उपदेश

विषय ३ : पानी और आत्मा का सुसमाचार

[3-6] सच्चा आत्मिक खतना (निर्गमन १२:४३-४९)?

(निर्गमन १२:४३-४९) 
“फिर यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, फसह के पर्व की विधि यह है: कोई भी परदेशी उसमें से न खाए; पर जो किसी का मोल लिया हुआ दास हो, और तुम लोगों ने उसका खतना किया हो, वह तो उसमें से खा सकेगा। पर परदेशी और मज़दूर उसमें से न खाएँ। उसका खाना एक ही घर में हो; अर्थात् तुम उसके माँस में से कुछ घर के बाहर न ले जाना; और बलिपशु की कोई हड्डी न तोड़ना। पर्व का मनाना इस्राएल की सारी मण्डली का कर्त्तव्य है। और यदि कोई परदेशी तुम लोगों के संग रहकर यहोवा के पर्व को मनाना चाहे, तो वह अपने यहाँ के सब पुरूषों का खतना कराए, तब वह समीप आकर उसको माने; और वह देशी मनुष्य के तुल्य ठहरेगा। पर कोई भी खतनारहित मनुष्य उसमें से न खाने पाए। उसकी व्यवस्था देशी और तुम्हारे बीच में रहनेवाले परदेशी दोनों के लिए एक ही हो”।
 
पुराने नियम में इस्राएलियों को परमेश्वर
की संतान होने के लिए अनिवार्य
शर्त क्या थी?
उनको खतना करवाना पड़ता था।

जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उनके लिए परमेश्वर का वचन पुराना नियम व नया नियम दोनों महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य हैं। हम वचनों के एक भी भाग को छोड़ नहीं सकते क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवन का वचन है। 
आज का परिच्छेद हमें कहता है कि जो कोई भी फसह का पर्व मनाना चाहे उसे पहले खतना करवाना होगा। परमेश्वर ने हमसे यह कहा है इसके बारे में हमें सोचना चाहिए। जिसका खतना नहीं हुआ है, वह फसह पर्व नहीं मना सकता। 
यदि हम यीशु में विश्वास करते हैं, तो परमेश्वर के उद्देश्य के लिए इस आदेश को हमें समझना चाहिए। खतना पुरूष लिंग के अग्रभाग को ढकने वाली चमड़ी को काटना है। क्यों परमेश्वर ने अब्राहम और उसके वंशजों को खतना करने के लिए कहा? इसका यह कारण है कि परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की थी कि केवल वह जो ‘पाप से अलग‘ है, वही उसकी प्रजा है। 
इसलिए वह पुराने नियम में इस्राएल की प्रजा से खतना करने को कहता है। परमेश्वर की प्रजा कहलाने के लिए, इस्राएली लोगों का खतना किया जाता था। यह परमेश्वर का नियम था। जो पवित्रीकरण का आधार है और वे जो विश्वास से अपने खतना करने के द्वारा पापों से संबंध समाप्त कर देते हैं वह उनका परमेश्वर हो जाता है। इसके अलावा, नए नियम में, वह उनका परमेश्वर है जो विश्वास के द्वारा पाप से अलग किए गए हैं। 
 
 
फसह का पर्व
 
फसह का पर्व क्या था?
इस्राएलियों के लिए यह वह दिन है जब परमेश्वर
उनको मिस्र देश की गुलामी से निकालकर लाया था,
इसी के स्मरण में और परमेश्वर के लिए
यह धन्यवाद का दिन था।

इस्राएल की प्रजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण विश्राम का दिन फसह का पर्व था। यह मिस्र देश से बाहर निकलने को स्मरण करने और परमेश्वर को धन्यवाद देने का दिन था, जहाँ इस्राएली लगभग ४०० वर्षों तक गुलाम के रूप में रहे थे। परमेश्वर ने १० महामारी भेजकर फिरौन के कठोर हृदय को बदल दिया था। इसका यह अर्थ है कि उसने इस्राएल की प्रजा को मिस्र से बाहर निकाला और कनान देश पहुँचाया। 
इस्राएल के लोगों को अन्तिम महामारी से बलिदान किये गए पहिलौठे के मारे जाने और उसके लहू और ख़तने के द्वारा बचाया गया। इसलिए परमेश्वर ने उनसे कहा कि फसह का पर्व उसकी दया की स्मृति में पीढ़ी से पीढ़ी तक मानना। 
 
 
फसह के पर्व को मनाने के लिए इस्राएली लोगों को क्या करना पड़ता था? 
 
फसह के पर्व को मनाने के लिए इस्राएली
लोगों को क्या करना पड़ता था?
उनको खतना करवाना पड़ता था।

हम जानते हैं कि आत्मिक फसह मनाने की आज्ञा में, हमें हमारे हृदय का खतना करना चाहिए। इस्राएली लोग फसह पर्व में ख़तने का बराबर पालन करते थे।
यह निर्गमन १२:४३-४९ में लिखा है कि “यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, फसह के पर्व की विधि यह है: कोई भी परदेशी उसमें से न खाए; पर जो किसी का मोल लिया हुआ दास हो, और तुम लोगों ने उसका खतना किया हो, वह तो उसमें से खा सकेगा। पर परदेशी और मज़दूर उसमें से न खाएँ। उसका खाना एक ही घर में हो; अर्थात् तुम उसके माँस में से कुछ घर के बाहर न ले जाना; और बलिपशु की कोई हड्डी न तोड़ना। पर्व का मनाना इस्राएल की सारी मण्डली का कर्त्तव्य है। और यदि कोई परदेशी तुम लोगों के संग रहकर यहोवा के पर्व को मनाना चाहे, तो वह अपने यहाँ के सब पुरूषों का खतना कराए, तब वह समीप आकर उसको माने; और वह देशी मनुष्य के तुल्य ठहरेगा। पर कोई भी खतनारहित मनुष्य उसमें से न खाने पाए। उसकी व्यवस्था देशी और तुम्हारे बीच में रहनेवाले परदेशी दोनों के लिए एक ही हो”। तब परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा कि खतना विधि के बाद फसह का पर्व मनाना। 
कौन थे जिन्हें फसह के पर्व में मेमने का माँस खाने और फसह का पर्व मनाने की अनुमति थी? केवल वह जिसका खतना किया गया हो फसह पर्व को मना सकेगा। फसह का मेमना, जैसा हम सब जानते हैं, यीशु मसीह है उसने संसार के पापों को अपने ऊपर उठा लिया। 
तब, पुराने नियम और नए नियम में खतना क्या है? ख़तने का अर्थ पुरूष लिंग के अग्रभाग को ढकने वाली त्वचा को काटना। इस संसार में यीशु मसीह को भी जन्म के आठवें दिन के बाद खतना किया गया। परमेश्वर ने आज्ञा दी है कि खतना वाले ही फसह पर्व की विधि में सम्मिलित हो सकेंगे और यह स्पष्ट किया है कि जो कोई खतना रहित है, वह फसह पर्व में सम्मिलित नहीं हो सकता। 
इसलिए परमेश्वर ने जैसा ठहराया है, प्रत्येक का खतना होना है। यदि आप यीशु में विश्वास करते हैं, तो आपको नए नियम में ख़तने के अर्थ को जानना चाहिए । 
 
 
ख़तने की विधि क्या थी जिसे परमेश्वर ने इब्राहीम को पालन करने की आज्ञा दी?
 
कैसे इब्राहीम और उसके वंशज परमेश्वर
की संतान बन सकते थे?
खतना करवाने के द्वारा।

उत्पति में, परमेश्वर इब्राहीम के सामने प्रकट हुआ और उसके साथ और उसकी संतानों के साथ वाचा बांधी। उत्पति अध्याय १५ में, परमेश्वर ने इब्राहीम के वंशजो से प्रतिज्ञा की कि वे आकाश के तारों के समान असंख्य होंगे और वह उन्हें उत्तराधिकार में कनान देश देगा। 
और अध्याय १७ में, वह अब्राहम से कहता है कि यदि वह और उसके वंशज वाचा के देश में प्रवेश करें और खतना करें, तब वह उनका परमेश्वर होगा और वे उसके लोग होंगे। परमेश्वर की यह वाचा अब्राहम और उसकी संतानो के साथ थी। परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की कि जब वे उसकी वाचा पर विश्वास करेंगे और खतना करेंगे, जिसका अर्थ था कि वे उसकी प्रजा बन जाते थे, और वह उनका परमेश्वर हो जाता था। 
उत्पति १७:७-८ कहता है, ‘मैं तेरे साथ और तेरे पश्चात् पीढ़ी-पीढ़ी तक तेरे वंश के साथ भी इस आशय की युग-युग की वाचा बाँधता हूँ, कि मैं तेरा और तेरे पश्चात् तेरे वंश का परमेश्वर रहूँगा। और मैं तुझ को, और तेरे पश्चात् तेरे वंश को भी, यह सारा कनान देश जिसमें तू परदेशी होकर रहता है, इस रीति से दूँगा कि वह युग-युग उनकी निज भूमि रहेगी, और मैं उनका परमेश्वर रहूँगा।’ यह खतना अब्राहम और उसके वंशजो के साथ परमेश्वर की वाचा का चिन्ह था। 
 
 
आत्मिक ख़तने का अर्थ क्या है?
 
आत्मिक खतना क्या है?
यह हमारे हृदय के सारे पापों को यीशु
के बपतिस्मा में विश्वास करने के
द्वारा अलग करना है।

क्योंकि अब्राहम ने परमेश्वर के वचन पर विश्वास किया था, परमेश्वर ने उसे धर्मी और अपनी संतान बनाया। यह खतना परमेश्वर और अब्राहम के मध्य वाचा का चिन्ह था। 
‘मेरे साथ बाँधी हुई वाचा का पालन तुझे और तेरे पश्चात् तेरे वंश को करना पड़ेगा, वह यह है: तुम में से एक एक पुरूष का खतना हो’ (उत्पति १७:१०)।
शारीरिक ख़तने का अर्थ पुरूष लिंग के अग्र भाग की चमड़ी को काटना है: आत्मिक रूप से यह यीशु के बपतिस्मा में हमारे विश्वास के द्वारा हमारे सारे पाप यीशु के ऊपर डाल दिये जाने का प्रतीक है। हमारा आत्मिक रूप से खतना तब होता है जब हम यीशु के बपतिस्मा के माध्यम से पानी और आत्मा के सुसमाचार में उद्धार को स्वीकार करने के द्वारा अपने सारे पापों से अलग हो जाते हैं। नए नियम में खतना यीशु के बपतिस्मा के माध्यम से अपने सारे पापों से अलग होना है। 
इसलिए पुराने नियम में खतना, नए नियम में यीशु का बपतिस्मा है; और दोनों ही परमेश्वर की वाचा हैं, जो हमें उसकी संतान बनाती हैं। इसलिए पुराने नियम में खतना और नए नियम में यीशु का बपतिस्मा दोनों एक ही और एक जैसे हैं। 
जैसे ही अब्राहम की संतान खतना करते थे, वे परमेश्वर के लोग बन जाते थे। हम भी परमेश्वर की संतान बन जाते हैं जब हम अपने मनों से सारे पापों को काटकर अलग करते हैं। यह हम विश्वास करने के द्वारा करते हैं कि संसार में पाप नहीं है क्योंकि जब यीशु यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया तब जगत के सारे पापों को उठा लिया था। 
यीशु का बपतिस्मा सब पापियों को उनके पापों से काटकर अलग कर दिए जाने के द्वारा धर्मी बनाता है। जैसा कि ख़तने की विधि में पुरूष लिंग के अग्र भाग की चमड़ी को अलग किया जाता था। इसलिए जब यीशु ने यरदन यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लिया तब मनुष्य जाति के पापों को उनके हृदय से काट दिया गया। जो यह विश्वास करता है उसका आत्मिक रूप से खतना होता है और वे परमेश्वर के धर्मी लोग हो जाते हैं।
 
 
गलत विश्वास जो लोगों को परमेश्वर से अलग करता है ।
 
क्या है जो इस्राएलियों को परमेश्वर से 
दूर करता है?
खतना रहित होना।

परमेश्वर ने अब्राहम से कहा खतना रहित पुरूष अर्थात् जिसका खतना नहीं किया गया है वह अपने लोगों में से नष्ट किया जाएगा। तब, शारीरिक खतना क्या है? और आत्मिक खतना क्या है? यदि शरीर का खतना शरीर के एक हिस्से से चमड़ी के टुकड़े को काटना है, तो आत्मिक खतना हमारे हृदयों के सारे पाप काट कर अलग कर उन्हें यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाल दिया जाता है। 
यीशु का बपतिस्मा मनुष्यजाति का आत्मिक खतना है। इसके द्वारा सारे संसार के पापों को हमसे अलग करके यीशु के ऊपर डाल दिया गया है। इस कारण यीशु को यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने बपतिस्मा दिया और सारी मनुष्यजाति को आत्मिक ख़तने के द्वारा बचाया और उनके सारे पापों को अलग कर दिया। 
सारी मनुष्यजाति के पापों को यीशु के ऊपर डाल दिया गया। परमेश्वर, अब्राहम का, इसहाक का, याकूब का और अब्राहम के सब वंशजो जिनके साथ परमेश्वर ने एक वाचा स्थापित की थी, उन सब का परमेश्वर हो गया और उसने उनके ख़तने के द्वारा ऐसा किया। इस प्रकार वह उनका परमेश्वर है जिन्होंने अपने सारे पापों को ख़तने के द्वारा अलग कर दिया। 
खतना क्या पाप को काटता है? यह अब्राहम के साथ परमेश्वर की वाचा है और उन सब के साथ जो यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु को अपनी मुक्ति के लिए विश्वास करने के द्वारा नया जन्म लेते हैं। इस तरह, वह हमें अपनी संतान होने का अधिकार देता है। इसी प्रकार वह उनका परमेश्वर है जिनका खतना हो गया है। 
परमेश्वर अब्राहम से बोला, ‘पीढ़ी-पीढ़ी में केवल तेरे वंश ही के लोग नहीं, पर जो तेरे घर में उत्पन्न हुआ हो। अथवा परदेशियों से रूपये कर मोल लिया जाए; ऐसे सब पुरूष भी जब आठ दिन के हो जाएँ, तब उसका खतना किया जाए। जो तेरे घर में उत्पन्न हो, अथवा तेरे रूपये से मोल लिया हो, उसका खतना अवश्य ही किया जाए; इस प्रकार मेरी वाचा, जिसका चिन्ह तुम्हारी देह में होगा, वह युग-युग रहेगी। जो पुरूष खतनारहित रहे, अर्थात् जिसकी खलड़ी का खतना न हो, वह प्राणी अपने लोगों में से नष्ट किया जाए, क्योंकि उसने मेरे साथ बाँधी वाचा को तोड़ दिया’ (उत्पति १७:१२-१४)।
जो कोई बिना आत्मिक ख़तने के यीशु के पास आने की कोशिश करे, वह अपने लोगों में से नष्ट किया जाएगा। नए नियम में आत्मिक खतना यीशु का बपतिस्मा है, जिसके द्वारा संसार के सारे पापों को उसके ऊपर डाल दिया गया था। 
जो कोई यीशु में विश्वास करता है, वह पुराने नियम के खतने में और नए नियम में यीशु के बपतिस्मा में भी विश्वास करेगा, ताकि वे आत्मा पाए, सारे पापों से बच जाए, और वह परमेश्वर की संतान बन जाए। हम जो यीशु में विश्वास करते हैं, उनके लिए पुराने नियम का खतना और नए नियम में यीशु का बपतिस्मा दोनों समान हैं। 
यदि हम ख़तने के सही अर्थ को समझने में नाकाम होते हैं या आत्मिक ख़तने के द्वारा उद्धार को अपने मन में स्वीकार नहीं कर सकते हैं जो नया जन्म लेने की अनुमति देता है, तो हमारा विश्वास करना व्यर्थ है। हम सोचते हैं कि हम परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य हैं, परंतु यह रेत के ऊपर विश्वास का घर बनाने जैसा है। 
परमेश्वर उन सबको जो उस विश्वास करते हैं, उनको खतना करने, यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा छुटकारा पाने में, और आत्मिक ख़तने में विश्वास करने को कहता है। खतना किए बिना, हम उसके लोग नहीं बन सकते। ख़तने के बिना, परमेश्वर के लोग होने की संभावना को नकारना है। इसलिए परमेश्वर चेतावनी देता है कि कोई भी चाहे वह रूपये देकर खरीदा गया गुलाम हो या परदेशी, फसह के पर्व में भाग लेने से पूर्व उसका खतना करना होगा। 
यहाँ तक कि इस्राएल देश में जन्मा मूल निवासी भी यदि खतना रहित होता तो उसे अपने लोगों में से निकाल दिया जाता था। इस्राएल के लोगों के साथ परमेश्वर की वाचा उन सब लीगों पर भी लागू होती है जो यीशु पर विश्वास करते है। 
निर्गमन अध्याय १२ में, इस्राएली लोग जो फसह के मेमने का माँस और कड़वा साग-पात खाते थे, वे सब खतना किए हुवे होते थे। फसह के मेमने का माँस खाने का अधिकार केवल उन्हें दिया जाता था जिनका खतना किया गया हो। 
यह जानना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि इस्राएली लोग जब मेमने का माँस खाते थे और मेमने का लहू द्वार की दोनों बाजुओं और घरों के चौखट के सिरों पर लगा देते थे, तो उनका भी खतना हो जाता था। 
परमेश्वर की चेतावनी के अनुसार यदि एक व्यक्ति जो खतना रहित है, वह अपने लोगो में से नष्ट कर दिया जाता था और परमेश्वर की संतान होने का अधिकार खो देता था। इसका मतलब आत्मिक ख़तने में अविश्वास करने का पाप लोगों को तबाही की ओर ले जाता है। केवल जिनका यीशु के बपतिस्मा के द्वारा आत्मिक खतना हो गया है, वह बच जायेगा। 
’उस पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है’ (१ पतरस ३:२१)। अर्थात् बपतिस्मा का अर्थ शरीर का मैल छुड़ाना नहीं, वह तो शुद्ध अंतःकरण से परमेश्वर के प्रति वचनबद्ध होना है। क्या आप विश्वास करते हैं कि यरदन नदी में यीशु के बपतिस्मा के द्वारा आपके सारे पाप यीशु के ऊपर चले गये थे? यदि आप सचमुच समझते हैं और इस सच्चाई में विश्वास करते हैं, तो आप अवश्य जानेंगे कि आपका आत्मिक खतना हुआ है और आप एक धर्मी व्यक्ति बन जाते हैं। और आप अवश्य आत्मिक सच्चाई में भी विश्वास करेंगे कि उसके बपतिस्मा के बिना क्रूस पर उसका लहू निरर्थक होगा। 
यदि आप यीशु के क्रूस पर बिना आत्मिक ख़तने और यीशु के बपतिस्मा के विश्वास करते हैं, तो आप अपने आपको परमेश्वर की दया से बाहर पायेंगे। आप पायेंगे कि अभी भी आपके मन में पाप है। 
हम इस सच्चाई में विश्वास करते हैं कि परमेश्वर के छुटकारे का कार्य यीशु मसीह के बपतिस्मा से प्रारंभ होता है और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा पूरा किया गया है। यह करने के लिए हमें सच्चाई के वचनों को, यीशु का बपतिस्मा और उसके लहू को, हमारे उद्धार के रूप में अपने हृदयों में ग्रहण करना होगा। 
इस विश्वास के साथ, हम अंधकार की शक्ति को दूर भगा सकते हैं और ज्योति की संतान हो जाते हैं। यह विश्वास उन लोगों को जिनका वास्तविक नया जन्म हुआ है, आत्मिक रूप से साधारण दर्जे के विश्वासियों से अलग करता है। 
हमारे प्रभु, यीशु हमसे उसमें बने रहने को कहते हैं। उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे सारे पापों को हमेशा के लिए धो दिया है। इसलिए, परमेश्वर की संतान होने का चिन्ह पाने के लिए हमें यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करना चाहिए। यदि हम ऐसा करने से चूक जाते हैं, तो हम उससे, अलग हो जाएंगे। 
उद्धार का छुटकारा नए नियम में यीशु का बपतिस्मा और पुराने नियम में ख़तने के अलावा कोई दूसरा नहीं है। हमारा छुटकारा तभी पूर्ण होता है जब हम यीशु के बपतिस्मा (आत्मिक खतना) और क्रूस पर उसके लहू (फसह के मेमने का लहू) दोनों में विश्वास करते हैं।
पुराने नियम में शरीर के ख़तने को नए नियम में यीशु के बपतिस्मा से जोड़ दिया है। यशायाह ३४:१६ हमें कहता है कि बाइबल में प्रत्येक शब्दों का जोड़ा है। ‘यहोवा की पुस्तक से ढूँढकर पढ़ो: इनमें से एक भी बात बिना पूरा हुए न रहेगी; कोई बिना जोड़ा नहीं रहेगा। क्योंकि मैंने अपने मुँह से यह आज्ञा दी है और उसी की आत्मा ने उन्हें इकट्ठा किया है।’
पुराने नियम का प्रत्येक शब्द नए नियम के साथ जुड़ा हुआ है। परमेश्वर का एक भी वचन उसके प्रतिरूप में कम नहीं है। 
 
 
उनका क्या होगा जो गलत तरीके में मूर्खतापूर्ण विश्वास करते हैं?
 
संसार के सब विश्वासियों में
से कौन नरक में जाएंगे?
वे जो आत्मिक ख़तने में विश्वास
नहीं करते हैं।

आज यहाँ पर अनेक लोग हैं जो केवल फसह के मेमने के लहू में विश्वास करते हैं। वे कहते हैं, ‘खतने का क्या मतलब है? यह पुराने नियम में केवल यहूदियों के लिए लागू होता था। हम नए नियम में अपने शरीर का खतना नहीं करते हैं।’
वास्तव में यह सच है। मैं सलाह नहीं दे रहा हूँ कि हमें शारीरिक खतना करना होगा। प्रेरित पौलुस ने आत्मिक ख़तने के विषय में स्पष्ट व्याख्या की है कि यह हृदय का खतना है जो मैंने अब किया है। 
मैं आपको यह नहीं कहता कि शरीर का खतना करो। हमारे लिए शरीर के ख़तने का कोई अर्थ नहीं है, परंतु हम यीशु के पास आते हैं और यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा आत्मिक खतना होने से हम सारे पापों से बच जाते हैं। 
कुछ लोगों का नया जन्म हुआ है, उनका आत्मिक खतना भी हुआ है। जो कोई यीशु में विश्वास करता है उसका आत्मिक खतना हो जाता है। यह सारे पापों से अलग होने और धर्मी होने का एकमात्र रास्ता है। केवल हमारे आत्मिक ख़तने के बाद हम पाप से मुक्त हो जाते हैं। इसलिए हमें हृदय से स्वीकार करना चाहिए कि यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा हमारा आत्मिक खतना हुआ है। 
प्रेरित पौलुस भी आत्मिक ख़तने के महत्व में विश्वास करते थे। उन्होनें कहा कि ‘खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है’ (रोमियो २:२९)। हम में से प्रत्येक को पाप से मुक्त होने के लिए आत्मिक रूप से खतना करना जरूरी है। 
क्या वास्तव में आपके पापों को आपसे अलग करके यीशु मसीह के ऊपर डाल दिये गये हैं? यहाँ तक कि नए नियम में भी, जो कोई यीशु में विश्वास करते हैं उनके हृदय का खतना यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा होता है। 
प्रेरित पौलुस अपनी पत्रियों में यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर सारे मनुष्यजाति को संसार के पापों से बचाता है और उन्हें अपने लोग बनाता है। इस्राएली प्रजा खतना करने के द्वारा परमेश्वर की प्रजा बन जाती और हम भी अपने सारे पापों को यीशु मसीह के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा उस पर डाल देते हैं, तब उसकी संतान बन जाते हैं।
परमेश्वर हमें अपनी प्रजा के रूप में तब स्वीकार करते हैं जब वह हमारे विश्वास को यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस के लहू में देखते हैं। यही विश्वास हमारा आत्मिक खतना करता है और हमें उद्धार की ओर ले जाता है। 
 
 
यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा पापियों के लिए उद्धार का अस्तित्व है 
 
उद्धार का कार्य यीशु के द्वारा
कैसे पूरा किया गया था?
उसके बपतिस्मा और क्रूस पर
मृत्यु के द्वारा।

पापियों के उद्धार को यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के पानी और क्रूस पर बहाए गए लहू के द्वारा पूरा कर दिया है। मेमने का लहू न्याय के लिए था, और यीशु का बपतिस्मा आत्मिक खतना था जिससे द्वारा हमारे सारे पापों को उसके ऊपर डाल दिया गया। 
मसीही कलीसियाएं आज इस राष्ट्र के लिए आत्मिक ख़तने की ज्योति नहीं बन पायी हैं। हालाँकि इन दिनों में पुराने नियम के ख़तने का कोई अर्थ नहीं है, फिर भी यीशु के बपतिस्मा की उपेक्षा नहीं की जा सकती। 
मैं आपसे कहता हूँ कि आपके सारे पापों को यीशु के बपतिस्मा के द्वारा दूर कर दिया गया है और यीशु के बपतिस्मा ने आपको सारे पापों से बचा लिया है। क्या आप इसमें विश्वास करते हैं? यदि आप यीशु के बपतिस्मा की उपेक्षा करते हैं, तो आप नया जन्म लेने के सुसमाचार को कभी नहीं समझ सकते क्योंकि छुटकारे का सम्पूर्ण सुसमाचार यीशु के बपतिस्मा के माध्यम से है। 
हम कैसे यीशु के बपतिस्मा की उपेक्षा कर सकते हैं, जिसे परमेश्वर हमें आत्मिक खतना बताता है? यदि हम बाइबल पढ़ें तो हम देख सकते हैं कि खतना और फसह के मेमने के लहू का निकट का संबंध है। 
प्रेरित यूहन्ना के द्वारा जो सुसमाचार प्रचार किया गया वह कोई और दूसरा नहीं, बल्कि यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए गए उसके लहू का शुभसमाचार था। वह १ यूहन्ना ५:६ में कहता है, ‘यही है वह जो पानी और लहू के द्वारा आया था, अर्थात् यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा वरन् पानी और लहू के द्वारा आया था।’ 
वह कहता है यीशु पानी, लहू और आत्मा के द्वारा आया। न केवल पानी के द्वारा, और न केवल लहू के द्वारा वरन् पानी, लहू और आत्मा इन तीनों के द्वारा आया। यह तीनों तत्व यीशु के बपतिस्मा, क्रूस पर यीशु का लहू और मृतकों में से पुनरूत्थान, एक ही बात हैं। यह हमारे उद्धार का प्रमाण है। 
 
 
क्यों बाइबल यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के विषय में बताती है?
 
क्या इस्राएल के लोग केवल फसह पर्व के दिन 
केवलमेमने के लहू द्वारा बचाये गये थे?
नहीं। फसह पर्व मनाने से पहले उनका
खतना हो चुका था।

यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका लहू जो हमें पानी और आत्मा से नया जन्म लेने की अनुमति देता है। निर्गमन अध्याय १२ कहता है, ‘तुम अपने लिए एक मेमना लेना, और उसका कुछ लहू लेकर घर के द्वार की चौखट के सिरे और दोनों अलंगों पर लगाना। जब मैं लहू देखूंगा तो वहाँ से आगे बढ़ जाऊंगा।’
इसे जानिए, क्या यह संभव है कि हम केवल फसह के मेमने के लहू में विश्वास करने के द्वारा अपने सारे पापों से बच सकते हैं? तब नए नियम में यीशु के बपतिस्मा के बारे में अधिक से अधिक क्यों कहा गया है? प्रेरित कहते हैं ‘उसी के साथ बपतिस्मा में गाड़े गएʼ (कुलुस्सियों २:१२)। ‘तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है, उन्होंने मसीह को पहिन लिया हैʼ (गलातियों ३:२७) ‘अर्थात् बपतिस्मा, यीशु के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता हैʼ (१ पतरस ३:२१)। 
प्रेरित पतरस, पौलुस और अन्य यीशु मसीह के सभी चेलों ने यीशु के बपतिस्मा के बारे में कहा है। यह यीशु का यरदन नदी में बपतिस्मा है जिसे उन्होंने संदर्भित किया है। और यही यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास है जो पानी और आत्मा से नया जन्म लेने की सच्चाई है। 
आपको सच्चाई बताऊं, पिछले १० वर्षों मैं बिना यीशु के बपतिस्मा को जाने केवल उसके लहू में विश्वास करता था। परंतु यह स्वयं की बुद्धि मेरे हृदय के पापों को दूर नहीं करता। मैं यीशु में अपने सारे हृदय से विश्वास करता था, परंतु मेरा हृदय अभी भी पाप से भरा हुआ था। 
१० वर्षों के बाद, मैंने आत्मिक ख़तने के अर्थ को खोज निकाला (यीशु के बपतिस्मा के द्वारा) और तब मेरा नया जन्म हुआ। केवल तभी मैंने सच्चाई को स्वीकार किया: पुराने नियम में खतना, नए नियम में यीशु के बपतिस्मा का प्रतीक है। मैंने इस पर विश्वास किया और अभी भी करता हूँ। 
‘नए नियम में यीशु का लहू और उसके बपतिस्मा दोनों में विश्वास करना क्या यह सच्ची आस्था है? क्या मेरा विश्वास बाइबल के अनुसार सच्चा है?ʼ इसके बाद मेरा नया जन्म हुआ, मैं इन बातों से अचंभित था। 
हालाँकि, मैं यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के संदेश में विश्वास करता था; फिर भी मेरे मन में प्रश्न था। ‘क्या यही सच्चा विश्वास है कि जब यीशु का बपतिस्मा हुआ तब मेरे सारे पापों को यीशु के ऊपर डाल दिया, या यह सच्चा विश्वास है कि यीशु ने केवल अपनी क्रूस की मृत्यु के द्वारा मुझे बचाया। यह विश्वास करना पर्याप्त नहीं है कि यीशु मेरा प्रभु और उद्धारकर्ता है?’ जब मैं निर्गमन अध्याय १२ पढ़ रहा था तब मैंने इसके बारे में सोचा।
बहुत से लोग आज निर्गमन १२ अध्याय को पढ़ते तो हैं, पर दोबारा कभी उस पर विचार नहीं करते। यह स्पष्ट है कि यीशु मसीह उनके उद्धारकर्ता के रूप में क्रूस के ऊपर मारा गया। वे सोचते हैं यह सही है, वे मसीह के लहू में विश्वास करते हैं, और कहते हैं कि यीशु मसीह ही प्रभु है और परमेश्वर का पुत्र है, परंतु वे अभी भी पापी हैं। वे सोचते हैं कि यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने के द्वारा वे बच जाएंगे, फिर भले ही उनके दिलों में पाप क्यों ना हो। 
इस प्रकार की आस्था सच्ची आस्था नहीं है। अकेली यह आस्था उन्हें नया जन्म लेने में सहायता नहीं कर सकती। केवल यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू ही हमें धर्मी बनाता है। 
तब निर्गमन अध्याय १२ का वास्तव में क्या अर्थ है? मैंने बाइबल के अंदर देखा और सोचने लगा, ‘क्या केवल यीशु के लहू में विश्वास करना उचित है जब की उसके बपतिस्मा की उपेक्षा की जाए?ʼ इसके पहले कि मैंने निर्गमन को पढ़ना समाप्त किया, मैंने इस सच्चाई को ढूंढ निकाला कि उद्धार केवल मसीह के लहू से नहीं है, बल्कि उसके बपतिस्मा के साथ ही है। मुझे निश्चय था कि हमारे हृदय का खतना यीशु के बपतिस्मा के साथ ही साथ क्रूस पर उसके लहू के कारण भी है। 
 
क्यों अधिकांश मसीही अभी
भी पापी हैं?
क्योंकि वे यीशु के बपतिस्मा में
विश्वास नहीं करते।

निर्गमन १२:४७-४९ में मैंने वास्तविकता को जाना कि फसह के मेमने का माँस खाने से पूर्व उसका खतना किया जाता था। इस कारण परमेश्वर ने पद ४९ में कहा, ‘उसकी व्यवस्था देशी और तुम्हारे बीच में रहनेवाले परदेशी दोनों के लिए एक ही हो।’
इसलिए, जिसका खतना नहीं हुआ है, वह फसह बलि का माँस नहीं खा सकता था। यह वह सच्चाई है जिसे मैंने पाया। उसी तरह, जब हम यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते हैं, तो हमें पहिले इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए कि यीशु ने यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया था। और इसके बाद इस सच्चाई को स्वीकार करें कि यीशु मसीह हमारे इन पापों के लिए क्रूस मारा गया। 
जब मुझे एहसास कि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया था उसकी वजह से क्रूस पर उसका न्याय हुआ, तब मुझे आत्मिक ख़तने का भी एहसास हुआ जो हमें जगत के सारे पापों और अपराधों से बचाता है। 
उसी पल मुझे एहसास ह़ा की मेरे सारे पाप मेरे हृदय से चले गये। मेरा हृदय हिम के समान श्वेत हो गया और अन्त में मैंने अपने हृदय में पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार को ग्रहण किया। 
मुझे एहसास हुआ कि दो बातें हैं जो हमें बचाती हैं, पुराने नियम में खतना और मेमने का लहू और नए नियम में यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा सारे पापों का उसके ऊपर डाला जाना। पुराने नियम में खतना और नए नियम में बपतिस्मा वास्तव में एक ही और समान भी हैं। 
यीशु मसीह का न्याय किया गया इसलिए नहीं कि उसने कोई पाप किया था, लेकिन अपने बपतिस्मा के द्वारा उसने संसार के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया था। जो यह विश्वास करता है कि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला जो मनुष्यजाति का प्रतिनिधि है, उसने यीशु को यरदन नदी में बपतिस्मा दिया और इसके द्वारा संसार के सारे पापों को उस पर ऊपर डाल दिया, वो यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू दोनों में भी विश्वास करता है।
क्यों बहुत से लोग उसके बपतिस्मा का इन्कार करते हैं जबकि बाइबल में बार-बार इसकी व्याख्या की गई है? यह इन्कार करने के द्वारा वे अभी भी पापी हैं। भले ही वे यीशु में विश्वास करते हैं, लेकिन वे अभी भी परमेश्वर से अलग हैं। वे यीशु पर विश्वास करने के बावजूद भी नरक में जाएंगे। 
वे यीशु में विश्वास करने के बावजूद भी जैसे पापी हो सकते है? क्यों वे पापी के जैसे रहते हैं? क्यों वे बर्बादी की राह में नीचे जा रहे हैं? यह बहुत ही दुःखदायी स्थिति है। वे लगातार पाप करते हैं क्योंकि वे इस सच्चाई में विश्वास नहीं करते कि संसार के सारे पापों को यीशु मसीह के ऊपर डाल दिया गया है, जो अपने आत्मिक बपतिस्मा के द्वारा सब लोगों के लिए अनंत उद्धार को लाया है। 
लोग सोचते हैं कि वे यीशु के लहू में विश्वास करने के द्वारा बचाए जाते हैं, परंतु इस प्रकार का विश्वास कभी भी उन्हें पूर्ण नहीं बनाता। क्यों? क्योंकि वे अपने पापों को यीशु को सौंपने में असफल हैं। 
हम केवल पानी (मसीह का बपतिस्मा) और उसके लहू में विश्वास करने से ही बच सकते हैं। यही एक मार्ग है जिसे परमेश्वर ने हमें दिया: उद्धार का आत्मिक खतना। तब, और केवल तब हम परमेश्वर की सच्ची संतान हो सकते हैं। 
हम अपने आप से पूछें। ‘यदि हम केवल आत्मिक ख़तने की भाँति यीशु के लहू में विश्वास करें तो क्या हम अपने पापों को पूर्णरीति से धो सकते हैं?’ उत्तर प्राप्त करने के लिए हमें अपने हृदय की गहराई में झांककर कर देखना है। 
पुराने नियम में, लोग ख़तने और फसह के मेमने के लहू के द्वारा बचाये गये थे, जैसे हम हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा उद्धार को प्राप्त करते हैं। इस तरह हम परमेश्वर के न्याय से और इस पापमय संसार से बच जाते हैं। जो विश्वास करते हैं वे परमेश्वर की संतान बन जाते है और परमेश्वर उनका पिता बन जाता है। 
दो बातों पर विश्वास करने के द्वारा व्यक्ति बचाया जाता है और परमेश्वर का हो जाता है: पहला, खतना और फसह बलि का लहू और दूसरा, यीशु का बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा। यीशु के अनुसार यह पानी, लहू और आत्मा से नया जन्म लेने का सच्चा अर्थ है। 
 
 
बाइबल में दर्शाया गया पानी और आत्मा का छूटकारा क्या है ?
 
क्या केवल यीशु के लहू में विश्वास करने के
द्वारा पापी धर्मी बन जाता है ?
कभी नहीं।

यीशु स्वर्ग के सिंहासन को छोड़कर इस संसार में नीचे उतर आया। उन्होंने ३० वर्ष की उम्र में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से संसार के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए पानी में बपतिस्मा लिया। 
क्रूस पर यीशु का लहू संसार के सब पापियों के पापों के लिए, स्वयं को दोषी ठहराने के लिए था। यीशु मसीह इस संसार में उद्धारकर्ता के रूप में और सारे पापियों को उनके पापों से अपने पानी और लहू के द्वारा बचाने आये। 
क्या हम केवल लहू से नया जन्म लेते हैं? नहीं। हम अपने पापों से यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा बचाये जाते हैं। जो केवल यीशु के लहू में विश्वास करतेब है उनको मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ। ‘क्या पापी मनुष्य केवल मसीह के लहू में विश्वास करने द्वारा धर्मी हो जाता है, या यह यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू दोनों के द्वारा होता है? क्या यह विश्वास करने से कि हमारे सारे पाप यीशु के बपतिस्मा द्वारा और उसके लहू के द्वारा उसके ऊपर चले जाते हैं या केवल उसके लहू के कारण? सत्य कौन-सा है, मैं आपसे पूछता हूँ?’
पानी और आत्मा से वास्तविक नया जन्म लेने के लिए, हमें निम्नलिखित बातों को पूरा करना है। हमें विश्वास करना है कि यीशु शरीर धारण करके इस संसार में आए, ताकि वह स्वयं यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के द्वारा संसार के सारे पापों को अपने ऊपर लेकर और हमारे सारे पापों के लिए क्रूस पर दण्ड पाये। यीशु मसीह में विश्वास करने के द्वारा, वह हमारा सच्चा उद्धारक है। इस तरह हमारा वास्तविक नया जन्म हो सकता है। 
मैं आपसे फिर पूछता हूँ। बाइबल में दर्शाया गया विश्वास क्या है? क्या यह यीशु के लहू में विश्वास है या यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू दोनों में विश्वास है? 
यीशु के लहू में विश्वास करना इस प्रकार है कि यीशु को संसार के सारे पापों के लिये सज़ा मिली और वह क्रूस पर दंडित किया गया। वह कुचला गया और हमारे पापों के लिए घायल किया गया ताकि हम भयानक न्याय से बच जाएं। परंतु यह पूर्ण सच्चाई नहीं हैं। इस सिंद्धात पर विश्वास करने से पहले, हमें एक समस्या का समाधान करना होगा। आखिर क्यों यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया? 
बाइबल स्पष्ट बताती है कि पाप की मजदूरी मृत्यु है। इस संसार में यीशु ने कोई भी पाप नहीं किया। वह मानव शरीर में एक मनुष्य के रूप में कुंवारी मरियम से जन्मा। परंतु वह अभिव्यक्ति स्वरूप में अपने लोगों के लिए पवित्र परमेश्वर के पुत्र के रूप में और पापियों का उद्धारक बन संसार में आया। इसलिए उसने क्रूस पर अपनी मृत्यु से पहले यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया। जब उसका बपतिस्मा हुआ, उसने हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया। इस प्रकार बिना बपतिस्मा और क्रूस पर लहू बहाए उसे दण्ड नहीं दिया जा सकता था। 
 
 
पुराने नियम में बलिदान की प्रथा
 
पुराने नियम में बलिदान चढाने के
लिए अनिवार्य शर्त क्या थी?
(१) एक निर्दोष जीवित पशु
(२) उसके ऊपर हाथ रखा जाए
(३) उसका लहू

आइये हम इस सच्चाई को देखें जो पवित्र मिलापवाले तम्बू की बलि-प्रथा में थी। पुराने नियम में, या तो एक पापी या महायाजक बलि किये जानेवाले मेमने या बकरे के सिर पर अपने हाथों को रखने के द्वारा अपने पापों को या इस्राएल के पापों को उसके सिर पर डाल देता था। तभी बलि पशु को मारा जाता और वेदी के सामने अर्पित किया जाता था। पुराना नियम तो नए नियम के लिये पूर्वगामी था, और यीशु मसीह बलि का मेमना जिसे परमेश्वर ने भेजने की प्रतिज्ञा की थी। 
कब आप ने अपने सारे पापों को यीशु के ऊपर डाले? मैं चाहता हूँ कि आप इस प्रश्न के उत्तर के विषय में सोचें। पुराने नियम में इस्राएली लोग बिना बलि-पशु के ऊपर हाथ रखे बलिदान नहीं चढ़ाते थे (बलि पशु के ऊपर हाथ रखने का अर्थ है बलि पशु के ऊपर पाप को डाल देना)। पाप बलि को वेदी के सामने लाने से पहले, हाथों को बलि पशु के ऊपर रखना पापों को लादने का स्थान ले लेता था। 
‘वह अपना हाथ होमबलि पशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिए प्रायश्चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा’ (लैव्यव्यवस्था १:४)। यह लैव्यव्यवस्था में लिखा है कि सभी बलिदानों के ऊपर हाथों को रखना आवश्यक था। बलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा इस्राएली लोग अपने पापों को उसके ऊपर सौंपते थे, और विशवास के साथ उसके लहू और माँस को परमेश्वर के आगे चढ़ाने से, उनके पापों से वे बच सकते थे। पुराने नियम में इस्राएली भी विश्वास से बचाये गये थे। 
जब एक होमबलि को परमेश्वर के समक्ष लाया जाता था, और पापी अपने हाथों को उसके सिर पर रखता था, इस प्रकार उसके पाप उस पर चले जाते थे। तब बलि पशु को पापी के लिए बलिदान किया जाता था। उसके लहू को वेदी के चारों ओर सींगों के ऊपर छिड़क दिया जाता था और जो बच जाता था उसे वेदी के नीचे जमीन पर बहा दिया जाता था। इस प्रकार पापी अपने पापों से बच जाते था। 
नए नियम में पापी अपने सारे पापों से अपने विश्वास के कारण बच सकता है जो पानी और यीशु के लहू में विश्वास के कारण होता है। यूहन्ना ५:१-१० कहता है कि एक पापी जब यीशु के बपतिस्मा और मेमने के लहू में (क्रूस पर) विश्वास करता है तब वह बच जाता है। 
इसलिए कोई भी पापी बच सकता है, जब वह यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू दोनों में विश्वास करे। वह यीशु का बपतिस्मा और उसके लहू, दोनों पवित्रात्मा के साथ ही, पानी और आत्मा से अवश्य नया जन्म पाएगा। 
अतिप्रियों, क्या आप केवल यीशु के लहू में विश्वास करने के द्वारा बचाये जा सकते हैं? जो यह सोचते हैं कि वे केवल क्रूस के लहू में विश्वास करने से नया जन्म ले सकते हैं, उसके हृदयों में अभी भी पाप हैं। वरन् हम यीशु के बपतिस्मा जो नए नियम में आत्मिक खतना है, उस पर विश्वास करने के द्वारा सारे पापों से बच जाते हैं, जो पिछले समय पुराने नियम में वर्णित ख़तने के बराबर है। 
सभी संप्रदायों के उनके अपने सिद्धांत हैं। हम जानते हैं कि इन सब का नरक में जाना निश्चित है, नहीं तो वे अपने गलत विश्वास में सदा के लिए छोड़ दिए जाएंगे। प्रेसबिटेरियन कलीसिया प्रारब्ध के सिद्धांत पर महत्व देते हैं; मेथोडिस्ट कलीसिया आर्मिनियस के सिध्धांत, अर्थात् दूसरे शब्दों में, मानववाद पर; बेपटिस्ट कलीसिया, बपतिस्मा पर; और होलीनेस कलीसिया, पवित्र जीवन पर; ये सब वचन की सत्यता से अलग-अलग दिशा में जा रहे हैं। 
परंतु नया जन्म लेने के लिये बाइबल में वचन की सच्चाई क्या कहती है? बाइबिल कहती है कि सच्चाई यीशु के बपतिस्मा में और उसके लहू में मिलती है। जो कोई विश्वास करता है और परमेश्वर के वचन का पालन करता है, और पानी और आत्मा से नया जन्म में विश्वास करता है, अवश्य उद्धार पाता है।
 
 
यीशु के बपतिस्मा का रहस्य क्या है ?
 
नए नियम में आत्मिक
खतना क्या है?
यीशु का बपतिस्मा

यीशु का बपतिस्मा ही आत्मिक खतना था। पुराने नियम में, परमेश्वर कहता है कि जो कोई खतना रहित है उसे उसके लोगों में से नष्ट कर दिया जाए।
हम जानते और विश्वास करते हैं कि नए नियम में आत्मिक खतना निश्चित रूप से यीशु का बपतिस्मा है। क्योंकि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु मसीह का बपतिस्मा उसकी लोक सेवकाई का आरंभ था। हम उसके बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा अपना आत्मिक खतना कर सकते हैं। हम इन कारणों का ध्यानपूर्वक विचार करते हैं कि क्यों यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया। 
‘उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। परन्तु यूहन्ना यह कह कर उसे रोकने लगा, ‘मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है? यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, ‘अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’ तब उसने उसकी बात मान ली’ (मत्ती ३:१३-१५)। 
यीशु का बपतिस्मा यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यरदन नदी में अर्थात् ‘मृत्यु की नदी’ में हुआ था। यूहन्ना ने यीशु के सिर पर अपने हाथों को रखा और उसे पूरी तरह पानी में डुबा दिया। यह सही तरीका है बपतिस्मा देने का (बपतिस्मा: पूरी तरह पानी में डुबो देना)। इस प्रकार यीशु ने संसार के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया, उसने ठीक उसी तरह बपतिस्मा लिया, जैसा कि पुराने नियम में बलिपशु के सिर पर हाथों को रखने का संदर्भ दिया गया है। 
जो यीशु में विश्वास करते हैं उनके लिए यीशु का बपतिस्मा आत्मिक खतना है। ‘इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है’ (मत्ती ३:१५)। यह उचित था कि यीशु ने सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लिया और हमारा परमेश्वर और उद्धारकर्ता बन गया। इसलिए यह उचित था, जैसा कि लिखा गया है कि वह हमारे सारे पापों को अपने सिर पर लेकर क्रूस पर मारा गया। यीशु के बपतिस्मा में सब पापियों को नया जन्म लेने के योग्य बनाने की सामर्थ है और यही पानी और आत्मा के सुसमाचार का रहस्य है। 
पहली बात कि यीशु ने अपनी लोक सेवकाई में सब पापियों को उनके पापों से यूहन्ना बपतिस्मादेनेवाले द्वारा बपतिस्मा लेने के द्वारा बचा लिया है। बपतिस्मा का अर्थ है, ‘धो देना, मर जाना, सौंप देना।ʼ 
बपतिस्मा लेने के लिए परमेश्वर के द्वारा जो तरीका मांग किया गया था; यीशु ने स्वयं संसार के सारे पापों को उपने ऊपर ले लिया। ‘देखो, यह परमेश्वर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है’ (यूहन्ना १:२९)। यीशु के बपतिस्मा का अर्थ है कि संसार के सब लोग जो उस पर विश्वास करते हैं, उनका आत्मिक खतना हो जाता है। 
कुछ समय बाद, वह परमेश्वर के मेमने के रूप में क्रूस पर चढ़ाया गया जिसने संसार के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और सब पापियों के बदले में न्याय को स्वीकार किया। इस प्रकार उसने सारी मनुष्यजाति को पाप से बचा लिया। 
इसलिए जो कोई यीशु के बपतिस्मा, पुराने नियम का खतना, और क्रूस पर उसके लहू को उद्धार के तौर पर विश्वास करता है, वे अपने सारे पापों से बच जाता है। यीशु मसीह ने सारे पापियों को अपने बपतिस्मा और अपने लहू से बचा लिया है। यही आत्मिक ख़तने की सच्चाई है। 
 
 
क्या उद्धार केवल लहू के द्वारा है? नहीं, ऐसा नहीं है
 
यीशु संसार में किस के
द्वारा आया?
पानी और लहू के द्वारा

१ यूहन्ना ५:४-८ कहता है, ‘क्योंकि जो कुछ परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह संसार पर जय प्राप्त करता है; और वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है, हमारा विश्वास है। संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका विश्वास यह है कि यीशु, परमेश्वर का पुत्र है। यही है वह जो पानी और लहू के द्वारा आया था, अर्थात् यीशु मसीह: वह न केवल पानी के द्वारा वरन् पानी और लहू दोनों के द्वारा आया था। और जो गवाही देता है, वह आत्मा है; क्योंकि आत्मा सत्य है। गवाही देनेवाले तीन हैं, आत्मा, पानी, और लहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।’
प्रिय मसीहियों, आपके उद्धारकर्ता के रूप में उसके लिए आपकी गवाही क्या है? यह कोई और नहीं, यह परमेश्वर के पुत्र में विश्वास ही है जो पानी और लहू के द्वारा आया। 
संसार को जितनेवाला जय क्या है? यह पानी और आत्मा में विश्वास की सामर्थ। यह यीशु मसीह है जो पानी और लहू के द्वारा आया। और यह आत्मा है जो गवाही देता है, क्योंकि आत्मा सत्य है। 
यहाँ पर तीन बातें हैं जो पृथ्वी पर गवाही देती हैं: पानी, लहू, और आत्मा। और ये तीनों एक ही में सहमत हैं। यीशु इस संसार में शरीर में आया, उसने बपतिस्मा लिया, और क्रूस पर मर कर हमें अनंत दण्ड से बचाया। इसका प्रमाण है परमेश्वर, हमारा सृष्टिकर्ता, जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में सब पापियों के लिए उद्धारकर्ता बन गया और आत्मा है जो हम सबको बचाता है।
यह हमारे लिए प्रमाण है कि यीशु, इस संसार में शरीर में आत्मा के रूप में आया, जिसने यरदन नदी में बपतिस्मा लेकर हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया, और हमारे अपराधों के न्याय के लिए क्रूस पर अपना लहू बहाया। इस प्रकार वह पानी और आत्मा का मूल सुसमाचार है। 
 
 
पानी और लहू क्या है जो परमेश्वर के उद्धार की गवाही देता है? 
 
पुराने नियम में दर्शाए गए ख़तने का
प्रतिरूप क्या है?
यीशु का बपतिस्मा

पानी यीशु मसीह के बपतिस्मा को दर्शाता है। पुराने नियम में यीशु के बपतिस्मा का आशय ख़तने से है। पुराने नियम में ख़तने का प्रतिरूप नए नियम में यीशु का बपतिस्मा है। इसका प्रमाण है कि यीशु के बपतिस्मा में ही संसार के सरे पापों को यीशु पर डाल दिया गया था।
कोई भी जो इस सच्चाई में विश्वास करता है, वह परमेश्वर के सम्मुख खड़ा हो सकता है और शुद्ध मन से कह सकता है, ‘प्रभु, आप मेरे उद्धारकर्ता हो क्योंकि मैं आपके पानी और आपके लहू में विश्वास करता हूँ, जो पानी और आत्मा का सुसमाचार है। इसलिए, मैं पाप से मुक्त हूँ। मैं परमेश्वर की एक संतान हूँ और आप मेरे उद्धारकर्ता हो।’ हम सच्चे विश्वास के साथ इस दावे को ईमानदारी से व्यक्त करने में सक्षम हैं। हमारे यह कहने के लिए सक्षम है क्योंकि यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में हमारा विश्वास है। 
वह वचन क्या है जो हमें नया जन्म लेने की अनुमति देता है? यह यीशु मसीह का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका लहू है, जो हमारे हृदय में उद्धार की गवाही देता है। यही पानी और आत्मा से नया जन्म लेने का सुसमाचार है।
प्रिय मसीहियों, आपसे मैं फिर कहता हूँ, ‘क्या एक पापी केवल मसीह के लहू में विश्वास करने से बच सकता है?ʼ नहीं। उद्धार की माँग मात्र क्रूस पर उसकी मृत्यु में विश्वास करना नहीं है। यह तो केवल पानी और लहू दोनों में विश्वास करना है - पानी और आत्मा का सुसमाचार - जिससे पापी नया जन्म ले सके। आइये, अब आपको मैं बाइबल से बताता हूँ कि कौन पानी के बारे में कहता है या दूसरे शब्दों में, यीशु के बपतिस्मा के बारे में। 
१ पतरस ३:२१-२२ कहता है, ‘उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है। वह स्वर्ग पर जाकर परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया; और स्वर्गदूत और अधिकारी और सामर्थी उसके अधीन किए गए हैं।’ 
पतरस गवाही देता है कि बपतिस्मा एक प्रतीक है जो अब हमें बचाता है, और यह पाप से छुटकारे का प्रमाण भी था। यीशु का बपतिस्मा पुराने नियम में ख़तने के समान है। जैसा कि इस्राएली लोग पुराने नियम काल में परमेश्वर के वचन में विश्वास करते और खतना करने के द्वारा परमेश्वर की संतान बन जाते थे। वैसे ही नए नियम में यीशु का बपतिस्मा हमारे सारे पापों से हमें बचाता है। इसलिए पुराने नियम में खतना और नए नियम में यीशु का बपतिस्मा दोनों एक समान हैं अर्थात् एक ही हैं। 
क्या अब आप सब विश्वास करते हैं कि यीशु का बपतिस्मा सचमुच ख़तने के समान है? जैसा कि १ पतरस ३:२१ में लिखा है, यह पानी उस बपतिस्मा का प्रतीक है जिससे अब तुम्हारा उद्धार होता है। क्या आप परमेश्वर के लिखे गए शब्द के साथ तर्क करेंगे? 
यह कैसे होगा कि हम; जो इस संसार में रहते हैं, पाप से मुक्त हो सकते हैं? यह केवल इसलिए है क्योंकि यीशु मसीह ने सारी धार्मिकता को पूरा करने के लिए बपतिस्मा लिया था कि पाप से हमें छुटकारा मिल सके। मत्ती ३:१५ कहता है ‘अब तो धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’
क्योंकि संसार के सारे पापों को यीशु के ऊपर डाल दिया गया, सब जो उसमें विश्वास करते हैं वे अब पाप से मुक्त हैं। इस सच्चाई को मानकर स्वीकार करने के द्वारा अब हम सब धर्मी बन गये हैं क्योंकि उसके बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को यीशु पर डाल दिया गया है। यीशु ने हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और हमें सब दण्ड से बचाने के लिए क्रूस पर मारा गया। 
प्रिय मित्रों, दो चीजें हैं जो कि पापियों को उनके पापों से बचाती हैं पानी और लहू। यीशु का हमारे पापों को अपने ऊपर लेना और क्रूस पर हमारे लिये उसकी मृत्यु। ये दो मुख्य बातें हैं कि यीशु मसीह ने इस संसार में हमारे लिए ३ वर्ष लोक सेवकाई की। 
यूहन्ना १:२९ कहता है, “देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है”। यीशु मसीह ने बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर लिया था और हमारे अपराधों के प्रायश्चित लिए क्रूस पर मारा गया। यीशु परमेश्वर का पुत्र है, और सृष्टिकर्ता। उसने ख़तने की वाचा को पूरा किया जिसे परमेश्वर ने पुराने नियम में संसार के पापों को दूर करने के लिए बनाया था। 
जो कोई अपने हृदय में यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार, पानी और आत्मा में विश्वास करता है, वह पानी और आत्मा से नया जन्म लेता है। और परमेश्वर उन सबका उद्धारकर्ता बन जाता है जो उस पर विश्वास करते हैं। प्रभु का धन्यवाद हो, हालेलूय्याह! यीशु ने हमारे छुटकारे को पूरा किया और संसार के सारे पापों से हमें बचा लिया जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की थी। 
 
 
शरीर के मैल का निराकरण नहीं
 
क्या शरीर समय के साथ
पवित्र बनता है?
नहीं। शरीर लगातार मृत्यु के दिन तक
पाप करता रहता है।

१ पतरस ३:२१ कहता है, ‘उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।’ 
जब कोई यीशु मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करता है, इसका यह अर्थ नहीं है कि वह शरीर में पाप करना बंद कर देता है। हम लगातार पाप करते हैं, परंतु यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करने के द्वारा, हम अपने सांसारिक पापों को यीशु को सौंपते हैं, जिसने क्रूस पर अपने लहू से पापों के लिये कीमत चुका दी है। हमारे उद्धार के लिए आवश्यक इन दो बातों में विश्वास करने के द्वारा, हम अपने पापों से बच जाते हैं। 
नया जन्म लेने का अर्थ है, यीशु को अपने हृदय में सारी मनुष्यजाति के उद्धारकर्ता के रूप में स्वागत करना है। हमारे हृदय में पापों की क्षमा भी प्राप्त होती है। जब हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करते हैं, तब हमारे हृदय का नया जन्म होता है, लेकिन हम अपनी देह में लगातार पाप और अपराध करते रहते हैं। लेकिन, हमारी देह के सारे पाप पहिले ही क्षमा कर दिया गये हैं।
यीशु का बपतिस्मा उन सब लोगों के लिए एक गवाही है जो बचा लिये गये हैं। जब हम यीशु के बपतिस्मा द्वारा पाप क्षमा में विश्वास करते हैं, तब अपने सारे पापों से अलग हो जाते हैं। जब हम उद्धार की सच्चाई यीशु के बपतिस्मा एवं पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा धर्मी होने को अपने हृदय में ग्रहण करते हैं, तो हमारा नया जन्म होता है और हम सारे पापों से अलग हो जाते हैं।
पुराने नियम में अब्राहम को धर्मी बनाये जाने का यही विश्वास है, जिसके बारे में प्रेरित पौलुस ने कहा है, और यह उद्धार का प्रतीक भी है जिसकी गवाही पतरस देता है । 
जैसा कि अब्राहम ने परमेश्वर के वचन को सुना और उसमें विश्वास किया और धर्मी ठहरा, जब हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु में विश्वास करते हैं, तो बच जाते हैं। 
यूहन्ना १:१२ कहता है, ‘परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।’ क्या आपने यीशु मसीह को स्वीकार किया है, जो हमें अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे सारे पापों से हमें बचाता है, वह आपका उद्धारकर्ता है? हमें उस छुटकारे (उद्धार) को प्राप्त करना चाहिए जो परमेश्वर के पुत्र के पानी और लहू के द्वारा हमें दिया गया है। 
क्या छुटकारा यीशु के लहू से है? नहीं। यह यीशु के पानी और लहू के द्वारा है। बाइबल में यह स्पष्ट लिखा है कि छुटकारा यीशु के लहू के द्वारा नहीं है। यह तो यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा है। 
नए नियम में यीशु का बपतिस्मा आत्मिक ख़तना है। यह छुटकारे की सच्चाई है जो हमारे सारे पापों से हमें अलग करता है। उसके द्वारा संसार के पापों के लिए न्याय किये जाने की सच्चाई का अर्थ यह है कि आपके और मेरे पापों के लिये उसको दण्ड दिया गया। 
पापों की क्षमा के सुसमाचार को प्राप्त करने के द्वारा, यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू से, हम अपने सारे पापों के न्याय से मुक्त हो जाते हैं। हमारे विश्वास के कारण उन सारे पापों से जो हम इस संसार में करते है, बच जाते हैं। जब हम यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू को अपने छुटकारे के रूप में ग्रहण करते हैं, तो हमारे हृदय के सारे पापों को घो दिया जाता है। क्या आप विश्वास करते हैं और समझते हैं कि यह सही है? मैं निष्ठापूर्वक आशा करता हूँ कि आप सब पानी और आत्मा के सुसमाचार में अवश्य विश्वास करेंगे। विश्वास करें और अनन्त जीवन प्राप्त करें।
पौलुस प्रेरित कहता है, ‘खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है’ (रोमियों २:२९)। हम हृदय का खतना कैसे करते है? जब हम यीशु मसीह के इस संसार में शरीर में आने, उसके बपतिस्मा में जिसके द्वारा उसने संसार के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया, क्रूस पर हमारे पापों के लिए उसकी मृत्यु में और उसके मृतकों में से पुनरुत्थान में विश्वास करते हैं, तब हम आत्मिक रूप से अपना खतना कर सकते हैं। पौलुस प्रेरित कहता है कि खतना तो हृदय का है। हृदय के ख़तने का अर्थ यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करना है। यदि आप अपने हृदय का खतना चाहते हैं, तो यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार को अपने हृदय में ग्रहण करना होगा। और केवल तब, आप सचमुच में परमेश्वर की संतान बन सकते हैं।
 
 
क्या यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला परमेश्वर की ओर से आया था?
 
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कौन था?
वह सारी मनुष्यजाति का प्रतिनिधि और हारून के वंश
का आख़री महायाजक था।

यहाँ, हमें यह पूछने की आवश्यकता है कि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कौन है जिसने यीशु मसीह को बपतिस्मा दिया। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला सारे मनुष्यजाति का प्रतिनिधि हैं। मत्ती ११:११-१४ कहता है, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो स्त्रियों से जन्मे हैं, उसमें से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से कोई बड़ा नहीं हुआ; पर जो स्वर्ग के राज्य में छोटे से छोटा है, वह उससे बड़ा है। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के दिनों से अब तक स्वर्ग के राज्य में बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवान उसे छीन लेते हैं। यूहन्ना तक सारे भविष्यद्वक्ता और व्यवस्था भविष्यद्वाणी करते रहे। और चाहो तो मानो कि एलिय्याह जो आनेवाला था, वह यही है।’ 
प्रिय मसीहियों, यीशु कहते हैं कि जो स्त्रियों से उत्पन्न हुए हैं, उनमें से कोई भी यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बड़ा नहीं है। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के जन्म के साथ, परमेश्वर की प्रथम वाचा का युग, पुराने नियम के युग का समापन होता है। यह पूरा हुआ क्योंकि यीशु मसीह ने परमेश्वर की वाचा को पूरा किया जो अंत में आया। 
तब वे कौन थे, जिन्होंने परमेश्वर की वाचा को पूरा किया? यीशु मसीह और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने संसार के सारे पापों को यीशु मसीह के ऊपर डाल दिया। पुराने नियम का अंतिम महायाजक कौन था? हारून का वंशज कौन था? यीशु मसीह स्वयं गवाही देते हैं कि यह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के अलावा कोई दूसरा नहीं था। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला मनुष्यजाति का प्रतिनिधि था, जो स्त्रियो में से उत्पन्न हुए है, उनमें सबसे महान था। 
आइये, जो सच्चाई हमारे पास है उस पर हम विचार करें। मूसा, अब्राहम, इसहाक और याकूब ये सभी स्त्रियों से उत्पन्न हुए थे। परंतु पुराने नियम और नए नियम दोनों में लोगों के बीच, कौन सबसे महान है जो स्त्रियों से उत्पन्न हुआ है? वह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला है। 
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, पुराने नियम का अंतिम भावुश्यवक्ता है और हारून का वंशज है, जिसने नए नियम में परमेश्वर के मेमने को बपतिस्मा दिया। ठीक उसी तरह जैसे कि हारून पुराने नियम में प्रायश्चित के दिन बलि-पशु के ऊपर हाथों को रखता था। उसने यीशु मसीह को बपतिस्मा दिया और संसार के सारे पापों को यीशु के ऊपर डाल दिया था। वह परमेश्वर का एक सेवक था। यीशु मसीह को बपतिस्मा देने के द्वारा उसने सारी मनुष्यजाति के हृदय में आत्मिक ख़तने को पूरा किया। 
यीशु के बपतिस्मा के साथ-साथ, हम उसके लहू में अपने छुटकारे की गवाही के रूप में विश्वास करना जरुरी हैं। यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और उसके लिए क्रूस पर दण्ड पाया। और हमारे लिए केवल एक चीज है जो हमें करनी है कि हम इस पर पूरी तरह से विश्वास करें। यह परमेश्वर की इच्छा है कि हम उस पर विश्वास करें कि यीशु ने हमारे लिए क्या किया है। 
एक बार आप पानी और आत्मा से नया जन्म लेने के सुसमाचार को अपने हृदय में ग्रहण करते हैं, तो आप अब्राहम और परमेश्वर की संतान बन सकते हैं। यहाँ बहुत थोड़े हैं जो यीशु में है जबकि यहाँ बहुत से हैं जिन्होंने अभी तक उसे अपने हृदय में ग्रहण नहीं किया है। 
लगभग दिन गुजरने पर है और वो काली रात आने वाली है। यीशु के बपतिस्मा में विश्वास करें और उसे अपने हृदय में आने दीजिए। यीशु के बपतिस्मा में विश्वास और उसका लहू आपके आत्मिक छुटकारे के साथ आपको आशीषित करेगा। 
हमेशा स्मरण रखें कि आत्मिक अभिषेक तब होता है जब आप छुटकारे के सुसमाचार, यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करते हैं। मैं आपसे जानना चाहता हूँ क्या आप बुद्धिमान कुँवारियों के समान यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार और उसके लहू में विश्वास करने के द्वारा आत्मिक मशाल (कलीसिया) और तेल (आत्मा) लेकर तैयार हैं (मत्ती २५:४)। जो यीशु में विश्वास करते हैं वह अपने हृदयों में आत्मा के साथ कलीसिया में जाते हैं।
 
 
यीशु ने किसके लिए बपतिस्मा लिया ?
 
किस कारण यीशु ने
बपतिस्मा लिया था?
मनुष्यजाति के सारे पापों को
धोने के लिए।

‘परन्तु यूहन्ना यह कह कर उसे रोकने लगा, ‘मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?’ यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, ‘अब तो ऐसा होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’ तब उसने उसकी बात मान ली (मत्ती ३:१४-१५)। 
यीशु ने मनुष्यजाति के सारे पापों को धोने के लिए बपतिस्मा लिया। यीशु परमेश्वर का पुत्र और हमारा उद्धारकर्ता है। वह सृष्टिकर्ता है जिसने हमारी सृष्टि की है। यीशु मसीह इस संसार में परमेश्वर की इच्छा से हमें उनकी संतान बनाने के लिए आए। 
पुराने नियम में सारे भविष्यवक्ताओं ने किसके विषय में कहा है? उन्होंने यीशु मसीह के विषय में कहा। पुराने नियम के सब भविष्यवक्ताओं ने यीशु के लिए कहा कि वह इस दुनिया में हमारे सारे पापों को अपने ऊपर लेने और हमेशा के लिए पाप से स्वतंत्र करने के लिए आएगा। 
जैसा कि पुराने नियम में भविष्यवाणी की गई थी, यीशु इस संसार में मनुष्यजाति आदम और हव्वा से लेकर पृथ्वी के अंतिम व्यक्ति तक के सारे पापों को दूर करने के लिए आया। 
अब, आप यीशु मसीह के बपतिस्मा और उसके लहू से अपने हृदय में छुटकारा पाएं। क्या आप अभी भी अनिश्चित हैं कि सच्चाई यही है? ’अब तो ऐसा होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।’ यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने सारी धार्मिकता को पूरा करने के लिए यीशु को बपतिस्मा दिया। 
‘बपतिस्मा’ शब्द का अर्थ है, ‘धो देना’। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा पुराने नियम में जिस तरह हाथों को ऊपर रखने का तरीका बताया गया है उसी रीति से बपतिस्मा लिया। 
इसके उपरान्त उन्होंने यरदन नदी में अपने आप को डुबाकर मनुष्यजाति के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया। यह नदी पापी के लिए मृत्यु और न्याय की प्रतीक है। मसीह की पानी में लगाई गई डुबकी, क्रूस पर उसकी मृत्यु को दर्शाती है। पानी में से बाहर आना उसके पुनरुत्थान का प्रतीक था। यीशु क्रूस की मृत्यु के बाद तीसरे दिन पुनरुत्थित हुए। 
यीशु हमारा उद्धारक परमेश्वर है। सच्चाई यह है कि यीशु ने इस संसार में बपतिस्मा लिया, क्रूस पर लहू बहाकर मरा, तीसरे दिन पुनरुत्थित हुआ और अब परमेश्वर के दाहिने हाथ विराजमान है। यह स्पष्ट प्रमाण है कि उसने सम्पूर्ण मनुष्यजाति को मृत्यु से बचा लिया। क्या आप इस सच्चाई में ईमानदारी से विश्वास करते हैं? 
यीशु का बपतिस्मा नए नियम का आत्मिक खतना है। ‘खतना वही है जो हृदय का और आत्मा में है’। हृदय का बपतिस्मा तब पूरा होता है जब हम यीशु के बपतिस्मा और उसके ऊपर अपने सम्पूर्ण पापों को सौंप देने की सच्चाई पर विश्वास करते हैं। हृदय का खतना यीशु के बपतिस्मा की पहचान है। जहाँ से हम अपने सारे पापों को यीशु के ऊपर सौंप देते हैं। 
क्या आपके हृदय का खतना हुआ है? यदि आप हृदय के ख़तने में विश्वास करते हैं तो आपके सब पाप सदा के लिए एक बार में अवश्य धुल जाएंगे। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यीशु मसीह सम्पूर्ण धार्मिकता को पूरा कर सारे पापियों के लिए उद्धार को निश्चित करता है। 
प्रिय मसीहियों, उद्धार के इस प्रमाण को अपने हृदय और विचारों में ग्रहण करें, यह सच्चाई है। एक बार जब आप यीशु के उद्धार को अपने हृदय में ग्रहण करेंगे, आप अपने सारे पापों से मुक्त हो जाएंगे। ‘किन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं’ (यूहन्ना १:१२)।
क्या आप जानते हैं, क्यों यीशु ने इस जगत में बपतिस्मा लिया? क्या अब आप इसमें विश्वास करते हैं? मनुष्यजाति के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया। यह ख़तने का बपतिस्मा था। यीशु का बपतिस्मा हमें आत्मिक खतना प्रदान करता है। इस कारण प्रेरित पौलुस हमें अपने हृदय का खतना करने को कहते हैं। यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू से हमें साफ-साफ बचा लिया है क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। इसलिए इस पर अपने हृदय में विश्वास करें। हमें परमेश्वर के वचनों को जो हमारे हृदय में है उसे ‘हाँ, आमीन’ कहना चाहिए। क्या यह सही नहीं है? क्या आप इसमें विश्वास करते हैं? 
 
 
क्या आप इस सच्चाई को अपने हृदय में स्वीकार करते हैं?
 
यीशु की आराधना करने से पहले
हमें क्या करना चाहिए?
हमें पानी और लहू की सच्चाई को अपने
हृदय में स्वीकार करना चाहिए।

इस संसार में यीशु को आए लगभग २००० वर्ष हो गए हैं। इन दिनों में और परमेश्वर के अनुग्रह के युग में यीशु के पानी और लहू की इस सच्चाई को अपने हृदय में स्वीकार करने के अलावा हमारे करने के लिए यहाँ और कुछ भी नहीं है। 
‘खतना जो हृदय का है।’ हमारे हृदय का खतना विश्वास करने के द्वारा हो गया है। हम केवल विश्वास से बचाये गए हैं। पुराne नियम में इस्राएली लोग खतना और फसह के लहू से बचाए गये थे। इसके लिए मेमने के लहू को वे अपने घरों की चौखटों के सिरे और दोनों बाजुओं में लगा देते थे। 
जो कोई यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करें, वह परमेश्वर के न्याय से नहीं डरेगा क्योंकि यह उससे पार हो चुका है। परंतु जिसने अपने हृदय में इस सच्चाई को स्वीकार नहीं किया है, उन पर परमेश्वर का न्याय आ पड़ेगा। यहाँ बहुत से हैं जो यीशु में व्यर्थ में विश्वास करते हैं और इस प्रकार से अभी भी अपने पाप के गुलाम हैं। 
इस अवस्था में वे कैसे पहुंचे? क्यों वे अभी भी पाप से कष्ट भुगत रहे हैं? यह केवल इसलिए कि वे यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू की सच्चाई को नहीं जानते। वे केवल यीशु के लहू में विश्वास करते हैं, उसके बपतिस्मा को छोड़ देते हैं या फिर उसे अनदेखा करते हैं। 
क्या उद्धार केवल यीशु के लहू में साधारण विश्वास करने से प्राप्त किया जा सकता है? क्या बाइबल हमें कहती है कि यह ऐसा है? पुराने नियम और नया नियम इसके बारे में क्या कहते हैं? बाइबल के अनुसार, यह न केवल परमेश्वर के मेमने के लहू के द्वारा, परंतु साथ ही यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उद्धार प्राप्त होता है (१ यूहन्ना ५:३-६)।
क्या आप केवल यीशु के लहू में विश्वास करते हैं? जो ऐसा करते हैं उनके हृदयों में अभी भी पाप है। उन्हें अपने गलत विश्वास को छोड़कर सच्चे सुसमाचार की ओर लौटना होगा। 
जो विश्वास नहीं करते अब उन्हें मालूम होना चाहिए कि वे भ्रमित हो गए हैं, वे नहीं जानते कि यीशु ने यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के द्वारा संसार के सारे पाप अपने ऊपर ले लिए हैं। उन्हें अपनी गलती मान लेनी चाहिए कि यीशु के बपतिस्मा को अस्वीकार करके उन्होंने गलत अवश्य किया है। उन्हें इसे अपने हृदय में स्वीकार करना चाहिए कि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा संसार के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया है। उद्धार सुलभ है, लेकिन जब हम केवल यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस दोनों में विश्वास करें तब। दूसरे शब्दो में, केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा हम अनंत जीवन प्राप्त करने के योग्य होते हैं। 
प्रियों, क्या अभी भी आप केवल यीशु के लहू में विश्वास पर निर्भर होकर जीवित हैं? यदि यही स्थिति है, तो निश्चित रूप से आपके हृदय में पाप है। यदि आप पाप करते हैं, तो आपके हृदय में पाप है। यदि आप सोचते हैं कि व्यवस्था का पालन करके आप पाप से मुक्त हो गए है, तो यह केवल एक एहसास मात्र है जो आपकी भावना से बाहर आता है। यह पक्का विश्वास होने की अनुभूति परमेश्वर के वचन के अनुसार नहीं है। 
 
 
अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है
 
सत्य हमें किससे स्वतंत्र करता है?
पाप की व्यवस्था और मृत्यु से।

अभी भी ज्यादा देर नहीं हुई है। आप सभी अनिवार्य रूप से यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास कर सकते हैं, और आपके हृदय का खतना हो जाएगा और आप सारे पापों से मुक्त हो जाएंगे। सारे पापों से मुक्त होने का मतलब है कि आप यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा बचाए गए है। 
क्या आप यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करके अपने पापों से छुटकारा पाना चाहते हैं? एक बार आप इसमें विश्वास कर लेते हैं, तो आप सीख जाते हैं कि उद्धार किसके समान है। आप मन में शांति पाएंगे। तभी, और केवल तभी, आप धर्मी बन पाएंगे। अपने कार्यों से नहीं, परंतु परमेश्वर के वचन में विश्वास करने के द्वारा। अभी भी यदि आप में से कोई केवल यीशु के लहू पर छुटकारे के लिए विश्वास करता है और उस पर निर्भर है, तो मैं आपको उत्साहित करना चाहूँगा कि आप यीशु का बपतिस्मा और उसके लहू दोनों में विश्वास कीजिए। 
प्रिय मसीहियों, मनुष्य जाति का पाप से सम्पूर्ण छुटकारा यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार के द्वारा पूरा किया जा चुका है। आत्मा परमेश्वर है। परमेश्वर एक मानव शरीर में इस संसार में अवतरित हुआ। 
परमेश्वर ने भविष्यवक्ताओं के द्वारा कहा था कि हम उसे यीशु नाम से पुकारेंगे, वह अपने लोगों को उनके पापों से छुड़ाएगा। परमेश्वर ने कहा, ‘देखो, एक कुँआरी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,’ जिसका अर्थ है - परमेश्वर हमारे साथ’ (मत्ती १२३)।
परमेश्वर पापियों को बचाने इस संसार में आए। उन्होंने संसार के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए बपतिस्मा लिया और इस प्रकार सब पापी बचा लिये गये। यह पानी और लहू से उद्धार की सच्चाई है। मैं यहाँ आपसे यह कहता हूँ, क्या हम केवल यीशु के लहू से बचाए गये हैं? निस्संदेह नहीं। हम यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके द्वारा बहाए गए लहू से बचाए गये हैं। 
आज यहाँ बहुत से झूठे भावुश्यवक्ता और पाखंडी हैं जो यीशु के बपतिस्मा में विश्वास नहीं करते। यीशु ने कहा, ‘तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा’ (यूहन्ना ८:३२)।
हम सत्य को जानते हैं। हमें जानना जरूरी है कि क्यों यीशु अपने बपतिस्मा के बारे में कहते हैं, और क्यों हम इसमें विश्वास करें। हमें जानना चाहिए कि क्यों परमेश्वर इस्राएली लोगों से पुराने नियम में ख़तने के लिए कहता है और वह क्यों फसह के मेमने के लहू के बारे में कहता है। 
जब हम केवल कहानी के एक भाग को ही जानते हैं, तो हम कभी भी सच्चाई को नहीं पहचान सकते। यीशु कहते हैं, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य पानी और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता’ (यूहन्ना ३:५)। 
 
 
मसीह में बपतिस्मा लेना
 
हम कैसे मसीह की मृत्यु में
सहभागी हो सकते हैं?
यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे
पापों को यीशु पर डालने के द्वारा।

बाइबल उद्धार के रहस्य की गवाही देता है। क्या यह केवल यीशु के लहू के द्वारा है? नहीं। यह उसके लहू और उसके बपतिस्मा दोनों के द्वारा है। प्रेरित पौलुस इसके बारे में रोमियों के ६ अध्याय में तथा अन्य बहुत सी पत्रियों में कहता है। 
आइए हम पढ़े रोमियों ६:३-८ पढ़े, ‘क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया। अतः उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ के गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चिय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएँगे। हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर लादा गया ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, और हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। इसलिए यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है कि उसके साथ जीएँगे भी।ʼ 
आइए पद ५ को देखें। यह कहता है, ‘क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चिय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएँगे।’
उसकी मृत्यु हमारी मृत्यु थी क्योंकि उसके बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उस पर डाल दिया गया था। इसलिए यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू का संबंध हमसे है। 
यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में हमारा विश्वास यीशु के साथ हमें एक करता है। ‘क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है’ (रोमियों ६:२३)। इसलिए क्रूस पर यीशु का मरना हमारी मृत्यु है। हमारे सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिये उसने बपतिस्मा लिया। इस सच्चाई में विश्वास करना, हमें यीशु मसीह, हमारे उद्धारकर्ता के साथ एक करता है।
 
 
हमें धार्मिक जीवन के भाग रूप यीशु में अधूरा विश्वास नहीं करना चाहिए
 
“वह विश्वासयोग्य और धर्मी” है 
इसका का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि यीशु ने एक ही बार में हमेशा
के लिए हमारे पापों को धो दिया है, और जो कोई
इस सच्चाई में विश्वास करे वह बच जाता है।

बहुत से लोग यीशु में एक धार्मिक जीवन शैली के जैसा विश्वास करते हैं, इसलिए वे कलीसिया जाते हैं और प्रार्थना में आँसू बहाते हैं और वे अपने पापों को मानते और प्रतिदिन क्षमा के लिए प्रार्थना करते हैं। ‘यीशु, मैं जानता और विश्वास करता हूँ कि तू मेरे लिए क्रूस पर मारा गया। हाँ, मैं विश्वास करता हूँ।ʼ
स्पष्टरूप से वे इस परिच्छेद को नहीं समझते हैं। ‘यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है’ (१ यूहन्ना १:९)। वे दावा करते हैं कि पापों को अंगीकार करने से उनके प्रतिदिन के पाप माफ़ किए जाते है। परंतु जो पाप ऊपर के परिच्छेद में बताए गए हैं, वह प्रतिदिन के मामूली पाप नहीं हैं। इस परिच्छेद का मतलब है कि जब हम अंगीकार करते है की हम अभी भी पापी है तब हमें एक बार में हमारे सारे पापों से क्षमा कर दिया गया है। 
‘अतः विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता हैʼ (रोमियों १०:१७)। ‘तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा’ (यूहन्ना ८:३२)। 
प्रिय मसीहियों, सच्चाई स्पष्ट है कि यदि आप विश्वास करें कि यरदन नदी में यीशु अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को अपने ऊपर लिए बगैर क्रूस पर मर गए, तो आपका विश्वास करना व्यर्थ है। यदि कोई मसीही अपने सारे पापों से बचना चाहता है, तो वह विश्वास करे कि यरदन में यीशु के बपतिस्मा के द्वारा एक बार में हमेशा के लिए उसके सारे पाप यीशु पर चले गए और उसने क्रूस पर हमारे सारे पापों का दण्ड सहा। दूसरे शब्दों में, हम यीशु का बपतिस्मा और उसके लहू दोनों में विश्वास करें। 
‘किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें’ (प्रेरितों ४:१२)। यीशु मसीह अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारा उद्धारकर्ता ठहरा है। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठाने लिया है और हमारा उद्धारकर्ता बना है। हमें अनन्त दण्ड से बचाने के लिए यीशु पानी और लहू के द्वारा आया। ‘क्योंकि धार्मिकता के लिये मन में विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिए मुँह से अंगीकार किया जाता हैʼ (रोमियो १०:१०)। क्या आप पापी हैं या धर्मी व्यक्ति? 
गलातियों ३:२७ कहता है, ‘और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।’ यह पद हमसे सच्चाई कहता है कि यीशु अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर लेने के बाद क्रूस पर चढ़ाया गया। वह तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा और अब पिता के दाहिने हाथ जा बैठा है। जो उसमें विश्वास करते हैं, उन सब के लिए यीशु उद्धार का प्रभु बन गया है। 
यदि यीशु का बपतिस्मा नहीं होता, यदि वह हमारे लिए क्रूस पर अपना लहू नहीं बहाता, तो वह हमारा उद्धारकर्ता नहीं होता। हम तभी बच सकते हैं जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं। 
 
 
मूसा के बेटें भी
 
क्यों परमेश्वर ने मिस्र देश के मार्ग में मूसा
को मारने की कोशिश कि?
क्योंकि उसने अपने बेटों का खतना
नहीं किया था ।

अतिप्रियों, आप यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा अपने पापों के छुटकारे का रहस्य सुन रहे हैं। यह एक आश्चर्यजनक आशीष है कि आप परमेश्वर के इन वचनों को सुन सकते हैं। 
क्या यह केवल यीशु मसीह का लहू मात्र है? पुराने नियम में ख़तने और फसह के मेमने के लहू के द्वारा लोग अब्राहम की संतान हो गए। अब हम यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की संतान हो गए हैं। परमेश्वर ने पुराने नियम में मूसा के द्वारा इसका प्रमाण हमें दिखाया है। 
इस्राएलियों को बचाने के लिए, परमेश्वर ने मूसा से बात की और कहा कि वह उसके लोगों को मिस्र से बाहर निकाल ले आए। इसलिए मूसा, अपने ससुर यित्रो की अनुमति से मिद्यान देश को लौटा और वह अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ मिस्र देश की ओर लौट गया। जब उसने अपने परिवार को गदहे पर बिठाया, तब प्रभु मार्ग की एक सराय में मूसा से मिला और उसने मूसा को मार डालने का प्रयत्न किया। 
परन्तु, उसकी बुद्धिमान पत्नी सिप्पोरा इसकी वजह जान गई। उसने एक धारदार चकमक पत्थर लेकर अपने पुत्र का खतना किया और कटी हुई चमड़ी से मूसा का पैर स्पर्श किया, और बोली ‘निश्चय तू मेरे लिए लहू बहानेवाला मेरा पति है!ʼ इसलिए परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया। 
इस प्रकार परमेश्वर कहता है कि वह किसी को भी मार सकता है, यहाँ तक कि यदि वह खतना नहीं करता तो मूसा के पुत्र को भी। इस्राएल के लोगों के लिए, खतना वाचा का चिन्ह था। वे जानते थे कि परमेश्वर अपने लोगों में से उसे नाश करेगा, अगुवे के पुत्र को भी, यदि वह खतना रहित बना हुआ हो। इसलिए, जैसे कि वह अपने पुत्र का खतना होने से रोके रहा, परमेश्वर ने इस कारण मार्ग में मूसा को सावधान किया। 
बाइबल कहती है कि इस कारण सिप्पोरा ने अपने पुत्र की कटी चमड़ी को लेकर मूसा के पाँवों पर फेंक दिया और कहती है, ‘तू लहू बहानेवाला पति है।ʼ ख़तने के लिए परमेश्वर की यही मांग थी (निर्गमन ४:२६)। 
कोई भी मनुष्य जिसने खतना नहीं किया इस्राएलियों के बीच में से नष्ट किया जाए। केवल वे ही जिनका खतना हुआ है, फसह के मेमने का माँस खा सकते थे और उस विधि में परमेश्वर के लोगों के समान शामिल हो सकते थे। 
प्रेरित पौलुस इब्रानी था। उसका जन्म के बाद आठवें दिन खतना किया गया था। उसने महान गुरू गम्लीएल के चरणों में शिक्षा पायी थी और वह इसे स्पष्ट रीति से जानता था कि यीशु मसीह ने यरदन में क्यों बपतिस्मा लिया और क्यों उसे क्रूस पर चढ़ाया गया था। इसलिए प्रेरित पौलुस अपनी सभी पत्रियों में यीशु के बपतिस्मा के बारे में लिखता है। 
प्रेरित पौलुस साथ ही यीशु के लहू के द्वारा हमारे छुटकारे के कार्य के पूर्ण हो जाने के बारे में भी बताता है। उसका लहू केवल पाप से मुक्ति का अंतिम चरण था जबकि सच्चा आत्मिक खतना यीशु के बपतिस्मा से होता है। उसके बपतिस्मा के बिना उसके लहू पर जोर देने का कोई लाभ नहीं है। 
प्रेरित पौलुस अक्सर यीशु के क्रूस के विषय में सीधे चर्चा करता है। ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि यह हमारे उद्धार का अंतिम प्रमाण है। यदि यीशु सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लेता, परंतु क्रूस पर अपना लहू बहाए बिना क्रूस पर हमारे लिए दण्ड सहता तो हम सम्पूर्ण रूप से बचाए नहीं गए होते। इसलिए प्रेरित पौलुस बार-बार क्रूस के विषय में चर्चा करता है। क्रूस हमारे उद्धार की प्रक्रिया में अंतिम और निर्णायक चरण है। 
यदि उद्धार की सच्चाई को बिना तोड़े-मरोड़े इस पीढ़ी के हाथों में सौंप दिया जाए, तो इसके द्वारा बहुत से लोग पाप मुक्त हो जाएंगे। परंतु दुर्भाग्यवश, सच्चाई अंतिम दिनों में कहीं खो गई है, और बहुत से लोग यीशु के बपतिस्मा के सच्चे अर्थ को समझे बिना केवल क्रूस के बारे में जानते हैं। 
क्योंकि उनका विश्वास केवल खोखले सुसमाचार में है इसलिए वे अभी भी पापी हैं, चाहे वे कितने ही वर्षों से उत्साहित होकर यीशु में विश्वास क्यों न कर रहे हो। अपने धार्मिक जीवन के १० वर्षों पश्चात्, यहाँ तक की ५० वर्षों के बाद भी वे पापी ही होंगे। 
 
 
मेरी गवाही
 
क्या परमेश्वर पापी की धार्मिकता
पर ध्यान देता है?
नहीं। वह न्यायी है। धर्मी वही है जो अपने पापों से
मुक्त है, जिन्होंने यीशु के बपतिस्मा के द्वारा
अपने सारे पापों को यीशु पर
डाल दिया है।

जब मैंने यीशु में विश्वास करना आरंभ किया, तब मैं २० वर्ष का था। इसके पहले, मुझे नहीं मालूम था कि मैंने अपने जीवन में कितने पाप किए हैं क्योंकि मैं परमेश्वर की व्यवस्था को नहीं जानता था। उस समय मैं परमेश्वर को जाने बिना अपनी ज़िदगी अपनी तरह से जीता था। 
फिर मैं बीमार हो गया। अत्यधिक बीमार होने पर सोचने लगा कि मैं मर जाऊंगा। इसलिए मैंने निर्णय लिया कि मृत्यु से पहले कम से कम अपने पापों से बचने के लिए कुछ करूं। क्योंकि मैंने सुना था कि यीशु मेरे जैसे पापी के लिये मारे गए। इसलिए मैंने उन में विश्वास करने का निर्णय लिया। आरंभ में, मैं बहुत ही आनंद एवं धन्यवाद से भर गया। 
परंतु कुछ समय बाद यह अनुभूति फीकी पड़ने लगी। कुछ वर्षों बाद ही, ना चाहते हुए भी प्रत्येक दिन मैं नया पाप करने लगा था। मैं फिर से पापी, और पापी होता गया। १० वर्षों के बाद सच्चाई यह थी कि मैं न बदलने वाला पहले जैसा एक पापी था। मैं एक विश्वासी और पापी दोनों था। 
हालांकि, मैं गाता था ‘रोना मुझे नहीं बचाएगा! मेरा चेहरा आंसुओं से भीग जाता है, कि मैं डर को कम नहीं कर सकता, मेरे वर्षों के पाप धोये नहीं जा सकते। रोना मुझे नहीं बचा सकता।’ मैं प्रत्येक समय रोता रहता था कि मैंने पाप किये हैं। 
‘‘प्रिय परमेश्वर, कृपया मेरे पापों को क्षमा कीजिए। एक बार मुझे क्षमा कर दीजिए, मैं फिर कभी पाप नहीं करूंगा।ʼʼ इसके बाद मैंने फिर पाप नहीं किए; मैंने तीन दिनों तक प्रार्थना की। मैंने अपने आप को किनारे के कमरे में बंद कर लिया और तीन दिनों तक उपवास के साथ प्रार्थना की। क्योंकि मेरे विचारों में बहुत बोझ था। मैं रोता और परमेश्वर को क्षमा के लिए कहता। तीसरे दिन, मैं अच्छा महसूस करने लगा। और सोचने लगा कि मैंने अपने आप को उसकी उपस्थिति में पुनः समर्पित कर दिया है। 
‘‘फिर मेरे पापों को धो दिया गया। हाल्लेलूय्याह!’’ अतः मैं कमरे के बाहर आया और कुछ समय के लिए फिर परिश्रम पूर्वक रहने लगा। लेकिन मैं जल्द ही फिर पाप करने लगा और मेरी निराशा बढ़ने लगी। मैं ऊपर कि प्रक्रिया को बड़ी निराशा के साथ बार-बार दोहराने लगा। प्रारंभ में यीशु में मेरा विश्वास बहुत ही कोमल था, परंतु इस घटना के बाद मैंने माना कि मेरे पाप बंद कमरे में धूल की परत की भाँति अधिक मात्रा में बढ़ने लगे हैं। 
१० वर्षों के बाद जब मैं एक बदतर पापी हो गया, तब मैंने अपना जीवन विशेष ढंग से आरंभ किया। ‘‘क्यों मैंने अपने जीवन में बहुत पहिले यीशु में विश्वास नहीं किया? यीशु में विश्वास करना तो ज्यादा आसान था यदि मैं ८० वर्ष होने तक इंतजार करता, इससे पहिले मैं मर जाता। तब, मैं पाप के प्रति सचेत नहीं होता और मुझे प्रतिदिन पश्चात्ताप की आवश्यकता ही नहीं होती।’’ मैंने सोचा कि परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन जीऊंगा। परंतु यह असंभव था। यह मेरी समझ से बाहर था, ऐसा मै सोचने लगा! 
मैंने खोज आरंभ की और परमेश्वर के लिए कुछ नया खोजने लगा। मैंने बहुत सा समय धर्मविज्ञान की पढ़ाई में लगा दिया। परंतु कुछ ही वर्ष बाद, मेरा हृदय और अधिक निष्फल हो गया। इसके पहले की मै धर्मसिद्धांतो के ऊपर किताबें पढ़ना शुरू करता, मैं अक्सर कहता कि मैं संत दानिय्येल के जैसा जीना चाहता हूँ, कभी भी मैं आरामदेह बिस्तर में नहीं सोया। मैंने शपथ ली कि मैं कभी भी मौज-मस्ती नहीं करूंगा, मैंने अपने आपको पूरी रीति से आवश्यकता ग्रस्त लोगों के लिए समर्पित कर दिया। 
जिस समय मैंने इस संत के जीवन के विषय में पढ़ा, मैंने अपने आप से सन्यासी जैसे जीवन जीने का प्रयत्न किया। मैं सीमेंट के कठोर फर्श में घुटने टेकता और एक समय में घण्टो प्रार्थना करता। तब, मैं महसूस करता था जैसे कि मेरी प्रार्थना बहुत महत्तवपूर्ण है, और इसके बाद मैं अपने आप से अच्छा महसूस करता था। 
परंतु १० वर्षों के बाद, मैं इसे और अधिक सहन न कर सका। इसलिए मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की ‘‘प्रिय परमेश्वर आप जो स्वर्ग में हैं, कृपया मुझे बचाइए। मैं सम्पूर्ण हृदय से आप पर विश्वास करता हूँ। मैं जानता हूँ कि मैं आपके लिए अपनी भक्ति को कभी बदल नहीं सकता, भले ही कुछ लोग मेरे गले पर चाकू रखें। यद्यपि मैं आप में सम्पूर्ण हृदय से विश्वास करता हूँ फिर भी मेरे हृदय के अंदर खालीपन क्यों है? क्यों मैं अत्यधिक हताश हूँ? क्यों मैं दूसरों की अपेक्षा ज्यादा भ्रष्ट पापी हो गया हूँ? मैंने पहले कभी पाप के बारे में ज्यादा नहीं सोचा। मैं विश्वास से आया हूँ और अब मुझे आश्चर्य है, क्यों मैं इतने वर्षों से विश्वास करने के बाद भी अत्यधिक बदतर हो गया हूँ। मेरे साथ यह क्या समस्या है?’’
इसकी मुख्य बात यह थी कि मैं इसका कारण समझ गया। बिना अपने पापों से बचे मैं परमेश्वर में विश्वास करता था। उन दिनों मैं इस सच्चाई को नहीं जानता था, और यह मुझे उत्साहित करने के लिए काफी थी। 
मेरे हृदय में पाप था, तो कैसे मैं दूसरों को परमेश्वर के अनुग्रह से छुटकारे के बारे में कहता? कैसे मैं दूसरो को यीशु में विश्वास करने के बारे में बताता? मैंने बार बार परमेश्वर से प्रार्थना की, ‘‘प्रिय परमेश्वर मैं अतिशीघ्र सेमीनरी से स्नातक होने जा रहा हूँ और मेरा एक पास्टर के रूप में अभिषेक होना है। परंतु यदि मैं पाप के साथ पास्टर होता हूँ तो कैसे दूसरे पापियों से छुटकारे के विषय में कह सकता हूँ? मैं अपने आप में एक पापी हूँ और जब मैंने प्रेरित पौलुस के पत्र को पढ़ा, तो मैंने पाया कि जिसके पास मसीह का आत्मा नहीं, वह परमेश्वर की संतान नहीं है। परंतु यह महत्व की बात नहीं है कि मैंने कैसे शीघ्रता से खोजा कि आत्मा मुझ में नहीं है। मुझे ऐसा लगा की आरम्भ में वह था, लेकिन फिर वह गायब हो गया। क्या हुआ? कृपया प्रभु, मुझे बताएं, ऐसा क्यों है।’’
वास्तव में, कारण यह था कि मैं अन्दर से सोचकर स्वयं भ्रमित था कि मैं यीशु में साधारण विश्वास के द्वारा बचा लिया गया। मैं इस समस्या पर अधिक समय तक दुःखी था। 
परमेश्वर की प्रतिज्ञा है जो लोग उसे उत्सुकता से खोजते हैं, उन पर वह अपने आप को प्रकट करता है। अन्त में वह अपनी सच्चाई में मुझे मिले। मैं यीशु में विश्वास करने के १० साल बाद अभी भी एक पापी था। परंतु जब मैंने पुराने नियम में ख़तने के अर्थ को और नए नियम में आत्मिक ख़तने के अर्थ को खोज लिया, तब मुझे यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के रहस्य का पता चला। जब मैंने इस सच्चाई को समझ लिया और यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उद्धार के रहस्य में विश्वास करने लगा, तब मेरे सारे दुःख समाप्त हो गए। मेरी आत्मा हिम के समान श्वेत हो गई। 
यही आप के लिए भी होगा। यदि आप यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, तो आप भी पाप रहित हो जाएंगे। हो सकता है अभी आप अपूर्ण हों, परन्तु आप धर्मी होंगे। जब आप इस सच्चाई को अपने हृदय में ग्रहण करते हैं और इसे दूसरों को बताते हैं, तो वे भी बच जाएंगे और परमेश्वर की महिमा करेंगे और जोर से चिल्ला उठेगें, ‘हालेलूय्याह!ʼ
मैं उन सब भाइयों और बहनों को बधाई देना चाहता हूँ जो बचा लिए गए हैं। हमारे सारे पापों से बचाने के लिए मैं यीशु की महिमा करता हूँ। हालेलूय्याह! हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे सारे पापों से हम बचा लिए गए हैं। 
यह कितनी अधिक महान् आशीष है कि हम अपनी सारी खुशियों को केवल शब्दों के साथ प्रकट करने में असमर्थ हैं। आइए हम मिलकर एक गीत गाते हैं – “उसका नाम पवित्र है, इसलिए कि हमने अब तक सभी प्राणियों के सामने उस पवित्र परमेश्वर की घोषणा नहीं की है। वह राज मिस्त्रियों के द्वारा त्यागे हुए पत्थर के समान बाहर फेंक दिया गया, परंतु उसका नाम मेरे हृदय में अत्यधिक बहुमूल्य रत्न बन गया है।’’
 
 
यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू सारे पापियों को उनके पापों से बचाने के लिए काफी है
 
हमारे हृदयों से सारे पापों को
कौन दूर करता है?
यीशु का बपतिस्मा

यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा संसार के सारे पापों को धो दिया है। उसने हमारा आत्मिक रूप से खतना किया और अपनी संतान बनाया। वह नया जन्म पाए हुओं का परमेश्वर है। 
पाप के लिए हमेशा दण्ड है। लेकिन यीशु ने हमें बचाने के लिये पानी में बपतिस्मा लिया और क्रूस का दण्ड सहा। उसके लहू के साथ हम सब को उसने बचा लिया और वह तीसरे दिन जी उठा। परमेश्वर पिता ने यीशु को मृतकों में से जीवित किया। 
यीशु का जीवन हमारा जीवन है और परमेश्वर की संतान होने का चिन्ह है। उसके बपतिस्मा ने हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और क्रूस पर यीशु का बहमूल्य लहू प्रमाण है कि उसने हमारे बदले में दण्ड सहा। 
प्रिय मित्रों, क्या आप के हृदयों में यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू का प्रमाण है? मैं आपसे फिर पूछता हूँ। क्या हमारा उद्धार केवल यीशु के लहू से हुआ है? नहीं। यह यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू दोनों के साथ आता है।
 
 
पाखंडी कौन है?
 
पाखंडी कौन है?
जो यीशु के बपतिस्मा में विश्वास का
अंगीकार करने के द्वारा असफल होता है।

प्रिय मित्रों, अपने प्रतिदिन के जीवन में यीशु में अपने विश्वास का अंगीकार करने के बावजूद क्या आप अभी भी एक पापी हैं? आप पापी हैं, चाहे आप यीशु में विश्वास करते हों, तब भी आप पाखंडी हैं। पाखंडी परमेश्वर की सच्चाई में विश्वास नहीं करते। तीतुस ३:१०-११ पाखंडी के बारे में कहता है, ‘पाखंडी को एक दो बार समझा-बुझाकर उससे अलग रह, यह जानकर कि ऐसा मनुष्य भटक गया है, और अपने आप दोषी ठहराकर पाप करता रहता है।’ 
अपने आप को दोषी ठहरा चुका व्यक्ति कहता है, ‘प्रिय परमेश्वर! मैं एक पापी हूँ। मैं आप में विश्वास करता हूँ, परंतु मैं अभी भी पापी हूँ। चाहे कोई कुछ भी कहे कोई बात नहीं, मैं एक पापी हूँ और मैं जानता हूँ कि यह सत्य है।ʼ
परमेश्वर उसको कहता है, ‘क्या तुम अभी भी पापी हो और अभी तक मेरी संतान नहीं हो? तब, तुम एक पाखंडी हो, और तुम्हें नरक की आग में डाला जाएगा।ʼ
यदि आप अपने हृदय में यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार में विश्वास किए बिना यीशु में विश्वास करते हैं, यदि आप अपने आप को एक पापी के रूप में दोषी ठहराते हैं और परमेश्वर के आगे अंगीकार करते हैं कि आपका आत्मा पाप के साथ है, तब आप परमेश्वर के सम्मुख पाखंडी हैं।
 
 
सच्चे विश्वासी कौन हैं?
 
उद्धार के बारे में परमेश्वर
की गवाही क्या है?
पानी, लहू, और आत्मा

वे सब जो यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे सभी जो परमेश्वर की संतान हैं और वे सब जिनके पापों को धो दिया गया है, वे सब धर्मी हैं। आप यीशु में विश्वास करने के बावजूद पापी कैसे हो सकते हैं? एक पापी कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। 
वे जो यीशु में विश्वास करने के द्वारा अपने हृदयों में परमेश्वर की गवाही देते हैं, वे धर्मी हो जाते हैं। यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू उसकी गवाही है। यीशु मसीह ने इस संसार में जी किया है वह उद्धार की गवाही है। 
इसलिए, जो कोई भी बपतिस्मा के सुसमाचार में विश्वास करने से इन्कार करता है जिसके द्वारा यीशु ने हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया है वह परमेश्वर से अलग कर दिए जाएंगे। 
प्रिय विश्वासी भाइयों एवं बहनों, क्या आप इस सुसमाचार को अपने हृदय में ग्रहण करेंगे कि पापियों का उद्धार न केवल यीशु के लहू मात्र से है वरन् यीशु के बपतिस्मा के पानी से भी है? 
जो कोई भी यीशु ने इस जगत में किए कार्यो पर विश्वास करता है, जो कोई भी पानी, लाहो, और आत्मा को ग्रहण करता है उन्हें उनके सारे पापों से बचाया जाता है। यही पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार की सच्चाई और समझ है। 
यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों से हमें पूर्णरूप से धो दिया है। इसलिए सारी मनुष्यजाति का उद्धार उसके द्वारा है। अब, यदि आपने यीशु में सच्चा विश्वास किया है, तो यकीनन आप यहाँ पापी नहीं रहते हैं। 
यीशु ने हमें मृत्यु से पुनरुत्थित किया है। वह सारे आत्माओं को जो शैतान के धोखा देने के कारण परमेश्वर से दूर भटके हुए थे, उनको बचाता है। यीशु सारी खोई हुई आत्माओं को ढूंढना चाहता है। परमेश्वर का कार्य उसके पुत्र यीशु के द्वारा पानी, लहू और आत्मा के सुसमाचार के साथ है। वह हमें पुकारता है और उसके द्वारा अब हम छुटकारे और उद्धार को पा सकते हैं। 
क्या आप इस महान प्रबल सच्चाई में विश्वास करते हैं? मैं आपसे कह रहा हूँ कि उद्धार केवल लहू के द्वारा नहीं है, परंतु यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए गए उसके लहू दोनों के माध्यम से है। जो यह कहते हैं कि वे केवल लहू के द्वारा बचाए गए हैं, वे इस बात को स्वीकार करते है की उनके हृदयों में पाप है। 
हम सब यह सोचते हैं कि यीशु के लहू में विश्वास करना ही हमारे उद्धार के लिए पर्याप्त है। हम बहुत पहले सोचते थे, परंतु अब स्वीकार करें कि यह पर्याप्त नहीं है। हम जो पानी, लहू, और आत्मा के द्वारा आया उस यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा बचाए गए है और हमने नया जन्म पाया है। 
प्रत्येक पापी यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पा सकता है (१ यूहन्ना ५:५-१०)। आइए, परमेश्वर की स्तुति करें। हाल्लेलूय्याह!