उपदेश

विषय ८ : पवित्र आत्मा

[8-19] (मत्ती २७:४५-५४) खुबसूरत सुसमाचार जिसने मंदिर के परदे को फाड़ दिया

(मत्ती २७:४५-५४)
“दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्धेरा छाया रहा। तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, “एली, एली, लमा शबक्‍तनी?” अर्थात् “हे मेरे परमेश्‍वर, हे मेरे परमेश्‍वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?” जो वहाँ खड़े थे, उनमें से कितनों ने यह सुनकर कहा, “वह तो एलिय्याह को पुकारता है।” उनमें से एक तुरन्त दौड़ा, और स्पंज लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्डे पर रखकर उसे चुसाया। औरों ने कहा, “रह जाओ, देखें एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं।” तब यीशु ने फिर बड़े शब्द से चिल्‍लाकर प्राण छोड़ दिए। और देखो, मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया : और धरती डोल गई और चट्टानें तड़क गईं, और कब्रें खुल गईं, और सोए हुए पवित्र लोगों के बहुत से शव जी उठे, और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए और बहुतों को दिखाई दिए। तब सूबेदार और जो उसके साथ यीशु का पहरा दे रहे थे, भूकम्प और जो कुछ हुआ था उसे देखकर अत्यन्त डर गये और कहा, “सचमुच यह परमेश्‍वर का पुत्र था!”
 
जब यीशु ने क्रूस पर आत्मा सोंपा तब परमेश्वर के
मंदिर का पर्दा क्यों फट गया?
क्योंकि परमेश्वर का राज्य उन लोगों के लिए खोल दिया गया जो 
उसके बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु पर विश्वास करते थे।
 
इस खुबसूरत सुसमाचार के सत्य को जानने के लिए, व्यक्ति को पहले पुराने नियम में लोगों के पापों की माफ़ी के लिए परमेश्वर के सामने जो बलिदान चढ़ाया जाता था उसकी पध्धति को समझना होगा। आपको निम्नलिखित सत्य को जानना और विश्वास करना चाहिए।
पुराने नियम में लैव्यव्यवस्था अध्याय १६ में दर्ज, प्राचीन प्रायश्चित के बलिदान के अनुसार, महायाजक अपने हाथो को जीवित बकरे के ऊपर रखता था और साल भर लोगों ने किए हुए सारे पापों को उसके ऊपर डालता था। फिर इस्राएली लोगों के बदले में, बलिदान को मारा जाता था, और महायाजक उसके लहू को दयासन पर छिड़कता था। यह इस्राएल के लोगों के सारे पापों का प्रायश्चित था। इसी तरह, केवल वही लोग पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते थे जो हाथों को रखने, लहू और परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते थे।
याजक हमेशा सेवा करने के लिए मिलापवाले तम्बू के पहले हिस्से में प्रवेश करते थे। लेकिन दुसरे हिस्से में, यानी की अतिपवित्र स्थान में महायाजक अकेला साल में एक ही बार प्रवेश कर सकता था, लेकिन लहू के बगैर वह नहीं जा सकता था जो उसने खुद के लिए और लोगों के पापों के लिए चढ़ाया था (इब्रानियों ९:६-७)। इसी तरह, महायाजक भी अतिपवित्र स्थान में विश्वास के द्वारा हाथ रखकर तैयार किए हुए बलिदान के लहू के बगैर प्रवेश नहीं कर सकता था।
 

जैसे नए नियम में कहा गया है, यीशु मसीह हमारे लिए बलिदान हुआ
 
नए नियम में, हमें कहा गया है की व्यक्ति यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के पर विश्वास के द्वारा परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकता है। परमेश्वर के मंदिर का पर्दा ऊपर से निचे की ओर कब फटा? यीशु के इस जगत में आने और यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेने के बाद जब वह क्रूस पर चढ़ाया गया तब यह हुआ।
इसका क्या कारण दिया गया है? यीशु इस जगत में बलिदान बनके यानी की परमेश्वर का मेम्ना बनके आया था, यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लेने के द्वारा उसने जगत के सारे पापों को उठाया, और जब उसे क्रूस पर चढ़ाया तब उसने मनुष्यजाति के पापों को साफ़ किया। परदे का फटना चिह्न है की मनुष्यजाति के सारे पाप जिसने हमें परमेश्वर से अलग किया था उसे यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू के द्वारा शुध्द कर दिया गया।
यीशु ने खुद ही पाप की किंमत चुकाकर जो उसकी मृत्यु था इस अवरोध को तोड़ दिया था। जगत के पापों को उठाने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया उअर क्रूस पर चढ़ा। यही कारण था की परमेश्वर के मंदिर का पर्दा दो भागों में फट गया। जैसे याजक हाथ रखने की बात पर विश्वास करके मिलापवाले तम्बू में प्रवेश कर सकते थे, वैसे ही हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते है यीशु के बपतिस्मा और लहू पर हमारे विश्वास के लिए धन्यवाद।
जब यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया, तब उसने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, “एली, एली, लमा शबक्तनी?” अर्थात् “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया है?” (मत्ती २७:46) जब उसने अन्त में अपनी आत्मा को सोंपा, तब उसने कहा, “पूरा हुआ!” (मत्ती १९:३०) यीशु का क्रूस पर कुछ समय के लिए अपने पिता के द्वारा तिरस्कार किया गया था क्योंकि उसने यरदन नदी में यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को उठाया था।
वह सारे मनुष्यजाति के उद्धार के लिए मरा। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु के परिणाम स्वरुप, उस पर विश्वास करनेवाले सारे लोग बच गए। क्योंकि हम जन्म से पापी है और दोष के लिए नियोजित है, इसलिए यीशु ने हमारे सारे पापों को उठाने के लिए बपतिस्मा लिया।
जब तक यीशु ने हमें हमारे सरे पापों से शुध्ध नहीं किया तब तक स्वर्ग के राज्य का दरवाजा बन्ध था। जब यीशु ने यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा, तब परमेश्वर के मंदिर का पर्दा ऊपर से निचे तक दो भागो में फट गया जिससे की जो कोई भी खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करे वे परमेश्वर के स्वर्गीय मंदिर में प्रवेश कर सके।
मैं प्रभु का धन्यवादित हूँ की मैं पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता हूँ। अब में खुबसूरत सुसमाचार जिसको यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू से परिपूर्ण किया उस पर विश्वास करने के द्वारा स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता हूँ। मैं अपने खुद के सामर्थ्य, उपलब्धियां और प्रयासों से उद्धार नहीं पा सकता था।
स्वर्ग के राज्य की ओर ले जाने वाली आशीष केवल प्रार्थना, दान और भक्ति से हाँसिल नहीं की जा सकती। व्यक्ति केवल यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करके बच सकता है। व्यक्ति केवल खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। यीशु स्वर्ग का द्वार है। जो यीशु पर विश्वास करते है उनके लिए ओर कोई विश्वास की आवश्यकता नहीं है। स्वर्ग में प्रवेश व्यक्ति के दान, सांसारिक प्रयास या दुसरे भले कार्यो के पुरस्कार के रूप में नहीं दिया जाता। विश्वासी के लिए राज्य में प्रवेश करने के लिए केवल एक चीज की जरुरत है और वो है यरदन नदी में यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसका लहू के सुसमाचार पर विश्वास।
उसके पानी (यरदन नदी में यीशु का बपतिस्मा) और लहू (क्रूस) पर का विश्वास आपको स्वर्ग के राज्य में ले जाएगा। जो व्यक्ति यीशु पर विश्वास करता है लेकिन फिर भी उसके अन्दर पाप है तो उसे एक बात पर विश्वास करने की जरुरत है: पानी और आत्मा का सुसमाचार। “तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा” (यूहन्ना ८:३२)।
हम अपनी मृत्यु का समय नहीं जानते लेकिन यीशु सबकुछ जानता है। हालाँकि वह हमारे पापमय स्वभाव को अच्छी तरह जानता है, इसलिए उसने तक़रीबन दो हजार साल पहले अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू के द्वारा हमारे सारे पापों को साफ किया है। 
 

हमें इस खुबसूरत सुसमाचार पे विश्वास करना है जिसने परमेश्वर के मंदिर का परदा फाड़ दिया
 
मनुष्यजाति को अपने पापों से बचाने के लिए उद्धारकर्ता ने कुँवारी के द्वारा जन्म लिया। यह ३० साल की उम्र में यरदन नदी में उसके बपतिस्मा की वजह से था, की यीशु ने जगत के सारे पापों को उठाया। मनुष्यजाति की कमजोरी और अपराधों के परिणाम जो भी पाप हुए थे उसे माफ़ कर दिया गया यीशु को धन्यवाद। सारी मनुष्यजाति के उद्धार के लिए उसका बपतिस्मा और लहू अनन्त चाबियाँ है। यीशु को बपतिस्मा दिया गया और उसका लहू बहाया गया और अब वे जिन्हें यह सुसमाचार में विश्वास है वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते है।
जब यीशु ने क्रूस पर अपना आत्मा सोंपा तब परमेश्वर के मंदिर का परदा फट गया। जब यीशु क्रूस पर मरा तब परमेश्वर के मंदिर का परदा दो भागों में कैसे फट सकता है? कारण यह है की खुबसूरत सुसमाचार में मनुष्यजाति के उद्धार को उसके द्वारा उपलब्ध किया गया।
पुराने नियम में, हम इस्राएल के मिलापवाले तम्बू के बारे में सिखते है। वहाँ होमबलि की वेदी और हौदी को रखा गया था। इस हौदी के पीछे मिलापवाला तम्बू था और तम्बू के अन्दर परदे के पीछे सन्दूक था, जहाँ परमेश्वर की उपस्थिति और महिमा रहती थी। परदे को इतनी अच्छी तरह बुना गया था की अगर चार घोड़े उसे चारो बाजू से खींचे तब भी वह फटने वाला नहीं था। भलेही राजा सुलेमान ने तम्बू की जगह मंदिर बनवाया, फिर भी मूल चीजे नहीं बदली गई थी, और अतिपवित्र स्थान में जाने के लिए पर्दा अभी भी वाही था। हालाँकि, जब यीशु क्रूस पर अपना लहू बहाके मर गए तब पर्दा ऊपर से निचे तक दो भागों में फट गया। यह इस बात की गवाही देता है की सुसमाचार कितना खुबसूरत और सम्पूर्ण था जिसे यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू से परिपूर्ण किया गया था।
परमेश्वर ने सारी मनुष्यजाति को पापों की माफ़ी और अनन्त जीवन से आशीषित किया है, और खुबसूरत सुसमाचार से उन्हें आलिंगन दिया है। यीशु ने, बलिदान के तौर पर, जब यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मरा तब पापों की सारी किंमत चुकाई। बाइबल कहती है, “पाप की मजदूरी मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)। पुराने नियम के समय के जैसे, व्यक्ति लहू और बलिदान से ही मंदिर में प्रवेश कर सकता था और पापों की माफ़ी पा सकता था, इसलिए हम बलिदान के द्वारा परमेश्वर के पास आ पाए, वह बलिदान यीशु था, और हमारे अपराधो से माफ़ी पाई। यह सच्चाई है। और वचन, “पाप की मजदूरी मृत्यु है” हमें बताता है की खुबसूरत सुसमाचार कितना सम्पूर्ण है।
खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करना स्वर्ग का रास्ता है। परदे का दो भागों में फट जाना परमेश्वर के राज्य का खुलाजाने को दर्शाता है। जब हम इस सुसमाचार को जानते और विश्वास करते है, और जाहते है, “अरे, यीशु ने मेरे सारे पापों को ले लिया है। अरे, यीशु ने पापों की सारी किंमत क्रूस पर चुकाई है!” स्वर्ग का द्वारा हमारे सामने खुल जाएगा। स्वर्ग उनके लिए खुल चूका है जिन्होनें यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू पर विश्वास करके छूटकारा पाया है। यीशु का लहू पापियों को मृत्यु से बचाता है और उसका बपतिस्मा मनुष्यजाति के पापों को अपने ऊपर लेने के लिए था।
जब प्रभु ने क्रूस पर अपनी आत्मा को सोंपा तब भूकम्प हुआ और कबरें खुल गई। उसके बाद, उसका लहू भूमि पर गिरने लगा और निचली सतह की ओर बहाने लगा। जब यीशु क्रूस पर मरा, तब मनुष्य जाति के सारे पाप साफ़ हो गए, खुबसूरत सुसमाचार परिपूर्ण हुआ, और सारे विश्वासी स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए सक्षम बने। यह नया जन्म पाने का सत्य है।
बहुत सारे विद्वान है जो जिन्होंने यह साबित करने के लिए खोजबीन की है की वास्तव में यीशु मसीह का अस्तित्व ही नहीं था। लेकिन यीशु के अस्तित्व के सबूत के सामने उनकी कल्पना टिक नहीं पाई। उनमे से कई लोगों ने हार मान ली है और यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार पर विश्वास करने लगे है। उन्हें एहसास हुआ की यीशु के अस्तित्व के सबूत इतने पर्याप्त है की इनकार नहीं किया जा सकता। जब उन्होंने इस खुबसूरत सुसमाचार को जाना और विश्वास किया जो यीशु का जन्म, बपतिस्मा, मृत्यु, पुनरुत्थान, स्वर्गारोहण और दूसरा आगमन है तब उन्होंने यीशु को अपपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया।
हम यीशु के बपतिस्मा के गवाह नहीं है। २,००० साल पहले क्या हुआ था वह हमारी आँखों ने नहीं देखा है। हालाँकि, जो लिखा है उसके द्वारा कोई भी खुबसूरत सुसमाचार के संपर्क में आ सकता है। यीशु ने अपने बपतिस्मा और लहू से परमेश्वर और मनुष्य के बिच के अवरोध को तोड़ दिया है, और ऐसे परमेश्वर के राज्य का पर्दा ऊपर से निचे की ओर दो भागों में फट गया।
अब जो कोई भी इस खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करता है, जिसे यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू से परिपूर्ण किया गया, वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। क्या आप इस सत्य पर विश्वास करते है की यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू यानी की खुबसूरत सुसमाचार स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने की चाबी है?
मैं पहले पापी था, जो यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करता था लेकिन खुबसूरत सुसमाचार के बारे में नहीं जानता था। हालाँकि, एक बार बाइबल में मैंने मेरे लिए उसके निस्वार्थ प्रेम के बारे पढ़ा। मैंने जाना की उसने मेरे लिए बपतिस्मा लिया, मेरे लिए क्रूस पर मरा और मेरे लिए वह पुनरुत्थित हुआ। यीशु ने हमारे प्रति अपने प्रेम के लिए यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा हमें बचाया और पाप की कीमत चुकाने के लिए क्रूस पर चढ़ा। हम इस खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करके स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य बने है।
यह मनुष्यजाति के लिए परमेश्वर की महान धार्मिकता और इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। उसकी सारी सेवकाई – उसका जन्म, यरदन नदी में बपतिस्मा, क्रूस पर मृत्यु, और पुनरुत्थान – हमें हमारे पापों से बचाने के लिए था। हम हमारी मृत्यु के बाद नरक के लिए नियोजित थे, लेकिन यीशु ने नरक के अनन्त से हमारी आत्माओं को बचाया है और हमें निश्चितता दी है की खुबसूरत सुसमाचार स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने का मार्ग है।
प्रिय भाइयो, जब यीशु क्रूस पर मरा, तब एक सिपाही ने उसकी कूख में भाला मारा, और तुरंत ही लहू और पानी बहाने लगे। बाइबल में ऐसा ही लिखा है। यह यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के खुबसूरत सुसमाचार की गवाही देता है।
क्या आप यह मानते है की क्रूस पर के यीशु के लहू में आपका विश्वास आपको आपके सारे पापों से मुक्त करने के लिए काफी है? क्या यीशु के बपतिस्मा का महत्त्व कम है या फिर आपके बपतिस्मा को दर्शाने के लिए है? यदि आप ऐसा विश्वास करते है, तो कृपया पश्चाताप कीजिए। अब हमें यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए और उसे परमेश्वर का सत्य मानना चाहिए।
 

क्या आप अपने सारे पापों से शुध्ध होना चाहते है?
 
जैसे हमें हमारे कर्ज से निकल ने के लिए कर्ज चुकाना पड़ता है, वैसे ही हमारे सारे पापों को साफ करने के लिए हमें यीशु के बपतिस्मा और लहू के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करना है। हमें यीशु के बपतिस्मा और लहू के सुसमाचार में अविश्वास का पाप नहीं करना है। हमने सीधे हमारे पापों को यीशु पर नहीं डाला है, लेकिन यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला नाम के मध्यस्थ व्यक्ति ने हमारे लिए इस कार्य को किया है।
हमारे प्रभु ने हम धर्मियों को स्वर्ग का राज्य दिया है, जिन्होंने पापों की माफ़ी पाई है। हमने हमारे शारीरिक सामर्थ्य से और धार्मिक प्रयासों से नया जन्म नहीं पाया, लेकिन खुबसूरत सुसमाचार में हमारे विश्वास के कारण। यह सुसमाचार काल्पनिक कहानी नहीं है। जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब जगत के सारे पाप उसके ऊपर डाले गए। उसमे कोई भी पाप नहीं था, लेकिन उसने बपतिस्मा के द्वारा जो पाप अपने ऊपर लिए थे उसकी वजह से उसको क्रूस पर मरना पडा।
जब यीशु ने अपनी आत्मा को सोंपा, तब धरती दोल गई और चट्टानें तड़क गई। तब सूबेदार और जो उसके साथ यीशु का पहरा दे रहे थे, भूकम्प और जो कुछ हुआ था उसे देखकर अत्यन्त डर गए और कहा, “सचमुच यह परमेश्वर का पुत्र है” (मत्ती २७:५४)।
अरिमतिया के यूसुफ़ ने यीशु के शव को लिया, उसे उज्जवल चादर में लपेटा और अपनी कब्र में रखा। प्रधान याजकों और फरीसियों ने तीसरे दिन कब्र की रखवाली करने के आदेश दिए थे।
हालाँकि, यीशु खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करने वालों को नया जीवन देने के लिए पुनरुत्थित हुआ। वह गलील में गया जहाँ उसने क्रूस पर चढ़ने से पहले अपने चेलों से मिलाने का वादा किया था। यह सारी चीजे – उसका जन्म, बपतिस्मा, क्रूस पर चढ़ाना, पुनरुथान, स्वर्गारोहण और दूसरा आगमन – उनके लिए था जो खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करते है। मैं भी गवाही देनेवाला बना जिसने गवाही दी की यीशु जिन्दा परमेश्वर का पुत्र है और मेरा उद्धारकर्ता है।
 

किसके द्वारा सच्चा सुसमाचार प्रचार किया गया? 
 
यीशु के बपतिस्मा और लहू में विश्वास करनेवाले सत्य के खुबसूरत सुसमाचार की गवाही देते है। खुबसूरत सुसमाचार अपने पापों से बचे लोगों की गवाही के द्वारा फैलता है। जब व्यक्ति सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा मुक्त होता है, तब परमेश्वर का आत्मा उसकी अगुवाई करना शुरू करता है, और वह उसकी खुद इच्छा की परवाह किए बिना उसे बदल देता है। आत्माओं को जितने वाले परमेश्वर के वचन निरन्तर धर्मी व्यक्ति को बदलता है और उसे मजबूत विश्वास देता है। उसके बदले में वह प्रभु की स्तुति करता है। परमेश्वर का वचन उसमे बना रहता है, और परिणाम स्वरुप वह दिन प्रतिदिन वह अपने आतंरिक नवीनीकरण का अनुभव कर सकता है। उसे बदला हुआ देखकर लोग गवाही देते है, “वह वास्तव में छूटकारा पाया हुआ व्यक्ति है। वह प्रामाणिक मसीही और परमेश्वर की संतान बना है”।
यहाँ तक की शैतान भी यह खुबसूरत सुसमाचार का स्वीकार करता है और सिर झुकाता है। वह कहता है, “मैं अपमानित हुआ हूँ!” “लेकिन यह सच है की अब इस जगत में कोई पाप नहीं है। कैसी भी व्यक्ति के हृदय में पाप नहीं है”। इसलिए, शैतान व्यक्ति की सोच में कार्य करता है, उसके विश्वासयोग्य जीवन में बाधा बनाता है। शैतान का कार्य उन्हें सुसमाचार की आत्मिक आशीष पाने से रोकना है।
शैतान यीशु से अपने युध्ध को हार चुका है। शैतान लोगों के मानों को नियंत्रिक करके यीशु को क्रूस पर चढ़ाने के लिए सफल हो गया। हालाँकि, यीशु ने जब बपतिस्मा लिया तभी जगत के पापों को उठा लिया था और पापों का मूल्य चुकाने के लिए वह क्रूस पर मरा। इस कारण, उसने सुसमाचार के विश्वासिओं को सम्पूर्ण रीति से बचाया।
शैतान मनुष्यजाति के पापों से उनको बचाने के परमेश्वर की योजना को रोकने में विफल रहा। यीशु ने खुबसूरत सुसमाचार को परिपूर्ण करने के लिए अपने बपतिस्मा और लहू से मनुष्यजाति के पापों का मूल्य चुका। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा सारे पापों को उठाया और क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा सारे पापों का अन्त किया, और कहा, “पूरा हुआ!” (यूहन्ना १९:३०) शैतान खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करने वालों पर दोष लगाने के सामर्थ्य से वंचित रहा। यीशु ने अपने जन्म, बपतिस्मा, क्रूसारोहण और पुनरुत्थान के द्वारा शैतान को हराया।
क्या अभी भी आप के हृदय में पाप है? नहीं। मसीही व्यक्ति सत्य के खुबसूरत सुसमाचार पर अपने विश्वास के आधार पर आत्मविश्वास के साथ कह सकते है, “मेरे हृदय में पाप नहीं है”। जो व्यक्ति यीशु के बपतिस्मा और लहू के खुबसूरत सुसमाचार पर विश्वास करता है उसके हृदय में रत्ती भर भी पाप नहीं है।
अब खुबसूरत सुसमाचार हमारे हृदय पर लिख दिया गया है। अब हम बिना खेद के परमेश्वर की उपस्थिति में खड़े रह सकते है। क्या आप सब विश्वास करते है की यीशु ने यरदन नदी में अपने बपतिस्मा के द्वारा आपके सारे पापों को उठा लिया है? यदि करते है तो, परमेश्वर के प्रति आपकी कृतज्ञता और आनन्द सम्पूर्ण किया जाएगा। खुबसूरत सुसमाचार में विश्वास करने की वजह से, हम इस जगत में पवित्र हुए है और हमारे पापों से मुक्त हुए है। हम परमेश्वर का धन्यवाद करते है।
“उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया, जिस में हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है” (कुलुस्सियो १:१३-१४)। हाल्लेलूया, प्रभु की स्तुति हो।
यीशु ने खुबसूरत सुसमाचार से उद्धार के द्वार को खोल दिया है। जैसे मंदिर का पर्दा दो भागों में फट गया था, वैसे ही आपको भी खुबसूरत सुसमाचार की सामर्थ्य से आपके हृदय में सारे अवरोधों को तोड़ देना चाहिए। खुबसूरत सुसमाचार आपके और मेरे लिए बनाया गया है। हम इस सुसमाचार पर विश्वास करके स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते है, और यह परम सत्य है जो हमें पवित्र आत्मा का अंतर्निवास पाने की अनुमति देता है।