उपदेश

विषय ३ : पानी और आत्मा का सुसमाचार

[3-4] यीशु का बपतिस्मा पापियों के लिए उद्धार का प्रतिक है (१ पतरस ३:२०-२२)

(१ पतरस ३:२०-२२)
“जिन्होंने उस बीते समय में आज्ञा न मानी, जब परमेश्‍वर नूह के दिनों में धीरज धरकर ठहरा रहा, और वह जहाज बन रहा था, जिसमें बैठकर थोड़े लोग अर्थात् आठ प्राणी पानी के द्वारा बच गए । उसी पानी का दृष्‍टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्‍वर के वश में हो जाने का अर्थ है। वह स्वर्ग पर जाकर परमेश्‍वर की दाहिनी ओर बैठ गया; और स्वर्गदूत और अधिकारी और सामर्थी उसके अधीन किए गए हैं।” 
 
 
किसके द्वारा हम धर्मी बन सकते है?
परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा

इस पृथ्वी पर हमारा जन्म हुआ उसके पहले से परमेश्वर हमें जानते है। वह जानते थे की हम पापी के रूप में जन्म लेंगे और अपने बपतिस्मा जो जगत के सारे पापों को ले लेता है उसके द्वारा हमें बचाया है। उसने सारे विश्वासियों को बचाया है और उनको अपने लोग बनाए है। 
यह सब परमेश्वर के अनुग्रह का परिणाम है। जैसे भजन संहिता ८:४ में कहा गया है, “तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे?” छूटकारा पाए हुए सारे लोग पापों से उद्धार पाया है उन्होंने उसका विशेष प्रेम पाया है। वे उसके संतान है। 
हम परमेश्वर की संतान बने उससे पहले, हम धर्मी बने और उद्धार पाया और उसे पिता कहने का अधिकार पाने से पहले, हम जो केवल उसके लहू और आत्मा में विश्वास करते थे वे क्या थे? हम पापी थे, केवल पापी जो इस पृथ्वी पर ७० या अगर तंदुरस्त है तो ८० साल जीने के लिए जन्म लिया है। 
हमारे पाप धुल गए उससे पहले, और यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार पर विश्वास करने से पहले, हम अधर्मी लोग थे जो निश्चितरूप से नाश होनेवाले थे। 
प्रेरित पौलुस ने कहा है की वह जो कुछ भी था केवल परमेश्वर के अनुग्रह के काराण था। वैसे ही, अभी हम जो कुछ भी है पूर्णरीति से केवल परमेश्वर के अनुग्रह की वजह से ही है। हम उसके अनुग्रह के लिए उसका धन्यवाद करते है। सृष्टिकर्ता इस दुनिया में आया और हमें बचाया, हमें उसकी संतान और लोग बनाया। हम पानी और आत्मा के उद्धार के अनुग्रह के लिए उसका धन्यवाद करते है। 
उसने हमें उसकी संतान और धर्मी बनने की अनुमति दी उसका कारण क्या है? क्या हम दिखने में सुन्दर है इसलिए? क्या हम बहुत हिन् काबिल है इसलिए? या फिर क्या हम बहुत ही अच्छे है इसलिए? आइए हम इसके बारे में सोचे और जहा उचित लगे वहाँ उसका धन्यवाद करे। 
करण यह है की परमेश्वर ने हमें उसकी संतान बनने के लिए और स्वर्ग राज्य में उसके साथ रहने के लिए हमारी रचना की है। परमेश्वर ने अनंतकाल तक उसकी साथ रहने के लिए हमें उसके अपने लोग बनाए है। केवल उसी कारण से परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन से आशीषित किए है। हम अच्छे दिखते थे, बहुत काबिल थे, या उनके बनाए दुसरे लोगो से ज्यादा धार्मिक जीवन जीते थे इसलिए उसने हमें अपने लोग नहीं बनाए है। केवल एक ही कारण है की वह हमसे प्रेम करता है। 
“उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, अब तुम्हें बचाता है” (१ पतरस ३:२१)। “थोड़े लोग अर्थात् आठ प्राणी पानी के द्वारा बच गए” (१ पतरस ३:२०)। 
केवल थोड़े ही, शहर में से एक और परिवार में से दो लोगो को बचाया जाएगा। तो फिर, क्या हम दुसरों से ज्यादा अच्छे है? नहीं, बिलकुल नहीं। हम कोई ख़ास नहीं है, लेकिन फिर भी पानी और आत्मा पर विश्वास करने से हमारा उद्धार हुआ है। 
वह तो चमत्कारों में एक चमत्कार है की हमने उद्धार पाया है, और यह परमेश्वर की ओर से मिली बिना शर्त की भेंट और आशीष है की हम उसको पिता, हमारे प्रभु कहकर बुला सकते है। यदि हम अभी भी पापी है तो हम उसे हमारे पिता या हमारे प्रभु कैसे कह सकते है? 
जब हम वास्तविकता के बारेमें सोचते है की हमारा उद्धार हुआ है, तब हम जानते है की परमेश्वर ने हमें बिना शर्त का प्रेम किया है। क्या हम उसका धन्यवाद नहीं करेंगे? यदि परमेश्वर का प्रेम और आशीष हमें नहीं मिला होता, तो हम जन्म लेकर भयानक रीति से हम मर गए होते। हम परमेश्वर की आशीषो और प्रेम के लिए बार बार परमेश्वर का धन्यवाद करते है जिसने हमें अपनी नज़र में अपनी संतान बनने के काबिल बनाया।
 
 
यीशु के बपतिस्मा के द्वारा मूल्यवान उद्धार हमें दिया गया है
 
क्यों नूह के समय में लोगो का नाश हुआ?
क्योंकि उन्होंने पानी में (यीशु का बपतिस्मा) 
विश्वास नहीं किया

“उसी पानी का दृष्‍टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, अब तुम्हें बचाता है।” पतरस की पहली पत्री में लिखा है की पानी के द्वारा केवल आठ आत्मा ही बची थी। नूह के समय में कितने लोग थे? कितने लोग थे ये जानने के लिए कोई रास्ता नहीं है, लेकिन मान लेते है की दस लाख लोग थे। दस लाख लोगों में से केवल नूह के परिवार के आठ लोग ही बच पाए। 
आज भी उसका अनुपात उतना ही है। वे कहते है की अभी पृथ्वी पर ६०० करोड़ से भी ज्यादा लोग है। आज यीशु पर विश्वास करने वालों में से कितने लोगो के पाप धुले होंगे? यदि हम केवल एक शहर पे नज़र डाले तो उसमे से बहुत ही थोड़े लोग होंगे। 
मेरे शहर में २५०,००० लोग है, उनमे से कितने लोगो ने अपने पापों से छूटकारा पाया होगा? शायद २००? तो फिर उसका अनुपात कितना है? उसका मतलब यह होगा की एक हज़ार में से एक से भी कम व्यक्ति ने छुटकारे की आशीष पाई होगी। 
यह अनुमान है की कोरिया में १ करोड़ २० लाख जितने मसीही है, जिसमें कैथोलिक भी शामिल है। इनमें से कितने लोग पानी और आत्मा से नया जन्म पाए हुए लोग होंगे? हमें यह बात ध्यान में रखना चाहिए की नूह के समय में पूरी पृथ्वी पर से केवल ८ लोग ही बच पाए थे। हमें जानना चाहिए और विश्वास करना चाहिए की जो लोग यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करते है जिसके द्वारा उसने हमारे सारे पापों को उठा लिए थे, उस सारे लोगों के पाप वह धो देता है। 
यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस के लहू के द्वारा छूटकारा दिया है ऐसा विश्वास करनेवाले बहुत थोड़े है। ‘यीशु के पुनरुत्थान’ की प्रसिध्ध तस्वीर देखे। कितने पुनरुत्थान पाए हुए लोग दिखते है? आप यरुशालेम के किल्ले से उनको यीशु की ओर आते देख सकते है, जिसने उनके लिए अपने हाथ फैलाए कर रखे है, अंदाजा लगाओ की उनमें से कितने धर्मशास्त्री और सेवक है। 
आज, संसार में बहुत सारे धर्मशास्त्री है, लेकिन जो यीशु के बपतिस्मा जो छुटकारे के महत्व का सत्य है उस पर विश्वास करनेवाले बहुत ही थोड़े है। कुछ धर्मशास्त्री कहते है की यीशु ने बपतिस्मा लिया उसका कारण यह था की वह नम्र था, और कुछ कहते है की उसने हमारे जैसे, यानी की मनुष्य बनने के लिए बपतिस्मा लिया। 
लेकिन बाइबल में लिखा है की, पतरस और यूहन्ना समेत यीशु के सारे प्रेरित इस बातकी गवाही देते है की, यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पाप उसके ऊपर चले गए है, और हम भी यह विश्वास करते है। 
प्रेरितों पवित्रशास्त्र में गवाही देते है की यीशु के बपतिस्मा के साथ हमारे पाप उसके ऊपर चले गए है। परमेश्वर के अनुग्रह से वह कितनी अद्भुत गवाही है की हम केवल वह विश्वास करने के द्वारा छूटकारा पाते है। 
 
 
छुटकारे के बपतिस्मा के विषय में ‘शायद’ जैसा कोई शब्द नहीं है
 
कौन परमेश्वर के असीम प्रेम को
पा सकता है?
वह व्यक्ति जो यीशु के बपतिस्मा और 
उसके लहू में विश्वास करता है
 
लोग विश्वास करते है की केवल यीशु पर विश्वास करने से हम बच जाएंगे। सारे संप्रदाय अपने विश्वास के द्वारा उद्धार में आश्वत है, और कई लोग सोचते है की यीशु का बपतिस्मा मसीही समाज के लिए मात्र एक अंधविश्वास है। लेकिन यह सच नहीं है। मैंने पढ़ी हुई हजारों किताबों में, मुझे उद्धार की एक भी किताब नहीं मिली जो ये ये बताती हो की यीशु का बपतिस्मा और लहू के छुटकारे और परमेश्वर के उद्धार के बिच संबंध है। 
नूह के समय में केवल ८ लोग बच पाए थे। मैं नहीं जानता की आज कितने लोग उद्धार पाए हुए है, लेकिन शायद ज्यादा नहीं है। जो उद्धार पाए हुए है वे वह है जिन्होंने यीशु के बपतिस्मा और लहू में विश्वास किया। जब बहुत सारी कलीसिया की मुलाक़ात ली, तब मैंने बार बार पहचाना की केवल बहुत थोड़े ही लोग है जो यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार का प्रचार करते है, जो सत्य का सुसमाचार है। 
यदि हम यीशु के बपतिस्मा और लहू में विश्वास नहीं करते, तो हम अभी पापी है और उद्धार पाए हुए नहीं है, भले ही फिर हम बहुत विश्वास योग्यता से कलीसिया में क्यों न जाते हो। शायद हम पूरा जीवन विश्वास योग्यता से कलीसिया में गए होंगे, लेकिन यदि अभी भी हमारे दिल में पाप है तो हम पापी है। 
यदि हम ५० साल कलीसिया में गए, लेकिन फिर भी हमारे दिल में पाप है, तो ५० साल का हमारा विश्वास झूठा है। उसके बदले में एक दिन का सच्चा विश्वास अच्छा है। यीशु पर विश्वास करनेवालों में से, जो लोग यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में सही रीति से विश्वास करते है केवल वही स्वर्ग राज्य में प्रवेश कर पाएंगे। 
सच्चा विश्वास यह मानने मैं हे की परमेश्वर का पुत्र इस पृथ्वी पर आया और जगत के सारे पापों को उठाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया। यह विश्वास हमें स्वर्ग राज्य की ओर लेजकर जाएगा। हमें ऐसा विश्वास भी करना चाहिए की आपके और मेरे लिए यीशु ने क्रूस पर लहू बहाया है। हमें परमेश्वर का धन्यवाद करने के लिए और उसकी महिमा करने के लिए भी यह जानना चाहिए। 
हम कौन है? हम पुरुषों और सत्रीओ की संतान है जिन्होंने यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा उद्धार पाया है। हम उसका धन्यवाद क्यों न करे? यीशु जब ३० साल का था तब हमें बचाने के लिए उसने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया। इस रीति से, उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया और क्रूस पर हमारा न्याय भी उसने ले लिया।
जब हम उसके बारेमें सोचते है, यब नम्रता से उसका धन्यवाद करते है। हमें जानना चाहिए की यीशु ने इस जगत में जो कुछ भी किया वो हमारे उद्धार के लिए किया। पहले, वह इस दुनिया में आया। उसने बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, तीसरे दिन पुनरुत्थित हुआ, और अब पिता के दाहिने हाथ पे बैठा है।
परमेश्वर का छूटकारा बिना कोई अपवाद के हम सब के लिए है। यीशु के उद्धार आपके और मेरे लिए है। हम परमेश्वर के प्रेम और आशीषो के लिए उसका धन्यवाद करते है।
हम सुसमाचार का गीत जानते है वह इस प्रकार से है। “एक सिन्दार कहानी है। संसार के कई लोगो में से, मैं ही केवल एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसके पास उसका प्रेम और उद्धार है। ओह! कितना अद्भुत है उसका प्रेम। मेरे लिए उसका प्रेम, मेरे लिए उसका प्रेम। एक सुन्दर कहानी है। संसार के कई लोगों में से, हम उद्धार पाए हुए है, जो उनके लोग बने है। हमने उसका प्रेम पहिना हुआ है। परमेश्वर का प्रेम, परमेश्वर का अनुग्रह। ओह! कितना अद्भुत है उसका प्रेम! मेरे लिए उसका प्रेम।
यीशु आपको और मुझे बचाने के लिए पृथ्वी पर आया, और उसके बपतिस्मा का छूटकारा हमारे लिए है। सुसमाचार कोई काल्पनिक कथा नहीं है; वह सत्य है जो हमें बोझ से भरे जीवन में से उठाकर परमेश्वर के सुन्दर राज्य में ले जाता है। आपको ध्यान में रखना चाहिए की विश्वास अआपके और परमेश्वर के बिच एक संबंध है। 
वह हमें बचाने के लिए इस जगत म आया। हमारे पापों को साफ़ करने के लिए उसने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर उसका न्याय हुआ। 
वह कितना महान आशीष है की विश्वासु परमेश्वर को पिता कह के बुला सकता है! हम कैसे अपने विश्वास के जरिए यीशु में उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास कर सकते है और उद्धार पा सकते है? हमारे लिए उसके असीम प्रेम के कारण यह संभव है। हमने उद्धार प्राप्त किया है क्योंकि पहले परमेश्वर ने हमें प्रेम किया है।
 
 
यीशु ने एक ही बार में हंमेशा के लिए हमारे सारे पापों को धो दिया है 
 
क्या हमनें एक ही बार में हंमेशा के लिए 
उद्धार पाया है या धीरे धीरे?
एक ही बार हंमेशा के लिए
 
“इसलिए कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिए धर्मी ने, पापों के कारण एक बार दू:ख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुँचाए” (१ पतरस ३:१८)। हमारे छुटकारे के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया और आपकों और मुझे यानी की अधर्मिओं को बचने के लिए वह क्रूस पर मरा। 
हमारे लिए परमेश्वर के न्याय को टालने के लिए यीशु इस पृथ्वी पर एकबार मरा। जिससे हम स्वर्ग राज्य में प्रवेश कर शके और परमेश्वर के साथ हंमेशा के लिए जी सके, वह इस दुनिया में आया और अपने के बपतिस्मा के द्वारा, अपने क्रूस पर के लहू के द्वारा, और पुनरुत्थान के द्वारा पूर्णरीति से हमारे पापों को साफ़ कर दिया है। 
क्या आप विश्वास करते है की यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमें पूर्णरीति से बचा लिया है? यदि आप उसके बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते तो आप उद्धार नहीं पा सकते। क्योंकि हम बहुत ही कमज़ोर है, इसलिए यदि हम ऐसा विश्वास नहीं करते की यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे सारे पापों को पूर्णरीति से साफ़ कर दिया है तो हम नया जन्म नहीं पा सकते। 
उसने हमारे सारे पापों को उठाने के लिए बपतिस्मा लिया और हमारे लिए क्रूस पर का न्याय ले लिया। यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के छुटकारे से एक ही बार में हंमेशा के लिए हमारे सारे पापों को साफ़ कर दिया है। 
यदि हम प्रत्येक समय हमारे पापों का प्रायश्चित करे, हर समय अच्छे और दयालु बने, और कलीसिया में ढ़ेरों अर्पण चढ़ाए फिर भी मनुष्य के तौर पे छूटकारा पाना असंभव होता। 
इसलिए, हमारे उद्धार के लिए यीशु का बपतिस्मा और क्रूस के उसके लहू पर विश्वास करना बहुत ही आवश्यक है। हमें पानी और लहू पर विश्वास करना ही चाहिए। अच्छे कार्य करने से हमारे पापों का प्रायश्चित नहीं होता। 
गरीबोँ के लिए महँगे कपडें लेने से या पादरी को अच्छा भोजन खिलाने से उद्धार नहीं मिलता। यीशु केवल उन लोगो को ही बचाएगा जो उनके बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करते है। यदि हम विश्वास करते है की परमेश्वर ने हमें यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा एक ही बार में बचाया है तो हम उद्धार प्राप्त करेंगे। 
कुछ लोग ऐसा सोचेंगे की परमेश्वर ने इस बारेमें बाइबल में कहा तो है लेकिन उनको अभी इस बारेमें सोचना पडेगा। यह उन पर निर्भर है, लेकिन हमें जैसे लिखा है वैसे ही उसके वचनों पर विश्वास करना चाहिए। 
इब्रानियों १०:१-१० में लिखा है की उसने एक ही बार हंमेशा के लिए हमें उद्धार दिया है। यह सत्य है की जो यीशु के बपतिस्मा और लाहो पर विश्वास करता है परमेश्वर उनको एक ही बार में हंमेशा के लिए उद्धार देता है। हमें भी उसमे विश्वास करना चाहिए। “वह एकबार मरा, एक ही बार में हम सबको बचाया, ओ भाइओं, विश्वास करो, और छूटकारा पाओ। यीशु के बपतिस्मा के तले अपने बोझ को रख दो।” यीशु ने एक ही बार बपतिस्मा लेने के द्वारा और एक ही बार खून बहाने के द्वारा एक ही बार हंमेशा के लिए हमारे अधर्म और पापों से हमें बचाया है। 
“अधर्मियों के लिए धर्मी ने” (१ पतरस ३:१८)। यीशु पापरहित परमेश्वर है, और उसने कभी भी पाप नहीं किया था। वह लोगो को उनके पापों से बचाने के लिए देह में हमारे पास आया। उसने बपतिस्मा लिया और हमारे सारे पापों को उठा लिया। उसने हमें पाप और अधर्म से बचाया है। 
जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब लोगों के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सारे पापों को उसके ऊपर डाला गया, और जब उसने क्रूस पर लहू बहाया और मर गया उसके द्वरा सारे लोग अपने न्याय से बच गए। उसने पापोयों के लिए बपतिस्मा लिया और उनकी जगह पे उसकी विजयी मौत हुई। 
यह उसके बपतिस्मा का छूटकारा है। यीशु ने हम सबको जो पापी थे उनको एक ही बार में हंमेशा के लिए छूटकारा दिया। हम कितने कमज़ोर है! यीशु ने हमारे जन्म से लेके मौत तक के सारे पापों का छूटकारा किया और न्याय के लिए खुद को क्रूस पर अर्पण कर दिया। हम जो यीशु में विश्वास करते है उनको ऐसा विश्वास करना चाहिए की यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमें उद्धार दिया है। 
हम कमज़ोर है, लेकिन यीशु कमज़ोर नहीं है। हम विश्वासी नहीं है, लेकिन यीशु है। परमेश्वर ने एक ही बार में हंमेशा के लिए हमें उद्धार दिया है। “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना ३:१६)। परमेश्वर ने हमें अपना एकलौता बेटा दिया है। जगत के सारे पाप यीशु पर डाले जाए इसलिए परमेश्वर ने अपने बेटे को बपतिस्मा दिलाया, जिससे सारे मनुष्यों का न्याय उस पर डाला जाए। 
यह कितना अद्भुत उद्धार है! हम परमेश्वर के प्रेम और उसके उद्धार के लिए उसका धन्यवाद करते है। परमेश्वर उनको उद्धार देता है जो लोग यीशु के पानी, और लहू में विश्वास करते है: यीशु का बपतिस्मा और लहू बहाना, और यीशु परमेश्वर का बेटा है ये वास्तविकता है। 
जो यीशु पर विश्वास करता है वे यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार पा सकते है और धर्मी के रूप में अनन्त जीवन जी सकते है। हम सबको उसमें विश्वास करना चाहिए। 
हमें कौन उद्धार देता है? क्या वह परमेश्वर है जो हमें उद्धार देता है, या फिर परमेश्वर की कोई सृष्टि है जो हमें उद्धार देती है? यीशु, जो परमेश्वर है वह हमें उद्धार देता है। हमने उद्धार पाया क्योंकि हमने परमेश्वर क छुटकारे में विश्वास किया, और यह छुटकारे का उद्धार है।
 
 
यीशु उद्धार का परमेश्वर है
 
‘मसीह’ का अर्थ क्या होता है?
याजक, राजा, और भविष्यवक्ता

यीशु मसीह परमेश्वर है। यीशु का मतलब है उद्धारकर्ता, और मसीह का मतलब है ‘वह जिसे अभिषेक किया गया है।’ जैसे पुराने नियम में शमूएल ने शाऊल को अभिषेक किया, वैसे ही राजाओं का अभिषेक किया गया था, याजकों का अभिषेक किया गया था और भविष्यवक्ताओं को अपनी सेवकाई के लिए अभिषिक्त होने की आवश्यकता थी। 
यीशु इस संसार में आया और तिन कर्तव्य के लिए उसका अभिषेक किया गया था: याजक, राजा, और भविष्यवक्ता। स्वर्गीय याजक के तौर पर, सारे मनुष्यों के पापों को उठाने के लिए उसको बपतिस्मा दिया गया था। 
अपने पिता की इच्छा को पूरा करते हुए, उसने पिता के सामने खुद को पापबलि के रूप में अर्पण किया। “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना १४:६)। यीशु ने हम में से केवल उन लोगों का उद्धार किया है जो विश्वास करते है की यीशु के बपतिस्मा और क्रूस परम उसके लटके जाने के द्वारा उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया है। 
“क्योंकि शरीर का प्राण लहू में रहता है” (लैव्यव्यवस्था १७:११)। यीशु ने अपने बपतिस्मा के बाद क्रूस पर लहू बहाया; ऐसे, उसने अपना जीवन हमारे पापों की किंमत के रूप में परमेश्वर के आगे अर्पण किया जिससे हम विश्वासी उद्धार पा सके। 
वह क्रूस पर मरा उसके बाद तीसरे दिन वह पुनरुत्थित हुआ और बंदीखाने में कैद आत्माओं को सुसमाचार सुनाया। जिन्होंने अभी छूटकारा नहीं पाया वे पाप के बंदीखाने में कैद आत्मिक कैदी जैसे है, और उनको यीशु सत्य का सुसमाचार यानी की पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करता है। हम उद्धार पा सके इसलिए परमेश्वर ने हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार दिया। जो कोभी इस पर विश्वास करता है वह नया जन्म पा सकता है।
 
 
यीशु का बपतिस्मा और लहू पापियों को बचाता है
 
हम किस रीति से परमेश्वर के आगे 
शुध्ध अन्त:करण रख सकते है?
यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास
करने के द्वारा

यीशु मसीह हमारे उद्धारकर्ता है, और उसकी गवाही १ पतरस ३:२१ में दी गई है, “उसी पानी का दृष्‍टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्‍वर के वश में हो जाने का अर्थ है।” यीशु के बपतिस्मा का पानी पापियों के उद्धार के लिए आवश्यक है। 
यीशु ने अपने बपतिस्मा से पापों को अपने ऊपर लेने के द्वारा पापोयों के सारे पापों को साफ़ किया है। क्या आप यीशु के बपतिस्मा पे विश्वास करते है? क्या आप विश्वास करते है की उसके बपतिस्मा के द्वारा हमारे दिलो को पापों से शुध्ध किया गया है? हमारे दिलो को पापों से शुध्ध किया गया है, लेकिन हमारा शरीर अभी भी पापी है। 
‘नया जन्म’ पाने का मतलब है की वह व्यक्ति फिर से पाप नहीं करेगी। हम नया जन्म पाए हुए लोग भी पाप करते है, लेकिन उसके बपतिस्मा पे हमारे विश्वास के कारण हमारे हृदय शुध्ध रहते है। इस तरह, ऊपर का वाक्य सूचित करता है की, “शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से” (१ पतरस ३:२१)। 
यीशु ने मेरे पापों को धो दिया और परमेश्वर ने मेरे लिए जो न्याय था उसको मान्य किया तो फिर मैं कैसे उसमे विश्वास न करू? यीशु, जो परमेश्वर है उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा मुझे उद्धार दिया है यह जानने के बावजूद मैं कैसे उसमे विश्वास नहीं कर सकता? हमनें परमेश्वर के सन्मुख उद्धार पाया है और अब हमारा विवेक शुध्ध है। जैसे हम नहीं कह सकते की परमेश्वर हमें प्रेम नहीं करता वैसे ही हम परमेश्वर के आगे ऐसा भी नहीं कह सकते की यीशु ने पूर्णरीति से मेरे पापों को साफ़ नहीं किया है।
 नया जन्म पाने के बाद हमारा विवेक ज्यादा संवेदनशील बन जाता है और जब हम गलत करते है तब वह हमें बताता है। यदि हमारा विवेक छोटी सी भी तकलीफ को महसूस करता है तो जब तक हम खुद को यीशु के बपतिस्मा के सामर्थ के बारे में याद नहीं दिलाते तब तक हम पाप से सम्पूर्ण रीति से मुक्त नहीं हो सकते है। 
जब हमारा विवेक तकलीफ को महसूस करे उसका मतलब है की कुछ गलत हो रहा है। यीशु के बपतिस्मा का पानी पाप की सारी गंदकी को दूर करता है। यीशु ने ओअने बपतिस्मा के साथ हामारे सारे पापों को भी उठा लिया है और हमें साफ़ किया है, हमारे विवेक को भी साफ़ किया है। जब हम वास्तव में यह विश्वास करते है, तब हमारा विवेक वास्तव में शुध्ध होता है। हमारा विवेक कैसे शुध्ध हो सकता है? यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पे विश्वास के द्वारा। जन्म से ही सारे लोगो के अन्दर दुष्टता और बुरा विवेक होता है, लेकिन यदि हम विश्वास करे की हमारे सारे पाप यीशु पर डाले गए है, तो हम उस पापों को मिटा सकते है। 
यह नया जन्म पाए हुए लोगो का विश्वास है। यह कोई ऐसी बात नहीं है की जिसे आप अपने पूरे होश में अंगीकार कर सको। क्या आपका विवेक शुध्ध है? क्या वह इसलिए शुध्ध है की आप अच्छा जीवन जिए है, या फिर वह इसलिए शुध्ध है की आपके सारे पाप यीशु पर डाले गए है और आप उसमे विश्वास करते है? केवल यीशु पर विश्वास करने से ही आप शुध्ध विवेक पा सकते हो। 
कुछ शब्दों में जीवन होता है जब कुछ शब्दों में जीवन नहीं होता। कैसे सारे लोगों के विवेक को शुध्ध किया जा सकता है? धर्मी बनने का और विवेक को शुध्ध करनेका एकमात्र रास्ता है, यीशु के सम्पूर्ण छुटकारे पे विश्वास करना। 
जब हम उसके बपतिस्मा पे विश्वास करते है तब हम पवित्र बनते है, उसका मतलब यह नहीं है की शरीर का मेल साफ़ हो गया है, लेकिन परमेश्वर के प्रति हमारा विवेक शुध्ध हुआ है। उसके लिए वह आया, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा और मृत्यु में से पुनरुत्थित हुआ और अभी वह परमेश्वर के दाहिने हाथ बैठा हुआ है। 
जब समय होगा, तब वो फिरसे इस जगत में आएगा। “और जो लोग उसकी बाट जोहते है उनके उद्धार के लिए दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा” (इब्रानियों ९:२८)। हम विश्वास करते है की जो उसकी बाट जोहते है और उसके बपतिस्मा और लहू में विश्वास के द्वारा पापरहित हुए है, उनको लेने के लिए वह वापिस आएगा। 
 
 
विश्वास का एक नैदानिक प्रयोग
 
क्या हम यीशु के बपतिस्मा के बगैर 
उद्धार पा सकते है?
कभी नहीं
 
हमारे देजोन की कलीसिया में हमने नैदानिक और अनियोजित प्रयोग किया। 
देजोन कलीसिया के रेव. पार्क ने एक युगल को कहा की यीशु के बपतिस्मा के अर्थ को दर्शाए बिना जगत में कोई पाप नहीं है। जब वो दूसरी कलीसिया में जाते थे तब पति उपसेश के समय सो जाता था क्योंकि सारे पादरी सुसमाचार का प्रचार तो करते थे लेकिन यीशु के बपतिस्मा से छूटकारा मिलता है इस बात को निकाल देते थे, इसलिए उनको हरदिन प्रायश्चित करना पड़ता था। 
लेकिन यहाँ देजोन कलीसिया में, उसने अपनी दोनों आँखे खुल्ली रखके उपदेश सुना क्योंकि उसको कहा गया था की उसके सारे पाप यीशु पर डाले गए है। अब उसको कलीसिया में लाना उसकी पति के लिए आसान हो गया था। 
एक दिन, वह कलीसिया में बैठा था और उसने रोमियों ८:१ सुना। “अत: अब जो मसीह यीशु में है, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं।” बाद में, उसने तुरन्त ही सोचा, ‘आहा, यदि कोई यीशु पर विश्वास करता है, तो वह पापरहित है। मैं युशु पर विश्वास करता हूँ इसलिए, मैं पापरहित हूँ।’ 
फिर उसने अपने साले को और दूसरी कई दोस्तों को फोन करके कहा, “क्या आपके दिल मैं पाप है? तो फिर तुम्हारा विश्वास सच्चा नहीं है।” इस समय रेव. पार्क मुश्किल में पद गए। पति यीशु के बारे में जानता नहीं था लेकिन उसका आग्रह ऐसा था की वह पापरहित है। 
फिर, युगल के बिच में समस्याएं शुरू हो गई। पत्नी ज्यादा धार्मिक थी, लेकिन उसके दिल में अभी भी पाप था जब की पति कहता था की वो खुद पापरहित है। पत्नी को यकीन था की दोनों के दिलों में अभी पाप है। उन्होंने उस बारेमें विवाद करना शुरू किया। पतीने आग्रह करना चालु रखा की वह पापरहित है क्योंकि ‘अत: अब जो मसीह यीशु में है, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं’ और पत्नी ने विवाद किया की उसके दिल में अभी भी पाप है। 
फिर एक दिन, उसकी पत्नी इस बारे में चिंता करके घबराई और उसने रेव. पार्क के पास जाके पूछने का फैसला किया की जब वो कहते है की उसके सारे पापों को यीशु पर डाल दिया गया है उसका मतलब क्या है? 
इसलिए एक दिन, शाम की आराधना सभा के बाद, उसने अपने पति को घर वापस भेज दिया और खुद रेव. पार्क को प्रश्न पूछने के लिए वहाँ रुकी। उसने कहा, “ मैं जानती हूँ की आप हमें कुछ कहने की कोशिश कर रहे है, लेकिन मुझे यकीन है की एक महत्वपूर्ण भाग छीपा हुआ है। कृपया करके मुझे बताइए वो क्या है।” फिर, रेव. पार्क ने उसे पानी और आत्मा से नया जन्म लेने के बारे में कहा। 
तब उसे समझ में आया की रोमन ८:१ में क्यों लिखा है की, “अत: अब जो मसीह यीशु में है, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं” उसने एक ही बार में विश्वास कर लिया। उसे आखिर में एहसास हुआ की हमारे सारे पापों को यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाला गया है इसलिए जो मसीह में है उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं। 
उसने लिखित वचनों को समझना शुरू किया, अन्त में उसे पता चला की छुटकारे की चाबी यीशु का बपतिस्मा है और हम उसके बपतिस्मा के छुटकारे से धर्मी बन सकते है। 
वास्तव में, उसका पति घर गया ही नहीं था लेकिन बहार खड़े रहकर उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने उसकी गवाही सुनी की उसके पाप पूर्णरीति से साफ़ हुए है, और आनन्द से पूछा, “क्या अब आप छूटकारा पाए हुए हाउ?” 
लेकिन पादरी ने उसकी पत्नी को जो कहा था उसे सुनने के बाद, वह परेशानी में पड़ गया था। उसने पहले कभी यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार के बारे में नहीं सुना था। उसे यकीन था की यीशु के बपतिस्मा के बिना भी उसके दिल में पाप नहीं है। इसलिए घर जाके, उन्होंने फ़िरसे विवाद करना शुरू किया। 
इस समय, परिस्थिति उलटीं थी। पत्नी पति को पूछ रही थी कि उसके दिल में पाप है की नहीं। पत्नीने पति से पूछा की यीशु के बपतिस्मा में विश्वास किए बिना वह कैसे पापरहित बन सकता है। उसने विवाद किया की वो अपने मन को जांचे। फिर, जब उसने अपने मन को टटोला तब उसे पता चला की उसके दिल में अभी भी पाप है। 
इसलिए, वह रेव. पार्क के पास गया और अंगीकार किया की उसके दिल में पाप है। उसने पूछा, “जब उन्होंने अपने हाथ को बकरे के सिर पर रखा, वह उसे मारने से पहले रखे, या मारने के बाद?” उसने कभी भी पानी और आत्मा का सुसमाचार नहीं सुना था, इस लिए वह परेशानी में पद गया था। 
वह इस आत्मिक प्रयोग का मतलब था। जगत के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यीशु को बपतिस्मा लेना आवश्यक था। उसके बाद वह क्रूस पर मरा क्योंकि पाप की मज़दूरी मृत्यु है। 
“उन्होंने बकरे के सिर पर हाथ उसे मारने से पहले रखे थे या उसे मारने के बाद?” उसने यह पूछा क्योंकि वह हाथ रखने और यीशु के बपतिस्मा के बारेमें व्याकुल था। इसलिए रेव. पार्क ने उसे यीशु के छुटकारे के बारेमें विस्तार से समझाया। 
उस दिन, पति ने पानी और आत्मा के सुसमाचार को पहलीबार सुना और उसने छूटकारा पाया था। उसने केवल एकबार सुसमाचार सुना और छूटकारा पाया। 
वह यीशु के बपतिस्मा को निकाल देने का प्रयोग था। हम कह सकते है की हमारे अन्दर पाप नहीं है, लेकिन यीशु के बपतिस्मा के बगैर निश्चित रूप से हमारे मन में पाप है। लोग सामान्य तौर पर कहते है की यीशु ने क्रूस पर के कार्य के द्वारा सारे पापों को धो दिया है, लेकिन जो लोग यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करते है केवल वो ही कह सकते है की परमेश्वर के सन्मुख में उनमें कोई पाप नहीं है। 
रेव. पार्क ने युगल के द्वारा साबित कर दिया की यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास किए बिना हम हमारे पापो से सम्पूर्ण छूटकारा नहीं पा सकते। 
 
 
उद्धार का प्रतिक: यीशु का बपतिस्मा 
 
उद्धार का प्रतिक क्या है?
यीशु का बपतिस्मा

“उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, अब तुम्हें बचाता है।” यीशु हमारे सारे पापों को साफ़ करने और हमारे विवेक को बर्फ़ के नाई सफ़ेद करने के लिए इस संसार में आया था। हम सब पापों से साफ़ हुए है क्योंकि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया है। उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमें उद्धार दिया है। इसलिए, पूरी सृष्टि को उसके आगे घुटनें टिकाने चाहिए। 
यीशु पर का विश्वास हमें बचाता है। यीशु पे विश्वास करने से हम परमेश्वर की संतान बनते है और स्वर्ग में जाते है। यीशु में विश्वाश करने के द्वारा हम धर्मी बनते है। हम राज-पदधारी याजकों का समाज है, हम परमेश्वर को हमारे पिता कहके बुला सकते है। हम इस संसार में रहते है, लेकिन हम राजा है। 
क्या आप विश्वास करते है की परमेश्वर उनको उद्धार देते है जो पानी और आत्मा के छुटकारे पे विश्वास करते है? हमारा छूटकारा यीशु के बपतिस्मा के बिना सम्पूर्ण नहीं हो सकता। परमेश्वर और यीशु ऐसे ही विश्वास को सच्चे विश्वास के रूप में स्वीकारते है जो उसके बपतिस्मा, उसके क्रूस, और आत्मा जो हमें सम्पूर्ण छूटकारा देती है उस पर विश्वास करते हो। केवल यही सच्चा विश्वास है। 
हमारे पाप उस समय धुल गए जब यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा पापों को खुद पर उठा लिया और जब यीशु ने क्रूस पर लहू बहाया तब हमारे सारे पापों की किंमत चुकाई गई। मसीह यीशु ने पानी और आत्मा के द्वारा हमें उद्धार दिया है। हाँ! हम विश्वास करते है!