उपदेश

विषय ८ : पवित्र आत्मा

[8-13] (यूहन्ना १६:५-११) पवित्र आत्मा के कार्यो और दान

(यूहन्ना १६:५-११)
“परन्तु अब मैं अपने भेजनेवाले के पास जाता हूँ; और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, ‘तू कहाँ जाता है?’ परन्तु मैं ने जो ये बातें तुम से कहीं हैं, इसलिये तुम्हारा मन शोक से भर गया है। तौभी मैं तुम से सच कहता हूँ कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा; परन्तु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेजूँगा। वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर करेगा। पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्‍वास नहीं करते; और धार्मिकता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर न देखोगे; न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है”।

पवित्र आत्मा का
कार्य क्या है?
वह जगत को पाप का, धार्मिकता का, और
न्याय का अंगीकार करवाता है।
 
उत्पत्ति १:२ में लिखा है, “पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डराता था”। हम इस भाग से देख सकते है की पवित्र आत्मा पाप से भरे हृदय में निवास नहीं कर सकता, लेकिन केवल उन लोगों के हृदय में निवास करता है जो खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते है। हालाँकि, कई लोग अपने हृदय में संदेह की वजह से कट्टर विश्वास में पद जाते है, और कहते है की उनके हृदय में पाप होने के बावजूद भी वे पवित्र आत्मा का अंतर्निवास प्राप्त करना चाहते है।
कट्टर विश्वास के तहत पाया हुआ आत्मा खुबसूरत आत्मा नहीं है। शैतान के कार्य कट्टरवाद के धर्म विरोधी लोगों के अन्दर होते है, और कट्टर विश्वासी बड़ी आसानी से शैतान की चाल और सामर्थ में फँस जाते है। लेकिन पवित्र आत्मा परमेश्वर है जो बुध्धिमान, भावनात्मक और अनन्त इच्छा रखता है। उसने इस संसार की सृष्टि करने में पिता परमेश्वर और उनके बेटे यीशु मसीह के साथ काम किया था। अब हम सीखेंगे की पवित्र आत्मा ने इस संसार में किन प्रकार के कार्यो को किया।
 

पवित्र आत्मा जगत को पापो का अंगीकार करवाता है
 
पवित्र आत्मा ने सबसे पहला कार्य कौनसा किया? उसने जगत को पापों का अंगीकार करवाया। उनके द्वारा जिन लोगों ने अंगीकार किया है वे वाही लोग है जिन्होंने यूहन्न्ना के द्वारा यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू का खुबसूरत सुसमाचार नहीं स्वीकार किया। वह सारे पापियों को और उन लोगों को भी जो पानी और आत्मा के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते पाप का अंगीकार करवाता है।
 

वह जगत को परमेश्वर की धार्मिकता का अंगीकार करवाता है
 
पवित्र आत्मा ने दूसरा कार्य कौनसा किया? वह परमेश्वर की धार्मिकता और यीशु ने पापियों को उनके पापों से बचाया उसकी गवाही देता है। यूहन्ना १६:१० कहता है, “और धार्मिकता के विषय में इसलिए कि मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर न देखोगे”। हमें जानना होगा की बाइबल में परमेश्वर की धार्मिकता का मतलब क्या है। इसका मतलब है सत्य यानी की यीशु ने यूहन्ना से अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को उठा लिया और अब जो कोई भी विश्वास करेगा वह परमेश्वर के अनुग्रह से धर्मी बन जाएगा। यीशु को यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा दिया गया और उसने जगत के सारे पापों को स्वीकार कर लिया, क्रूस पर अपना लहू बहाया, पुनरुत्थित हुआ और पापियों का उद्धारकर्ता बन गया। यह खुबसूरत सुसमाचार है जो परमेश्वर ने हमें दिया है। यीशु ने परमेश्वर की इच्छा के अनुसार पानी और लहू से जगत के सारे पापों को उठा लिया और हमारे जीवन का स्वामी बन गया।
पवित्र आत्मा उन लोगों की मदद करता है जो यूहन्ना द्वारा यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू में विश्वास करते है, ऐसे वह उनको पापों की माफ़ी पाने के लिए मदद करता है। आपको जानना चाहिए की त्रिएक में परमेश्वर के कार्य पूरक है। पवित्र आत्मा खुबसूरत सुसमाचार के लिए कार्य करता है, लोगों को परमेश्वर के प्रेम में विश्वास करवाता है। वह पानी और आत्मा के सुसमाचार के सत्य होने की निश्चितता भी देता है।
 

वह जगत को न्याय का अंगीकार करवाता है
 
पवित्र आत्मा का तीसरा कार्य क्या है? वह शैतान के कार्यों का नाश करता है। शैतान लोगों के कानों में फुसफुसाता है और कहता है, “तुम यीशु पर विश्वास कर सकते हो, लेकिन मसीहियत को केवल संसार के एक धर्म के रूप में मानो”। शैतान लोगों को यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू में विश्वास करने से रोकता है जिससे वे यीशु में विश्वास करने के बावजूद अपने पापों से माफ़ी न पा सके। क्योंकि शैतान ने मसीहियत को एक “साधारण” धर्म बना दिया है, कई लोग शैतान के भ्रम में पड़ जाते है कि यीशु में विश्वास करने का कारण अच्छा व्यक्ति बनना है। हालाँकि, यीशु में विश्वास करने का सच्चा उद्देश्य नया जन्म प्राप्त करके धर्मी व्यक्ति बनना है।
आपके पास झूठा विश्वास नहीं होना चाहिए। झूठा विश्वास आपको पवित्र नहीं कर सकता भले ही फिर आप यीशु पर कितना भी विश्वास क्यों न करते हो। यदि आपके पास झूठा विश्वास है, तो आप शैताम के झूठ की वजह से यीशु को स्पष्ट रूप से जान नहीं सकते और देख नहीं सकते। पवित्र आत्मा उन लोगों के लिए उद्धार की निश्चितता है जो पानी और आत्मा के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके बचाए गए है। जिनके हृदय में पाप है उनका सारा विश्वास बेकार है।
पवित्र आत्मा खुबसूरत सुसमाचार की गवाही देता है। यीशु ने जगत के सरे पापों को उठाने के लिए बपतिस्मा लिया और पापों की कीमत चुकाने के लिए उसे क्रूस पर चढ़ाया गया। पवित्र आत्मा इस सत्य की गवाही देता है। पवित्र आत्मा जगत के सारे लोगों को सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करके अपने सारे पापों से माफ़ी पाने के बारे में कहता है। हालाँकि, हमें यह याद रखना चाहिए की पवित्र आत्मा उन लोगों का न्याय करता है जो लोग खुबसूरत सुसमाचार को अपने हृदय में नहीं रखते।
 
 
प्रत्येक व्यक्ति के पास धन्य विश्वास होना चाहिए
 
धन्य विश्वास क्या है? वो विश्वास जो हमें पापों की माफ़ी के द्वारा पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाने के लिए अगुवाई करता है। हालाँकि, हम पूरे विश्व में कई मसीहियों को देखते है जिन्होंने लम्बे समय से यीशु के साथ अपने रिश्ते को बनाए रखा है फिर भी उनके हृदय में अभी भी पाप है। जितना ज्यादा वह यीशु पर विश्वास करते है, उतना ही ज्यादा वह पापमय बनते जाते है। अपने पापों से छूटकारा पाने के लिए उनके लिए सबसे बड़ी बाधा यह है की वह विश्वास करते है की अन्य भाषा में बोलना और दर्शन को पाना पवित्र आत्मा प्राप्त करने का सबूत है। वह अपने पापों की वजह से परमेश्वर के न्याय से अनजान है।
इस संसार में कई लोग पवित्र आत्मा और शैतान के कार्यो में अन्तर नहीं कर पाते। शैतान लोगों को झूठा विश्वास देने के द्वारा उन्हें परेशानी में डालता है और उन्हें विनाश की ओर ले जाता है। शैतान परमेश्वर के खिलाफ जाकर यही करना चाहता है। शैतान लोगों को अन्धश्रध्धा में विश्वास करवाता है और उन्हें अपना गुलाम बनाता है। शैतान उनके अन्दर चिह्न और चमत्कार का अनुभव करने की इच्छा रखता है और उन्हें यह सोचने पर मजबूर करता है की ऐसा अनुभव करना खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करके पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हालाँकि, पवित्र आत्मा लोगों को वचन के माध्यम से परमेश्वर की दुनिया देखने की अनुमति देता है। पवित्र आत्मा के द्वारा, वे यह जान पाए है और विश्वास कर पाए है की, परमेश्वर उन्हें प्रेम करता है, और परमेश्वर उन्हें बचाना चाहता है। उनकी योजना यीशु के द्वारा पानी और आत्मा के सुसमाचार के जरिए पापियों को बचाना और विश्वास से उनके प्रेम में जीवन बिताने के लिए आमंत्रित करना है।
१ पतरस ३:२१ कहता है, “उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा अब तुम्हें बचाता है”। १ पतरस १:२३ भी कहता है, “क्योंकि तुमने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है”।
पवित्र आत्मा का कार्य मनुष्य को पाप से, धार्मिकता से, और न्याय से अवगत कराना है और उन्हें उन सत्यो पर विश्वास करवाना है। पवित्र आत्मा उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताता है जिससे की वे यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके अपने पापों से छूटकारा पा सके। पवित्र आत्मा उन्हें ज्ञान देता है की जब वे पानी औत आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है तब वह उनके अन्दर रहता है।
अब तक हमने पवित्र आत्मा के कार्यों को देखा। इस दुनिया के सारे लोग पवित्र आत्मा का अंतर्निवास और परमेश्वर का प्रेम केवल तभी पा सकते है जब वे यीशु के पानी और आत्मा के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके पापों की माफ़ी पाए।
 
 
पवित्र आत्मा का व्यक्तित्व
 
पवित्र आत्मा सर्वसामर्थी परमेश्वर है। उसके पास व्यक्तित्व के ख़ास गुण है जैसे की, बुध्धि, आवेश, और इच्छा। क्योंकि पवित्र आत्मा के पास बुध्धि है, फिर भी वह परमेश्वर की गहरी बातें (१ कुरिन्थियों २:१०) को और मनुष्यों के मन को जाँचता है।
क्योंकि पवित्र आत्मा के पास आवेश है, इसलिए वह उनसे प्रसन्न होता है जो परमेश्वर के वचन पे विश्वास करते है, लेकिन अविश्वासियों से खेद होता है। धर्मी पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर के प्रेम को भी महसूस कर सकते है।
पवित्र आत्मा को “शान्तिदाता” भी कहा गया है। इसका मतलब है की पवित्र आत्मा धर्मी जन को तकलीफ में मदद करता है और उन्हें अपने दुश्मनों से लडके जित दिलाता है। उसके पास बुध्धि, आवेश, और इच्छा है जैसे एक मनुष्य के अन्दर होता है, और वह उनके अन्दर निवास करता है जो पानी और आत्मा के खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करते है।
 

पवित्र आत्मा के कार्य निम्नलिखित है
 
पवित्र आत्मा लोगों को पाप की माफ़ी के सत्य को समझने की अनुमति देता है और विश्वासियों के हृदय में निवास करता है। उसका कार्य सत्य की गवाही देना है की यीशु ने अपने बपतिस्मा और अपने लहू के द्वारा सारी मनुष्यजाति के पापों को उठा लिया (१ यूहन्ना ५:६-८)। वह अपने संतों को किसी भी परेशानी में शान्ति देता है और उन्हें फिर से खड़ा होने के लिए सामर्थ देता है। जब उन्हें पता नहीं होता की क्या प्रार्थना करे तब वह खुद उनके लिए मध्यस्था करता है (रोमियों ८:२६)। और वह परमेश्वर की कलीसिया में धर्मी को आराम देता है और उन्हें उनके वचनों की भरपूरता देता है (भजन संहिता २३)।
 

पवित्र आत्मा के कार्य बाइबल से सम्बंधित है
 
पवित्र आत्मा धर्मी को सत्य जानने और मानने के लिए और दूसरो को प्रचार करने के लिए अगुवाई करता है। “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है” (२ तीमुथियुस ३:१६)।
“यहोवा की पुस्तक से ढूँढ़कर पढ़ो : इनमें से एक भी बात बिना पूरा हुए न रहेगी; कोई बिना जोड़ा न रहेगा। क्योंकि मैं ने अपने मुँह से यह आज्ञा दी है और उसी की आत्मा ने उन्हें इकट्ठा किया है” (यशायाह ३४:१६)।
“पर पहले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती, क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, पर भक्‍त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्‍वर की ओर से बोलते थे” (२ पतरस १:२०-२१)।
पवित्र आत्मा ने परमेश्वर के सेवकों को परमेश्वर के वचन लिखने के लिए प्रेरित किया जिससे की हम पढ़ सके। उसने लोगों को पानी और आत्मा के सुसमाचार से रूबरू किया और उन्हें जगत में प्रचार करने के लिए अगुवाई की। इसलिए, भले ही धर्मी इस जीवन में बहुत कष्टों को उठाए, फिर भी वह उसपर जित पाने के लिए सक्षम है पवित्र आत्मा के सामर्थ के लिए धन्यवाद।
 

पवित्र आत्मा के वरदान और फल
 
पवित्र आत्मा के वरदान का मतलब है की वह संतों को परमेश्वर का खुबसूरत सुसमाचार दूसरों को प्रचार करने की योग्यता देता है। इसलिए संत परमेश्वर के काम के लिए अपने आप को समर्पित करते है, और पवित्र आत्मा उन्हें प्रभु को महिमा देने के लिए मदद करता है। “किन्तु सब के लाभ पहुँचाने के लिए हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है” (१ कुरिन्थियों १२:७)।
पवित्र आत्मा के वरदानो का उद्देश्य संतों को विश्वास में सुसज्ज करना है और उनके आगे जो दौड़ है उसे पूरा करने में उनकी मदद करना है (इफिसियों ४:११-१२)। पवित्र आत्मा परमेश्वर के सेवकों को सुसमाचार को फैलाने की योग्यता देता है। परमेश्वर की कलीसिया संतों का समूह है जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए है (१ कुरिन्थियों १:२)। 
प्रत्येक मसीही को जिसने पवित्र आत्मा पाया है उसे दिए गए पद के अनुसार व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि यीशु मसीह कलीसिया का सिर है। पवित्र आत्मा संतों को आत्मिक द्रष्टिकोण और योग्यता देता है जिससे वह परमेश्वर के राज्य के लिए कार्य कर सके। वह परमेश्वर ने हमें दिए हुए सुसमाचार की महिमा के लिए सबकुछ करता है। वह कहता है, “इसलिए तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करो” (१ कुरिन्थियों १०:३१)।
 

पवित्र आत्मा के भिन्न भिन्न प्रकार के वरदान 
 
पवित्र आत्मा के १२ प्रकार के वरदान है। हम बाइबल में देख सकते है की यह वरदान अलग अलग लोगों को दिए गए है। वरदानों की एक बड़ी सूची रोमियों १२:६-८, १ कुरिन्थियों १२:८-१०, और इफिसियों ४:११ में पाई जाति है। निम्नलिखित नौ आत्मिक वरदान है जो कुरिन्थियों अध्याय १२ में पाए जाते है।
१) बुध्धि की बातें: यह हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार को समझने के लिए औउर खुबसूरत सुसमाचार का प्रचार करने के लिए प्रेरित करता है।
२) ज्ञान की बातें: यह धर्मियों के जीवन में आनेवाली सारी परेशानियों को परमेश्वर के वचन के द्वारा सुलझाने की योग्यता है।
३) विश्वास: पवित्र आत्मा संतो को मजबूत विश्वास और आत्मशक्ति देता है जिससे की वह अपने पापों और शैतान से आत्माओं को बचाने का चमत्कार कर सके। धर्मी व्यक्ति विश्वास के सामर्थ से अपने पापों की माफ़ी पा सकता है और आत्मिक बातों को चंगा कर सकता है।
४) चंगाई: पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को परमेश्वर के वचन पर उसके विश्वास के अनुसार चंगा करने की योग्यता देते है।
५) सामर्थ्य के काम करने की शक्ति: यह आश्चर्यजनक वरदान है जो संतों को परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने के द्वारा कार्य करने की अनुमति देता है। सामर्थ्य के काम वह है जो विश्वास के द्वारा अलौकिक रीति से होता है, जो मनुष्य के कुदरती ज्ञान के नियमों से परे है।
६) भविष्यवाणी: इस समय, जैसा लिखा है उस अनुसार प्रकार केवल वही भविष्यवाणी कर सकते है जो परमेश्वर के वचन पे विश्वास करते है और उसका पालन करते है। जो लोग बाइबल में लिखा है वैसे नहीं लेकिन अपने शब्दों से भविष्यवाणी करते है वह सच्ची भविष्यवाणी नहीं है। परमेश्वर का सेवक, जिसके अन्दर पवित्र आत्मा का अंतर्निवास है, वह परमेश्वर के वचन का प्रचार करता है और उसके कारण उसे कलीसिया जो परमेश्वर की देह है उससे सुधार और अत्साहित किया जाता है। पवित्र आत्मा यह योग्यता परमेश्वर के सेवक और संतों को देता है।
७) आत्माओं की परख: यह परख करने की योग्यता है की किसी व्यक्ति ने अपने पापों से माफ़ी पाई है की नहीं। यदि हम इस वरदान को प्राप्त नहीं करते है तो शैतान के द्वारा नाश होने की संभावना है। क्योंकि दुनिया शैतान के नियंत्रण में है, इसलिए हम यह वरदान केवल परमेश्वर ने दिए हुए खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके ही पा सकते है और इसतरह परिक्षण, बोझ और इस संसार की बुराइयों पर जित पा सकते है। धर्मी व्यक्ति सच्चे सुसमाचार पर विश्वास करके इस वरदान को पा सकता है। इस प्रकार वह कह सकता है की किसी व्यक्ति के हृदय में पाप है या नहीं।
८) अनेक प्रकार की भाषा: बाइबल हमें अन्य भाषा में बोलने के बारे में कहती है: “परन्तु कलीसिया में अन्य भाषा में दस हज़ार बातें कहने से यह मुझे और भी अच्छा जान पड़ता है, कि दूसरों को सिखाने के लिये बुद्धि से पाँच ही बातें कहूँ” (१ कुरिन्थियों १४:१९)। संतों को समझना जरुरी है की परमेश्वर के वचन के सत्य को समझना अन्य भाषा में बोलने जो वे खुद नहीं समझते उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए उसे अन्य भाषा बोलने से दूर रहना है।
९) भाषाओं का अर्थ बताना: यह वरदान चेलों को आरम्भ के समय में सुसमाचार का प्रचार करने के लिए दिया गया था। इन दिनों में पवित्र आत्मा संदेशो को विविध भाषाओं में अनुवाद की सेवा के माध्यम से सुसमाचार को फैला रहा है। जब सुसमाचार प्रचार करनेवाला व्यक्ति सारी भाषाओं को जनता हो तो अनुवाद करने की जरुरत नहीं पड़ती। हालाँकि, हमारे बिच भाषाओं का अवरोध है, इसलिए परमेश्वर हम अनुवादको को अपना कार्य करने की अनुमति देते है। परमेश्वर गड़बड़ी में या आनन्द विभोर होकर कार्य नहीं करते। पवित्र आत्मा खुबसूरत सुसमाचार में कार्य करता है और संतों को भिन्न भिन्न भाषाओं में सुसमाचार का अनुवाद करने में अगुवाई करता है।
 

पवित्र आत्मा के फल क्या है? 
 
पवित्र आत्मा के फलों के बारे में, बाइबल हमसे कहती है, “पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, कृपा, भलाई, विश्‍वास, नम्रता, और संयम है; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं” (गलातियों ५:२२-२३)।
१) प्रेम: धर्मी व्यक्ति के लिए सच्चा प्रेम पानी और आत्मा के खुबसूरत सुसमाचार के द्वारा दूसरों को उनके पापों से बचाना है। क्योंकि धर्मी व्यक्ति के अन्दर खुबसूरत सुसमाचार है जो यीशु का प्रेम है, वे सच्चे प्रेम के सुसमाचार को प्रचार करते है और दूसरी आत्माओं को सच्चा प्रेम भी करते है।
२) आनन्द: जब हम नया जन्म पाते है तब यह हमारे हृदय की गहराई में से बहार आती महान ख़ुशी है। धर्मी व्यक्ति जिसे अपने सारे पापों से माफ़ी मिली है उसके हृदय में आनन्द होता है (फिलिप्पियों ४:४)। क्योंकि धर्मी के हृदय में आनन्द होता है, इसलिए उनके पास अपने आनन्द को दूसरों के साथ बाँटने की योग्यता होती है।
३) शान्ति: यह हृदय की शान्ति है जो उस धर्मी व्यक्ति को दी गई है जिसने पानिया उर आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करके अपने सारे पापों से माफ़ी पाई है। पवित्र आत्मा धर्मी को शान्ति के खुबसूरत सुसमाचार प्रचार करने के लिए कहता है। जिन लोगों ने यह शान्ति का खुबसूरत सुसमाचार सुना है वे दूसरों को जगत के पापों पर जय पाने और उद्धार की भेंट की सामर्थ में विश्वास करने के लिए अगुवाई करता है। धर्मी व्यक्ति जो परमेश्वर और मनुष्यों के बिच शान्ति करवाता है उसे परमेश्वर का पुत्र कहा गया है (मत्ती ५:९) और दूसरों को पापों की माफी पाने में अगुवाई करते है (नीतिवचन १२:२०)। पवित्र आत्मा धर्मी को खुबसूरत सुसमाचार प्रचार करने के द्वारा धर्मी जीवन जीने के लिए दूसरों को आशीष देने के लिए अगुवाई करते है।
४) धीरज: धीरज का फल धर्मी व्यक्ति के हृदय में होता है, जो सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा अपने पापों से बचाया गया है। हम पवित्र आत्मा के साथ संगती करने के द्वारा यह फल को प्राप्त कर सकते है। धर्मी व्यक्ति के अन्दर धीरज धरनेवाला हृदय होता है।
५) कृपा: जब हम पापों में डूबे हुए थे तब परमेश्वर ने हम पर दया की और हमें यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू से छूटकारा दिया। हम दूसरों को प्रेम और उनपर दया कर सकते है क्योंकि यीशु ने हम पर दया की और हमारे सारे पापों को मिटा दिए, और क्योंकि हम उस पर विश्वास करते है और हमने अनुग्रह पाया है। धर्मी व्यक्ति का हृदय कृपा से और खुबसूरत सुसमाचार के फलों से भरा हुआ होता है।
६) भलाई: यहाँ भलाई का मतलब है “सदाचार”। धर्मी व्यक्ति के हृदय की गहराई में प्रभु में भलाई और विश्वास होता है।
७) विश्वास: विश्वास का मतलब है की परमेश्वर के प्रति विश्वास से भरा हुआ हृदय। संत के जीवन में विश्वास तब आता है जब वह यीशु के प्रति ईमानदार होता है।
८) नम्रता: इसका मतलब है की दूसरों को पूरी रीति से समझना और अपने हृदय में उनके प्रति नम्र रहना है। धर्मी व्यक्ति के पास उनके दुश्मनों के लिए प्रेम और उनके छुटकारे के लिए प्रार्थना करने का हृदय होता है।
९) संयम: संयम खुद को अनुशासित करने की योग्यता है, ज़िद्दी जीवन को छोड़ कर संयम के जीवन की अगुवाई करना।
 

पवित्र आत्मा से भरपूर होना
 
पवित्र आत्मा से भरने का परिणाम क्या होता है? इस प्रकार की आशीष पाना संतों को यीशु के चेलों की तरह जीवन जीने की और परमेश्वर की कलीसिया में जुड़ने की अनुमति देता है। पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को धार्मिकता का पात्र बनने और मसीह की इच्छा पूरी करने के लिए खुद को समर्पित करने के लिए सक्षम बनाता है। धर्मी व्यक्ति की इच्छा प्रभु की इच्छा के द्वारा नियंत्रित होती है, और वे अपनी सारी संम्पति और तालंत स्वेच्छा से प्रभु को समर्पित करते है। पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को आत्मिक गरीबी, हार या निराशा से नहीं लेकिन जित, आनन्द और आत्मविश्वास से जगत के पापों पर जित हांसिल करने के लिए अगुवाई करता है (रोमियों अध्याय ७)।
“परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होंगे” (प्रेरितों १:८)। पवित्र आत्मा की भरपूरी धर्मी व्यक्ति को सुसमाचार प्रचार करने की अगुवाई देती है।
जिनके अन्दर पवित्र आत्मा निवास करता है उनको प्रभु ने सामर्थी विश्वास दिया है। और यीशु के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास के द्वारा जिनके पाप माफ़ हुए है उनको परमेश्वर की संतान बनने का अधिकार भी दिया है (यूहन्ना १:१२)। विश्वास के द्वारा परमेश्वर की संतान बने हुए धर्मी व्यक्ति इस जगत में खुबसूरत सुसमाचार का प्रचार कर सकता है।
धर्मी व्यक्ति के पास पापों की माफ़ी के सुसमाचार के द्वारा शैतान को हारने की योग्यता भी होती है। उनके पास आत्मिक बिमारी को चंगा करने (मरकुस १६:१८), शैतान के सामर्थ्य पर जय पाने की (लूका १०:१९), और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की (प्रकाशितवाक्य २२:१४) सामर्थ्य भी है। धर्मी व्यक्ति वायदे के वचन पर विश्वास करने के द्वारा राजाओं के अधिकारों के साथ जीवन जीते है (२ कुरिन्थियों ६:१७-१८)।
धर्मी व्यक्ति पवित्र आत्मा के कारण अपने जीवन से सारी सांसारिक वासनाओं को निकाल देता है। वह हमें सच्चे सुसमाचार का प्रचार करने में अगुवाई करता है (गलातियों ५:६)।
पवित्र आत्मा के कारण धर्मी व्यक्ति खुबसूरत सुसमाचार को पढ़ता है और विश्वास करता है और दूसरों को सिखाता है (१ तीमुथियुस ४:१३)।
पवित्र आत्मा हर दिन परमेश्वर की कलीसिया में धर्मी व्यक्ति को जोड़ता है (इब्रानियों १०:२५)।
पवित्र आत्मा के कारण धर्मी अपने हृदय में सत्य के प्रकाश के लिए (इफिसियों ५:१३) पापों का अंगीकार करता है (१ यूहन्ना १:९)।
पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को उसके जीवन में सही मार्ग में चलाता है (भजन संहिता २३)।
पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को अपने वरदानो को न खोने के लिए कहता है (१ थिस्सलुनीकियों ५:१९)।
पवित्र आत्मा अद्भुत सुसमाचार के द्वारा महान कार्य करता है (मरकुस १६:१७-१८)।
पवित्र आत्मा धर्मी व्यक्ति को परमेश्वर की कलीसिया में जोड़ कर उन्हें प्रभु के चेलों की तरह जीवन जीने की अगुवाई करता है। वह धर्मी को खुबसूरत सुसमाचार का प्रचार करने के द्वारा और पवित्र आत्मा से भरपूर होकर आत्मिक जीवन जीने के लिए अगुवाई करता है। यह अद्भुत सुसमाचार के द्वारा पवित्र आत्मा का कार्य है (१ पतरस २:९)।
वह इस समय भी संतों के हृदयों में कार्य कर रहा है। हाल्लेलूया!