उपदेश

विषय ४ : हरदिन के पापों को सुलझाना

[4-1] भरपूर प्रायश्चित का सुसमाचार (यूहन्ना १३:१-१७)

(यूहन्ना १३:१-१७)
“फसह के पर्व से पहले, जब यीशु ने जान लिया कि मेरी वह घड़ी आ पहुँची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, तो अपने लोगों से जो जगत में थे जैसा प्रेम वह रखता था, अन्त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा। जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय यीशु ने, यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्‍वर के पास से आया हूँ और परमेश्‍वर के पास जाता हूँ, भोजन पर से उठकर अपने ऊपरी कपड़े उतार दिये, और अँगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी। तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछे से उसकी कमर बन्धी थी उसी से पोंछने लगा। जब वह शमौन पतरस के पास आया, तब पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, क्या तू मेरे पाँव धोता है?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।” पतरस ने उससे कहा, “तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा!” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।” शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तो मेरे पाँव ही नहीं, वरन् हाथ और सिर भी धो दे।” यीशु ने उससे कहा, “जो नहा चुका है उसे पाँव के सिवाय और कुछ धोने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है; और तुम शुद्ध हो, परन्तु सब के सब नहीं।” वह तो अपने पकड़वानेवाले को जानता था इसी लिये उसने कहा, “तुम सब के सब शुद्ध नहीं।” जब वह उनके पाँव धो चुका, और अपने कपड़े पहिनकर फिर बैठ गया, तो उनसे कहने लगा, “क्या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया? तुम मुझे गुरु और प्रभु कहते हो, और ठीक ही कहते हो, क्योंकि मैं वही हूँ। यदि मैं ने प्रभु और गुरु होकर तुम्हारे पाँव धोए, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पाँव धोना चाहिए। क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। मैं तुम से सच सच कहता हूँ, दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं, और न भेजा हुआ अपने भेजनेवाले से। तुम ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो तो धन्य हो।”
 
 
क्यों यीशु ने फसह के पर्व से पहले पतरस के पैर धोए? उसके पैर धोने से पहले यीशु ने कहा, “तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।” पतरस यीशु के सारे चेलों में सबसे उत्तम था। उसने विश्वास किया की यीशु परमेश्वर का पुत्र है और उसने गवही दी की यीशु ही मसीह था। जब यीशु ने उसके पैर धोए, तब निश्चित रूप से ऐसा करने का कोई कारण होगा। जब पतरस ने अपने विश्वास का अंगीकार किया की यीशु ही मसीह है, तब उसका मतलब था की उसने विश्वास किया की यीशु ही उद्धारकर्ता है जो उसे सारे पापों से छूडाएगा। 
 
क्यों यीशु ने क्रूस पर चढ़ने से पहले 
चेलों के पैर धोएं?
क्योंकि वह चाहता था की वे उसके सम्पूर्ण 
उद्धार के बारे में जाने

क्यों उसने पतरस के पैर धोए? यीशु जानता था की पतरस उसका तिन बार इनकार करेगा और भविष्य में भी पाप करना चालू रखेगा। 
यदि, यीशु के स्वर्गारोहण के बाद, पतरस के दिल में कोई भी पाप छूट जाता, तो वह मसीह के साथ एक नहीं हो पाया होता। लेकिन यीशु अपने सारे चेलों की दुर्बलता जानता था और वह नहीं चाहता था की उनके पाप उसके और उसके चेलों के बिच में आए। इसलिए, उसे उसको सिखाने की जरुरत थी की उनके सारे अपराध पहले से ही धुल चुके है। इस कारण उसने अपने चेलों के पैर धोए। यीशु, मरने से पहले और उनको छोड़ने से पहले, सुनिश्चित करना चाहता था की वे उसके बपतिस्मा के सुसमाचार और उनके जीवनभर के सारे पापों के प्रायश्चित के विश्वास में मजबूती से खड़े रहे। 
यूहन्ना १३ यीशु ने अपने चेलों के लिए परिपूर्ण किए हुए सम्पूर्ण उद्धार के बारे में बात करता है। जब यीशु उनके पैर धो रहा था तब उसने उनको अपने बपतिस्मा के सुसमाचार के ज्ञान के बाते में कहा था जिसके जरिए सारे मनुष्य अपने अपराधों को धो पाए। 
“भविष्य में शैतान के द्वारा धोख़ा मत खाना। मैंने यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के साथ आपके सारे पापों को उठा लिया है और मैं क्रूस पर उनका न्याय भी ले लूँगा। उसके बाद, मृत्यु में से पुनरुत्थान के द्वारा मैं आप सभी के लिए नए जन्म का उद्धार परिपूर्ण करूँगा। आपको सिखाने के लिए की आपके भविष्य के पापों को भी मैंने उठा लिया है, आपको पाप के प्रायश्चित का मूल सुसमाचार सिखाने के लिए मैं अपने क्रूस पर चढ़ने से पहले तुम्हारें पैर धो रहा हूँ। यह नया जन्म पाने के सुसमाचार का रहस्य है। आप सभी को यह करना चाहिए।” 
हम सबको समझना होगा की क्यों यीशु ने चेलों के पैर धोए और जानना होगा की क्यों उसने कहा, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।” केवल उसके बाद ही हम नया जन्म पाने के सुसमाचार पे विश्वास करेंगे और नया जन्म पाएंगे।
 
 
उसने यूहन्ना १३:१२ में कहा है 
 
अपराध क्या है?
हमारी दुर्बलता के कारण हम जो पाप करते है वो।

वह क्रूस पे मरा उससे पहले, यीशु ने अपने चेलों के साथ फसह का पर्व मनाया और अपने हाथों से चेलों के पैर धोके उनको पापों के प्रायश्चित का सुसमाचार सुनाया। 
“यीशु ने, यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्‍वर के पास से आया हूँ और परमेश्‍वर के पास जाता हूँ, भोजन पर से उठकर अपने ऊपरी कपड़े उतार दिये, और अँगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी। तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अँगोछे से उसकी कमर बन्धी थी उसी से पोंछने लगा। जब वह शमौन पतरस के पास आया, तब पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, क्या तू मेरे पाँव धोता है?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा” (यूहन्ना १३:३-७)।
उसने अपने चेलों को बपतिस्मा का सुसमाचार और अपने बपतिस्मा के पानी के द्वारा पापों का प्रायश्चित सिखाया। 
उस समय, यीशु के साथ ईमानदार रहने के लिए, पतरस को समझ में नहीं आया की क्यों प्रभु उसके पैर धो रहा है। जब पतरस को वास्तव में समझ में आया की यीशु ने उसके लिए क्या किया है, उसके बाद यीशु पर का उसका बदल गया। यीशु उसको पाप के प्रायश्चित और अपने बपतिस्मा के पानी के सुसमाचार को सिखाना चाहता था। 
वह चिंतित था की शायद पतरस उसके भविष्य के पापों की वजह से उसके पास आने के लिए सक्षम नहीं होगा, दुसरे शब्दों में, उसके शरीर के भविष्य के पाप। यीशु ने उनके पैर धोए जिससे शैतान शिष्यों के विश्वास को छीन न पाए। उसके बाद, पतरस को समझ में आया की यह किसलिए हुआ। 
यीशु ने मार्ग तैयार किया जिससे जो कोई भी उसके बपतिस्मा के पानी और लहू पर विश्वास करेगा वह अपने पापों से हमेशा के लिए छूटकारा पाएगा। 
यूहन्ना १३ में, जब वह अपने चेलों के पैर धो रहा था उस समय का वार्तालाप दर्शाया है। वह शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण थे और केवल नए जन्म पाए हुए लोग ही सच्ची रीति से समझ सकते है। 
फसह के पर्व के बाद यीशु ने अपने चेलों के पैर धोए उसके पीछे का सहस्य यह था की वह उनको एहसास कराना चाहता था की उसने उनके जीवन भर के पापों को धो दिया है। यीशु ने कहा, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।” यह शब्द अनन्त छुटकारे के सत्य से भरे हुए थे जो पतरस को कहे गए थे।
हम सभी को यीशु के बपतिस्मा के बारे में जानना चाहिए और विश्वास करना चाहिए, जिसने हमारे सारे पापों को और अपराधों को धो दिया है। यरदन नदी में यीशु का बपतिस्मा दोनों हाथ उसके ऊपर रखने के द्वारा सारे पापों को उसके ऊपर डालने का सुसमाचार था। हम सभी को यीशु के वचन के ऊपर विश्वास करना चाहिए। उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को उठा लिया और न्याय लेने के द्वारा और क्रूस पर मरने के द्वारा पापों की माफ़ी पूरी हुई। यीशु ने सारे लोगो को पापों से छूटकारा देने के लिए बपतिस्मा लिया। 
 
 
हमारे जीवनभर के अपराधों का प्रायश्चित यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा सम्पूर्ण हुआ
 
धर्मियों के खिलाफ में शैतान का ‘फन्दा’ क्या है?
शैतान धर्मियों को फिर से पाप में डालने के लिए 
छल ने का प्रयास करता है।

यीशु अच्छी रीति से जानता था की, उसके क्रूस पर चढ़ने, पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद, शैतान और झूठे प्रचारक आएँगे और चेलों को धोख़ा देने की कोशिश करेंगे। हम पतरस की गवही के द्वारा देख सकते है की, “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है,” वह यीशु पर विश्वास करता था। लेकिन फिरभी, यीशु एक ओर बार पतरस को पाप के माफ़ी का सुसमाचार याद दिलाना चाहते थे। वह सुसमाचार यीशु के बपतिस्मे का था, जिसके द्वारा उसने जगत के सारे पापों को उठा लिया। वह पतरस को, चेलों को, और हमें जो बाद में इस पृथ्वी पर आनेवाले थे उनको फिरसे एक ओर बार सिखाना चाहता था। “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।”
जब भी यीशु के चेलों ने पाप किया, तब शैतान ने उसे प्रलोभन और दोष देते कहा की, “देखो! यदि आप अभी भी पाप करेंगे, तो आप कैसे कह पाओगे की आप पापरहित हो? आपने अभी उद्धार नहीं पाया। आप केवल एक पापी है।” इस प्रकार के दूषण को रोकने के लिए यीशु ने उनको कहा की यीशु के बपतिस्मा पे उनके विश्वास ने उनके जीवनभर के, भूतकाल के, वर्त्तमान के, और भविष्य के सारे पापों को धो दिया है। 
“आप सब जानते है की मैंने बपतिस्मा लिया है! यरदन में मुझे बपतिस्मा लेने की वजह थी की आपके जीवनभर के पापों और मनुष्यजाति के मूल पाप दूल जाए। क्या अब आप समझते है की मैंने क्यों बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा?” उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा उनके हरदिन के सारे पापों को उठा लिया था और वह क्रूस पर उनके लिए न्याय लेनेवाला था यह बताने के लिए यीशु ने चेलों के पैर धोए। 
अब, यीशु के बपतिस्मा और लहू पे हमारे विश्वास की वजह से आपका और मेरा छूटकारा हुआ है, जिसने हमें हमारे सारे पापों से माफ़ी पाने के लिए सक्षम किया है। यीशु ने हमारे लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा। उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे सारे पापों को साफ़ किया है। जो कोई भी पाप की माफ़ी के सुसमाचार को जानेगा और विश्वास करेगा और जो सत्य पर विश्वास करेगा वह पापों से छूटकारा पाएगा। 
उसके बाद, नए जन्म पाए हुए लोगों को उद्धार पाने के बाद क्या करना चाहिए? उनको हरदिन अपने पापों को स्वीकार करना चाहिए और यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार, उनके सारे पापों के प्रायश्चित के सुसमाचार पे विश्वास करना चाहिए। पापों की माफ़ी का सुसमाचार वह है जिसके द्वारा हम नया जन्म पाए जुए लोग अपने मन में प्रभावित होते है। 
केवल आप ने फिरसे पाप किया तो क्या उसका मतलब ऐसा है की आप फिरसे पापी बन गए? नहीं। यीशु ने हमारे सारे पापों को उठा लिया है यह जानने के बाद हम फिरसे पापी कैसे बन सकते है? यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका लहू हमारे सारे पापों के प्रायश्चित का सुसमाचार था। कोई भी व्यक्ति इस पापों की माफ़ी के मूल सुसमाचार पे विश्वास करने से किसी भी प्रकार के अपवाद के बिना ‘धर्मी व्यक्ति’ के रूप में नया जन्म पा सकता है।
 
 
धर्मी फिर से कभी पापी नहीं बन सकता 
 
क्यों धर्मी फिर से कभी पापी नहीं बनते?
क्योंकि यीशु ने उनके जीवनभर के सारे पापों का 
प्रायश्चित पहले ही कर दिया है।

यदि आप पानी और आत्मा के द्वारा पापो की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करते है, लेकिन हरदिन आपके अपराधों के कारण आप को ऐसा लगता है की आप अभी पापी है, तो आप को यरदन नदी के पास जाना चाहिए, जहा यीशु ने हमारे सारे पापों को लेने के लिए बपतिस्मा लिया था। यदि पापों की माफ़ी पाने के बाद भी आप पापी बनते है तो यीशु को फ़िरसे बपतिस्मा लेना पडेगा। आपको यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार द्वारा अपने पापों की माफ़ी पर विश्वास करना ही होगा। आपको दिमाग में रखने की जरुरत है की यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा एक ही बार में हमेशा के लिए आपके सरे पापों को उठा लिया था। यीशु मसीह आपके उद्धारकर्ता है ऐसा आपका विश्वास होना चाहिए। 
यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने का मतलब है की आप यीशु के बपतिस्मा पे विश्वास करते है, जिसने आपके जीवनभर के सारे पापों को उठा लिया है। यदि आप सचमुच उसके बपतिस्मा, क्रूस, मृत्यु, और पुनरुत्थान पे विश्वास करते हो, ति फिर आप फिरसे पापी नहीं बन सकते, फिर आपने चाहे कितना भी पाप क्यों न किया हो। आपने विश्वास के द्वारा अपने जीवनभर के सारे पापों से छूटकारा पाया है। 
यीशु मसीह ने भविष्य के पापों को भी धो दिया है, और हमारी दुर्बलता के द्वारा हम जोभी पाप करते है उसको भी। यीशु ने अपने बपतिस्मा को महत्त्व देने के लिए, उसने अपने बपतिस्मा यानि की पापों की माफ़ी के सुसमाचार के चिन्ह के रूप में चेलों के पी धोए। परमेश्वर का जगत के सारे पापों के लिए भरपूर प्रायश्चित और मनुष्यजाति के उद्धार के वायदे को पूरा करने के लिए यीशु मसीह ने बपतिस्मा लिया। क्रूस पर चढ़ा, पुनरुत्थित हुआ, और स्वर्फ़ में गया। परिणाम के तौर पर, उसके चेलें अपने जीवन के अन्त तक पापों की माफ़ी, यीशु के बपतिस्मा, क्रूस, और पुनरुत्थान के सुसमाचार का प्रचार करने के लिए काबिल बने। 
 
 
पतरस के शरीर की दुर्बलता 
 
क्यों पतरस ने यीशु का इन्कार किया?
क्योंकि वह दुर्बल था

बाइबल हमें बताती है की जब पतरस का सामना महायाजक काइफा के सेवको से होता है और उस पर दोष लगाया गया की वह भी यीशु के चेलों में से एक है, तब उसने दो बार इनकार किया और कहा, “नहीं, मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” फिर, तीसरी बार शपथ खाकर उसने इनकार किया। 
आइए हम मत्ती २६:६९ में से एक भाग को पढ़े। “पतरस बाहर आँगन में बैठा हुआ था कि एक दासी उसके पास आई और कहा, “तू भी यीशु गलीली के साथ था।” उसने सब के सामने यह कहते हुए इन्कार किया, “मैं नहीं जानता तू क्या कह रही है।” जब वह बाहर डेवढ़ी में गया, तो दूसरी दासी ने उसे देखकर उनसे जो वहाँ थे कहा, “यह भी तो यीशु नासरी के साथ था।” उसने शपथ खाकर फिर इन्कार किया : “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” थोड़ी देर बाद लोगों ने जो वहाँ खड़े थे, पतरस के पास आकर उससे कहा, “सचमुच तू भी उनमें से एक है, क्योंकि तेरी बोली तेरा भेद खोल देती है।” तब वह धिक्‍कारने और शपथ खाने लगा : “मैं उस मनुष्य को नहीं जानता।” और तुरन्त मुर्ग़ ने बाँग दी। तब पतरस को यीशु की कही हुई बात स्मरण हो आई : “मुर्ग़ के बाँग देने से पहले तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा। ” और वह बाहर जाकर फूट फूट कर रोया” (मत्ती २६:६९-७५)।
पतरस वास्तव में यीशु पर विश्वास करता था और विश्वासयोग्यतासे उसके पीछे चलता था। उसने विश्वास किया था की यीशु मसीह उसके उद्धारकर्ता है और ‘आनेवाला भविष्यवक्ता’ है। लेकिन जब पतरस को काइफा के सामने ले जाया गया और यीशु के साथ उसका संबंध था इस बात को लोगो के सामने बताने में उसे खतरा लगा, तब उसने उनके सामने यीशु का इनकार किया। 
पतरस नहीं जानता था की वह यीशु का इनकार करेगा, लेकिन यीशु जानता था की वह करेगा। यीशु पतरस की दुर्बलता को बख़ूबी जानता था। इसलिए, यीशु ने पतरस के पैर धोए और उसके मन में उद्धार के सुसमाचार को लिख दिया, जैसे यूहन्ना १३ में लिखा है, “तू भविष्य में पाप करेगा, लेकिन मैंने तेरे भविष्य के सारे पापों को धो दिया है।” 
जब पतरस की जान को खतरा था तब उसने यीशु का इनकार किया, लेकिन वह शरीर की दुर्बलता थी जिसने उसे यह करवाया। इसलिए, अपने चेलों को भविष्य के सारे अन्यायों से बचाने के लिए यीशु ने पहले से ही उनके पैर धोएं थे। 
“मैं आपके भविष्य के पापों को भी मिटा दूंगा।” मुझे क्रूस पर लटकाया जाएगा क्योंकि मैंने बपतिस्मा लिया था और आपके सारे पापों को उठा लिया था, और आप सब का सच्चा उद्धारकर्ता बनने के लिए मुझे उसका मूल्य चुकाना पडेगा। मैं आपका परमेश्वर हूँ, आपका उद्धारकर्ता। आप सब के पापों के लिए मैं उसका मूल्य चुकाऊँगा और मेरे बपतिस्मा और लहू के द्वारा मैं आपका चरवाहा बनूँगा। मैं आपके उद्धार का चरवाहा हूँ। 
इस सत्य को उनके दिलों में निश्चितरूप से बो ने के लिए, यीशु ने फसह के पर्व से पहले चेलों के पी धोए। यह सुसमाचार का सत्य है। 
नया जन्म पाने के बाद भी हमारा शरीर कमज़ोर है इसलिए हम फिरसे पाप करेंगे। निश्चितरूप से, हमें पाप नहीं करने चाहिए, लेकिन जब हम पतरस की तरह समस्याओं का सामना करते है, तब हम पाप करना नहीं चाहतें फिर भी पाप करते है। हम शरीर में जी रहे है, इसलिए कई बार हम अपने पापों की वजह से नाश की ओर जाटव है। जबतक हम इस संसार में है तबतक हमारा शरीर पाप करेगा, लेकिन यीशु ने वो सारे पाप अपने बपतिस्मा और क्रूस के लहू के कारण मिटा दिए है। 
हम यीशु का अपने उद्धारकर्ता के रूप में इनकार नहीं करते, लेकिन जब हम इस शरीर मैं जीते है, तब हम परमेश्वर की मरजी के विरोध में पाप करना ज़ारी रखते है। वह इसलिए की हमने शरीर में जन्म लिया है। 
यीशु अच्छी रीति से जनता था की हम शरीर में जी रहे है इसलिए हम पाप करेंगे, इसलिए यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा पापों की किंमत चुका के हमारा उद्धारक बना। जो उसके उद्धार और पुनरुत्थान पर विश्वास करता है उनके पापों को यीशु दूर करता है। 
इसीलिए चारों सुसमाचार यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु के बपतिस्मा से आरम्भ होते है। मनुष्य के तौर पर उसके जीवन का उद्देश्य यह था की वह नए जन्म का सुसमाचार, यानी की उद्धार के सुसमाचार को परिपूर्ण करे। 
 
हम कब तक शरीर से 
पाप करते रहेंगे?
मृत्यु के दिन तक हम पाप करते है।

जब पतरस ने मुर्ग़ के बाँग देने से पहले एकबार नहीं, दो बार नहीं, लेकिन तिन बार यीशु का इनकार किया, तब उसका दिल कैसे टूट गया होगा! उसे कितनी शर्म आई होगी? उसने यीशु के आगे शपथ खाई थी की वह उसका इनकार नहीं करेगा। उसने अपने शरीर की दुर्बलता के कारण पाप किया था, लेकिन जब पतरस अपनी कमजोरी के कारण एकबार नहीं, लेकिन तिन बार यीशु का इनकार करते समय उसके दिल की क्या हालत हुई होगी? जब यीशु ने पतरस की और दया से देखा तब उसे कितनी शर्म आई होगी? 
लेकिन यीशु यह सब जानता था। इसलिए, उसने कहा, “मैं जनता हूँ की तू बार बार पाप करेगा। लेकिन मैंने तेरे सारे पापों को मेरे बपतिस्मा के जरिए ले लिया है, शायद तेरे पाप तुझे ठोकर खिलाए और तुझे फिरसे पापी बनाए, शायद तुझे मेरे पास वापस आने असम्भव लगे। बपतिस्मा लेने के द्वारा और तेरे सारे पापों का न्याय लेने के द्वारा मैं तेरा सम्पूर्ण उद्धारकर्ता बना हूँ। मैं तेरा परमेश्वर बना हूँ, तेरा चरवाहा। टू निरन्तर शरीर के पापों को करता रहेगा फिर भी मैं तुझे प्रेम करना ज़ारी रखूँगा। मैंने पहले से ही तेरे सारे अन्यायों को धो दिया है। पाप की माफ़ी का सुसमाचार हमेशा के लिए असरकारक है। तेरे लिए मेरा प्रेम हमेशा के लिए है।” 
यीशु ने चेलों को कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।” यूहन्ना १३ में वह इस सुसमाचार को बोला उसका कारण यह था की लोगों के लिए पानी और आत्मा के द्वारा नया जन्म पाना आवश्यक था। क्या आप यह विश्वास करते है? 
वचन ९ में। “शमौन पतरस ने उससे कहा, हे प्रभु, तो मेरे पाँव ही नहीं, वरन हाथ हाथ और सिर भी धो दे।” यीशु ने उससे कहा, जो नहा चुका है उसे पाँव के सिवाय और कुछ धोने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वह बिलकुल शुध्ध है।” 
प्रिय मित्रो, क्या आप भविष्य में ‘शरीर’ के पाप करेंगे, या नहीं करेंगे? आप निश्चितरूप से करेंगे। लेकिन यीशु ने कहा की उसने पहले से ही अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा भविष्य के पापों को, और शरीर के अन्यायों को साफ़ किया, और वह क्रूस पे चढ़ा उससे पहले उसने अपने शिष्यों को सत्य के वचन, प्रायश्चित का सुसमाचार कहा। 
जब हम अपने शरीर में कमजोरियों के साथ जीते है, तब हम पाप करते है। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को धो दिया। उसने केवल हमारा सिर और शरीर नहीं धोया, लेकिन हमारे पैर भी धोए है जो भविष्य के पाप है। यह नया जन्म पाने का यानी की यीशु के बपतिस्मा का सुसमाचार है।
यीशु ने बपतिस्मा लिया उसके बाद, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने गवही दी, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्ना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” (यूहन्ना १:२९) हमें विश्वास करना चाहिए की यीशु के बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पाप उसके ऊपर डाले गए और वह सारे धुल गए। 
जब हम इस पापी संसार में जी रहे है, तब हम पाप करते है। यह एक वास्तविक सच है। जब हमारे शरीर की दुर्बलता सतह पर आती है, तब हमें अपने आप को याद दिलाना चाहिए की यीशु ने माफ़ी के सुसमाचार के द्वारा हमारे सारे पापों को धो दिया है और अपने लहू के द्वारा उसकी किंमत चुकाई है। हमें अपने दिल की गहराई से उसका धन्यवाद करना चाहिए। आइए हम विश्वास के द्वारा अंगीकार की यीशु हमारा उद्धारकर्ता और परमेश्वर है। परमेश्वर की स्तुति हो। 
इस संसार में सारे लोग शरीर में पाप करते है। लोग अपने शरीर में निरन्तर पाप करते है और उनके जीवनभर के पापों की वजह से उनकी मौत हो जाति है। 
 
 
लोगो के मन में छिपे बुरे विचार 
 
मनुष्य को कौन अशुध्द करता है?
कई प्रकार के पाप और बुरे विचार

मत्ती १५:१९-२० में यीशु कहता है। “क्योंकि बुरे विचार, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवही और निन्दा मन ही से निकलती है। ये ही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।” मनुष्य के मन में नाना प्रकार के पाप उनको अशुध्द करतें है। 
 
 
प्रत्येक व्यक्ति को अपने दुष्ट स्वभाव को पहचानना चाहिए 
 
हर एक मनुष्य के मन में क्या है?
बारह प्रकार के पाप 
(मरकुस ७:२१-२३)

हमें यह कहने के लिए सक्षम बनना चाहिए की, “बारह प्रकार के पाप लोगों के मन में है। मेरे मन में वह सारे पाप है। बाइबल में जिन पापों के बारे में लिखा गया है वह बारह पाप मेरे अन्दर है।” हमें अंगीकार करना चाहिए की हम पानी और आत्मा से नया जन्म पाए उससे पहले, पाप मूलरूप से हमारे मन में थे। हमें स्वीकारना चाहिए की हम परमेश्वर के सन्मुख में पापी है, लेकिन हम कई बार ऐसा नहीं करते। हम में से कई लोग बहाने बनाते है और कहते है की, “मेरे मन में ऐसे विचार लाभी नहीं थे, मैं केवल पलभर में ही भ्रमित हुआ था।” 
लेकिन यीशु ने मनुष्यों के लिए क्या कहा? उसने स्पष्ट रूप से कहा की मनुष्य के मन से जो कुछ भी निकलता है वह उसे अशुध्द करता है। उसने हमें कहा कि लोगो के अन्दर बुरे विचार है। आप क्या सोचते हो? आप अच्छे है की बुरे? क्या आप जानते हो की सारे लोगों के अन्दर बुरे विचार है? हाँ, सारे लोगों के विचार बुरे है।
थोड़े साल पहले, सिओल का बड़ा स्टोर अचानक ढह गया। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया था वे बहुत ही पीड़ा में थे, लेकिन कई लोग वहाँ उस दू:खद द्रश्य का आनन्द उठाने आए थे। 
कुछ लोगों ने सोचा, कितने मरे होंगे? २००? नहीं, यह तो बहुत कम है। ३००? शायद? अच्छा, लेकिन अगर मरनेवालो की संख्या एक हजार से भी ज्यादा होती तो देखने में मज़ा आता....” लोगों के हृदय इतने भी बुरे बन सकते है। हमें यह स्वीकार करना पडेगा। वह मरनेवालों के लिए कितना अनुचित था! कुछ लोग आर्थिक रीति से बरबाद हो गए थे। 
कुछ देखने वालों के अन्दर सहानुभूति नहीं थी। “यदि ज्यादा लोग मरे होते तो ज्यादा मज़ा आता! कैसा द्रश्य था! यदि यह घटना लोगों से भरे बोलपार्क में हुई होती तो? हजारो लोग मलबे के निचे दब गए होते, क्या ऐसा नहीं होता? अरे, हाँ! निश्चितरूप से वह इससे भी ज्यादा रोचक होता!” शायद कुछ लोगो ने इस प्रकार से सोचा होता। यही घटना कार अकस्मात् के बारेम में भी सुनाई पड़ती है, जिज्ञासु प्रेक्षक इन छोटे अकस्मातों से निराश हो जाएंगे।
हम सभी लोग जानते है की कई बार हम कैसे बुरे बन जाते है। निश्चितरूप से, हम ऐसे बुरे विचारों के बारे में नहीं बोलेंगे। कभी अगर हम ऐसे अकस्मातों को देखें तब हम हमारी जीभ से सहानुभूति के शब्द बोलते है। जब तक वह हमारे हित के विरोध में नहीं जाता, तब तक हम ऐसे भयानक घटनाओं को देखने की इच्छा रखते है, जिसमे हजारो लोगों की मौत होती है। इसी रीति से लोगों के हृदय कार्य करते है। हम में से कई लोग नया जन्म पाने से पहले ऐसा ही थे। 
 
 
हर एक मनुष्य के मन में हत्या 
 
क्यों हम पाप करते है?
क्योंकि हमारे मन में बुरे विचार है।

परमेश्वर ने कहा की सारे व्यक्ति के मन के अन्दर हत्या है। लेकिन कई लोग परमेश्वर के आगे इस बात का इनकार करते है और कहते है, “आप कैसे ऐसा बोल सकते है! मेरे दिल में कोई भी हत्या करने का विचार नहीं है! आप कैसे मुझे ऐसे व्यक्ति में गिन सकते है!” वे कभी भी अंगीकार नहीं करेंगे की उनके दिल में हत्या करने का विचार है। वे मानते है की खुनी उनसे अलग नस्ल के होते है। 
“दुसरे दिन अखबार में आता खुनी, और वह झूंड जिसने लोगों की हत्या करके उनको उनके ही तहखाने में जला दिया था ईसर ही लोगों के दिल में हत्या होती है! वह अलग नस्ल के है! मैं उनके जैसा कभी नहीं बन सकता! वे बदमाश है! खुनी है!” वह अपराधियों के ऊपर चिल्लाते है, “वे शैतान से जन्मे है उनका पृथ्वी के ऊपर से नाश होना चाहिए! उन सभी को मृत्यु दण्ड होना चाहिए!” 
लेकिन दुर्भाग्यसे, हत्या करने का विचार क्रोध से भरे हुए लोगों के दिल में है, और कत्यारों के दिल में भी है। परमेश्वर हमें कहता है की सारे लोगों के हृदय में पाप है। हमें परमेश्वर के वचन को स्वीकारना चाहिए, जो हमारे मन के अन्दर छिपी बातों को भी जनता है। इसतरह, हमें कबूल करना चाहिए की, “मैं पापी हूँ और मेरे मन में हत्या है।” 
हाँ, परमेश्वर ने हमें कहा है की सारे लोगों के मन में, हत्या के साथ दुसरे भी बुरे विचार है। आइए परमेश्वर के वचनों का स्वीकार करे। जैसे पीढ़ी दुष्ट बनती जाति है, वैसे ही व्यकिति की सुरक्षा के साधन हत्या करने के साधन में तबदील हो जाते है। यह हमारे मन में रहे हत्या करने के विचार का परिणाम है। आप क्रोध के कारण या भय के कारण हत्या कर सकते हो। मैं ऐसा नहीं कहता की हम में से सारे लोग दूसरो की हत्या करेंगे, लेकिन हम अपने मन में ऐसा सोचते जरुर है। 
हम सब ने हमारे मन में बुरे विचारों के साथ जन्म लिया है। कुछ लोग सच में हत्या करने के द्वारा अन्त करते है, इसलिए नहीं की उन्होंने एक हत्यारें के रूप में जन्म लिया है लेकिन इसलिए की हम हत्यारें बनने में सक्षम है। परमेश्वर हमें कहता है की हमारे मन में बुरे विचार और हत्या है। यही सत्य है। हम में से कोई भी इस सत्य से अपवादरूप नहीं है। 
इसलिए, हमारे लिए सच्चा रास्ता है परमेश्वर के वचनों को स्वीकारना और उसका पालन करना। हम इस जगत में पाप करते है क्योंकि हमारें मन में बुरे विचार है। 
 
 
हमारे मन में व्यभिचार है 
 
 
परमेश्वर कहता है की सारे लोगों के मन में व्यभिचार है। क्या अप सहमत है? क्या आप कबूल करते है की आप के मन में व्यभिचार है? हाँ, सारे लोगों के में में व्यभिचार है।
इसीलिए हमारे समाज में वेश्यावृत्ति और एनी यौन अपराध पनपते है। यह मनुष्य इतिहास के हर समय में पैसा कमाने का एक तरीका रहा है। दुसरे व्यवसाय को शायद आर्थिक मंदी सहन करनी पद सकती है, लेकिन इस तिरस्कृत व्यवसाय को ज्यादा सहन नहीं करना पड़ता क्योंकि सारे मनुष्य के मन में व्यभिचार है। 
 
 
पापोयों का फल पाप ही होता है 
 
मनुष्य तुलना में किसके जैसा है?
ऐसे वृक्ष के जैसा जो केवल पाप का फल देता है

जैसे सेब का पेड़ सेब का फल देता है, नासपती का पेड़ नासपाती का, खजूर का पेड़ खजूर का, वैसे ही हम जिन्होंने अपने मन में १२ प्रकार के पापों के साथ जन्म लिया है, वह पाप का फल ही देंगे। 
यीशु ने कहा की मनुष्य के मन से जो कुछ भी निकलता है वह उसे अशुध्द करता है। क्या आप सहमत है? हम केवल यीशु के वचनों के साथ सहमत हो सकते है और कहे, “हाँ, हम साँप के वंशज है, कुकर्म करनेवाले है। हाँ, प्रभु, आप ज्योति है,” हाँ, हमें अपनी बुराई को स्वीकारना चाहिए। हमें परमेश्वर के सन्मुख सत्य को कबूल करना चाहिए। 
जैसे यीशु ने परमेश्वर की इच्छा को माना, वैसे ही हमें भी परमेश्वर के वचनों को स्वीकारना चाहिए और पालन करना चाहिए। केवल इसी रीति से ही हम पानी और आत्मा के द्वारा उद्धार पा सकते है। यह परमेश्वर की ओर से भेंट है। 
मेरा देश चार ऋतुओं से आशीषित है। कैसे ऋतु बदलती जाति है, वैसे कई प्रकार के पेड़ अपने फलों को देते है। इसी रीति से, हमारे दिल में रहे बारह पाप हमें पकड़ के रखते है और निरन्तर हमें पाप करने की ओर लेकर जाते है। आज, शायद हत्या ने आपके हृदय में पकड़ जमाई है और कल शायद व्यभिचार पकड़ जमाएगा। 
फिर दुसरे दिन, बुरे विचार, उसके बाद परस्त्रीगमन, चोरी, झूठी गवही...और बदुत कुछ। हम पूरे साल के दौरान, हर महीने, हरदिन, हर घन्टे पाप करना जारी रखते है। हमारा एक भी दिन बिना पाप किए नहीं गुजरता। हम अपने आप शपथ खाना ज़ारी रखते है की अब हम ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन हम पाप किए बिना नहीं रह सकते क्योंकि हम इसी रीति से जन्मे है। 
क्या आपने कभी ऐसा देखा है की सेब के पेड़ ने सेब का फल देने से मना कर दिया क्योंकि वह पेड़ फल देना नहीं चाहता? “मैं सेब का फल देना नहीं चाहता!” यदि वह फल ना देने का निर्णय कर भी ले, तो वह कैसे सेब का फल नहीं देगा? फूल अनिवार्य रीति से वसंत में खिलते है, सेब गरमी के मौसम में पकाते है, और खाने के लिए तैयार हो जाते है। 
यह प्रकृति का नियम है, और पापियों के जीवन को भी प्रकृति का यही नियम मानना चाहिए। पापी पाप का फल देते है। 
 
 
‘यीशु का बपतिस्मा और क्रूस’ हमारे पापों के प्रायश्चित के लिए था 
 
यीशु के प्रायश्चित का
मतलब क्या है?
वह यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा 
पापों की किंमत चुकाना है।

आइए हम पापी यानी की कुकर्म करनेवालों के वंश परमेश्वर के सन्मुख पापों का प्रायश्चित किस रीति से कर सकते है, और अपना जीवन आनन्द से कैसे जी सकते है यह ढूँढने के लिए बाइबल का एक भाग पढ़े। यह पापों के प्रायश्चित के लिए सुसमाचार है। 
लैव्यव्यवस्था ४ में कहा गया है, “यदि साधारण लोगों में से कोई अज्ञानता से पाप करे, अर्थात् कोई ऐसा काम जिसे यहोवा ने मना किया हो करके दोषी हो, और उसका वह पाप उस पर प्रगट हो जाए, तो वह उस पाप के कारण एक निर्दोष बकरी बलिदान के लिये ले आए; और वह अपना हाथ पापबलिपशु के सिर पर रखे, और होमबलि के स्थान पर पापबलिपशु का बलिदान करे। और याजक उसके लहू में से अपनी उंगली से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसके सब लहू को उसी वेदी के पाए पर उंडेल दे। और वह उसकी सब चरबी को मेलबलिपशु की चरबी के समान अलग करे, तब याजक उसको वेदी पर यहोवा के निमित्त सुखदायक सुगन्ध के लिये जलाए; और इस प्रकार याजक उसके लिये प्रायश्‍चित्त करे, तब उसे क्षमा मिलेगी” (लैव्यव्यवस्था ४:२७-३१)। 
पुराने नियम के समय में, लोग अपने पापों का प्रायश्चित किस रीति से करते थे? सबसे पहले वे पापबलि के सिर पर अपने दोनों हाथ रखत्ये, और अपने पापों को उसके ऊपर डालते थे। 
लैव्यव्यवस्था में लिखा है। “इस्राएलियों से कह कि तुम में से यदि कोई मनुष्य यहोवा के लिये पशु का चढ़ावा चढ़ाए, तो उसका बलिपशु गाय-बैलों अथवा भेड़-बकरियों में से एक का हो। “यदि वह गाय-बैलों में से होमबलि करे, तो निर्दोष नर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर चढ़ाए कि यहोवा उसे ग्रहण करे। वह अपना हाथ होमबलिपशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिये प्रायश्‍चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा” (लैव्यव्यवस्था १:२-४)।
जब उस युग के व्यक्ति को अपने दिल में पापों का एहसाह होता तब उसे पापबलि को तैयार करना पड़ता था जो पापों की माफ़ी के लिए उपयोग में लिया जता था। उसने किए हुए पापों को पापबलि के ऊपर डालने के लिए उसे उसके सिर पर ‘हाथ रखना’ पड़ता था। पवित्र तम्बू के आँगन में, होमबलि की वेदी थी। वह पिटारे जैसे आकार की थी, मंच के टेबल से थोड़ी बड़ी, और उसके चारो कोनों में सींग थे। इस्राएल के लोग पापबलि के सिर पर अपने पापों को डालने के द्वारा और उसका मांस होमबलि की वेदी के ऊपर जलाने के द्वारा अपने पापों का प्रायश्चित करते थे। 
परमेश्वर ने लोगों के लिए लैव्यव्यवस्था की किताब में कहा है की, “वह अपनी इच्छा से उसे मिलापवाले तम्बू के दरवाजे के पास यहोवा के सन्मुख में लाए।” जब वे उनके सिर पर हाथ रखते थे तब उनके पाप पापबलि के ऊपर डाले जाते थे, और बाद में बलि की गरदन काटकर और उसके लहू को होमबलि के सींगो पर रखता था। 
उसके बाद, बलि के शरीर के अन्दर के भाग को साफ़ किया जाता था, और उसके मांस के टूकडे किए जाते थे और जब तक भस्म न हो जाए तब तक उसे होमबलि की वेदी पर जलाया जाता था। फिर, उनके पापों के लिए मांस की सुगंध परमेश्वर को अर्पण की जाति थी। इस रीति से वे अपने हरदिन के पापों का प्रायश्चित करते थे। 
परमेश्वर ने उनके वार्षिक पापों के लिए दुसरे प्रायश्चित के बलिदान की अनुमति दी थी। वह हरदिन के प्रायश्चित के बलिदान से अलग था। उसमे, सारे इस्राएली लोगों के बदले म महायाजक अकेला ही पापबलि पर अपने हाथो को रखता और वह दयासन की पूर्व में सात बार लहू का छिड़काव करता। इसके साथ ही, वह हर साल सातवें महीने के दसवें दिन इस्राएल के लोगों के सामने जीवित बकरे के सिर पर हाथ रखता (लैव्यव्यवस्था १६:५-२७)। 
 
पुराने नियम की पापबलि का प्रतिक कौन है?
यीशु मसीह

अब, आइए हम ढूंढते है की नए नियम में बलिदान की पध्धति किस रीति से बदली और अनंतकाल के परमेश्वर की प्रतिमा कैसे लगातार बनी रही। 
क्यों यीशु को क्रूस पर मरना पडा? यीशु ने इस संसार ने ऐसा क्या गलत कर दिया था कि परमेश्वर ने अपने बेटे को क्रूस पर मरने दिया? किसने उसे क्रूस पर मरने के लिए दबाव किया? जब जगत के पापी, अर्थात् हम सब पाप में डूब गए, तब यीशु हमें बचाने के लिए इस जगत में आया। 
उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यरदन में बपतिस्मा लिया और मनुष्यजाति के बदले उसने क्रूस पर न्याय को ले लिया। जिस तरह यीशु ने बपतिस्मा लिया और जिस तरह यीशु ने क्रूस पर लहू बहाया वह पुराने नियम के प्रायश्चित जैसा था, पापबलि पर हाथ रखना और उसका रक्त बहाना। 
इस रीति से पुराने नियम में किया गया था। पापी अपना हाथ पापबलि के ऊपर रखता और अपने पापों को अंगीकार करके कहता, “प्रभु, मैंने पाप किया है। मैंने हत्या और व्यभिचार किया है।” फिर, उसके पाप पापबलि के ऊपर डाले जाते थे। 
जैसे पापी पापबलि का गला कटता और परमेश्वर के आगे अर्पित करता, यीशु को भी उसी रीति से हम सभी के पापों के प्रायश्चित के लिए अर्पण किया गया था। यीशु ने हमें बचाने के लिए और अपने बलिदान के द्वारा हमारे सारे पापों के प्रायश्चित के लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर अपना लहू बहाया।
वास्तव में, यीशु ने यह हमारे लिए किया। जब हम यह सोचते है की, लोगों के सारे पापों के लिए निर्दोष पशु की बलि चढ़ाने का क्या मतलब है? क्या वह पशु जानते थे की पाप क्या है? पशु पापों को नहीं जानते थे, वे निर्दोष थे।
जैसे वह पशु पूरी तरह निर्दोष थे, वैसे ही यीशु भी निर्दोष था। वह पवित्र परमेश्वर है, परमेश्वर का पुत्र, और उसने कभी भी पाप नहीं किया था। इसलिए, उसने ३० साल की उम्र में यरदन में बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को ले लिया है। 
यीशु क्रूस पर मरा क्योंकि उसने हमारे पापों को उठा लिया था। मनुष्यजाति के पापो को धो कर उद्धार देने की उसकी सेवा थी। 
 
 
पाप के प्रायश्चित के सुसमाचार का आरम्भ 
 
क्यों यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से 
यरदन में बपतिस्मा लिया?
सब धार्मिकता को पूरा करने

मत्ती ३ में लिखा है, “उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। परन्तु यूहन्ना यह कह कर उसे रोकने लगा, “मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?” यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली” (मत्ती ३:१३-१५)। 
हमें जानना चाहिए और समझना चाहिए की यीशु ने ३० साल की उम्र में बपतिस्मा क्यों लिया। सारे लोगों के पापों के प्रायश्चित के लिए और परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा करने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया। सारे लोगों को अपने पापों से बचाने के लिए, यीशु मसीह ने, जो निर्दोष था उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया। 
इस तरह, उसने जगत के पापों को उठा लिया और सारे मनुष्यों के पापों के प्रायश्चित के लिए अपना बलिदान दिया। पाप से उद्धार पाने के लिए, हमें सम्पूर्ण सत्य को जानना पडेगा और उसके ऊपर विश्वास करना पडेगा। उसके उद्धार पर विश्वास करना और उद्धार को पाना हमारे ऊपर है। 
यीशु के बपतिस्मा का क्या मतलब है? वह पुराने नियम के हाथ रखने जैसा ही है। पुराने नियम में, बलि के सिर पर महायाजक के हाथ रखने के द्वारा सारे लोगों के पाप बलि के ऊपर डाले जाते थे। इसी रीति से, नए नियम में, अपने आप को पापबलि के रूप में प्रस्तुत करने और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा यीशु ने जगत के पापों को उठा लिया। 
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला पृथ्वी के सारे मनुष्यों में सबसे बड़ा था, परमेश्वर के द्वारा स्थापित मनुष्यजाति का प्रतिनिधि। मनुष्यों के प्रतिनिधि के रूप में, मनुष्य का महायाजकने, यीशु पर अपने हाथ रखे और जगत के पाप उस पर डालें। ‘बपतिस्मा’ का मतलब होता है, ‘स्थानांतरित करना, गढ़ाना, और साफ़ होना।’ 
क्या आप जानते है की यीशु इस जगत में क्यों आया और क्यों यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया? क्या आप यीशु के बपतिस्मा के अर्थ को समझ कर उस पर विश्वास करते हो? यीशु के बपतिस्मा ने हमारे यानि की कुकर्म करनेवालों के वंशज ने जीवनभर जो पाप किए इसे उठा लिए है। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने हमारे सारे पापों के प्रायश्चित के सुसमाचार की पूर्ति के लिए यीशु को बपतिस्मा दिया। 
मत्ती ३:१३-१७ में, शुरुआत ‘उस समय’ शब्द से होती है और वह यीशु के बपतिस्मा के समय को दर्शाता है, वह समय जब जगत के सारे पापों को उसपर डाला गया। 
‘उस समय,’ यीशु ने मनुष्य के सारें पापो को ले लिया, तिन साल बाद क्रूस पर मरा, और तीसरे दिन पुनरुत्थित हुआ। जगत के सारे पापों को धोने के लिए उसने एक ही बार हमेशा के लिए बपतिस्मा लिया, एक ही बार हमेशा के लिए क्रूस पर मरा, और एक ही बार हमेशा के लिए मृत्यु में से पुनरुत्थित हुआ। जो परमेश्वर के सन्मुख अपने पापों से छूटकारा पाना चाहते है, उनके लिए उसने जगत के सारे पापों को उठा लिया और एक ही बार हमेशा के लिए उनमो उद्धार दिया। 
क्यों यीशु को बपतिस्मा लेने की जरुरत पड़ी? क्यों उसे अपने सिर पर काँटों का मुकुट पहिनकर पिलातुस के दरबार में सामान्य अपराधी की तरह न्याय को सहन करने की जरुरत पड़ी? क्यों उसे क्रूस पर चढ़ने की और मृत्यु तक लहू बहाने की जरुरत पड़ी? इन सब का कारण है की उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को, आपके और मेरे पापों को, अपने ऊपर उठा लिए थे। हमारे पापों के लिए, उसे क्रूस पर मरना पडा। 
हमें उद्धार के वचनों पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि परमेश्वर ने हमें उद्धार दिया है और हमें उसके प्रति धन्यवादित रहना चाहिए। यीशु के बपतिस्मा, क्रूस, और पुनरुत्थान के बिना, हमारे लिए कोई उद्धार नहीं है। 
जब यीशु ने जगत के सारे पापों को उठा ने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लिया, तब उसने हमारे पापों को उठा लिया इसतरह, हमको जो उसके उद्धार के सुसमाचार पर विश्वास करते है उन्हें उद्धार दिया। ऐसे लोग भी है जो सोचते है की, “यीशु ने केवल मूल पाप लिया है, क्या उसने नहीं लिया?” लेकिन वह झूठे है।
बाइबल में स्पष्ट रीति से दर्शाया गया है की जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब उसने एक ही बार हमेशा के लिए जगत के सारे पापों को उठा लिया। मूल पाप के साथ हमारे सारे पाप धुल गए है। यीशु मत्ती ३:१५ में कहता है, “क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” सारी धार्मिकता पूरा करने का मतबल होता है की सारे पापों को हमारे पास से ले लिया गया है। 
क्या यीशु ने हमारे जीवनभर के पापों को भी धो दिया है? हाँ, उसने धो दिए है। आइए पहल हम उसका सबूत लैव्यव्यवस्था में ढूंढें। उसमे महायाजक और प्रायश्चित के दिन के बारें में कहा गया है। 
 
 
सारे इस्राएलीओं के वार्षिक पापों के लिए प्रायश्चित का बलिदान
 
क्या इस्राएली इस पृथ्वी के पापबलि से 
एक ही बार हमेशा के लिए पवित्र हुए?
कभी नहीं

“और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा चढ़ाकर अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्‍चित्त करे। और उन दोनों बकरों को लेकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के सामने खड़ा करे; और हारून दोनों बकरों पर चिट्ठियाँ डाले, एक चिट्ठी यहोवा के लिये और दूसरी अज़ाज़ेल के लिये हो। और जिस बकरे पर यहोवा के नाम की चिट्ठी निकले उसको हारून पापबलि के लिये चढ़ाए; परन्तु जिस बकरे पर अज़ाज़ेल के लिये चिट्ठी निकले वह यहोवा के सामने जीवित खड़ा किया जाए कि उस से प्रायश्‍चित्त किया जाए, और वह अज़ाज़ेल के लिये जंगल में छोड़ा जाए” (लैव्यव्यवस्था १६:६-१०)। यहाँ, कारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर इस्राएल के लोगों के वार्षिक पापों के प्रायश्चित के लिए दो बकरों को लेता है। 
“और हारून दोनों बकरों पर चिट्ठियाँ डाले, एक चिट्ठी यहोवा के लिये और दूसरी अज़ाज़ेल के लिये हो।” 
पापबलि के सिर पर हाथ रखने के द्वारा पापियों के पापों को बलि के ऊपर डालने के लिई हेडिं के पापों के प्रायश्चित के लिए बलिदान के पशु की आवश्यकता थी। लेकिन इस्राएल के वार्षिक पापों के लिए लोगों के बदले महायाजक हर साल सातवें महीने के दसवें दिन वार्षिक पापों को पापबलि के ऊपर डालता था। 
लैव्यव्यवस्था १६:२९-३१ म३ लिखा है की, “तुम लोगों के लिये यह सदा की विधि होगी कि सातवें महीने के दसवें दिन को तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना, और उस दिन कोई, चाहे वह तुम्हारे निज देश का हो चाहे तुम्हारे बीच रहने वाला कोई परदेशी हो, कोई भी किसी प्रकार का काम-काज न करे; 30क्योंकि उस दिन तुम्हें शुद्ध करने के लिये तुम्हारे निमित्त प्रायश्‍चित्त किया जाएगा; और तुम अपने सब पापों से यहोवा के सम्मुख पवित्र ठहरोगे। 31यह तुम्हारे लिये परमविश्राम का दिन ठहरे, और तुम उस दिन अपने अपने जीव को दु:ख देना; यह सदा की विधि है” (लैव्यव्यवस्था १६:२९-३१)। 
पुराने नियम में, इस्राएल के लोग अपने हरदिन के पापों के प्रायश्चित के लिए एक अर्पण को लेकर आते थे और उसके सिर पर अपने सारे पापों को डालते और कहते, “प्रभु, मैंने ऐसे ऐसे काम किए है। कृपया करके मुझे माफ़ करो।” बाद में, पापबलि का गला काटता, याजक को लहू देता, और यकीन के साथ घर वापस जाता की वह पापों से स्वतंत्र हुआ है। इस तरह, पापबलि पापोयों के लिए अपने सिर पापों को लेकर मरता। पापो की जगह बलिदान के पशु को मारा जाता था। पुराने नियम में, पापबलि बकरा, भेड़, बछड़ा, बैल या परमेश्वर के द्वारा ठहराया हुआ कोई पवित्र पशु हो सकता था। 
परमेश्वर ने अपनी अनन्त दया में, एक पापो को उसके पापों की वजह से मरने के बजाएं पशु के जीवन को बलिदान करने की अनुमति दी थी। 
इस रीति से पुराने नियम में, पापी अपने पापों के प्रायश्चित के रूप में बलिदान का प्रायश्चित कर सकते थे। पापियों के सारे अपराध हाथ रखने के द्वारा पापबलि पे चले जाते थे, और पापोयों के पापों को माफ़ करने के लिए बलि का लहू याजक को दिया जाता था। 
फिर भी, हरदिन के पापों का प्रायश्चित करना असम्भव था। परिणाम के तौर पर, परमेश्वर ने इस्राएल के सारे लोगों के वार्षिक पापों को हर साल सांतवें महीने के दसवें दिन महायाजक के द्वारा प्रायश्चित करने के लिए अनुमति दी थी। 
प्रायश्चित के दिन महायाजक को क्या करना होता था? पहले, महायाजक हारून पापबलि के ऊपर अपने हाथो को रखता था, और लोगों के पापों को कबूल करके कहता था की, “प्रभु, इस्राएल के लोगों ने ऐसे ऐसे पाप किए है, जैसे की हत्या, व्यभिचार, परस्त्रीगमन, चोरी, झूठी गवही, निंदा....” 
उसके बाद, वह पाबलि का गला काटकर, उसका लहू लेकर, पवित्र स्थान में दयासन पे सातबार लहू को छिड़कता था। (बाइबल में, नबर ७ को सम्पूर्ण नम्बर माना जाता है।) 
लोगों के वार्षिक पापों को उनके बदले पापबलि के सिर पर डालने का काम महायाजक का था, और पापबलि को बलिदान किया जाता था। 
क्योंकि परमेश्वर सारे लोगों को उनके पापों से छूटकारा देने के लिए न्यायी है, इसलिए उसने लोगों के बदले पापबलि को मरने की अनुमति दी। परमेश्वर सचमुच दयालु है, इसलिए उसने लोगों को उनके बदले में बलिदान के पशु की बलि चढ़ाने की अनुमति दी। फिर महायाजक दयासन के पूर्व में लहू का छिड़काव करता था इस तरह, सारे लोगों के पिछले साल का प्रायश्चित सातवें महीने के दसवें दिन प्रायश्चित के दिन किया जाता था। 
 
पुराने नियम के मुताबिक़ बलिदान का मेम्ना कौन है?
यीशु जो निर्दोष है

महायाजक ने इस्राएल के लोगों के लिए प्रायश्चित के दिन दो बकरों को अर्पण करना पड़ता था। उसमे से एक बकरा बलिदान के लिए था, जिसका मतलब है ‘पर डालना।’ इसी रीति से नए नियम का बलिदान का बकरा यीशु मसीह था। “क्योंकि परमेश्‍वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्‍वास करे वह नष्‍ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना ३:१६)। 
परमेश्वर ने अपना एकलौता बेटा बलिदान के मेमने के रूप में दिया। सारी मनुष्यजाति के बलिदान के मेमने के रूप में, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा पाकर वह जगत का उद्धारकर्ता बना। यीशु का मतलब है ‘उद्धारकर्ता’ और मसीह का मतलब है ‘अभिषिक्त राजा,’ इसलिए यीशु मसीह का मतलब है ‘परमेश्वर का पुत्र जो हम सब को उद्धार देने के लिए आया।’
जैसे पुराने नियम में प्रायश्चित के दिन लोगों के वार्षिक पापों को दूर किया जाता था, उसी तरह यीशु मसीह तक़रीबन २००० साल पहले हमारे सारे पापों के प्रायश्चित के सुसमाचार को परिपूर्ण करने के लिए इस जगत में बपतिस्मा लेने और क्रूस पर अपना लहू बहाने आया। 
इस समय, आइए हम लैव्यव्यवस्था में से एक भाग को पढ़े। “और हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे पर रखकर इस्राएलियों के सब अधर्म के कामों, और उनके सब अपराधों, अर्थात् उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उनको बकरे के सिर पर धरकर उसको किसी मनुष्य के हाथ जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेजके छुड़वा दे। वह बकरा उनके सब अधर्म के कामों को अपने ऊपर लादे हुए किसी निर्जन स्थान में उठा ले जाएगा; इसलिये वह मनुष्य उस बकरे को जंगल में छोड़ दे” (लैव्यव्यवस्था १६:२१-२२)। 
लिखा है की इस्राएलियों के सारे पाप बकरे के सिर पर डाला जता था वह लैव्यव्यवस्था १ में भी दर्शाया है। ‘उनके सब अपराध’ उन्होंने शरीर में और मन में किए हुए सारे पापों को दर्शाता है। और ‘उनके सब अपराध’ महायाजक के हाथ रखने से पापबलि के सिर पर रखे जाते थे। 
 
 
परमेश्वर की व्यवस्था के द्वारा, हमारे पास हमारे सारे पापों का ज्ञान होना चाहिए
 
क्यों परमेश्वर ने हमें व्यवस्था दी?
हमें पापों का ज्ञान देने के लिए

परमेश्वर की व्यवस्था में ६१३ आज्ञाए है। वास्तव में, जब हम उसके बारे में सोचते है, तब हम वही करते है जो उसने करने के लिए मना किया है, और वो नहीं करते जो उसने करने के लिए कहा है। 
इसलिए, हम पापी है। बाइबल में लिखा है की परमेश्वर ने हमें आज्ञाए इसलिए दी ताकि हमें हमारे पापों का एहसास हो (रोमियों ३:२0)। इसका मतलब है की उसने व्यवस्था की आज्ञाए हमें यह सिखाने के लिए दी की हम पापी है। उसने हमें इसलिए नहीं दी की हम उसका पालन करने के लिए सक्षम है, लेकिन इसलिए ताकि हमें हमारे पापों का एहसास हो। 
उसने हमें अपनी आज्ञाए पालन करने के लिए नहीं दी। आप कुत्ते से इन्सान की तरह जीने की आशा नहीं रख सकते। उसी तरह, हम कभी भी परमेश्वर की व्यवस्था के मुताबिक़ नहीं जी सकते, लेकिन उसकी व्यवस्था की आज्ञाओं से हमें हमारें पापों का एहसाह होता है। 
परमेश्वर ने वह हमें दिया क्योंकि हम पापों का ढेर है, लेकिन वास्तव में हमें उसका एहसास नहीं होता। “तू हत्यारा है, परस्त्रीगामी है, कुकर्म करनेवाला है,” परमेश्वर हमें व्यवस्था के जरिए विरोधाभासी रीति से कहता है। उसने हमें हत्या न करने के लिए कहा है, फिर भी हम अपने दिल में हत्या करते है, कभी कभी तो शरीर के द्वारा भी। 
हालाँकि, व्यवस्था में लिखा है इसलिए हमें हत्या नहीं करनी चाहिए, हम जानते है की हम हत्यारे है, और कहते है की, “अरे, मैं झूठा था, मैं पापी हूँ क्योंकि मैंने कुछ ऐसा किया है जो मुझे नहीं करना चाहिए था। मैंने पाप किया है।” 
इस्राएल के लोगों को पाप से बचाने के लिए, परमेश्वर ने पुराने नियम में हारून को प्रायश्चित का बलिदान चढ़ने की अनुमति दी, और वह हारून था जो साल में एकबार लोगों के लिए प्रायश्चित करता था। 
पुराने नियम में, प्रायश्चित के दिन परमेश्वर को दो पापबलि चढ़ाई जाति थी। एक परमेश्वर के सन्मुख अर्पित किया जाता था जब की दुसरे के सिर पर हाथ रखके लोगों के सारे पापों को लेकर जंगल में भेज दिया जाता था। नियुक्त किए गए मनुष्य के हाथो बकरे को जंगल में भेजने से पहले, महायाजक जीवित बकरे के सिर पर अपने हाथ रखता और इस्राएल के पापों को कबूल करता। “प्रभु, लोगों ने हत्या, परस्त्रीगमन, चोरी, मूर्ती पूजा की है....हमने तेरे सन्मुख में पाप किया है।” 
पलिस्ती की भूमि रेगिस्तान जंगल है। बकरे को अंतहीन जंगल में छोड़ दिया जाता और आखिर में उसकी मौत हो जाति। जब उसको छोड़ा जाता, तब इस्राएल के लोग जब तक वह दिखना बंद न होजाए तब तक उसपे नज़र रखते थे, और विश्वास करते थे की उनके पाप बकरे के साथ चले गए है। ऐसे लोगों को शान्ति मिलती, और सारे लोगों के वार्षिक पापों के लिए जंगल में बकरे की मौत हो जाति। 
इस रीति से, परमेश्वर ने यीशु मसीह यानी की परमेश्वर के मेमने के द्वारा हमारे सारे पापों का प्रायश्चित किया। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस के लहू के द्वारा हमारे सारे पाप सम्पूर्ण रीति से साफ़ हो गए है। 
यीशु परमेश्वर और उद्धारकर्ता है। वह परमेश्वर का पुत्र है जो सारी मनुष्यजाति को पाप में से उद्धार देने के लिए आया। वह सृष्टिकर्ता है जिसने हमें अपने स्वरुप में बनाया है और वह इस संसार में हमें बचाने के लिए आया। 
केवल हमारे हरदिन के पाप ही यीशु पर डाले गए ऐसा नहीं है लेकिन हमारे भविष्य के और मन और शरीर के पाप भी यीशु पर डाले गए है। इस तरह, परमेश्वर की सब धार्मिकता को पूरा करने के लिए और जगत के सारे पापों का सम्पूर्ण प्रायश्चित करने के लिए उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया। 
यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने के तिन साल पहले, जब उसने सार्वजनिक सेवाओँ को शुरू किया, तब उसने यरदन में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को उठा लिया था। हमारे सारे पापों के प्रायश्चित के द्वारा मनुष्यजाति के लिए उसका उद्धार उसके बपतिस्मा से शुरू होता है। 
यरदन नदी में, जहा कमर तक पानी था, वहाँ यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु पर हाथ रखे और उसे डूबकी लगवाई। यह बपतिस्मा पुराने नियम के हाथ रखकर पापों को उसके ऊपर डालने जैसा ही है। 
पानी में डूबकी मारने का मतलब है मृत्यु, और पानी में से बहार आने का मतलब है पुनरुत्थान। इस तरह, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा यीशु ने अपनी सेवकाई के तीनो भाग को पूर्ण किया और प्रगट किया: सारे पापो को लेना, क्रूस पर मरना, और पुनरुत्थान। 
हम केवल तभी बच सकते है जब हम यीशु ने हमें जो वचनों के द्वारा पाप से छुड़ाया उसका पालन करे। परमेश्वर ने हमें यीशु के द्वारा बचाने का फैसला किया था, और पुराने नियम में उसने जो वाचा बाँधी थी वह परिपूर्ण हुई। इस कार्य के द्वारा। यीशु हमारे सारे पापों को लेकर क्रूस तक चला।
 
जब यीशु ने हमारे सारे पापों को धो दिया है तो 
अब हमें कौन सा काम करना बाकी है?
हम सभी को अब परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करना है।

यूहन्ना १:२९ में लिखा है, “दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्ना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने गवाही दी की, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्ना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” जब यीशु ने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया तब मनुष्यजाति के सारे पाप उस पर डाले गए। विश्वास कीजिए! फिर आप अपने सारे पापों के प्रायश्चित से आशीषित होंगे। 
हमें परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करना ही चाहिए। हमें अपने विचार और ज़िद को एक तरफ रखकर परमेश्वर के लिखित वचनों का पालन करना चाहिए। हमें केवल सरल रीति से विश्वास करना है की यीशु ने जगत के सारे पापों को उठा लिया है। 
ऐसा कहना की यीशु ने जगत के सारे पापों को उठा लिया है और ऐसा कहना की उसने हमारे पापों के प्रायश्चित से परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया है यह दोनों ही एक जैसे ही है। ‘ऊपर हाथ रखना’ और ‘बपतिस्मा’ यह दोनों भी एक जैसे ही है। 
हम ‘सब,’ ‘सारा,’ या ‘सम्पूर्ण’ कहते है लेकिन इन सबका मतलब एक जैसा ही है। पुराने नियम में ‘ऊपर हाथ रखना’ का मतलब नए नियम में भी ऐसा ही होता है, लेकिन वहाँ ‘बपतिस्मा’ शब्द का प्रयोग हुआ है। 
उसका एक सरल सत्य है की यीशु ने हमारे सारे पापों के प्रायश्चित के लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर न्याय ले लिया। हम जब इस मूल सुसमाचार पर विश्वास करते है तब उद्धार प्राप्त करते है। 
जब बाइबल कहती है की यीशु ने ‘जगत का पाप’ (यूहन्ना १:२९) उठा लिया है, तब जगत के पापों का क्या मतलब होता है? उसका मतलब है की वह सारे पाप जो लेकर हम पैदा हुए थे, वह है बुरे विचार, चोरी, परस्त्रीगमन, लालच, बुराई, निंदा, घमंड, और मूर्खता जो हमारे मन में है। उसमे हमारे सारे उल्लंघन और अपराध है जो हम शरीर से और मन से करते है। 
“क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है” (रोमियों ६:२३)। “और बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नहीं” (इब्रानियों ९:२२)। जैसे इस वचनों में कहा है वैसे, सारे पापों को किंमत चुकानी पड़ती है। यीशु मसीह ने सारी मनुष्यजाति को पापों से बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया और एक ही बार हमेशा के लिए पापों की किंमत चुका दी। 
इसलिए, हमारे सरे पापों से मुक्त होने के लिए, हमें केवल मूल सुसमाचार पर विश्वास करना है – यीशु का बपतिस्मा, उसका लाहो, और उसका इश्वरत्व 
 
 
भविष्य के पापों का प्रायश्चित 
 
क्या अब हमें हमारे पापों के लिए 
बलि चढ़ाने की आवश्यकता है?
फिर कभी नहीं

आनेवाले कल के पाप, परसों के पाप, और हम जिए तब तक जो पाप हम करते है वह ‘जगत के पाप’ में सम्मिलित है, वैसे ही आज के पाप, बीते कल का पाप, उसके पहले के पापों को भी ‘जगत के पाप’ में सम्मिलित किया जाता है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सारे पाप ‘जगत के पाप’ का एक भाग है, और जगत के सारे पाप यीशु के बपतिस्मा के द्वारा निश्चितरूप से उस पर डाले गए है। हमारे मृत्यु तक हम जो भी पाप करेंगे वह सब पहले से ही ले लिए गए है। 
हमें केवल यह मूल सुसमाचार, यानी की परमेश्वर के लिखित वचनों पर विश्वास करने की जरुरत है और उद्धार के लिए उसका पालन करने की जरुरत है। हमारे सारे पापों से छूटकारा पाने के लिए हमें हमारे विचारों को एक तरफ रखना चाहिए। आप शायद पूछेंगे, “हमने जो पाप किए ही नहीं उन पापों को वह कैसे ले सकता है? तो फिर, मैं आपको सामने दूसरा प्रश्न पूछूंगा, “क्या हम जब जब पाप करे तब यीशु को बार बार आकार लहू बहाना चाहिए?” 
नया जन्म पाने के सुसमाचार के अन्दर ही हमारे पापों के प्रायश्चित का नियम है। “और बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नहीं” (इब्रानियों ९:२२)। जब पुराने नियम में कोई व्यक्ति अपने पाप से छूटकारा पाने की इच्छा रखता, तब उसे पापबलि पर अपने हाथ रखने के द्वारा अपने पापों को उसके ऊपर डालना पड़ता था, और उसकी जगह पे पापबलि को मरना पड़ता था। 
इसी रीति से, परमेश्वर का पुत्र सारी मनुष्यजाति को बचाने के लिए पृथ्वी पर आया। उसने हमारे सारे पापों को उठाने के लिए बपतिस्मा लिया, हमारे पापों की किंमत चुकाने के लिए क्रूस पर लहू बहाया, और “पूरा हुआ” कहने के द्वारा मर गया। तीसरे दिन वह पुनरुत्थित हुआ और अभी पिता के दाहिने हाथ बैठा हुआ है। इस तरह, वह हमेशा के लिए हमारा उद्धारकर्ता बना। 
हमारे पापों से सम्पूर्ण छूटकारा पाने के लिए, हमें अपने निश्चित विचारों को फेकना पडेगा और हमारे धार्मिक सिध्धांतो को छोड़ना पडेगा जोई हमें हमारे हरदिन के पापों के छुटकारे के रोजाना पछतावे की प्रार्थना करने के लिए कहते है। मनुष्यजाति के पापों को दूर करने के लिए, एक योग्य बलिदान एक ही बार हमेशा के लिए बलिदान करना आवश्यक था। स्वर्ग के परमेश्वर ने अपने बेटे के बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को उस पर डाल दिए और उसे क्रूस पर लटकने दिया। मृत्यु में से उसके पुनरुत्थान से हमारा उद्धार सम्पूर्ण हुआ। 
“निश्‍चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्‍वर का मारा–कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी.... और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।” यशायाह ५३ में, सारी मनुष्यजाति के उल्लंघन और अपराधों को यीशु मसीह पर डाला गया है। 
नए नियम में, इफिसियों १:४ में लिखा है, “जैसा उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले उसमे चुन लिया है।” यह हमें कहता है की उसने जगत की उत्पत्ति से पहले हमें उसमे चुन लिया है, जगत की उत्पत्ति से पहले, परमेश्वर ने हमें मसीह में अपने लोग, दोषरहित धर्मी बनाने का फैसला किया था। हम पहले जो कुछ भी सोचते थे, लेकिन अब हमें परमेश्वर के वचन, पानी, लहू, और आत्मा के वचनों पर विश्वास करना चाहिए और उसका पालन करना चाहिए। 
परमेश्वर ने हमें कहा था की उसके मेमने, यीशु मसीह ने जगत के पापों को ले लिया है और सारी मनुष्यजाति के लिए प्रायश्चित किया है।
इब्रानियों १० में लिखा है की, “क्योंकि व्यवस्था, जिसमें आनेवाली अच्छी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब है पर उनका असली स्वरूप नहीं, इसलिये उन एक ही प्रकार के बलिदानों के द्वारा जो प्रतिवर्ष अचूक चढ़ाए जाते हैं, पास आनेवालों को कदापि सिद्ध नहीं कर सकती” (इब्रानियों १०:१)। 
यहाँ, वह कहता है की उन्होनें सालो साल जो बलिदान चढ़ाए उससे वे सम्पूर्ण नहीं बने। व्यवस्था सच्ची बातों का चित्र नहीं है लेकिन अच्छी चीज जो आनेवाली है उसके छाया रूप है। यीशु मसीह, जो आनेवाला था, उसने एक ही बार हमेशा के लिए (जैसे इस्राएल के वार्षिक पाऊँ का एक ही बार हमेशा के लिए प्रायश्चित किया जाता था) बपतिस्मा लेने के द्वारा और हमारें सारे पापों के प्रायश्चित के लिए क्रोस पर लटकने के द्वारा हमें सम्पूर्ण किया है। 
फिर, यीशु ने इब्रानियों १० में कहा है की, “फिर यह भी कहता है, “देख, मैं आ गया हूँ, ताकि तेरी इच्छा पूरी करूँ,” अत: वह पहले को उठा देता है, ताकि दूसरे को नियुक्‍त करे। उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं। हर एक याजक तो खड़े होकर प्रतिदिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते, बार-बार चढ़ाता है। परन्तु यह व्यक्‍ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ाकर परमेश्‍वर के दाहिने जा बैठा, और उसी समय से इसकी बाट जोह रहा है, कि उसके बैरी उसके पाँवों के नीचे की पीढ़ी बनें। क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है। और पवित्र आत्मा भी हमें यही गवही देता है; क्योंकि उसने पहले कहा था, “प्रभु कहता है कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद उनसे बाँधूँगा वह यह है कि मैं अपने नियमों को उनके हृदय पर लिखूँगा और मैं उनके विवेक में डालूँगा।” फिर वह यह कहता है, “मैं उनके पापों को और उनके अधर्म के कामों को फिर कभी स्मरण न करूँगा।” और जब इनकी क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा” (इब्रानियों १०:९-१८)। 
हम विश्वास करते है की यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रोस पर लहू बहाने के द्वारा हमें जगत के सारे पापों से उद्धार दिया है। 
 
 
पानी और आत्मा से नया जन्म पाकर मिलता उद्धार जो हमारे हृदय और मन में लिखा हुआ है 
 
क्या अब हम पाप नहीं करते 
इसलिए धर्मी है?
नहीं। हम धर्मी है क्योंकि यीशु ने हमारे सारे पापों को 
उठा लिया और हम उसमे विश्वास करते है।

क्या आप सभी उसके सम्पूर्ण उद्धार पर विश्वास करते हो? – आमीन – क्या आप विश्वास से परमेश्वर के वचन का पालन करते है की हमें बचाने के लिए यीशु मसीह ने खुद बपतिस्मा लिया और क्रूस पर लहू बहाया? नया जन्म पाने के लिए उसके वचनों पर हमारा विश्वास होना चाहिए। जब हम विश्वास करते है की यीशु ने माफ़ी के सुसमाचार के द्वारा जगत के पापों के साथ हमारे सारे पापों को भी धो दिया है तब हम उद्धार पा सकते है। 
हम परमेश्वर के नियमो का पालन करने के द्वारा कभी भी पापरहित नहीं बन सकते, लेकिन उसके कार्यो में विश्वास करने के द्वारा सम्पूर्ण बन सकते है। यीशु मसीह ने यर्दन में बपतिस्मा लेने के द्वारा, न्याय को सहन करने के द्वारा और क्रूस पर हमारे पापों की वजह से दण्ड सहने के द्वारा हमारे सारे पापों को ले लिया है। यह सुसमाचार पर पूरी रीति से विश्वास करने के द्वारा, हम अपने सारे पापों से छूटकारा पा सकते है और धर्मी बन सकती है। क्या आप ये विश्वास करते है? 
यीशु का बपतिस्मा, उसका क्रूस पर लटकना और पुनरुत्थान मनुष्यों के पापों की माफ़ी के लिए था और उद्धार का नियम परमेश्वर के असीमित और निस्वार्थ प्रेम पर निर्भर है। हम जैसे है वैसे ही परमेश्वर हमें प्रेम करते है और वह धर्मी है, इसलिए उसने पहले हमें धर्मी बनाया। उसने यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उसके ऊपर डाल कर हमें धर्मी बनाया है। 
हमारे सारे पापों को साफ़ करने के लिए, उसने अपने एकलौते बेटे को पृथ्वी पर भेजा। उसने यीशु को बपतिस्मा के द्वारा सारे पापों को उठा लेने की अनुमति दी और फिर हमारे पापों का न्याय उसके बेटे पर डाल दिया। उसने पानी और लहू के उद्धार के द्वारा हमें अपनी धर्मी संतान बनाया है, परमेश्वर का अगापे प्रेम। 
इब्रानियों १०:१६ में लिखा है, “मैं अपने नियमों को उनके हृदय पर लिखूँगा और मैं उनके विवेक में डालूँगा।” 
हमारे हृदय और मन में, क्या हम परमेश्वर के सन्मुख में पापी है या धर्मी? यदि हमें परमेश्वर के वचन पे विश्वास है, तो हम धर्मी बनेंगे। यीशु मसीह ने हमारे सारे पापों को उठा लिया और उसका न्याय भी हुआ। यीशु मसीह हमारे उद्धारकर्ता है। आप सोच सकते हो, “हम हरदिन पाप करते हैतो फिर हम धर्मी कैसी बन सकते है? निश्चितरूप से हम पापी है।” लेकिन जब हम परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करते है, जैसे यीशु ने पिता की आज्ञा का पालन किया, तो हम धर्मी बनेंगे।
वास्तव में, मैंने जैसे पहले कहा था वैसे, हमने नया जन्म पाया उससे पहले हमारे हृदय में पाप था। हमने माफ़ी के सुसमाचार को अपने क्रिदय में लिया उसके बाद, हमनी हमारे सारे पापों से उद्धार पाया। जब हम सुसमाचार नहीं जानते थे, तब हम पापी थे। लेकिन जब हमने यीशु के उद्धार पर विश्वास करना शुरू किया, और यीशु के धर्मी संतान बने उसके बाद हम धर्मी बने। यह धर्मी बनने का विश्वास है जिसके बारे में प्रेरित पौलुस ने बात की है। माफी के सुसमाचार पर विश्वास करने से हम ‘धर्मी’ बने है। 
ना तो प्रेरित पौलुस, ना तो अब्राहम, ना तो विश्वास के पूर्वजों अपने कार्य से धर्मी बने थे, लेकिन परमेश्वर के वचन, पापों की माफ़ी के उसके आशीषित वचनों पर विश्वास करने से धर्मी बने। 
इब्रानियों १०:१८ में, “और जब इनकी क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा।” जैसे लिखा गया है वैसे ही परमेश्वर ने हमें उद्धार दिया है जिससे हमें अपने पापों के लिए मरना न पड़े। क्या आप इसमे विश्वास करते है? – आमीन -
फिलिप्पियों २ में, “जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो; जिसने परमेश्‍वर के स्वरूप में होकर भी परमेश्‍वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन् अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्‍वर ने उसको अति महान् भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है, कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें; और परमेश्‍वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकर कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है” (फिलिप्पियों २:५-११)। 
यीशु मसीह, जो उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्व की छाप है (इब्रानियों १:३), उसने अपने लिए कोई महान गौरव नहीं लिया। उसके बदले में, वह खुद एक सेवक सा बना, और मनुष्य के समान बना। उसने खुद को नम्र किया और हमें बचाने के लिए मृत्यु तक आज्ञाकारी रहा। 
इसलिए, हम यीशु की स्तुति करते है, “वह हमारा परमेश्वर, उद्धारकर्ता और राजा है।” हम परमेश्वर की महिमा और यीशु की स्तुति करते है उसका कारण यह है की यीशु ने अन्त तक पिता की इच्छा का पालन किया। यदि उसने पालन नहीं किया होता, तो हम अभी परमेश्वर के पुत्र की महिमा नहीं कर रहे होते। लेकिन परमेश्वर के पुत्र ने अपने पिता की इच्छा का मरते दम तक पालन किया इसलिए, पृथ्वी पर सारी सृष्टि और सारे लोग उसकी महिमा करते है, और हमेशा के लिए करते रहेंगे। 
यीशु मसीह परमेश्वर का मेमना बना जिसने जगत के पापों को उठा लिया, और लिखा है की अपने बपतिस्मा के द्वारा उसने सारे पापों को ले लिया है। अब, उसने जगत के पापों को उठा लिया उसे तक़रीबन २००० साल गुजर चुके है। आप और मैं हमारे जन्म से इस संसार में जी रहे है, और जगत के पापों में हमारे पाप भी सम्मिलित है। 
 
यदि हम भविष्य में पाप करे तो क्या 
हम पापी बनेंगे?
नहीं, क्योंकि यीशु ने हमारे भूतकाल के, वर्त्तमान के, 
और भविष्य के सारे पापों को उठा लिया है।

मूल पापों को हमारे जीवन के अपराधों से अलग न करे तो, क्या हमने जन्म लिया तबसे कोई पाप नहीं किया? – हाँ, हमने किया है। -
यीशु जानते थे की हम अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक पाप करेंगे, इसलिए उसने पहली से ही हमारे पापों को उठा लिया ठगा। क्या अब आप वह देख सकते है? यदि हम ७० सालों तक जिए तो हमारे पापों से सौ सभी ज्यादा ट्रक भर जाएंगे। लेकिन यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिया और अपने साथ क्रूस तक ले गया। 
यदि यीशु ने केवल मूल पाप ही लिए है, तो हम सब मरेंगे और नरक में जाएंगे। यदि हमें ऐसा लगता है की उसने हमारे सारे पापों को नहीं लिया, फिर भी उससे सत्य को बदला नहीं जा सकता की यीशु ने हमारे सारे पापों को दूर किया है। 
हम इस जगत में कितने पाप करते है? हमारे सारे पाप जगत के पापों में सम्मिलित होते है। 
जब यीशु ने यूहन्ना से कहा की उसको बपतिस्मा दे, तब उसका निश्चितरूप से वही मतलब था। यीशु मसीह ने खुद गवाही दी है की उसने हमारे सारे पापों को उठा लिए है। परमेश्वर ने अपने सेवक को यीशु के पहले भेजा और यीशु का बपतिस्मा यूहन्ना से हुआ। यूहन्ना, मनुष्यजाति का प्रतिनिधि से बपतिस्मा लेने के द्वारा, उसके सामने बपतिस्मा के लिए सिर झुकाने के द्वारा, यीशु ने सारी मनुष्यजाति के सारे पापों को उठा लिया। 
२० से ३० साल की उम्र तक के, ३० से ४० की उम्र तक के, और ऐसे आगे हमारे सारे पापों का, यहाँ तक की हमारे बचपन के पाप भी जगत के पापों में सम्मिलित होते है, जिसे यीशु ने बपतिस्मा के द्वारा उठा लिए। 
कौन कह सकता है की अभी भी इस जगत में पाप बाकी है? यीशु मसीह ने जगत के पापों को ले लिया, और जब हम बिना संदेह के यीशु ने हमारे प्रायश्चित के लिए जो कुछ भी किया: उसका बपतिस्मा और उसका किंमती खून बहाया उस पर हमारे पूरे दिल से विश्वास करेंगे तो हम उद्धार पा सकते है। 
ज्यादातर लोग अपने विचारों में डूबे रहकर बहुत ही अशांत जीवन जीते है, और अपने जीवन के बारे में ही बाते करते है जैसे की उनका जीवन का बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो। लेकिन ऐसे बहुत सारे लोग है जिन्होंने कठिन जीवन जिया है। कई लोगो ने अशांत जीवन जिया है। नया जन्म पाने से पहले मैंने भी ऐसा ही जीवन जिया है। कैसे आप माफ़ी के सुसमाचार, यीशु का बपतिस्मा, और उसके लहू के सुसमाचार को समझ कर विश्वास नहीं कर सकते? 
 
 
पापियों का उद्धार सम्पूर्ण हो चुका है 
 
क्यों यीशु ने पतरस के पैर धोएं?
क्योंकि वो चाहता था की पतरस दृढ विश्वास करे की यीशु ने अपने
बपतिस्मा के द्वारा उसके भविष्य के पापों को भी उठा लिया है।

आइए यूहन्ना १९ पढ़े। “तब वे यीशु को ले गए, और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो ‘खोपड़ी का स्थान’ कहलाता है और इब्रानी में ‘गुलगुता’। वहाँ उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को। पिलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया, और उसमें यह लिखा हुआ था, “यीशु नासरी, यहूदियों का राजा।” यह दोष-पत्र बहुत से यहूदियों ने पढ़ा, क्योंकि वह स्थान जहाँ यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था नगर के पास था; और पत्र इब्रानी और लतीनी और यूनानी में लिखा हुआ था” (यूहन्ना १९:१७-२०)। 
प्रिय मित्रो, यीशु मसीह ने जगत के सारे पापों को उठा लिया और पिलातुस की सभा में उसे मृत्यु दण्ड दिया गया। अब आइए हम इस द्रश्य के बारें में एक साथ सोचे। 
वचन २८ से, “इसके बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ पूरा हो चुका, इसलिये कि पवित्रशास्त्र में जो कहा गया वह पूरा हो, कहा, “मैं प्यासा हूँ।” वहाँ सिरके से भरा हुआ एक बरतन रखा था, अत: उन्होंने सिरके में भिगोए हुए स्पंज को जूफे पर रखकर उसके मुँह से लगाया। जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा, “पूरा हुआ”; और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए” (यूहन्ना १९:२८-३०)। 
यीशु ने कहा, “पूरा हुआ!” और क्रूस पर मर गया। तिन दिन बाद, वह मृत्यु से पुनरुत्थित हुआ और स्वर्ग में गया। 
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका मृत्यु अनिवार्य रूप से एक दुसरे के साथ जुड़े हुए है; एक दुसरे के बिना किसी का भी अस्तित्व नहीं है। इसलिए, आइए हम प्रभु यीशु की स्तुति करे क्योंकि उसने अपने पाप के सुसमाचार के द्वारा हमें बचाया है।
मनुष्य का शरीर हमेशा शरीर की जरूरतों का पालन करता है, इसलिए हम अपने शरीर से पाप करते है। उसने अपने सुसमाचार के द्वारा हमें हमारे शरीर के पापों से बचाया है। 
जिनके पास पापों की सम्पूर्ण माफ़ी है वे यीशु के ऊपर जो बैतलहम में पैदा हुआ, यरदन में बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा और तीसरे दिन पुनरुत्थित हुआ उस पर विश्वास करने के द्वारा स्वर्ग राज्य में प्रवेश कर सकते है। हम हमेशा परमेश्वर की स्तुति करते है और उसके नाम की महिमा करते है। 
यूहन्ना के आख़री अध्याय में, यीशु पुनरुत्थित हो कर गलील में गया था। वह पतरस के पास गया और उसे पूछा, “हे, शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? और पतरस ने उत्तर दिया, “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” फिर यीशु ने उसे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” 
पतरस को सारी बातों का एहसास हुआ, यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार, पापों की माफ़ी। अब, पानी और लहू के सुसमाचार पर विश्वास करने से जिसने उसे उसके पापों की माफ़ी दी और एहसास कराया की क्यों यीशु ने उसके पैर धोए थे उससे यीशु पर उसका विश्वास ओर भी ज्यादा मजबूत बना। 
आइए हम यूहन्ना २१:१५ फिर से पढ़े। “भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसने उससे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” उसने अपने मेमनों को पतरस को सोंपने के लिए विश्वास किया क्योंकि पतरस उसका चेला था, जिसने पूर्णरीति से उद्धार पाया था, और क्योंकि पतरस परमेश्वर का धर्मी और सम्पूर्ण सेवक था।
यदि पतरस अपने हरदिन के पापों से फिरसे पापी बन गया होता तो, यीशु ने कभी भी उसे पापों के प्रायश्चित का सुसमाचार प्रचार करने के लिए नहीं कहा होता, क्योंकि उसने, सारे चेलों के साथ हरदिन शरीर में पाप लिया होता। हालाँकि, यीशु ने उनको सुसमाचार का प्रचार करने को कहा जिन्होंने अपने सारे पापों को दूर किया था क्योंकि उन्होंने यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पर विश्वास किया था, पाप के लिए प्रायश्चित का सुसमाचार।
 
 
“प्रभु, तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ”
 
जब आप फिरसे पाप करते हो तब क्या आप
फिरसे ‘पापी’ बनते हो?
नहीं। यीशु ने यरदन में पहले से ही मेरे भविष्य के 
पापों को ले लिया है।

आइए हम यीशु ने पतरस को कहे हुए शब्द के बारें में सोचे। “हे, शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उससे कहा, “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” उसके प्रेम का अंगीकार सच्चा था, क्योंकि उसके विश्वास का उद्भव पापों के प्रायश्चित के सुसमाचार से हुआ था। 
यदि यीशु ने पतरस और दुसरे चेलों को पैर धोने के द्वारा पापो के माफ़ी का सुसमाचार सिखाया नहीं होता, तो वे प्रेम का अंगीकार करने के लिए सक्षम नहीं होते। 
उसके बदले, जब यीशु उनके पास आया और पूछा, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? पतरस ने कहा होता, “प्रभु, मैं तो केवल एक अपूर्ण व्यक्ति हूँ। मैं एक पापी हूँ जो आपको इन से बढ़कर प्रेम नहीं कर सकता। कृपया करके मुझे अकेला छोड़ दो।” और पतरस वहाँ से भाग गया होता, यीशु से खुद को छूपा लिया होता। 
लेकिन आइए हम पतरस के उत्तर के बारे में सोचे। वह पापों के माफ़ी का सुसमाचार, यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू जिसने पूरी मनुष्यजाति को बचाता है उसके द्वारा वह आशीषित हुआ था। 
इसलिए पतरस ने कहा, “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” यह प्रेम का अंगीकार यीशु के माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा आया है। पतरस ने पापों के प्रायश्चित के सच्चे सुसमाचार पर विश्वास किया था, जिसके द्वारा यीशु ने जगत के सारे पापों को उठा लिया था। इसमें भविष्य के सारे पाप सम्मिलित होते है, जो लोग शरीर की दुर्बलता और कमजोरी की वजह से करते है। 
पतरस ने दृढ़ता से पापो की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास किया, और उसने ऐसा भी विश्वास किया की यीशु परमेश्वर का मेम्ना था इसलिए वह प्रभु को बिना किसी झिजक क उत्तर दे सका। यीशु का उद्धार पापों की माफ़ी के सुसमाचार से आता है, और ऐसे, पतरस ने अपने हरदिन के पापों से भी उद्धार पाया। पतरस ने जगत के सारे पापों की माफ़ी के सुसमाचार के द्वारा उद्धार प्राप्त किया। 
क्या आप पतरस के जैसे है? क्या आप यीशु को प्रेम कर सकते है और उस पर विश्वास कर सकते है, जिसने अपने माफ़ी के सुसमाचार, अपने बपतिस्मा और लहू से हमारे सारे पापों को उठा लिया है? आप कैसे उस पर विश्वास और उसे प्रेम नहीं कर सकते? दूसरा कोई रास्ता नहीं है। 
यदि यीशु ने केवल हमारे भूतकाल और वर्त्तमान के पापों को ही लिया है और भविष्य के पापों को नहीं लिया तो हम अभी जिस तरह से यीशु की स्तुति कर रहे है वेसे कभी नहीं कर पाते। इसके अलावा, हम सब निश्चितरूप से नरक में जाएंगे। इसलिए, हम सब को यह दावा करना चाहिए की पाप के प्रायश्चित के सुसमाचार पर विश्वास करने से हमने उद्धार पाया है। 
शरीर हमेशा पाप करने की ओर झुका हुआ है, इसलिए हम निरन्तर पाप करते है। इसलिए, हमें अंगीकार करना ही चाहिए की पाप के भरपूर प्रायश्चित का सुसमाचार जो यीशु ने हमें दिया है यानी की यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार पर विश्वास करने से, हमारा उद्धार हुआ है। 
यदि हम पाप के प्रायश्चित के सुसमाचार यानी की यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार पे विश्वास नहीं किया होता, तो कोई भी विश्वासी ने अपने जीवनभर के पापों से छूटकारा नहीं पाया होता। उसके अलावा, यदि हमने हरबार अंगीकार और पछतावा करने के द्वारा उद्धार पाया होता, तो हम शायद धर्मी बने रहने के लिए आलसी होते और हमारे दिलों में हमेशा पाप रहता। 
यदि ऐसा होता, तो हम पापी बनने की ओर जा रहे होते और यीशु को प्रेम नहीं कर पाते या उसके नजदीक भी नहीं जा पाते। हम यीशु के उद्धार पर विश्वास नहीं कर पाते और जीवन के अन्त तक उसके पीछे नहीं चल पाते। 
यीशु ने हमें पाप के माफ़ी का सुसमाचार दिया और जिन्होंने विश्वास किया उनको उद्धार भी दिया। वह सम्पूर्ण उद्धारकर्ता बना और हमारे हरदिन के अपराधों को धो दिया जिससे की हम उसे सच्चा प्रेम कर सके। 
हम विश्वासी यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार, हमारे पापों की माफ़ी के सुसमाचार को प्रेम करते है। सारे विश्वासी पापों की माफ़ी के सुसमाचार जो यीशु ने हमें दिया है उसके जरिए हमेशा यीशु को प्रेम कर सकते है और उसके उद्धार के प्रेम में बंध सकते है। 
प्रिय मित्रो! यदि यीशु ने एक छोटा सा पाप भी छोड़ दिया होता, तो आप यीशु पर विश्वास करने के लिए सक्षम नहीं बनते, और आप माफ़ी के सुसमाचार के गवाह बनने के लिए भी सक्षम नहीं होते। 
लेकिन, यदि आप पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करते है, तो आप अपने सारे पापों से उद्धार पा सकते है। जब आपको यीशु के वचनों में दर्शाई गई, माफ़ी के सच्चे सुसमाचार का एहसास होता है तब वह आपको अपने सारे पापों से उद्धार पाने की अनुमति देता है।
 
 
“क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?”
 
क्यों हम यीशु को इतना ज्यादा प्रेम करते है?
उसके बपतिस्मा के द्वारा हमारे ऊपर उसके प्रेम के कारण, 
जिसने हमारे भविष्य के पापों के साथ 
सारे पापों को धो दिया है।

परमेश्वर ने अपने मेमनों को अपने सेवक को सोंप दिए, जो पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर सम्पूर्ण विश्वास करता था। यीशु ने तिन बार पूछा, “हे, शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? और पतरस ने हर बार उत्तर दिया, “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” अब, आइए हम पतरस के उत्तर के बारे में सोचे। हम देख सकते है की यह उसके इच्छा की अभिव्यक्ति नहीं थी, लेकिन पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर उसका विश्वास था। 
जब हम किसी को प्रेम करते है, और जब वह प्रेम हमारी इच्छाओं पर निर्भर होता है, तो जब हम कमज़ोर पड़ते है तब वह प्रेम अस्थिर हो जाता है। लेकिन यदि वह प्रेम परमेश्वर के प्रेम के सामर्थ के ऊपर निर्भर होता है, तो फिर वह हमेशा के लिए स्थिर रहेगा। परमेश्वर का प्रेम, जैसे की, हमारे सारे पापों के लिए भरपूर प्रायश्चित, यीशु के बपतिस्मा का पानी और लहू का उद्धार, जैसा है। 
पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर हमारा विश्वास हमारे प्रेम और प्रभु के लिए कार्यो की नीव बनना चाहिए। यदि हमने उसे केवल हमारी इच्छा से प्रेम किया होगा, तो हम कल को ठोकर खाएंगे और हमारे अन्यायों के कारण खुद को धिक्कार ने के द्वारा अन्त होगा। हालाँकि, यीशु ने हमारे पापों को धो दिया है: मूल पाप, भूतकाल के हमारे हरदिन का पाप, आज के और आनेवाले कल के पाप, और हमारे जीवनभर के सारे पाप। उसने किसी को भी उद्धार से अलग नहीं रखा। 
यह सब सच है। यदि हमारा प्रेम और विश्वास हमारी इच्छाओं पर निर्भर है, तो हम अपने विश्वास में विफल हो जाएंगे। लेकिन हमारा प्रेम और विश्वास यीशु ने दी हुई पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर निर्भर है, तो हम पहले से ही परमेश्वर की संतान, और धर्मी है। 
क्योंकि हम पानी और आत्मा के द्वारा मिलते उद्धार पर विश्वास करते है इसलिए हम पापरहित है, और क्योंकि हमारा उद्धार हमारे खुद के विश्वास से नहीं लेकिन परमेश्वर के प्रेम और उसके पापों के प्रायश्चित के सुसमाचार से हुआ है, इसलिए हम जीवन में अधूरे और कमज़ोर होने के बावजूद धर्मी है। हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे और अनंतकाल तक परमेश्वर की स्तुति करेंगे। क्या आप यह विश्वास करते है? 
१ यूहन्ना ४:१० में लिखा है, “प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्‍वर से प्रेम किया, पर इस में है कि उसने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्‍चित के लिये अपने पुत्र को भेजा।” यीशु ने हमें पानी और आत्मा से बचाया, जिससे हम माफ़ी के सुसमाचार, यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पर विश्वास करे। 
यदि यीशु ने हमें पापों की माफ़ी के सुसमाचार से बचाया न होता, तो हमनें कभी उद्धार प्राप्त नहीं किया होता, फिर भले ही चाहे हम कितने भी उत्साह से विश्वास क्यों न करते हो। लेकिन यीशु ने हमारे हृदय से और शरीर से किए सारे पापों को धो दिया है। 
हमें धर्मी बनने के लिए, यकीन होना चाहिए की पानी और आत्मा, प्रायश्चित के सुसमाचार के वचनों पर विश्वास से हमारा उद्धार हुआ है। जगत के सारे पापों की माफ़ी का सुसमाचार यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू से बना हुआ है। माफी का सुसमाचार सच्चा विश्वास, उद्धार की नीव है, और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने की चाबी है। 
 
 
हमें अपनी खुद की इच्छाओं का विश्वास निकाल देना चाहिए 
 
सच्चा विश्वास कहा से आता है?
वह परमेश्वर की ओर से आता है, जिसने हमारे भविष्य के
सारे पापो को धो दिया है।

व्यक्ति की अपनी इच्छा से जन्मा हुआ विश्वास या प्रेम सच्चा प्रेम नहीं है। इस दुनिया में कई लोग है जो यीशु को अपनी इच्छासे प्रेम करते है, फिर उनके हृदय में रही पाप की पीड़ा के कारण वे अपना विश्वास छोड़ देते है। 
लेकिन हमें एहसास होना चाहिए की यीशु ने जगत के सारे पापों को धो दिया है: केवल मामूली अपराध ही नहीं लेकिन बड़े से बड़े पापों को भी। 
यूहन्ना १३ में, अपने चेलों को उद्धार के पूर्णता के ज्ञान को सिखाने के लिए क्र्रोस पर चढ़ने से पहले यीशु ने अपने चेलों को बुलाया। अपने चेलो के साथ भोजन करते समय, उसने खड़े होकर उनके हृदयों में अपने भरपूर उद्धार के सत्य को लिखने के लिए उनके पैर धोए। हम सभी को माफ़ी के सुसमाचार को जानना चाहिए और उसमे विश्वास करना चाहिए, जो यीशु ने अपने चेलों के पैर धोते समय उनको सिखाया था। 
लेकिन पतरस ने पहले निश्चितरूप से यीशु को अपने पैर धोने के लिए मना किया था। “पतरस ने उससे कहा, तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा।” और यह उसके खुद की इच्छा से जन्मे विश्वास की अभिव्यक्ति थी। लेकिन यीशु ने उससे कहा, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा।”
अब, पानी और आत्मा के सुसमाचार से, हम बाइबल के वचनों को समझ सकते है जो पहले हमारी समझ से बहार थे। वह सत्य के वचन है: पानी और आत्मा का सुसमाचार, पापों की माफ़ी, जो पापी को पूरे दिल से विश्वास करने द्वारा धर्मी बनाता है। 
पतरस दुसरे चेलों के साथ मछली पकड़ने के लिए गया, जैसे वे यीशु को मिलाने से पहले करते थे वैसे ही। बाद में, यीशु उनके सामने प्रगट हुआ और उनको बुलाया। यीशु ने उनके लिए भिजन तैयार किया था, और जब वे भोजन कर रहे थे, तब पतरस को यीशु ने पहले कहे थे उन शब्दों का एहसास हुआ। जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा। उसे अन्त में एहसास हुआ की यीशु ने उसके पैर धोए थे उसका क्या मतलब था। 
“प्रभु ने मेरे सारे पापों को धो दिया है। मेरी कमजोरी के कारण किए हुए सारे पाप, उसमे मैं जो भविष्य में करनेवाला हूँ वो पाप भी सम्मिलित है।” पतरस ने अपनी इच्छा के द्वारा जन्मे पापों को छोड़ दिया, और यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू, यानी की पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर मज़बूत रहने की शुरुआत की। 
भोजन करने के बाद, यीशु ने पतरस को पूछा, “क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?” अब, यीशु के प्रेम में विश्वास से मजबूत होकर, पतरस ने कबूल किया। “हाँ, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।” पतरस उत्तर दे सका क्योंकि उसे एहसाह ही की यीशु ने जब कहा की, “परन्तु इसके बाद समझेगा,” उसका मतलब क्या है। वह अपने सच्चे विश्वास यानी की यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पर विश्वास, पापों की माफ़ी के सुसमाचार का विश्वास कबूल करने में सक्षम बना। 
 
 
बादमें वह परमेश्वर का सच्चा सेवक बना 
 
आप परमेश्वर के सच्चे सेवक 
कैसे बन सकते हो?
मेरे सारे पापों के लिए उसके अनन्त प्रायश्चित पर
विश्वास करने के द्वारा

उस अनुभव के बाद, पतरस और दुसरे चेलों ने मृत्यु तक सुसमाचार का प्रचार किया। पौलुस, जिसने बेरहमी से मसीहियों का सताव किया था, उसने भी रोमन साम्राज्य के कठिन समय में सुसमाचार की गवाही दी थी।
यीशु के बारह चेलों में, यहूदा ने यीशु को पकड़वाया था और फिर आत्महत्या कर ली थी। वह प्रेरित पौलुस था जिसने उसकी जगह ली थी। चेलों ने मत्तियाह को चुना था, लेकिन परमेश्वर ने पौलुस को चुना था, इसलिए पुलिस यीशु का प्रेरित बना और दुसरे क्व्हेलों के साथ माफ़ी के सुसमाचार का प्रचार किया। 
यीशु के बहुत सारे चेलें शहीदों की मौत मरे थे। यहाँ तक की जब उनको मौत का डर दिखाया गया, फिर भी उन्होंने अपने विश्वास से इनकार नहीं किया, और जाके मूल सुसमाचार का प्रचार किया। 
उन्होंने शायद इस रीति से प्रचार किया होगा: “यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू, जो उसके पापों की माफ़ी का सुसमाचार है उसके द्वारा आपके सारे पापों को धो दिया है। यीशु ने यरदन में अपने बपतिस्मा के द्वारा आपके सारे पापों को ले लिया है और आपके लिए क्रूस पर न्याय सहन किया है। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू के सुसमाचार पर विश्वास करो और उद्धार पाओं।” 
मूल सुसमाचार सुनने के द्वारा और विश्वास करने के द्वारा वास्तव में कई लोग उद्धार पाएंगे। वह यीशु के बपतिस्मा, उसके लहू, और आत्मा में विश्वास का सामर्थ था। 
यीशु के चेलों ने पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करते हुए कहा की, “यीशु परमेश्वर और उद्धारकर्ता है।” उन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार की गवाही दी उसके कारण से ही आप और मैं हमारे उद्धार के लिए यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार को सुन सकते है, और पापों से उद्धार पा सकते है। परमेश्वर के असीमित प्रेम और यीशु के सम्पूर्ण उद्धार से, हम सब यीशु के चेलें बने है। 
क्या आप सभी लोग विश्वास करते है? यीशु ने हमें इतना सारा प्रेम किया है की उसने हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार दिया, पापों की माफ़ी दी, और हम यीशु के धर्मी चेले बने है। माफ़ी के सच्चे सुसमाचार को सिखाने के लिए, यीशु ने अपने चेलो के पैर धोए। 
जब यीशु ने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर लहू बहाया उसके द्वारा हमारे जीवनभर किए हुए सारे पाप धुल गए थे यह बात चेलों को और हमें सिखाने के लिए यीशु ने अपने चेलों के पैर धोए थे। हम उसके प्रेम और माफ़ी के सुसमाचार के लिए यीशु का धन्यवाद करते है। 
यीशु ने चेलों के पैर धोने के द्वारा हमें दो बात सिखाई थी। पहला, वह उन्हें सिखाने के लिए था जो उसने कहा था की, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा,” माफ़ी का सुसमाचार यानी की यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के द्वारा हमारे सारे पाप धुल गए है। 
दूसरी बात यह थी की यीशु ने पापियों को बचाने के लिए और उनको धर्मी बनाने के लिए अपने अप को नम्र किया, हम जिन्होंने नया जन्म पाया है उन्हें माफ़ी के सुसमाचार का प्रचार करने के द्वारा दूसरो की मदद करनी चाहिए। हम जो पहले आये है उनको दूसरो की सेवा करनी चाहिए जो बाद में आनेवाले है। 
यीशु ने फसह के पर्व के दिन अपने चेलों के पैर क्यों धोए थे उसके दोनों कारण स्पष्ट हुए है और यह उसकी कलीसिया में अभी भी अस्तित्व में है। 
चेला कभी भी अपने गुरु से बड़ा नहीं हो सकता। इसलिए, हम संसार को सुसमाचार का प्रचार करते है और जैसे यीशु की सेवा करते है वैसे ही उसकी सेवा भी करते है। हम, जिन्होंने पहले उद्धार पाया है, उनको बाद में आनेवाले लोगों की सेवा करनी चाहिए। यह सिखाने के लिए, यीशु ने चेलों के पैर धोए थे। पतरस के पैर धोने के द्वारा, उसने हमें बताया की, वह सम्पूर्ण उद्धार है जिससे की हम फिर कभी भी शैतान के द्वारा भ्रमित न हो। 
आप सब भी माफ़ी के सुसमाचार, यानी की पानी और आत्मा के सुसमाचार पे विश्वास करने के द्वारा उद्धार पा सकते है। यीशु ने अपने बपतिस्मा, क्रूस पर मृत्यु, और पुनरुत्थान के द्वारा हमारे सारे पापों को धो दिया है। जो उनके सुसमाचार पर विश्वास करते है केवल वो ही जगत के पापों से हमेशा के लिए उद्धार पा सकते है।
 
 
जिसने हमारे हरदिन के पापों को धो दिया है उस सुसमाचार पर विश्वास करो
 
हम माफ़ी के सुसमाचार, पानी और आत्मा के वचनों पर विश्वास करने के द्वारा शैतान के छल से बच सकते है। लोग आसानी से शैतान के द्वारा धोख़ा खाते है और शैतान निरंतर उनके कानों में गुनगुनाता है। लोगों के शरीर पाप करते ही रहते है ऐसा जानने के बाद भी कोई पापरहित कैसे बन सकते है? सारे लोग पापी है।
हालाँकि, हम उत्तर जानते है। “यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा सारे पापों को उठा लिया है ऐसा जानने के बावजूद भी विश्वासी कैसे पाप के साथ रह सकता है? यीशु ने पापों की सारी किंमत चुकादी है, तो फिर हमें कौनसी किंमत चुकानी बाकी है?” 
यदि हम पानी और लहू के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते, तो शैतान के शब्द हमें ठीक लगेंगे। लेकिन, यदि सुसमाचार हमारे पक्ष में है, तो फिर परमेश्वर के वचन में हमारा विश्वास न बदलेवाला विश्वास है। 
हमारा विश्वास पानी और लहू से नए जन्म के सुसमाचार पर होना चाहिए। यीशु का बपतिस्मा, उसका क्रूस का लहू, और उसके मृत्यु और पुनरुत्थान पर विश्वास करना ही सच्चा विश्वास है। 
क्या आपने कभी पवित्र मिलापवाले तम्बू का चित्र देखा है? वह एक छोटा तम्बू का घर है। घर को दो भागो में बाँटा गया है, बहार का भाग पवित्र स्थान है और अन्दर का भाग परमपवित्र स्थान है, जिसमे दयासन है। 
पवित्र मिलापवाले तम्बू के बहार के आँगन में कुल ६० खम्भे है, और पवित्र स्थान में ४८ पट्टिया है। परमेश्वर के वचन का मतलब समझने के लिए हमें पवित्र मिलापवाले तम्बूका चित्र हमारे दिमाग में रखना चाहिए। 
 
 
तम्बू के आँगन का द्वार किसका बना हुआ था? 
 
तम्बू के आँगन का द्वार किसका बना हुआ था?
नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और 
बटी हुई सूक्ष्म सनी के पर्दे से

तम्बू के आँगन के द्वार के बारे में निर्गमन २७:१६ में दर्शाया गया है, “आँगन के द्वार के लिये एक परदा बनवाना, जो नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का कामदार बना हुआ बीस हाथ का हो, उसके लिए खम्भे चार और खाने भी चार हों।” तम्बू के आँगन का द्वार बनाने के लिए नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का इस्तेमाल हुआ था। वह सूक्ष्म बटा हुआ और रंगबिरंगा था। 
परमेश्वर ने मूसा को द्वार नीले, बैंजनी, और लाल रंग के रंगबिरंगे कपड़े से बनाने को कहा था जिससे लोगों को प्रवेश द्वार ढूँढने में आसानी रहे। द्वार नीले, बैंजनी, और लाल रंग के बटे हुए सूक्ष्म सनी के कपड़े से चार खम्भों पर लटकाया गया था। 
यह चार सामग्री परमेश्वर के उद्धार का चिह्न है, जिसके द्वारा उसके बेटे पर विश्वास करनेवाले सारे लोगों को यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा और उसके परमेश्वर होने के द्वारा उद्धार मिले। 
पवित्र मिलापवाला तम्बू बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सारी सामग्री का एक ख़ास मतलब है और वह परमेश्वर के वचन और यीशु के द्वारा मनुष्यजाति को बचाने के लिए अपनी योजना को प्रस्तुत करता है। 
अब, पवित्र मिलापवाले तम्बू के आँगन का द्वारा बनाने के लिए कितने प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल हुआ था? चार अलग अलग सामग्री का इस्तेमाल हुआ था: नीले, बैंजनी, लाल कपड़ा, और बटी हुई सूक्ष्म सनी का कपड़ा। यह चारों हमें नया जन्म पाने के सुसमाचार पर मजबूती से विश्वास करने के लिए मदद करने को बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि वे महत्वपूर्ण नहीं होते, तो यह जानकारी बाइबल में इतनी विस्तृत रीति से नहीं दर्शाई होती। 
पवित्र मिलापवाले तम्बू का द्वारा बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री हमारे उद्धार के महत्त्व की और संकेत कराती है। इसलिए, परमेश्वर ने यह बाते मूसा को प्रगट की और जैसा उसने कहा है ठीक वैसा ही करने के लिए कहा।
 
 
परमेश्वर के सुसमाचार में नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े का क्या अर्थ है?
 
तम्बू के उपयोग में ली हुई सारी चीजे 
किसका प्रतिक थी?
यीशु के बपतिस्मा और लहू के द्वारा उसके उद्धार का

पवित्र मिलापवाले तम्बू के अन्दर, पवित्र स्थान और परमपवित्र स्थान के बिच में लटकाया हुआ परदा बनाने के लिए भी नीले, बैंजनी, और लाल रंग का कपड़ा, और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का इस्तेमाल हुआ था। महायाजक, जो साल में एकबार परमपवित्र स्थान में जाता था उसका बागा भी इसी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था। 
नीले रंग का कपड़ा यीशु के बपतिस्मा का चिह्न है। १ पतरस ३:२१ में, वह कहता है, “उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, अब तुम्हें बचाता है।” पतरस यीशु के बपतिस्मा की पुष्टि करता है, जिसके द्वारा उसने इस वचन में जगत के सारे पापों को उठा लिया था, जो प्रायश्चित के उद्धार का चिह्न है। यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पाप उसके ऊपर डाले गए थे। इसलिए, नीले रंग का कपड़ा, यीशु के बपतिस्मा, उद्धार के वचन का महत्वपूर्ण भाग है। 
लाल रंग का कपड़ा यीशु के लहू का चिह्न है, और बैंजनी रंग का कपड़ा उसके इश्वरत्व – यीशु के राजा और परमेश्वर के दर्जे का चिह्न है। यह तीनो रंग के कपड़े यीशु में हमारे विश्वास औरब उद्धार के लिए महत्वपूर्ण थे। 
महायाजक के द्वारा पहिने जाते बहार के कपड़ो को एपोद कहा जता था, और एपोद का बागा भी नीले रंग का था। महायाजक अपने सिर पर पगड़ी पहनता था, जिसके ऊपर चोखे सोने की पट्टी बनाकर उसके ऊपर ‘यहोवा के लिए पवित्र’ ऐसे अक्षर खोदे गए थे। पट्टी को पगड़ी के साथ नीले फीते से बाँधा गया था। 
 
 
नीले रंग के कपड़े के द्वारा दर्शाया गया सत्य 
 
नीले रंग का कपड़ा किसका प्रतिक है?
यीशु के बपतिस्मा का

मैंने बाइबल में नीले रंग के कपड़े का मतलब देखा। बाइबल नीले रंग के बारे में क्या कहती है? हमें नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े को समझना पडेगा। 
नीले रंग का कपड़ा ‘पानी’ को दर्शाता है, वह यीशु का बपतिस्मा है। यीशु मसीह ने जगत के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया (मत्ती ३:१५)।
यदि यीशु ने बपतिस्मा से जगत के सारे पापों को नहीं लिया होता तो, हम परमेश्वर के अन्मुख पवित्र नहीं बन पाते। इसी लिए, यरदन में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को उठाने के लिए यीशु को जगत में अना पडा। 
पवित्र मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार में नीला रंग था इसका कारण यह था की हम यीशु के बपतिस्मा के बगैर पवित्र नहीं हो सकते। 
लाल कपड़ा उसके लहू को, यानी की यीशु के मृत्यु को दर्शाता है। बैंजनी यीशु के इश्वरत्व को दर्शाता है, ऐसे यीशु का दर्जा, “जो परमधन्य और एकमात्र अधिपति और राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है” (१ तीमुथियुस ६:१५)। 
सत्य यह है की लाल कपड़ा मसीह के लहू का चिह्न है, जिसने सारी मनुष्यजाति के पापों का मूल्य चुकाने के लिए क्रूस पर लहू बहाया। यीशु मसीह अपने बपतिस्मा के द्वारा मनुष्यजाति के सारे पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए, और क्रूस पर बलिदान देने के द्वारा पापों के मूल्य को चुकाने के लिए इस संसार में आया। यीशु का बपतिस्मा और लहू ही माफ़ी का सच्चा सुसमाचार है की जिसकी भविष्यवाणी पुराने नियम में पवित्र मिलापवाले तबू के लिए इस्तेमाल किए गए रंगबिरंगे कपड़ो के द्वारा की गई थी। 
तम्बू के तख्ते बबूल की लकड़ी से बने हुए थे, और उसके चूलें पीतल के थे और उसके ऊपर चाँदी की पट्टी लगाईं गई थी। 
सारे पापियों का उनके पापों के लिए न्याय हुआ क्योंकि पाप की मज़दूरी मृत्यु है। पुराने नियम के दिनों में किसी भी व्यक्ति को परमेश्वर के द्वारा नए जन्म से आशीषित न किया जाए तब तक उसे अपने पापों के लिए बलिदान चढ़ाना पड़ता था। 
हालाँकि, नए नियम में यीशु का बपतिस्मा, जो पवित्र मिलापवाले तम्बू में नीले रंग के कपड़े के रूप में दर्शाया गया है, उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया है। यीशु क्रूस तक हमारे पापों को लेकर गया, उसके लिए लहू बहाया और उसका न्याय हुआ और ऐसा करने के द्वारा, उसने हम सभी को बचाया जो माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करते है।
प्रिय मसीहियों, यीशु का बपतिस्मा यीशु का उद्धार था, जिसने हमारे पापों को उठाने के द्वारा हमें बचाया। यीशु, जो परमेश्वर था, वह देह में इस जगत में आया (बैंजनी रंग का कपड़); जगत के सारे पापों को अपने ऊपर लेने के लिए उसने बपतिस्मा लिया (नीले रंग का कपड़ा); हमारी जगह उसने न्याय का स्वीकार किया और क्रूस पर लहू बहाया (लाल रंग का कपड़ा)। यीशु का बपतिस्मा हमें सिखाता है की वह सारी मनुष्यजाति का सच्चा उद्धारक बना। 
हम इसे पवित्र मिलापवाले तम्बू के लिए इस्तेमाल किए गए रंगों में भी देख सकते है। 
द्वार के परदे में नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कढ़ाई के काम करने का स्पष्ट उद्देश्य हमें परमेश्वर के उद्धार के बारे में कहना था। यहाँ बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का मतलब है की उसने बिना किसी अपवाद के हम सभी को पापों से बचाया है। वह प्रायश्चित के उद्धार के लिए निश्चितरूप से महत्वपूर्ण था। 
हम पवित्र मिलापवाले तम्बू के द्वार के लिए इस्तेमाल की गई सारी सामग्री में देख सकते है की यीशु मसीह ने बिना किसी योजना के, लापरवाही से हम पापियों को नहीं बचाया था। उसने, परमेश्वर की योजना का पालन करके, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर लटका और मनुष्यजाति को परिपूर्ण करने के लिए मृत्यु में से पुनरुत्थित हुआ। नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा, माफ़ी के सुसमाचार की सामग्री से, यीशु ने उन सबको बचाया जिन्होंने उसके उद्धार पर विश्वास किया। 
 
 
पुराने नियम की पीतल की हौदी नए नियम के बपतिस्मा का प्रतिक है 
 
क्यों याजक पवित्र स्थान में जाने से पहले 
अपने हाथ और पैर धोते थे?
क्योंकि उनको परमेश्वर के सन्मुख 
पापरहित खड़ा रहना था।

हाथ धोने का पात्र भी पीतल से बना हुआ था। पीतल यीशु ने हमारे लिए सहन किए न्याय को दर्शाता है। हाथ धोने का पात्र सुसमाचार के वचन का चिह्न है, जो हमें कहता है की हमारे सारे अपराध धुल चुके है। 
वह हमें बताता है की कैसे हमारे हरदिन के पाप धुल गए। यीशु के बपतिस्मा के वचन पर विश्वास के द्वारा ही मनुष्यजाति के हरदिन के पाप धुल सकते है। 
होमबलि की वेदी न्याय को दर्शाती है। यीशु का पानी जो नीले रंग का है, वह पापों के प्रायश्चित का सुसमाचार है, दुसरे शब्दों में, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु का बपतिस्मा (मत्ती ३:१५, १ यूहन्ना ५:५-१०)। वह प्रायश्चित के द्वारा उद्धार के सुसमाचार के वचन है। 
१ यूहन्ना ५ में लिखा है की, “और जिस जय ने जगत को जित लिया है वह हमारा विश्वास है। क्योंकि गवही देनेवाले तीन हैं, आत्मा, और पानी, और लहू; और तीनों एक ही बात पर सहमत हैं।” वह हमें कहता है की जो परमेश्वर के पुत्र के ऊपर विश्वास करता है उसके अन्दर पानी, लहू, और आत्मा की गवाही भी है। 
परमेश्वर ने हमें प्रायश्चित के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पवित्र होने के लिए और पवित्र मिलापवाले तम्बू में प्रवेश करने की अनुमति दी है। इसलिए, हम अब विश्वास से जी सकते है, परमेश्वर के वचनों को समझ सकते है, उसके द्वारा आशीषित हुए है, और धर्मी सा जीवन जी सकते है। परमेश्वर के लोग बनने का मतलब है की प्रायश्चित के सुसमाचार के द्वारा उद्धार प्राप्त करना और पवित्र मिलापवाले तम्बू के अन्दर जीवन जीना। 
आज कई लोग कहते है की पवित्र मिलापवाले तम्बू के द्वार पर नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का मतलब समझे बिना केवल विश्वास करना काफी है।यदि कोई व्यक्ति इन चीजो का मतलब जाने बिना यीशु पर विश्वास करते है, तो उसका विश्वास सच्चा नहीं है क्योंकि अभी भी उसके दिल में पाप होगा। प्रायश्चित का सुसमाचार, यानि की पानी, लहू, और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा नया जन्म पाने के सत्य पर अविश्वास के कारण ऐसे लोगों के दिलों में अभी भी पाप होगा। 
यदि किसी अनजान व्यक्ति का मूल्याँकन करने को कहा जाए, और यदि वो श्रोताओं को खुश करना चाहे, तो वह कहेगा, “हाँ, मैं इस व्यक्ति पर विश्वास करता हूँ। वास्तव में मैं उनसे मिला नहीं हूँ, लेकिन फिर भी मैं उन पर विश्वास करता हूँ,” क्या आपको लगता है की श्रोता यह सुनके खुश होंगे? शायद आप में से कुछ लोगो ने ऐसा किया होगा, लेकिन यह ऐसा विश्वास नहीं है जैसा परमेश्वर हमसे चाहता है। 
परमेश्वर चाहता है की हम पापों की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करे, नीले (यीशु का बपतिस्मा), बैंजनी (यीशु का इश्वरत्व), और लाल (यीशु का लहू) रंग के कपड़े के द्वारा यीशु का उद्धार। हमें यीशु पे विश्वास करने से पहले यह जानना चाहिए की उसने हमें सारे पापों से कैसे बचाया है। 
जब हम यीशु पर विश्वास करते है, तब हमें जानना चाहिए की उसने पानी (यीशु का बपतिस्मा), लहू (उसका लहू), और आत्मा (यीशु परमेश्वर के तौर पर) द्वारा हमें कैसे बचाया। 
जब हम सच्ची रीति से समझते है, तब हम सच्चे और सम्पूर्ण विश्वास का अनुभव कर सकते है। इस सत्य को जाने बिना हमारा विश्वास कभी भी सम्पूर्ण नहीं होगा। सच्चा विश्वास केवल यीशु के उद्धार की गवाही, माफ़ी का सुसमाचार, और यीशु मनुष्यजाति का सच्चा उद्धारकर्ता है यह समझने के द्वारा ही आता है। 
तो फिर, यीशु का मज़ाक उड़ानेवाला विश्वास कैसा होगा? ऐसा होगा। 
 
 
ऐसा विश्वास जो यीशु का मज़ाक उडाता है 
 
विश्वास के लिए सबसे जरुरी क्या है?
यीशु के बपतिस्मा का सटीक ज्ञान

आपको एहसास होना चाहिए की यीशु पर मनस्वी रीति से विश्वास करना वह उसका मज़ाक उड़ाने जैसा है। यदि आप सोचते है, “मुझे विश्वास करना कठिन लगता है, लेकिन वह परमेश्वर और परमेश्वर का पुत्र है, इसलिए मुझे किसी भी तरीके से उस पर विश्वास करना ही पड़ेगा,” तो फिर आप यीशु का मजाक उड़ा रहे है। यदि आप वास्तव में नया जन्म पाना चाहते है, तो आपको यीशु के बपतिस्मा और लहू, प्रायश्चित के सुसमाचार पर विश्वास करना ही होगा। 
प्रायश्चित के सुसमाचार को जाने बिना यीशु पर विश्वास करना वह यीशु पर विश्वास न करने से भी बुरा है। केवल यीशु के लहू पर विश्वास करना वह सत्य को जाने बिना व्यर्थ काम करने जैसा है। 
यीशु नहीं चाहता की कोई भी मनस्वी रीति से यीशु पर विश्वास करने, या बिना वजह के उसमे विश्वास रखने का प्रचार करे। वह इच्छा रखता है की हम प्रायश्चित के सुसमाचार को जानने के द्वारा उस पर विश्वास करे। 
जब हम यीशु में विश्वास करते है, तब हमें कबूल करना चाहिए की प्रायश्चित का सुसमाचार यीशु का बप्तिस्मा और लहू है। जब हम यीशु में विश्वास करे, तब हमें उसके वचन के द्वारा प्रायश्चित का सुसमाचार समझना चाहिए और ख़ास तौर पर यह जानना चाहिए की उसने हमारे पापों को किस तरह साफ़ किया है। 
हमें यह भी चाहिए की पवित्र मिलापवाले तम्बू के द्वारा पर नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े का क्या मतलब होता है। फिर, हम सच्चा विश्वास पा सकते है जो अनंतकाल तक रहेगा। 
 
 
हम यीशु पे विश्वास किए बिना नया जन्म नहीं पा सकते, जो नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े की अनुभूति है 
 
पवित्र स्थान में जाने से पहले याजक
क्या करते थे?
वे पीतल की हौदी के पानी से अपने हाथ और पैर धोते थे।

हमारे प्रभु यीशु ने हमें बचाया है। जब हम देखते है की उसने कैसे हमें सम्पूर्ण रीति से बचाया है तब हम उसकी स्तुति करते है। हमें पवित्र मिलापवाले तम्बू की ओर देखना चाहिए। उसने हमें पवित्र मिलापवाले तम्बू के नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े के द्वारा प्रायश्चित के सुसमाचार के वचन दिए। हमें प्रभु का धन्यवाद करना चाहिए और स्तुति करनी चाहिए।
पापी भयानक न्याय में से गुजरे बिना पवित्र स्थान में प्रनेश नहीं कर सकते। कैसे कोई अपने पापों का न्याय पाए बिना पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकता है? यह असम्भव हो सकता था। यदि ऐसा व्यक्ति प्रतिबंधित जगह में प्रवेश करे, तो वही पर वह मारा जाता। पापी कभी भी पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकता और जीने की उम्मीद भी नहीं रख सकता। 
हमारे प्रभु ने हमें पवित्र मिलापवाले तम्बू के द्वार के गुप्त रहस्य से हमें बचाया है। नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े, और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े से, उसने हमें बचाया है। उसने इन चीजो के द्वारा हमें उसके उद्धार का रहस्य कहा है। 
क्या आप और मैं उस रीति से बचे है? यदि हम नीली, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े के वचनों पर विश्वास नहीं करते, तो प्रायश्चित के सुसमाचार के द्वारा कोई उद्धार नहीं हो सकता। नीला रंग परमेश्वर को नहीं दर्शाता; वह यीशु के बपतिस्मा का चिह्न है। वह यीशु का बपतिस्मा है जिसने हमारे पापों को उठा लिया है। 
कोई भी इंसान नीले रंग के कपड़े पे विश्वास किए बगैर होमबलि की वेदी तक प्रवेश कर सकता है। हालाँकि, वह पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकता जहाँ परमेश्वर की उपस्थिति होती है। 
इसलिए, पवित्र मिलापवाले तम्बू के द्वार में प्रवेश करते पहले, हमें नीले (यीशु के बपतिस्मा) कपड़े, लाल (क्रूस पर उसका लहू) कपड़े, और बैजनी (यीशु का परमेश्वर और परमेश्वर का पुत्र बनना) कपड़े पर विश्वास करना चाहिए। जब हम विश्वास करते है केवल तभी परमेश्वर हमारा स्वीकार करता है और परदे के द्वारा परमपवित्र स्थान में प्रवेश करने की अनुमति देते है। 
कुछ लोग तम्बू के बहार के आँगन में प्रवेश करते है और सोचते है की वह अन्दर आ चुके है। लेकिन यह उद्धार नहीं है। उद्धार पाने के लिए हमें कितना अन्दर जाना चाहिए? हमें परमपवित्र स्थान में प्रवेश करने के लिए सक्षम बनना चाहिए। 
परमपवित्र स्थान में प्रवेश करने के लिए, हमें पीतल के बर्तन के पास से गुजरना पडेगा। पीतल का बर्तन यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है, और हमें यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे हरदिन के पापों को धोना पडेगा और पवित्र स्थान में प्रवेश करने के लिए पवित्र बनना होगा। 
पुराने नियम में, याजकों को प्रवेश करने से पहले अपने आप को साफ करना पड़ता था, और नए नियम में, उनके जीवनभर के पाप धुल गए है यह दिखाने के लिए चेलों के पैर धोए। 
ઈશ્વરનો નિયમ કહે છે, “क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्‍वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है” (रोमियों ६:२३)। परमेश्वर बिना किसी अपवाद के मनुष्यों के पापों का न्याय करता है, लेकिन उसने पापों को अपने बेटे पर डाल कर हमारी जगह उसका न्याय किया। यह परमेश्वर का प्रेम है, उसका उद्धार है। सच्चा उद्धार केवल जब हम प्रायश्चित के सुसमाचार जिसमे यीशु का बपतिस्मा, लहू, मृत्यु, और पुनरुत्थान सम्मिलित है उस पर विश्वास करते है तभी पा सकते है। 
 
 
नया जन्म पाने के लिए व्यक्ति को बाइबल के सत्य, और पाप के प्रायश्चित के सुसमाचार को तिरस्कृत नहीं करना चाहिए। 
 
हमें करने के लिए एकमात्र काम कौन सा है?
वह है सुसमाचार, परमेश्वर के लिखित 
वचनों पर का विश्वास।

मैंने कभी भी दुसरे लोगो को तिरस्कृत नहीं किया। जब कभी भी ऐसी चीज के बारे में बात करते है जो मैं नहीं जानता, तब मैं विनम्रता से कहता हूँ की वह मुझे समझाएं। लेकिन जब मैंने पवित्र मिलापवाले तम्बू के बारे में आसपास पूछा तो कोईभी मुझे बता नहीं पाया। 
तो फिर मैं क्या कर सकता हूँ? मुझे फिर बाइबल के पास आना पडा। बाइबल में, पवित्र मिलापवाले तम्बू के बारे में कहा लिखा है? निर्गमन में उसके बारेमें विस्तृत तौर पर लिखा गया है। यदि कोई व्यक्ति ध्यानपूर्वक इस पुस्तक को पढ़े, तो वह व्यक्ति परमेश्वर के लिखित वचनों के द्वारा उसका मतलब समझ सकता है। 
प्रिय मित्रो, आप लापरवाही से यीशु पर विश्वास करने से उद्धार नहीं पा सकते। आप केवल नियमित कलीसिया में जाने से नया जन्म नहीं पा सकते। हम जानने है की यीशु ने नीकुदेमुस से क्या कहा। “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता.... तू इस्राएलियों का गुरु होकर भी क्या इन बातों को नहीं समझता?” (यूहन्ना ३:५,१०) 
जो लोग यीशु पर विश्वास करते है उन्हें नीले कपड़े (जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब जगत के सारे पाप उसके ऊपर डाले गए), लाल कपड़े(हमारे सारे पापों के लिए यीशु का मृत्यु), और बैंजनी कपड़े (यीशु उद्धारकर्ता, परमेश्वर, और परमेश्वर का पुत्र है) पर विश्वास करना होगा। 
हमें विश्वास करना चाहिए की यीशु जगत के सारे पापियों का उद्धारकर्ता है। इस विश्वास के बगैर, कोई भी नया जन्म नहीं पा सकता, और परमेश्वर के राज्य के पवित्र स्थान में प्रवेश भी नहीं कर सकता। उसके बगैर व्यक्ति इस जगत में विश्वासयोग्यता से जी भी नहीं सकता। 
क्या यह आसान नहीं है की कोई भी व्यक्ति केवल यीशु पर विश्वास करके नया जन्म पा सकता है? – हाँ – “आपने उद्धार पाया है। मैंने भी उद्धार पाया है। हम सबने उद्धार पाया है।” कितना आसन! लेकिन कई ऐसे लोग भी है जो सच्ची रीति से ‘नया जन्म’ पाए बिना ही यीशु पर विश्वास करते है। 
हमें बाइबल में सत्य को जानना चाहिए और साथ ही साथ यीशु पर विश्वास भी करना चाहिए। हमें पवित्र मिलापवाले तम्बू में प्रवेश करने के लिए और विश्वास के स्टार में परमेश्वर के साथ रहने के लिए बाइबल में माफ़ी के सुसमाचार और नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े का मतलब समझना चाहिए। जब तक यीशु हमें अपने राज्य में ले जाने के लिए वापस नहीं आता तब तक हम विश्वास के तम्बू के अन्दर आनंद से रह सकते। यीशु पर सच्ची रीति से विश्वास करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। 
 
 
नीले रंग के कपड़े से पवित्रीकरण के मूल सुसमाचार का आरम्भ होता है 
 
यीशु के क्रूस के अलावा हमारे उद्धार के लिए 
अनिवार्य शर्त कौनसी है?
यीशु का बपतिस्मा

लोग ऐसा सोचते है की वे गलती किए बिना सम्पूर्ण रीति से जीवन जी सकते है। हालाँकि, अच्छा करने के लिए जीतनी कोशिश वो करेगा, उतनी जल्दी से वह अपनी कमजोरी को ढूंढेंगे। मनुष्य कितना अपूर्ण है, इसलिए पाप न करना उसके लिए असम्भव है। हालाँकि, यीशु ने नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े यानी की प्रायश्चित के सुसमाचार से हमारा उद्धार किया है, इसलिए हम पवित्र बन सकते है और परमेश्वर के पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है। 
यदि परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से उद्धार नहीं दिया होता, तो हम खुद से पवित्र स्थान में प्रवेश करने के लायक नहीं बन पाते। इसका क्या कारण है? यदि केवल अपने शरीर से सम्पूर्ण जीवन जीनेवाले ही पवित्र स्थान में प्रवेश कर पाते, तो ऐसा कोई भी न होता जो लायक न बन पाता। जब कोई सच्चे सुसमाचार को जाने बिना यीशु पर विश्वास करता है, तब वह केवल अपने दिल में पापों को बढ़ाता है। 
यीशु ने अपनी योजना के तहत हमें उद्धार दिया है: नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का सुसमाचार। उसने हमारे सारे पापों को धो दिया है। क्या आप इसमे विश्वास करते है? -हाँ- क्या आपके हृदय में माफ़ी का सुसमाचार और उसकी गवाही है? -हाँ-
जब आप सुसमाचार की गवाही देते है केवल तभी आप अपने सिर पर सोने की पट्टी रख सकते हो जो हकती है ‘यहोवा के लिए पवित्र’ और ‘राज-पदधारी याजकों का समाज’ (१ पतरस २:९) में जुड़ सकते है। केवल तभी आप लोगों के सामने खड़े रह सकते हो और उनको कह सकते हो की आप परमेश्वर के सेवक हो, और राज-पदधारी याजक के रूप में काम करते हो। 
महायाजक के पगड़ी के ऊपर सेने की पट्टी होती है और उसे नीले रंग के फीते से बाँधा हुआ होता है। क्यों नीला रंग? क्योंकि यीशु ने हमें माफ़ी के सुसमाचार से बचाया है, हमारे सारे पापों को उठा लिया है और अपने बपतिस्मा के द्वारा हमें पापरहित किया है। नए नियम का बपतिस्मा पुराने नियम के हाथ रखने के समान है। 
हम यीशु के ऊपर चाहे जीतनी तत्परता और निष्ठा पूर्वक विश्वास करे लेकिन फिर भी, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के गुप्त शब्दों के रहस्य को पहचाने बिना हम ‘परमेश्वर के लिए पवित्र’ खुदी हुई पट्टी हांसिल नहीं कर सकते। 
हम न्यायी कैसे बन सकते है? मत्ती ३:१५ में लिखा है की, “क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” यीशु ने बपतिस्मा लिया और हमें जगत के सारे पापों से उद्धार दिया। अपने बपतिस्मा के द्वारा, उसने हमारे सारे पापों को उठा लिया है, और हम विश्वासी धर्मी बने। 
यदि यीशु का बपतिस्मा नहीं होता तो हम कैसे कह पाते की हम पापरहित है? यदि हम यीशु में विश्वास करे और चिल्लाए, क्रूस पर उसके मृत्यु के बारे में सोचे, फिर भी सारे आँसू इस जगत के पापों को धो नहीं सकते थे। नहीं। हम चाहे कितना भी रोते और पछतावा करते, फिर भी हमारे पाप हमारे अन्दर ही रहे होते। 
‘यहोवा के लिए पवित्र।’ उसने अपने बपतिस्मा और लहू के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिया है, इसलिए परमेश्वर ने हम पापियों के सारे पापों को यीशु पर डालने की अनुमति दी, और उद्धार के वचन बाइबल में लिखे हुए है इस कारण से, हमारे सारे अपराध और कमज़ोरी के बावजूद हम धर्मी बने है। 
इसलिए, अब हम परमेश्वर के सन्मुख में खड़े रह सकते है। अब हम धर्मी के तौर पर जीवन जी सकते है और जगत को सुसमाचार का प्रचार कर सकते है। “मैंने उद्धार पाया है। आपने उद्धार पाया है। हम सब ने उद्धार पाया है।” परमेश्वर की अनुग्रही योजना के मुताबिक़ हमने उद्धार पाया है। 
आपके हृदय में प्रायश्चित के सुसमाचार के वचन के बगैर आपको उद्धार नहीं मिल सकता, फिर भले ही आप चाहे जितने प्रयास क्यों न करे। वह अनुचित प्रेम के बारे में लोकप्रिय कोरियन गीत के जैसा है, “ओह, मैं अब उसे देखता हूँ, जब भी मैं उसके करीब होता हूँ, तब मेरी धड़कने तेज हो जाति है, मैं अनुचित प्रेम में ही हूँ।” मेरी धड़कने तेज हो जाति है, लेकिन उसकी नहीं। मेरा प्रेम कभी वापस नहीं मिला। दुर्भाग्यसे, कई सारे मसीही परमेश्वर के प्रति आज भी अनुचित प्रेम रखते है।
लोग ऐसा सोचते है की उद्धार अलग अलग लोगों को अलग अलग रीति से मिलता है। वे पूछते है, “क्यों केवल वह बपतिस्मा के सुसमाचार से ही मिलता है? यदि वह यीशु के बपतिस्मा का सुसमाचार नहीं है तो वह सम्पूर्ण उद्धार नहीं हो सकता। केवल इसी रीति से हम परमेश्वर के सन्मुख धर्मी बन सकते है क्योंकि केवल इसी रीति से हम अपने सारे पापों से शुध्ध हो सकते है। 
 
 
नीले रंग के कपड़े का उद्धार जो यीशु ने हमें दिया वो क्या है? 
 
हमें धर्मी कौन बनाता है?
नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े का सुसमाचार

नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े के सुसमाचार से मिलता उद्धार सारी मनुष्यजाति के लिए परमेश्वर की भेंट है। इस भेंट ने हमें पवित्र तम्बू में प्रवेश करने और शान्ति से जीवन जीने के लिए सक्षम बनाया है। उसने हमें धर्मी बनाया है, कलीसिया में रहकर ही कलीसिया के द्वारा प्रशिक्षित होने के लिए उसने हमें सक्षम बनाया है। 
जब भी हम परमेश्वर के सन्मुख में प्रार्थना करने के लिए जाते है, तब सुसमाचार हमें अपने प्रेम से आशीषित करती है। इसीलिए उद्धार हमारे लिए बहुत ही मूल्यवान है। यीशु ने हमें ‘चट्टान पर’ विश्वास का घर बनाने के लिए कहा है। चट्टान उसके बपतिस्मा का सुसमाचार है। हम सभी को उद्धार पाना चाहिए, उद्धार के साथ जीना चाहिए, स्वर्ग में जाना चाहिए, अनन्त जीवन प्राप्त करना चाहिए, और परमेश्वर की संतान बनना चाहिए। 
प्रिय मित्रो, प्रायश्चित के सुसमाचार के कारण, हम विश्वास से पवित्र तम्बू में प्रवेश करने के लिए सक्षम बने है। हमारे सारे पाप धुल गए (यीशु का बपतिस्मा) और क्रूस के न्याय के कारण, यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हमने उद्धार पाया है। 
हमारे सारे पापों के लिए भरपूर प्रायश्चित, यीशु का बपतिस्मा और लहू वह सुसमाचार है जिसने हमारे सारे पापों को धो दिया है। क्या आप इसमे विश्वास करते है? प्रायश्चित का स्वर्गीय सुसमाचार ही सच्चा सुसमाचार है जिसने पूर्णरूप से हमारे पापों को धो दिया है। 
हम ने प्रायश्चित के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पाया है। यीशु ने हमें प्रायश्चित का सुसमाचार दिया है, जिसने हमारे हरदिन के सारे पापों को और भविष्य के पापों को भी धो दिया है। प्रभु की स्तुति हो। हाल्लेलूया! 
पानी और आत्मा का सुसमाचार (पानी और लहू का सुसमाचार) यीशु मसीह के द्वारा परिपूर्ण हुआ और प्रचारित ह़ा सच्चा सुसमाचार है। यह किताब यीशु के सुसमाचार, पानी और आत्मा के सुसमाचार के रहस्य को प्रगट करने के लिए लिखी गई है। 
क्योंकि कई सारे लोग सम्पूर्ण सत्य को जाने बिना ही यीशु पर विश्वास करते है, इसलिए वे मसीही धर्मशास्त्र (कहलाती दार्शनिक धर्मविद्या) की दुनिया में केवल कट्टरवादी या धार्मिक अनेकवादी होने के बारेमें घमंड करते है; संक्षेप में, वे झूठी सिक्षा और भ्रम में जीवन जीते है। इसलिए, हमें वापस जाना चाहिए और सच्चे सुसमाचार में विश्वास करना चाहिए। अभी भी देर नहीं हुई है। 
जो लोगों को पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के सुसमाचार के बारें में प्रश्न है उनके लिए मैं दूसरी किताब में ज्यादा विस्तृत रूप से बताउँगा।