उपदेश

विषय ८ : पवित्र आत्मा

[8-7] (यशायाह ९:६-७) खुबसूरत सुसमाचार जो आपको अनुमति देता है की पवित्र आत्मा आपके अन्दर बसे

(यशायाह ९:६-७)
“क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके काँधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत युक्‍ति करनेवाला पराक्रमी परमेश्‍वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वह उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से लेकर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए और सम्भाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा”।
 
 
ऐसा क्या है जो पवित्र आत्मा को विश्वासियों के अन्दर 
रहने की अनुमति देता है?
पानी और आत्मा का खुबसूरत सुसमाचार
 
पवित्र आत्मा को प्राप्त करने के लिए, हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने की आवश्यकता है। हमारे परमेश्वर का नाम अदभुत, युक्ति करनेवाला और सामर्थी परमेश्वर है। हमारे परमेश्वर ने खुद को स्वर्ग के मार्ग के रूप में दर्शाया है। यीशु मसीह ने सब को खुबसूरत सुसमाचार उपहार के रूप में दिया है।
हालांकि, इस दुनिया में, बहुत सारे लोग हैं जो अभी भी अंधेरे में रहते हैं। वे इस अंधेरे से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे खुबसूरत सुसमाचार को नहीं जानते हैं, इसलिए वे अपने पापों से कभी नहीं बच सकते। इसके बजाय वे झूठे सिद्धांतों की वजह से अपने विश्वास से दूर हो गए है। इसके विपरीत, जो लोग सत्य की तलाश करते हैं, वे खुबसूरत सुसमाचार को पाएंगे और अपने जीवन के बाकी हिस्सों को परमेश्वर की आशीष के साथ पूरा करेंगे। मेरा मानना है कि यह परमेश्वर का विशेष आशीष है जो उन्हें खुबसूरत सुसमाचार खोजने और उनके पापों को दूर करने में उनकी मदद करता है।
इसलिए, यदि यह उनकी आशीष के लिए नहीं होता तो पापों से मुक्ति असंभव थी। यदि हम प्रभु से मिले हैं और पवित्र आत्मा को प्राप्त किया है तो हम बहुत धन्य हैं। अफसोस, बहुत से लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि इस खूबसूरत सुसमाचार में विश्वास करने से परमेश्वर की आशीष मिलता है।
यीशु मसीह, उनके एकलौते बेटें के द्वारा हमें दिए गए खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करने से परमेश्वर की आशीष प्राप्त हुई। यीशु ही वह है जो हमें दुनिया के पापों से बचाता है और हमें उनकी दया की आशीष देता है। कोई और हमें हमारे पापों से नहीं बचा सकता है या हमारे दिलों में अपराध को मिटाने में हमारी मदद नहीं कर सकता है। कौन अपने पापों और अनन्त मृत्यु के दर्द से खुद को बचा सकता था?
परमेश्वर हमें बताता है, “ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है” (नीतिवचन १६:२५)। लोग अपने स्वयं के धर्मों की स्थापना करते हैं और खुद को विनाश और मृत्यु की ओर ले जाते हैं। कई धर्मों में यह दावा है कि वे धार्मिकता पर ज़ोर देते हैं और लोगों को उनके पापों से बचाने के लिए अपने तरीके दिखाते हैं लेकिन यह केवल पानी और आत्मा का सुसमाचार है, जो हमारे प्रभु ने हमें दिया है, जो हमें हमारे सभी पापों से बचा सकता है। केवल यीशु ही उद्धारकर्ता है जो पापियों को उनके पापों से बचा सकता है।
यूहन्ना १४:६ में, हमारे प्रभु ने कहा, “यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।” उसने अपना शरीर और लहू उन लोगों को दे दिया जो उनकी मृत्यु के रास्ते पर थे। उन्होंने स्वयं को सच्चे जीवन के मार्ग के रूप में भी संदर्भित किया। परमेश्वर कहते हैं कि यदि कोई यीशु के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास नहीं करता है, तो वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता है।
हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना चाहिए, हमारे पापों से हमें माफ़ी पानी चाहिए और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए वह हमारा उद्धारकर्ता है ऐसा विश्वास करना चाहिए।
 
 
एक बार प्राचीन इज़राइल में!
 
“यहूदा का राजा आहाज जो योताम का पुत्र और उज्जिय्याह का पोता था, उसके दिनों में आराम के राजा रसीन और इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह ने यरूशलेम से लड़ने के लिये चढ़ाई की, परन्तु युद्ध कर के उन से कुछ बन न पड़ा” (यशायाह ७:१)।
इस्राएल मूल रूप से एक राष्ट्र था। हालाँकि, इस्राएल दक्षिण और उत्तर में विभाजित हो गया। परमेश्वर का मंदिर दक्षिणी यहूदिया के यरुशलम में था, जहाँ राजा सुलैमान के पुत्र रहोबाम ने शासन करता था। बाद में, सुलैमान के सेवकों में से एक, यारोबाम ने उत्तर में एक और राष्ट्र की स्थापना की और इसलिए इज़राइल विभाजित हो गया। उस समय से, परमेश्वर में विश्वास बिगड़ गया। विश्वास का बिगड़ना आज के झूठे धर्मों का स्रोत बन गया। इस तरह जेरोबाम ढोंगियों का प्रवर्तक बन गए। उसने परमेश्वर की व्यवस्था में सुधार किया क्योंकि वह अपने सिंहासन को बचाना चाहता था इसलिए, वह ढोंगियों का पिता बना। उसने इस्राएल, उत्तरी साम्राज्य में अपने लोगों के लिए एक अलग धर्म बनाया और उसने यहूदा, दक्षिणी साम्राज्य पर आक्रमण करने की भी कोशिश की। लगभग २०० साल बीत गए, लेकिन दो राज्यों के बीच शत्रुतापूर्ण संबंध अपरिवर्तित थे।
हालाँकि, परमेश्वर ने यशायाह के माध्यम से बात की, “क्यांकि अरामियों और रमल्याह के पुत्र समेत एप्रैमियों ने यह कह कर तेरे विरुद्ध बुरी युक्ति ठानी है कि आओ, हम यहूदा पर चढ़ाई कर के उसको घबरा दें, और उसको अपने वश में लाकर ताबेल के पुत्र को राजा नियुक्त कर दें। इसलिये प्रभु यहोवा ने यह कहा है कि यह युक्ति न तो सफल होगी और न पूरी। क्योंकि आराम का सिर दमिश्क, ओर दमिश्क का सिर रसीन है। फिर एप्रैम का सिर शोमरोन और शोमरोन का सिर रमल्याह का पुत्र है। पैंसठ वर्ष के भीतर एप्रैम का बल इतना टूट जाएगा कि वह जाति बनी न रहेगी। यदि तुम लोग इस बात की प्रतीति न करो; तो निश्चय तुम स्थिर न रहोगे” (यशायाह ७:५-९)।
उस समय, परमेश्वर ने यशायाह के माध्यम से राजा अहाज के सामने भविष्यवाणी की थी, लेकिन राजा को उस पर कोई विश्वास नहीं था। अहाज को बस इस बात की चिंता थी कि वह सीरिया की सेना के खिलाफ भी पकड़ नहीं बना पाएगा, लेकिन एक-दूसरे के साथ गठबंधन में सीरिया और इस्राएल के आक्रमण के बारे में सुनकर वह डर में कांप गया। लेकिन परमेश्‍वर के एक सेवक यशायाह ने आकर उससे कहा, “पैंसठ साल से भी कम समय में, उत्तर इस्राएल टूट जाएगा। और दो राजाओं ने जो षड्यंत्र रचा है वह कभी सच नहीं होगा”।
परमेश्वर के सेवक ने राजा अहाज से कहा कि वह परमेश्वर से संकेत मांगे।“अपने परमेश्वर यहोवा से कोई चिन्ह मांग; चाहे वह गहिरे स्थान का हो, वा ऊपर आसमान का हो।” (यशायाह 7:11). “तब उसने कहा, हे दाऊद के घराने सुनो! क्या तुम मनुष्यों को उकता देना छोटी बात समझकर अब मेरे परमेश्वर को भी उकता दोगे? इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी” (यशायाह ७:१३-१४)। यह उसकी भविष्यवाणी थी: कि वह अपने लोगों को उनके पापों से बचाएगा।
 
 
परमेश्वर का शत्रु कौन है?
 
मनुष्यजाति का दुश्मन पाप है और पाप शैतान से उत्पन्न होता है। और हमारे पापों से उद्धारकर्ता कौन है? उद्धारकर्ता यीशु मसीह, परमेश्वर के पुत्र के अलावा और कोई नहीं है। मनुष्य के पास शरीर की मूलभूत कमजोरियाँ हैं और इसलिए वह पाप करता है। वह शैतान की सामर्थ के अधीन है। कई लोग आज भी भविष्यवक्ताओं के पास जाते है और जैसे यह झूठे भविष्यवक्ता कहते है वैसे ही अपना जीवन जीने का प्रयास करते है। यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे शैतान के नियंत्रण में हैं।
प्रभु ने यशायाह को उद्धार का सबूत देते हुए कहा कि एक कुंवारी एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी। यह परमेश्वर की योजना थी कि यीशु को एक मनुष्य के पापी शरीर के रूप में भेजा जाए और वह पापियों को शैतान के उत्पीड़न से बचाए। भविष्यवाणी के अनुसार, यीशु कुंवारी मरियम से पैदा हुए इंसान के रूप में इस दुनिया में आए।
यदि यीशु हमारे पास नहीं आते, तो हम अभी भी शैतान के शासन में जी रहे होते। लेकिन यीशु इस दुनिया में आया और सारे पापियों को बचानेवाले खुबसूरत सुसमाचार को देने के लिए यूहन्ना से बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा। इसलिए, बहुत से लोगो ने खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास किया, अपने पापों की क्षमा प्राप्त कि और परमेश्वर की संतान बने।
यहाँ तक की आज भी, बहुत से धर्मशास्त्री इस बात पर बहस करते हैं कि क्या यीशु मसीह परमेश्वर है या मनुष्य। रूढ़िवादी धर्मशास्त्रियों का कहना है कि "यीशु परमेश्वर है," लेकिन कुछ नए धर्मशास्त्रियों ने यह तर्क देते हुए जवाब दिया कि यीशु यूसुफ का नाजायज बच्चा था। यह कैसी निराशाजनक बात है!
कुछ नए धर्मविज्ञानी कहते हैं कि वे विश्वास नहीं कर सकते कि यीशु के पास पानी पर चलने की क्षमता थी। वे कहते हैं, “यीशु वास्तव में पहाड़ की निचली क्षितिज पर चले थे और उनके चेलों को दूर से देखने पर ऐसा लगा की वह पानी पर चल रहा था”। दैवियता के वर्तमान डॉक्टर जो न्यू थियोलॉजी के स्कूलों से संबंधित है वे धर्मंशास्त्र के महापुरुष नहीं है। उनमें से ज़्यादातर लोग सिर्फ बाइबल में लिखी बातों को मान सकते हैं।
एक और उदाहरण देने के लिए, बाइबल कहती है कि यीशु ने ५,००० लोगों को दो मछलियों और पाँच रोटियों के साथ खिलाया। लेकिन वे इस चमत्कार को लेकर बहुत संशय में रहते हैं। वे इसे निम्नलिखित शब्दों में समझाते हैं। “लोग यीशु का अनुसरण कर रहे थे और वे भूख से मर रहे थे। इसलिए यीशु ने अपने चेलों को सभी बचे हुए भोजन को इकट्ठा करने के लिए कहा। फिर एक बच्चे ने उसे स्वेच्छा से अपना भोजन दिया, और यह देखकर दुसरे लोगों ने भी अपना भोजन निकाला। इसलिए जब उन्होंने एकसाथ भोजन खाया, तो बचे हुए खाने से बारह टोकरियाँ बच गई”। इस प्रकार के धर्म-विज्ञानी बस परमेश्वर के शब्दों को अपनी सीमित समझ के अनुकूल बनाने की कोशिश करते हैं।
परमेश्वर के सत्य में विश्वास करने से केवल उस खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास किया जा सकता है जो परमेश्वर ने दिया है। विश्वास का मतलब यह नहीं है की जो चीज समझ में आये उसपर विश्वास करना और जो चीज समझ में ना आये उसपर विश्वास न करना। चाहे हम इसे समझे या न समझे, लेकिन हमें जैसे लिखा है वैसे वचनों पर विश्वास करना है और उसे स्वीकार करना है।
यीशु के मनुष्य के पुत्र के रूप में हमारे पास आने का अर्थ है कि वह हमें हमारे सारे पापों से बचाने के लिए भेजा गया था। यीशु, जो परमेश्वर है, हमें बचाने के लिए इस धरती पर आया। यशायाह ने भविष्यवाणी की थी कि वह कुंवारी से पैदा हुए मनुष्य के पुत्र के रूप में हमारे पास आएगा.
उत्पत्ति 3:15 में, परमेश्वर ने सर्प से कहा, “और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा”। इसका मतलब है कि परमेश्वर ने यीशु को एक मनुष्य के रूप में, मनुष्यजाति को उनके पापों से बचाने के लिए एक उद्धारकर्ता के रूप में भेजने की योजना बनाई थी।
बाइबल में लिखा है, “हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है” (१ कुरिन्थियों १५:५५-५६)। मृत्यु का डंक पाप है। जब मनुष्य पाप करता है, तो मृत्यु उसे अपना दास बना लेती है। लेकिन हमारे प्रभु ने वादा किया, “औरत का बीज तुम्हारे सिर को काटेगा।" इसका मतलब यह है कि यीशु उस पाप के डंक को नष्ट कर देगा जो शैतान लाया था।
यीशु इस दुनिया में आए, दुनिया के सारे पापों को दूर करने के लिए उसने बपतिस्मा लिया गया और वह क्रूस पर लटका गया। उसने उन सभी को पापों से बचा लिया जो खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते हैं। जब आदम और हव्वा ने पाप किया, तो परमेश्वर ने मनुष्यजाति को शैतान की सामर्थ से बचाने का वादा किया। आधुनिक दुनिया में, परमेश्वर का दुश्मन वह हैं जो खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास नहीं करते हैं।
 
 
क्यों यीशु इस दुनिया में पैदा हुआ था?
 
परमेश्वर ने हमें हमारे पापों से बचाने के लिए व्यवस्था और खुबसूरत सुसमाचार दिया। परमेश्वर की व्यवस्था के तहत, उसकी उपस्थिति में लोग पापी बन गए। इसी तरह, व्यवस्था दी गई ताकि लोगों को उनके पापों का पता चल सके। जब लोग पाप के और व्यवस्था के गुलाम हो गए, तब हमारे प्रभु व्यवस्था की धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस दुनिया में आए।
यीशु का जन्म व्यवस्था के तहत हुआ था। वह व्यवस्था के युग में पैदा हुआ था। लोगों को व्यवस्था की आवश्यकता इस कारण थी कि उन्हें अपने पापों से माफ़ी पाने के लिए अपने पापों को जानना आवश्यक था। लोग अपने कपड़ों से गंदगी तभी साफ करते हैं जब उन्हें एहसास होता है कि वे गंदे हैं। इसी तरह, अपने पापों को पहचानने के लिए, लोगों को परमेश्वर के नियम को जानना चाहिए। यदि कोई व्यवस्था नहीं थी, तो पापों का कोई मतलब नहीं है, और यीशु को इस दुनिया में नहीं आना पड़ता।
यदि आप परमेश्वर की व्यवस्था को जानते हैं, तो आपके पास उससे मिलने का एक मौका है। हम व्यवस्था के बारे में जानते थे और इसलिए अपने पापों के बारे में जानने में सक्षम थे। जब हम अपने पाप के बारे में जानते थे तब ही यीशु मसीह ने हमारे लिए विश्वास करने के लिए खुबसूरत सुसमाचार लाया था। यदि परमेश्वर ने हमें व्यवस्था नहीं दी होती, तो हम पापी नहीं होते और न्याय का अस्तित्व नहीं होता। इस प्रकार, परमेश्वर ने हमें व्यवस्था दी और सारे पापियों को उनके पापों से बचाने के लिए खुबसूरत सुसमाचार प्रस्तुत किया।
सृष्टिकर्ता और उसकी सृष्टि के बीच जो व्यवस्था मौजूद होनी चाहिए, वह परमेश्वर की उद्धार की व्यवस्था है। यह प्रेम की व्यवस्था है। परमेश्वर ने मनुष्य को बताया, “पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा” (उत्पत्ति २:१७)। यह वह व्यवस्था थी जो परमेश्वर ने हमें प्रदान कि थी, और व्यवस्था उस प्रेम का आधार बन गई जिसके साथ परमेश्वर ने हम सभी को हमारे पापों से बचाया। हमारे पापों की क्षमा में उद्धार के व्यवस्था की नींव थी। परमेश्वर हमें बताता है कि वह हमारा सृष्टिकर्ता है और उसकी इच्छा के अनुसार सब अस्तित्व में है। इसका मतलब यह है कि परमेश्वर सम्पूर्ण है और इसलिए लोगों को उद्धार की व्यवस्था में विश्वास करना चाहिए जो कि खुबसूरत सुसमाचार के माध्यम से पूरा किया गया था।
सम्पूर्ण परमेश्वर वाकही में अच्छा है। इस दुनिया के लिए परमेश्वर के प्यार ने उन्हें अपने एकलौते बेटे को बलिदान करने के लिए प्रेरित किया, जो सारे पापियों का उद्धारकर्ता बन गया। यदि परमेश्वर ने हमें बनाया और हमें हमारे पापों से बचाने के लिए खुबसूरत सुसमाचार नहीं दिया होता, तो हमने उसके खिलाफ शिकायतें उठाईं होती। लेकिन परमेश्वर हमें अपने विनाश से बचाना चाहते थे और इसलिए उद्धार की व्यवस्था स्थापित की। व्यवस्था के कारण, हम अपने पापों का एहसास करने में सक्षम थे और सीधे उन्हें देखकर, यीशु के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करना शुरू किया। जब हम परमेश्वर के वचन का उल्लंघन करते हैं, तो हम व्यवस्था के समक्ष पापी के रूप में प्रकट होते हैं, और आखिरकार हम पापी परमेश्वर के सामने पाप की क्षमा की दया की भीख माँगते हैं।
यीशु एक स्त्री से पैदा हुआ था और मनुष्यजाति को पाप से बचाने के लिए इस दुनिया में आया था। यीशु इस दुनिया में हमारे लिए परमेश्वर की योजना को पूरा करने के लिए एक मनुष्य के रूप में आया था। हम उनके खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते हैं। इसलिए, हम प्रभु की स्तुति करते हैं।
कुछ लोग शिकायत करते हैं, "परमेश्वर ने मुझे इतना कमजोर क्यों बना दिया कि मैं पाप में इतनी आसानी से गिर गया और अपने अधर्म के लिए इतना कष्ट उठाया?" उसने हमें पीड़ित होने की अनुमति दी क्योंकि हम यीशु के सुसमाचार पर संदेह कर रहे थे। परमेश्वर ने हमें दुख और खुबसूरत सुसमाचार दोनों दिए ताकि हम उनकी संतान की तरह उसके जैसे सामर्थी बने। यह उसकी योजना थी।
लेकिन दुष्ट आत्मा कहती है, "नहीं! नहीं! परमेश्वर एक तानाशाह है! आगे बढ़ो और अपनी इच्छानुसार जियो। स्वतंत्र रहो! अपने स्वयं के प्रयासों के माध्यम से अपनी किस्मत बनाओ!” दुष्ट आत्मा भी परमेश्वर में मनुष्यजाति के विश्वास को अवरुद्ध करने का प्रयास कराती हैं। लेकिन जो लोग परमेश्वर से अलग रहना चुनते हैं, वे उद्धार के लिए उनकी योजना में बाधा हैं। यीशु इस दुनिया में आए और उन लोगों को बुलाया जो शैतान की सामर्थ्य के तले है और अपना पाप छोड़ने के लिए तैयार है। हमें परमेश्वर से अलग नहीं रहना चाहिए।
 
 
मनुष्य पैदाइशी पापी है जो नरक के लिए नियोजित है
 
इस धरती पर कोई भी ऐसा सत्य नहीं है जो बदलता नहीं है। लेकिन यीशु का खुबसूरत सुसमाचार अटल सत्य है। इसलिए, लोग उस सत्य पर निर्भर हो सकते हैं और शैतान की सामर्थ से छूटकारा पा सकते हैं। मनुष्यजाति को आदम और हव्वा के पाप विरासत में मिले और मसीह के हस्तक्षेप के बिना वे नरक की आग में बरबाद हो जाते। इसके बजाय, उनके बलिदान के लिए धन्यवाद, मनुष्य परमेश्वर की संतान बनने की सामर्थ्य से आशीषित है। “तौभी संकट-भरा अन्धकार जाता रहेगा। पहिले तो उसने जबूलून और नप्ताली के देशों का अपमान किया, परन्तु अन्तिम दिनों में ताल की ओर यरदन के पार की अन्यजातियों के गलील को महिमा देगा” (यशायाह ९:१)। परमेश्वर ने अपने बेटे को इस दुनिया में भेजा और उन लोगों को महिमा दी जो खुबसूरत उद्धार में विश्वास करते हैं। 
“जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशायाह ९:२)। आज, यह वचन आपके और मेरे लिए सच हुए है। खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करने से, हमें अनन्त जीवन प्राप्त हुआ, जो इस पृथ्वी पर नहीं हो सकता। यीशु मसीह ने मनुष्यजाति को दुनिया के सभी पापों से बचाया और जो लोग खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें अनंत जीवन और स्वर्ग का राज्य दिया।
 
 
जो लोग निराश थे उन पर उसने सुसमाचार का खुबसूरत प्रकाश डाला
 
मनुष्य का, एक कोहरे की तरह, इस दुनिया में अस्तित्व है लेकिन जल्द ही गायब हो जाता है। उनका जीवन वार्षिक पौधों और घास की तरह है। घास वर्ष के दौरान केवल कुछ महीनों के लिए अपनी जीवन शक्ति को बरकरार रखती है और फिर परमेश्वर के नियम के अनुसार गायब हो जाती है। हमारे जीवन में इस घास की तरह सबकुछ व्यर्थ है। लेकिन परमेश्वर ने हमारी थकी हुई आत्माओं को खुबसूरत सुसमाचार दिया और उनकी धार्मिकता के साथ हमें उनकी संतान बना दिए। यह कैसी अद्भुत कृपा है! हमारा निरर्थक जीवन परमेश्वर के प्रेम के कारण अनन्त जीवन बन गया और हमें उनकी संतान बनने का अधिकार भी प्राप्त हुआ।
यहाँ एक आत्मा का अंगीकार है जो खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करके परमेश्वर की कृपा से धन्य थी।
 मैं एक ऐसे परिवार में पैदा हुआ था जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करता था। इसलिए, मुझे इस खुबसूरत सोच के साथ पाला गया की मुझे हर सुबह मेरी माँ के सामने पानी से भरा कटोरा रखकर स्वर्ग और पृथ्वी के देवताओं से मेरे परिवार की अच्छाई के लिए प्रार्थना करनी थी। जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा था, मुझे मेरे मूल्य या मेरे अस्तित्व का कारण नहीं पता था, जिससे मुझे विश्वास हो गया कि वास्तव में यह मायने नहीं रखता था कि मैं जीवित था या मर गया था। क्योंकि मैं अपने मूल्य से अनजान था, मैं एकांत में रहता था।
इस तरह की जिंदगी ने मुझे थका दिया और इसलिए मैं शादी करने के लिए दौड़ पड़ा। मेरा विवाहित जीवन अच्छा रहा। मेरे पास इच्छा करने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए मैंने एक शांत और निर्मल जीवन जीया। फिर मेरा एक बच्चा हुआ और उस समय से मैंने पाया कि मेरे अंदर प्यार दिखने लगा था। मैंने अपनी स्वार्थी इच्छाओं को खोना शुरू कर दिया लेकिन मुझे अपने सबसे करीबी लोगों के खोने का डर भी था।
इस प्रकार, मैंने परमेश्वर की खोज शुरू कर दी। मैं नाजुक और असमर्थ था और इसलिए, अपने प्रियजनों पर नजर रखने के लिए एक निरपेक्ष होने की जरूरत थी। इसलिए मैंने कलीसिया में भाग लेना शुरू कर दिया लेकिन मेरा विश्वास मेरी माँ से थोड़ा अलग था क्योंकि उसने पानी के कटोरे के सामने प्रार्थना की थी - मेरी प्रार्थना केवल अस्पष्ट आशंकाओं और आशाओं पर आधारित थी।
एक बार, मैंने स्थानीय कलीसिया में आयोजित एक छोटी सभा में भाग लिया और जब मैं प्रार्थना कर रहा था, मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मैं शर्मिंदा था और रोना बंद करने की कोशिश की, लेकिन आँसू बहते रहे। मेरे आसपास के लोगों ने मेरे सिर पर हाथ रखा और मुझे पवित्र आत्मा प्राप्त करने के लिए बधाई दी। लेकिन मैं घबराया हुआ था। मैं परमेश्वर के वचनों से भी परिचित नहीं था और उस पर मेरा विश्वास केवल अस्पष्ट था, इसलिए मुझे कोई विश्वास नहीं था कि यह बल पवित्र आत्मा का था।
मैंने जिस कलीसिया में भाग लिया वह पेंतिकुस्त-करिश्माई आंदोलन से जुड़ा था, और कई लोगों को मेरे जैसे अनुभव थे और लगभग हर कोई अन्य भाषा में बोलता था। एक दिन, मुझे एक पादरी की अगुवाई में एक जागृति की सभा के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसके बारे में लोगों ने कहा था कि वह पवित्र आत्मा से भार हुआ है। पादरी ने कलीसिया में कई लोगों को इकट्ठा किया और कहा कि वह किसी की साइनसाइटिस को ठीक कर देगा क्योंकि ऐसा करना उसकी आत्मिक सामर्थ में था। हालांकि, मुझे लगा कि साइनसाइटिस अस्पतालों में आसानी से ठीक होने वाली बीमारी है, इसलिए मुझे इस बात में अधिक दिलचस्पी थी कि उन्होंने पवित्र आत्मा को कैसे प्राप्त किया। लेकिन जब पादरी चंगाई के अपने प्रयासों में सफल होते लिए दिखाई दिया, तो उसने यह दावा करना शुरू कर दिया कि वह यह अनुमान लगा सकता है कि हाई स्कूल का छात्र अपने विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में सफल होगा या नहीं। बहुत से लोगों ने उसके सामर्थ की प्रशंसा की जैसे की वे परमेश्वर की हैं।
लेकिन मैं उसे समझ नहीं पाया। और मैं यह नहीं कह सकता था कि पादरी के पास जो कुछ भी सामर्थ थी, उसका पवित्र आत्मा के साथ कुछ भी लेना देना था। मुझे नहीं लगा कि यह महत्वपूर्ण था कि वह साइनसाइटिस को ठीक कर सकता है या किसी परीक्षा में किसी की सफलता का पूर्वानुमान लगा सकता है। इसलिए, मैं उनके स्पष्ट चमत्कारों को पवित्र आत्मा के कार्यों के रूप में नहीं ले सकता था।
परमेश्वर की शक्ति और प्रेम जो मेरे मन में था, मैंने जो देखा उससे अलग था। उस कारण से, मैंने उस कलीसिया में जाना बंद कर दिया और पादरी की सामर्थ में विश्वास करने वाले लोगों से बचता रहा। उसके बाद, मैंने एक शांत कलीसिया में भाग लिया, जिसे मैंने चुना क्योंकि मेरा मानना था कि यह परमेश्वर के वचनों के साथ अधिक व्यवहार करता है। मैंने व्यवस्था का ज्ञान प्राप्त किया और इसके माध्यम से कि मैं बहुत अधर्मी था। परमेश्वर मेरे डर का विषय बन गए और मैंने सीखा कि मैं उनकी उपस्थिति में सम्मानजनक नहीं दिख सकता और उनकी आत्मा मुझे उपेक्षित करती दिखाई दी।
यशायाह ५९:१-२ में यह लिखा है, “सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता”। यह मेरी स्थिति के अनुकूल प्रतीत हुआ। मेरे लिए उनकी संतान बनना और पवित्र आत्मा प्राप्त करना असंभव था क्योंकि मैंने जो कुछ भी किया या सोचा था वह पापमय था।
“मैंने परमेश्वर का भय माना और इसलिए लगातार पश्चाताप की प्रार्थना की। किसी ने मुझे ऐसा करने के लिए नहीं कहा, लेकिन मैं परमेश्वर के सामने सम्मानपूर्वक खड़ा होना चाहता था। क्योंकि मैं पापी था, मैंने ईमानदारी से पश्चाताप की और भी अधिक प्रार्थना की। लेकिन ये प्रार्थनाएँ मेरे पापों को धोने में असफल रहीं। मैंने जो कुछ भी किया, वह मेरे विचारों और ईमानदारी को दर्शाता है, इसलिए मेरे पाप अभी भी मुझमें थे। उस समय से, मैंने परमेश्वर के खिलाफ शिकायतें जारी करना शुरू कर दिया। मैं उनकी नज़र में परिपूर्ण होना चाहता था, लेकिन मैं अभी एकदम सही नहीं हो सकता, इसलिए मेरी शिकायतें और पाप ढेर हो गए।
इस धार्मिक उलझन के समय में, मेरे पिता को दौरा पड़ा। उनके निधन से पहले ऑपरेटिंग कमरे और अस्पताल के बिस्तरों में उन्हें ४० दिनों तक रहना पड़ा। लेकिन मैं एक बार भी अपने पिता के लिए प्रार्थना नहीं कर सका। मैं एक पापी था, इसलिए मैंने सोचा कि अगर मैंने अपने पिता के लिए प्रार्थना की, तो उसका दर्द और बढ़ जाएगा। मेरे विश्वास में कमी होने पर मैं व्यथित था और मैं परमेश्वर का अनुसरण करना चाहता था, लेकिन मैं शिकायत नहीं कर रहा था और आखिरकार मैं उससे दूर हो गया। मेरा धार्मिक जीवन जैसे खत्म हो गया। मैंने सोचा कि अगर मैं उस पर विश्वास करता हूं, तो उसकी आत्मा मुझमें बस जाएगी और मुझे शांति मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं था। उसके बाद, मेरा जीवन और भी निरर्थक हो गया और मैं भय और दुःख में जी रहा था।
लेकिन प्रभु ने मुझे नहीं छोड़ा। उसने मुझे एक विश्वासी से सामना करने के लिए प्रेरित किया, जिसने वास्तव में परमेश्वर के वचनों के द्वारा पवित्र आत्मा को प्राप्त किया था। मुझे इस व्यक्ति से पता चला कि यीशु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को उठा लिया है और क्रूस पर उसे उसके लिए न्याय चुकाना पडा। इसलिए, इस दुनिया के सारे पाप, मेरे पाप भी, माफ कर दिए गए थे। जब मैंने सुना और यह समझ में आया, तो मैं देख सकता था कि मेरे सभी पाप साफ हो गए हैं। परमेश्वर ने मुझे मेरे पापों के लिए क्षमा प्राप्त करने में मदद की, मुझे पवित्र आत्मा का आशीष दिया और मुझे एक शांतिपूर्ण जीवन प्रदान किया। उसने चुपचाप मेरा नेतृत्व किया, मुझे अच्छे और बुरे की स्पष्ट समझ दी और मुझे इस दुनिया के प्रलोभनों पर जित पाने का सामर्थ्य प्रदान किया प्रदान किया। उसने मेरी प्रार्थनाओं का जवाब दिया और मुझे एक धर्मी और सार्थक जीवन जीने में मदद की। मुझे पवित्र आत्मा देने के लिए वास्तव में मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ।
हम में से हर एक प्रभु की कृपा से आशीषित है और पवित्र आत्मा को प्राप्त करने में सक्षम है। हमें उनका खुबसूरत सुसमाचार देने के लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ। परमेश्वर ने धर्मियों को ऐसे ही सुख की आशीष दी है। धर्मी लोगों के दिल हर्षित होते हैं। प्रभु ने हमें अनन्त ख़ुशी दी। हम जानते हैं कि परमेश्वर का उद्धार, प्रेम और अनुग्रह कितना कीमती है और हम उनके लिए आभारी हैं। प्रभु ने हमें स्वर्ग के खुबसूरत सुसमाचार के माध्यम से खुशी दी। यह कुछ ऐसा है जो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता है। परमेश्वर ने हमें मग्न और ईमानदार बनाने के लिए पवित्र आत्मा और साथ ही साथ खुबसूरत सुसमाचार भी दिया है। खुबसूरत सुसमाचार हमारे जीवन को आशीषित बनाता है। प्रभु ने हमें खुबसूरत सुसमाचार दिया और उन्हें खुशी है कि धर्मी लोग धन्य जीवन का आनंद लेते हैं।
जैसा कि लूका में लिखा गया है, मरियम ने कहा, “क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता। मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया” (लूका १:३७-३८)। जिस पल मरियम ने परमेश्वर के खुबसूरत वचनों पर विश्वास किया, जैसा कि उसके दूत ने कहा था, उसने यीशु का गर्भ धारण किया। इसी तरह, अपने विश्वास के द्वारा, धर्मी अपने हृदय में खुबसूरत सुसमाचार को धारण करते हैं।
“क्योंकि तू ने उसकी गर्दन पर के भारी जूए और उसके बहंगे के बांस, उस पर अंधेर करने वाले की लाठी, इन सभों को ऐसा तोड़ दिया है जेसे मिद्यानियों के दिन में किया था” (यशायाह ९:४)। शैतान ने हमारे जीवन में सारे संकट, बीमारियाँ और अत्याचार डाले लेकिन हम उस पर जय पाने के लिए बहुत कमजोर हैं। लेकिन परमेश्वर हमसे प्यार करता है और इसलिए उसने शैतान के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उसे हराया।
“क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वे उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा” (यशायाह ९:६-७)।
परमेश्वर ने यीशु के द्वारा लाए हुए खुबसूरत सुसमाचार के द्वारा हमें अपने बच्चों के रूप में महिमा देने का वादा किया। उसने अपने वादे के अनुसार शैतान को हराया और हमें शैतान की ताकत से बचाया।
प्रभु पृथ्वी पर आए और अपनी सामर्थ से पाप के सभी अंधकार को दूर करने का वचन दिया। इसलिए हम अपने प्रभु को अद्भुत कहते है भी कहते हैं। उन्होंने हमारे लिए कई बेहतरीन काम किए हैं। मनुष्य के पुत्र के रूप में इस दुनिया में आने का परमेश्वर का निर्णय रहस्यमय था। “यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे” (यशायाह १:१८)। 
प्रभु ने हमें हमारे पापों से बचाने और हमें अनन्त माफ़ी देने का वादा किया। यीशु को एक अद्भुत व्यक्ति के रूप में जाना जाता है और, तदनुसार, उसने हमारे लिए चमत्कारी कार्य किए हैं। “उसका नाम अदभुत, युक्ति करनेवाला, पराक्रमी होगा”। परमेश्वर ने, हमारे युक्ति करनेवाले के रूप में, खुबसूरत सुसमाचार के साथ हमारे उद्धार की योजना बनाई और हमें अपने पापों से सदा के लिए बचाने के लिए अपनी योजना को अंजाम दिया।
परमेश्वर की मूर्खता मनुष्य की तुलना में समझदार है। यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेना और क्रूस पर मरना हमारे सभी पापों से हमें बचाने के लिए यीशु के लिए यह उनकी बुद्धि थी। यह रहस्यमय काम है जो उसने हमारे लिए किया, लेकिन यह प्रेम की व्यवस्था है जिसने हमें हमारे सभी पापों से बचाया। प्रेम की व्यवस्था सच्चाई का सुसमाचार है जो पानी और उसके लाहो के द्वारा पवित्र आत्मा पाने की ओर हमारी अगुवाई करता है।
यशायाह ५३:१० में प्रभु कहता है, “तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया”। यीशु ने परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने के लिए अपनी आत्मा को पाप के लिए बलिदान कर दिया। उसने जगत के पापों को अपने पुत्र, यीशु मसीह के ऊपर डाल दिया, और उसे क्रूस पर चढ़ाने का दुख झेला ताकि वह उनके लिए न्याय करे। यह खुबसूरत सुसमाचार है जिसने मनुष्यजाति को एक ही बार हमेशा के लिए उनके पापों से बचाया है। मसीह ने हमारे लिए अपना जीवन अर्पित किया, पाप की मजदूरी का भुगतान किया और हमें उद्धार की आशीष दी।
 
 
परमेश्वर कि बलिदान प्रथा
 
यीशु ने यूहन्ना से अपने बपतिस्मा के 
द्वारा कितने पाप उठा लिए?
आरम्भ से लेकर अन्त के समय तक के भूतकाल,
वर्त्तमान और भविष्य के सारे पापों को

बाइबल एक ऐसे बलिदान की बात करती है जिसके परिणाम स्वरुप एक दिन के पापों की माफ़ी मिलती नथी। एक पापी को निष्कलंक बलिदान लाना पड़ता था और अपने पापों को उसके ऊपर डालने के लिए उसके सिर पर हाथ रखना पड़ता था। फिर उसे बलि को मारना पड़ता था और उसके लहू को याजक को सोंप देता था। और याजक ने पशु के कुछ लहू को लेकर होमबलि के सींगो पर लगाता था और बचे हुए लहू को वेदी के निचे डाल देता था।
इस तरह, उसे एक दिन के पापों के लिए माफ़ी मिलती थी। पापियों के लिए हाथ रखने के द्वारा वे अपने पापों को बलिदान के ऊपर डाल सकते थे। जो लोग बलि प्रथा के अनुसार अपना बलिदान देते थे, वे अपने पापों के लिए माफ़ी प्राप्त कर सकते थे। यीशु के पाप को दूर करने से पहले उस समय में बलिदान प्रथा हमारे पापों के लिए बलिदान करने का तरीका था।
परमेश्वर ने प्रायश्चित का दिन भी नियुक्त किया था ताकि पूरे वर्ष के दौरान किए गए पापों के लिए इस्राएल के लोग प्रायश्चित कर सकें। सातवें महीने के दसवें दिन बलिदान होता था। परमेश्वर ने हारून को महायाजक नियुक्त किया, जो सभी इस्राएलियों के वार्षिक पापों को बलि के बकरे पर डालता था। विधि परमेश्वर की योजना के अनुसार की जाती थी। पापों की क्षमा उसकी बुद्धि और मानव जाति के प्रति प्रेम से हुई। यही उसकी सामर्थ है।
"होमबलि के वेदी के सींग" का मतलब है "न्याय की पुस्तकें" (प्रकाशितवाक्य २०:१२), जहाँ मानव जाति के पापों को दर्ज किया गया है। होमबलि के सींगो पर याजक लहू को लगाता था जिसका मतलब था न्याय की पुस्तक में लिखे नाम और उनके अपराध को मिटाना था। लहू सारे शरीर का जीवन है। बलिदान ने इस्राएलियों के पापों को दूर कर दिया और पाप की मजदूरी का भुगतान करने के लिए बलि का बकरा मारा गया। परमेश्वर ने उन्हें अपने पापों के न्याय को स्विलार करने के लिए बलि पशु को मार दिया था। यह उसकी बुद्धि और हमारे लिए प्यार की निशानी थी।
परमेश्वर की योजना को पूरा करने के लिए यीशु मसीह पाप की पेशकश के रूप में इस दुनिया में आए। यीशु ने अपने बलिदान के द्वारा दुनिया के पापों को दूर कर दिया। अगर हम इस वायदे के वचन को देखें, तो हम देखते हैं, “तौभी यहोवा को यही भाया की उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया” (यशायाह ५३:१०) या “जो जगत का पाप उठा ले जाता है” (यूहन्ना १:२९)।
“क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वे उसको दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा” (यशायाह ९:६-७)।
रहस्यमय और अद्भुत वायदा यह था कि यीशु परमेश्वर की इच्छा को पूरा करेंगे और जगत के सारे पापों को उठाने के द्वारा विश्वासियों को शांति प्रदान करेंगे। परमेश्वर का वादा प्यार का वादा था, जिसके द्वारा उन्होंने सारी मनुष्यजाति के लिए शांति लाने की योजना बनाई। यह वही है जो परमेश्वर ने हमसे वादा किया था, और यही उसने किया।
मत्ती १:१८ कहता है, “अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई।” “यीशु” का अर्थ है उद्धारकर्ता, वह जो अपने लोगों को उनके पापों से बचाएगा। "मसीह" का अर्थ है अभिषिक्त राजा, राजा यीशु के कोई पाप नहीं किए थे, और वह हमारा राजा और उद्धारकर्ता है जो अपने लोगों को उनके पापों से बचाने के लिए एक कुंवारी से पैदा हुआ था।
“‘वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो” (मत्ती १:२१-२२)।
 
 
यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया
 
मत्ती ३:१३-१६ में लिखा गया है, “उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे पर यूहन्ना के पास उस से बपतिस्मा लेने आया। परन्तु यूहन्ना यह कहकर उसे रोकने लगा, कि मुझे तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यक्ता है, और तू मेरे पास आया है? यीशु ने उस को यह उत्तर दिया, कि अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धामिर्कता को पूरा करना उचित है, तब उस ने उस की बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उस ने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की नाईं उतरते और अपने ऊपर आते देखा।”
इस परिच्छेद में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला दिखाई देता है। क्यों यूहन्ना को यीशु को बपतिस्मा देना पड़ा? यीशु को जगत के सारे पापों को लेने के लिए बपतिस्मा लेना पड़ा, और उन सब को परमेश्वर की योजना के अनुसार लेना पड़ा।
 “और प्रभुता उसके कांधे पर होगी,” (यशायाह ९:६)। यहां "प्रभुता" का अर्थ है कि यीशु वह है जिसके पास स्वर्ग के स्वामी के रूप में और जगत के राजा के रूप में अधिकार और सामर्थ है। यीशु ने मनुष्यजाति के सारे पापों को दूर करने के लिए एक अद्भुत काम किया। यह अद्भुत बात यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लेना थी। यीशु का यह कहना कि "इसी तरह सब धार्मिकता को पूरा करना हमारे लिए उचित है" यह है कि जगत के सारे पापों को दूर करना सही और उचित था।
रोमियों १:१७ कहता है, “क्योंकि उस में परमेश्वर की धामिर्कता विश्वास से और विश्वास के लिये प्रगट होती है”। सुसमाचार में परमेश्वर की धार्मिकता का पता चलता है। क्या पानी और आत्मा का सच्चा सुसमाचार वास्तव में परमेश्वर की धार्मिकता को दर्शाता है? हाँ! सच्चा सुसमाचार यह है कि यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और क्रूस के द्वारा जगत के सारे पापों को दूर कर दिया। पानी और आत्मा का सुसमाचार खुबसूरत सुसमाचार है जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता का पता चलता है। यीशु ने दुनिया के पापों को कैसे दूर किया? जब यूहन्ना ने यरदन नदी में उसे बपतिस्मा दिया, तो उसने दुनिया के सारे पापों को ले लिया।
“सब धार्मिकता” ग्रीक भाषा में “पसन् दिकाइयोसुने” है। इसका अर्थ है कि यीशु ने मनुष्यजाति के सभी पापों को सबसे न्यायसंगत और अद्भुत तरीके से दूर किया। इसका अर्थ है कि दुनिया के सभी पापों के बारे में यीशु की सफाई बिल्कुल न्यायपूर्ण और उचित थी। दुनिया के पापों को मिटाने के लिए यीशु को यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेना पड़ा।
 परमेश्वर जानते थे कि मनुष्यजाति को शांति प्रदान करने के लिए यीशु का बपतिस्मा बहुत ही आवश्यक था। यदि वह यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा नहीं लेता और क्रूस पर अपना लहू नहीं बहाता, तो यीशु हमारा उद्धारकर्ता नहीं बन सकता था। यीशु ने दुनिया के सभी पापों को दूर करने के लिए खुद पापबलि बन गया।
यशायाह ५३:६ में परमेश्वर कहते हैं, “हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया”। परमेश्वर की इच्छा के लिए यीशु को जगत के सारे पापों को स्वीकार करना पड़ा। यही कारण है कि यीशु एक मनुष्य के शरीर में पापबलि बनके आया और यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लिया।
यीशु को मनुष्यजाति के सारे पापों को स्वीकार करना पड़ा और उनके लिए न्याय लेना पड़ा ताकि वह परमेश्वर की योजना को पूरा कर सके और अपने प्यार को व्यक्त कर सके। जब यीशु बपतिस्मा के बाद पानी से बाहर निकला, तब परमेश्वर ने कहा, “कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ” (मत्ती ३:१७)।
 
 
हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ
 
 “क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा” (यशायाह ९:६)। यीशु परमेश्वर का पुत्र है। यीशु सृष्टि का परमेश्वर है जिसने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया है। न केवल वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पुत्र है, बल्कि वह सृष्टिकर्ता और शांति का राजा भी है। यीशु परमेश्वर है जिसने मनुष्यजाति को खुशी दी है।
यीशु सच्चाई का परमेश्वर हैं। उसने हमारे सभी पापों को दूर किया, हमें बचाया, और हमें शांति दी। क्या इस दुनिया में पाप है? नहीं, कोई पाप नहीं है। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि कोई पाप नहीं है उसका कारण यह है कि हम खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते हैं, जो कहता है कि यीशु ने दुनिया के सारे पापों को उनके बपतिस्मा और लहू के द्वारा क्रूस पर धोया। यीशु हमसे झूठ नहीं बोलते। यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू से पाप की मजदूरी का भुगतान किया। उन्होंने विश्वास करने वाले सभी लोगों को अपनी संतान बनने दिया और हम सभी को शांति दी। उन्होंने हमें अनंत काल तक अपने पवित्र संतान के रूप में जीवन दिया। मैं प्रभु की स्तुति करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं।
 
 
देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!
 
यूहन्ना १:२९ कहता हैं, “दूसरे दिन उस ने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!” यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को उठाने के बाद दुसरे दिन फिर यूहन्ना के सामने प्रगट हुआ। यूहन्ना ने यह कह कर यीशु के बारे में गवाही दी, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” उसने फिर यूहन्ना १:३५-३६ में फिर वह गवाही देता है, “दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। और उस ने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि करके कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है!”
यीशु वह मसीहा था जो परमेश्वर के मेमने के रूप में आया था, जैसा कि परमेश्वर ने पुराने नियम में वादा किया था। यीशु मसीह अद्भुत युक्ति करनेवाला, पराक्रमी परमेश्वर के रूप में हमारे सामने प्रगट हुआ, और हमें सारे पापों से बचाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया। एक बालक हमारे लिए पैदा होगा। उसने योहान्ना से अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों का स्वीकार किया, पाप की मजदूरी चुकाई, और शान्ति का राजकुमार बन गया जो हमें शान्ति और हमारे पापों से छूटकारा देता है।“देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।” 
लोगों के पास अपने पापों के लिए मरने के अलावा और कोई चारा नहीं था। मनुष्यों को उनके पापों की वजह से अनगिनत पाप करने के लिए नियत किया गया और अंततः नर्क के लिए दोषी ठहराया गया। उन्होंने दुखी जीवन व्यतीत किया; उनकी कमजोरियों के कारण उनमें से कोई भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता था या सपने नहीं देख सकता था। यीशु मसीह, जो हमारे परमेश्वर हैं, जब उन्होंने यरदन नदी में यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लिया और उनके अधर्म के न्याय के लिए क्रूस पर चढ़ाया गया था, तब उन्होंने उनके सारे पापों को स्वीकार किया था। अपनी मृत्यु के समय, मसीह ने कहा, “पूरा हुआ” (यूहन्ना १९:३०)। इस तथ्य के लिए उनके गवाह का रोना था कि यीशु ने सारी मनुष्यजाति को उनके पापों और मृत्यु से बचाया था, और उन्होंने खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करने वाले सारे लोगों को छूटकारा दिया था।
“देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है”। क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सारे पाप कहाँ हैं? क्या वे यीशु मसीह के शरीर पर नहीं हैं? इस संसार में हमें अपमानित करने वाले सभी पाप और अपराध कहाँ हैं? वे सभी यीशु मसीह के ऊपर स्थानांतरित हो गए। हमारे सभी पाप कहाँ हैं? वे सब उसके शरीर पर है जिसके काँधे पर प्रभुता है; वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के शरीर में हैं।
 
 
जन्म से लेकर कब्र तक के सारे पाप!
 
हम जीवन भर पाप करते हैं। हम पैदा हुए तब से २० साल की उम्र के हुए तब तक पाप किए। २० साल पहले किए सारे पाप कहाँ गए? उन्हें यीशु मसीह के शरीर पर स्थानांतरित कर दिया गया। २१ और ४० साल की उम्र के बीच जो पाप हमने किए थे, वे भी यीशु पर डाल दिए गए है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति कितने वर्षों तक जीवित रहता है, उसने अपने जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक जो पाप किए थे, वे यीशु मसीह पर डाल दिए गए है। आदम से लेकर इस धरती पर अंतिम व्यक्ति तक, मनुष्यजाति ने जो भी पाप किए, वे यीशु पर डाल दिए गए गए। यहां तक कि हमारे बच्चों और पोते-पोतियों के पाप भी पहले से ही यीशु के ऊपर डाल दिया गया है। जब उसने बपतिस्मा लिया तब सारे पापों को उसके ऊपर डाल दिया गया।
क्या अब भी इस दुनिया में पाप हैं? नहीं, एक पाप भी नहीं बचा। दुनिया में कोई पाप नहीं बचा है क्योंकि हम उस खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करते हैं जो यीशु मसीह ने हमें दिया है। क्या आपके दिल में पाप है? नहीं। आमीन! हम उस खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करते हैं जो कहता है कि यीशु मसीह ने हमें हमारे सारे पापों से बचाया है। हमारे लिए यह अद्भुत कार्य करने के लिए हम सर्वसामर्थी यीशु की स्तुति करते हैं।
यीशु मसीह ने हमारे खोए हुए जीवन को पुन: स्थापित किया। अब हम खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करते हैं ताकि हम परमेश्वर के साथ रह सकें। यहां तक कि वे लोग जो परमेश्वर के दुश्मन थे - पापियों के पास जिनके पास अंधेरे जंगलों में छिपने के अलावा और कोई चारा नहीं था - अब खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करके अपने पापों से बच सकते है।
खुबसूरत सुसमाचार हमें सिखाता है कि जब यीशु ने यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लिया, क्रूस पर चढ़ा, और पुनरुत्थित हुआ तब प्रभु ने हमारे सारे पापों को धो के साफ़ किया। हम यीशु के सुसमाचार पर विश्वास करके परमेश्वर की पवित्र संतान बन गए है। यीशु ने हमारे पापों की भेंट के रूप में अपने स्वयं के शरीर का बलिदान दिया। वह, सर्वसामर्थी परमेश्वर का पुत्र, जिसने कभी इस दुनिया में एक भी पाप नहीं किया, उसने जगत के सारे पापों को दूर कर दिया और जो कोई भी उस पर विश्वास करता है उसे बचाया। यशायाह ५३:५ कहता है, “परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया”।
यीशु ने जगत के सारे पापों को ले लिया, जिसमें मूल पाप और वास्तविक पाप दोनों शामिल थे और एक भी अपराध नहीं छोड़ा। उसने क्रूस पर अपनी मृत्यु के साथ पाप की मजदूरी का भुगतान किया और इस तरह हमें हमारे सारे पापों से बचाया। यीशु ने इस खूबसूरत सुसमाचार के द्वारा जगत के सारे पापों को धोया। हमने यीशु के माध्यम से नया जीवन पाया है। जो लोग इस खूबसूरत सुसमाचार को मानते हैं वे अब आत्मा में मरे हुए नहीं हैं। अब हमारे पास नया और अनन्त जीवन है, क्योंकि यीशु ने हमारे पाप की सारी मजदूरी चुका दी है। हम यीशु मसीह के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके परमेश्वर की संतान बन गए हैं।
क्या आप विश्वास करते हैं कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है? क्या आप यह भी विश्वास करते हैं कि वह आपका उद्धारकर्ता है? मैं करता हूँ। यीशु मसीह हमारे लिए जीवन है। हमने उसके द्वारा नया जीवन पाया है। हम अपने पापों और अपराधो के कारण मरने के लिए नियोजित थे। लेकिन यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर मृत्यु के द्वारा पाप की मजदूरी का भुगतान किया। उसने हमें अपनी पाप की गुलामी से, मृत्यु के सामर्थ्य से, और शैतान के बंधनों से छुड़ाया।
प्रभु वह परमेश्वर है जिसने हमें हमारे पापों से बचाया और यीशु में विश्वास करने वाले सभी लोगों का उद्धारकर्ता बन गया। जब हम इब्रानियों १०:१०-१२, १४ और १८ देखते है, तो हम देख सकते हैं कि प्रभु ने हमें पवित्र किया ताकि पापों के प्रायश्चित को प्राप्त करने की आवश्यकता न रहे। हम यीशु पर विश्वास करके परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। हमें अपने पापों और अपराधो के लिए मरना तय था, लेकिन अब हम स्वर्ग में प्रवेश करने और यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करके अनंत जीवन का आनंद लेने में सक्षम हैं।
“अच्छा चरवाहा मैं हूँ, अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है” (यूहन्ना १०:११)। हमारे प्रभु इस संसार में आए ताकि अपने बपतिस्मा, क्रूस पर अपनी मृत्यु और अपने पुनरुत्थान के द्वारा हमें जगत के पापों से बचा सके। वह उन लोगों को भी पवित्र आत्मा का अंतर्निवास देता है, जिन्होंने इस सच्चाई पर विश्वास करके अपने पापों का प्रायश्चित पाया है। धन्यवाद, प्रभु। आपका सुसमाचार खुबसूरत सुसमाचार है, जो विश्वासियों को पवित्र आत्मा का अंतर्निवास दे सकता है। हाल्लेलूया! मैं प्रभु की स्तुति करता हूँ।