुध्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है” (१ पतरस ३:२१)। 
 
 
परमेश्वर के छुटकारे का उद्धार यीशु के पानी और लहू के द्वारा आया 
 
परमेश्वर किसको धर्मी कहता है?
उनको जिनके दिल में कोई भी
पाप नहीं है

यीशु ने लोगो को जो छूटकारा दिया वो उसके बपतिस्मा और लहू का छूटकारा था। उस छुटकारे के कारण हम उठकर प्रकाशमान होते है। कैसे? इन तीनो चीजो की गवाही देने के द्वारा। 
“उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है” (यशायाह ६०:१)। परमेश्वर ने हम पर प्रकाश पड़ा और हमें भी प्रकाशमान होने के लिए कहा। हमें इस आज्ञा को मानना चाहिए। 
हम अपनी पूरी ताकत से सुसमाचार का प्रचार करते आए है। हालाँकि, कई लोग अभी भी सुनते नहीं है। यीशु में विश्वास करो और आप छूटकारा पाएंगे। आप धर्मी ठहरेंगे। यदि अभी भी आप के दिल में पाप है, तो आप अभी भी धर्मी नहीं है। आपने अभी भी संसार पे जय नहीं पाई है। 
यदि आप यीशु के पानी (यीशु का बपतिस्मा) पे विश्वास नहीं करेंगे तो आप कभी भी अपने हृदय के पापों से छूटकारा नहीं पाएंगे। य्स्दी आप यीशु के लहू पर विश्वास नहीं करोगे तो आप कभी भी न्याय को टाल नहीं सकेंगे। यदि आप यीशु मसीह पर विश्वास नहीं करेंगे तो आप कभी भी उद्धार नहीं पा सकेंगे। जब तक अप इन तीनो चीजो पर विश्वास नहीं करेंगे तब तक आप पूर्णरीति से धर्मी नहीं बन सकते। 
अधूरी धार्मिकता केवल ‘कहलाई जानेवाली धार्मिकता’ की ओर लेकर जाति है। यदि कोई कहता है की खुद में पाप है फिर भी वह अपने आप को धर्मी मानता है, तो अभी तक वो यीशु में नहीं है। इन दिनों में कुछ लोग ‘कहलाए जानेवाली धार्मिकता’ पर छुटकारे को टांगते है। उन्होंने इस विषय पे बहुत सारे व्यर्थ लेखो को लिखा है। 
जब मनुष्य के मन में अभी भी पाप हो तो क्या पर्म्नेश्वर उसे पापरहित कहेगा? परमेश्वर ऐसा नहीं करता। परमेश्वर वाही कहता है जो वो देखता है। वह सर्वसामर्थी है लेकिन वह कभी भी झूठ नहीं बोलता। लोग धार्मिकता के सही अर्थ को नहीं समझते। हम किसी भी चीज को ‘साफ’ तभी कहेंगे जब वो वास्तव में साफ़ हो। जब पाप हो तब हम उसे ‘धर्मी’ नहीं कहते। 
आप शायद ऐसा सोच रहे होंगे की आप के मन में पाप होने के बावजूद भी यीशु आपको धार्मी कहता है। ये गलत है। 
यीशु हमें तभी धर्मी कहता है जब हम यीशु में विश्वास करते है की वह आत्मा से, पानी से (जब उसने बपतिस्मा लिया तब हमारे सारे पापों को उठा लिया) और लहू से (वह देह में आया और हमारे लिए मरा) आया। 
साथी मसीही, ‘कहलाई जानेवाली धार्मिकता’ को पानी और लहू के सुसमाचार से कोई लेनादेना नहीं है। ‘कहलाई जानेवाली धार्मिकता’ या ‘धर्मी कहलाया जाना’ मनुष्यों ने बनाई हुई अंधश्रद्धा है। जब आप के दिल में पाप हो तब क्या परमेश्वर आप को धर्मी कहेगा? जब किसी व्यक्ति के दिल में पाप हो तब परमेश्वर उसे धर्मी नहीं कहता है, फिर भले ही बड़े उत्साह से वो यीशु पे विश्वास क्यों न करता हो। यीशु कभी भी झूठ नहीं बोलता। 
तब भी, क्या आप अभी भी ऐसा सोच रहे है की जब किसी मनुष्य के दिल में पाप हो तो यीशु उसे धर्मी कहता है? ऐसा केवल मनुष्य ही सोच सकता है, परमेश्वर नहीं। परमेश्वर झूठ बोलने को धिक्कारता है। जब आप केवल ‘आत्मा’ और ‘लहू’ पर विश्वास करते हो तो क्या परमेश्वर आपको धर्मी कहेगा? कभी नहीं। 
परमेश्वर केवल एक ही प्रकार के लोगो को धर्मी कहता है। वो वे है जिनके दिल में पाप नहीं है। वह केवल वैसे लोगो को ही पहचानता है जो तीनो चीजो में विश्वास करते हो: यीशु, जो परमेश्वर है, वह देह में पृथ्वी पर आया, उसने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया, और उसने हमारे सारे पापों को मिटाने के लिए क्रूस पर लहू बहाया। 
जो छुटकारे के सुसमाचार पे विश्वास करते है केवल ऐसे लोगो को ही परमेश्वर धर्मी के रूप में पहचानते है, वे योग्य रीति से विश्वास करने वाले है। वे यीशु ने हमारे लिए की हुई सारी चीजो पे सम्पूर्ण विश्वास करते है। वे विश्वास करते है की यीशु आया और उनके सारे पापों को उठाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया, और क्रूस पर मरने के द्वारा उसने खुद हमारे न्याय को ले लिया, और वह मृत्यु से पुमरुत्थित हुआ। 
यह सारी बातें परमेश्वर के प्रेम कारण हुई। यीशु स्वर्ग में से पृथ्वी पर आया और कहा, “हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा” (मत्ती ११:२८)। हमारे पापों को उठा लेने के द्वारा उसने यह किया। 
जो लोग केवल यीशु के लहू में विश्वास करते है परमेश्वर उनको नहीं जानता। जो लोग केवल यीशु के लहू में विश्वास करते है उनके दिलो में अभी पाप है। यीशु किस को छूटकारा पाए हुए व्यक्ति के रूप में जानता है? 
यीशु के बपतिस्मा, उसके लहू, और वह परमेश्वर है इस सत्य पर विश्वास। आपके उद्धार क लिए सब जरुरी है। “जब मैं इस संसार में आया और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया तब मैंने तुम्हारे सारे पापों को उठा लिया था। मैं गवाही देता हूँ की जगत के सारे पाप मेरे ऊपर डाले गए है। क्रूस पर मैंने पापों का दाम चुका दिया है। इस रीति से मैंने तुम्हें बचाया है।”
जो इन तीनो में विश्वास करते है उनको यीशु कहता है, “हाँ, अपने उद्धार पाया है। आप धर्मी और परमेश्वर की संतान हो।” आप भी यीशु के बपतिस्मा, उसके लहू, और उसकी आत्मा इन तीनो में विश्वास करके उद्धार पा सकत हो। जो लोग केवल लहू और आत्मा में विश्वास करते है उनके दिलो में अभी पाप है। 
परमेश्वर के राज्य में केवल एक ही सत्य है। वहाँ न्याय, ईमानदारी, और दया है। वहाँ झूठ का नामोनिशान नहीं है। स्वर्ग में झूठ और धोखाधड़ी का अस्तित्व ही नहीं है। 
 
‘जो व्यवस्था को तोड़ता है’ 
वो कौन है?
वो वही है जो यीशु के बपतिस्मा पे 
विश्वास नहीं करता

“उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए?” (मत्ती ७:२२)। 
परमेश्वर कभी भी मनुष्य को ऐसे कार्यो के लिए अपने राज्य में प्रवेश करने के लिए योग्य नहीं जानता। “तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, मैंने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालों, मेरे पास से चले जाओ” (मत्ती ७:२३)। 
“मैंने आपको दो घर अर्पण किए है। मैंने आपके लिए अपनी जान तक दे दी है। क्या आपने मुझे देखा नहीं है? मैंने अपने जीवन के आख़री साँस तक आपका इन्कार नहीं किया। क्या अपने मुझे देखा नहीं? 
“क्या तुम्हारे दिल मैं पाप है?” 
“हाँ, प्रभु, थोड़ा पाप है।” 
“तो फिर, मुझ से दूर रहो! यहाँ किसी भी पापी को आने की अनुमति नहीं है।” 
“लेकिन प्रभु आपके ऊपर मेरा जो विश्वास है उसके कारण मेरी शहीद की तरह मौत हुई!” 
“तेरा क्या मतलब है? शहीद की तरह मरा? तू केवल अपने जिद्दीपन में मरा है। क्या तूने मेरे बपतिस्मा और लहू को पहचाना? क्या मैंने तुम्हारें दिल में गवाही दी की टू मेरे लोग हो? तुमने मेरे बपतिस्मा पे विश्वास नहीं किया और मैंने कभी गवाही नहीं दी की तुम मेरे लोग हो, फिर भी तुम अपने विश्वास में कायम रहे और उसके लिए मर गए। मैंने कब तुम्हारी गवाही दी? तूने खुद यह अपने ऊपर लिया है। तुमने अकेले अपने छुटकारे के लिए कोशिश की। क्या तुम समझते हो? अब, तुम अपने रास्ते जाओ।” 
यीशु ने हमें उठने और प्रकाशमान हिने के लिए कहा है। छूटकारा पाए हुए लोगो को नाम मात्र के मसीही लोगो का और झूठें भविष्यवक्ताओं का सामना करना पद सकता है, और प्रकाशमान होनें में विफल होते है! लेकिन एक छोटी सी चिंगारी बड़ी आग को सुलगा सकती है। यदि व्यक्ति हिंमत के साथ खड़ा होकर सत्य की गवाही दे, तब पूरा संसार प्रकाशमान होता है। 
यशायाह ६०:१-२ में कहा है, “उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। देख, पृथ्वी पर तो अन्धियारा और राज्य राज्य के लोगों पर घोर अन्धकार छाया हुआ है; परन्तु तेरे ऊपर यहोवा उदय होगा, और उसका तेज तुझ पर प्रगट होगा।” 
परमेश्वर हम उठने और प्रकाशमान होने का आदेश देते है क्योंकि असत्य का अन्धकार, जो झूठा सुसमाचार है उसने पूरी पृथ्वी को ढँक दिया है। जो यीशु में विश्वास करते है केवल वाही उसे प्रेम कर सकते है। जिन्होंने छूटकारा नहीं पाया वे कभी भी यीशु को प्रेम नहीं कर सकते। वे केवल प्रेम की बातें करते है लेकिन जब तक वे सम्पूर्ण सत्य पर विश्वास नहीं करेंगे तब तक वह सच्चा प्रेम नहीं कर सकते।
 
 
ऐसी तिन बाते है जो पापियों के उद्धार की गवाही देती है 
 
हमारे दिल में उद्धार की गवाही क्या है?
यीशु का बपतिस्मा

“गवाही देनेवाले तीन हैं, आत्मा, और पानी, और लहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।” यीशु पृथ्वी पर आया और उसने पानी और लहू से अपना कार्य किया। उसने यह किया और हमें बचाया। 
जब हम मनुष्यों की गवाही मान लेते हैं, तो परमेश्‍वर की गवाही तो उससे बढ़कर है; और परमेश्‍वर की गवाही यह है कि उसने अपने पुत्र के विषय में गवाही दी है। जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है वह अपने ही में गवाही रखता है। जिसने परमेश्‍वर पर विश्‍वास नहीं किया उसने उसे झूठा ठहराया, क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्‍वास नहीं किया जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है। और वह गवाही यह है कि परमेश्‍वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्‍वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है” (१ युहन्ना ५:९-१२)। 
नया जन्म पाए हुए लोग मनुष्य की गवाही प्राप्त करते है। हम धर्मी के रूप में पहिचाने जाते है। जब नया जन्म पाए हुए लोग जुन्होने छूटकारा पाया है वे छुटकारे के सत्य के बारे में बोलते है, तब लोग उसमे विवाद नहीं करते। वे उसको स्वीकारते है। वे कहते है की हम सच्ची रीति से विश्वास करते है, हम हमारे विश्वास में सच्चे है। यदि हम उनको कहेंगे की हमने नया जन्म कैसे पाया, तो हम जिस सत्य के सुसमाचार की गवाही देते है उसके विरोध में कोई भी खड़ा नहीं रह सकता। वे कहते है की हम सच्चे है। हम मनुष्य की गवाही प्राप्त करते है। 
लेकिन यह भाग ऐसा कहता है की, “परमेश्वर की गवाही तो उससे बढ़कर है; क्योंकि यह गवाही परमेश्वर ने दी है।” वह कहते है की परमेश्वर की गवाही उसका पुत्र है।सही? उसके पुत्र की गवाही क्या है? परमेश्वर ने हमें बचाया उसकी गवाही यह है की यीशु आत्मा से आया, वह छुटकारे के पानी से आया, और वह क्रूस के लहू से आया। और परमेश्वर गवाही देता है की इस रीति से उसने हमें बचाया, और हम उसके लोग है क्योंकि हम उसमे विश्वास करते है। 
“जो परमेश्‍वर के पुत्र पर विश्‍वास करता है वह अपने ही में गवाही रखता है। जिसने परमेश्‍वर पर विश्‍वास नहीं किया उसने उसे झूठा ठहराया, क्योंकि उसने उस गवाही पर विश्‍वास नहीं किया जो परमेश्‍वर ने अपने पुत्र के विषय में दी है।”
यह भाग हमें कहता है की छूटकारा पाया हुआ कौन है। यह कहता है की जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है वह अपने में ही गवाही रखता है। क्या आपके दिल में गवाही है? वह अपमे है और वह मुझमे है। परमेश्वर हमारे लिए पृथ्वी पर आए। (वह पवित्र आत्मा के द्वारा मरियम की कोख़ से देह में आया।) जब वह ३० साल का था, तब हमारे सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए बपतिस्मा लिया। और हमारे सारे पापों के साथ, क्रूस पर उसका न्याय हुआ। वह हमें अनन्त जीवन देने के लिए तीसरे दिन पुनरुत्थित हुआ। ऐसे यीशु ने हमें बचा। 
यदि वह पुनरुत्थित नहीं होता तो क्या होता? वह कैसे में मेरी गवाही दे पाया होता? इसी लिए वह मेरा उद्धारकर्ता है। यह हमारा विश्वास है। 
और जैसे उसने कहा था, उसने हमें अपने बपतिस्मा और लहू से बचाया। और हम विश्वास करते इसलिए, आप और मैं बच गए है। गवाही मुझ में है और आप में भी है। छूटकारा पाया हुआ व्यक्ति उसके बपतिस्मा के ‘पानी’ को नकार नहीं सकता। हमें बचाने के लिए उसने जो कार्य किए उसे हम निकाल नहीं सकते। 
“क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है” (मत्ती ३:१५)। हम कभी भी नकार नहीं सकते की यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा यीशु ने हमारे सारे पापों को उठा लिया है। छूटकारा पाया हुआ व्यक्ति कभी भी ‘पानी,’ यीशु के बपतिस्मा को नकार नहीं सकता। 
 
 
जो लोग विश्वास करते है लेकिन उनका छूटकारा नहीं हुआ, वे अन्त तक यीशु के बपतिस्मा को नकारेंगे।
 
कौन परमेश्वर को झूठा ठहराता है?
वह जो यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास नहीं करता

प्रेरित यूहन्ना ने कितनी सटीकता से बात कही है, “जिसने परमेश्वर पर विश्वास नहीं किया उसने उसे झूठा ठहराया।” यदि प्रेरित यूहन्ना अभी और यहाँ ज़िंदा होता, तो वह आजके मसीही लोगो को क्या कहता? उसने हमसे पूछा होता की जब ‘यीशु का बपतिस्मा हुआ तब’ उसने सारे पापों को उठा लिया था की नहीं? 
क्या यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला इस सुसमाचार की गवाही नहीं देता की, यीशु ने खुद के बपतिस्मा के द्वारा हम सब का छूटकारा किया है? “जब उसने मेरे द्वारा बपतिस्मा लिया तब क्या आपके पापों को उसके ऊपर नहीं डाला गया था और क्या उसने आपके पापों को अपनी पीठ पर नहीं उठाया था?” इस तरह, वह स्पष्ट रूप से गवाही देता है की हम सब को बचाने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया था (यूहन्ना १:२९, १ यूहन्ना ५:४-८)। 
जो लोग इश्वर पे विश्वास नहीं करते, दुसरे शब्दों में, उसने हमें बचाने के लिए जो किया उन सब में जो विश्वास नहीं करता, वे उसको झूठा ठहराते है। जब हम कहते है की यीशु ने जब बपतिस्मा लिया तब उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया, तब वे कहते है की, “अरे, मेरे प्रिय! वह हमारे सारे पाप नहीं ले सका! उसने केवल मूल पाप लिया है, इसलिए हमारे हरदिन के पाप अभी बाकि है।” 
इस लिए, वे आग्रह करते है की उनको छुटकारे के लिए हरदिन पापों के पश्चाताप की प्रार्थना करनी चाहिए। वे ऐसा विश्वास करते है। क्या आप भी ऐसा ही विश्वास करते है? जो व्यक्ति विश्वास नहीं करता की हमारे पाप यीशु के बपतिस्मा के साथ धुल गए वे परमेश्वर को झूठा ठहराते है।
 
 
जब यीशु का बपतिस्मा हुआ और उसने क्रूस पर लहू बहाया तब उसने हमें एक ही बार में हंमेशा के लिए छूटकारा दिया
 
कौन झूठ बोलता है?
वह व्यक्ति जो यीशु के बपतिस्मा पे 
विश्वास नहीं करता

यीशु ने बपतिस्मा लिया और सारे पाप एक ही बार में हंमेशा के लिए उठा लिए। जो लोग यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करते है परमेश्वर उनको बचाता है, लेकिन जो लोग विश्वास नहीं करते उनको परमेश्वर छोड़ देता है। वे नरक में जाते है। इसलिए हम बचे हुए है की नहीं यह हम किस में विश्वास करते है उस पर निर्भर है। यीशु ने जगत को सारे पापों से बचाया। जो विश्वास करते है वे बचे हुए है और जो विश्वास बही करते वे अभी नहीं बचाए गए है क्योंकि उन्होंने परमेश्वर को झूठा ठहराया है। 
लोग उनकी कमज़ोरी की वजह से नरक में नहीं जाते, लेकिन उनकी विश्वास की कमी की वजह से जाते है। “जिसने परमेश्वर पर विश्वास नहीं किया उसने उसे झूठा ठहराया” (१ यूहन्ना ५:१०)। जो लोग विश्वास नहीं करते की उनके पाप यीशु पर डाल दिए गए है उनके दिल में अभी पाप है। उनके अन्दर पाप नहीं है ऐसा वे नहीं बोल सकते। 
एक बार मैं धर्मगुरु को मिला और उनसे पूछा, “धर्मगुरु, जब आपने यीशु पर विश्वास किया तब आपके सारे पाप कहा गए?” 
“निश्चित रूप से वे थे।” 
“तो फिर, यीशु ने जगत के सरे पापों को उठा लेने के बाद कहा ‘पूरा हुआ,’ आप बच गए है। क्या यह सही नहीं? 
“हाँ, मैं बच गया हूँ।” 
“तो फिर आप पाराहित होने चाहिए।” 
“हाँ, मैं हूँ।” 
“यदि आप फिर से पाप करेंगे तो क्या होगा?” 
“हम केवल मनुष्य है। हम फिरसे पाप कैसे नहीं कर सकते? इसलिए हमें पश्चाताप करना चाहिए और हेडिं के पापों को साफ़ करना चाहिए।” 
इस धर्मगुरु के दिल में अभी भी पाप है क्योंकि वह छुटकारे के सम्पूर्ण सत्य को नहीं जानता। 
उसके जैसे लोग परमेश्वर का मज़ाक उड़ाते है और उसे झूठा ठहराते है। क्या यीशु, जो परमेश्वर है वो जगत के सारे पापों का छूटकारा करने में विफल रहा? वह बहुत निराश करने वाला है। यदि यीशु ने सारे पापों का छूटकारा नहीं किया होता, तो वह उद्धार का परमेश्वर कैसे बना होता? वह हमें उसपे विश्वास करने के लिए कैसे कह पाता? क्या आप उसे झूठा ठहराना चाहते हो? मेरी राय है की आप को ऐसा नहीं करना चाहिए! 
बाइबल हमें कहती है की उसका मज़ाक मत उडाओ। उसका मतलब है उसे झूठा मत ठहराओ और उसे धोखा देने की कोशिश मत करो। वह हमारे जैसा नहीं है। 
प्रेरित यूहन्ना हमें छुटकारे के सुसमाचार के बारे में स्पष्ट रूप से कहता है। कई लोग परमेश्वर ने हमारे लिए की हुई बातो पर विश्वास नहीं करना चाहते – वास्तविकता यह है की यीशु पानी, लहू, और आत्मा से आया। 
यहाँ मसीही लोगो के दो समुदाय है: वे जो बाइबल के कहे अनुसार विश्वास नहीं करते और अंगीकार नहीं करते, “मैं पापी हूँ,” और वे जो परमेश्वर ने उनके लिए की हुई प्रत्येक बातो पर विश्वास करते है और विश्वास से अंगीकार करते है, “मैं धर्मी हूँ।” आपको क्या लगता है कौनसा समुदाय सच बोल रहा है? 
वे जो परमेश्वर ने की हुई बातो पर विश्वास नहीं करते, दुसरे शब्दों में, जो पानी, लहू और आत्मा की गवाही का स्वीकार नहीं करते वे झूठ बोलते है। उनके पास झूठा विश्वास है। जो विश्वास नहीं करते वे परमेश्वर को झूठा ठहराते है। 
उसे झूठा मत ठहराओ। यीशु यरदन नदी के पास आया और ऐसे (बपतिस्मा लेने के द्वारा) सारी धार्मिकता (जगत के पापों को उठा लिए) को पूरा किया। 
 
 
अविश्वासी लोग यीशु के बपतिस्मा और उसकी पवित्रता को नकारते है 
 
शैतान और दुष्ट आत्मा 
क्या नकारते है?
यीशु के बपतिस्मा को

जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है वह अपने ही में गवाही रखता है। नया जन्म पाए हुए विश्वास करते है की जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब उनके पापों को उस पर डाला गया, और पानी और लहू के द्वारा उनका छूटकारा हुआ। वे विश्वास केरते है की यीशु ने कुमारी मरियम की कोख़ से इस पृथ्वी पर जन्म लिया, क्रूस पर मौत से पहले उसने यरदन में बपतिस्मा लिया और वह पुनरुत्थित हुआ। 
धर्मिओं के दिल में गवाही होती है। हमारे उद्धार का सबूत यीशु पर हमारे विश्वास में है, जो पानी, लहू, और आत्मा के द्वारा आया। गवाही आप में है। मेरी आपको राय है की अपने दिल में गवाही को रखे। मैं आप को कहता हूँ। यदि गवाही नहीं है तो उद्धार नहीं है, उद्धार का सबूत आपके अन्दर है। 
प्रेरित यूहन्ना कहता है, “जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है वह अपने ही में गवाही रखता है” (१ युहन्ना ५:१०)। क्या केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करनी क लिए गवाही का होना जरुरी है? या, लहू में नहीं पानी में विश्वास करने के लिए? परमेश्वर के द्वारा पहिचाने जाने के लिए आपको इन तीनो पर विश्वास करना चाहिए। 
केवल तभी यीशु आपकी गवाही देगा की ‘आप बचाए गए है।’ क्या आप ऐसा कहते है की तिन में से केवल दो पर विश्वास करने के लिए गवाही की जरुरत है? वह आपकी अपनी रीति से परमेश्वर पे विश्वास रखने जैसा होगा। वह ‘अपने आपकी गवाही’ देने जैसा होगा। 
ऐसे है सरे लोग है। इस दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग है जो तिन में से केवल दो पर ही विश्वास करते है। वे गवाही देते है की वह उद्धार पा चुके है और उस विषय में किताब भी लिख रहे है। वे कितने वाक्पटु है! यह कितना निराशाजनक है। वे अपने आप को ‘सुसमाचार के प्रचारक’ कहलवाते है। वह ऐसा मानते है की वे केवल ‘सुसमाचार के प्रचारक’ ही नहीं ‘धर्मी’ भी है। वे ‘पानी’ में विश्वास नहीं करते फिर भी वे उद्धार के विषय में बड़ी बड़ी बाते करते है! वे कितने तार्किक लगते है! लेकिन उनके मन में परमेश्वर की गवाही नहीं है। वे केवल ढोंगी है। 
आप उसे उद्धार कैसे कह सकते हो? केवल वो ही जो यीशु पर विश्वास करता है, जो आत्मा, पानी, और लहू से आया, उनके पास ही परमेश्वर और मनुष्य की गवाही है। 
प्रेरित पौलुस कहता है, “क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल शब्द मात्र ही में वरन् सामर्थ्य और पवित्र आत्मा में, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुँचा है; जैसा तुम जानते हो कि हम तुम्हारे लिये तुम्हारे बीच में कैसे बन गए थे” (१ थिस्सलुनीकियो १:५)। जब लोग केवल यीशु के लहू पर ही विश्वास करते है तब शैतान खुश होता है। “अरे, मूर्ख, तुम मेरे द्वारा छले गए हो, हा-हा!” कई ऐसे लोग है जो मानते है की यीशु के लहू की स्तुति करने से शैतान भाग जाएगा। वे सोचते है की शायद शैतान क्रूस से डरता है। लेकिन आपको ध्यान में रखने की जरुरत है की शैतान केवल नाटक कर रहा है। हमें उससे मूर्ख नहीं बनना चाहिए। 
जब शैतान किसी मनुष्य में प्रवेश करता है तब वह मनुष्य पागल जैसा लगता है और उसके मुँह से झाग निकलने लगता है। ऐसा करना शैतान के लिए कठिन नहीं है। शैतान मनुष्य से कुछ भी करवाने का सामर्थ रखता है। इसके लिए शैतान को केवल थोड़ी बुध्धि का प्रयोग करना पड़ता है। परमेश्वर ने शैतान को सारा सामर्थ दिया है सिवाय के मनुष्य को मार डालने का। वह मनुष्य को पत्ते की तरह हिला सकता है, चिल्ला सकता है और मुँह से झाग भी निकलवा सकता है। 
जब ऐसा होता है, तब विश्वासी चिल्लाते है, “यीशु क नाम से चला जा! चला जा!” और जब वह इन्सान होश में आता है और सामान्य रीति से व्यवहार करता है, तब वे उनसे कहते है की यह तो यीशु के लहू के सामर्थ्य से हुआ है। लेकिन यह उसके लहू का सामर्थ नहीं है, वह केवल शैतान है जो “ढोंग’ करता है। 
शैतान और दुष्य आत्मा सबसे ज्यादा उनसें डरते है जो यीशु में विश्वास करते है जिसने बपतिस्मा से हमें शुध्ध किया है, और अपने लहू के द्वारा हमारा न्याय ले लिया है और तीसरी दिन पुनरुत्थित हुआ। शैतान यीशु के बपतिस्मा और लहू के उद्धार के आसपास खड़ा भी नहीं रह सकता। 
जैसे आप जानते है, केथोलिक धर्मगुरु कई बार भूत निकालने का काम करते है। हमने फ़िल्मों में ये देखा है। ‘ओमेन’ नामकी फिल्म में, एक धर्मगुरु ने लकड़ी का क्रूस पकड़ा है और उसे हिलाता है लेकिन धर्मगुरु की मौत हो जाति है। जो नया जन्म पाए हुए लोग है उनको ऐसे रीति से हराया नहीं जा सकता। 
नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति बड़े साहस से यीशु के लहू और यीशु के पानी के बारे में बात करते है। जब शैतान उसे परेशान करने की कोशिश करता है, तब वे शैतान से पूछते है, “क्या तू जानता है की यीशु ने मेरे सारे पापों को ले लिया है?” तब शौतान वहाँ से भाग जाएगा। शैतान ‘नया जन्म पाए हुए’ लोगो के आसपास रहने को धिक्कारता है। यदि ‘नया जन्म पाया हुआ’ व्यकी केवल वहाँ बैठे, तो शैतान भागने की कोशिश करेगा। ऐसा कहा गया है की जो व्यक्ति परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता वह परमेश्वर को झूठा ठहराता है। वे उसके पुत्र के पानी और लहू की गवाही पर विश्वास नहीं करते। 
 
परमेश्वर के पुत्र की गवाही क्या है?
उसका बपतिस्मा, उसका लहू, और आत्मा

परमेश्वर के पुत्र की गवाही क्या है? गवाही ये है की वह आत्मा के द्वारा आया और पानी के द्वारा हमारे पापों को उठा लिया। उसने जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिए और उसने हम सब के लिए क्रूस पर लहू बहाया। क्या वह पानी, लहू, और आत्मा का छूटकारा नहीं है? 
लोग परमेश्वर के सामने झूठ बोलते है क्योंकि वे पानी और लहू के सच्चे सुसमाचार पे विश्वास नहीं करते। यह सच्चे सुसमाचार के अलावा सारे सुसमाचार गलत है। उनका विश्वास झूठा है, और वे इस गलत सुसमाचार का व्यर्थ प्रचार करते है। 
आइए हम १ यूहन्न्ना ५ की ओर वापस मुड़े। ११ वाँ वचन कहता है, “और वह गवाही यह है कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है।” वह कहता है की परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है; और वो जीवन उस व्यक्ति में है जो उसका स्वीकार करता है। यह जीवन उसके पुत्र में है। 
जो लोग अनन्त जीवन पाते है वे यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा छूटकारा पाए हुए लोग है। छूटकारा पाए हुए अनन्त जीवन पा सकते है और हंमेशा के लिए जिन्दा रहते है। क्या आपने अनन्त जीवन पाया है? 
१२ वें वचन में, “जिसके पास पुत्र है, उसकें पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।” दुसरे शब्दों में, जो लोग पुत्र ने पृथ्वी पर किए हुए काम पे विश्वास करते है – उसका बपतिस्मा लेना, और क्रूस पर मरना, और उसका पुनरुत्थान – उनके पास अनन्त जीवन है। लेकिन जो इन में से एक को भी निकाल देते है उनके पास जीवन नहीं है, और वे छूटकारा भी नहीं पाएंगे। 
प्रेरित यूहन्ना ने लोगो को यीशु ने पृथ्वी पर किए कार्यो पर उनके विश्वास के आधार पर अलग अलग दर्शाया है: पानी, लहू, और आत्मा। यह बाते हमें बताती है की उनके अन्दर वचन है की नहीं। वह छूटकारा पाए हुए व्यक्ति को यीशु के पानी, उसके लहू, और आत्मा पे उसके विश्वास से पहिचान लेता है। 
 
 
जो लोग नया जन्म नहीं पाए है वे भेड़ और बकरी के बीचमें अन्तर नहीं कर सकते 
 
छूटकारा पाए हुआ और 
छूटकारा न पाए हुए के बीचमें
कौन अंतर कर सकता है?
वह जो नया जन्म पाया हुआ है

प्रेरित यूहन्ना स्पष्ट रूप से पहिचान लेता है की जो लोग छूटकारा पाए हुए है वे न्यायी है। प्रेरित पौलुस ने भी ऐसा ही किया। परमेश्वर क सेवक भेड़ और बकरी के बिच अन्तर कैसे कर सकते है? वे परमेश्वर के सच्चे सेवक और झूठे सेवक के बिच में अन्तर कैसे कर सकते है? जो यीशु के पानी और लहू के द्वारा छूटकारा पाए है वे इस अन्तर को देख सकते है। 
यदि कोई व्यक्ति पादरी, सुसमाचार प्रचारक या प्राचीन हो लेकिन छूटकारा पाए हुए को पहिचान ना पाए, या भेड़ और बकरी के बिच अन्तर ना कर पाए तो अभी भी वह नया जन्म पाया हुआ नहीं है, और उसमे अभी नया जीवन नहीं है। लेकिन जो सचमुच नया जन्म पाए हुए है वे अन्तर कर सकते है। जिसके अन्दर जीवन नहीं है वे ना तो अन्तर पहिचान सकते है ना तो उसे स्वीकार कर सकते है। 
यह ऐसा है की हम अंधेरे में रंगों को नहीं पहचान सकते। हरा रंग हरा ही है और सफ़ेद रंग सफ़ेद ही है। लेकिन, यदि आप अपनी आँखों को बंद करेंगे, तो आप रंगों को देख भी नहीं पाएंगे और पहचान भी नहीं पाएंगे। 
लेकिन जो आँखे खुल्ली रखके देखते है वे रंग में छोटी से छोटी भिन्नता को भी देख सकते है। इसी तरह, जो छूटकारा पाए हुए है और जो छूटकारा पाए हुए नहीं है उनमे भी ऐसा ही अन्तर है। 
हमें छुटकारे के सुसमाचार का, पानी, लहू, और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना है। हमें उठना है और प्रकाशमान होना है। जब हम सुसमाचार कहने के लिए लोगों को अपने आसपास इकठ्ठा करते है तब हम मनुष्य के शब्दों से नहीं बोल सकते। बाइबल में, १ यूहन्ना ५ में उसका मतलब समझाया गया है। हमें उसे एक के बाद एक समझाना चाहिए की जिससे कोई गड़बड़ी ना हो। 
जिस वचन का हम प्रचार करते है, वह यीशु के छुटकारे के पानी, लहू, और आत्मा के वचन है। यीशु के ‘लहू’ के बारे ,में लोगो को बताने के लिए हमें प्रकाशमान होने की जरुरत है। हमें उसे स्पष्ट बनाने की आवश्यकता है जिससें इस दुनिया में कोई भी इस सत्य को जाने बिना ना रहे। 
यदि नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति उठके प्रकाशमान नहीं होगा, तो कई लोग छुटकारे के बिना मर जाएंगे, और परमेश्वर इससें प्रसन्न नहीं होगा। वह हमें आलसी सेवक करके बुलाएगा। हमें यीशु के पानी और लहू का सुसमाचार फैलाना है। 
मैं एक ही बात को बार बार कहता हूँ क्योंकि हमारे उद्धार के लिए यीशु का बपतिस्मा बहुत ही महत्वपूर्ण है। जब हम बच्चो के साथ बात करते है, तब हमें बार बार बात को कहना पड़ता है, सारी बातों को कहना पड़ता है ताकि हमें यकीन हो कि वे समझ रहे है। 
यदि हम अनपढ़ व्यक्ति को पढ़ाने की कोशिश करते, तो हम वर्णमाला से शुरू करते। फिर हम धीरे धीरे सिखाते की वर्णमाला का उपयोग करके शब्द कैसे लिखते है। जब वह शब्दों को साथ में लिखना सिख जाता है जैसे की ‘दण्ड,’ तब हम इस शब्द का मतलब समझाने की शुरुआत करेंगे। इसी रीति से हमें लोगो के साथ यीशु की बात करनी चाहिए जिससे हमें यकीन हो की वे सचमुच समझते है। 
हमें यीशु के बपतिस्मा को स्पष्ट रीति से समझाना चाहिए। वह इस जगत में पानी, लहू, और आत्मा के द्वारा आया। मैं प्रार्थना करता हूँ की आप यीशु पे अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करो और छूटकारा पाए। 
यीशु के बपतिस्मा, उसके क्रूस के लहू, और यीशु ही हमारा परमेश्वर और उद्धारकर्ता है ऐसा विश्वास करने से पानी और आत्मा का छूटकारा मिलता है।