उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-1] (निर्गमन २७:९-२१) पापियों का उद्धार मिलापवाले तम्बू में प्रगट हुआ

(निर्गमन २७:९-२१)
“फिर निवास के आँगन को बनवाना। उसके दक्षिण की ओर के लिये बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े के परदे हों, उसकी लम्बाई सौ हाथ की हो; एक किनारे पर इतना ही हो। और उनके लिए बीस खम्भे बनें, और इनके लिये पीतल की बीस कुर्सियाँ बनें, और खम्भों के कुन्डे और उनकी पट्टियाँ चाँदी की हों। और उसी प्रकार आँगन के उत्तर की ओर की लम्बाई में भी सौ हाथ लम्बे परदे हों, और उनके लिए भी बीस खम्भे और इनके लिये भी पीतल के बीस खाने हों; और उन खम्भों के कुन्डे और पट्टियाँ चाँदी की हों। फिर आँगन की चौड़ाई में पश्‍चिम की ओर पचास हाथ के परदे हों, उनके लिए खम्भे दस और खाने भी दस हों। पूरब की ओर आँगन की चौड़ाई पचास हाथ की हो। आँगन के द्वार की एक ओर पन्द्रह हाथ के परदे हों, और उनके लिए खम्भे तीन और खाने तीन हों; और दूसरी ओर भी पन्द्रह हाथ के परदे हों, उनके लिए भी खम्भे तीन और खाने तीन हों। आँगन के द्वार के लिये एक परदा बनवाना, जो नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का कामदार बना हुआ बीस हाथ का हो, उसके लिए खम्भे चार और खाने भी चार हों। आँगन के चारों ओर के सब खम्भे चाँदी की पट्टियों से जुड़े हुए हों, उनके कुन्डे चाँदी के और खाने पीतल के हों। आँगन की लम्बाई सौ हाथ की, और उसकी चौड़ाई पचास हाथ की, और उसके कनात की ऊँचाई पाँच हाथ की हो, उसकी कनात बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े की बने, और खम्भों के खाने पीतल के हों। निवास स्थान के भाँति भाँति के बर्तन और सब सामान और उसके सब खूँटे और आँगन के भी सब खूँटे पीतल ही के हों। “फिर तू इस्राएलियों को आज्ञा देना, कि मेरे पास दीवट के लिये कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल ले आना, जिससे दीपक नित्य जलता रहे। मिलापवाले तम्बू में, उस बीचवाले परदे से बाहर जो साक्षीपत्र के आगे होगा, हारून और उसके पुत्र दीवट साँझ से भोर तक यहोवा के सामने सजा कर रखें। यह विधि इस्राएलियों की पीढ़ियों के लिये सदैव बनी रहेगी।”

समकोणीय मिलापवाले तम्बू के आँगन की बाड़ लम्बाई में १०० हाथ की थी। बाइबल में, एक हाथ की लम्बाई मतलब व्यक्ति के कोहनी से उसके हाथ की ऊँगली के छोर तक की लम्बाई, तक़रीबन आज के ४५ सेंटीमीटर। उसी रूप से, मिलापवाले तम्बू के आँगन के बाड़े की लम्बाई १०० हाथ थी मतलब की वह ४५ मीटर थी, और उसकी चौड़ाई ५० हाथ यानी की तक़रीबन २२.५ मीटर थी चौड़ी थी। यह घर का नाप था जिसमे पुराने नियम के समय में परमेश्वर इस्राएल के लोगों के बिच में निवास करता था।
 

मिलापवाले तम्बू का बाहरी आँगन बाड़े से घिरा हुआ था
 
क्या आपने कभी भी मिलापवाले तम्बू की प्रतिमा को किसी चित्र या कृति में देखा है? मोटे तौर पर बोले तो मिलापवाला तम्बू दो आँगन और तम्बू यानी की परमेश्वर के घर में बटा हुआ था। परमेश्वर के इस घर के अन्दर, पवित्र स्थान नामक एक छोटा ढाँचा था। पवित्र स्थान को चार भिन्न आवरणों से ढका गया था: नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से  बुना आवरण; दूसरा बकरी के बाल से बना हुआ; फिर लाल रंग से रंगी मेढ़े की खाल से बना; और सुइसों की खाल से बना आवरण। 
तम्बू के आँगन के पूर्व में उसका द्वार था, जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना हुआ था। जब कोई भी इस द्वार से प्रवेश करता था तव हम होमबलि की वेदी और हौदी को देख सकते थे। हौदी से गुजरते हुए, हम तम्बू को देख सकते है। तम्बू पवित्र स्थान और परमपवित्र स्थान में बटा हुआ था, जहाँ परमेश्वर का साक्षी का संदूक पाया जाता है। तम्बू के आँगन के बाड़े को ६० खम्भों से बनाया गया था जिसके ऊपर सफ़ेद सनी का कपड़ा लटकाया गया था। दूसरी तरफ, तम्बू को ४८ पटिए और ९ खम्भों से बनाया गया था। परमेश्वर इस ढाँचे से हमें क्या कहना चाहते है यह समझने के लिए हमारे पास कमसे कम उसके बहारी दिखावे की जानकारी होनी चाहिए।
परमेश्वर ४८ पटिए से बने तम्बू के अन्दर रहते है। परमेश्वर दिन में बादल का खम्भा बनकर और रात में आग के बादल के रूप में तम्बू के ऊपर इस्राएलियों के सामने खुद को प्रगट करते थे। और पवित्र स्थान के अन्दर, जहाँ परमेश्वर खुद निवास करते है, वह परमेश्वर की महिमा से भर जाता था। पवित्र स्थान के अन्दर, भेंट की रोटी की मेज, दीवट, और धूप वेदी था और परमपवित्र स्थान के अन्दर, साक्षी का संदूक और प्रायश्चित का ढकना था। यह जगह इस्राएल के आम लोगों के लिए नहीं थी; तम्बू के नियम के आधार पर केवल याजक और महायाजक ही इस पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते थे। ऐसा लिखा है, “ये वस्तुएँ इस रीति से तैयार हो चुकीं। उस पहले तम्बू में याजक हर समय प्रवेश करके सेवा के कार्य सम्पन्न करते हैं, पर दूसरे में केवल महायाजक वर्ष भर में एक ही बार जाता है, और बिना लहू लिये नहीं जाता; जिसे वह अपने लिये और लोगों की भूल चूक के लिये चढ़ाता है” (इब्रानियों ९:६-७)। यह हमें बताता है की आज के युग में, जिनके पास सोने का विश्वास है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता है केवल वे ही परमेश्वर की सेवकाई करते हुए उसके साथ जी सकते है।
भेंट की रोटी की मेज पर राखी गई रोटी का मतलब क्या है? इसका मतलब है परमेश्वर का वचन। धूप वेदी का मतलब क्या है? यह हमें प्रार्थना के बारे में बताता है। परमपवित्र स्थान के अन्दर, साक्षी का सन्दूक, और प्रायश्चित का ढकना था जो शुध्ध सोने से बनाए गए थे जिसे संदूक के ऊपर रखा गया था। उसके ऊपर करुबों अपनी पंख फैलाए, अपनी पंख से प्रायश्चित के ढकने को ढंके खड़े थे, और वे प्रायश्चित के ढकने की ओर अपना मुँह करके खड़े थे। यह प्रायश्चित का ढकना था, जहाँ परमेश्वर का अनुग्रह पाया जाता था। साक्षी के संदूक के अन्दर, दस आज्ञाए लिखी दो पत्थर की तख्तियाँ, हारून की कलियाँ फूटी हुई छड़ी, और मान्ना से भरे कटोरे को रखा गया था। संदूक को सोने से मढ़ा गया था (प्रायश्चित का ढकना), और उसके ऊपर करुबों को रखा गया था जिनका मुँह प्रायश्चित के ढकने की ओर था।
 

जिन्होंने पापों की माफ़ी पी है वे कहाँ रहते है?
 
जिन्होंने पाप की माफ़ी पाई है वे पवित्र स्थान के अन्दर जिएंगे। पवित्र स्थान को ४८ पटिए से बनाया गया था जिन्हें सोने से मढ़ा गया था। इसके बारे में सोचे। जब आप सोने से मढ़ी ४८ पटिए से बनी दीवार की ओर देखते है तो वह कितनी ज्यादा चमकदार होगी? वैसे ही पवित्र स्थान के अन्दर की सारी चीजे और पात्र सोने से बनाए गए थे और वे इसी तरह चमक रहे थे।
तम्बू के आँगन के रखु होमबलि की वेदी और हौदी को पीतल से बनाया गया था, और आंगन की बाद को चाँदी से मढ़े खम्भों से और सफ़ेद सनी के कपड़े से बनाया गया था। उसके विपरीत, पवित्र स्थान के अन्दर के सारे पात्र सोने से बनाए गए थे; दीवट को सोने से बनाया गया था, और भेंट की रोटी की मंजन भी। जैसे पवित्र स्थान के अन्दर के सारे पात्र और तिन दीवारे चोखे सोने से बनाई गई थी, इसलिए पवित्र स्थान के अन्दर हमेशा चमक रहती थी। 
पवित्र स्थान के अन्दर सोने की चमक रहती थी यह हमें बताता है की उद्धार पाए हुए संत अपना जीवन परमेश्वर की कलीसिया में बिताएंगे। जो संत पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विशवास करके अपना जीवन जीते है वे पवित्र स्थान में पाए जाने वाले सोने की तरह है। पवित्र स्थान में रहनेवाले ऐसे संतो का जीवन आशीषित है जो कलीसिया में रहते है, वचन का मनन करते है, परमेश्वर को प्रार्थना और स्तुति करते है, और परमेश्वर के सिंहासन के सामने जाते है और हरदिन उनका अनुग्रह प्राप्त करते है। यह पवित्र स्थान के अन्दर के विश्वास का जीवन है। आपको अपने हृदय में यह रखना होगा की केवल धर्मी जन जिसने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा उद्धार पाया है वही पवित्र स्थान के अन्दर जीवन जी सकता है।
 

परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से पवित्र स्थान के बहार और अन्दर के भाग को अलग किया था 
 
जैसे ज्यादातर घरो में बाड़ होती है, वैसे ही तम्बू के आँगन में ६० खम्भों से बनी बाड़ थी जिसे सफ़ेद सनी के कपड़े से लपेटा गया था। आँगन के पूर्व में, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े आर बटी हुई सनी के कपड़े से बुना पर्दा लगाया गया था, जिसकी चौड़ाई ९ मीटर थी।
तम्बू का अभ्यास करते समय, हमें यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए की ऐसा विश्वास क्या है जो परमेश्वर हमसे चाहता है, उद्धार पाए हुओ का विश्वास क्या है, और तम्बू की सामग्री के द्वारा हमें यह समझना चाहिए की हमारे प्रभु ने हमें कैसे बचाया है। पवित्र स्थान के अन्दर का यह विश्वास क्या है यह जानने के लिए, हमें सबसे पहले ध्यानपूर्वक हौदी, होमबलि की वेदी, और तम्बू के आँगन के बहार बनी बाड़ की ओर देखना चाहिए। ऐसा करने के द्वारा, हम यह ढूंढ सकते है की हमें कौनसे विश्वास के द्वारा पवित्र स्थान में प्रवेश करना है।
तम्बू के बाहरी आँगन में क्या था? वहाँ हौदी और होमबलि की वेदी थी। और यह लकड़ी के ६० खम्भों से घिरी हुई थी, और इसके ऊपर बटी हुई सनी का कपड़ा लटकाया गया था। इस बाड़ के खम्भे बबूल की लकड़ी से बनाए गए थे, जो सख्त होने के बावजूद भी हलके थे। इस लकड़ी से बने खम्भे तक़रीबन २.२५ मीटर ऊँचे थे जो साधारण इंसान को इसे फान कर पवित्र स्थान के अन्दर जाना असंभव बनता है। लेकिन यदि इस दीवार के पास कुछ रखकर उसके ऊपर चढ़ा जाएर तो आँगन के अन्दर क्या है यह देखा जा सकता है, लेकिन इस मदद के बगैर, अन्दर जाना असंभव था। यह हमें बताता है की हमारे खुद के प्रयासों से हम कभी भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते।
बाहरी आंगन के लकड़ी के खम्भों के निचे पीतल की कुर्सिया लगाईं गई थी, और उसके ऊपर के भाग पर चाँदी के खूंटे लगाए गए थे। जिस तरह खम्भे खुद से खड़े नहीं रह सकते थे, इसलिए खम्भों को एक दुसरों से बाँधा गया था। और खम्भों को सहारा देने के लिए, खम्भों को खूंटे और डोरियों से बाँधा गया था (निर्गमन ३५:१८)। 
 

मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए कौन सी सामग्री का उपयोग किया गया था?
 
तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। द्वार की उंचाई २.२५ मीटर, और चौड़ाई ९ मीटर थी। वह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना पर्दा था जिसे चार खम्भों पर लटकाया गया था। उसी रूप से, जब कोई तम्बू के अन्दर प्रवेश करने की कोशिश करता था, तब वह आसानी से यह द्वार को ढूंढ सकता था।
तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा यह प्रगट करता है की परमेश्वर अपने पुत्र यीशु की चार सेवकाई के द्वारा हमें बचाएगा। लकड़ी के सारे खम्भे और आँगन के बाड़ का सनी का कपड़ा स्पष्ट रूप से प्रगट करता है की किस रीति से परमेश्वर अपने बेटे यीशु के द्वारा आपको और मुझे हमारे पाप से बचाएगा।
दुसरे शब्दों में, तम्बू के आँगन के द्वार के द्वारा परमेश्वर स्पष्ट रूप से उद्धार के रहस्य को प्रगट करते है। आइए हम एक बार ओर तम्बू के आँगन के द्वार के इस्तेमाल हुई सामग्री की ओर चलते है: नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा। यीशु पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार पाने के लिए यह चार कपड़े हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि यह सामग्री महत्वपूर्ण नहीं होती, तो बाइबल में इसका इतना विस्तार से वर्णन नहीं होता। 
तम्बू के आँगन के द्वार के लिए इस्तेमाल हुई सारी सामग्री परमेश्वर के लिए हमें बचाने के लिए बहित ही महत्वपूर्ण थी। हालाँकि, द्वार नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बना था यह वास्तविकता पापियों को बचने के लिए परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चार कपड़े परमेश्वर के सम्पूर्ण उद्धार का प्रकाशन है। इस तरह परमेश्वर ने इसे निर्धारित किया है। इसी लिए परमेश्वर ने सिनै पर्वत पर मूसा को तम्बू का ढाँचा दिखाया, और उसे ठीक इस योजना के अनुसार तम्बू बनाने के लिए कहा।
 
 
नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े का मतलब क्या है?
 
 पवित्र स्थान का द्वार नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को बुनकर बनाया गया था और पवित्र स्थान और परमपवित्र स्थान के बिच का पर्दा भी इन चार कपड़ो से बनाया गया था। केवल इतना ही नहीं, लेकिन महायाजक के एपोद और चपरास भी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना हुआ था। तो फिर नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा हमें क्या कहता है? तो फिर हमें बचाने के लिए प्रभु के लिए जो आवश्यक था वह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा हमसे क्या कहता है? हमें निश्चितता के साथ इस समस्या को नजदीक से सुलझाना चाहिए।
सबसे पहले, नीला कपड़ा हमें यीशु के बपतिस्मा के बारे में बताता है। जो लोग बपतिस्मा के महत्त्व से अनजान है वे यह नहीं जानते की नीला कपड़ा यीशु मसीह के बपतिस्मा को दर्शाता है। उसी रूप से, जिन्होंने नया जन्म नहीं पाया वे यह दावा करते है की नीले कपड़े का मतलब है की, “यीशु मसीह खुद परमेश्वर है, और वह मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया।” दूसरी ओर बाकी के लोग दावा करते है की, “नीले कपड़े का मतलब है वचन।” हालाँकि, बाइबल हमें बताती है की नीले कपड़े का मतलब “यीशु का बपतिस्मा है जिसके द्वारा उसने पृथ्वी पर आकर जगत के पापों को अपने ऊपर उठाया था।” पवित्रशास्त्र स्पष्ट रूप से हमें बताता है की नीला कपड़ा पानी के बपतिस्मा को दर्शाता है जिसे यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिया था। तम्बू के बारे में वचन को पढ़ते, मिझे समझमे आया की, “अरे, परमेश्वर हमें बताना चाहता है की यीशु के बपतिस्मा पे हमारे विश्वास का क्या महत्त्व है।”
बलिदान चढाते समय महायाजक जो अंगरखा पहनता था वह भी नीले कपड़े से बनाया गया था। महायाजक ने अपने सिर पर पहनी पगड़ी के ऊपर एक सोने की तख्ती लगाईं गई थी और उसे जिस धागे से बाँधा गया था वह भी नीला था। और उस सोने की तख्ती पर लिखा हुआ था, “यहोवा के लिए पवित्र।” हम देख सकते है की महायाजक की पगड़ी पर सोने की तख्ती से बंधा नीला धागा स्पष्ट रूप से यीशु के बपतिस्मा को प्रगट करता है जो परमेश्वर के लिए पवित्र है।
इस तरह, पगड़ी पर सोने की तख्ती से बंधे नीले धागे के द्वारा परमेश्वर हमसे हमारे उद्धार के बारे में बात करता है। दुसरे शब्दों में, हमें जो पवित्र करता है वह है नीला धागा, और यह है यीशु का बपतिस्मा। हालाँकि नीला रंग हमें आसमान की याद दिलाता है, नीला केवल परमेश्वर को नहीं दर्शाता। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में से नीले कपड़े का मतलब यीशु मसीह का बपतिस्मा है। अलग तरह से देखे तो, नीला कपड़ा हमसे कहता है की यीशु मसीह ने बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापियों के पापों को उठाया (मत्ती ३:१५)। यदि यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा सब लोगों के पापों को नहीं उठाया होता तो सारे विश्वासी “यहोवा के लिए पवित्र” नहीं बन सकते थे। यदि यह यीशु ने लिया हुआ बपतिस्मा नहीं होता तो, हम कभी भी परमेश्वर के सामने पवित्र नहीं ठहरते।
क्या आप तम्बू के आँगन के द्वार को मूसा को दिखाए नमूने के मुताबिक़ बनवाने के परमेश्वर के आदेश के आत्मिक मतलब को जानते है? आँगन का द्वार तम्बू तक लेकर जाता है जहाँ परमेश्वर निवास करते है जो यीशु मसीह को दर्शाता है। कोई भी व्यक्ति यीशु मसीह के बगैर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। आँगन का द्वार जो यीशु को दर्शाता है, वह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना हुआ था क्योंकि परमेश्वर सत्य को प्रगट करना चाहते थे जो हमें हमारे उद्धार की ओर लेकर जाता है। बैंजनी कपड़ा पवित्र आत्मा को दर्शाता है, हमसे कहता है की, “यीशु राजाओं का राजा है।” लाल कपड़ा लहू को दर्शाता है जो यीशु ने क्रूस पर बहाया। नीला कपड़ा, जैसे बताया वैसे यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है जो उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिया। 
इसलिए नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा हमें यीशु के बपतिस्मा, परमेश्वर के देहधारण, और क्रूस पर उसकी मृत्यु के बारे में बताता है। इन तिन कपड़ों में प्रगट हुए यीशु के कार्य हमें विश्वास देते है जो हमें पवित्रता के साथ यहोवा के सामने जाने के लिए योग्य बनाता है। यीशु, खुद परमेश्वर, मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर आए, बपतिस्मा लेने के द्वारा पापियों के अपराधों को खुद पर ले लिया, और सारे पापों के न्याय को सहा और अपने लहू को बहाया – यह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का आत्मिक रहस्य है।
हो सकता है की आप अब तक नीले कपड़े को परमेश्वर या उसके वचन के बारे में सोचते थे। लेकिन अब आपको स्पष्ट रूप से समझना चाहिए की वास्तव में यह यीशु मसीह का बपतिस्मा है। जिस बपतिस्मा के द्वारा यीशु ने हमारे सारे पापों को उठाया वह महत्वपूर्ण है और उसे उसके कार्यो से निकाल नहीं सकते; उसी रूप से, पुराने नियम के तम्बू के द्वारा परमेश्वर हमें उसके महत्त्व को बताते है।
 
 
यीशु का बपतिस्मा वह तरिका था जिसके जरिए उसने हमारे सारे पापों को उठाया था
 
तम्बू के बाड़े के खम्भे बबूल की लकड़ी से बने थे। इन खम्भों के निचे पीतल की कुर्सिया लगाईं गई थी, और उनके ऊपर चाँदी के खूंटे लगाए गए थे। यह हमें बताता है की पापियों का उनके पापों के लिए न्याय होना चाहिए। जिन लोगों का न्याय पहले एक बार हो चुका है केवल वे ही उद्धार पा सकते है। अब तक जिनका न्याय नहीं हुआ और इसलिए नहीं बचाए गए वे अपने पापों की वजह से जब परमेश्वर के सामने जाएंगे अनन्त सिक्षा को पाएंगे।
जैसे लिखा गया है की, “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है,” (रोमियों ६:२३) पापी अपने पाप के लिए परमेश्वर के न्याय के हकदार है। इसलिए एक बार पापियों का न्याय होना चाहिए, और फिर परमेश्वर के अनुग्रह से फिर वे जीवन जी सकते है। यही है नया जन्म प्राप्त करना। नीले कपड़े का विश्वास की यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिया, और लाल कपड़े का विश्वास की यीशु ने क्रूस पर न्याय को सहकर सारे पापियों को बचाया है – यही विश्वास हमारे पापों के लिए हमें एक बार मारता है और नया जन्म देता है। आपको समझना चाहिए की अनन्त दण्ड केवल उन लोगों का इंतज़ार कर रहा है जो विश्वास से न्याय से नहीं गुजरते।
 यीशु के बपतिस्मा के द्वारा मसीह ने हमें हमारे सारे पापों से बचाने के लिए हमारे सारे पापों को सहा। यीशु ने हमारे पापों को उठाने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया था। यीशु खुद परमेश्वर है, और फिर भी हमें बचाने के लिए वह मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर आया, मनुष्यजाति के प्रतिनिधि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा पापियों के सारे अपराधों को उठाया, और क्रूस पर खुद का जीवन देकर और लहू और पानी बहाकर पापियों की जगह उसका न्याय हुआ। तम्बू के आँगन के द्वार विस्तृत रूप से यीशु के कार्यों के बारे में हमें बताते है जो उसने हमारे उद्धारकर्ता के रूप में परिपूर्ण किया। तम्बू के आँगन के द्वार के द्वारा परमेश्वर स्पष्ट रूप से हमसे कहता है की यीशु पापियों का उद्धारकर्ता बना है।
बटी हुई सनी का कपड़ा पुराने और नए नियम के वचन को दर्शाता है, जो बहुत ही गहरे और एक दुसरे के पूरक है। कितने विस्तारपूर्वक यह दोनों एक दुसरे के साथ जुड़कर बटी हुई सनी का कपड़ा बनाते है? इस बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा, परमेश्वर विस्तार पूर्वक हमें बताते है की उसने कैसे हमें बचाया है।
जब हम बिछौने की ओर देखते है, तब हम देखते है की उसे भिन्न भिन्न धागों से बुना गया है। उसी तरह, परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा की वे तम्बू के आँगन का द्वार नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को बुनकर बनाए। यह हमें बताता है की यीशु जो पानी (बपतिस्मा), लहू (क्रूस), और पवित्र आत्मा (यीशु परमेश्वर है) से आया हुआ यीशु हमारे उद्धार का द्वार है। परमेश्वर के गूढ़ वचन में प्रगट हुए सही विश्वास के साथ और उसके प्रेम को पाकर अब हम विश्वास से सम्पूर्ण रीति से बच गए है।
यीशु मसीह ने हमें संयोग से नहीं बचाया है। जब हम तम्बू की ओर देखते है तब हम यह देख सकते है। यीशु ने वास्तव में पापियों को बचाया है। जब हम केवल बाड़े के खम्भों की ओर देखते है तब हम समझ सकते है की उसने कितने विस्तार पूर्वक हमें बचाया है। क्यों खम्भों की संख्या ६० है? यह इसलिए क्योंकि ६ नंबर मनुष्य को दर्शाता है, जब की ३ नंबर परमेश्वर को दर्शाता है। प्रकाशितवाक्य १३ में, ६६६ का चिह्न आता है, और परमेश्वर हमसे कहते है की यह नंबर पशु का नंबर है, और इसलिए बुध्धिमान ही इस नंबर के रहस्य को जानते है। इसलिए, ६६६ नंबर का मतलब है की मनुष्य परमेश्वर की तरह पेश आता है। मनुष्यों की इच्छा क्या है? क्या यह सम्पूर्ण दैवीय व्यक्ति बनना नहीं है? यदि हम वास्तव में दैवीय व्यक्ति बनना चाहते है, तो हमें यीशु पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म प्राप्त करना चाहिए और परमेश्वर की संतान बनना चाहिए। ६० खम्भे इस बात को बड़े विस्तार से बताते है।
हालाँकि, विश्वास करने की बजाए, लोग घमंड करते है और बुरे कम करते है, अपने खुद के द्वारा इस दैवीय व्यक्तित्व में हिस्सा लेने की कोशिश करते है। केवल इसी करण से लोगों ने अभिलाषा के चलते सारे वचनों को फिर से व्याख्या किया है और मनुष्य निर्मित बातों पर विश्वास करते है, क्योंकि उनके पास विश्वास नहीं है लेकिन केवल अभिलाषा है जो परमेश्वर के विरुध्ध में है। इस देह की अभिलाषा के कारण वे खुद से देह की सम्पूर्णता को प्राप्त करने की कोशिश करते है, और अन्त में वे वचन से बहुत दूर चले जाते है।
 

उद्धार के वचन मिलापवाले तम्बू के सारे पात्र में प्रगट हुए है
 
यीशु मसीह को सारे पापियों को बचाने और उन्हें पवित्र स्थान में खींचने के लिए तम्बू के सारे पात्र और सामग्री आवश्यक है। होमबलि की वेदी आवश्यक थी, हौदी आवश्यक थी, और खम्भे, पीतल की कुर्सिया, चाँदी के खूंटे, कुण्डी और चाँदी की पट्टिया आवश्यक थी। यह सारी चीजे पवित्र स्थान के बहार पाए जानेवाले पात्र थे, और उनकी सामग्री पापी को धर्मी बनाने के लिए आवश्यक थी।
यह सारी चीजे पापियों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के योग्य बनाने के लिए आवश्यक थी, लेकिन उन सब में सबसे महत्वपूर्ण नीला कपड़ा था (यीशु का बपतिस्मा)। नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े का इस्तेमाल तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए हुआ था। यह कपड़े यीशु के तिन कार्यों को दर्शाते है जो हमारे लिए आवश्यक है जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते है। पहला, यीशु ने इस पृथ्वी पर आकर अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पाप खुद पर ले लिए; दुसरा, यीशु परमेश्वर है (आत्मा); और तीसरा, यीशु ने यरदन नदी में यूहन्ना के द्वारा जो हमारे सारे पापों का स्वीकार किया था उनका दण्ड चुकाने के लिए वह क्रूस पर मरा। यह विश्वास का सही क्रम है जो पापियों को उद्धार पाने और धर्मी बनने के लिए आवश्यक है।
जब हम बाइबल पढ़ते है, तब हम समझते है की हमारा प्रभु कितना असरल है। हम स्पष्ट रूप से ढूंढ सकते है की जिसने हमें इस बटी हुई सनी के कपड़े की तरह विस्तृत रूप से बचाया है वह ओर कोई नहीं लेकिन खुद परमेश्वर है। उसके अतिरिक्त, परमेश्वर ने इस्राएलियों से नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़ो को बुनवाकर तम्बू के आंगन का द्वार बनवाया जो ९ मीटर चौड़ा था। उसी रूप से, परमश्वर ने यह सुनिश्चित किया की जो कोई भी तम्बू की ओर देखता है, वह दूर से भी तम्बू के आँगन के द्वार को आसानी से पहचान सके।
तम्बू के आँगन के खम्भों के ऊपर लटकता हुआ बटी हुई सनी का कपड़ा परमेश्वर की पवित्रता को दर्शाता है। उसी रूप से, हम समझ सकते है की पापी तम्बू के पास जाने की हिम्मत नहीं कर सकता, और वे केवल तभी उसके आँगन में प्रवेश कर सकते है जब वे तम्बू के आँगन के द्वार में बुने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुई यीशु की सेवकाई पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार पाए। इस तरह, परमेश्वर ने पापियों को इस योग्य बनाया की वह जान पाए की यीशु मसीह ने उनके सारे पापों को मिटा दिया है और उन्हें पानी, लहू, और पवित्र आत्मा के द्वारा बचाया है।
केवल इतना ही नहीं, लेकिन आँगन के द्वार समेत तम्बू को बनाने वाली सारी सामग्री हमें यह वचन दिखाती है की परमेश्वर के लिए पापी को धर्मी बनाने के लिए यह सब आवश्यक था। क्योंकि परमेश्वर ने इस्राएलियों को तम्बू के आँगन का द्वार इतना बड़ा बनाने के लिए कहा था की सब उसे ढूंढ सके, और क्योंकि यह द्वार नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को बुनकर बनाया गया था इसलिए परमेश्वर ने सब को वचन के महत्त्व को स्पष्ट रूप से समझने के लिए योग्य बनाया है जो पापियों को धर्मी बना सकता है। 
तम्बू के आँगन का द्वार हमसे कहता है की परमेश्वर ने हमें सम्पूर्ण रीति से बचाया है, जो बबूल की लकड़ी के समान थे, पाप से नीले कपड़े (यीशु का बपतिस्मा), लाल कपड़े (क्रूस का लहू), और बैंजनी कपड़े (यीशु परमेश्वर है) की ओर। परमेश्वर ने यह निर्धारित किया है की जो कोई इस पर स्पष्ट रूप से विश्वास करेगा केवल वही पवित्र स्थान यानी की परमेश्वर के घर में प्रवेश कर सकता है।
 

यीशु मसीह इस अर्थ के जरिए हमें बता रहे है
 
परमेश्वर हमसे कहता है की हमें सोने की तरह चमकते हुए विश्वास के जीवन को जीने के लिए पहले यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को साफ़ करना चाहिए। इसी लिए परमेश्वर ने खुद मूसा को तम्बू का नमूना दिखाया, और मूसा के द्वारा उसे बनवाया, और इस्राएल के लोगों को तम्बू की स्थापना के द्वारा अपने पापों की माफ़ी पाने के योग्य बनाया। आइए हम उस विश्वास को पुनर्ग्रहण करे जो हमें तम्बू के आँगन से होकर पवित्र स्थान में लेकर जाता है। तम्बू के आँगन के द्वारा, परमेश्वर निरंतर हमसे सत्य पर हमारे विश्वास के बारे में बताता है की यीशु ने हमें पानी, लहू, और पवित्र आत्मा से बचाया है। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ो से बने आँगन के द्वार पर विश्वास, बलिदान के अर्पण के सिर पर महायाजक के हाथ रखने, और उस विश्वास से जिससे महायाजक हौदी में अपने हाथ और पैर धोता था – यह सारी चीजे हमें यह जानने की अनुमति देते है की पानी और आत्मा के सुसमाचार पर का हमारा विश्वास ही सोने का विश्वास है जो हमें पवित्र स्थान में प्रवेश करने और वहाँ महिमा में जीवन जीने के लिए योग्य बनाता है।
तम्बू के द्वारा, परमेश्वर ने हम सब को उद्धार का अनुग्रह और उसकी आशीष पाने की अनुमति दी है। तम्बू के द्वारा, हम उस आशीष को जान जान सकते है जो परमेश्वर ने हमें दी है। हम उद्धार के अनुग्रह को समझ सकते है और उस पर विश्वास कर सकते है जिसने हमें परमेश्वर के अनुग्रह के सिंहासन के सामने जाने और उद्धार पाने के योग्य बनाया है। क्या अप यह समझते है? तम्बू के द्वारा, हम देख सकते है की हमारे प्रभु ने कैसे आपको और मुझे विस्तृत रूप से बचाया है, कितने विस्तारपूर्वक उसने हमारे उद्धार की योजना बनाई है, और कितने विस्तारपूर्वक उसने इसे योजना के तहत परिपूर्ण किया है और पापियों को धर्मी बनाया है।
क्या शायद आपने अब तक यीशु पर अस्पष्ट रूप से विश्वास किया है? क्या आप मानते थे की नीला रंग केवल आसमान का है? क्या आप केवल बैंजनी और लाल रंग के विश्वास के बारे में जानते थे की यीशु, राजाओं का राजा, इस पृथ्वी पर आया और क्रूस पर हमें बचाया, और क्या आप इस अनुसार विश्वास करते थे? यदि ऐसा है तो, अब सच्चे विश्वास को ढूँढने का समय हो गया है। मैं आशा करता हूँ की आप सब स्पष्ट रूप से यीशु के बपतिस्मा के बारे में जाने, नीले रंग का विश्वास, और इस प्रकार परमेश्वर ने दिए हुए उद्धार के अनुग्रह को समझे और विश्वास करे।
परमेश्वर ने केवल हमें लहू और पवित्र आत्मा से नहीं बचाया। क्यों? क्योंकि परमेश्वर स्पष्ट रूप से हमें नीले, बैंजनी, और लाल रंग के बारे में बताता है, और इन तिन कपड़ो के द्वारा वह हमसे कहता है की कैसे यीशु ने हमें बचाया है। तम्बू के द्वारा, हमारे प्रभु ने हमें यीशु के उद्धार के कार्य को विस्तार पूर्वक दिखाया है। मूसा को तम्बू बनाने का आदेश देने के बाद, और इस तम्बू के द्वारा, परमेश्वर ने वायदा किया की वह हमें इस रीति से बचाएगा। जैसे वायदा किया था, यीशु मनुष्य की देह में आए और यरदन नदी के पानी (नीला) में बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को ले लिया। उसके बपतिस्मा के द्वारा, वास्तव में यीशु ने पापियों को उनके पाप से बचाया। कितना गहन है यह, कितना सच्चा है यह, और हमारा उद्धार कितना निश्चित है!
जब हम पवित्र स्थान में प्रवेश करते है, तब हम दीवट, भेंट की रोटी की मेज, और धूप वेदी को देख सकते है। परमपवित्र स्थान में प्रवेश करने से पहले, हम कुछ समय इस पवित्र स्थान में जीते है जो सोने से चमक रहा है, और वचन की रोटी को खाते है। कितना आशीषित है यह? परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने से पहले, हम उसकी कलीसिया में पानी और आत्मा के सुसमाचार से पूरी तरह उद्धार पाए हुए व्यक्ति के तौर पर जीवन जीते है। परमेश्वर की कलीसिया जो हमें जीवन की रोटी देता है वह पवित्र स्थान है।
पवित्र स्थान में – अर्थात, परमेश्वर की कलीसिया – वहाँ दीवट, भेंट की रोटी की मेज, और धूप वेदी थी। दीवट, अपने पुष्पकोश, डालियाँ, कटोरे और फूलो को चोखे सोने से बनाया गया था। चोखे सोने से बनाया गया दीवट हमें कहता है की हम धर्मियों को परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़ना चाहिए। 
भेंट की रोटी की मेज पर, अखमीरी रोटी को रखा जाता था, जो परमेश्वर के शुध्ध वचन को दर्शाता है जो संसार की बुरी सिक्षाओ से स्वतंत्र है। परमेश्वर का पवित्र स्थान – अर्थात, परमेश्वर की कलीसिया – इस शुध्ध परमेश्वर के बचन का प्रचार कराती है जो बिना किसी खमीर के है, और परमेश्वर के सामने कुछ भी बुरा किए बिना शुध्ध विश्वास के साथ जीवन जीते है। 
परमपवित्र स्थान के परदे के सामने, धूप वेदी को रखा गया था। धूप वेदी वह जगह थी जहाँ परमेश्वर को प्रार्थना की जाति थी। पवित्र स्थान के पात्र के द्वारा, परमेश्वर हमसे कहता है की जब हम उसके सामने जाते है, तब हमारे अन्दर एकता, उसके शुध्ध वचन पर विश्वास, और प्रार्थना होना चाहिए। केवल धर्मी प्रार्थना कर सकता है, क्योंकि परमेश्वर केवल धर्मियों की प्रार्थना ही सुनते है (यशायाह ५९:१-२, याकूब ५:१६)। और सब लोग उत्साह पूर्वक प्रार्थना करते है इसलिए वे परमेश्वर से मिल सकते है ऐसा नहीं है।
इसी तरह, पवित्र स्थान हमें कहता है की परमेश्वर की कलीसिया में उद्धार पाना हमारे लिए कितनी अद्भुत बात है। तम्बू के लिए इस्तेमाल हुई मुख्य सामग्री – नीला कपड़ा (यीशु का बपतिस्मा), लाल कपड़ा (अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को लेकर यीशु क्रूस पर मरा और हमारे पापों का दण्ड सहा), और बैंजनी कपड़ा (यीशु परमेश्वर है) – उस विश्वास को दर्शाती है जो हमारे पास होना ही चाहिए। यह तिन चीजे हमारे सम्पूर्ण विश्वास को बनाती है। जब हम विश्वास करते है की यीशु परमेश्वर का पुत्र है और खुद परमेश्वर है, और उसने हमें बचाया है, केवल तभी हम पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है जो सोने सा चमकता है जहाँ परमेश्वर निवास करते है। यदि हम यीशु के कार्यों पर विश्वास नहीं करते जो इन तिन कपड़ो में प्रगट हुए है, तो फिर हम चाहे यीशु पर कितना भी विश्वास क्यों न करते हो लेकिन हम पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकते। सारे मसीही परमपवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकते।
 

वे लोग जो गलत विश्वास के साथ मिलापवाले तम्बू के आँगन में प्रवेश करने की कोशिश करते है
 
आज, बहुत सरे मसीही है जो विश्वास करने का दावा करते है फिर भी पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकते। दुसरे शब्दों में, बहुत सारे ऐसे लोग है जो अपने अंधे विश्वास के साथ उद्धार पाने की कोशिश करते है। ऐसे लोग ओर कोई नहीं लेकिन वे है जो यह सोचते है की वे यीशु मसीह के लहू पर विश्वास करने क द्वारा बच जाएंगे, और विश्वास करते है की वह खुद परमेश्वर और राजाओं का राजा है। वे यीशु पर एकतरफा विश्वास करते है। केवल यीशु के लहू पर विश्वास करते हुए वे होमबलि की वेदी के सामने खड़े होते है और अंधी प्रार्थना करते है, “प्रभु, आज भी मैं पापी हूँ। मुझे माफ़ करिए, प्रभु। प्रभु आप मेरी जगह क्रूस पर चढ़े और मरे इसलिए मैं आपको मेरा सारा धन्यवाद देता हूँ। अरे, प्रभु, मैं आपसे प्रेम करता हूँ!” 
सुबह यह करने क बाद, वे अपने जीवन में लौटते है, और फिर से शाम को होमबलि की वेदी के सामने आते है और फिर से वही प्रार्थना करते है। जो लोग हर सुबह, हर शाम और हर महीने होमबलि की वेदी का आश्रय लेते है वे नया जन्म नहीं पा सकते, लेकिन अपने खुद की सोच के अनुसार वे गलत विश्वास में पद जाते है।
वे होमबलि की वेदी पर अपना बलिदान का अर्पण रखते है और आग से अपना बलिदान अर्पण करते है। क्योंकि आग में मांस जल जाता है, इसलिए जलाते हुए मांस की सुगंध फैलती है, और सफ़ेद और काला धुआँ निरंतर उठता रहता है। होमबलि की वेदी वो जगह नहीं है जहाँ हम परमेश्वर के सामने हमारे पापों को दूर करने के लिए रोते रहे, लेकिन वास्तव में वह वो जगह है जो हमें नरक की आग की याद दिलाती है। 
हालाँकि, लोग हर सुबह और शाम इस जगह के पास जाते है और कहते है, “प्रभु, मैंने पाप किया है। कृपया मेरे सारे पाप माफ़ करे।” फिर वे घर की ओर लौटते है, और वे अपने जीवन में संतुष्ट होते है जैसे की उन्होंने सच में पापों की माफ़ी पाई हो। हो सकता है की वे आनद के साथ यह गीत भी गाए, “मुझे माफ़ी मिली है, आपको माफ़ी मिली है, हम सब को माफ़ी मिली है।” लेकिन ऐसी भावनाए केवल थोड़े समय के लिए ही है। कुछ ही समय में, वे फिर से पाप करते है और खुद को होमबलि की वेदी के सामने खड़ा पाते है, अंगीकार करते है, “प्रभु, मैं पापी हूँ।” जो लोग बार बार होमबलि की वेदी के सामें आते है और जाते है वे यीशु पर विश्वास करने का दावा करने के बाद भी पापी है। ऐसे लोग कभी भी परमेश्वर के पवित्र राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते।
तो फिर कौन अपने पापों की सम्पूर्ण माफ़ी प्राप्त कर सकता है और परमेश्वर के पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकता है? वे वही लोग है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के रहस्य को जानते है और विश्वास करते है। जो लोग इस पर विश्वास करते है वे यीशु की मृत्यु पर अपने विश्वास के द्वारा होमबलि की वेदी से गुजर सकते है, हौदी में अपने हाथ और पैर धो सकते है और खुद को याद दिला सकते है की उनके सारे पाप यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाले गए है, और फिर परमेश्वर के पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है और अपने पापों की माफ़ी पाई है वे अपने विश्वास के द्वारा परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते है, क्योंकि उनका विश्वास परमेश्वर के द्वारा स्वीकार्य है।
मैं आशा करता हूँ की आप सब इस बात को समझे और विश्वास करे की नीले कपड़े का मतलब बाइबल के आधार पर यीशु का बपतिस्मा है। ऐसे कई लोग है जो आज यीशु पर विश्वास करने का दावा करते है, लेकिन कुछ ही लोग पानी यानी (नीला कपड़ा) की यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करते है। यह बहुत ही दुखदाई घटना है। यह बड़े तनाव का कारण है की बहुत सारे लोग अपने मसीही विश्वास से बपतिस्मा के महत्वपूर्ण विश्वास को निकाल देते है, जबकि यीशु इस पृथ्वी पर केवल परमेश्वर के रूप में और क्रूस पर मरने के लिए ही नहीं आए थे। मैं आशा और प्रार्थना करता हूँ की आप सब अभी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के विश्वास को जाने और विश्वास करे, और इस प्रकार ऐसे व्यक्ति बने जो परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सके।
 

हमें मिलापवाले तम्बू के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए प्रभु पर विश्वास करना चाहिए
 
हमारे प्रभु ने आपको और मुझे सम्पूर्ण रीति से बचाया है। जब हम तम्बू की ओर देखेते है, तब हम देख सकते है की प्रभु ने कितने विस्तृत तरीके से हमें बचाया है। हम इसके लिए उसका पर्याप्त धन्यवाद भी नहीं कर सकते। हम कितने आभारी है की प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से बचाया है, और उसने हमें वह विश्वास भी दिया है जो जो इन नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर विश्वास करता है! 
पापी व्यक्ति कभी भी परमेश्वर के अनुग्रह को पाए बिना और अपने पापों के न्याय को पाए बिना पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकता। कैसे कोई व्यक्ति जिसने अपने पापों का न्याय भी प्राप्त नहीं किया वह तम्बू का द्वार भी खोल सकता है और पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकता है/ वे नहीं कर सकते! जब ऐसे लोग पवित्र स्थान में प्रवेश करते है, तब वे शापित होते है और देह में अंधे हो जाते है। “अदभुत, यहाँ कितना उजियाला है! अरे, मैं कैसे कुछ देख नहीं पा रहा हूँ? जब मैं बहार था, तब मैंने सोचा की जब मैं पवित्र स्थान में प्रवेश करूंगा तो मैं सब कुछ देख पाउँगा। मैं क्यों कुछ नहीं देख पा रहा हूँ, और यहाँ इतना अन्धेरा क्यों है? जब मैं पवित्र स्थान के बहार था तब मैं सब कुछ अच्छी तरह से देख सकता था... मुझे कहा गया था की पवित्र स्थान बहुत ही उजला है; लेकिन यहाँ इतना अन्धेरा क्यों है?” वे कुछ नहीं देख सकते क्योंकि वे आत्मिक रीति से अंधे किए गए है, क्योंकि उनके पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास नहीं है। इसी तरह, पापी कभी भी पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकते।
हमारे परमेश्वर ने हमें इस लायक बनाया है की हम पवित्र स्थान में अंधे न हो, लेकिन हमेशा के लिए पवित्र स्थान में रहने की आशीष को पाए। तम्बू के हर भाग में पाए जाने वाले नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा, परमेश्वर ने हमें हमारे उद्धार के तरीके के बारे में बताया है, और भविष्यवाणी के इस वचन के अनुसार, उसने हमें हमारे सारे पापों से छुडाया है। 
हमारे प्रभु ने हमें पानी, लहू और पवित्र आत्मा से बचाया है (१ यूहन्ना ५:४-८), इसलिए हम अंधे नहीं होंगे लेकिन हमेशा के लिए उसके चमकते हुए अनुग्रह में जिएंगे। उसने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा बचाया है। हमारे प्रभु ने हमें गूढ़ वचनों के द्वारा वायदा किया है और उसने हमें कहा है की उसने हमें यह वायदा परिपूर्ण करने के द्वारा बचाया है। 
क्या आप विश्वास करते है की आप और मैं नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए यीशु के कार्यों के द्वारा बचाए गए है? हाँ! हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में विश्वास किए बिना नहीं बच सकते। 
नीला कपड़ा परमेश्वर को नहीं दर्शाता। यह यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है जिसके द्वारा उसने यरदन नदी में जगत के सारे पापियों के पापों को ले लिया।
नीले कपड़े यानी की यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास किए बिना होमबलि की वेदी के सामने खड़ा होना सम्भव हो सकता है। शायद लोग होमबलि की वेदी के बगल में रखे हौदी के पास भी पहुच सकते है, लेकिन वे पवित्र स्थान में नहीं प्रवेश कर सकते जहाँ परमेश्वर निवास करता है। जो लोग तम्बू के द्वार को खोल सकते है और पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है केवल वही परमेश्वर की सच्ची संतान है जिन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पापों की सम्पूर्ण माफ़ी प्राप्त की है। लेकिन पापी व्यक्ति, फिर चाहे वो कोई भी हो, पवित्र स्थान में कभी भी प्रवेश नहीं कर सकती। तो फिर हमें हमारे उद्धार को प्राप्त करने के लिए कितना अन्दर प्रवेश करना चाहिए? जब हम तम्बू के अन्दर प्रवेश करते है तब हम उद्धार नहीं पाते, लेकिन जब हम पवित्र स्थान में प्रवेश करते है जहाँ परमेश्वर निवास करता है तब उद्धार पाते है।
 

मिलापवाले तम्बू के अन्दर के विश्वास और बहार क विश्वास के बिच अन्तर
 
तम्बू के बाहरी आँगन में रखे होमबलि की वेदी और हौदी सब पीतल से बने थे, और बाड़ लकड़ी, चाँदी और पीतल से बनी थी। लेकिन जब हम तम्बू में प्रवेश करते है तब सारी चीजे अलग हो जाति है। तम्बू की मुख्य बात यह है की वह “परमेश्वर का घर है।” उसकी तीनो बाजू की दीवार बबूल की लकड़ी के ४८ पटिए से बनी थी, जिसे सोने से मढ़ा गया था। भेंट की रोटी की मेज और धूप वेदी भी बबूल की लकड़ी से बने थे, और सेने से मढ़े गए थे, और दीवट को चोखे सोने से बनाया गया था। उसी रूप से, पवित्र स्थान के अन्दर के सारे पात्र शुध्ध सोने से बनाए गए थे या तो सोने से मढ़े गए थे।
दूसरी ओर, पटिए के निचे की कुर्सिया किससे बनाई गई थी? वे चाँदी की बनाई गई थी। जब की तम्बू के बाड़ के खम्भों की कुर्सिया पीतल से बनाई गई थी, और तम्बू के पटिए की कुर्सिया चाँदी से बनाई गई थी। और आँगन के बाड़ के खम्भे लकड़ी से बनाए गए थे, तम्बू के पटिए बबूल की लकड़ी से बनाए गए थे और सोने से मढ़े गए थे। लेकिन तम्बू के द्वार के पाँच खम्भों की कुर्सिया पीतल से बनाई गई थी। 
हालाँकि तम्बू के पटिए की कुर्सिया चाँदी से बनी थी, तम्बू के द्वार के खम्भों की कुर्सिया पीतल से बनी थी। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है की जो कोई भी परमेश्वर की उपस्थिति में आता है उसका न्याय होना चाहिए। यदि हमारा न्याय होगा और हम मारे जाएंगे तो कोई कैसे परमेश्वर के सामने आएगा? यदि हम मर जाए तो हम परमेश्वर के सामने खड़े नहीं हो पाएंगे।
तम्बू के द्वार के पाँच खम्भों के लिए इस्तेमाल हुए पीतल के द्वारा, परमेश्वर हमसे कहता है की भले ही हमारे पाप के लिए हमारा न्याय हो; लेकिन यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वार हमारे सारे पापों को ले लिया है और उन पापों के लिए हमारी जगह उसका न्याय हुआ है। हमारे पापों की वजह से हमारा न्याय होना था। लेकिन हमारी जगह इन पाप के सारे न्याय को किसी ओर ने सह लिया। हमारी जगह, कोई ओर मरा। हमारी जगह जिसका न्याय हुआ ओर मरा वो ओर कोई नहीं लेकिन यीशु मसीह है।
नीले कपड़े के द्वारा प्रगट हुआ विश्वास वो विश्वास है जो मानता है की यीशु मसीह ने हमारे सारे पापों का स्वीकार किया है और इस प्रकार हमारे सारे पापों को माफ़ किया है। जैसे यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाले गए हमारे पापों की वजह से परमेश्वर ने यीशु का जीवन ले लिया, इसलिए अब हम हमारे पापों के न्याय का सामना नहीं करेंगे। लाल कपड़े में प्रगट हुआ विश्वास यीशु के क्रूस पर बहाए हुए लहू पर विश्वास करता है। यह विश्वास मानता है की जिसका सामना हमें करना था उन पापों के दण्ड को यीशु मसीह ने उठा लिए। 
जो लोग यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करने के द्वारा उनके सारे पाप उसके ऊपर डालते है, और इन पापों के करण यीशु ने क्रूस पर लहू बहाकर मृत्यु को सहा इस पर विश्वास करते है केवल वे ही पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है। यही कारण है की तम्बू के द्वार की कुर्सिया पीतल से बनाई गई थी। उसी तरह, हमें मसीह के लहू में विश्वास करना चाहिए जिसने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और हमारी जगह न्याय को सहा। 
परमेश्वर ने निर्धारित किया था की जो लोग यह विश्वास करते है की उन्हें बचाने वाला यीशु मसीह खुद परमेश्वर है (बैंजनी कपड़ा), यीशु का बपतिस्मा (नीला कपड़ा), और सच्चाई की यीशु ने उनकी जगह पापों के न्याय को सहा (लाल कपड़ा) केवल वे ही पवित्र स्थान में प्रवेश करने के योग्य है। परमेश्वर ने केवल उन लोगों को पवित्र स्थान में प्रवेश करने की अनुमति दी थी जिनका उनके पापों के कारण न्याय हुआ हो और जो विश्वास करते हो की यीशु ने उन्हें उनके सारे पापों से बचाया है।
तम्बू के द्वार के खम्भों की कुर्सिया को पीतल से बनाया गया था। पीतल की कुर्सियों का आत्मिक मतलब है की परमेश्वर ने आदम के वंशज के रूप में पैदा हुए पापियों को पवित्र स्थान में रहने की अनुमति केवल तब दी है जब उनके पास नीले कपड़े (यीशु का बपतिस्मा), लाल कपड़े (पापियों के स्थान पर यीशु का न्याय को सहना) और बैंजनी कपड़े (यीशु खुद परमेश्वर है) का विश्वास हो। पीतल से बने द्वार के पाँच खम्भे हमें परमेश्वर के सुसमाचार के बारे में कहते है, जो रोमियों ६:२३ में लिखा है, “क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, लेकिन परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है,” यीशु ने पानी, लहू, और आत्मा से हमारे सारे पापों को माफ़ किया है।
 

हमें परमेश्वर के वचन को अनदेखा नहीं लेकिन उस पर विश्वास करना चाहिए
 
यीशु पर विश्वास करने का मतलब यह नहीं है की आपका उद्धार होगा ही। आपके कलीसिया में हिस्सा लेने का यह मतलब नहीं है की आपका नया जन्म हो चुका है। हमारे प्रभु ने यूहन्ना ३ में कहा है की जिन लोगों का पानी और आत्मा से नया जन्म हुआ है केवल वे ही परमेश्वर के राज्य को देखेंगे और उसमे प्रवेश करेंगे। यीशु ने दृढ़ता से यहूदी अगवे और परमेश्वर पर विश्वास करनेवाले नीकुदेमुस से कहा, “तुम यहूदी गुरु हो, और फिर भी यह नहीं जानते की नया जन्म कैसे पाए? जब कोई व्यक्ति पानी और आत्मा से नया जन्म पाता है केवल तभी वह परमेश्वर के राज्य को देखता है और उसमे प्रवेश करता है।” जो लोग यीशु पर विश्वास करते है वे केवल तभी नया जन्म पा सकते है जब उनके पास नीले कपड़े (जब यीशु का बपतिस्मा हुआ तब उसने हमारे पापों को एक ही बार में अपने ऊपर ले लिए), लाल कपड़े (यीशु हमारे पापों के लिए मरा) और बैंजनी कपड़े (यीशु उद्धारकर्ता, खुद परमेश्वर, और परमेश्वर का पुत्र है)। उसी रूप से, तम्बू में पाए जानेवाले नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा सरे पापियों को यह विशवास करना चाहिए की यीशु पापियों का उद्धारकर्ता है।
क्योंकि बहुत सारे लोग इस सत्य पर विश्वास किए बिना यीशु पर विश्वास करते है इसलिए वे ना तो नया जन्म पा सकते है ना ही वे नया जन्म पाने के वचन को जान पाते है। हमारे प्रभु ने स्पष्टता से हमें कहा है की भले ही यदि हम यीशु पर विश्वास कारने का दावा करे, लेकिन यदि हमने नया जन्म नहीं पाया है तो हम कभी भी पवित्र स्थान यानी की पिता के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते और ना ही विश्वास का योग्य जीवन जी सकते है। 
हमारे मनुष्य निर्मित विचारों में हम सोचते है की यदि सारे मसीहियों को नया जन्म प्राप्त करना स्वीकार किया जाए तो कितना अच्छा होगा। क्या ऐसा नहीं है? यदि हम यीशु ने मनुष्यजाति को बचाने के लिए क्या किया उसे जाने बिना केवल यीशु का नाम लेने से और उस पर हमारे विश्वास का दवा करने से उद्धार को प्राप्त करते तो लोगों के लिए यीशु पर विश्वास करना बहुत ही आसान होता। जब भी हम नए मसीही से मिलते तो हम परमेश्वर का धन्यवाद कारते और गाते, “मुझे माफ़ी मिली है, आपको माफ़ी मिली है, हम सब को माफ़ी मिली है।” “बहुत सारे मसीही लोग है तो गवाही का क्या महत्त्व रह जाता है? सबकुछ अच्छा चल रहा है। क्या यह अद्भुत नहीं है?” यदि ऐसा होता, तो लोग बड़ी आसानी से उद्धार के बारे में सोचते, क्योंकि जो कोई भी यीशु का नाम लेता है वह उद्धार पाटा है, और वे चाहे जैसा जीवन जिए फिर भी उनका उद्धार होगा। लेकिन परमेश्वर ने हमसे कहा है की हम ऐसे अंधे विश्वास के साथ कभी भी नया जन्म नहीं पा सकते। उसके विपरीत, उसने हमसे कहा है की जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार को जाने बिना उद्धार पाने का दावा करते है वे नियम-विरुध्ध जीवन जीते है।
 

आपकी देह नहीं लेकिन आपकी आत्मा का नया जन्म हुआ है
 
यीशु मनुष्य बना, इस पृथ्वी पर आया, और हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वार बचाया। यूसफ, यीशु के सांसारिक पिता बढ़ई थे (मत्ती १३:५५), और यीशु ने इस बढ़ई पिता के निचे अपने परिवार की सेवा की, उसने खुद अपने जीवन के पहले २९ साल बढ़ई का काम किया। लेकिन जब वह ३० साल का हुआ, तब उसे अपना दैवीय कार्य शुरू करना था और अपनी सार्वजनिक सेवकाई को आगे बढ़ाना था। 
जैसे यीशु के पास मनुष्य और दैवीय दोनों स्वभाव थे, वैसे ही हम नया जन्म पाए हुए लोगों के पास भी दो भिन्न स्वभाव है। हमारे पास देह और आत्मा दोनों है। हालाँकि, जब किसी व्यक्ति का आत्मा नया जन्म पाया हुआ नहीं होता फिर भी वह यीशु पर विश्वास करने का दावा करता है, तो यह व्यक्ति नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति नहोई है – अर्थात, उनके पास नया जन्म पाया हुआ आत्मा नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपनी आत्मा में नया जन्म पाए बिना यीशु पर विश्वास करने की कोशिश करता है तो यह व्यक्ति नीकुदेमुस की तरह है जो देह में नया जन्म पाने की कोशिश करता है, और यह कभी भी वास्तव में नया जन्म पाने वाला व्यक्ति नहीं हो सकता। हालाँकि यीशु खुद परमेश्वर था, फिर भी वह देह में मनुष्यों की तरह कमजोरियों से भरा हुआ था। उसी तरह, जब हम कहते है की हमने नया जन्म पाया है, तो उसका मतलब है की हमारी आत्मा ने नया जन्म पाया है, हमारी देह ने नहीं।
यदि यीशु पर विश्वास करने का दावा करनेवाले लोग नया जन्म पाए हुए होते, तो मैं उदार पादरी के रूप में जाने जाने की कोशिश करता। क्यों? क्योंकि मैं सच्चाई पर विश्वास न करनेवालों के द्वारा ज्यादा उतेजित नहीं होता, और इसलिए मैं यह आशा करते हुए की वे सत्य को जानेंगे अपने उपदेश में ज्यादा रूक्ष नहीं होता। लोग अपनी देह में कैसे पवित्र बन सकते है यह समझाते हुए मै बहुत ही शिष्ट, सज्जन, उदार, नरम, हास्यप्रद पादरी के रूप में जाना जाता। निसन्देह, मैं अपनी छवि को इस प्रकार सुन्दर बना सकता हूँ, लेकिन मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा। यह इसलिए नहीं की मेरे अन्दर आपके मन में कोई प्रभाव छोड़ने की कोई काबिलियत नहीं है, “यह पादरी वास्तव में यीशु की तरह पवित्र और दयालु है।” यह इसलिए क्योंकि मनुष्य की देह बदल नहीं सकती, और देह में दयालु, उदार, और कृपालु बनने का मतलब यह नहीं है की वह व्यक्ति नया जन्म पाई हुई धर्मी व्यक्ति है। कोई भी व्यक्ति देह में नया जन्म नहीं पा सकता। यह आत्मा है जिसे परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने क द्वारा नया जन्म पाना चाहिए।
जब अप यीशु पर विश्वास करते है, तब आपको सत्य जानना चाहिए। “तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा” (यूहन्ना ८:३२)। केवल परमेश्वर का सत्य ही हमें नया जन्म दे सकता है, हमारी आत्माओं को पाप के बंधन से छुडा सकता है, और हमें धर्मी की तरह नया जन्म दे सकता है। जब हम बाइबल को ठीक रीति से जानते है, विश्वास करते है और प्रचार करते है केवल तभी हम पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है और सच्चे विश्वास के साथ हमारा जीवन जी सकते है, और परमपवित्र स्थान के प्रायश्चित के ढकने के पास भी जा सकते है। पानी और आत्मा का सुसमाचार जो हमारी आत्मा को सत्य में नया जन्म देता है, और इस पर हमारे विश्वास की वजह से हमारे सारे पाप माफ़ होते है और हमें विश्वास के स्तर पर परमेश्वर के साथ जीवन जीने की अनुमति देता है। पानी और आत्मा का सुसमाचार जो हमारे हृदय में है वह हमें प्रभु के साथ आनन्द में आत्मिक और चमकते हुए स्तर पर नया जन्म पाए हुए परमेश्वर की संतान के रूप में जीवन जीने के योग्य बनता है।
यीशु पर आँख बांध करके विश्वास करना सही विश्वास नहीं है। मनुष्य के दृष्टिकोण से देखे तो, मेरे अन्दर बहुत सारी कमियाँ है। मैं यह केवल मेरे होठो से नहीं कह रहा, लेकिन जब भी मैं कुछ करता हूँ, तब मुझे वास्तव में समझ आता है की मेरे अन्दर बहुत सारी कमियाँ है। उदहारण के लिए, जब मैं बाइबल केम्प की तैयारी करता हूँ ताकि सारे संत और नए लोग आराम से वचन को सुन सके, परमेश्वर के अनुग्रह से अपने हृदय में प्रभावित हो, नया जन्म पाने की आशीष को पाए, और अपने देह और आत्मा में आराम पाकर वापस लौटे, तब मुझे पता चलता है की मैं बहुत सारी चीजो को भूल गया हूँ और मैंने पहले तैयारी नहीं की। जो चीज थोड़े श्रम को करके की जा सकती थी वह अक्सर तब याद आती है जब तैयारी का समय समाप्त होता है और केम्प शुरू होनेवाला होता है। मैं खुद के बारे में सोचता हूँ की क्यों मैंने उन चीजों के बारे में पहले नहीं सोचा और तयारी नहीं की, यदि तब मैं बाइबल केम्प की तैयारी में थोडा ओर ध्यान देता, तो सारे संत और नै आत्माए बहुत अच्छेसे परमेश्वर का वचन सुनते और उद्धार प्राप्त करते, और अच्छा समय बिताते। जब मैं पूरा दिन काम करता हूँ तब भी मेरी तरफ से कुशलता की कमी के कारण कई बार परिणाम मेरी अपेक्षा के मुताबिक़ नहीं अता। मैं खुद इस वास्तविकता के अवगत हूँ की मेरे अन्दर बहुत सारी कमियाँ है।
“मैं क्यों यह नहीं कर सकता? मुझे केवल थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है, फिर भी मैं यह क्यों नहीं कर सकता हूँ?” जब मैं वास्तव में सुसमाचार की सेवकाई करता हूँ तब कई बार मैं अपनी कमियाँ के बारे में जान पाता हूँ। इसलिए मैं खुद को पहचानता हूँ और यह स्वीकार करता हूँ, “मैं ऐसा ही हूँ। मैं ऐसा अयोग्य हूँ।” मैं केवल यह मेरे होंठो से कहने के लिए नहीं कहता, और मैं सदाचारी बनने का ढोंग भी नहीं कर रहा, लेकिन वास्तव में मैं ऐसा हूँ जो छोटी सी बात को भी ठीक तरीके से नहीं सुलजा सकता लेकिन लापरवाह हूँ। खुद की ओर देखते हुए, मैं अपनी कई सारी कमजोरियों को महसूस करता हूँ।
 

हम नीले कपड़े पर विश्वास के द्वारा पवित्रता प्राप्त कर सकते है
 
जब लोग अपने बारे में सोचते है, तब उन्हें लगता है की वे कोई भी गलती किए बिना सब कुछ कर सकते है। लेकिन जब वे वास्तव में कोई कार्य करते है, तब उनकी वास्तविक क्षमता और कमजोरियां प्रगट होती है। उन्हें पता चलता है की वे वास्तव में अयोग्य है और वे पाप और गलतियाँ करते है। जब लोगों को लगता है की वे सही कर रहे है तब भी वे यह सोचने के द्वारा खुद को धोख़ा देते है की वे अपने अच्छे विश्वास के कारण परमेश्वर के राज्य में जा रहे है। 
लेकिन देह कभी भी नहीं बदलती। कोई भी देह बिना कमजोरी के नहीं है, और यह हमेशा गलत करता है और अपनी कमजोरियाँ प्रगट करता है। यदि, शायद, आप सोचते है की आप देह में कुछ अच्छा कार्य करने के द्वारा प्रभु के राज्य में जा सकते है, तब आपको यह समझने की जरुरत है की आपकी देह ने चाहे जितना व्ही अच्छा कार्य किया हो लेकिन परमेश्वर के सामने वह व्यर्थ है। हमें जो चीज प्रभु के राज्य में प्रवेश करने के योग्य बनाती है वह केवल नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सच्चाई के वचन पर हमारा विश्वास जिसके द्वारा प्रभु ने हमें बचाया है। क्योंकि हमारे प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से बचाया है इसलिए हम केवल इस सत्य पर विश्वास करने के द्वारा पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है।
यदि परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से नहीं बचाया होता तो हम कभी भी पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर सकते थे। भले ही हमारा विश्वास कितना भी मजबूत क्यों ना हो, हम प्रवेश नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि यदि ऐसा होता, तो इसका मतलब होता की प्रवेश करने के लिए हरदिन हमारी देह का विश्वास अच्छा होना चाहिए। यदि हरदिन हमारा विश्वास अच्छा होता केवल तभी हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाते, तो फिर जिनकी देह कमज़ोर है वे कैसे अच्छा विश्वास कर पते और राज्य में प्रवेश कर पाते? जब हमारे पास पाप की माफ़ी पाने का कोइन रास्ता नहीं है, और जब भी हम पाप करते है तब वापस मुड़ने के लिए हमारे पास विश्वास नहीं है, तो फिर हम कैसे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश्ज करने के लोइए अच्छा विश्वास कर पाएंगे? हमारी देह पवित्र देह होनी चाहिए जो किसी भी हालत में पाप न करे, या हमें हरदिन पश्चाताप की प्रार्थना और उपवास करना चाहिए, लेकिनं किसकी देह इतनी पवित्र है और कौन यह सब कर सकता है?
यदि परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से नहीं बचाया होता तो हम में से कोई भी पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं कर पाता। हम ऐसे लोग हैं जिनका विश्वास एक पल के लिए अच्छा होता है लेकिन अगले पल गायब हो जाता है। जब हमारा विश्वास कुछ पल के लिए ही अच्छा होता है और फिर गायब हो जाता है, तो हम व्याकुल हो जाते है की हमारे पास सच्चा विश्वास है या नहीं, और अन्त में हमारे पास जो पहले विश्वास होता है उसे भी गवाँ देते है। अन्त में, हम यीशु पर विश्वास करने से पहले जितने पापी थे उससे भी ज्यादा पापी बन जाते है। लेकिन यीशु ने हमें जो अयोग्य पापी थे उन्हें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए अपने उद्धार की योजना के अनुसार सम्पूर्ण तरीके से बचाया है। उसने हमें हमारे पापों की माफ़ी दी है।
जब हमारे पास यह प्रमाण हो केवल तभी हम महायाजक के जैसे अपनी पगड़ी पर सोने की तख्ती लगा सकते है जिस पर लिखा हुआ होता है, “यहोवा के लिए पवित्र” (निर्गमन २८:३६-३८)। तब हम अपना याजकीय पद प्राप्त कर सकते है। जो लोग याजक के रूप में परमेश्वर की सेवा करते समय दुसरे लोगों के सामने अपने “यहोवा के लिए पवित्र” होने की गवाही दे सकते है वे वही लोग है जिनके हृदय में यह प्रमाण है की उन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा अपने पापों की माफ़ी पाई है।
महायाजक की पगड़ी से एक सोने की तख्ती लगी हुई थी, और इस तख्ती को पगड़ी के साथ जिसने बांधे रखा था वह नीला धागा था। तो फिर परमेश्वर ने क्यों कहा की पगड़ी को नीले धागे से बांधो? हमें बचाने के लिए हमारे प्रभु के लिए सबसे आवश्यक चीज थी यह नीला धागा, और यह नीला धागा यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है जिसके द्वारा उसने मनुष्यों के सारे पाप अपने ऊपर लिए थे। यदि हमारे प्रभु ने नए नियम में अपने बपतिस्मा के द्वारा पुराने नियम की तरह हाथ रखवाने की रीति से हमारे पापों को मिटाया नहीं होता; तो हम यहोवा से कभी भी पवित्रता प्राप्त नहीं कर पाते फिर चाहे हम कितना भी यीशु पर विश्वास क्यों न करते हो। इसी लिए पगड़ी के साथ सोने की तख्ती को जोड़ा गया था। और जो कोई भी महायाजक को सोने की तख्ती के साथ देखता, जिस पर लिखा हुआ था “यहोवा के लिए पवित्र” वह उन्हें याद दिलाता था की उन्हें भी पापों की माफ़ी पाकर परमेश्वर के सामने पवित्र बनना है। और यह लोगों को सोचने पर मजबूर करता था की वे कैसे परमेश्वर के सामने पवित्र बन सकते है।
हमें भी यह याद करना है की हम कैसे धर्मी बने है। हम धर्मी कैसे बने है? आइए मत्ती ३:१५ पढ़ते है, “यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली।” यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वार हम सब को हमारे पापों से बचाया है। क्योंकि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को खुद पर ले लिया था, इसलिए जो लोग इस पर विश्वास करते है वे पापरहित है। यदि यीशु ने बपतिस्मा नहीं लिया होता, तो हम यह कहने की हिम्मत कैसे करते की हम पापरहित है? क्या अपने केवल क्रूस पर यीशु की मृत्यु का अंगीकार करके आंसू बहाकर पाप की माफ़ी को प्राप्त किया है? ऐसे बहुत सारे लोग है जो यीशु की मृत्यु से दुखी नहीं होते जैसे की उनका उसके साथ कोई रिश्ता ही नहीं है, वे अपने पूर्वजो की मौत को याद करके आँसू बहाते है, और जब वे बीमार पड़ जाते है या किसी मुसीबत का सामना करते है तब उन्हें बहुत तकलीफ होती है। जब कभी भी आप इस तरह रोने का ढोंग करो, या फिर आप वास्तव में यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जानर से दुखी हो, तो आपके पाप इस तरह कभी भी मिटाए नहीं जा सकते। 
जिस तरह “यहोवा के लिए पवित्र” लिखी हुई सोने की तख्ती महायाजक की पगड़ी से नीले धागे के द्वारा बाँधी जाति थी, उसी तरह जो हमारे पाप मिटाता है और हमें पवित्र बनाता है वह है यीशु का बपतिस्मा। हमारे हृदयों ने पाप की माफ़ी पाई है क्योंकि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया, क्योंकि यहोवा ने हमारे पाप का बोझ उस पर लाद दिया क्योंकि जगत के सारे पाप यीशु के बपतिस्मा के द्वारा उसके ऊपर डाले गए थे। कोई फर्क नहीं पड़ता की हमारे हृदय की भावना कितनी खाली है, ओर कोई फर्क नहीं पड़ता की हम अपने कार्य में कितने अयोग्य है, हम बाइबल में लिखे गए नीले धागे के वचन के द्वारा धर्मी बने है और सम्पूर्ण रीति से बचाए गए है। जब हम अपनी देह की ओर देखते है तब हम अभिमान नहीं कर सकते, लेकिन क्योंकि यह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास हमारे हृदय में है – अर्थात, क्योंकि हमारे पास पानी और आत्मा का सम्पूर्ण सुसमाचार है जो हमसे कहता है की यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया और क्रूस पर हमारा न्याय सहा – इसलिए हम निडरता पूर्वक और बिना डर के सुसमाचार के बारे में बोल सकते है। क्योंकि हमारे पास पानी और आत्मा का सुसमाचार है इसलिए हम विश्वास से धर्मी के रूप में जीवन जी रहे है, और लोगों को इस धर्मी विश्वास का प्रचार कर सकते है।
हम हमारे प्रभु के अनुग्रह के लिए पर्याप्त धन्यवाद नहीं कर सकते। क्योंकि हमारा उद्धार हमारे पास संयोग से नहीं आया, इसलिए हम इसके ओर भी ज्यादा धन्यवादी है।जो उद्धार हमने प्राप्त किया है वह साधारण नहीं है की कोई भी व्यक्ति गलत विश्वास करने के बावजूद भी इसे पाए। व्यक्ति अपनी मरजी से “प्रभु प्रभु” चिल्लाए, उसका यह मतलब नहीं है की जो कोई भी इस तरह करेगा वह उद्धार पाएगा। क्योंकि हमारे हृदय में यह प्रमाण है की पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा हमारे पाप मिट गए है, की प्रभु ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से हमें विस्तार पूर्वक बचाया है, इसलिए हम इस महान उद्धार के लिए बहुत ही धन्यवादित है।
बाइबल हमें कहती है की जो कोई भी परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह पर विश्वास करता है उसके हृदय में यह गवाही है (१ यूहन्ना ५:१०)। यदि हमारे हृदय में कोई गवाही नहीं है, तो हम परमेश्वर को झूठा ठहराते है, इसलिए हम सब के हृदय में यह गवाही होनी चाहिए। उसी रूप से, जो लोग आपसे प्रमाण माँगते है उनसे प्रतिघात करने का कोई कारण नहीं है, “आपने उद्धार पाया है उसका प्रमाण मुझे दिखाइए। आपने कहा था की जब लोग पापो की माफ़ी पाते है, तब वे उपहार के तौर पर पवित्र आत्मा प्राप्त करते है, और इसलिए उद्धार का स्पष्ट प्रमाण है। मुझे यह प्रमाण दिखाइए।” आप निम्नलिखित तरीके से निडरता पूर्वक प्रमाण दिखा सकते है: “मेरे अन्दर पानी और आत्मा का सुसमाचार है जिसके द्वारा यीशु ने मुझे सम्पूर्ण तरीके से बचाया है। क्योंकि मैं उसके द्वारा सम्पूर्ण तरीके से बचाया गया हूँ, इसलिए मेरे अन्दर कोई पाप नहीं है।”
यदि आपके हृदय में आपके उद्धार का प्रमाण नहीं है, तो आपने उद्धार नहीं पाया। कोई फर्क नहीं पड़ता को लोग कितने उत्साह से यीशु पर विश्वास करते है, यह अपने आप में उनके उद्धार का निर्माण नहीं करता। यह केवल एकतरफ़ा प्रेम है। यह एक ऐसा प्रेम है जो यह परवाह नहीं करता की दूसरा व्यक्ति कैसा अनुभव कर रहा है। जब हम जिसे प्रेम नहीं करर्ते वे हमसे कुछ अपेक्षा करते है, प्रेम की अनुभूति करते है, और ऐसे हमारी ओर देखते है की वह प्रेम करने के लिए मर रहा हो, तो इसका मतलब यह नहीं है की हमें भी बदले में उसे प्रेम करना है। उसी तरह, परमेश्वर उन लोगों को अपनी बाहों में नहीं लेता जिन्होंने अपने पाप की माफ़ी नहीं पाई है क्योंकि उनके हृदय परमेश्वर के लिए तड़प रहे है। यही है परमेश्वर के लिए पापियों का एकतरफ़ा प्रेम।
जब हम परमेश्वर को प्रेम करते है, तब हमें उसके वचन पर विश्वास करने के द्वारा उसे प्रेम करना चाहिए। उसके लिए हमारा प्रेम एकतरफ़ा नहीं होना चाहिए। हमें उससे हमारे प्रेम के बारे में कहना चाहिए, और हमें उससे प्रेम करने से पहले यह पता करना चाहिए की क्या वह हमसे प्रेम करता है की नहीं। यदि हम अपना सारा प्रेम किसी ऐसे व्यक्ति को दे जो वास्तव में हमसे प्रेम नहीं करता, तो अन्त में हमारा हृदय टूट जाएगा।
हमारे प्रभु ने हमें हमारे पाप से दूर करके हमें अपना अनुग्रह दिया है ताकि उसके लिए हमारा न्याय न हो। उसने हमें परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने और परमेश्वर के साथ जीवन जीने की अनुमति दी है, और उसने हमें उपहार दिया है जो हमें परमेश्वर के अनुग्रह से पाप की माफ़ी प्राप्त करने के लिए योग्य बनाता है। परमेश्वर के उद्धार ने हमें अनगिनत स्वर्ग के आत्मिक आशीष दिए है। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर ने हमें जो उद्धार दिया है केवल वही हमें यह सारी आशीष प्राप्त करने के लिए योग्य बनाता है।
 

उद्धार जो यीशु मसीह खुद हमारे पास लेकर आया
 
हमारे प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से बचाया है। उसने हमें तिन भिन्न कपड़ो से बने उद्धार को दिया है। यह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का उद्धार ओर कुछ नहीं लेकिन परमेश्वर के द्वारा दिया गया उद्धार का उपहार है। यह उद्धार का उपहार है जिसने हमें पवित्र स्थान में प्रवेश करने और वहाँ रहने के योग्य बनाया है।
पानी और आत्मा के सुसमाचार ने आपको और मुझे धर्मी बनाया है। यह हमें परमेश्वर की कलीसिया में आने और शुध्ध जीवन जीने की अनुमति देता है। और यह सच्चा सुसमाचार हमें परमेश्वर के आत्मिक वचन को मनन करने और उसके अनुग्रह को प्राप्त करने के लिए भी योग्य बनाता है। यह हमें परमेश्वर के अनुग्रह के सिंहासन के सामने जाने और प्रार्थना करने के लिए भी योग्य बनाता है, और इस प्रकार हमें विश्वास देता है जिसके द्वारा हम खुद से परमेश्वर के अनुग्रह को पा सकते है। केवल हमारे उद्धार के द्वारा ही परमेश्वर ने हमें यह महान आशीष दी है। इसी लिए उद्धार बहुत ही महत्वपूर्ण है।
यीशु ने हमसे कहा है की हम अपने विश्वास का घर चट्टान पर बनाए (मत्ती ७:२४)। यह चट्टान ओर कुछ नहीं लेकिन पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा आता हमारा उद्धार है। उसी रूप से, हमें उद्धार पाकर हमारे विश्वास के जीवन को जीना चाहिए – उद्धार पाने के द्वारा धर्मी बनना, उद्धार पाने के द्वारा अनन्त जीवन का आनन्द उठाना, और उद्धार पाने के द्वारा स्वर्ग में प्रवेश करना।
इस संसार के अन्त का समय बहुत ही नजदीक है। इसलिए, इस युग में, लोगों के पास वचन के द्वारा उद्धार पाने के ओर भी कई सारे कारण है। कुछ ऐसे लोग है जो कहते है की कोई भी व्यक्ति नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े की सच्चाई को जाने बिना केवल यीशु पर विश्वास करने से उद्धार पा सकता है, और इसलिए विश्वास के जीवन के बारे में बात करने की जरुरत नहीं है, क्योंकि इस तरह से उद्धार पाना उपयुक्त है। 
हालाँकि, मैं बार बार यह बात दोहराता हूँ उसका कारण है की जिन्होंने अपने हृदय में पाप की माफ़ी को प्राप्त किया है केवल वे लोग ही परमेश्वर के द्वारा स्वीकृत विश्वास का जीवन जी सकते है। क्योंकि जिन संतों ने पाप की माफ़ी पाई है उनके हृदय पवित्र मंदिर है जहाँ पवित्र आत्मा निवास करता है, नया जन्म पाए हुए संतों को इस पवित्रता को अशुध्द न करने के लिए विश्वास से अपना जीवन जीना चाहिए।
धर्मी कैसे जीवन जीता है यह बात पापी कैसे जीवन जीता है इस बात से बिलकुल भिन्न है। परमेश्वर के दृष्टिकोण से, जिस तरह पापी जीवन जीते है वह उसके स्तर से बिलकुल निचे है। उनका जीवन केवल ढोंग से भरा हुआ होता है। वे व्यवस्था के मुताबिक़ जीने का सख्त प्रयास करते है। उन्हें किस तरह चलना चाहिए, किस तरह अपना जीवन जीना चाहिए, किस तरह उन्हें बात करनी चाहिए, और किस तरह उन्हें हँसना चाहिए इन बारे में खुद के मापदंड बनाते है। 
लेकिन यह धर्मी जिस तरह जीवन जीता है उससे कई दूर की बात है। परमेश्वर धर्मी जन को विस्तार से कहता है. “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुध्धि के साथ प्रेम रख।” यह जीवन का तरिका है जो परमेश्वर धर्मी जन को देता है। यह हम धर्मियों के लिए उचित है की हम अपना जीवन परमेश्वर से अपने पूरे हृदय से प्रेम करके, और अपनी सारी सामर्थ्य और इच्छा से उसकी इच्छा को पूरा करके जीवन जिए। हमारे पडोशी को बचाने के लिए हमें उसके कार्य में अनगिनत निवेश करना चाहिए। यही है मसीहियों का जीवन।
यदि हम उस स्तर पर बने रहे जहाँ हम सोचते है की हमारे लिए बस इतना जरुरी है की हम पाप ना करे, तो हम नया जन्म पाए हुए मसीही व्यक्ति के जैसे जीवन नहीं जी सकते। मैंने नया जन्म पाया उससे पहले, मैं रूढ़िवादी प्रिस्बीटेरियन संप्रदाय में विधि सम्मत जीवन जीता था, और जहाँ तक व्यवस्था के जीवन की बात थी, मैं उसे पूर्ण रूप से पालन करता था। आज-कल, लोग ऐसा नहीं करते, लेकिन क्योंकि मैं बहुत पहले से धर्मी जीवन जी रहा था, इसलिए मैं हरदिन व्यवस्था का पालन करने में तत्पर था। मैं व्यवस्था के प्रति इतना आज्ञाकारी था की मैं प्रभु के दिन कभी भी कार्य नहीं करता था, जैसे की व्यवस्था आज्ञा देती है की सब्त के दिन को पवित्र मान इसलिए मैं इतवार के दिन अपनी कार में भी नहीं जाता था। यदि मैं आपसे कहूं की जैसा मैंने जीवन जिया वैसा आप भी जिए, तो ऐसा कोई नहीं होगा जो इस प्रकार विधि सम्मत जीवन जी पाए। नया जन्म पाने से पहले मेरा जीवन इस प्रकार विधि सम्मत था। हालाँकि, कोई फर्क नहीं पड़ता की मैंने कितनी पवित्रता से अपना धार्मिक जीवन जिया है, ऐसे जीवन का परमेश्वर की इच्छा के साथ कोई लेना देना नहीं है और यह व्यर्थ है।
पाठको, क्या आपके पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास है? क्योंकि यीशु का उद्धार इन तिन कपड़ो में निहित है, इसलिए हम विश्वास के द्वारा पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है। हमारा उद्धार २,००० साल पहले ही परिपूर्ण हो गया है। हम यीशु मसीह को जाने उससे पहले ही उसने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को खुद पर ले लिया और क्रूस पर मरने के द्वारा हमारे पाप के न्याय को सहा।
 

पाप से उद्धार यीशु मसीह में है
 
जब वे लोग तम्बू में प्रवेश करते है जिन्होंने नया जन्म नहीं पाया है, तब वे इसके आँगन के द्वार के जरिए प्रवेश नहीं करते, लेकिन वे अवैध तरीके से बाड़ को फान के प्रवेश करते है। वे कहते है, “क्यों बाड़ का बटी हुई सनी का कपड़ा इतना सफ़ेद है? यह बहुत बोझिल है। उनको इसे लाल या नीले रंग से रंगना चाहिए था। आज कल उसी का फैशन है। लेकिन यह बाड़ बहुत ही सफ़ेद है! यह नज़रों में बहुत ही चुभ रहा है। और क्यों यह इतना ऊँचा है? यह २.२५ मीटर से भी ज्यादा है। मेरी खुद की ऊंचाई २ मीटर भी नहीं है; जब बाड़ इतनी ऊँची है तो मैं कैसे अन्दर जा सकता हूँ? ठीक है, मैं सीढ़ी का इस्तेमाल कर के ऊपर चढ़ जाउंगा!” 
ऐसे लोग अपने अच्छे कार्यों की मदद से प्रवेश करने की कोशिश करते है। वे अपनी भेंट, अच्छे कार्य, और धीरज से तम्बू के आँगन की बाड़ को फानने की कोशिश करते है और वे यह कहते हुए बाड़ के ऊपर से कूदते है, “मैं किसी भी तरह से यह २.२५ मीटर की उंचाई से छलांग लगाउंगा।” इसलिए तम्बू के आँगन में प्रवेश करने के बाद, वे पीछे मुड़ते है और होमबलि की वेदी को देखते है। फिर वे वेदी से अपनी आँखे हटाते है और पवित्र स्थान की ओर देखते है, और सबसे पहले वे उनके सामने पड़ी हुई हौदी को देखते है।
तम्बू के आँगन के बाड़े के खम्भों की उंचाई २.२५ है, लेकिन पवित्र स्थान जहाँ परमेश्वर निवास करते है उसके द्वार के खम्भे और परदे की ऊंचाई ४.५ मीटर है। यदिन लोग चाहे तो अपनी मरजी से तम्बू के आँगन में प्रवेश कर सकते है। लेकिन यदि वे २.२५ मीटर ऊँची बाड़ से छलांग लगाकर तम्बू के आँगन में प्रवेश करते है, लेकिन जब वे वहाँ प्रवेश करने की कोशिश करते है जहाँ परमेश्वर निवास करता है, तब उनका सामना ४.५ मीटर ऊँचे खम्भों और पवित्र स्थान के परदे से होगा। लोग अपनी कोशिश से २.५ मीटर उंचाई से छलांग लगा सकते है। लेकिन वे परमेश्वर के द्वारा नियुक्त ४.५ मीटर उंचाई से छलांग नहीं लगा सकते। यह उनकी सीमा है।
इसका मतलब है की जब हम पहले यीशु पर विश्वास करते है, तब हम केवल धर्म के रूप में विश्वास करते है। कुछ लोग यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में भी विश्वास करते है, और विश्वास करते है की उद्धारकर्ता चार संतो में से एक है। लोग कैसे विश्वास करते है इसकी परवाह किए बिना, उनके पास उनका खुद का विश्वास है, लेकिन वे इस विश्वास के द्वारा वास्तव में नया जन्म पाया हुआ व्यक्ति नहीं बन सकते। 
सच में नया जन्म पाने के लिए, उन्हें अपने विश्वास के द्वारा नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वार से गुजरना चाहिए। हम परमेश्वर के सामने यह विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पाए हुए है की यीशु हमारा उद्धारकर्ता है और सत्य का द्वार है, और उसने हमें पानी, लहू और आत्मा से बचाया है। तिन कपड़ों में प्रगट हुए यीशु के कार्यों पर विश्वास करनेवाला विश्वास ओर कुछ नहीं लेकिन पानी, लहू, और आत्मा का विश्वास है। लोग किसी ओर चीज पर विश्वास करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन वास्तव में ऐसा कोई सकारात्मक प्रमाण नहीं है की वे इस प्रकार विश्वास करने के द्वारा उद्धार पाएंगे और महान आशीष पाएंगे। केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे विश्वास के द्वारा हम परमेश्वर की स्वीकृति पा सकते है और महान अनुग्रह और परमेश्वर के उद्धार की आशीष पा सकते है। पानी और आत्मा के सुसमाचार के इस विश्वास का उद्देश्य हमें परमेश्वर का अनुग्रह देना है।
क्या आप तम्बू को केवल एक साधारण समकोणीय आँगन समझते है, जिसके अन्दर एक घर खड़ा है? यह आपके विश्वास के लिए फायदेमंद नहीं है। तम्बू हमसे सम्पूर्ण विश्वास के बारे में कहता है, और हमें जानना चाहिए की यह विश्वास वास्तव में क्या है।
तम्बू को अच्छी तरह न जाने से, आप सोच सकते है की तम्बू की उंचाई उसके बाड़ के जीतनी ही होगी, २.२५ मीटर। लेकिन ऐसा नहीं है। भले ही हम तम्बू के अन्दर न जाए लेकिन बाड़ के बहार से ही तम्बू को देखे, तो हम देख पाएंगे की तम्बू की उंचाई बाड़ की उंचाई से दोगुनी है। भले ही हम तम्बू के निचे के भाग को न देख पाए, लेकिन फिर भी हम उसके द्वार को स्पष्ट रूप से देख सकते है, जो हमें बताते है की तम्बू की ऊँचाई उसके आँगन की बाड़ से बड़ी है। 
जिन्होंने यीशु पर योग्य रीति से विश्वास करने के द्वारा अपने पापों की माफ़ी पाई है और इस प्रकार तम्बू के आँगन के द्वार से प्रवेश किया है उन्हें होमबलि की वेदी और हौदी के पास अपने विश्वास की पुष्टि करनी चाहिए, और केवल तभी वे पवित्र स्थान में प्रवेश कर सकते है। पवित्र स्थान में प्रवेश करने के लिए, खुद का नकार करना आवश्यक है। पवित्र स्थान के अन्दर पाए जाने वाले पात्र पवित्र स्थान के बहार पाए जाने वाले पात्र से विशिष्ट है। 
क्या आपको पता है की शेतान सबसे ज्यादा किसे नफ़रत करता है? वह नफ़रत करता है पवित्र स्थान के अन्दर और बहार खिंची है सीमा से। क्योंकि परमेश्वर उनके बिच काम करता है जो पवित्र स्थान को अन्दर और बहार से अलग करते है, शैतान इस सीमा से नफ़रत करता है और लोगों को यह सीमा बनाने से रोकता है। लेकिन यह याद रखे: परमेश्वर उनके द्वारा कार्य करता है जो विश्वास की इस सीमा को खींचते है। परमेश्वर ऐसे लोगों से प्रसन्न होता है जो इस प्रकार की स्पष्ट सीमा को खींचते है, और वह उन पर अपनी आशीष को उंडेलता है ताकि वे अपने विश्वास के साथ पवित्र स्थान के अन्दर रह पाए।
विश्वास करे की तम्बू के बहार के आँगन के सारे पात्र और उसके लिए इस्तेमाल हुई सारी सामग्री परमेश्वर के द्वारा तैयार और नियोजित की गई थी ताकि लोग अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त कर सके। और जब आप इस पर विश्वास करने के द्वारा पवित्र स्थान में प्रवेश करते है, तब परमेश्वर आपके ऊपर ओर भी ज्यादा अनुग्रह और आशीष उंडेलता है।
 

प्रायश्चित का ढकना वह जगह है जहाँ हम उद्धार का अनुग्रह प्राप्त करते है
 
परमपवित्र स्थान में, दो करुबों ऊपर से निचे साक्षी के संदूक की ओर देखते हुए अपनी पंख फैलाए खड़े है। दो करुबों के बिच की खाली जगह को प्रायश्चित का ढकना कहते है। प्रायश्चित का ढकना वह जगह है जहाँ परमेश्वर हमें अपना अनुग्रह देता है। साक्षी के संदूक का ढकना लहू से तरबतर था, क्योंकि महायाजक इस्राएल के लोगों के लिए अर्पण किए हुए बलिदान के लहू को प्रायश्चित के ढकने पर सात बार छिड़कता था। फिर परमेश्वर प्रायश्चित के ढकने के ऊपर उतरता था और इस्राएल के लोगों के ऊपर अपना अनुग्रह उंडेलता था। जो लोग इस पर विश्वास करते है उनके लिए परमेश्वर की आशीष, सुरक्षा, और मार्गदर्शन की शुरुआत होती है। तब से वे परमेश्वर के सच्चे लोग बनते है और पवित्र स्थान में प्रवेश करने के योग्य बनते है। 
इस संसार के बहुत सारे मसीहियों में, कुछ ऐसे लोग भी है जिनका विश्वास उन्हें पवित्र स्थान में प्रवेश करने की अनुमति देता है, जब की दूसरों के पास ऐसा विश्वास नहीं है जिसके द्वारा वे पवित्र स्थान में प्रवेश कर सके। आपके पास किस प्रकार का विश्वास है? हमें ऐसे विश्वास की आवश्यकता है जो उद्धार की स्पष्ट सीमा खींचे और परमेश्वर के पवित्र स्थान में प्रवेश करे, क्योंकि ऐसा करने के द्वारा ही केवल हम परमेश्वर से आशीष पा सकते है।
लेकिन इस प्रकार का विश्वास होना आसान बात नहीं है। क्योंकि जब लोग उद्धार की स्पष्ट सीमा खींचते है तब शैतान नफ़रत करता है, वह निरंतर इस सीमा को मिटाने की कोशिश करता है। “आपको इस प्रकार विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है। सब लोग इस प्रकार विश्वास नहीं करते, तो फिर आप क्यों इस पर ज्यादा महत्त्व देते है और बार बार इसे करते है? अधिक परिश्रम न करे, लोगों के साथ चले।” ऐसी बात करने के द्वारा, शैतान हमारे देह की कमजोरी को प्रगट करता है और उन्हें मुसीबत बनाने की कोशिश करता है। क्या आप ऐसे व्यक्ति बनेंगे जो शैतान की भ्रमित बात को सुनते है जो हमें परमेश्वर से अलग करने की कोशिश करता है? या फिर आप हरदिन अपने उद्धार को याद करके, कलीसिया के साथ जुड़कर, परमेश्वर के वचन का पालन करके, प्रार्थना का जीवन जिएंगे, और उस अनुग्रह को प्राप्त करेंगे जो परमेश्वर ने आपके लिए रखा है?
वास्तव में, जिन्होंने अपने पापों की माफ़ी पाई है वे जितना हो सके उतना अपने उद्धार पर मनन करना पसंद करते है। वे बार बार पानी और आत्मा के सुसमाचार पर मनन करते है। सुसमाचार का मनन करना अच्छा और महत्वपूर्ण है। क्या आप ऐसे नहीं है? “अरे, फिर से वाही कहानी, जब हमने उद्धार पाया था? कहानी की सामग्री और पृष्ठभूमि भिन्न हो सकते है, लेकिन यह वही पुरानी कहानी है। मैं इससे पाक चुका हूँ!” 
क्या ऐसा कोई है जो इस प्रकार कहता है? यदि मुझे हरदिन मेरे बारे में कहानी कहानी पड़े तो मैं माफ़ी मांगता हूँ, लेकिन जब बाइबल कहती है की हमें हरदिन हमारे उद्धार पर मनन करना है, तो मैं क्या कर सकता हूँ? जब पुराना और नया दोनों नियम हमसे पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में बात करते है, तब परमेश्वर के सामने दुष्टता यह है की कोई इसके अलावा किसी ओर चीज के बारे में प्रचार करे। बाइबल के सारे वचन पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में बताते है। “उद्धार, विश्वास का जीवन, विश्वास, आत्मिक जीवन, शैतान के विरुध्ध युध्ध, स्वर्ग, महिमा, और पवित्र आत्मा” – संतो के यह मुख्य विषय इस सच्चे सुसमाचार से जुड़े हुए है। इन चीजो को छोड़ किसी ओर चीज के बारे में बात करना ओर कुछ नहीं लेकिन पाखंड और झूठी सिक्षा है। जो समान दीखता है लेकिन जिसके तत्व भिन्न है वह ओर कुछ नहीं लेकिन झूठी सिक्षा है। जो सुसमाचार बहार से पानी और आत्मा के सुसमाचार के जैसा दिखता है लेकिन अन्दर से अलग है वह झूठे धर्म का झूठा सुसमाचार है।
यह कितना अद्भुत होगा की परमेश्वर की कलीसिया हरदिन भरमाने वाले झूठे धर्म के वचन नहीं लेकिन परमेश्वर के वचन का प्रसार करे? यह एक आशीष है की हम परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़े हुए है, परमेश्वर के शुध्ध वकाहं को सुनते है और विश्वास करते है। हमेशा पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करने के द्वारा, परमेश्वर की कलीसिया संतों को हरदिन परमेश्वर के अनुग्रह के बारे में सोचने के लिए, उससे प्रार्थना करने के लिए, और उसका आदर करने के लिए, और ऐसा जीवन जीने के लिए योग्य बनाती है जो दुष्टता की ओर नहीं जा रहा। क्या आप खुश नहीं है की अपने एक बार फिर से सत्य के वचनों को सुना और उस पर विश्वास किया जो आपको पाप की माफ़ी पाने के लिए अनुमति देते है? मैं भी बहुत खुस हूँ।
यदि मुझे इस पानी और आत्मा के सुसमाचार के अलावा किसी ओर चीज का प्रचार करने के लिए विवश किया जाए, तो मुझे बहुत दुःख होगा। यदि मुझे उद्धार के वचन नहीं लेकिन किसी मनुष्य निर्मित सिक्षा का प्रसार करने के लिए विवश किया जाए, तो मैं वहाँ से भागना चाहूँगा। निसन्देह, मेरे पास इसके अलावा बात करने के लिए ओर कुछ नहीं है। ऐसे बहुत सारे मानववादी समस्याए है जिसे में बता सकता हूँ, लेकिन यह हम नया जन्म पाए हुए लोगों के लिए अनावश्यक और झूठी सिक्षा है। 
केवल यही पानी और आत्मा का सुसमाचार जिसके द्वारा यीशु, खुद परमेश्वर ने, हमें परमेश्वर के बहुमूल्य वचन में बचाया है जिसे बार बार चबाने पर भी वह हमें मिठाश देता है। ऐसी बहुत सारी दूसरी कहानी भी है जो मैं आपसे कह सकता हूँ, लेकिन जब मैं पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में बात करता हूँ जो हमें उद्धार देता है तब मुझे अच्छा लगता है। मैं बहुत ही उत्तेजित होता हूँ। जब मैं इस उद्धार के बारे में बात करता हूँ तब मैं सबसे ज्यादा आनंदित होता हूँ, क्योंकि यह मेरी पुरानी यादों को ताजा करता है, मुझे याद दिलाता है की कैसे प्रभु ने मुझे बचाया, फिर से एक बार उसे धन्यवाद देता हूँ, और फिर से उद्धार की रोटी खाता हूँ।
मुझे यकीन है की जब आप उद्धार के वचन को सुनेंगे तब आपको भी पसंद आएगा। शायद आप शिकायत कर रहे है की हरदिन एक जैसे ही कहानी है, लेकिन गहराई में, आप सोचते है, “अब मैंने इसे फिरसे सुना है, यह ओर भी अच्छी है। शुरू में यह उतनी अच्छी नहीं थी, लेकिन जब मैंने इसे निरंतर सुनना ज़ारी रखा, तब मुझे पता चला की किसी ओर कहानी को सुनना इससे ज्यादा बहेतर नहीं हो सकता। मैंने सोचा की आजकी कहानी कुछ खास होगी, लेकिन निष्कर्ष ने मुझे बताया की यह फिर से वही कहानी है। लेकिन फिर भी, मैं खुस हूँ।” मुझे यकीन है की आपका हृदय यही अनुभव कर रहा है।
भाइयों और बहनों, मैं यहाँ जो प्रचार कर रहा हूँ यह यीशु के वचन है। प्रचारकों को यीशु के वचन का प्रचार करना चाहिए। परमेश्वर की कलीसिया को ओर कुछ नहीं लेकिन पानी और आत्मा के लिखित वचन के द्वारा प्रचार करना है। अब हम कलीसिया में हमारे विश्वास के जीवन को जीते है। पवित्र स्थान में प्रवेश करके, अपने पुष्पकोश के साथ सोने से बने दीवट के निचे उजियाला करना, धूप वेदी के पास प्रार्थना करना, परमेश्वर के मंदिर में जाना, उसकी आराधना करना, और इस सोने के घर में रहना – यही है हमारे विश्वास का जीवन। 
अप और मैं अब परमेश्वर के द्वारा दिया गया विश्वास का जीवन जी रहे है। पाप की माफ़ी को प्राप्त करना और विश्वास का योग्य जीवन जीना ही परमेश्वर के घर के बारे में है। “इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्‍ट होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” (२ कुरिन्थियों ४:१६)। तम्बू में प्रगट हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर हमारे विश्वास के साथ, हमारी आत्माए परमेश्वर के घर में चमकती हुई जीवन जी रही है। 
हमें हमारे सारे पाप और दण्ड से बचाने के लिए मैं हमेशा के लिए परमेश्वर को अपना धन्यवाद देता हूँ। हाल्लेलूयाह!