उपदेश

विषय ८ : पवित्र आत्मा

[8-12] (तीतुस ३:१-८) आप के जीवन को पवित्र आत्मा की भरपूरी में जीना

(तीतुस ३:१-८)
“लोगों को सुधि दिला कि हाकिमों और अधिकारियों के अधीन रहें, और उनकी आज्ञा मानें, और हर एक अच्छे काम के लिये तैयार रहें, किसी को बदनाम न करें, झगड़ालू न हों; पर कोमल स्वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। क्योंकि हम भी पहले निर्बुद्धि, और आज्ञा न माननेवाले, और भ्रम में पड़े हुए और विभिन्न प्रकार की अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन व्यतीत करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे। पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की कृपा और मनुष्यों पर उसका प्रेम प्रगट हुआ, तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार नए जन्म के स्‍नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। यह बात सच है, और मैं चाहता हूँ कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्होंने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें। ये बातें भली और मनुष्यों के लाभ की हैं”।

हम कैसे पवित्र आत्मा की भरपूरी का 
जीवन जी सकते है?
हमें पर्वेश्वर की इच्छा को जानना चाहिए और उसके 
अनुसार सुसमाचार का प्रचार कारण चाहिए।
 
जो लोग यीशु में विश्वास करते है और पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाया है उन्हें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए। मसीहियों के लिए, पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन वह है जिसकी परमेश्वर माँग करता है। हमें उसके आदेश का पालन करना चाहिए। तो फिर हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन कैसे जी सकते है? हमें पौलुस इसके बारे में क्या कहता है उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। 
 

पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए क्या जरुरी है?
 
तीतुस ३:१ में पौलुस कहता है, “लोगों को सुधि दिला की हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उनकी आज्ञा मानें, और हर एक अच्छे काम के लिये तैयार रहे”। सबसे पहले, वह हमें हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रखता है, ताकि हम उनकी आज्ञा मानें और अच्छे कम के लिए तैयार रहे। उसका मतलब यह था की हम यदि हम जगत के नियमोंका पालन नहीं करते तो हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन नहीं जी सकते। निसन्देह, यदि जगत के अधियारियों और नियमो सत्य के विरोध में है, तो हमें उसे नहीं मानना है। लेकिन यदि नियम हमारे विश्वास के विरोध में नहीं है तो, हमें शांति से सुसमाचार की सेवा करने के लिए उसे मानना चाहिए।
हम वे है जिन्होंने पवित्र आत्मा का अंतर्निवास प्राप्त किया है। यदि हम सांसारिक नियमो को तोड़ते है तो हम कैसे पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने में सक्षम बन सकते है? इसलिए, पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, हमें संसार के नियम का अनुसरण करना चाहिए। जिन्होंने पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाया है वे समाज के नियमों का पालन करते है। हम केवल तभी परमेश्वर के साथ चल सकते है जब हम संसार के नियमों का पालन करे।
मान लो की हममें से किसी एक ने कलीसिया में जाते समय रास्ते में कोई अपराध किया। तो क्या वो चैन से प्रभु की सेवकाई कर पाएगा? यदि वह नियम के बहार जीवन जियेगा तो कैसे इस पृथ्वी पर रहकर प्रभु की शिक्षा के अनुसार जीवन जी पाएगा? हमें आत्मा चलते हुए सामजिक्म नियमों को तोड़ना नहीं चाहिए। नियम तोड़ने से कुछ अच्छा नहीं होता। हमें नियमों का पालन करने के द्वारा शान्ति बनाए रखना है। हमें सुसमाचार का प्रचार करते वक्त उत्तम जीवन जीने की आशा रखनी है। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, संतों के लिए यह यह बुध्धिमानी होगी की वे सामाजिक नियमों को थामे रहे। 
 

हमें हमारे हृदय में नम्रता रखनी है
 
पौलुस ने कहा, “किसी को बदनाम न करें, झगड़ालू न हों; पर कोमल स्वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें”। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, हमें किसी को बदनाम नहीं करना है, झगड़ालू नहीं होना है, पर कोमल स्वभाव के बनना है, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहना है।
नया जन्म पाए हुए लोगों के हृदय में, नम्रता, संयम और दया है। यह पवित्र आत्मा के द्वारा सम्भव हुआ क्योंकि वह हमारे अन्दर रहता है। पौलुस ने हमें कहा है की एक दुसरे के साथ झगड़ा करके सुसमाचार को नष्ट नहीं करना है। निसन्देह, हमें लड़ना है जब सामाजिक नियम सुसमाचार के विरोध में हो। लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो, हमें शान्ति से रहना है। हमें ऐसा कुछ करना है की लोग हमारे बारे में सोचे, “भले ही कुछ समय के लिए वह शेर की तरह निडर होता है, लेकिन वास्तव में वह कबूतर की नाई शांतिपूर्ण है। मसीहियत पर उसके विश्वास ने उसे विनम्र और समझदार व्यक्ति बनाया है।
देह की वासनाओं में कोई दया या नम्रता नहीं होता। लेकिन पवित्र आत्मा के अंतर्निवास के द्वारा और प्रभु के द्वारा जिसने हमें हमारे पापों से बचाया है, हम दूसरो के प्रति नम्र बन सकते है। जिसने मेरे साथ बहुत बुरा किया है उसे माफ़ करदेना ही सच्ची “माफ़ी” है और हृदय की गहेराई की नम्रता से उसके साथ व्यवहार करना सच्ची “नम्रता” है। जब किसी के लिए मेरे दिल में कड़वाहट हो और में नम्र होने का ढोंग करू तो यह मेरे लिए नम्रता नहीं है। नम्रता और माफ़ी से भरा हृदय नया जन पाए हुए मसीहियों के लिए आतंरिक नैतिकता है।
जब लोग हमारे साथ गलत करते है तब भी हमारे अन्दर भलाई होनी चाहिए। जब तक वे सुसमाचार के खिलाफ में खड़े न हो तब तक हमें सब के साथ नम्र रहना है। लेकिन यदि वे ऐसा करते है, तब हमें भलाई के प्रकाश को सत्य के प्रकाश में बदलना है। भलाई केवल परमेश्वर के वचनों में पाई जाति है, इसलिए जो लोग विरोध करते है, परमेश्वर के वचन को बदनाम करते है वे भलाई के लायक नहीं है।
परमेश्वर विरोध करनेवालों को माफ़ नहीं करते लेकिन उन्हें कीमत चुकाने के लिए कहते है। परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, “जो तुझे आशीष दे, उन्हें में आशीष दूँगा, और जो तुझे कोसे, उसे में शाप दूँगा” (उत्पत्ति १२:३)। जो लोग सुसमाचार का विरोध करते है उनके पास उद्धार पाने का कोई रास्ता नहीं है। वे उस विनाश से बच नहीं पाएंगे जो न केवल उनके जीवनों को बरबाद कर देगा लेकिन उनकी तीसरी पीढ़ी तक सब को नष्ट कर देगा।
क्यों हमें सहनशील और मनर बनना है? जैसे तीतुस ३:३ में लिखा है, “क्योंकि हम भी पहले निर्बुद्धि, और आज्ञा न माननेवाले, और भ्रम में पड़े हुए और विभिन्न प्रकार की अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन व्यतीत करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे”। हम नया जन्म पाने से पहले इन लोगों के जैसे ही थे। इस लिए हमें सहन करना है और उन्हें माफ़ करना है क्योंकि हम भी पहले उनकी तरह थे।
तीतुस ३:४-८ में लिखा है, “पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्‍वर की कृपा और मनुष्यों पर उसका प्रेम प्रगट हुआ, तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार नए जन्म के स्‍नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। यह बात सच है, और मैं चाहता हूँ कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्होंने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें। ये बातें भली और मनुष्यों के लाभ की हैं”।
बाइबल के अनुसार, परमेश्वर ने हमें हमारे पापों से इसलिए नहीं बचाया क्योंकि हम भले काम करते थे। उसने हमें नया जन्म पाने की आशीष दी क्योंकि वह हमसे प्रेम करता था और उसे हम पर दया आई। दुसरे शब्दों में, यीशु मसीह इस जगत में आये, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, पुनरुत्थित हुए, और ऐसे हमारे सारे पाप धोए। मृतकों में से फिरसे ज़िन्दा होने के द्वारा, जगत की सारी अपूर्ण चीजे सम्पूर्ण हो गई।
परमेश्वर ने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हमें पवित्र आत्मा से आशीषित किया है। यीशु मसीह ने जगत के सारे पापों को उठाने के लिए यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मर गए जिससे की हमारे सारे पाप माफ़ हो सके। हमें उद्धार दिया गया और धर्मी बने।
बाइबल यह भी कहती है, “जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। इसका मतलब है की हम, परमेश्वर के वारिस, वे है जो उसकी सारी सम्पति और महिमा के वारिस है। इस तरह का आशीषित जीवन जीने के लिए, हमें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए। आपको पानी और आत्मा के सुसमाचार पे विश्वास करना चाहिए, अपने पापों से माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए और दूसरो को सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए।
इसलिए, हमारे सारे पापों से माफ़ी पाने के बाद, हमें दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना चाहिए, हमें जगत के नियमों का पालन करना चाहिए और दूसरों को सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए जो परमेश्वर को खोज रहे है। और हमें उन लोगों को माफ़ करना चाहिए जो हमारे साथ बुरा बर्ताव करते है और उनके साथ भलाई और नम्रता से बर्ताव करना चाहिए जिससे की वे खुबसूरत सुसमाचार के प्रचार में बाधा न बने। “ये बातें भली और मनुष्यों के लाभ की हैं”। यदि आप पवित्र आत्मा की भारपोरी की इच्छा रखते है, तो पौलुस ने हमें जो कहा है उसे आपको याद रखना है। यह शायद कुछ ख़ास है ऐसा नहीं लगता, लेकिन यह बहुत ही महत्वपूर्ण वचन है।
हालाँकि हम इस संसार में जी रहे है, तो यदि हम इस संसार के नियमों की अवज्ञा करके के द्वारा दूसरो का विरोध करके पवित्र आत्मा से नहीं भर सकते। इसलिए जब तक नियम परमेश्वर के विरोध में न हो तब तक हमें उसे मानने चाहिए। हमें इस संसार के नियमों का पालन करना चाहिए। यदि हमारे अन्दर विश्वास है, फिर भी यदि हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहते है तो नियमों का पालन करना हमारे लिए उत्तम विकल्प है। हमारे लिए भलाई के काम करनेका अर्थ है की, हमें संसार के नियमों का पालन करना और हमारे पड़ोसी के साथ शान्ति से रहना।

 
क्या अप पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहते है?
 
इफिसियों ५:८-११ कहता है, “क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, अत: ज्योति की सन्तान के समान चलो (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धार्मिकता, और सत्य है), 1और यह परखो कि प्रभु को क्या भाता है। 1अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी न हो, वरन् उन पर उलाहना दो”। यह पद्यांश हमें ज्योति के संतान के समान चलने और आत्मा के फल लाने के बारे में कहता है।
इफिसियों ५:१२-१३ कहता है, “क्योंकि उनके गुप्‍त कामों की चर्चा भी लज्जा की बात है। पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है वह ज्योति है”। पौलुस यहाँ कहता है की जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते है। यदि धर्मी व्यक्ति धार्मिक रीति से जीवन नहीं जी सकता, तो वह परमेश्वर के द्वारा प्रगट होगा। जब कोई व्यक्ति अन्धकार के कार्य करते हुए पकडे जाता है, फिर ज्योति के द्वारा फटकार मिलती है तो क्या होता है? उसकी गलती मान लेने के बाद, जब वो दूसरी बार परमेश्वर के सामने खड़ा होता है तो उसका हृदय प्रकाशित हो जाता है। “पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है वह ज्योति है”। ज्योति के सामने प्रगट होना अच्छा है। तब हम अपने अपराधों को स्वीकार करते है और परमेश्वर के पास वापस लौटते है।
यदि हम सच में पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहते है, तो हमारे हृदय में दया होना आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति के दिल में पाप नहीं है, उसका यह मतलब नहीं है की उसे दयालु बनने की जरुरत नहीं है। हमें हमारे हृदय में भलाई और दया रखकर जीना चाहिए। हमें बुध्धि से प्रचार करना चाहिए और उनके लिए प्रार्थना करनी चाहिए जो पानी और आत्मा के सुसमाचार को नहीं जानते जिससे की वे इसको समझे और उनके पाप माफ़ किए जाए। और हमें दूसरो को हानि भी नहीं पहुँचानी चाहिए। हमें सुसमाचार के लिए खाना है, आराम करना है जीवन जीना है और दूसरो की सेवा भी करनी है।
पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, हमें समय के महत्त्व के बारे में सोचना है और मनुष्य की बुध्धि की तरह खुबसूरत सुसमाचार का प्रचार करना है। जब हम संसार से प्रेम करते है, तब हम अन्धकार के सदृश बन जाते है और परमेश्वर के कार्य को करने से चूक जाते है। इसलिए, हमें अपनी आँखे प्रभु पर लगानी चाहिए और वाही करना चाहिए जो वह चाहता है। परमेश्वर ने हमें जो उद्धार दिया है उस पर विश्वास करते, हमें हर समय चौकन्ना भी रहना है। आत्मा की बुध्धि से भरा हुआ व्यक्ति दुनिया अन्धकार से भर जाए उसके पहले खुबसूरत सुसमाचार प्रचार करने के लिए अपने आप को समर्पित करता है।
 

प्रभु की इच्छा को समझो 
 
हमें वह खोजना चाहिए जो परमेश्वर को प्रसन्न करता हो। हमें यह सीखना ही चाहिए की वह अपनी कलीसिया और वचनों के द्वारा हमसे क्या करवाना चाहता है। हमें यह जानना चाहिए की हम उसे प्रसन्न करने के लिए क्या कर सकते है और हमारे लिए उसकी इच्छा को ढूँढना चाहिए।
जिन लोगों के पाप माफ़ किए गए है वे वह लोग है जिन्होंने नया जन्म पाया है और नया जन्म पाए हुए लोग वे लोग है जिनके पास पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है। जिन लोगों के अन्दर पवित्र आत्मा है वे सच्चे पवित्र और परमेश्वर की सन्तान है। उन्हें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए। यह सारे संतो का कर्तव्य है। हमें दुसरे लोगों की जरुरत को नज़र अंदाज करके खुद पर ही अपनी योग्यता और ऊर्जा को बरबाद नहीं करना चाहिए। हमें समय के साथ बह कर परमेश्वर के कार्य में बाधारूप नहीं बनना चाहिए।
यदि हम पवित्र किए गए है और परमेश्वर के प्रेम के द्वारा नया जन्म पाए है, तो उसके कार्य को निरंतर करने के लिए हमें अच्छा व्यक्ति बनाना चाहिए। यदि हम उसके ऊपर विश्वास करके उसकी संतान बने है, तो यह हमारे लिए अच्छा है की हम भलाई के लोग बने।
परमेश्वर की संतानों का शरीर सम्पूर्णता से बहुत दूर है लेकिन फिर भी यह परमेश्वर को प्रसन्न करता है; यदि हम परमेश्वर की इच्छा की चिंता करे और अच्छे काम करे। लेकिन जो नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति है यदि वह केवल खुद के लिए जीवन जीता है तो वह दूसरीं के लिए बुराई करता है। “दाखरस से मतवाले मत बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ” (इफिसियों ५:१८) मतलब है की हमें देह की वासनाओं से मतवाले नहीं होना है लेकिन भलाई के कार्यों को करना है।
पौलुस इफिसियों ५:१९-२१ में कहता है, “और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने-अपने मन में प्रभु के सामने गाते और कीर्तन करते रहो। और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्‍वर पिता का धन्यवाद करते रहो। मसीह के भय से एक दूसरे के अधीन रहो”। यदि हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहते है, तो हमें उद्धार के सुसमाचार पर विश्वास करना है और उसका प्रचार भी कारण है और परमेश्वर ने हमारे लिए जो किया उसे प्रगट करना है।
जब भी हम प्रार्थना करते है तब परमेश्वर हमें आशीष देता है और हम एक सुर और आवाज में उनकी स्तुति के गीत गाए इस लिए परमेश्वर ने उसे भजन संहिता और भजन और आत्मिक गीतों में अभिलिखित किया है। हमें उसकी सराहना, धन्यवाद और स्तुति करनी चाहिए। जब हम उनके लिए प्रार्थना करते है जिन लोगों ने उद्धार नहीं पाया और एक दुसरे के लिए प्रार्थना करते है तब हम पवित्र आत्मा की भरपूरी के जीवन की आशीष पा सकते है। हमें अपने हृदय की गहराई से परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए और यीशु मसीह को आदर देना चाहिए, जिसने हमें बचाया है। हमारे हृदय में इस विचार के साथ, हम अपने गलत कार्यो को स्वीकार करने के लिए सक्षम बनते है, हमारे पापों को साफ़ करने के लिए हम उसकी सराहना करते है और उसकी आज्ञा का पालन करते है। इसी का मतलब पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना है।
 

हमें अपने जीवन भर खुबसूरत सुसमाचार की सेवा करनी चाहिए
 
हमें अच्छे कार्यो की योजना बनानी चाहिए और खुबसूरत सुसमाचार की महिमा के लिए उसे करना चाहिए। परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़ के, हमें साथ मिलाकर प्रार्थना करनी चाहिए और प्रत्येक मनुष्य की आत्मा को बचाने के लिए परमेश्वर को पुकारना चाहिए। अभी भी ऐसे कई लोग है जिन्होंने नया जन्म नहीं पाया है क्योंकि परमेश्वर को खोजने के बावजूद भी उन्होंने खुबसूरत सुसमाचार को नहीं जानते। हमें इन लोगों के लिए प्रार्थना करनी चाहिए और कहना चाहिए, “परमेश्वर, कृपया करके उन्हें भी बचाए”। और हमें स्वार्थी चीजो के पीछे नहीं भागना है लेकिन खोए हुओ को बचने के लिए सुसमाचार की सेवा में हमारी सम्पति को लगाना चाहिए। दूसरो की आत्मा के लिए और परमेश्वर के राज्य की बढ़ोतरी के लिए जीवन जीना अच्छा कार्य कारण है।
इस तरह के कार्यो को करने का मतलब है की पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने का मतलब यह नहीं है की अन्य भाषा में बोलना और चमत्कार करना, लेकिन परमेश्वर को कैसे प्रसन्न करे यह सीखना है। इसका मतलब है परमेश्वर ने हमें जो उद्धार दिया उस पर विश्वास करना, कविता और भजन से परमेश्वर की स्तुति और महिमा करना। हमारे पूरे दिल से परमेश्वर को धन्यवाद करना, स्तुति और महिमा करना, और हमारे शरीर रुपी धार्मिक पात्र से उसकी सेवा करना ही परमेश्वर की इच्छा है। उसके आदेश का पालन करने का मतलब है की पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना।
पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, हमें एक दूसरो की आज्ञा का पालन करना है। यदि कोई हमें सलाह दे रहा है, तो हमें सुनना चाहिए की वह क्या कह रहा है। इसी तरह, यदि मैं उसे सलाह दे रहा हूँ, तो भले ही वह मेरे साथ सहमत न हो लेकिन उसे सुनना चाहिए। इसी तरह, हमें एक दुसरे की आज्ञा मानकर और परमेश्वर के कार्य को करते हुए पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए।
 

आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने का मतलब है यीशु की महिमा करना
 
पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने का मतलब है की यीशु मसीह की आज्ञा का पालन करना। आइए इफिसियों ६:१०-१३ पढ़ने के द्वारा पता लगाए की इसका मतलब क्या है। “इसलिये प्रभु में और उसकी शक्‍ति के प्रभाव में बलवन्त बनो। परमेश्‍वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम शैतान की युक्‍तियों के सामने खड़े रह सको। क्योंकि हमारा यह मल्‍लयुद्ध लहू और मांस से नहीं परन्तु प्रधानों से, और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। इसलिये परमेश्‍वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम बुरे दिन में सामना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको”।
पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने का क्या मतलब है? इसका मतलब है की प्रभु में बलवान बनाना और उसकी सामर्थ में विश्वास होना। इसका मतलब है की हमारी खुद की नहीं लेकिन पवित्र आत्मा की समर्थ के द्वारा जीवन जीना जो हमारे अन्दर निवास करता है। इसके अलावा, इसका मतलब है प्रार्थना का जीवन जीना। प्रार्थना के द्वारा, हम भिन्न योग्यताओं और परमेश्वर की आशीषों को पाकर धार्मिक जीवन जी सकते है। इस तरह के जीवन के जीने का मतलब है परमेश्वर के हथियार को पहिन लेना। हम इतने कमज़ोर है की यदि हम उसके साथ चलने की, उसकी सेवा करने की और उसके आज्ञा का पालन करने की कोशिश करे तो हम तब तक पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन नहीं जी सकते जब तक हम उसके वचनों को थामे न रहे।
हमारे आत्मिक सामर्थ को बढाने के लिए परमेश्वर के वचनों में विश्वास होना महत्वपूर्ण है। यदि हमारे अन्दर विश्वास है, तो हमें यह बोलने के द्वारा परमेश्वर के हथियारों को पहिनना चाहिए, “मुझे यकीन है की यह परमेश्वर के वचन में लिखा है वैसा ही है”। यह विश्वास है जो हमें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने में सक्षम बनाता है।
क्या आपमे से कोई भी इस तरह का जीवन जीने में समस्या का सामना कर रहा है? तो फिर पवित्रशास्त्र के वचनों को याद रखे और परमेश्वर के हथियारों से सज्ज हो जाइए। परमेश्वर हमें उनके सारे हथियारों से सज्ज होने के लिए कहता है। अपने हृदय की गहराई में वचनों को रखने के द्वारा, आप परमेश्वर के हथियारों से सज्ज होने के मतलब को समझ पाएंगे। हमारे वातावरण और लोग क्या कह रहे है इस बातकी परवाह किए बिना हमें परमेश्वर के वचनों को थामे रहना है। इस तरह, हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी सकते है।
हम इस विश्वास को कहाँ पा सकते है? प्रकाशितवाक्य ३:२२ कहता है, “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है”। पवित्र आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है यह हमें सुनना चाहिए। दुसरे शब्दों में, केवल परमेश्वर के सेवक ही परमेश्वर के वचनों को सुन सकते है और पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी सकते है। पवित्र आत्मा किसके द्वारा बात करता है? परमेश्वर अपनी कलीसिया में अपने सेवकों के द्वारा सारे संतो और दुनिया के सरे लोगों से बात करता है।
ये यह कहता है की, आपको विश्वास करना चाहिए की कलीसिया की शिक्षा पेमेश्वर के वचनों पर आधारित है। आपको मन में यह विश्वास रखके कलीसिया की शिक्षा का स्वीकार करना है। यदि पवित्र आत्मा प्रचारक के अन्दर नहीं रहता है, तो यह संभवित है की वह खुद की बाते शिखा सकता है। जिस प्रचारक के अन्दर पवित्र आत्मा का अंतरनिवास है वह पवित्र आत्मा के नियंत्रण में परमेश्वर के वचन का प्रचार करता है। यदि प्रचारक ऐसा नहीं करता और बाइबल के बहार के वचनों का प्रचार करता है तो पवित्र आत्मा उसे रोकेगा क्योंकि वह उसके हृदय अन्दर बसता है।
पवित्र आत्मा परमेश्वर है। परमेश्वर के सेवक का अधिकार महान है क्योंकि परमेश्वर उसके अन्दर निवास करता है। नए नियम में, यीशु मसीह ने पतरस से कहा “मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा” (मत्ती १६:१९)। स्वर्ग की कुंजियाँ पानी और आत्मा का सुसमाचार है। दुसरे शब्दों में, यह सुसमाचार स्वर्ग में प्रवेश करने की कुंजियाँ है। परमेश्वर ने परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने का अधिकार केवल पतरस को नहीं दिया लेकिन परमेश्वर के सारे सेवकों और संतों को दिया है, जब तक वे नया जन्म और पवित्र आत्मा का अंतरनिवास नहीं पा लेते।
पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीने के लिए, हमें परमेश्वर के सारे हथियारों से सज्ज होना पडेगा। यदि हमारे अन्दर विश्वास नहीं है, तो हमें कलीसिया के अधिकार और परमेश्वर के सेवकों के द्वारा हर दिन कलीसिया की शिक्षाओं को मानना होगा। यदि आपने आज जो उपदेश सुना है वो आपके कोई काम का नहीं होगा आपके जीवन के साथ सीधा जुड़ा हुआ नहीं होगा, फिर भी आप उसे सुनी और अपने हृदय में रखे। आपके हरदिन के लिए जरुरी वचनों को बाइबल में खोजिए। उसको थामे रहे। इस तरह, आप विश्वास के व्यक्ति बन जाएंगे। तब आप पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी पाएंगे, परमेश्वर के साथ चल पाएंगे, और इस संसार की अन्धकार की सत्ता के साथ युध्ध को जित पाएंगे।
आप शायद परेशान हो रहे होंगे क्योंकि आपको कहा गया था की संसार के नियमों का पालन करे लेकिन अब मैं कहता हूँ की आपको संसार की अन्धकार की सत्ता के सामने युध्ध करना है। रोम के समय में, रोम का सम्राट खुद को परमेश्वर कहता था और नियम के मुताबिक़ सारे लोगों को उसे परमेश्वर की पूजना था। लेकिन यह कुछ ऐसा है जो मसीही लोग नहीं कर सकते थे क्योंकि वह परमेश्वर के वचन के खिलाफ था। इसलिए उस समय के मसीहियों के पास रोम के सम्राट के साथ युध्ध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, जिसके सामने लोग झुकते थे कैसे की वह परमेश्वर हो।
शैतान से युध्ध जितने के लिए, हमें परमेश्वर पर विश्वास करना है और उसे थामे रहना है। यदि हम परमेश्वर के वचन के अनुसार जिए, तो हम उसकी आशीषों को पा सकते है और शैतान को हरा सकते है। यदि हम बचाए हुए है फिर भी, यदि हम परमेश्वर के वचनों को थामे नहीं रखेंगे तो हम शैतान से युध्ध को हर जाएंगे। परमेश्वर हमें चेतावनी देता है, “तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (१ पतरस ५:८)। जो व्यक्ति परमेश्वर के वचन में विश्वास नहीं करता उस पर शैतान आसानी से हमला कर सकता है।
यदि वह परमेश्वर के वचन से नहीं होता तो यीशु भी शैतान से युध्द नहीं कर पाता। “लिखा है, मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा” (मत्ती ४:४)। उसने जो लिखा है उस पर विश्वास करके शैतान को भगाया। और हमारे बारे में क्या? हमारे अन्दर बुध्धि की कमी है और यीशु से अपनी तुलना नहीं कर सकते। इसलिए, हमें परमेश्वर के वचन में विश्वास करना है और उसे मजबूती से थामे रहना है।
हमें केवल यह नहीं कहना है की, “मैं सोचता हूँ की वचन सही है लेकिन में पूरी तरह से उस पर विश्वास नहीं कर सकता”। वचन को थाम कर रखना है। “मैं विश्वास करता हूँ की जैसे लिखा है वैसा ही होगा”। यह सच्चा विश्वास है और हमें परमेश्वर के हथियारों से सज्ज होने में सक्षम बनाता है। जो लोग कहते है की, “जैसे हमारे प्रभु ने कहा है वैसे ही पूरा होगा” वह आशीषित होगा। यदि व्यक्ति परमेश्वर के वचनों को थामे रहता है और उस पर निर्भर रहता है, तो उसके विश्वास के अनुसार सब अच्छा होगा। यदि शैतान हमें परिक्षण में डालने की कोशिश करे, तो वह निश्चय ही दूर भाग जाएगा यदि हम कहे की, “मैं परमेश्वर के वचन में विश्वास करता हूँ। मैं उसके वचन में विश्वास करता हूँ यह सही उत्तर है”। शैतान के खिलाफ युध्ध जितने का यही रास्ता है।
 

हमें परमेश्वर के वचन को थामे रखना है
 
“इसलिये परमेश्‍वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम बुरे दिन में सामना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको। इसलिये सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहिन कर, और पाँवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर; और इन सब के साथ विश्‍वास की ढाल लेकर स्थिर रहो जिससे तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार, जो परमेश्‍वर का वचन है, ले लो” (इफिसियों ६:१३-१७)। 
इस परिच्छेद में, “इसलिए सत्य से अपनी कमर कसकर,” परमेश्वर का वचन व्यक्ति के कमर में बंधे पट्टे से तुलना करता है। इसका मतलब है की हमें परमेश्वर के वचन से हमारे मन की सुरक्षा करनी चाहिए। वह हमें सत्य के वचन का अनुसरण करने के लिए कहता है जिससे हम परमेश्वर के साथ एक मन के हो सके। लेकिन जैसे यह पट्टा शरीर के साथ मजबूती से बंधा हुआ होता है, वैसे ही हमें खुद को परमेश्वर के वचन के साथ मजबूती से जोड़े रखना है। जब हम परमेश्वर के साथ एक मन के होते है, तब हम स्वाभाविक रूप से विश्वास करने और कहने के सक्षम बनते है की, “मैं विश्वास करता हूँ की सब कुछ सही होगा, मैं विश्वास करता हूँ की जैसे परमेश्वर ने कहा है वैसे ही पूरा होगा”।
अगला, हमें धार्मिकता की झिलम पहननी है। हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार की झिलम पहननी चाहिए जो कहती है की परमेश्वर ने हमें बचाया है। हमें सत्य से अपनी कमर कसनी है, और धार्मिकता की झिलम पहनिने है। हमें मूल्यवान मणि की झिलम पहननी है। हमें उसे इस विश्वास के साथ पहिनानी है की परमेश्वर ने हमारे सारे पाप माफ़ कर दिए है। हमें अपने पूरे हृदय से परमेश्वर के वचन में विश्वास करना है। हमें शान्ति देनेवाले उद्धार के सुसमाचार का प्रचार भी करना है।
ऊपर के सारे वचन को थामकर, हम पाँव में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन सकते है, और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार कर सकते है जो सारे लोगों को परमेश्वर की शान्ति देता है। यदि हम अपने पापों से बचाए गए है, तो हम अपने मूँह से अपने विश्वास का अंगीकार करेंगे। और हर समय हमारे पाप और बुराई प्रगट होंगे, हमें उसे तुरंत ही परमेश्वर ने हमारे सारे पापों को मिटा दिया है इस सत्य के द्वारा दूर करना है। उसने ऐसा यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू के द्वारा किया। हमें परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए महिमा का जीवन जीना है। हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार प्रचार करना है, जो हर व्यक्ति को शान्ति देता है जिन्हें अभी तक पापों से छूटकारा नहीं मिला।
सबसे ऊपर, हमें दुष्टके सामने विश्वास की ढाल से लड़ना है। जब शैतान हमला करता है, तब हमें उसे एक हाथ में सत्य की ढाल से और दुसरे हाथ में आत्मा की तलवार से उसे खदेड़ना है।
फिर हमें उद्धार का टोप पहनना है। हमें यह कहते हुए उद्धार के वचनों का स्वीकार करना है की, “मैं पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा मेरे सारे पापों से बचाया गया हूँ। परमेश्वर ने इस रीति से मेरे सारे पापों को माफ़ किया है”। हमें हमारे दिमाग में सत्य को पहिचानना है। हमें परमेश्वर के वचन, उद्धार का टोप और आत्मा की तलवार को शैतान के सामने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना है।
यदि शैतान हम पर हमला करता है, तब हमें तलवार निकालकर उसे मार गिराना है। “परमेश्वर ने यह कहा है! और मैंने उस पर विश्वास किया!” हम परमेश्वर के वचन पर विश्वास के द्वारा शैतान को भगा सकते है। यदि हम परमेश्वर के वचन पर विश्वास करे और आत्मिक तलवार से सज्ज हो जाए, तब शैतान भाग जाएगा और चिल्लाएगा “आह! यह दर्द करता है”। यदि हम केवल परमेश्वर के वचन पर विश्वास करे तो शैतान के किसी भी प्रकार के हमले का सामना कर सकते है और उसे हरा सकते है।
आपको ऐसा धार्मिक जीवन जीवन जीना चाहिए और कबूल करना चाहिए, “मेरी देह सम्पूर्णता से काफी दूर है, लेकिन मैं परमेश्वर का जन हूँ जिसने छूटकारा पाया है। मैं विश्वास से परमेश्वर ने जो वचन मुझे कहे है उसे थाम कर जीवन जीता हूँ”। यदि हमारे अन्दर इस तरह का विश्वास है तो, हम जब भी वह हमें परेशान करने या हमारे विश्वासयोग्य जीवन में बाधा बनने आए तब हर समय उसे सत्य की तलवार से हरा सकते है। यदि हम सांसारिक शब्दों से शैतान पर हमला करेंगे तो उसे कोई फर्क नहीं पडेगा। इसलिए, हमें यह कहने के द्वारा उसके साथ युध्ध करना चाहिए, “परमेश्वर यह कहता है”। तब शैतान परमेश्वर के अधिकार के सामने समर्पण कर देगा।
यदि हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहते है, तो हमें परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए की कलीसिया, सारे संत और परमेश्वर के सेवक अपने आप को सुसमाचार के प्रचार की सेवा में सोंप दे। इस प्रकार की प्रार्थना करने से, “मुझे साहस से सुसमाचार के रहस्य को प्रगट करने दे,” तब हम सुसमाचार की सेवकाई के उद्देश्य के जीवन को जी सकते है। यह पविय्र आत्मा की भरपूरी का जीवन है। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन सारे संतो के लिए महत्वपूर्ण है। यदि हम सच्चे संत बनना चाहते है, तो हमें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए। ऐसा जीवन जीना सारे संतो के लिए जरुरी है, जैसे की पापों की माफ़ी पाना सारी आत्माओं के लिए जरुरी है। यह परमेश्वर का आदेश है।
वे जो अपने पापों से बचाए गए है लेकिन यह नहीं जानते की विश्वासयोग्य जीवन कैसे जिए तो उन्हें पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए। यही परमेश्वर चाहता है। संतों को पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए, जो परमेश्वर की इच्छा है। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन संतो को भले कार्यो करने के द्वारा सुसमाचार का प्रचार करने के लिए प्रेरित करते है। वे सुसमाचार का प्रचार करने, परमेश्वर से प्रार्थना करने, और परमेश्वर के वचन में विश्वास करने और उसे थामे रहने को प्रेम करते है। हमें उद्धार का टोप पहिनकर और धार्मिकता की झिलम पहिनकर यह कहने के द्वारा शैतान को दूर भगाना है की, “मैं हर समय धर्मी हूँ”।
हालाँकि संतो के पास पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है, इसलिए वे आत्मा में चल सकते है और पवित्र आत्मा की सामर्थ पाने के लिए सक्षम है। वे विश्वास की प्रार्थना के द्वारा पाई हुई परमेश्वर की आशीष से भले कार्य करते है। और जब तक वे शैतान को हरा न दे और परमेश्वर के आगे खड़े न हो तब तक उन्हें आत्मा में चलना चाहिए। केवल नया जन्म पाए हुए मसीही लोग ही परमेश्वर के हथियारों को पहिन सकते है जो पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी सकते है।
“क्योंकि हमारा यह मल्‍लयुद्ध लहू और मांस से नहीं परन्तु प्रधानों से, और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं” (इफिसियों ६:१२)। नया जन्म पाए हुए लोगों का युध्ध लहू और मांस से नहीं है। हालाँकि, जिन्होंने पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाया है उन लोगों का युध्ध अन्धकार के हकीमों से और दुष्टता की आत्मिक सेना से है, जो हमें सुसमाचार की सेवा करने से रोकते है और हमें परेशान करते है।
जब हम प्रभु के सुसमाचार के लिए आत्मिक युध्ध करने बहार जाते है, तब हमें टोप और आत्मा के हथियार पहिनने चाहिए। यदि हम इस युध्ध में केवल साधारण कपड़े पहिनेंगे, तो हम घायल होंगे। इस लिए, हमें हथियार पहिनने चाहिए। हमें तलवार, ढाल और टोप की जरुरत है। युध्ध को जितने के लिए, हमें युध्ध से पहले पूरी रीति से तैयार होना है। हमें झिलम पहननी है, कमर को बांधना है और दोनों पाँवों में जूते पहिनने है। फिर एक हाथ में ढाल और दुसरे हाथ में तलवार लेकर, हम अपने दुश्मन को हरा सकते है। यह पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन है। 
 

हमें खुबसूरत सुसमाचार का पालन करना चाहिए 
 
पौलुस ने हमें कहा है की, “और पवित्र आत्मा के द्वारा जो हम में बसा हुआ है, इस अच्छी धरोहर की रखवाली कर” (१ तिमोथी १:१४)। अच्छी धरोहर क्या है? यह पानी और आत्मा का सुसमाचार है जिसने हमें हमारे पापों से बचाया है। तीतुस ३:५ में लिखा है, “उसने नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हमें बचाया है”। हमारे प्रभु ने हमारे सारे पापों को साफ़ कर दिया है जो हमने इस दुनिया में किए थे, क्रूस पर मरा और पुनरुत्थित हुआ। हमें इस खुबसूरत सुसमाचार का पालन करना है। हमें उद्धार का टोप और धार्मिकता की झिलम पहिनानी अहि और सत्य से हमारी कमर बाँधनी है। हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए।
इस तरह से अपने आप को हथियारों से सज्ज करने के बाद, हमें शैतान के खिलाफ युध्ध को जितना चाहिए। केवल तभी हम जित को पा सकते है और दूसरो के साथ बाँट सकते है। हमें प्रभु के राज्य में प्रवेश करने से पहले शैतान के खिलाफ कई आत्मिक युध्ध लड़ने है और पुरस्कारों को प्राप्त करना है, जो हमारी विरासत है। जितने ज्यादा युध्ध हम हमारे विरोधी के सामने जीतते है, उतना ही अगला युध्ध हमारे लिए आसान हो जाता है। हम सभी को उसके राज्य की समृध्धि के लिए प्रार्थना करना चाहिए। फिर हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन पा सकते है।
हमें हमारे पापों की माफ़ी से संतुष्ट नहीं होना चाहिए लेकिन पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जीना चाहिए।सुसमाचार और हमारे भले कार्यो के लिए, हमें परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करना चाहिए। हमें पवित्र आत्मा के चलाए चलना चाहिए और परमेश्वर के वचन का पालन और विश्वास करना चाहिए, जिससे हम शैतान के खिलाफ युध्ध को हर कर नष्ट न हो।
क्या आप मुझे समझ रहे है। केवल तभी हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन पा सकते है। मैं आशा करता हूँ की आप भी पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा करेंगे और परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहकर उसका पालन करेंगे। आइए हम सब आत्माओं को शैतान से बचने का कार्य करे। हम प्रभु के दुबारा आगमन तक पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी सकते है। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन प्राप्त करना हमारे लिए परमेश्वर ने दी हुई दूसरी आज्ञा है। उसका धन्यावाद करे। हमारे हृदय में पापों की माफ़ी होने की वजह से हम पवित्र आत्मा का अंतर्निवास प्राप्त कर सकते है। और यदि यह पवित्र आत्मा के अंतरनिवास के लिए नहीं है तो, मैं पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन शुरू नहीं कर सकता था। मैं पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन देने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ।
क्या आप विश्वास करते है की आप पवित्र आत्मा का अंतर्निवास प्राप्त कर सकते है? हम जिन्होंने अपने पापों की माफ़ी पाई है, उनके अन्दर पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है। वे जो पानी और आत्मा के सुसमाचार को नहीं जानते और विश्वास नहीं करते, उनके पास पवित्र आत्मा का अंतर्निवास नहीं है। जगत के सारे लोगों को नरक में डाल दिया जाएगा यदि उनके अन्दर पवित्र आत्मा का अंतर्निवास नहीं है।
हालाँकि हमारे हृदय में पाप नहीं है, इसलिए हमारे अन्दर पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है। और पवित्र आत्मा हमारे हृदय में रहते है, इसलिए हम पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जी सकते है। हम, जिनके पास पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है, उन्हें पवित्र आत्मा से भरपूर होने के लिए आत्मा की सारी इच्छाओं का पालन कारण चाहिए। जितना ज्यादा हम इच्छा का पालन करेंगे, उतना जी ज्यादा हमारा विश्वास एक हथियारों से सुसज्ज योध्धा जैसे मजबूत होता जाएगा। लेकिन हम आत्मा की आज्ञा मानने में विफल हो गए, तो यह हमारे लिए हथियारों को निचे रखने जैसा होगा।
आइए पवित्र आत्मा के वचनों के द्वारा वृध्धि पाए और विशवास के जन बने। जब हम्पवित्र आत्मा के वचन सुनते है तब हमारा विश्वास बढ़ता है क्योंकि परमेश्वर कहता है, “अंत: विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है” (रोमियों १०:१७)। इसलिए, यदि शैतान हम पर हमला करता है, तब भी हम इस वचनों में हमारे विश्वास की वजह से सुरक्षित है। शैतान उन लोगों पर हमला नहीं कर सकता जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा विश्वास की ढल लिए हो। विश्वासयोग्य व्यक्ति के पास अपने विश्वास के द्वारा शैतान के हमलों को नाश करने की समर्थ है। 
आइए विश्वास से पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन जिए। पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन ऐसे जीवन का संकेत करता है जो पूरी दुनिया में विश्वासयोग्यता से पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करता हो। ऐसा जीवन पवित्र आत्मा की भरपूरी का जीवन है।