उपदेश

विषय ३ : पानी और आत्मा का सुसमाचार

[3-5] नया जन्म पाने के मूल सुसमाचार का मतलब (यूहन्ना ३:१-६)

(यूहन्ना ३:१-६) 
‘फरीसियों में नीकुदेमुस नाम का एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था। उसने रात को यीशु के पास आकर उससे कहा, ‘हे रब्बी, हम जानते हैं कि तू परमेश्वर की ओर से गुरु हो कर आया है, क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो तो नहीं दिखा सकता।’ यीशु ने उसको उत्तर दिया, ‘मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।’ नीकुदेमुस ने उस से कहा, ‘मुनष्य जब बूढ़ा हो गया, ता कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है? यीशु ने उत्तर दिया, ‘मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य पानी और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।’
 
 
बाइबल के अनुसार नया जन्म पाने का मतलब क्या है?
 
क्या नया जन्म पाने का संबंध शारीरिक
भावना और परिवर्तन से है?
नहीं, नया जन्म पाने का संबंध आत्मिक परिवर्तन से है।
यह एक पापी मनुष्य का पाप से मुक्त होना है।
 
इस दुनिया में, बहुत से लोग हैं जो यीशु पर विश्वास कर लेने मात्र से नया जन्म पाना चाहते हैं। कैसे? पहले मैं आपको यह बताना चाहूँगा कि नया जन्म पाना हमारे ऊपर नहीं है। दूसरे शब्दों में, यह कुछ तो है जो कि अकेले हमारे कार्यों के परिणाम से नहीं हो सकता।
लगभग सभी मसीहियों की यह गलत धारणा है। वे विश्वास करते हैं कि उनका नया जन्म हो गया है। इसलिए वे निम्नलिखित कारणों से आपस में विश्वास करते हैं। कुछ लोग कई नयी कलीसिया बनाने के द्वारा उद्धार पाने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग अपने आप को उन लोगों के बीच में जहाँ परमेश्वर का वचन नहीं पहुँचा है, ऐसे दूरस्थ स्थानों में प्रचार करने के लिए यीशु मसीह के जैसे मिशनरी के रूप में समर्पित करते हैं, और कुछ लोग विवाह से बिल्कुल इनकार करते हैं। वे अपनी सारी शक्ति परमेश्वर के कार्य में खर्च करते हैं इस विश्वास से कि यही परमेश्वर का कार्य है।
यही सब कुछ नहीं है। ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो अपनी बड़ी रकम अपने चर्च में दान देते हैं, बहुत से लोग अपने चर्च के फर्श की प्रत्येक दिन साफ सफाई, झाडू-पोंछा करते हैं। कुल मिलाकर वे अपनी सारी सम्पत्ति और समय को अपने चर्च में दान कर देते हैं और वे विश्वास करते हैं इन सब प्रयासों से उन्हें जीवन का मुकुट प्राप्त होगा। वे करते हैं कि परमेश्वर उनके कार्यों की प्रशंसा करेंगे और उन्हें नया जन्म पाने की अनुमति प्रदान करेंगे।
तथ्य यह है कि बहुत से समर्पित लोग हैं जो नया जन्म लेना चाहते हैं। ऐसे लोग सब जगह पाए जाते हैं। वे कठिन कार्य करते हैं और आशा करते हैं कि एक दिन अवश्य परमेश्वर उन्हें आशीष देंगे और उनका नया जन्म होगा। ये लोग बहुत से धार्मिक संस्थानों में, बाइबल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुधार केन्द्रों में पाए जाते हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे नया जन्म पाने की सच्चाई के बारे में कुछ नहीं जानते हैं।
वे सब अपने कार्यों के प्रतिफल से सोचते हैं, “यदि मैं यह कार्य सही रूप से करूं तो मेरा नया जन्म हो जाएगा”। इसलिए वे ऐसे कार्यों में अपना सारा प्रयास लगा देते हैं, वे सोचते हैं कि वे नया जन्म पाने के लिए आवश्यक आधार बना रहे हैं और सोचते हैं कि ‘रेव्ह. वेस्ली के समान मेरा भी एक दिन नया जन्म होगा!’ यूहन्ना ३:८ पढ़कर वे व्याख्या करते हैं कि नया जन्म पाने की आशीष कहाँ से आती है, या यह कहाँ जाती है। 
इसलिए वे इस आशा में केवल कठिन कार्य करते हैं कि एक दिन यीशु उन्हें अवश्य नया जन्म पाने की अनुमति दे सकते हैं। यहाँ बहुत से लोग हैं जो सोचते हैं, “यदि मैं इसी तरह कोशिश करता रहूँगा तो यीशु मुझे नया जन्म पाने की अनुमति एक दिन अवश्य देंगे। इस बात को जाने बिना कि एक दिन उनका नया जन्म होगा। किसी सुबह मैं नया जन्म पाकर जाग उठूंगा और जानूंगा कि मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ”। यह कैसी निष्फल आशा और विश्वास है।
इस तरह से हमारा नया जन्म कभी नहीं हो सकता! शराब और धुम्रपान से दूर रहकर हमारा नया जन्म कभी नहीं हो सकता है, चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों। जैसा कि यीशु कहते हैं- परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए हमें “पानी और आत्मा से नया जन्म लेना है”। और नया जन्म पाने के लिए परमेश्वर की एक ही शर्त है, पानी और आत्मा पर विश्वास।
यदि एक मनुष्य जिसका पानी और आत्मा से अब तक नया जन्म नहीं हुआ है। उसके धार्मिकता के सारे कार्य यीशु के सामने बेकार हैं। उनका भेंट चढ़ाने, दान देने या गहरी धार्मिक आस्था से कभी नया जन्म नहीं हो सकता। एक व्यक्ति सोचता है कि किसने नया जन्म पाया केवल परमेश्वर ही जानते हैं, वह कभी नहीं जान सकता कि उसका नया जन्म हुआ है या नहीं।
इस तरह से सोचना आसान है, परंतु नया जन्म पाए हुए मेज के नीचे छुप नहीं सकते हैं। इसे वह अपने में अवश्य जानेंगे और दूसरे लोग भी इसको महसूस करेंगे।
हम सांसारिक रूप से इसे अनुभव नहीं कर सकते, परंतु हम इसे निस्संदेह आत्मिक रूप से ज्यादा अच्छे से अनुभव कर सकते हैं। जिसका वास्तव में नया जन्म हुआ है उन विश्वासियों का परमेश्वर के वचन, पानी, लहू और आत्मा के वचनों से नया जन्म हुआ है। जिन्होंने नया जन्म नहीं लिया है वे इसे नहीं समझते हैं, यह ठीक वैसा है जैसे नीकुदेमुस नहीं समझ सका।
इसलिए हमें वचन की सच्चाई को सुनना है, छुटकारा यीशु के बपतिस्मा और लहू से है। जैसे हम परमेश्वर के वचन को सुनते और सीखते हैं, हम उसके अंदर सच्चाई को पाते हैं। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम अपने मनों को खोलें और ध्यानपूर्वक सुनें।
‘हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती है और किधर जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है’ (यूहन्ना २:८)।
जब एक व्यक्ति जिसका नया जन्म नहीं हुआ है इस आयत को पढ़ता है, तो वह सोचता है : “आह! यीशु कहते हैं कि वह नहीं जानता है कि कब मैंने नया जन्म पाया है। कोई भी नहीं जानता है”। और यह विचार उसे तसल्ली देता है, परंतु यह सही नहीं है। हम नहीं जानते हवा कहाँ से आती है और कहाँ चली जाती है, परंतु परमेश्वर सब कुछ जानता है।
नया जन्म पाया व्यक्ति भी, यहाँ तक कुछ लोग जो आरंभ में इस सच्चाई को नहीं समझ पाते हैं। यह समझ योग्य है। परंतु एक ऐसे व्यक्ति के हृदय में, यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा छुटकारे का यही सुसमाचार है। 
यही नया जन्म पाए हुए की गवाही है। वही जो सुसमाचार सुनता और समझता है : “ओह, तब मैं पाप से मुक्त हूँ। तब, मेरा नया जन्म होता है और मैं बच जाता हूँ”। जब वह विश्वास करता है और पानी और आत्मा के सुसमाचार को अपने हृदय में ग्रहण करता है, वह धर्मी और परमेश्वर की संतान बन जाता है। 
कुछ लोग अक्सर पूछते हैं, “क्या आपका नया जन्म हुआ है?” और वे उत्तर देते हैं, “अभी नहीं”। तब क्या आपने उद्धार पाया है? हाँ, मैं विश्वास करता हूँ। परंतु यह एक विरोधाभासी वाक्य है, क्या वह ऐसा नहीं कहता है? वह ऐसा इसलिए सोचता है कि जब एक व्यक्ति का नया जन्म होता है, तो उसके शरीर में भी परिवर्तन होता है।
जो लोग मानते हैं कि नया जन्म होना, हमारे जीवन स्तर में स्वाभाविक परिवर्तन होने जैसा है। परंतु सच्चाई यह है कि वे पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के सुसमाचार को नहीं समझते हैं।
यहाँ बहुत से लोग हैं जो नया जन्म होने के अर्थ को नहीं समझते हैं। यह एक दयनीय स्थिति है, ये केवल आम विश्वासी नहीं हैं, परंतु अधिकांश चर्च के अगुवे भी हैं जो इस भ्रम की स्थिति में चलते जा रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए जिन्होंने नया जन्म पाया हैं, उनका हृदय उनके लिए रोता है।
जब हम इस तरह सोचते हैं, तो क्या इस कारण से स्वर्ग में हमारे परमेश्वर यीशु को कितनी अधिक पीड़ा होती होगी? आइये यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू से नया जन्म पाने के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा हम सब का नया जन्म हो।
नया जन्म होने और बचा लिए जाने का मतलब एक सा है। कैसे, यहाँ बहुत से लोग हैं जो इस सच्चाई को नहीं जानते हैं। नया जन्म होने का अर्थ है कि एक व्यक्ति के हृदय के पापों को पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा धो दिया गया है। इसका मतलब, यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके बलिदान में विश्वास करने के द्वारा धर्मी होना है।
नया जन्म पाने से पहले लोग पापी होते हैं। परंतु नया जन्म पाने के बाद, वे पूर्णरूप से पाप रहित हो जाते हैं। नया जन्म पाया हुआ एक व्यक्ति नई सृष्टि के समान हो जाता है। वह उद्धार के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की एक संतान बन जाता है। नया जन्म पाने का अर्थ यीशु के बपतिस्मा के वस्त्र को पहनना, यीशु के साथ क्रूस पर मरना और उसके साथ पुनरुत्थित होना है। इसका मतलब, यीशु के बपतिस्मा और क्रूस के वचनों के द्वारा एक व्यक्ति का धर्मी ठहराया जाना है।
जब एक व्यक्ति माँ के गर्भ से जन्म लेता है, वह एक पापी होता है। परंतु जब वह पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के सच्चे सुसमाचार को सुनता है, तब वह नया जन्म लेता है और धर्मी बन जाता है।
बाह्य तौर पर उस व्यक्ति कोई बदलाव नहीं दीखता है, परंतु आंतरिक रूप से वह आत्मा में नया जन्म पाया हुआ होता है। यह है नया जन्म पाने का मतलब। परंतु यहाँ बहुत थोड़े हैं जो इस सच्चाई को जानते हैं, यहाँ तक दस हजार में से कोई एक व्यक्ति। क्या आप मेरे साथ सहमत हैं कि यहाँ बहुत थोड़े हैं जो नया जन्म पाने की सच्चाई को समझते हैं?
वे जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं और नया जन्म पाते हैं वे सामान्य मसीहियों और वास्तविक नया जन्म पाए हुओं में अंतर कर सकते हैं।
 
 
यह यीशु हैं जो हवा पर नियंत्रण रखते हैं
 
यह कौन जान सकता है कि कौन
बचाया गया है?
केवल नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति।

“हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती है और किधर जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है”। यीशु उनके बारे में कह रहे थे जिन्होंने नया जन्म नहीं पाया है। नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति नया जन्म पाने के बारे में जानता है। परंतु नीकुदेमुस नहीं जानता था। परमेश्वर जानते हैं किसका नया जन्म हुआ है, और जिसने नया जन्म पाया है, वह भी इसे जानता है।
कैसे, वह जिसने नया जन्म नहीं पाया है, वह नहीं समझ सकता है कि एक मनुष्य कैसे नया जन्म ले सकता है जैसे वह नहीं जानता कि हवा किधर से आती है और यह कहाँ चली जाती है।
क्या आप यह समझ सकते हैं? कौन हवा को बहाता है? परमेश्वर हवा को बहाते हैं। हवा को किसने बनाया है? परमेश्वर जो स्वर्ग में है। धरती पर मौसम को कौन नियंत्रित करता है, कौन पानी और वायु के चक्र को नियंत्रित करता है? और कौन सब जीवित प्राणियों को जीवन का श्वास प्रदान करता है? दूसरे शब्दों में, कौन है जिसने इस दुनिया में सब जीवधारियों को बनाया और उन्हें विकसित करता है? यह यीशु मसीह के अलावा कोई दूसरा नहीं था, और यीशु ही प्रभु है।
जब तक हम पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार को नहीं जानते हैं, हम नया जन्म नहीं ले सकते और न ही आत्मिक रूप से दूसरों को हम सिखा सकते हैं। इसलिए यीशु हम से कहते हैं कि जब तक कोई पानी और आत्मा से न जन्मे वह नया जन्म नहीं पा सकता। 
हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना होगा, यह सामर्थी सुसमाचार हमें नया जन्म देता है। वे जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन सब के मनों में पवित्र आत्मा प्रवेश करता और निवास करता है।
मनुष्यजाति के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया था और इन पापों के लिए क्रूस पर अपने लहू को बहाकर दाम चुका दिया है। उसने सब मनुष्य जाति के हृदय में नया जन्म पाने के उद्धार को स्थापित कर दिया है। जब हम इस सुसमाचार में विश्वास करते हैं, पवित्र आत्मा हमारे हृदय में प्रवेश करता है। यही नया जन्म पाने का उध्दार है। जब हम यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा सारे पापों के धुल जाने में विश्वास करते हैं तो वास्तव में नया जन्म लेते हैं।
उत्पत्ति १:२ में यह लिखा है, “पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी, और गहरे पानी के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्वर का आत्मा पानी के ऊपर मण्डराता था”। 
इसका मतलब है कि आत्मा पापी के हृदय में प्रवेश नहीं कर सकता है। जिसने नया जन्म नहीं पाया है वह संसार में है और यह संसार पाप के अंधकार से भरा हुआ है। इसलिए ऐसे व्यक्ति के हृदय में परमेश्वर का आत्मा रहे ये सम्भव नहीं है। 
परमेश्वर ने अपने सुसमाचार के प्रकाश को पापी के हृदय में आलोकित किया है। परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो” (उत्पत्ति १:३) तो उजियाला हो गया। केवल तभी से सब लोगों के हृदयों में परमेश्वर का आत्मा रहने लगा।
इसलिए, नया जन्म पाए हुए व्यक्ति के हृदय में जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करता है, परमेश्वर का आत्मा दिया जाता है। यही उसके “नया जन्म” पाने का मतलब है। वे अपने हृदय में नया जन्म लेते हैं क्योंकि उन्होंने पानी और आत्मा के उद्धार के वचनों को सुन लिया है और उस पर विश्वास करते हैं।
एक मनुष्य कैसे नया जन्म ले सकता है? यीशु इसे स्पष्ट करते हुए नीकुदेमुस फरीसी से कहता है, “यदि कोई पानी और आत्मा से न जन्मे तो परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता”। नीकुदेमुस ने कहा, “हम पानी और आत्मा से कैसे जन्म ले सकते हैं? क्या हमें फिर से माता के गर्भ में प्रवेश करना होगा, तब हमारा नया जन्म होगा?” स्पष्ट है : वह इसे अक्षरशः लेता है और उसे समझ न सका कि कैसे एक मनुष्य नया जन्म पा सकता है।
यीशु ने उससे कहा, “तुम एक गुरु हो, फिर भी तुम इसका अर्थ नहीं समझते?’ यीशु उससे कहते हैं कि जब तक कोई पानी और आत्मा द्वारा जन्म न ले वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता, न ही उसे देख सकता है। यीशु ने नीकुदेमुस से नया जन्म पाने की सच्चाई बताई।
यह सही है कि यहाँ पर बहुत से लोग हैं जो नया जन्म लिए बिना यीशु पर विश्वास करते हैं। अधिकांश मसीही नीकुदेमुस जैसे ही हैं जिनका अभी वास्तव में नया जन्म नहीं हुआ है।
इस्राएल में उन दिनों नीकुदेमुस एक धार्मिक गुरु था, ठीक उसी तरह जैसे आज के चर्च में अगुवे होते हैं। आज के परिवेश में वह कांग्रेस के एक राज्य नेता के समकक्ष था। धार्मिक मापदण्ड के द्वारा वह एक शिक्षक, इब्रानियों का एक गुरु, यहूदियों का एक धार्मिक अगुवा था। वह एक पारंगत विद्वान भी था।
उन दिनों इस्राएल देश में जैसे कि आज यहाँ पर उसकी तुलना में उसके बराबर कोई भी संस्था नहीं थी। इसलिए सब लोग “बुद्धिजीवी व्यक्तियों” के अधीन शिक्षा प्राप्त करने सभागृह या मंदिर में जाते थे। जैसा कि आज भी है, उनके बीच में बहुत से झूठे शिक्षक भी थे। और वे स्वयं नया जन्म पाए बिना लोगों को शिक्षा देते थे।
आज भी यहाँ पर बहुत से धार्मिक अगुवे, चर्च के पदाधिकारी, शिक्षक, प्रचारक, प्राचीन और डीकन हैं, जिनका नया जन्म नहीं हुआ है। नीकुदेमुस जैसे वे नया जन्म पाने की सच्चाई को नहीं जानते हैं। बहुत से लोग सोचते भी हैं कि हमें नया जन्म पाने के लिए अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करना होगा। वे जानते हैं कि उनका नया जन्म होगा, परंतु कैसे होगा वे नहीं जानते।
यह उनकी अज्ञानता के कारण है, जैसे एक अंधा मनुष्य हाथी को अपने हाथों के स्पर्श से जानने की कोशिश करता है। उसके निर्देश उसकी स्वयं की व्यक्तिगत भावनाओं और अनुभवों पर आधारित होते हैं। वे चर्च में सांसारिक मूल्यों का प्रचार करते हैं। इसके बावजूद, बहुत से लोगों को नया जन्म पाने से रोक देते हैं।
भले कार्यों को करने से नया जन्म नहीं होता है। हमारा नया जन्म पानी, लहू और आत्मा के वचनों में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर हमें देता है। यह परमेश्वर का सुसमाचार है जो हमें एक पापी से बदलकर धर्मी बनाता है।
यीशु ने यह कहा, “जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं और तुम विश्वास नहीं करते, तो यदि मैं स्वर्ग की बातें कहूँ तो फिर कैसे विश्वास करोगे?’” (यूहन्ना ३:१२) और वास्तव में लोगों ने विश्वास नहीं किया जब यीशु ने उनसे सच्चाई कही कि उसने हमारे सारे पापों का प्रायश्चित्त अपने बपतिस्मा के द्वारा पूरा कर दिया था। उन्होंने क्या विश्वास नहीं किया? वे विश्वास नहीं करते कि उनका छुटकारा यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके मृत्यु के द्वारा मुमकिन हुआ। इसका यह मतलब है जब उसने कहा की जब मैं “स्वर्ग की बाते” करता हूँ तब लोग विश्वास नहीं करते।
हमारे सारे पापों को धोने के लिए यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मारे गए और तब मुर्दों में से जी उठने के द्वारा पापियों के लिए नया जन्म पाने का मार्ग तैयार कर दिया है।
इसलिए यीशु पुराने नियम के उद्धरण द्वारा नीकुदेमुस को समझाते हैं, “कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है। और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए; ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना ३:१३-१५)। जैसे मूसा ने जंगल में सर्प को ऊंचा उठाया, उसी प्रकार मानव-पुत्र का ऊंचा उठाया जाना अनिवार्य है। जो कोई उस पर विश्वास करेगा वह अनन्त जीवन प्राप्त करेगा।
यीशु के कहने का क्या तात्पर्य है जब उसने कहा की, “जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए” (यूहन्ना ३:१४)। वह इस वाक्यांश को पुराने नियम से उद्धरण देकर समझाता है कि कैसे उसके बपतिस्मा और लहू के द्वारा मानवजाति के सारे पापों का प्रायश्चित्त हुआ है।
यीशु के क्रूस पर मारे जाने, उनके ऊंचे पर चढ़ाए जाने के लिए, पहले उसने जगत के पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया। क्योंकि यीशु पापरहित थे उसे क्रूस पर चढ़ाया नहीं जा सकता था। उसको क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा उनका बपतिस्मा हुआ और इस प्रकार दुनिया के सारे पापों को उन्होंने अपने ऊपर ले लिया।
केवल हमारे पापों को अपने ऊपर लेने के द्वारा और अपने लहू से उनका मूल्य चुकाने के लिए उसने सारे पापियों को शाप से बचा लिया। यीशु ने पानी और आत्मा से नया जन्म पाने का छुटकारा हमें दे दिया है।
इसलिए वे जो यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते हैं वाही उसके बपतिस्मा के वस्त्र को पहनते हैं, उसके साथ मरते हैं और वे उसके साथ नया जन्म लेते हैं। बाद में नीकुदेमुस को यह समझ में आया।
 
 
जैसे साँप को ऊँचे पर चढ़ाया
 
क्यों यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था?
क्योंकि उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा 
सारे पापों को उठा लिया था।

क्या आप यह कहानी जानते हैं कि कैसे मूसा ने जंगल में पीतल के साँप को लटकाया था? यह कहानी गिनती अध्याय २१ में लिखी है। यह बताती है कि मिस्र देश से निकलने के बाद इस्राएलियों के प्राण अधीर हो गए, इस कारण से वे परमेश्वर और मूसा के विरूद्ध बोलने लगे।
इस कारण, परमेश्वर ने लोगों के मध्य विषैले सर्प भेजे, जो उनके तम्बूओं में घुस गये और उनको डसने लगे। डसे जाने के बाद उनके शरीर फूलना शुरू हुए और बहुत से इस्राएली मर गए।
जब लोग मरने लगे, तब उनके अगुवे मूसा ने परमेश्वर से प्रार्थना की, “प्रभु! कृपया हमें बचाइये”। परमेश्वर ने मूसा से कहा, पीतल का एक सर्प बना और उसको एक खंभे पर लटका। उसने उनसे कहा कि जो कोई उस खंभे कि ओर देखेगा वह जीवित रहेगा। मूसा ने जैसे प्रभु ने कहा वैसा ही किया और इस्राएलियों को परमेश्वर का वचन कह सुनाया।
जो कोई उसके वचनों पर विश्वास करते और पीतल के सर्प की ओर देखते, वे चंगे होते थे। ठीक इसी प्रकार से हम भी शैतान के जहरीले डंक से चंगे हुए हैं। इस्राएली लोगों ने मूसा की बात सुनी और खंभे पर लटके सर्प की ओर देखा और इस प्रकार वे चंगे हो गए थे।
खंभे के सर्प का प्रकाशन यह था कि यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु के द्वारा सारे मनुष्य जाति के पापों के शाप को यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु के द्वारा उस पर डाल दिया गया। उसने दुनिया के सारे पापियों के पाप का दण्ड चुकाने के लिए उन्हें स्वयं अपने ऊपर ले लिया। इस प्रकार, उसने हमारे सारे पापों के दण्ड का अन्त कर दिया।
यीशु मसीह इस संसार में सारे लोगों को बचाने के लिए आए, वे जो “साँप के जहर” जैसी शैतान की परीक्षाओं से मरने वाले थे। हमारे सारे पापों का भुगतान करने के लिए, उसने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मारा गया। जी उठने के पूर्व जो उस पर विश्वास करते हैं, वे बचा लिए गए।
जैसा कि पुराना नियम में केवल वही इस्राएली बच पाए थे, जिन्होंने उस खंभे पर लटके सर्प को देखा था। आज वे सब जो यीशु में विश्वास करते हैं उन्हें विश्वास है कि उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे पापों का मूल्य चुका दिया, वह बच जाता है और नया जन्म पा सकता है।
यीशु ने यरदन नदी में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा क्रूस पर उसकी मृत्यु और मृतकों में से जी उठने के द्वारा दुनिया के सारे पापों के लिए पूरा दाम चुका दिया है। अब जो कोई उस पर विश्वास करता है वह उसके अनुग्रह के द्वारा उद्धार की आशीष प्राप्त कर सकता है।
“कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा” (यूहन्ना ३:१३)। हमारे पापों के दण्ड के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर अपना लहू बहा दिया और हमारे लिए स्वर्ग का द्वार खोल दिया है। यूहन्ना १४:६ में यीशु ने कहा, “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता”।
क्योंकि हमारे लिए स्वर्ग का द्वार खोलने को यीशु ने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर चढ़ाया गया था। वे सब जो उसके द्वारा उद्धार में विश्वास करते हैं बच जाते हैं। यीशु ने हमारे पापों का मूल्य चुका दिया है, इसलिए जो भी उसके पानी, लहू और आत्मा की सच्चाई में विश्वास करते हैं, वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं।
यीशु ने हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार से बचा लिया है। नया जन्म लेना यीशु के बपतिस्मे और उसके लहू में विश्वास करने से आता है और इस सच्चाई से कि वह परमेश्वर है।
“जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए” (यूहन्ना ३:१४)। इस वाक्यांश का क्या अर्थ है? क्यों यीशु क्रूस पर चढ़ाए गये? क्या उन्होंने हमारी भांति पाप किए थे? क्या वह हमारी भांति कमजोर थे? क्या वह हमारी भांति ही अपूर्ण थे जैसे हम हैं? नहीं! वैसे नहीं थे। 
तब क्यों उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया? यह हमें बचाने के लिए और हमारे सारे पापों के दण्ड के लिए था। हमारे सारे पापों से हम सब को बचाने के लिए उन्होंने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर चढ़ाए गये।
यह पानी और आत्मा से नया पाने के उद्धार की सच्चाई है। यीशु उन सबको नया जीवन देते हैं जो उसके बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु में विश्वास करते हैं जो हमारे पापों के दण्ड के लिए था।
 
 
‘पानी’ और ‘आत्मा’ का मतलब
 
पानी और आत्मा का क्या मतलब है?
पानी का मतलब है यीशु का बपतिस्मा और
आत्मा का मतलब है की वह परमेश्वर है।

बाइबल हमें बताती है कि जब हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करते हैं, तो हम नया जन्म पाते हैं। नया जन्म पाने से हम परमेश्वर की संतान बनते है, यह परमेश्वर के लिखे वचनों में मिलता है। पानी, लहू और आत्मा का सुसमाचार जो हमारे पापों की पूर्ति है।
बाइबल के अनुसार, “पानी का मतलब यीशु का बपतिस्मा है” (१ पतरस ३:२१)। और आत्मा का मतलब है कि यीशु परमेश्वर है। और यह नया जन्म पाबे की सच्चाई है कि यीशु मानव शरीर में इस दुनिया में आए और उन्होंने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे पापों के लिए मूल्य चुकाया।
उन्होंने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा पाप की मजदूरी को चुका दिया। बपतिस्मा लेने और क्रूस पर लहू बहाने के द्वारा, उन सब को जो उस पर विश्वास करते हैं, बचा लिया।
हमें जानना चाहिए कि यीशु का बपतिस्मा और लहू हमारे छुटकारे का प्रतिनिधित्व करता है जिस ने पापों से हमें बचा लिया है। केवल वे ही स्वर्ग राज्य को देख सकते और प्रवेश कर सकते हैं जिन्होंने ‘पानी और आत्मा’ से नया जन्म लिया हो। यीशु ने अपने बपतिस्मा, लहू और आत्मा से हमें बचा लिया है। क्या आप इसमें विश्वास करते हैं?
यीशु स्वर्ग का महायाजक है। वह इस दुनिया के पापों का मूल्य चुकाने इस दुनिया में आए। उसने बपतिस्मा लिया, क्रूस पर अपना लहू बहाया और पुनरुत्थित हुए। इस प्रकार वे सब जो यीशु में विश्वास करते हैं वह उनका उद्धारकर्ता है।
यूहन्ना १०:७ में यीशु ने कहा, “भेड़ों का द्वार मैं हूँ”। यीशु स्वर्ग के द्वार पर खड़े हैं। कौन हमारे लिए द्वार खोलेगा? वह यीशु मसीह है।
वह उनके लिए अपना मुंह फेर लेगा जो उसके छुटकारे की सच्चाई को बिना जाने उस पर विश्वास करते हैं। वह उन्हें अनुमति नहीं देता जो उसके बपतिस्मा, लहू और आत्मा से नया जन्म पाने में विश्वास नहीं करते हैं। वह उन लोगों से अपना मुंह फेर लेगा जो उसके लिखे वचनों पर विश्वास नहीं करते हैं। जो उसकी पवित्रता को मानने से अस्वीकार करते हैं और जो उसे परमेश्वर के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं।
लिखित सच्चाई यह है कि वह इस दुनिया में शरीर में आया, बपतिस्मा लिया और दुनिया के सारे पापों के लिए क्रूस पर मारा गया। हमारे अधर्मों के बदले उसने क्रूस पर दण्ड पाया, क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद तीसरे दिन जी उठा। जो कोई इस सच्चाई में विश्वास करने से इनकार करते हैं, उसके द्वारा बाहर फेंक दिए जाएंगे और नाश हो जाएंगे। जैसा कि यह लिखा गया है, “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है”।
वे किसी भी तरह, जो उसके बपतिस्मा और लहू के द्वारा छुटकारे की आशीष में विश्वास करते हैं, वे अपने हृदय में पवित्र बन जाते हैं, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करते हैं। नया जन्म पाने का सच्चा सुसमाचार यही है जो पानी, लहू और आत्मा के द्वारा हमारे पास आया। पानी और आत्मा से नया जन्म पाना ही स्वर्ग का सुसमाचार है। केवल वे जो यीशु के बपतिस्मा और लहू में विश्वास करते हैं, नया जन्म ले सकते हैं। वे जो पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, पाप रहित हैं। ये वे हैं जिन्होंने वास्तविक नया जन्म पाया है। 
आज, नीकुदेमुस के जैसे जो सत्य से अपरिचित था, अधिकांश लोग सच्चे सुसमाचार को जाने बिना यीशु पर विश्वास करते हैं। नीकुदेमुस अपने समुदाय का प्रतिष्ठित व्यक्ति था! इसके अलावा उसने यीशु से सच्चा सुसमाचार सुना, और बाद में जब यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया गया, वह उनमें से एक था जिसने यीशु की देह को दफ़न किया। उसी समय से नीकुदेमुस उस पर पूर्ण रूप से विश्वास करने लगा। 
आज भी यहाँ हम में से बहुत से हैं जो यीशु के पानी और आत्मा की सच्चाई के बारे में नहीं जानते हैं। इसके अलावा यहाँ पर बहुत से ऐसे लोग हैं जो सच्चाई नहीं स्वीकार करते हैं जबकि उनके पास सच्चा सुसमाचार सुनने का अवसर है। यह एक दुःख की बात है।
यीशु ने हम सबके लिए नया जन्म पाने को संभव बनाया है। क्या हमारा नया जन्म हुआ है? पानी, लहू और आत्मा से। यीशु ने हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया जब उसने पानी में बपतिस्मा लिया था। वह क्रूस पर मारा गया और उसके बाद मृतकों में से जी उठा। 
और वह हम सबको जो यीशु में विश्वास करते हैं, नया जन्म पाने की आशीष में विश्वास करते हैं, नया जन्म देता है। यीशु उनका उद्धारकर्ता है जो उसमें विश्वास करते हैं, उन्हें नया जन्म पाने की अनुमति देता है। प्रार्थना कीजिए कि आप हमेशा यीशु के साथ होंगे, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी की सृष्टि की और दोनों के बीच की सब वस्तुओं को बनाया है।
यूहन्ना ३:१६ कहता है, “जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परंतु अनन्त जीवन पाए”। यीशु में विश्वास करने के द्वारा हम अनंतकाल का जीवन प्राप्त करते हैं। पानी और आत्मा में विश्वास करने के द्वारा हम नया जन्म लेते हैं। यह सच्चाई है कि यदि हम उद्धार के सुसमाचार, यीशु के बपतिस्मा और लहू में और यीशु ही उद्धारकर्ता और परमेश्वर हैं, विश्वास करते हैं, तो हम बच सकते हैं।
परंतु यदि हम इस सच्चाई में विश्वास नहीं करते हैं, तो हमें अनंतकाल के लिए नरक में डाल दिया जाएगा। इसलिए यीशु नीकुदेमुस से कहते हैं, “जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं और तुम विश्वास नहीं करते, तो यदि मैं स्वर्ग की बातें कहूँ तो फिर कैसे विश्वास करोगे?”
परमेश्वर ने हमारे लिए क्या किया है? यीशु के द्वारा छुटकारा और हमें नया जन्म पाने की अनुमति दी है। यीशु हमें संसार की बुराइयों और पापों से बचाता है। इस संसार के पापियों को पाप के दण्ड से बचाने के लिए उसने हमारे पापों को अपने बपतिस्मा के द्वारा अपने ऊपर ले लिया, क्रूस पर चढ़ाया गया और उसके बाद मृतकों में से जी उठा।
यह हमारी पसंद है कि हम इस उद्धार में विश्वास करें या न करें। नया जन्म पाने का उद्धार, यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा उद्धार में विश्वास करने से आता है।
यह कहा गया हैं कि परमेश्वर हम पर दो प्रकार से आशीष प्रदान करते हैं। एक सामान्य आशीष है, जिसमें प्रकृति की सब चीजें शामिल हैं, सूर्य और वायु भी। इसे हम सामान्य आशीष के रूप में जानते हैं क्योंकि यह सब मनुष्यों को दिया गया है, चाहे वे पापी हों या धर्मी।
तब, यह विशेष आशीष क्या है? पानी और आत्मा से नया जन्म पाना ही विशेष आशीष है, जो सब पापियों को उनके पापों की मृत्यु से बचाती है।
 
 
विशेष आशीष
 
विशेष आशीष क्या है?
यीशु के बपतिस्मा, क्रूस पर चाढाए जाना, और उसके 
पुनरुत्थान के द्वारा नया जन्म पाना।

यूहन्ना ३:१६ में लिखा है, “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करेगा वह नष्ट न हो, परंतु अनन्त जीवन पाए”। यह परमेश्वर की विशेष आशीष को दर्शाता है: यीशु एक मनुष्य के शरीर में इस संसार में आए और उन्होंने हमारे लिए बपतिस्मा लेने और क्रूस पर चढ़ाए जाने के द्वारा हमारे सारे पापों को धो दिया। यही परमेश्वर की विशेष आशीष है। यह सच्चाई है कि हम सारे पापों से बचा लिए गए हैं।
यह एक सच्चाई है कि यीशु ने हमें बचाया और पापी से बदल कर धर्मी बना दिया है। इस सच्चाई में विश्वास करने के द्वारा आपके पास परमेश्वर की विशेष आशीष हो सकती है। क्या आप सब विश्वास करते हैं?
आपका विश्वास करना सब व्यर्थ हो जाएगा, यदि आपने परमेश्वर की इस विशेष आशीष को ठुकरा दिया है। आप अपने जीवन भर कितना भी निष्ठापूर्वक रहे हों, चाहे कुछ भी किया हो सब व्यर्थ हो जाएगा।
मैं हमेशा प्रचार करता हूँ और कभी भी यह प्रचार करना नहीं भूलता कि यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस में विश्वास करना ही नया जन्म पाने का एक मात्र मार्ग है। बाइबल की अन्य पुस्तकें प्रकट करती हैं कि यीशु के द्वारा नया जन्म पाने की आशीष ही ‘परमेश्वर की विशेष आशीष है’ जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं। यह स्पष्ट करना कि यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस पर चढ़ाये जाने की अपेक्षा परमेश्वर की आशीष अच्छी है। ऐसा यहाँ पर कुछ भी नहीं है।
यीशु का बपतिस्मा और उसका क्रूस पर चढ़ाया जाना ही परमेश्वर की विशेष आशीष है। इस संसार में झूठे प्रचारक इसके बारे में कुछ भी नहीं कहते हैं। ये झूठे प्रचारक ज्योति के दूत के वेश में आते हैं, वे मसीहियत और मानवता की नैतिकता से सुसज्जित रहते हैं। हाँ, यही सही है। जो आश्चर्यकर्म वे करते हैं, बीमार लोगों को चंगा करना, ये सब दुष्टता है। परंतु परमेश्वर की विशेष आशीष से उनका कोई लेना देना नहीं है।
यही परमेश्वर की विशेष आशीष है जो हम पापियों को प्रायश्चित्त का सुसमाचार देती है। उसकी विशेष आशीष के साथ परमेश्वर हमें नया जन्म पाने की आज्ञा देता है। अपने बपतिस्मा, लहू, मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा वह हमें नया बनाता है। वह हमें अपनी संतान बनाता है, पाप से मुक्त करता है।
क्या आप इसमें विश्वास करते हैं? जी हाँ! क्या आपने सचमुच आशीष पायी है? जी हाँ। यीशु का बपतिस्मा और लहू, मृत्यु और पुनरुत्थान की यह आशीष परमेश्वर ने हमें दी है। यह विशेष आशीष परमेश्वर ने हमें पानी और आत्मा के द्वारा दी है। यही विशेष आशीष का सुसमाचार है। प्रभु की स्तुति हो अपनी विशेष आशीष से हमें बचाने के लिए।
यह एक दुःख की बात है कि बहुत से निष्ठावान मसीही आज परमेश्वर की विशेष आशीष के प्रति सजग नहीं हैं, बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार के प्रति, पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के प्रति, वे बिना सोचे समझे अपने स्वयं के धर्मविज्ञान और धार्मिक नैतिकता में चल कर मार्ग खोजने की कोशिश करते हैं। वे कैसे इस बात से अनजान हैं!
मसीहियत हमारे साथ काफी समय से है। सुधार हुआ उसे तक़रीबन पांचसो साल हो चुके है। परंतु अब भी कोरिया में बहुत से लोग और शेष पूरी दुनिया में ऐसे लोग हैं जो नया जन्म पाने की सच्चाई और परमेश्वर की विशेष आशीष के बारे में अभी भी अनजान हैं।
परंतु मुझे आशा और विश्वास है कि वे अब इस सच्चाई को जानेंगे क्योंकि हम दुनिया के अंत होने के समय से नजदीक हैं।
पापियों का नया जन्म होगा और वे पानी और आत्मा की सच्चाई को ग्रहण करने के अनुसार धर्मी बनकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे। बहुत से मसीही नया जन्म पाने के लिए कठिन प्रयास करते हैं।
इसलिए, यदि वे नया जन्म पाने के सही अर्थ को जाने बिना कोशिश करते हैं तो उनका विश्वास करना बेकार है। उनका नया जन्म हो गया है, परंतु उनके पास नया जन्म पाने की सच्चाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 
वे ऐसा मान लेते हैं कि उन्होंने निष्ठापूर्वक विश्वास किया है और अपने हृदय में आग का अनुभव किया है, तो वे नया जन्म पा सकते हैं। परंतु व्यक्तिगत विचारों या उत्साही धार्मिक कर्मकाण्ड के आधार पर नया जन्म पाने की कोशिश करना केवल गलत विश्वास की ओर ले जा सकता है।
 
 
परमेश्वर का वचन जो हमें सच्चा नया जन्म पाने की ओर ले जाता है।
 
विश्वास और धर्म के बीच में क्या अंतर है?
विश्वास का मतलब है कि यीशु ने हमें बचाने के लिए जो 
किया उसपर भरोषा करना, जब की धर्म व्यक्ति के 
अपने विचारों और कार्यों पर भरोसा करना है।

१ यूहन्ना ५:४-८ में यह स्पष्ट लिखा है कि हम केवल पानी, आत्मा और लहू में विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पा सकते हैं। यदि हम नया जन्म लेते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि हम केवल परमेश्वर के लिए सच्चाई के वचन के द्वारा नया जन्म ले सकते हैं। हमें जानना चाहिए कि दर्शन, अन्य भाषा बोलना या भावनात्मक अनुभव कभी भी हमें नया जन्म पाने की तरफ नहीं ले जा सकते।
यूहन्ना के अध्याय ३ में यीशु कहते हैं कि जब तक कोई मनुष्य पानी और आत्मा द्वारा जन्म न ले, वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। यदि कोई नया जन्म पाना चाहता है, तो उसे यीशु में दो बार विश्वास करना पडेगा। पहला, एक धार्मिक प्रवृत्ति के कारण यीशु में विश्वास करना है, वह अपने पापों को व्यवस्था के द्वारा स्वीकार करता है। यह परमेश्वर की व्यवस्था के द्वारा है और वास्तव में वह एक बहुत बुरा पापी है, यह सिद्ध होता है।
हमारा विश्वास यीशु में दुनिया के अनेक धर्मों के अनुसार नहीं है। मसीहियत कोई दूसरे धर्म की तरह नहीं है। यह केवल विश्वास के द्वारा अनन्त जीवन पाने का एकमात्र मार्ग है।
जो कोई यीशु में धर्म के समान विश्वास करता है, वह अंत में खाली हाथ रहेगा। वह पाप से भरे एक हृदय के साथ संसार और खालीपन में छोड़ दिया जाएगा। क्या यह सत्य नहीं है? आप बाइबल में एक पाखण्डी फरीसी के जैसा अंत नहीं चाहेंगे।
प्रत्येक व्यक्ति एक नया जन्म पाया हुआ मसीही बनना चाहता है। हालाँकि, जब कोई मसीहियत को एक धर्म के रूप में विश्वास करता है, अंत में वह पाप से भरा एक पाखण्डी हो जाता है। हमें नया जन्म पाने की सच्चाई को समझना चाहिए।
जो कोई भी बिना नया जन्म पाए मसीहियत में एक धर्म के रूप में विश्वास करता है, निश्चय ही अंत में उसके हृदय में भ्रम और खालीपन होगा। एक व्यक्ति जो यीशु पर विश्वास करता है, परंतु नया जन्म नहीं लिया है तो उसका विश्वास गलत है। इसलिए वह अंत में एक मूर्ख जैसा है। वह लोगों के सामने पवित्रता में आने के लिए कठिन प्रयास करता है, परंतु वह बुरी तरह से असफल रहता है।
जैसे-जैसे आप मसीहियत में एक धर्म के रूप में विश्वास करेंगे, आप हमेशा पापी ही बने रहेंगे। एक पाखण्डी और अपने जीवन के सब दिन पापों के लिए विलाप करते रहेंगे। यदि आप अपने पापों से मुक्त होना चाहते हैं, तो आपको पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार की लिखी सच्चाई में विश्वास करना होगा।
 
 
यीशु के बपतिस्मा द्वारा छुटकारे के भेदों का पता लगाना
 
हमें नया जन्म कौन देता है?
यीशु का बपतिस्मा, क्रूस पर उनकी मृत्यु और
उसका पुनरुत्थान

बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर के वचन के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति का नया जन्म हो सकता है, जो कभी नहीं बदल सकता। अब हम प्रेरित पतरस के वचनों को १ पतरस ३:२१ में देखें। “यह पानी उस बपतिस्मा का प्रतीक है जिससे अब तुम्हारा उद्धार होता है”।
बाइबल में यह उल्लेख है कि यीशु का बपतिस्मा पूर्व संकेत है जो अब हमें बचाता है। सब जो यीशु में विश्वास करते हैं यह जानते हैं, यहाँ हमारे अपने बपतिस्मा के बारे में नहीं, परंतु यीशु के बपतिस्मा के बारे में लिखा है। यीशु का बपतिस्मा हम पापियों को नई जिंदगी देता है। विश्वास कीजिए और आपका नया जन्म होगा और उद्धार की आशीष प्राप्त कीजिए।
समझने के लिए कि उद्धार यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा प्राप्त होता है। हम पाप से धर्मी होकर और अनन्त जीवन प्राप्त करके बच सकते हैं। दूसरे शब्दों में, जब हम परमेश्वर के वचन के द्वारा उद्धार की सच्चाई में विश्वास करते हैं, तो हमारे पाप हमेशा के लिए धो दिए जाएंगे।
नया जन्म लेना दूसरी बार जन्म लेना है। हम में से अधिकांश लोग यीशु पर एक धर्म के रूप में विश्वास करते हैं और जब हम इस सच्चाई को मानते हैं, उसके बाद विश्वास के द्वारा हमारा नया जन्म होता है। यीशु के नाम का मतलब है “क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा” (मत्ती १:२१)।
जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं और पूर्ण रूप से जानते हैं कि उसने मनुष्य जाति के लिए क्या किया है, तो हम अपने पापों से मुक्त हो जाते हैं और बिलकुल नये इंसान के जैसा हमारा नया जन्म होता है। पहले हम यीशु में एक धर्म के जैसा विश्वास करते थे। उसके बाद जब हमने यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार को सुना और विश्वास किया तो हमारा नया जन्म हुआ।
वह सच्चाई क्या है जो हमें नया जन्म देती है? पहला यह यीशु का बपतिस्मा है, उसके बाद उसका लहू जो क्रूस पर बहाया गया और अंत में उसका मृतकों में से जी उठना है। नया जन्म पाने का अर्थ यीशु में परमेश्वर और उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करना है। आइये, हम देखें कि कैसे पुराने नियम के लोगों का नया जन्म हुआ था।
 
 
पुराने नियम में पाप का दण्ड: हाथ रखना और लहू का चढ़ाना
 
पुराने नियम में नया जन्म पाने के सुसमाचार का क्या अर्थ है? पहले हम लैव्यव्यवस्था पहला अध्याय पढ़ें और देखें कि नया जन्म पाने के बारे में यह क्या कहता है।
लैव्यव्यवस्था १:१-५ पद “यहोवा ने मूसा को बुलाकर मिलापवाले तम्बू में से उससे कहा, ‘इस्राएलियों से कह कि तुम में से यदि कोई मनुष्य यहोवा के लिये पशु का चढ़ावा चढ़ाए, तो उसका बलिपशु गाय-बैलों अथवा भेड़-बकरियों में से एक का हो।’ ‘यदि वह गाय-बैलों में से होम बलि करे, तो निर्दोष नर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर चढ़ाए कि यहोवा उसे ग्रहण करे’। वह अपना हाथ होमबलि पशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिये प्रायश्चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा। तब वह उस बछड़े को यहोवा के सामने बलि करे; और हारून के पुत्र जो याजक हैं, वे लहू को समीप ले जाकर उस वेदी के चारों ओर छिड़कें जो मिलापवाले तम्बू के द्वार पर है”।
परमेश्वर हमें लैव्यव्यवस्था में कहता है कि कैसे इस्राएली लोग बलि प्रथा के माध्यम से एक हो जाते थे। इस सच्चाई को हम सब जानते और समझते हैं। इसलिए हम इन शब्दों पर पुर्नविचार करें।
परमेश्वर ने मूसा को बुलाया और उससे मिलापवाले तम्बू में बातें की। यह इस्राएलियों के पापों के लिए प्रायश्चित्त के बारे में थी। जब इस्राएली लोग परमेश्वर की व्यवस्था का उल्लंघन कर पाप करते थे, तो वे परमेश्वर के लिए निष्कलंक जीवित पशु की बलि चढ़ाते थे।
और इस पशु बलि के लिए परमेश्वर का विशेष आदेश था कि उसे दोषरहित होना चाहिए, और यह भी कि चढ़ावा परमेश्वर द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार हो। बलि का प्रारूप निम्न प्रकार से था :
पुराने नियम में कोई पाप करता था, तो वह परमेश्वर के सम्मुख पापों की क्षमा के लिए बलि चढ़ाता था। पहला, वह बलि दोषरहित हो और वह बलि के सिर पर अपना हाथ रखे जिसमें उसका पाप बलि पशु के सिर पर चला जाता था।
इसके बाद उस पशु को बलि चढ़ाया जाता था, फिर उसके लहू को वेदी के सींगों पर छिड़क दिया जाता था और शेष लहू को वेदी के चारों ओर जमीन पर छिड़क देता था। इस विधि को पवित्र मिलापवाले तम्बू में किया जाता था जिसे परमेश्वर ने अपने लोगों को पाप से मुक्ति की आशीष के रूप में दिया था।
परमेश्वर द्वारा अपनी व्यवस्था और आज्ञा में ६१३ धाराएं दी गई हैं, जिसमे बताया गया है की उनको “क्या करना चाहिए” और “क्या नहीं करना चाहिए”। परमेश्वर ने व्यवस्था और आज्ञाएं इस्राएली लोगों को सौंपी थी। इसलिए लोग जानते थे कि परमेश्वर की यह व्यवस्था व आज्ञाएं सही थीं, परन्तु वे उसके अनुसार जीवन नहीं जी सकते थे क्योंकि प्रत्येक मनुष्य बारह प्रकार के पापों के साथ आदम के स्वभाव में जन्मा है। 
इसलिए वे परमेश्वर के सम्मुख सही जीवन जीने की योग्यता खो चुके थे। इस्राएली लोग धर्मी होने की योग्यता खो चुके थे। बजाय इसके कि वे कुछ नहीं कर सकते और पाप से बचने की कठोर कोशिश छोड़ देते, परंतु वे पाप करते रहे। यह मानव जाति की नियति है कि वह एक पापी की भांति मर जाता है।
परंतु परमेश्वर ने अपनी अनंत दया से लोगों को बलि प्रथा को दिया जिसके द्वारा वे अपने पापों के लिए प्रायश्चित्त कर सकें। उसने पवित्र मिलापवाले तम्बू की विधि को दिया। इसलिए कि इस्राएल की प्रजा और दुनिया के सारे लोगों को उनके सारे पापों से बचा लिया जाये। उसने सारी मानव जाति के लिए अपने धार्मिक प्रेम को बलि प्रथा के द्वारा प्रकट कर दिया है। उसने इस दुनिया को उद्धार का मार्ग दिखा दिया है।
परमेश्वर ने लोगों को बलि प्रथा को दिया और लेवी घराने का बलि चढ़ाने हेतु अभिषेक किया। इस्राएल के बारह गोत्रों में केवल लेवी घराने को ही इस्राएल के लोगों के लिए बलि चढ़ाने के लिए अभिषेक किया गया था।
मूसा और हारून लेवी घराने के थे। और बाइबल में लिखित व्यवस्था और नियम हैं जिनका पालन पवित्र मिलापवाले तम्बू में किया जाता था। बलि पर हाथों को रखना प्रायश्चित्त का सुसमाचार था।
इसलिए जब हम लेवियों की बलि प्रथा को ठीक से समझेंगे, तो हम नया जन्म ले सकते हैं। इसलिए हम परमेश्वर के वचन में मिलापवाले तम्बू में बलि प्रथा के विषय में अध्ययन करते हैं। यह पुराने नियम का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंत में जब हम नए नियम में आते हैं, तब हम पानी और आत्मा के द्वारा नया जन्म पाने की आशीष प्राप्त करते हैं।
 
 
पुराने नियम में पाप के लिए प्रायश्चित्त
 
परमेश्वर के गुण क्या हैं?
न्याय और प्रेम।

परमेश्वर ने लेवी घराने से मूसा को पवित्र मिलापवाले तम्बू में बुलाया और उसके भाई हारून का महायाजक के रूप में अभिषेक किया। हारून पाप बलि के ऊपर लोगों के पापों को चढ़ाता था।
परमेश्वर ने लैव्यव्यवस्था १:२ में मूसा से क्या कहा, वह लिखा है। “यहोवा ने मूसा को बुलाकर मिलापवाले तम्बू में से उससे कहा, ‘इस्राएलियों से कह कि तुम में से यदि कोई मनुष्य यहोवा के लिये पशु का चढ़ावा चढ़ाए, तो उसका बलिपशु गाय-बैलों अथवा भेड़-बकरियों में से एक का हो”। परमेश्वर यहाँ पर बलिदान की भेंट को स्पष्ट करते हैं। यदि कोई भी मनुष्य अपने पापों का प्रायश्चित्त करे, वह एक बैल या एक भेड़, अपने गाय-बैलों अथवा भेड़-बकरियों में से चढ़ाए। 
परमेश्वर ने उनसे यह भी कहा, “यदि वह गाय-बैलों में से होम बलि करे, तो निर्दोष नर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर चढ़ाए कि यहोवा उसे ग्रहण करे” (लैव्यव्यवस्था १:३)।
उस व्यक्ति को जिसे अपने जीवन में पापों के लिए मरना था उसके स्थान पर यह बलि परमेश्वर को ग्रहणयोग्य थी। इस्राएली अपने पापों को पापबलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा डाल सकता था। वह व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से पशु बलि चढ़ाता था। अब देखें पद ४ क्या कहता है -
“वह अपना हाथ होम बलि पशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिये प्रायश्चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा”। इस प्रकार यह बलिदान परमेश्वर के द्वारा ग्रहणयोग्य था। जब एक पापी होमबलि के सिर पर अपना हाथ रखता था, उसका पाप पशु के सिर पर चला जाता था। इसलिए एक पापी परमेश्वर के सम्मुख बलि के सिर पर अपना हाथ रखता था, तब वह इसे ग्रहण करता और उसके पापों का प्रायश्चित्त होता था।
बलि चढ़ाने वाला व्यक्ति पहले पशु का वध करता और उसके लहू को लेकर वेदी के सींगों पर लगाता था और बाकी वेदी के चारों ओर छिड़क देता था। इस प्रकार उसके पापों के लिए मूल्य चुकाता और उनसे मुक्त हो जाता था, व्यक्ति को परमेश्वर के द्वारा ठहराई गयी व्यवस्था के अनुसार बलिदान चढ़ाना जरुरी था।
लैव्यव्यवस्था १:५ में यह लिखा गया है, “तब वह उस बछड़े को यहोवा के सामने बलि करे; और हारून के पुत्र जो याजक हैं, वे लहू को समीप ले जाकर उस वेदी के चारों ओर छिड़कें जो मिलापवाले तम्बू के द्वार पर है”। मिलापवाले तम्बू के अंदर द्वार पर होमबलि की वेदी के चारों कोने में चार सींग होते थे।
होमबलि के सिर पर हाथ रखने के बाद उसके पाप उस पर चले जाते थे, जो पाप करता था, वह पशु बलि का वध करता था और याजक उसके लहू को सींगों पर छिड़क देता था। वेदी के सींग पापों के लिए न्याय को दर्शाते थे। इस प्रकार सींग पर लहू लगाने का अर्थ पशु का लहू बहाकर पापी के पापों के बदले पाप का भुगतान करना था। जब परमेश्वर वेदी के सींगों पर लहू देखता था, तो वह उसके पापों को माफ कर देता था।
क्यों पाप बलि का लहू बहाया जाता था? क्योंकि “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है” (रोमियों ६:२३) और क्योंकि शरीर का प्राण लहू में है। इसलिए यह इब्रानियो में लिखा है, “बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नहीं” (इब्रानियों ९:२२)। इसलिए पापबलि को पापों के लिए लहू बहाना परमेश्वर की व्यवस्था को पूरा करना था, जो कहता है कि पाप की मजदूरी मृत्यु है।
न्यायोचित रूप से पापी की ओर से लहू चढ़ाया जाता था, परंतु पापी के प्रायश्चित्त के स्थान पर पापबलि का लहू बहाया जाता था। याजक तब वेदी के सींगों पर प्रतीक स्वरूप लहू लगाता था। जिससे पाप की मजदूरी का मूल्य चुका दिया जाता था।
यदि हम नए नियम में प्रकाशितवाक्य २०:११-१५ पढ़ें, तो हम देख सकते हैं कि यह सींग न्याय की पुस्तक का प्रतीक हैं। इसलिए जब आप वेदी के सींगों पर लहू लगाते हैं, तो आप न्याय की पुस्तक पर लहू लगाते हैं। यह स्पष्ट है कि बलि पर हाथों को रखने के द्वारा और पाप बलि के लहू के द्वारा पापों के लिए न्याय पूरा कर दिया गया है।
 
 
पाप दो जगहों पर दर्ज किए गए है 
 
समस्त मानव जाति के पाप परमेश्वर के सम्मुख दो जगहों पर दर्ज किए गए हैं। एक उनके हृदय पटल पर और दूसरा, न्याय की पुस्तक में जो परमेश्वर के सम्मुख खुला हुआ है।
यह यिर्मयाह १७:१ में लिखा गया है, “यहूदा का पाप लोहे की टांकी और हीरे की नोंक से लिखा हुआ है; वह उनकी हृदयरूपी पटिया और उनकी वेदियों के सींगों पर भी खुदा हुआ है”। 
लैव्यव्यवस्था १७:११ में, यह कहा गया है, “क्योंकि शरीर का प्राण लहू में रहता है”। लहू प्राणी का जीवन है और हमारे पापों का भुगतान केवल लहू से है। इसलिए लहू वेदी के सींगों पर लगाया जाता था। व्यवस्था के अनुसार सभी वस्तुएं लहू द्वारा शुद्ध की जाती थी। और बिना लहू बहाए पाप की क्षमा नहीं (इब्रानियों ९:२२)।
“फिर वह होम बलि पशु की खाल निकालकर उस पशु को टुकड़े टुकड़े करे; तब हारून याजक के पुत्र वेदी पर आग रखें, और आग पर लकड़ी सजाकर रखें; और हारून के पुत्र जो याजक हैं, वे सिर और चरबी समेत पशु के टुकड़ों को उस लकड़ी पर जो वेदी की आग पर होगी, सजाकर रखें; और वह उसकी अंतड़ियों और पैरों को पानी से धोए। जब याजक सब को वेदी पर जलाए कि वह होमबलि यहोवा के लिये सुखदायक सुगन्धवाला हवन ठहरे” (लैव्यव्यवस्था १:६-९)।
तब जायक होमबलि को टुकड़ों में काटे और उन्हें वेदी की आग के ऊपर रखे। इस विधि का अर्थ था, सौंप देना। मनुष्य जब परमेश्वर के सम्मुख पाप करते थे, इस तरह वे मर जाते थे और लहू बहाते और नरक की आग में डाल दिए जाते थे। कैसे, दण्ड पापबलि के द्वारा ले लिया जाता था। इस तरह लोग अपने पापों के लिए प्रायश्चित्त करते थे।
होमबलि का चढ़ावा परमेश्वर की धार्मिक व्यवस्था में न्याय का विधान था। परमेश्वर अपनी दोनों व्यवस्थाओं, धार्मिकता की व्यवस्था और प्रेम पर आधारित व्यवस्था में संयुक्त रूप से समस्त मनुष्यजाति के लिए प्रायश्चित्त की संविधि में बंधा हुआ है। 
क्योंकि परमेश्वर धर्मी है, इसलिए वह न्याय करता है और उन्हें मृत्यु दण्ड देता है। लेकिन वह अपने लोगों से प्रेम भी करता है, वह उनके पापों को पापबलि के ऊपर डालने की अनुमति देता है। नए नियम में हमारा परमेश्वर हमसे बहुत प्रेम करता है इसलिए उसने बपतिस्मा लिया और हम पापियों के लिए पाप बलि बन कर क्रूस पर चढ़ाया गया। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु ने दुनिया के सारे पापों को धो दिया।
 
 
पुराना नियम में एक दिन के पापों के लिए प्रायश्चित्त।
 
पुराना नियम में निष्कलंक पाप बलि
किसका प्रतीक थी?
यीशु मसीह।

आइये हम लैव्यव्यवस्था ४:२७ से पढ़ें; “यदि साधारण लोगों में से कोई अज्ञानता से पाप करे, अर्थात् कोई ऐसा काम जिसे यहोवा ने मना किया हो करके दोषी हो, और उसका वह पाप उस पर प्रकट हो जाए, तो वह उस पाप के कारण एक निर्दोष बकरी बलिदान के लिये ले आए; और वह अपना हाथ पापबलि पशु के सिर पर रखे, और होमबलि के स्थान पर पापबलि पशु का बलिदान करे। और याजक उसके लहू में से अपनी उंगली से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसके सब लहू को उसी वेदी के पाए पर उंडेल दे। और वह उसकी सब चरबी को मेलबलि पशु की चरबी के समान अलग करे, तब याजक उसको वेदी पर यहोवा के निमित्त सुखदायक सुगन्ध के लिये जलाए; और इस प्रकार याजक उसके लिये प्रायश्चित्त करे, तब उसे क्षमा मिलेगी” (लैव्यव्यवस्था ४:२७-३१)।
आदम के वंशज, इस्राएली लोग और सारी दुनिया के लोग जिनका जन्म इस संसार में हुआ है, वे सब पाप से भरे हैं। इसलिए हमारे हृदय पाप से भरे हुए हैं। एक मनुष्य के हृदय के अंदर सब प्रकार के पाप हैं: बुरे-बुरे विचार, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, धन लोलुपता और मूर्खता।
जब एक पापी एक दिन के पापों के लिए प्रायश्चित्त करना चाहे तो वह पवित्र मिलापवाले तम्बू में निष्कलंक पशु लेकर आता था। तब वह अपने पापों को उस पर डालने के लिए पशु के सिर पर अपने हाथों को रखता था। उसके बाद पशु बलि का वध करके और उसके लहू को याजक को परमेश्वर के सम्मुख चढ़ाने के लिए देता था। याजक तब शेष बलि को ले जाता था। इस प्रकार पापी अपने पापों से क्षमा पा सकता था।
बिना परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञाओं के लोग नहीं जानते कि वे पापी हैं या नहीं है। परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञाओं के द्वारा जब हम अपने आप को देखते हैं, हमें हमारे पापों का ज्ञान होता है। हमारे मापदण्डों के द्वारा हमारे पापों का न्याय नहीं होगा, परंतु परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञाओं द्वारा होगा।
इस्राएल देश के लोगों ने पाप किए, इसलिए नहीं कि वे ऐसा करना चाहते थे, परंतु इसलिए कि वे अपने हृदय में सब प्रकार के पापों के साथ पैदा हुये थे। क्योंकि मनुष्य अपनी कमजोरियों अर्थात् जिसे अपराध कहते हैं, के कारण पाप करता है। पाप में मनुष्यजाति के सारे पाप और अपराध सम्मिलित हैं।
सारे मनुष्य अपूर्ण प्राणी हैं। जैसे इस्राएली लोग भी अपूर्ण थे, वे पापी थे और पाप करते थे। हमारे समस्त अपराधों और अनियमितताओं को निम्न प्रकार से श्रेणीबद्ध किया गया है। जब हमारे मनों में बुरे विचार होते हैं, तो उसे पाप कहते हैं और जब हम उसका आचरण करते हैं, तो उसे बुराई कहते हैं। दुनिया के पापों में दोनों तरह के पाप शामिल हैं।
पुराने नियम में पापबलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा सारे पाप उस पर चले जाते थे। उसके बाद पापी पाप से मुक्त हो जाता था। इसलिए उसे अपने पापों के लिए मरने की जरूरत नहीं थी। इसतरह बलि प्रथा परमेश्वर के प्रेम और न्याय की परछाई है।
क्योंकि परमेश्वर ने हमें मिट्टी से बनाया है, हम आरंभ से ही धूल हैं। वेदी के सींगों पर लहू लगाने और शेष लहू को वेदी के आधार में छिड़कने का अर्थ था कि इस्राएली अपने पापों के लिए खेदित होते थे और उनके हृदय की पट्टियों से सारे पाप मिट जाते थे। 
“याजक वेदी के ऊपर परमेश्वर के लिए सुखदायक सुगंध के लिए चर्बी को जलाता था”। बाइबल में चर्बी का अर्थ है पवित्र आत्मा। इसलिए हमारे पापों के प्रायश्चित्त करने के लिए, इस प्रकार इसे हमें करना चाहिए जो परमेश्वर ने ठहराया है। हमें भी उसी तरह से हमारे पापों के प्रायश्चित्त को अपने हृदयों में उचित मानना चाहिए।
परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा कि पशु बलि एक भेड़, बकरी या बछड़ा होना चाहिए। पुराना नियम में पाप बलि चुने हुए लोगों के लिए थी। बछड़ा एक शुद्ध पशु है। इस कारण पाप बलि निष्कलंक होता था जो यीशु मसीह का प्रकटीकरण है। उसने पवित्र आत्मा के द्वारा गर्भ धारण किया और मानव जाति के पापों के लिए पाप बलि बन गया।
पुराना नियम के लोग निर्दोष पाप बलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पापों को उस पर सौंप देते थे। याजक उनके पापों की क्षतिपूर्ति के लिए बलिदान करते थे। इस प्रकार इस्राएली लोग अपने पापों के लिए प्रायश्चित्त किया करते थे।
 
 
प्रायश्चित्त के दिन की विधि
 
इस्राएल के लोगों को प्रायश्चित्त के दिन
बलि चढ़ाना आवश्यक क्यों था?
इसलिए कि वे मृत्यु के दिन तक पाप करते रहें।
प्रतिदिन की पाप-बलि उन्हें परमेश्वर के
सम्मुख पवित्र नहीं कर सकती थी।

हालाँकि, जब कभी वे पाप करे तब बलिदान चढ़ाना पड़ता था, इसलिए यह उनके पापों के प्रायश्चित्त करने के लिए आवश्यक सारी बलियों की आपूर्ति किया जाना असंभव था। इसलिए धीरे-धीरे ये प्रथा बंद हो गयी। उनके प्रतिदिन के पापों के लिये न खत्म होने वाले प्रायश्चित्त का नियत कार्य बंद कर दिया गया और वे महसूस करने लगे कि वे सब मिलकर इस प्रथा से दूर हो गए हैं।
हम कितना भी कठिन प्रयास करें, हमारे सब पापों के लिए हम पर्याप्त बलि कभी भी नहीं चढ़ा सकते हैं। इसलिए हमारे पापों के लिए वास्तविक पूर्ति उद्धार की व्यवस्था में हमारे हृदय की गहराई से विश्वास के द्वारा दिया गया है, जिसे परमेश्वर ने हमारे लिए तैयार किया है।
हमारी कमजोरी की वजह से, हम परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार जीने की कितनी भी कोशिश करते हैं। ऐसा करके हम केवल और अधिक जानने लगते हैं कि हम कितने अधूरे और कमजोर हैं। इसलिए परमेश्वर ने इस्राएल की प्रजा के साल भर के पापों को एक ही बार में प्रायश्चित्त करने के लिए एक मार्ग दिया था (लैव्यव्यवस्था १६:१७-२२)। 
लैव्यव्यवस्था में यह लिखा है, “तुम लोगों के लिये यह सदा की विधि होगी कि सातवें महीने के दसवें दिन को तुम अपने जीव को दुःख देना, और उस दिन कोई चाहे वह तुम्हारे निज देश का हो, चाहे तुम्हारे बीच रहनेवाला कोई परदेशी हो, कोई भी किसी भी प्रकार का कामकाज न करे; क्योंकि उस दिन तुम्हें शुद्ध करने के लिये तुम्हारे निमित्त प्रायश्चित्त किया जाएगा; और तुम अपने सब पापों से यहोवा के सम्मुख पवित्र ठहरोगे। यह तुम्हारे लिये परमविश्राम दिन ठहरे, और तुम उस दिन अपने जीव को दुःख देना; यह सदा की विधि है” (लैव्यव्यवस्था १६:२९-३१)।
इस प्रकार वर्ष में एक बार इस्राएली लोग सुरक्षित बच जाते थे जब महायाजक सातवें महीने के दसवें दिन सब लोगों के वर्ष भर की अवधि में किए गये पापों के प्रायश्चित्त के लिए बलि चढ़ाता था। इससे उनके पाप धो दिए जाते थे और उनके मनों में उस दिन शांति होती थी।
सातवें महीने के दसवें दिन हारून महायाजक समस्त इस्राएल के प्रतिनिधि के रूप में प्रायश्चित्त के लिए बलि चढ़ाता था। उस समय दूसरे याजक पवित्र वेदी के पास नहीं जा सकते थे। सबसे पहले हारून अपने और अपने परिवार के लिए प्रायश्चित्त की बलि करता था। इसके बाद शेष समस्त इस्राएली प्रजा के लिये प्रायश्चित्त करता था क्योंकि वह और उसका परिवार भी पाप करते थे।
इस प्रकार वह लोगों के लिए बलि चढ़ाता था। “और उन दोनों बकरों को लेकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के सामने खड़ा करे; और हारून दोनों बकरों पर चिट्ठियां डाले, एक चिट्ठी यहोवा के लिये और दूसरी अजाजेल के लिये हो। और जिस बकरे पर यहोवा के नाम की चिट्ठी निकले उसको हारून पापबलि के लिये चढ़ाए; परन्तु जिस बकरे पर अजाजेल के लिये चिट्ठी निकले वह यहोवा के सामने जीवित खड़ा किया जाए कि उस से प्रायश्चित्त किया जाए, और वह अजाजेल के लिये जंगल में छोड़ा जाए” (लैव्यव्यवस्था १६:७-१०)।
अपने परिवार तथा स्वयं के लिए प्रायश्चित की विधि को पूरा करने के बाद करता, हारून “दो बकरों के लिए चिठ्ठिया डालता था”, एक बकरा परमेश्वर के लिए और दूसरा अजाजेल के लिए।
दो बकरों में से पहले को परमेश्वर के लिए चढ़ाया जाता था। यहाँ पर, महायाजक अपने हाथों को लोगों के पापों के लिए बकरे के सिर पर रखता था जो वे वर्ष की अवधि में करते थे।
महापवित्र स्थान में दयासन के पास लहू को लेकर सात बार छिड़कता था। इस प्रकार इस्राएलियों के विगत वर्ष भर के उनके पापों को क्षमा कर दिया जाता था। इस्राएल के लोगों को उनके पापों के बदले में मरना था, जबकि इसके बदले में हारून महायाजक पाप बलि के सिर पर उनके पापों को डालता था और यह उनके लिए न्याय पाना था। तब वह दूसरे जीवित बकरे को परमेश्वर के सम्मुख बलि करता था। यह वह बलि थी जिसे लोगों के लिए किया जाता था।
 
 
लोगों के लिए
 
सब लोगों के सामने, हारून दूसरे बकरे के सिर पर अपने हाथों को रखता था और परमेश्वर के सम्मुख अंगीकार करता था। “प्रभु, इस्राएल के लोगों ने हत्या, व्यभिचार, चोरी, धन लोलुपता, झूठ, धोखेबाजी . . . और वे मूर्तियों के आगे सिर झुकाया हैं। वे विश्रामवार को पवित्र नहीं माना, उन्होंने तेरा नाम व्यर्थ लिया है, और इन्होंने व्यवस्थाओं और आज्ञाओं के सब नियमों को तोड़ा है।“ तब वह अपने हाथों को हटा लेता था। इससे, लोगों के वर्ष भर के सारे पापों को पाप बलि के ऊपर डाल दिया जाता था।
आइये लैव्यव्यवस्था १६:२१ पढे़ं, “और हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे के सिर पर रखकर इस्राएलियों के सब अधर्म के कामों, उनके सब अपराधों, अर्थात् उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उनको बकरे के सिर पर रखकर उसको किसी मनुष्य के हाथ से जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेजकर छुड़वा दे”। बलि का बकरा तब जंगल में घूमता रहता था और इस्राएल के लोगों के पापों को अपने सिर पर लिए मर जाता था। बलि का बकरा, “अजाजेल” इब्रानी भाषा में इसका अर्थ है “बाहर रखना”। जिसका अर्थ है कि पाप बलि समस्त इस्राएली लोगों के बदले में परमेश्वर के सामने से निकाल देना था।
इसलिए इस्राएल के पापों को हारून के हाथ रखने के द्वारा बलि के बकरे के ऊपर डाल दिया जाता था। इस प्रकार इस्राएली अपने पापों के लिए क्षमा प्राप्त करते थे। जब वे महायाजक को बकरे के सिर पर हाथ रखते हुए और इसे जंगल में जाते हुए देखते थे, तो इस्राएल के सब लोग जो प्रायश्चित्त की प्रथा में विश्वास करते थे, उन्हें अपने पापों के प्रायश्चित्त का निश्चय हो जाता था। पुराने नियम की सारी प्रथाएं नए नियम के “नया जन्म पाने के सुसमाचार” की परछाई थी।
पुराने नियम में हाथों को रखने और बलि का लहू, पाप से मुक्ति का सुसमाचार था। ठीक यही आधारभूत बातें नए नियम में पायी जाती हैं।
 
 
नए नियम में छुटकारे का सुसमाचार
 
नए नियम में, लोग सारे पापों से कैसे छुड़ाए गये? यह मत्ती १:२१-२५ में लिखा गया है, “वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों को उनके पापों से उद्धार करेगा। यह सब इसलिए हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था, वह पूरा हो: ‘‘देखो, एक कुंवारी गर्भवती होगी और वह एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,’’ जिसका अर्थ है - परमेश्वर हमारे साथ। तब यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा के अनुसार अपनी पत्नी को अपने यहाँ ले आया; और जब तक वह पुत्र न जनी, तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा”।
हमारे यीशु इस संसार में इम्मानुएल नाम से सारे लोगों को उनके पापों से बचाने के लिए आए। इसीलिए उसका नाम यीशु रखा गया। इस दुनिया के सब मनुष्यों के पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यीशु आए। वह मानव शरीर में मनुष्यजाति का उद्धारकर्ता बनकर आए। उन्होंने हमारे उद्धार को पूरा कर दिया और हमेशा के लिए हमें पाप से मुक्त कर दिया।
 
 
नया जन्म पाने का सुसमाचार
 
और यीशु ने हमारे सारे पापों से हमें कैसे मुक्त किया है? उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा इसे किया है। मत्ती ३:१३-१७ को देखें : 
उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। परन्तु, यूहन्ना यह कहकर उसे रोकने लगा, ‘‘मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?’’ यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, ‘‘अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’’ तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया, और उसने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई: ‘‘यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ’’ (मत्ती ३:१३-१७)।
नए नियम में, जब यीशु ३० वर्ष के हुए तब वह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के पास यरदन नदी में आए। उन्होंने उसके द्वारा बपतिस्मा लिया और सब पापियों के पापों को अपने ऊपर ले लिया। इस प्रकार से उसने परमेश्वर की सारी धार्मिकता को पूरा कर दिया।
 
 
क्यों यीशु ने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया? 
 
सुसमाचारों में क्या बताया गया है?
परमेश्वर की धार्मिकता।

आइये, अब हम यह दृश्य देखें जब स्वर्ग के महायाजक का मनुष्यजाति के अंतिम महायाजक से मिलन होता है। यहाँ हम बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता को देख सकते हैं जो दुनिया के समस्त पापों के लिए सुरक्षित प्रायश्चित्त है।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, जिसने यीशु को बपतिस्मा दिया जो स्त्री से जन्में हैं उससे बड़ा कोई नहीं है। मत्ती ११:११ में यीशु इस बात की गवाही देते हैं, “जो स्त्रियों से जन्में हैं, उनमें से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बड़ा कोई नहीं हुआ”। जिस प्रकार लोगों के पाप प्रायश्चित्त के दिन जब महायाजक हारून पाप बलि के सिर पर हाथों को रखता था, वैसे ही लोगों के पापों का प्रायश्चित हो जाता था। नए नियम में दुनिया के समस्त पापों का प्रायश्चित हो गया जब यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लिया था।
नया जन्म पाने का सुसमाचार हमारे भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काल के सारे पापों के लिए सम्पूर्ण प्रायश्चित्त का सुसमाचार है। इसलिए छुटकारे का सुसमाचार यीशु के बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर ने अपनी धार्मिकता को पूरा करने के लिये तैयार किया था। जिससे दुनिया के सब लोगों को बचा लिया गया। दुनिया के पापों के प्रायश्चित्त के लिए यीशु ने सबसे योग्य और उचित तरह से बपतिस्मा लिया।
“सारी धार्मिकता” को पूरा करने का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है परमेश्वर ने दुनिया के सारे पापों को सबसे उचित ढंग से धो दिया। मनुष्यजाते के सारे पापों को धोने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया था। “क्योंकि उसमें परमेश्वर की धार्मिकता विश्वास से और विश्वास के लिए प्रकट होती है” (रोमियों १:१७)। इस सुसमाचार में परमेश्वर का धार्मिकता जो आदि से अंत तक विश्वास पर ही आधारित है।
परमेश्वर की धार्मिकता उसके निर्णय को प्रकट करना था कि उसने अपने पुत्र यीशु को इस संसार में भेजकर दुनिया के सारे पापों को उसके बपतिस्मा और क्रूस पर मृत्यु के द्वारा धो दिया।
नए नियम में, परमेश्वर की धार्मिकता को यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा अभिव्यक्त किया गया है। हम धर्मी बन जाते हैं क्योंकि यीशु ने आज से दो हजार साल पहले यरदन नदी में बपतिस्मा लेकर समस्त मानव जाति के पापों को अपने ऊपर ले लिया। जब हम परमेश्वर के उद्धार को अपने हृदय में ग्रहण करते हैं, तब परमेश्वर की धार्मिकता वास्तव में पूर्ण होती है। 
यीशु ने उसको उत्तर दिया, ‘‘अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’’ तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी के ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया, और उसने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई: ‘‘यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ’’ (मत्ती ३:१५-१७)।
यह परिच्छेद प्रकट करता है कि परमेश्वर स्वयं गवाही देते हैं कि उसके पुत्र के बपतिस्मा में उद्धार की सारी धार्मिकता पूरी होती है। वह हमसे कह रहे थे, “यीशु, जिसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया अब वही मेरा पुत्र है”। परमेश्वर साक्षी देते हैं कि उसके पुत्र का बपतिस्मा सारी मनुष्यजाति के प्रायश्चित्त के लिए था। परमेश्वर ने इसलिए ऐसा कहा है कि उसके पुत्र, यीशु का पवित्र कार्य व्यर्थ नहीं होगा। 
यीशु परमेश्वर का पुत्र है और संसार के पापियों का उद्धारकर्ता भी है। परमेश्वर कहते हैं, “जिससे मैं प्रसन्न हूँ,” यह सच्चाई है कि यीशु ने पिता की इच्छा का पालन किया और अपने बपतिस्मे के द्वारा सारी मनुष्यजाति के पापों को अपने ऊपर ले लिया।
बपतिस्मा शब्द का अर्थ है: ‘धो देना, सौंप देना, दबा देना।’ क्योंकि हमारे सारे पाप उस पर चले गए जब यीशु ने बपतिस्मा लिया। संसार के समस्त पापों से बचने के लिए हम सबको इस सुसमाचार में विश्वास करना है।
पुराने नियम में उद्धार की सारी भविष्यवाणियों को नए नियम में यीशु के बपतिस्मा के द्वारा पूरा कर दिया गया था। इस प्रकार पुराने नियम की भविष्यवाणी नए नियम में पूर्णरूप से प्राप्त दूसरा हिस्सा हैं। जैसा कि इस्राएल के लोग पुराने नियम में अपने पापों के लिए वर्ष भर में एक बार प्रायश्चित्त करते थे। नए नियम में उसी प्रकार मनुष्यों के पापों को यीशु पर डाल दिया गया और हमेशा के लिए प्रायश्चित्त कर लिया गया है।
लैव्यव्यवस्था १६:२९ का प्रतीक रूप मत्ती ३:१५ है। संसार के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया था। धन्यवाद उसके बपतिस्मा को, जो कोई उसकी पापों की अनंत क्षमा में विश्वास करते हैं, वे बच जाते हैं। उनके सारे पापों को उनकी हृदय रूपी पट्टीका से मिटा दिया गया है।
यदि आप यीशु के बपतिस्मा की सच्चाई और क्रूस पर उसकी मृत्यु की सच्चाई को अपने हृदय में स्वीकार और विश्वास नहीं करते हैं, तो आप अपने पापों को कभी भी नहीं धो सकते, चाहे आप कितना भी धार्मिक जीवन जीते हों, कोई महत्व की बात नहीं है। केवल यीशु के बपतिस्मा के द्वारा ही परमेश्वर का वचन पूरा होता है जो हमारे पापों को मिटा देता है। हमारे सारे पापों के छुटकारे के द्वारा सच्चा उद्धार प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में, यीशु के बपतिस्मा के द्वारा।
इन बातो को जानकार, अब आप क्या करेंगे? क्या आप इस उद्धार को अपने हृदय में ग्रहण करेंगे? या नहीं करेंगे? यह मनुष्य का शब्द नहीं है, परंतु यह स्वयं परमेश्वर के वचन हैं। यीशु क्रूस पर मारा गया क्योंकि उसके बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उसने अपने ऊपर ले लिया था। क्या आप सहमत नहीं हैं कि यीशु का क्रूस पर चढ़ाया जाना उसके बपतिस्मा का परिणाम है? 
रोमियों ८:३-४ में यह लिखा है, “क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल होकर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात् अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिये भेजकर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए”।
क्योंकि जैसे हम शरीर की दुर्बलता के कारण परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञा का पालन नहीं कर सकते, इसलिए यीशु ने शरीर में होकर सब पापों को स्वयं अपने ऊपर ले लिया। यही यीशु के बपतिस्मा की सच्चाई है। यीशु का बपतिस्मा क्रूस पर उसकी मृत्यु का अग्रिम रूप से किया गया अभिषेक है। यह परमेश्वर के मूल सुसमाचार की बुद्धिमानी है।
यदि आप केवल क्रूस पर यीशु की मृत्यु में विश्वास कर रहे हैं, आपको अभी वापस लौटना है और यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उद्धार के सुसमाचार को अपने हृदय में स्वीकार करना हैं। तब और केवल तब आप परमेश्वर की वास्तविक संतान बन सकते हैं।
 
 
मूल सुसमाचार
 
मूल सुसमाचार क्या है?
पानी और आत्मा का सुसमाचार।

पापों के प्रायश्चित्त का सुसमाचार ही मूल सुसमाचार है। यह यीशु के बपतिस्मा, उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान का सुसमाचार है जिसे परमेश्वर ने हम पर प्रकट किया है। यीशु मसीह ने यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा पाप एक बार में धो ही दिये और इसके द्वारा वे सब जो इस सच्चाई में विश्वास करते हैं, उद्धार दिया है। हमारे विश्वास के कारण हमारे भविष्य के पापों को भी धो दिया गया है।
अब जो कोई यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करेगा, वह संसार के सब पापों से हमेशा के लिए बच जाता है। क्या आप विश्वास करते हैं? यदि आपका उत्तर ‘हाँ, मैं करता हूँ’, तब आप वास्तव में धर्मी हो जाएंगे।
आइये हम सब इस घटना का संक्षिप्त में सारांश देखें, जो यीशु के बपतिस्मा के बाद घटित हो रहा था। यूहन्ना १:२९ में यह लिखा है, “देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है”।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने साक्षी दी है कि यीशु परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवालेने जब यीशु को यरदन में बपतिस्मा दिया तब जगत के सारे पापों को उसके ऊपर डाल दिया था। इसके अलावा, क्योंकि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवालेने स्वयं यीशु को बपतिस्मा दिया था, इसलिए वह गवाही देते हैं, “देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है”। यीशु ने बपतिस्मा लिया और जगत के पापों को अपने ऊपर उठा लिया था, और यही नया जन्म पाने का सुसमाचार है।
 
                                                                               
 
 
“देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है” (यूहन्ना १:२९)। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया है।
पाप जो आपने जन्म से लेकर अपने दसवें जन्म दिन तक किए हैं, वे संसार के सारे पापों में सम्मिलित हैं। क्या आप विश्वास करते हैं कि वे पाप यीशु के ऊपर डाल दिये गए थे? हाँ, मैं विश्वास करता हूँ। जो अपराध आपने ११ से २० वर्ष के बीच किए हैं उनके बारे में क्या? क्या आप विश्वास करेंगे कि वे पाप भी यीशु पर डाल दिये गये थे? हाँ, मैं विश्वास करता हूँ।
भविष्य में हम जितने पाप करेंगे, क्या वे संसार के पापों में शामिल हैं? हाँ, वे भी सम्मिलित हैं। तब, क्या वे पाप यीशु पर चले गए? हाँ, वे चले गए थे। क्या आप सचमुच विश्वास करते हैं कि आपके सारे पाप यीशु के ऊपर डाल दिये गये हैं? हाँ, मैं विश्वास करता हूँ। क्या आप विश्वास करते हैं कि जगत के सारे पापों को यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाल दिया गया था? हाँ, मैं विश्वास करता हूँ।
क्या आप सचमुच संसार के पापों से बचना चाहते हैं? यदि आप चाहते हैं तो यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु में विश्वास कीजिए। एक बार विश्वास कीजिए और आप बच जाएंगे। क्या आप यह विश्वास करते हैं? नया जन्म पाने का यह सच्चा उद्धार है। यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू नया जन्म पाने का मूल सुसमाचार है। संसार के सब पापियों के लिए यह परमेश्वर की ओर से आशीष है।
यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा नया जन्म पाने के उद्धार में विश्वास करने के लिए उसके प्रेम को देखना ही सच्चा विश्वास और वास्तविक नया जन्म पाना है। आपको केवल बाइबल में लिखे सच्चाई के वचनों को स्वीकार करना है।
 
 
धर्म और विश्वास
 
हम नया जन्म पाए व्यक्ति के दिल
में क्या गवाही है?
कि यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू से
हमारे सारे पापों को मिटा दिया है।

धर्म का मतलब है, मनमर्जी के अनुसार यीशु में विश्वास करना या परमेश्वर के पवित्र वचन का तिरस्कार करना। कैसे, पाप से उद्धार किसी व्यक्ति के सोच-विचार से अलग है। विश्वास परमेश्वर के पुराने और नए नियम के वचनों पर भरोसा करना है और स्वयं के विचारों को त्यागना है। इसको वैसा ही ग्रहण करना है जैसा बाइबल में लिखा गया है। और पानी और लहू के द्वारा उद्धार को स्वीकार करना: यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु को स्वीकार कर ग्रहण करना है। एक व्यक्ति मूल सुसमाचार को अपने हृदय की गहराई में ग्रहण कर बच सकता है। 
बिना यीशु के बपतिस्मा के हमारे पापों को उस पर डाला नहीं जा सकता, और बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नहीं है। हमारे सारे पाप यीशु को क्रूस पर चढ़ाने और हमारे लिए लहू बहाने से पहले ही सौंप दिये गये। जब हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करते हैं, सुसमाचार के द्वारा हमारा नया जन्म होता है और हम संसार के सारे पापों से छूटकारा पाते हैं।
सच्चा विश्वास यह विश्वास करना है कि जब यीशु मसीह बपतिस्मा लिया तब उसने हमें हमारे सारे पापों से पूरी रीति से धो दिया है; यह विश्वास करना है कि उसने हमारे सारे पापों के लिए क्रूस पर दण्ड पाया। हम परमेश्वर के धार्मिक उद्धार में विश्वास करते हैं। परमेश्वर ने हमें अत्यधिक प्रेम किया है कि उसने अपने पुत्र यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए उसके लहू के द्वारा हमें बचा लिया। जब हम इस सुसमाचार में विश्वास करते हैं, हम अपने सारे पापों से बच जाते हैं, दण्ड से छूटकारा पाते हैं और परमेश्वर के सम्मुख धर्मी ठहरते हैं।
“प्रभु मैं विश्वास करता हूँ। मैं उद्धार पाने के योग्य नहीं हूँ, परंतु यीशु के बपतिस्मा, उसके क्रूस पर चढ़ाये जाने और पुनरुत्थान के सुसमाचार में विश्वास करता हूँ”। हम प्रभु को नया जन्म पाने की आशीष के लिए धन्यवाद दें। नया जन्म पाने के मूल सुसमाचार में विश्वास करना सच्चा विश्वास है।
नया जन्म पाने की सच्चाई यह है, “अतः विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है” (रोमियों १०:१७)। “तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा” (यूहन्ना ८:३२)। हमें सत्य को ठीक तरह से जानना चाहिए और हमें पानी, लहू और आत्मा में विश्वास करना चाहिए जो इसकी साक्षी देता है (यूहन्ना ५:५-८)।
“सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।“ पानी और आत्मा के बारे में यह यीशु के वचन हैं। क्या आप स्वतंत्र हो गए हैं ? क्या हम धार्मिक हैं या निष्ठावान हैं ? यीशु केवल उन्हें चाहते हैं जो पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के सुसमाचार में विश्वास करते है।
यदि आप यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, तो आपके हृदय में पाप नहीं है। इसके बावजूद यदि यीशु में आपका विश्वास धर्म के एक हिस्से के रूप में है, तो अभी भी आप पाप में जी रहे हैं। क्योंकि यीशु के उद्धार में आपका पूरी रीति से विश्वास नहीं है। धर्म में विश्वास करने वाले अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने की कोशिश करते हैं और हर समय पापों के लिए पश्चात्ताप की प्रार्थना करते हैं। 
इसलिए ऐसे लोग अपने पापों से कभी भी पूरी रीति से बच नहीं सकते हैं। फिर वे इसके लिए जीवन भर पश्चात्ताप करते हैं। यह कभी भी यीशु के बपतिस्मा और उसकी क्रूस पर मृत्यु के द्वारा पापों की पूर्ण क्षमा का स्थान नहीं ले सकता है। आइए, हम यीशु के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा बच जाएं, जिसने सारे संसार के पापों को धो दिया है। यहाँ तक कि भविष्य के पापों को भी।
मैं आपको पुनः कहता हूँ कि प्रतिदिन पश्चात्ताप करना नया जन्म पाने के सुसमाचार का विकल्प कभी भी नहीं हो सकता। समस्त मसीहियों को अब नया जन्म पाने के सुसमाचार के द्वारा पापों की क्षमा में विश्वास करना चाहिए।
हम कभी भी अपने पापों के लिए पूर्ण पश्चात्ताप नहीं कर सकते हैं। गलत पश्चात्ताप व्यक्ति को परमेश्वर के पास नहीं पहुँचा सकता। परंतु केवल उसे संतोष दे सकता है। गलत पश्चात्ताप एक तरफा अंगीकार है जो कि परमेश्वर की इच्छा के खाते में कभी नहीं आता है। ये वह नहीं है जो परमेश्वर हमसे चाहता है।
सच्चा पश्चात्ताप क्या है? यह परमेश्वर के पास वापस लौटना है। यीशु के उद्धार के सुसमाचार के पास वापस आना है और जिस प्रकार से वचन में लिखा गया है, विश्वास करना है। वह सुसमाचार जो हमें बचाता है वह यीशु के बपतिस्मा, उसका क्रूस पर चढ़ाया जाना और पुनरुत्थान ही है। जब हम इस सुसमाचार में पूर्णरूप से विश्वास करते हैं, तब हम बच जाते हैं और अनंत जीवन प्राप्त करते हैं।
यह नया जन्म पाने के सुसमाचार का विवेकपूर्ण निर्णय लेने की समझदारी है। यह यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू और स्वर्ग के राज्य के सुसमाचार में विश्वास करना है। वह हमें नया जन्म पाने की अनुमति देता है।
जब यीशु हमसे कहते हैं कि हमें पानी और आत्मा से नया जन्म पाना है, तो उसका अर्थ है कि उसके बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए गये उसके लहू में विश्वास करने के द्वारा हमारा नया जन्म हो। तब हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने और उसमें रहने योग्य होते हैं। हमें उसके वचनों में विश्वास करना चाहिए। दो बातें जो हमारे पाप क्षमा की गवाही देती हैं, यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका लहू, यही वचन हैं जो हमें नया जन्म पाने की अनुमति देते हैं।
क्या अब आप नया जन्म पाने के सुसमाचार और पापों की क्षमा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं? यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास हमें संसार के सब पापों से बचाता है। हम इस विश्वास के साथ नया जन्म ले सकते हैं। अब भी बाइबल हमसे कहती है कि सारे संसार के पापियों के पापों को यीशु ने धो दिया है। हम क्यों विश्वास करके नया जन्म नहीं लेते हैं?
जो कोई इन दो बातों में विश्वास करता है, वह हमारे नया जन्म पाने की गवाही देता है। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ाये जाने पर विश्वास करने से वे वास्तविक नया जन्म लेते हैं। और वह जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है वह स्वयं गवाही रखता है (यूहन्ना ५:३-१०)। जब आप यीशु पर विश्वास करते हैं तो आप पानी, आत्मा और लहू के सुसमाचार को छोड़ नहीं सकते।
जैसा कि सेनापति नामान ने कोढ़ से पूर्णरूप से चंगा होने के लिए यरदन नदी में सात बार स्नान किया (२ राजा ६ अध्याय)। हम विश्वास करें कि यीशु ने संसार के सब पापों को एक ही बार में और हमेशा के लिए यरदन नदी में धो दिया और इसके परिणाम स्वरूप हमें अनंत उद्धार दे दिया है।
क्योंकि यीशु हमसे प्रेम करता है, इसलिए हम जगत के सारे पापों से बच सकते है और पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा अनन्त जीवन पा सकते है। आइए हम सब नए जन्म पाने के सुसमाचार पर विश्वास करे और परमेश्वर के उद्धार को पाए।