उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-4] (निर्गमन १९:१-६) क्यों परमेश्वर ने मूसा को सिनै पर्वत पर बुलाया उसका कारण

(निर्गमन १९:१-६)
“इस्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीते, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए। और जब वे रपीदीम से कूच करके सीनै के जंगल में आए, तब उन्होंने जंगल में डेरे खड़े किए; और वहीं पर्वत के आगे इस्राएलियों ने छावनी डाली। तब मूसा पर्वत पर परमेश्‍वर के पास चढ़ गया, और यहोवा ने पर्वत पर से उसको पुकारकर कहा, “याक़ूब के घराने से ऐसा कह, और इस्राएलियों को मेरा यह वचन सुना : ‘तुम ने देखा है कि मैं ने मिस्रियों से क्या-क्या किया; तुम को मानो उकाब पक्षी के पंखों पर चढ़ाकर अपने पास ले आया हूँ। इसलिये अब यदि तुम निश्‍चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे; समस्त पृथ्वी तो मेरी है। और तुम मेरी दृष्‍टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे।’ जो बातें तुझे इस्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।”
 
 
क्यों परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को चुना?
 
मुख्य भाग निर्गमन १९:१-६ में पाया जाता है। हालाँकि यह भाग बहुत बड़ा नहीं है, मैं निर्गमन अध्याय १९ से २५ में प्रगट हुए सत्य को बोलना भी चाहता हूँ। इस्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीते, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए। परमेश्वर ने उन्हें सिनै पर्वत के सामने डेरा डालने के लिए कहा, और मूसा को पर्वत के ऊपर बुलाया।
इस तरह मूसा को बुलाकर, परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों से अपने वचन से बात की, “इसलिये अब यदि तुम निश्‍चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे; समस्त पृथ्वी तो मेरी है। और तुम मेरी दृष्‍टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे।’ जो बातें तुझे इस्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।” परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को बुलाया और उन्हें उठाया उसके पीछे का कारण यह था की वह उन्हें अपना निज धन बनाना चाहते थे और अपने राज्य के लिए उन्हें याजक नियुक्त करना चाहते थे।
इसी हेतु के कारण परमेश्वर ने इस्राएलियों को मिस्र से अलग किया। जिस तरीके का उपयोग करके परमेश्वर इस्राएलियों को अपना निज धन बनाना चाहते थे वह था उन्हें अपनी व्यवस्था देना और मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति देना जिससे द्वारा वे अपने पाप से बच सके, जिससे वह उनके सारे पापों को धो सके, उन्हें अपने लोग बना सके, और उन्हें याजकों का राज्य बना सके। इसी तरह, इस्राएलियों को भी यह स्पष्ट तौर से समझना चाहिए, और ऐसे विश्वास को दुबारा पाना चाहिए जैसा परमेश्वर उनसे चाहता है। उनके राज्य को परमेश्वर के याजको का राज्य बनाने के लिए, परमेश्वर ने उन्हें एक हाथ में उनके ६१३ धाराए वाली व्यवस्था दी और दुसरे हाथ में उसने उनके द्वारा मिलापवाला तम्बू बनवाया।
इसलिए, यदि इस्राएलियों यीशु पर विश्वास नहीं करते जो उनका मसीहा बनके आया था, तो फिर उन्हें पश्चाताप करना चाहिए और अपने पूरे दिल से उस पर विश्वास करना चाहिए। यीशु, जो मिलापवाले तम्बू के बलिदान की पध्धति में पाप बलिदान का मुख्य भाग है, उसने यूहन्ना के द्वारा अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू से उनके सारे पापों को साफ़ कर दिया है। इस्राएल के लोगों को स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करना चाहिए की, परमेश्वर ने उन्हें मिस्र से निकाल कर उन्हें अब्राहम की संतान बनाया और मिलापवाले तम्बू के बलिदान के द्वारा उनके सारे पापों को साफ़ किया। उस समय, इस्राएली परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं कर पाए इसलिए उन्हें परमेश्वर के द्वारा नियुक्त बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ बलिदान चढ़ा कर अपने पापों की माफ़ी पानी होती थी। यह बलिदान चढ़ाना यीशु मसीह, उद्धारकर्ता का प्रतिबिम्ब था जिसने मनुष्यजाति को उनके पापों से बचाया है।
यहाँ तक की अब भी, इस्राएली मूसा को सबसे बड़ा भविष्यवक्ता मानता है। हालाँकि, वे यीशु पर मसीहा के तौर पर विश्वास नहीं करते जिसने उन्हें उनके सारे पापों से बचाया है, इसलिए वे नए नियम को परमेश्वर का वचन नहीं मानते, और उसके बदले में केवल पुराने नियम को परमेश्वर का वचन मानते है। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए की यीशु केवल महान भविष्यवक्ता ही नहीं है लेकिन वह स्वर्ग के राज्य का महायाजक है, मसीहा जिसका इस्राएली इंतज़ार कर रहे थे। विश्वास से, इस्राएलियों को अब यह मानना चाहिए की मिलापवाले तम्बू के बलिदान की पध्धति का मुख्य तत्व ओर कोई नहीं लेकिन मसीहा खुद है।
 
 
परमेश्वर ने इस्राएलियों को मूसा का आदर करने के लिए कहा, लेकिन...
 
क्यों परमेश्वर ने मूसा को इस्राएलियों के सामने ऊँचा उठाया? वो इसलिए ताकि वे मूसा के द्वारा बोले गए परमेश्वर के वचन को स्वीकारे और विश्वास करे। दुसरे शब्दों में, उन्हें यह यकीन दिलाने के लिए की मूसा जो भी बोल रहा है वह परमेश्वर के वचन है। परमेश्वर ने मूसा को सिनै पर्वत पर बुलाया ताकि वह उसे इस्राएलियों की सामने ऊँचा उठा सके। इससे इस्राएल के लोग मूसा और परमेश्वर से डराने लगे, और इस्राएल के लोगों ने देखा की मूसा ने परमेश्वर से बात की, उस पर विश्वास किया, क्योंकि परमेश्वर ने मूसा से ऐसे बात की जैसे की वह उसका मित्र हो।
वैसे ही, परमेश्वर का वचन जो मूसा ने इस्राएलियों को सुनाया था उस पर इस्राएल के लोगों ने मजबूत विश्वास किया जैसे की वह परमेश्वर के द्वारा बोला गया हो। हालाँकि, मूसा को महान मानाने के द्वारा, इस्राएल के लोगों ने यीशु मसीहा को अपना उद्धारकर्ता न स्वीकार कर बड़ी गलती की। अन्त में, इस्राएली अपने मसीहा को पहिचानने में विफल हुए, और उसके उद्धार के प्रेम का अस्वीकार करके उनका अन्त हुआ। अब उनके आगे बहुत बड़ा कार्य था – वह है, यीशु को उनके दिल में मसीहा के रूप में स्वीकार करना, जो मूसा से भी बड़ा भविष्यवक्ता था।
 
 
परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को मिलापवाला तम्बू बनाने और उसे बलिदान अर्पण करने का आदेश दिया
 
मूसा के द्वारा, परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को अपनी व्यवस्था और आज्ञाए दी, और उसने उन्हें मिलापवाला तम्बू बनाने के लिए भी कहा। मिलापवाले तम्बू के अन्दर, परमेश्वर के दया के प्रेम से इस्राएलियों के पाप धुल जाते थे जो बलिदान की पध्धति से प्रगट हुआ था। मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति के द्वारा, परमेश्वर ने अब्राहम के वंशजो को भी पापों की माफ़ी दी थी, और उसने उनके सारे पापों को साफ़ किया था जिससे वे लोग परमेश्वर के लोग बन सके।
परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को दो पत्थर की पाटिया दी थी जिस पर उसकी दस आज्ञाए लिखी हुई थी। उन दस आज्ञाओं में से ऊपर की चार आज्ञा परमेश्वर और मनुष्यजाति के बिच की थी, और बाकी छह आज्ञा मनुष्यों के आपसी संबंध के लिए पालन करनी थी। इन दस आज्ञाओं के अलावा, परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को ओर भी सेंकडो आज्ञाए दी थी जो उन्हें अपने हरदिन के जीवन में पालन करना था।
परमेश्वर ने इस्राएलियों को इतनी सारी व्यवस्था और आज्ञाए इसलिए दी ताकि वह उनके दिल में यह दिखा सके की केवल परमेश्वर ही सम्पूर्ण है। इस्राएल के आत्मिक लोगों के लिए – वह है, वे जो यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते है – परमेश्वर को छोड़ कोई ओर दूसरा दैवीय नहीं है। कनान देश में प्रवेश करने से पहले इस्राएल के लोगों को स्पष्ट रूप से यह सत्य सिखाने के लिए की वही यहोवा है, परमेश्वर ने सिनै पर्वत पर मूसा से बात की और उसे अपनी व्यवस्था दी। और जब भी वे पाप करे तो मिलापवाले तम्बू के बलिदान की पध्धति के अनुसार बलिदान चढ़ाने से उन्हें पापों की माफ़ी मिलती थी जो परमेश्वर के द्वारा नियुक्त किया गया था। 
 
 
इस्राएल के लोगों ने परमेश्वर से वुँवस्था और आज्ञाए प्राप्त की
 
आइए हम निर्गमन २४:३-८ को देखे: “मूसा ने लोगों के पास जाकर यहोवा की सब बातें और सब नियम सुना दिए। तब सब लोग एक स्वर में बोल उठे, “जितनी बातें यहोवा ने कही हैं उन सब बातों को हम मानेंगे।” तब मूसा ने यहोवा के सब वचन लिख दिए; और बड़े सबेरे उठकर पर्वत के नीचे एक वेदी और इस्राएल के बारहों गोत्रों के अनुसार बारह खम्भे भी बनवाए। तब उसने कई इस्राएली जवानों को भेजा, जिन्होंने यहोवा के लिये होमबलि और बैलों के मेलबलि चढ़ाए। और मूसा ने आधा लहू लेकर कटोरों में रखा, और आधा वेदी पर छिड़क दिया। तब वाचा की पुस्तक को लेकर लोगों को पढ़ कर सुनाया; उसे सुनकर उन्होंने कहा, “जो कुछ यहोवा ने कहा है उस सब को हम करेंगे, और उसकी आज्ञा मानेंगे।” तब मूसा ने लहू लेकर लोगों पर छिड़क दिया, और उन से कहा, “देखो, यह उस वाचा का लहू है, जिसे यहोवा ने इन सब वचनों पर तुम्हारे साथ बाँधी है।”
जब परमेश्वर ने मूसा के द्वारा इस्राएल के लोगों को व्यवस्था दी तब परमेश्वर ने लहू से वाचा बाँधी थी। इसका मतलब है की परमेश्वर की व्यवस्था जीवन की व्यवस्था है। परमेश्वर ने इस्राएलियों को अपनी जीवन की व्यवस्था दी, और इस्राएल के लोगों को उसके वचन पर विश्वास करना पडा।
वैसे ही, मूसा ने इस्राएलियों को होमबलि और शान्ति अर्पण का लहू लेकर आने को कहा। परमेश्वर ने मूसा को अपने लोगों को इकठ्ठा करने के लिए कहा, और उनके सामने परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञाए पढ़ने के लिए कहा। उर फिर मूसा ने उनसे पूछा, “क्या आप परमेश्वर ने जो कहा है उसे पालन करेंगे?” फिर इस्राएलियों ने एकसाथ पर्नेश्वर को उत्तर दिया की वे उनकी आज्ञा मानेंगे।
“मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा और तुम्हें राज्य के याजक बनाऊँगा,” फिर परमेश्वर ने मूसा के द्वारा इस्राएलियों से वादा किया। फिर मूसा ने उनके ऊपर होमबलि का लहू छिड़का। यह दिखाता है की जब कोई व्यक्ति पाप करता है, तब उसे बलिदान के द्वारा ही माफ़ी मिलती है। परमेश्वर जीवन के वचन के द्वारा हमसे जो कहता है उस पर हमें स्वीकार करना चाहिए। मूसा ने बलिदान का लहू लिया, लोगों पर उसे छिड़का, और उनसे कहा, “देखो, यह उस वाचा का लहू है, जिसे यहोवा ने इन सब वचनों पर तुम्हारे साथ बाँधी है।” यह हमें कहता है की क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवन का वचन है, इसलिए यदि हम उसका पालन नहीं करेंगे, तो हमें अपने हाथ बलि के सिर पर रख कर उसे उसके सिर पर डालने होंगे, उसे मारना होगा, और हमारे पापों के लिए उसका लहू परमेश्वर को अर्पण करना होगा।
हमें परमेश्वर की इस व्यवस्था में जो ख़याल रखना है वह यह है की, हमारे पापों की सजा है, लेकिन उसके साथ ही, बलिदान की ऐसी पध्धति है जो हमारे पापों को धो देती है। इसलिए, जब परमेश्वर की व्यवस्था और आज्ञाओं की बात हो, हमें उसे अपने हृदय में स्वीकार करना चाहिए क्योंकि इस व्यवस्था और आज्ञाओं में बलिदान है जो हमारे पापों की माफ़ी देता है। यह विश्वास बहुत आवश्यक है। क्योंकि जब हम परमेश्वर की व्यवस्था का पालन करते है तब हमें आशीष मिलती है और जब हम उसका पालन नहीं करते तब हमें श्राप मिलता है, हमें विश्वास करना चाहिए की हमें हर वक्त हमारे पापों को बलिदान के अर्पण से धोने की जरुरत है। जिन्होंने पाप किया था उन्होंने बलिदान के सिर पर अपने हाथ रखकर अपने पाप उसके ऊपर डालने के द्वारा और उसके लहू को लेकर परमेश्वर को अर्पण करने के द्वारा अपने पापों की माफ़ी पाई। हमें यह पहचानना चाहिए और विश्वास करना चाहिए की व्यवस्था और बलिदान की पध्धति जीवन की व्यवस्था है, जिसके द्वारा हम परमेश्वर से नया जीवन पा सकते है।
इसलिए, जब परमेश्वर की व्यवस्था हमें हमारे पापों के बारे में सिखाती है, वैसे पानी और आत्मा का सुसमाचार हमें दिखाता है की यूहन्ना के द्वारा यीशु ने लिए हुए बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए लहू के द्वारा हमारे सारे पाप धुल गए है – यह वो सत्य है जो हमें जगत के सारे पापों से बचाता है।
प्राचीन समय में, जब गोत्र एक दुसरे से वायदा करते थे, तब वे किसी प्रकार का बलिदान चढाते थे। वे भेड़, बकरी, या बैल लाते थे और उनके लहू से वे वाचा को बांधते थे। यह वाचा का मुख्य भाग होता था, जिसका मतलब था, “यदि तूने मेरे साथ जो वाचा बाँधी है उसका पालन नहीं करेगा, तो तू ठीक इसी तरह मारा जाएगा।” वे लहू से अपनी वाचा बांधते थे।
इसी तरह, परमेश्वर ने भी अपनी वाचा लहू से बाँधी है। दुसरे शब्दों में, उसने हमें कहा है, की यदि हम उसकी ६१३ व्यवस्था और आज्ञाओं का पालन नहीं करेंगे, तो हम उस पाप के कारण मारे जाएंगे। लेकिन ठीक उसी समय, उसने हमें विश्वास से मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ पाप का बलिदान चढ़ाकर पापों की माफ़ी पाने के लिए भी कहा है।
यदि हम परमेश्वर के वचन को गंभीरता से नहीं लेते, तो हमारे पापों की वजह से हम पर आनेवाले परमेश्वर के क्रोध से हम कभी नहीं बच पाते। लेकिन यदि हम उसने ठहराया है वैसे पाप का बलिदान चढाते है, तो परमेश्वर इस बलिदान का स्वीकार करेगा और हमें हमारे सारे पापों की माफ़ी देगा। हमें जीवन की इस व्यवस्था में विश्वास करना चाहिए, यह उद्धार की व्यवस्था जो हमसे कहती है की परमेश्वर तम्बू की बलिदान की पध्धति के द्वारा इस्राएल के सारे लोगों के पाप माफ़ करेंगे, इस प्रकार से हम अपने हृदय में पापों की माफ़ी प्राप्त करेंगे। जो कोई भी परमेश्वर की व्यवस्था का अनादर करता है वह परमेश्वर के प्रेम की दया से वंचित रहेगा, और इस रूप से, हमें व्यवस्था और बलिदान की पध्धति को हमारे जीवन के लिए सत्य के रूप में विश्वास करना चाहिए।
इसी लिए मूसा ने वाचा को लहू से बंधा, और इस लहू को इस्राएल के लोगों के ऊपर छिड़का, और उन्होंने लहू से परमेश्वर से वाचा बाँधी। इसलिए, यह जानने के बाद की यदि हम लहू से बनी व्यवस्था का पालन नहीं करेंगे तो मर जाएंगे, इसलिए हमें व्यवस्था के साथ यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए, जो हमारी होमबलि के लिए परमेश्वर के सामने अर्पण हुआ।
हम सभी को यह जानना और विश्वास करना चाहिए की हम मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ परमेश्वर को बलिदान चढ़ाने से हमारे पापों से बच सकते है। उसके नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा, परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से हमें सारी मनुष्यजाति के पापों की माफ़ी के बारे में सिखाया है। उनके पापों से माफ़ी पाने के लिए उन्हें बलि के सिर पर हाथ रखकर उनके सारे पाप उसके सिर पर डालने होंगे, और उसके बाद इस बलि को अपना लहू बहाकर होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कना होगा और बचा हुआ लहू उसके निचे बहाना होगा।
यह बलिदान का अर्पण था जो पाप और मृत्यु की व्यवस्था के लिए जरुरी था। इसलिए, हमें हमारे विश्वास से बलिदान के अर्पण के द्वारा वायदा किए हुए पाप की माफ़ी को स्वीकार करना चाहिए और हमारे पापों को दूर करना चाहिए। हमें तम्बू की बलिदान की पध्धति देने के द्वारा, परमेश्वर ने हमें उद्धार की व्यवस्था दी, जिससे की हम परमेश्वर के वचन पर विश्वास करे और हमारे पापों की माफ़ी पाए। परमेश्वर ने मनुष्यजाति को दी हुई दो व्यवस्था को हमारे दिल में स्वीकार करने के द्वारा पापों की माफ़ी की आशीष पानी चाहिए: व्यवस्था खुद और मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति।
 
 
हम हमारे सारे पापों से कैसे बच सकते है?
 
परमेश्वर ने मूसा को जो बलिदान की पध्धति दी थी उसके द्वारा, उसने इस्राएल के लोगों को दिखाया की उनके पापों से उनका उद्धार केवल बलिदान की पध्द्ष्टि के द्वारा माफ़ी मिलती है उस पर विश्वास करने से ही सम्भव है।
जब हम परमेश्वर को हमारा विश्वास देते है जो उसके द्वारा नियुक्त बलिदान पर विश्वास करता है, तब वह हमारा विश्वास स्वीकार करता है और हमें हमारे सारे पापों से बचाता है। क्यों? क्योंकि परमेश्वर ने पहले से ही पूरी मनुष्यजाति को उनके पापों से बचा लिया है, और जो विश्वास करता है, उन्हें वह सारे पापों से पवित्र करके अपनी आशीष देता है। जो सम्पूर्ण है उसके द्वारा नियुक्त की गई बलिदान की पध्धति के द्वारा, परमेश्वर ने हमें उद्धार की व्यवस्था जानने के योग्य बनाया है। यदि कोई व्यक्ति यह जानता भी नहीं और विश्वास भी नहीं करता की यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू के द्वारा उसके सारे पापों को धो दिया है तो वह दोषी ठहरेगा। हम सबको परमेश्वर की दया के प्रेम पर विश्वास करना चाहिए।
परमेश्वर ने हमें तम्बू की बलिदान की पध्धति के द्वारा बचाया है, जिसके उद्धार की योजना हमारे पापों को हाथ रखने के द्वारा बलिदान पर डाल देना था। इसी तरह हम सभी को दया के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए जो इस सत्य पर विश्वास करनेवाले सभी को अपने पाप साफ़ करने की अनुमति देता है। जो व्यक्ति परमेश्वर के सामने व्यवस्था और बलिदान की पध्धति को नहीं पहचानता वह कभी भी पापों की माफ़ी नहीं पा सकता, लेकिन जो लोग परमेश्वर की दया के सुसमाचार पर विश्वास करते है वे अपने पापों की अनन्त माफ़ी पा सकते है।
परमेश्वर केवल हमें यह नहीं कहता की पाप मत करो, लेकिन वह हमें सिखाता है की हम पापी मनुष्य है जो पाप करते है। इसलिए, वह हमें कहता है की हमें पापों की माफ़ी पाने के लिखे उसे बलिदान चढ़ाना होगा। इसी लिए जब एक पापी बलिदान चढ़ाता है तब परमेश्वर कहता है, “मेरे लिये मिट्टी की एक वेदी बनाना, और अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के होमबलि और मेलबलि को उस पर चढ़ाना; जहाँ जहाँ मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँ वहाँ वहाँ मैं आकर तुम्हें आशीष दूँगा” (निर्गमन २०:२४)।
पापबलि जो इस्राएलियों ने परमेश्वर को चढ़ाई उसमे बलिदान के सिर पर हाथ रखने की पध्धति थी, जिससे उनके पाप बलि के ऊपर चले जाते थे, उसका लहू निकाल कर होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कते थे, और उसके मांस को जलती हुई वेदी पर जलाते थे। जब उन्हें ऐसा बलिदान चढ़ाना होता था तब परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार की व्यवस्था पर पूरे दिल से विश्वास करना अनिवार्य था। परमेश्वर रुढ़िवादी बलिदान नहीं चाहता था, लेकिन वह ऐसा बलिदान चाहता था जिसमे विश्वास से उनके पाप बलि के ऊपर डाले जाते है, ऐसा विश्वास की वे नरक के लिए नियोजित है जहाँ परमेश्वर का अनुग्रह नहीं है।
हमारे पापों को दूर करने के लिए हमारे प्रभु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लिया और क्रूस पर अपना लहू बहाया। पापबलि के द्वारा ही हमारे पापों को मिटाने के लिए उसने फैसला किया। विश्वास का यह अर्पण नए नियम में यीशु के द्वारा परिपूर्ण उद्धार के अर्पण का प्रतिबिम्ब है – मसीह इस पृथ्वी पर आया, यूहन्ना से लिए हुए बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पाप अपने ऊपर ले लिए, क्रूस पर मरा, और ऐसे उसने पूरी मनुष्यजाति को उसके पाप से बचाया। इस सत्य पर हमारे पूरे दिल से विश्वास करने पर हम परमेश्वर की संतान बनते है।
 
 
हमें सैद्धांतिक विश्वास निकाल देना चाहिए
 
निर्गमन २०:२५-२६ कहता है, “और यदि तुम मेरे लिये पत्थरों की वेदी बनाओ, तो तराशे हुए पत्थरों से न बनाना; क्योंकि जहाँ तुम ने उस पर अपना हथियार लगाया वहाँ तुम उसे अशुद्ध कर दोगे। और मेरी वेदी पर सीढ़ी से कभी न चढ़ना, कहीं ऐसा न हो कि तेरा तन उस पर नंगा देख पड़े।” परमेश्वर इस वचनों में क्या कह रहा है उस पर हमें ध्यान देना चाहिए। परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा की वेदी बनाते समय, यदि वे पत्थर की वेदी बनाना चाहे, तो तराशे हुए पत्थरो से न बनाए, लेकिन उन पत्थरो से बनाना जो अपने मूल आकर में हो। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है की परमेश्वर उसके उद्धार पर हमारे विश्वास को स्वीकार करना चाहते है, जिसे मनुष्यों के विचार से बदला नहीं जा सकता।
और परमेश्वर हमें वचन से चेतावनी देते है, “और मेरी वेदी पर सीढ़ी से कभी न चढ़ना, कहीं ऐसा न हो कि तेरा तन उस पर नंगा देख पड़े,” मनुष्यों के बनाए हुए, धार्मिक विश्वास से उसकी आराधना नहीं करनी है। वे अपने खुद के धर्म में सामान्य सिध्दांत को जोड़ देते है जो लोगों से कहते है की वे अपना धार्मिक जीवन जीते हुए धीरे धीरे पवित्र बने। यहाँ तक की मसीही धार्मिक लोग भी यह दावा करता है की वे परमेश्वर की व्यवस्था के मुताबिक़ धार्मिक जीवन जीते है।
लेकिन, क्या यह वास्तव में सच है? बिलकुल नहीं! लोग, आदम के वंशज के रूप में पैदा होते है, वे अपने पापों के कारण परमेश्वर की व्यवस्था का पालन नहीं कर सकते, और वे इन पापों के करण मौत का सामना करते है। इसलिए, ऐसे लोगों को पापों से बचाने के लिए, परमेश्वर ने मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति को नियुक्त किया, और उन्हें वास्तव में बचाया।
इसलिए, हम सभी को हमारे पापों की माफ़ी के लिए, और परमेश्वर ने हमारे लिए तम्बू के आँगन के द्वार पर प्रगट हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से नियुक्त किए दया के सुसमाचार को स्वीकार करना है। जैसे बाइबल के वचन में लिखा है ठीक वैसे ही हमें विश्वास करना है, की यीशु मसीह वचन के परमेश्वर के रूप में इस पृथ्वी पर आए, और जैसे तम्बू में प्रगट हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा भविष्यवाणी की गई थी वैसे ही उसने अपना कार्य किया, और ऐसे उसने हमें हमारे सारे पापों से बचाया।
लेकिन जिन लोगों के पास केवल धार्मिक और सैद्धांतिक विश्वास है उनका क्या? उनके हरदिन के पापों की माफ़ी पाने के लिए वे क्या करते है? ऐसे लोग पश्चाताप की प्रार्थना करने के द्वारा पापों की माफ़ी पाने की कोशिश करते है, और अन्त में वे धीरे धीरे पवित्र होने के सिध्धांत पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी बनने की कोशिश करते है। अपने खुद के प्रयास से परमेश्वर को मिलने की कोशिश करना अभिमान है, और यह ओर कुछ नहीं लेकिन खुद की बनाई धार्मिक बुराई है।
सबसे पहले व्यक्ति को यह कबूल करना होगा की परमेश्वर के सामने वह अपने पापों को दूर करने के लिए कुछ नहीं कर सकता। जब हमने इस दुनिया में जन्म लिया, तब हम सबने ऐसे मनुष्य के रूप में जन्म लिया था जो पाप करता था, इसी लिए हम हमेशा पाप करते रहते है। अपने वचन के द्वारा परमेश्वर चाहे जितना भी हमें पाप करने से मना करे, लेकिन हम ऐसे है जो उसकी व्यवस्था को तोड़ते है और परमेश्वर सामने पाप करते है। इसलिए, हमें परमेश्वर की व्यवस्था के सामने कबूल करना चाहिए की हम पापी है। और हमें अपने पूरे दिल से उद्धार की व्यवस्था पर विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए हमारे प्रभु के कार्यो के द्वारा बचाया है।
परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने के अलावा ओर कोई दूसरा रास्ता नहीं है, जो हमें जगत के सारे पापों से बचा सके, प्रभु अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे लिए बलिदान का अर्पण बने, और ऐसे उसने हमें जगत के पापों से बचाया। बाइबल हमें बताती है की यहोवा को छोड़ कोई दूसरा परमेश्वर नहीं है, और बिना यीशु मसीह के कोई भी पिता के पास नहीं आ सकता (यूहन्ना १४:६)। परमेश्वर की व्यवस्था के वचन को पहचान कर और विश्वास करके हम पापी बनते है, और पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करके हम हमारे पापों से बचाए गए है। यही सत्य और परमेश्वर पर सच्चा विश्वास है।
वैसे ही, हम सभी को पापों की माफ़ी के मुताबिक़ उद्धार पर विश्वास करना चाहिए जो हमारे प्रभु ने हमें बचाने के लिए बनाया है। मसीहियत संसार के दुसरे धर्मो की तरह नहीं है, लेकिन यह हमारे विश्वास की नींव पर बना उद्धार का सच है जो यीशु मसीह पर विश्वास करता है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुआ।
 
 
ऊपर के मुख्य भाग के द्वारा, हम सभी को यह जानना चाहिए की परमेश्वर ने हमें क्यों बुलाया है
 
हम सब को यह सच समझना चाहिए की परमेश्वर ने आपको और मुझे उसकी निज सम्पति बनाने के लिए बुलाया है। आप और मैं कभी भी अपने प्रयासों से परमेश्वर के लोग नहीं बन सकते। बल्कि, आप और मैं परमेश्वर की संतान बने है क्योंकि हमने सत्य पर विश्वास किया है की यीशु मसीह हमें व्यवस्था के श्राप और नरक की सज़ा से बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आए थे। यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा उसने उन सभी को बचाया है जो विश्वास करते है। मसीहा, परमेश्वर का बेटा, मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर आया, अपने बपतिस्मा के द्वारा एक ही बार में मनुष्यजाति के सारे पाप अपने ऊपर उठा लिए, जगत के सारे पापों को क्रूस के पास लेकर गया, हमारे पापों की कीमत चुकाने के लिए हमारे खातिर खुद का बलिदान दिया, मृत्यु में से जीवित हुआ, और ऐसे उन सभी का उद्धारकर्ता बना जो पूरे दिल से इस पर विश्वास करते है।
परमेश्वर हमसे कहता है की उसने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा मनुष्यजाति को सम्पूर्ण पापों की माफ़ी दी। हमारा प्रभु हमसे पूछता है, “क्या तुम मेरे कार्य पर विश्वास करते हो, जो मैंने तुम्हारे पापों की माफ़ी के लिए किए, की मैं इस पृथ्वी पर आया और यूहन्ना से बपतिस्मा लिया और क्रूस पर मेरा खून बहाया?” परमेश्वर के सामने हम केवल “हाँ” कह सकते है। पापों की माफ़ी पर विश्वास करना जो परमेश्वर ने हमें दिया है उसे छोड़ हमारे लिए उद्धार पाने का ओर कोई दूसरा रास्ता नहीं है। केवल पुराने नियम के इस्राएली ही नहीं, लेकिन आप और मैं भी – जगत के सारे लोगों को – यह जानना चाहिए की परमेश्वर ने मूसा को सिनै पर्वत पर क्यों बुलाया और इस मुख्य भाग के वचन के द्वारा बात की।
परमेश्वर ने इस्राएलियों को दस आज्ञाए दी थी और उन्हें उनके पापों की माफ़ी पाने के लिए पृथ्वी की वेदी बनाने के लिए कहा था (निर्गमन २०:२४)। वैसे ही, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे विश्वास के द्वारा हमें भी हमारे सारे पापों से छूटकारा पाना चाहिए।
परमेश्वर का खुद का नाम क्या है? उसका नाम “याहवेह” है। इसका मतलब है, “मैं जो हूँ सो हूँ,” वह है, परमेश्वर वह है जो खुद से अस्तित्व में आए। फिर कैसे वह हमारे पास आए? वह पानी और आत्मा के द्वारा हमारे पास आए (यूहन्ना ३:५)। हमारा प्रभु मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया, यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लेकर मनुष्यों के सारे पाप अपने ऊपर उठाए, और मौत तक क्रूस पर चढ़के हमारी जगह बलिदान हुए। क्योंकि यह सब सच है, और क्योंकि हमें भी ऐसे विश्वास करना चाहिए, की परमेश्वर ने हमसे ऐसा विश्वास रखने के लिए कहा था जो मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए इस्तेमाल हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुआ था। सच्चा विश्वास केवल तब आता है जब हम हमारे खुद के विचारों को त्याग दे और परमेश्वर के द्वारा दी गई पापों की माफ़ी को पहिचाने। हमें बिना शर्त प्यार देने के लिए हम उसका धन्यवाद करे वो भी कम पड़ जाएगा, क्योंकि हमारे पास ऐसा कुछ नहीं है की हम परमेश्वर के सामने गर्व करे।
हमें हमारे विश्वास की नीवं बाइबल आधारित परमेश्वर के ज्ञान पर रखनी चाहिए। परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को इस विश्वास की नींव के बारे में कहा है, और उसने हमें भी कहा है। इस समय, आप सभी को तम्बू के द्वार में प्रगट हुए रंगों को समझना और विश्वास करना चाहिए, वह रंग जिसने विश्वास के नींव की रचना की है। हमें सच्चे परमेश्वर पर विश्वास करना चाहिए। आपको और मुझे हमारे पापों से बचाने के लिए, खुद परमेश्वर ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठाया और क्रूस पर अपना लहू बहाया।
आपको भी, जो इस्राएल के आत्मिक व्यक्ति बनना चाहते है, उन्हें धार्मिक मसीहियत के द्वारा नाश किए गए बलिदान की पध्धति को फिर से बनने के द्वारा अपने सारे पापों से माफ़ी पाने के लिए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए। आपको और मुझे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानना चाहिए, और फिर एक बार पाप की माफ़ी के हमारे विश्वास की नींव रखनी चाहिए ताकि यह मजबूती से कड़ी रहे।
हमें हमारे विश्वास से यीशु को धन्यवाद करना चाहिए। हमें बचाने के लिए जो नरक के लिए नियोजित थे, परमेश्वर पिता ने यीशु को हमारे पास भेजा, जो अपने वचन के द्वारा नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े के रूप में आया। इस सत्य पर पूरे दिल से विश्वास करने के द्वारा की हमारे प्रभु ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए अपनी चार सेवकाई के द्वारा उसने हमें हमारे सारे पापों से बचाया है, और उसकी दया के प्रेम पर विश्वास करने के द्वारा हम परमेश्वर को धन्यवाद देते है। जब हम पूरी तरह यह जाने और विश्वास करे की परमेश्वर ने मूसा को सिनै पर्वत पर क्यों बुलाया था केवल तभी हम बुलाहट पाए हुए बन सकते है जिसने पापों की माफ़ी पर अपने विश्वास की नींव को बनाया है। परमेश्वर ने हमें सिनै पर्वत से क्यों बुलाया इसका कारण आपको और मुझे जानना है और उस पर विश्वास करना है: यह बलिदान के अर्पण के द्वारा हमारे सारे पापों को माफ़ करने के लिए और हमें उसकी संतान बनाने के लिए था।
मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार में प्रगट हुए सत्य से, आप परमेश्वर की और ज्यादा दया को पाएंगे। यह मेरी सच्ची आशा और प्रार्थना है की आप सभी परमेश्वर की दया के प्रेम पर विश्वास करे और अपने हृदय में इसका स्वीकार करे।