उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-3] (निर्गमन ३४:१-८) यहोवा ज़िंदा परमेश्वर

(निर्गमन ३४:१-८)
“फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “पहली तख़्तियों के समान पत्थर की दो और तख़्तियाँ गढ़ ले; तब जो वचन उन पहली तख़्तियों पर लिखे थे, जिन्हें तू ने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख़्तियों पर भी लिखूँगा। सबेरे तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे सामने खड़ा होना। तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन् पर्वत भर पर कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरने पाएँ।” तब मूसा ने पहली तख़्तियों के समान दो और तख़्तियाँ गढ़ीं; और भोर को उठकर अपने हाथ में पत्थर की वे दोनों तख़्तियाँ लेकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार सीनै पर्वत पर चढ़ गया। तब यहोवा ने बादल में उतरकर उसके संग वहाँ खड़ा होकर यहोवा नाम का प्रचार किया। यहोवा उसके सामने होकर यों प्रचार करता हुआ चला, “यहोवा, यहोवा, ईश्‍वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करुणामय और सत्य, हज़ारों पीढ़ियों तक निरन्तर करुणा करनेवाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करनेवाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा; वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन् पोतों और परपोतों को भी देनेवाला है।” तब मूसा ने तुरन्त पृथ्वी की ओर झुककर दण्डवत् किया”।
 
 
हमें यह पता लगाने की जरुरत है की हम जिस परमेश्वर पर विश्वास करते है वह वास्तव में कौन है
 
आइए हम निर्गमन ३:१३-१६ की ओर मुड़कर शुरू करते है: “मूसा ने परमेश्‍वर से कहा, “जब मैं इस्राएलियों के पास जाकर उनसे कहूँ, ‘तुम्हारे पितरों के परमेश्‍वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है,’ तब यदि वे मुझ से पूछें, ‘उसका क्या नाम है?’ तब मैं उनको क्या बताऊँ?” परमेश्‍वर ने मूसा से कहा, “मैं जो हूँ सो हूँ।” फिर उसने कहा, “तू इस्राएलियों से यह कहना, ‘जिसका नाम मैं हूँ है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है’।” फिर परमेश्‍वर ने मूसा से यह भी कहा, “तू इस्राएलियों से यह कहना, ‘तुम्हारे पितरों का परमेश्‍वर, अर्थात् अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर, और याक़ूब का परमेश्‍वर, यहोवा, उसी ने मुझ को तुम्हारे पास भेजा है। देख, सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा।’ इसलिये अब जाकर इस्राएली पुरनियों को इकट्ठा कर, और उनसे कह, ‘तुम्हारे पितर अब्राहम, इसहाक, और याक़ूब के परमेश्‍वर, यहोवा ने मुझे दर्शन देकर यह कहा है कि मैं ने तुम पर और तुम से जो बर्ताव मिस्र में किया जाता है उस पर भी चित्त लगाया है”।
 
 
यहोवा परमेश्वर कौन है?
 
हिब्रू में प्रभु का नाम याहवेह है, पारंपरिक तौर पर यहोवा, और याहवेह का मतलब होता है की जिसका अस्तित्व खुद से है, सृष्टिकर्ता जिसने पूरा ब्रह्मांड और उसके अन्दर की सारी चीजो की सृष्टि की है।
आइए निर्गमन ६:२-७ देखते है: “परमेश्‍वर ने मूसा से कहा, “मैं यहोवा हूँ। मैं सर्वशक्‍तिमान ईश्‍वर के नाम से अब्राहम, इसहाक, और याक़ूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ। और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात् कनान देश जिसमें वे परदेशी होकर रहते थे, उसे उन्हें दे दूँ। इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं, उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है। इस कारण तू इस्राएलियों से कह, ‘मैं यहोवा हूँ, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूँगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊँगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूँगा, और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूँगा, और मैं तुम्हारा परमेश्‍वर ठहरूँगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया”।
ऊपर वचन ३ कहता है, “मैं सर्वशक्‍तिमान ईश्‍वर के नाम से अब्राहम, इसहाक, और याक़ूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ”। किंग जेम्स वर्ज़न में “प्रभु के नाम से” पद की जगह ऐसा लिखा है की “यहोवा के नाम से”। हिब्रू शब्द यहोवा का मतलब है “जिसका अस्तित्व है” या “एस सच्चे परमेश्वर का सही नाम”। परमेश्वर ने अपना नाम यहोवा लोको के सामने पहले प्रगट नहीं किया था। इसलिए उस समय लोग उसे केवल परमेश्वर कहकर बुलाते थे। लेकिन अब, इस्राएल के लोगों को बचाने के लिए, परमेश्वर चाहते है की उसका नाम यहोवा दुनिया के सारे लोगों के सामने प्रगट हो। “मैं यहोवा हूँ। मैं याहवेह हूँ। मैं जो हूँ सो हूँ, जो खुद से अस्तित्व में आया था”। इसतरह परमेश्वर ने अपने आप को लोगों के सामने प्रगट किया।
परमेश्वर वह है जिसका अपने आप से अस्तित्व है, “अब्राहम, इसहाक, और याकूब का परमेश्वर”। वह सबसे प्राचीन समय से पहले मौजूद है, सारी चीजो की उत्पति से पहले। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर अनंतकाल से जिन्दा है और उसका अस्तित्व है। परमेश्वर ने अनुमति दी थी की इस्राएल के लोग, अब्राहम की संतान, ४३० साल तक मिस्र की गुलामी में जाए, और उसने वायदा भी किया था की वह उन्हें उनकी गुलामी से छूडाएगा और कनान देश में लेकर जाएगा। जैसे उसने वायदा किया था, यहोवा परमेश्वर ४३० साल बाद प्रगट हुआ, और मूसा को आदेश दिया की वह इस्राएल के लोगों को फारून के सताव से छूडाए। “मैं यहोवा हूँ। मैं जो हूँ सो हूँ, आपका परमेश्वर। मेरे लोगों को जाने दो”। अपने लोगों के लिए, उसने अपने आप को मूसा के सामने प्रगट किया, और फारून को आदेश दिया की वह उसके लोगों को जाने दे, क्योंकि यहोवा परमेश्वर इस्राएल के लोगों के दुःख को जानता था। क्योंकि वह जनता था की उसके लोग दुःख से विलाप कर रहे है, इसलिए परमेश्वर ने कहा की वह उन्हें गुलामी से छूडाएगा।
अब्राहम से वायदा करने के ४३० साल बाद, परमेश्वर इस्राएल के लोगों के पास आया और अपने आप को उनके सामने प्रगट किया। “मैं यहोवा हूँ। मैं परमेश्वर हूँ। मैं अब्राहम से किए हुए वायदे को पूरा करने के लिए आया हूँ, की मैं उसकी सन्तानों को मिस्र से निकाल कर कनान देश में लेकर जाउँगा। और मैं आपके सारे दुःख को भी जानता हूँ। अब फारून के पास जाओ और उसे कहो”। यहोवा परमेश्वर यह कहता है।
हमें पहचानना चाहिए की पेमेश्वर असल में अब्राहम, इसहाक और याकूब का परमेश्वर है। तो फिर उसका नाम क्या है? उसका नाम याहवेह है, मतलब जो अपने आप अस्तित्व में आया है। परमेश्वर का अस्तित्व पूरे ब्रह्मांड की सृष्टि से पहले का है, जैसे की उसका अस्तित्व खुद से हुआ है, जिसका अस्तित्व किसी ओर से नहीं लेकिन खुद से हुआ है। 
 
 
हमें परमेश्वर के नाम का मतलब समझना चाहिए
 
यह जटिल है की हम मानते है और विश्वास करते है की परमेश्वर वह है जिसका अस्तित्व खुद से, जिसने हमें बनाया है, जो हमारे ऊपर शासन करता है, और जिसने हमें हमारे पाप से बचाया है। हमें याहवेह परमेश्वर पर हमारे पूर्ण परमेश्वर के रूप में विश्वास करना चाहिए, क्योंकि इस याहवेह परमेश्वर ने पूरे ब्रह्मांड को बनाया है, और अभी भी निरंतर उसका अस्तित्व है।
इस्राएल के लोगो के जैसे, आप और मैं भी परमेश्वर पर विश्वास करते है, और उसकी उपस्थिति में हमने उसकी आज्ञाओं को भी प्राप्त किया है। जैसे इस्राएल के लोग व्यवस्था का पालन करने में विफल हुए थे, हम भी व्यवस्था के मुताबिक़ जीवन जीने में विफल हुए है। परमेश्वर के सामने हमारे पाप के कारण, हम भी ऐसे लोग है जो पाप के न्याय के पात्र है। दुसरे शब्दों में, हमारे पाप के कारण, हम उसके द्वारा हमारे पाप के दोष से बच नहीं सकते।
इसी लिए हम प्रत्येक को अपने खुद के पापों के प्रायश्चित के लिए परमेश्वर को कीमत चुकानी चाहिए। हमारे पापों से बचने के लिए, वास्तव में हमें हमारे विश्वास से, परमेश्वर को हमारे जीवन के बराबर बलिदान देना था। हमारे पापों के लिए लिए जीवन का वास्तविक प्रायश्चित देने के द्वारा ही परमेश्वर और हम मनुष्यजाति के बिच में शान्ति की स्थापना हुई। केवल विश्वास के द्वारा ही हमने हमारे पाप और दोष से छूटकारा पाया है।
क्योंकि वास्तव में यह मामला है, इसलिए जब भी हम परमेश्वर के सामने जाते है, तब हमें अंगीकार करना चाहिए, की इस पाप के लिए हम न्याय और सज़ा के योग्य थे। जब हम परमेश्वर पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते है, तब हमें वास्तव में यह मानना चाहिए और अंगीकार करना चाहिए की हम अपने पापों की वजह से नरक के लिए बाध्य है, और मसीहा पर विश्वास करना चाहिए, जिसने हमारे उद्धारकर्ता के रूप में हमारे पापों की कीमत चुकाई है और हमें पाप के न्याय से छुडाया है। जब हम परमेश्वर के सामने जाते है, तब हमें यीशु मसीह, हमारे पापों के बलिदान के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करना चाहिए, उस पर मसीहा के रूप में विश्वास करना चाहिए, और उसे पहचानना चाहिए। हमें यह अगिकार करना चाहिए की हम परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने में विफल होने के कारण परमेश्वर के सामने हम पापी है, और हमें विश्वास करना चाहिए की यीशु मसीहा ने हमें हमारे पापों से छुडाया है।
हमें यह जानना चाहिए की हम पाप की वजह से परमेश्वर की सज़ा के पत्र है। हमारे पाप का अंगीकार करने की वजह से, हम पाप की माफ़ी की आशीष पाने के योग्य बने है जो परमेश्वर ने हमें दी है, और हम अपने विश्वास की नींव बनने के योग्य बने है जो परमेश्वर के अनुग्रह को संचित करता है और पाप की उसकी माफ़ी प्राप्त करता है।
हमें उसकी संतान बनाने के लिए, परमेश्वर ने हमें उसके स्वरुप में बनाया, लेकिन उसने हमें कमजोरी के साथ जन्म दिया। आदम की संतान होने के नाते, हम सभी जन्म से पापी है, हमें उसकी संतान बनाने की परमेश्वर की यह गहन विधि थी।
हम ऐसे मनुष्य थे जो हमारी पापों के लिए न्याय के योग्य थे, लेकिन उसकी इच्छा पूरी करने के लिए, परमेश्वर ने अपने पुत्र को हमारे पास भेजा, और हमारे सारे पापों को माफ़ किया। यीशु, परमेश्वर के पुत्र ने, परमेश्वर की योजना को पूरा करने के लिए बपतिस्मा लिया उअर क्रूस पर मरा। इसलिए यहोवा परमेश्वर ने हमें नया जीवन दिया जिन्होंने विश्वास किया की यूहन्ना के द्वारा उसके पुत्र के बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पाप उसके ऊपर डाल दिए गए थे, उसने क्रूस पर अपने लहू से हमें हमारे सारे पापों से बचाया है, ऐसे उसने हमारे पापों का दोष खुद उठाया।
यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू बलिदान था जो हमारे विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पाने के लिए, हमारे पापों से हमें बचाने के लिए, और परमेश्वर की संतान बनने के लिए पर्याप्त था। हम विश्वास करने के द्वारा हमारे सारे पापों से बच सकते है, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर हमारे विश्वास के साथ, हमारे पास ऐसा विश्वास होना चाहिए जो हमें परमेश्वर के लोग बनने की अनुमति दे। यह परम सत्य है, वास्तव में जिनके पास ऐसा विश्वास है वेही परमेश्वर के लोग बन सकते है।
 
 
इस संसार के सारे धर्मो के ईश्वर केवल मनुष्यों के हाथो से बनाई हुई कठपुतली है
 
यहोवा परमेश्वर, यीशु मसीह, और पवित्र आत्मा को छोड़ दुसरे सारे देवता संसार के देवता है जिसे महज़ लोगों ने अपने हाथों से बनाया है। परमेश्वर को छोड़ इस संसार में और कुछ भी अपने आप से अस्तित्व में नहीं आया है। इसलिए यहोवा परमेश्वर ने कहा, “मैं जो हूँ सो हूँ”।
वास्तव में क्या कोई ऐसा है जो अपने आप अस्तित्व में आया है? बुध्ध अपनी माता के पेट से पैदा हुए थे, और मुहम्मद भी, वे सारे अपने मातापिता से पैदा हुए थे, इसलिए वे परमेश्वर के द्वारा की हुई सृष्टि है। बुध्ध की प्रतिमा जो बनाई गई है वह भी मनुष्य की खुद की सृष्टि है, जो परमेश्वर के द्वारा बनाए गए पत्थर और धातु से बनी हुई है। सूर्य से लेकर चन्द्र तक, तारे, पानी, हवा, ब्रह्मांड की गेलेक्सी यह सब परमेश्वर के द्वारा बनाया गया है। यहाँ तक की आत्मिक प्राणी, स्वर्गदूत भी परमेश्वर के द्वारा बनाए गए है।
केवल अब्राहम, इसहाक, और याकूब का परमेश्वर जिस पर हम विश्वास करते है, याहवेह परमेश्वर है, जो अपने आप अस्तित्व में आया है। याहवेह परमेश्वर को किसी ने नहीं बनाया है। वह केवल अपने आप से अस्तित्व में आया है, केवल वही पूरे ब्रह्मांड का सृष्टिकर्ता है, और केवल वही है जिसने आपको और मुझे बनाया है। केवल यही याहवेह परमेश्वर ने हमारे पापों से हमें बचाने और अपने लोग बनाने की योजना बनाई थी।
क्योंकि परमेश्वर ने ऐसी योजना बनाई थी की हम रोते हुए इस दुनिया में जन्म ले और खाली हाथ लौट जाए, और यह उसकी योजना की वजह से है की हम इस संसार में दुःख उठाते है, जिससे की हम उसको ढूंढें और उससे मिले।
जब हम कहते है की हम परमेश्वर पर विश्वास करते है, तब हमें यह अंगीकार कारण चाहिए की हम ऐसे व्यक्ति है की, हम हमारे पाप और असफलता के कारण परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं कर पाए, और मृत्यु के दण्ड का, नरक का, और परमेश्वर के सामने दुःख का सामना करेंगे। यीशु मसीहा पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने से पहले, हमें अंगीकार करना चाहिए की हम पापी है जो पाप के न्याय का सामना करेगा और नरक में डाला जाएगा।
 
 
यहोवा परमेश्वर सर्वज्ञानी और सर्वशक्तिमान है
 
केवल परमेश्वर ही सर्वज्ञानी और सर्वसामर्थी है जिसने हमें बनाया है और हमारे ऊपर शासन करता है। इस बात को समझने के बाद, हमें परमेश्वर के सामने अंगीकार करना चाहिए की हम किस तरह के पापी है – हमें अंगीकार करना चाहिए की, हमारे पाप के कारण, हम परमेश्वर के क्रोध के पात्र है। और हमें सत्य पर विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर के मेमने पर विश्वास करने के द्वारा, जो हमें हमारे सारे पापों से बचाने के लिए आया, और इस बलिदान के सिर पर हमारे हाथ रखने के द्वारा हमारे सारे पाप उसके ऊपर डालने के द्वारा, हमारे सारे पाप और समस्या का समाधान हो चुका है। हमारे पापों की वजह से हमारा न्याय होना था और हम मरना था, लेकिन इस बलिदान ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया, इसलिए हमारे पाप धुल गए। हमें इस सत्य पर विश्वास करना चाहिए। हमें यह पहचानना चाहिए की इस बलिदान के द्वारा, सर्वसामर्थी परमेश्वर ने, जिसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है, उसने हमें जो नरक के लिए नियोजित थे उन्हें उनके सारे पापों से बचाया है। जो लोग ऐसा विश्वास करते है वे यीशु मसीहा के सच्चे विश्वासी है।
वास्तव में, मसीहा पर मनमाने ढंग से विश्वास करना गलत है। जब हम कहते है की हम परमेश्वर पर विश्वास करते है, यब हमारा विश्वास बाइबल की सच्ची नींव पर खड़ा होना चाहिए। और हमें उसके वचन पर सबसे पहली और सामर्थी नींव बनानी चाहिए, जो कहता है, “मैं जो हूँ सो हूँ। मैं यहोवा हूँ”।
इस्राएल के लोग व्यवस्था का पालन नहीं कर पाए जो परमेश्वर ने उन्हें दी थी। परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को जो आज्ञाए दी थी वह हमें भी दी गई है जो आज के युग में जीवन जीते है। यदि आप सच में परमेश्वर पर विश्वास करना चाहते है, और यदि आप अपने विश्वास के द्वारा सच में अब्राहम की संतान बनना चाहते है, तो आपको यह समझना चाहिए की परमेश्वर ने केवल इस्राएल के लोगों को ही ६१३ आज्ञाए नहीं दी थी, लेकिन हमें भी दी थी, इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति को, और पूरे ब्रह्मांड को दी थी। और हमें वास्तव में यह समझना चाहिए की इस्राएल के लोगों के जैसे हम भी आज्ञा का पालन करने में विफल हुए है, और इसलिए हम मृत्यु के लिए नियोजित किए गए है, क्योंकि “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है” (रोमियों ६:२३)।
हमें विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य से हमारे पाप माफ़ कर दिए है। ऐसा करने के लिए, हमें उद्धार के सत्य को ढूँढने के लिए बहार जाना पडेगा, हिसके द्वारा हमारे प्रभु ने हमें हमारे पाप से और हमारे पापों के दोष से बचाया है।
परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने में विफल होने के बावजूद, यदि हम यह नहीं समझते की हम भयंकर पापी है, और हम यह अंगीकार नहीं करते की हमारे पापों की वजह से हमारा न्याय होगा, तो फिर हम कभी भी मसीहा पर विश्वास नहीं कर पाएंगे। यदि लोग ऐसा विश्वास करते की वे पापी होने के बावजूद भी स्वर्ग में प्रवेश करेंगे, जब की वास्तव में परमेश्वर ने उनके पाप न्याय की किताब में दर्ज किए है, तब वे खुद से परमेश्वर की व्यवस्था को चुनौती देते, और परमेश्वर का नाम व्यर्थ में लेकर पाप करते। ऐसे लोग अपने पापों से बचने के योग्य नहीं है। वे अपने पापों के लिए अनंतकाल के लिए न्याय भुगतेंगे, और नरक की सज़ा के लिए उन पर दोष लगाया जाएगा, भले ही फिर वे परमेश्वर पर विश्वास करते हो या ना करते हो, परमेश्वर उन्हें नहीं पहचानेगा। ऐसे लोगों को एक बार पश्चाताप करना चाहिए और अपने अविश्वास से वापस मुड़ना चाहिए।
इस क्षण में भी, परमेश्वर हमारे हृदय में है, और इस सारी जगहों में वह अपने आप अस्तित्व में आया है। और वह हमारे बारे में सबकुछ जानता है।
परमेश्वर ज़िंदा है फिर भी, ऐसे लोग है जो उस पर विश्वास नहीं करते, कुछ लोग तो उसे ताना मारते है। लेकिन हम सभी को हमारे पापों के लिए बलिदान की आवश्यकता है। इसी लिए परमेश्वर ने तय किए हुए उद्धार के मार्ग के लिए इस्राएल के लोगों को मिलापवाले तम्बू की होमबलि की वेदी पर अपने बलिदान के अर्पण को चढ़ाने के योग्य बनाया।
परमेश्वर वास्तव में अपने आप अस्तित्व में आए हुए है। वह पहले भी था और अभी भी है। वह वो परमेश्वर है जो जीवित था, प्रगट हुआ, बहुत पहले हमारे विश्वास के पूर्वजो से बात की थी, वाही अभी भी जिन्दा है, प्रगट हुआ, और हमसे बात करता है, जो हमारे बिच में कार्य करता है, हमें अगुवाई देता है, और हमारे जीवनों पर शासन करता है।
 
 
सत्य जो हमें कभी नहीं भूलना चाहिए
 
हालाँकि हम बचाए गए है, फिर भी एक बात है जो हमें नहीं भूलनी चाहिए। यह है की हम अनंतकाल के न्याय के लिए नियोजित थे, लेकिन उसके बपतिस्मा और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा, हमारे प्रभु ने हमें हमारे पापों के सारे न्याय से छुडाया है। वास्तव में, हम हमारे प्रभु के सामने खड़े होंगे तब तक, हमें इस सत्य को नहीं भूलना चाहिए और हमेशा हमारे हृदय में यह विश्वास करना चाहिए। जब हम परमेश्वर के राज्य में उसकी स्तुति करेंगे तब भी हमें यह याद रखना है। हमें परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए की उसने हमें जो अपने पापों के लिए अनंतकाल तक शापित होनेवाले थे और उनका न्याय होनेवाला था उन्हें अनुमति दी की वे अपने प्रभु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास कर पाए, और हमें अनन्त जीवन दिया।
हमें हमेशा के लिए पानी और आत्मा के सुसमाचार को पहचानना चाहिए। यदि हम यह अंगीकार न करे की हम हमारे पापों के कारण अनंतकाल के न्याय के लिए नियोजित है तो क्या होगा? तो फिर परमेश्वर की स्तुति करने के लिए हमारे पास कोई कारण नहीं होता। वास्तव में परमेश्वर ने हमें बचाया है, नाशवान प्राणी को जो अपने पापों के लिए हमेशा न्याय के योग्य है। इसी लिए हमें परमेश्वर पर विश्वास करना चाहिए और उसकी स्तुति करनी चाहिए – क्योंकि हमारे प्रभु ने हमारे लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर अपना लहू बहाया। इसी लिए आपको भी विश्वास करना चाहिए, और इसी लिए हम सभी को पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। जो लोग उनके पापों के लिए यीशु ने लिए हुए बपतिस्मा और बहाए हुए लहू पर विश्वास करते है उनके पास परमेश्वर की स्तुति करनेवाला हृदय होता है। क्योंकि प्रभु ने उन्हें उनके पाप और मृत्यु से बचाया है, इसलिए वे विश्वास से हरदिन उसकी स्तुति करते है।
समस्या यह ही की कुछ लोग यीशु मसीह को गलत समझते है। उसके प्रति उनका ज्ञान एकतरफा और आधा है। ऐसे लोग है जिनका विवेक भ्रष्ट हो चुका है, जो यह भी नहीं समझते है की वे पाप कर रहे है, वास्तव में, वे हर प्रकार के पाप से घिरे हुए है। जो लोग पाप करते है फिर भी उसे समझते नहीं है वो पाप है – यही लोग पापी ही।
हालाँकि हम कमज़ोर है जो पाप करते है, जब भी हम पाप करते है तब हमें उसका अंगीकार करना चाहिए, और हमें हमारे प्रभु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू की पुष्टि करनी चाहिए – जो ही, पानी और आत्मा का सुसमाचार। ऐसा करने से हम यह अंगीकार करते है की वास्तव में हम परमेश्वर के सामने पापी है। और पानी और आत्मा के सुसमाचार पर वास्तव में विश्वास करने के द्वारा, हम चैन की साँस ले सकते है। सचमुच, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा, हमने मन की शांति पाई है।
जब मैं पापरहित होने की बात करता हूँ, तब इसका मतलब यह नहीं है की जब हम वास्तव में पाप करते है तो उसे पहचानना नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है की जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है उनके लिए पाप पाप नहीं है। हालाँकि हम हमारे सारे पापों से छूडाए गए है, फिर भी हम जो पाप करते है वह पाप ही है – हमारे पापों के रूप में। हमें जो कभी भी नहीं भूलना है वह ये है की हालाँकि हम हमारे पापों के कारण अनंतकाल के लिए न्याय के भागी है, फिर भी हमारे प्रभु ने अपने बपतिस्मा से, क्रूस पर अपने लहू से, और अपने पुनरुत्थान से हमें हमारे सारे पाप और दोष से बचाया है। हमें कभी भी नहीं भूलना चाहिए की हमारे प्रभु ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से हमें बचाया है, लेकिन इस पर विश्वास करना है और उसकी स्तुति करनी है। हमें यह याद रखना है की हम पहले कैसे थे। याद रखे की हम पहले इतने गरीब थे की हमारे पापों के कारण अनंतकाल के न्याय के भागी थे। और हमें परमेश्वर के द्वारा दिए गए पापों की माफ़ी के उद्धार की स्तुति करनी चाहिए, और उसकी उद्धार के अनुग्रह के लिए हरदिन उसका धन्यवाद करना चाहिए। पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वासियों का विश्वास इसक अलावा ओर कुछ नहीं है।
 
 
यहोवा परमेश्वर आज भी जीवित है
 
जैसे परमेश्वर अब्राहम, इसहाक, और याकूब का परमेश्वर था, अब वह आपका और मेरा परमेश्वर है। “क्योंकि परमेश्वर गड़बड़ी का नहीं, लेकिन शांति का परमेश्वर है” (१ कुरिन्थियों १४:३३)। वह उन मसीहियों का परमेश्वर नहीं है जिनके कार्य अभिमानी और भड़कीले है, लेकिन वह उन लोगों का परमेश्वर है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है। हमारे पास ऐसा विश्वास है जो परमेश्वर के वचन को मानता है और उसकी आज्ञा “हाँ” कहकर मानते है। परमेश्वर हमारा परमेश्वर है। जब वास्तव में वह हमसे कहता है की, “तुम नरक के लिए नियोजित हो,” तब हम उससे कहते है, “हाँ, आप सच्चे है।” जब वह हमें कहता है, “तुम्हारे मृत्यु के दिन तक तुम पाप करोगे,” फिर हम फिरसे कहते है की, “हाँ, आप सच्चे है।” और जब वह हमसे कहता है, “वास्तव में मैंने तुम्हें मेरे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया है,” एक बार फिर हम केवल यही कहते है, “हाँ, आप सच्चे है”। इस प्रकार हम परमेश्वर के लोग बने है जो “हाँ” कहकर उनकी आज्ञा का पालन करते है। मैं परमेश्वर को उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करता हूँ की उसने हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार से बचाया है।
हमें अपने हृदय में विश्वास करना है और समझना है की वास्तव में हमारे प्रभु ने हमें पानी, लहू और आत्मा के द्वारा बचाया है, और हमें परमेश्वर के राज्य के लोग बनाया है। यह विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए की पानी और आत्मा का सुसमाचार उद्धार की भेंट है जो परमेश्वर ने हमें दी है।
अनंतकाल के लिए मुझे, जो मेरे पापों के कारण नरक के लिए नियोजित था उसे पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा बचाने के लिए मैं निरंतर परमेश्वर की स्तुति करता हूँ। याद रखे की हम सब पीतल के है – हम परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकते – और इसलिए हमें पापों से छुडाने के लिए हम परमेश्वर की स्तुति करते है, उसने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया है। और हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में छिपे सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हमें उस का धन्यवाद करना चाहिए।
केवल याहवेह परमेश्वर ही समग्र मनुष्यजाति के परमेश्वर है। और वह समग्र मनुष्यजाति के लिए उद्धारकर्ता परमेश्वर बने। हमें याहवेह परमेश्वर पर हमारे परमेश्वर के तौर पर विश्वास करना चाहिए।