उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-7] (निर्गमन २५:१-९) मिलापवाले तम्बू को बनाने की सामग्री जिसने विश्वास की नींव रखी

(निर्गमन २५:१-९)
“यहोवा ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से यह कहना कि मेरे लिये भेंट लाएँ; जितने अपनी इच्छा से देना चाहें उन्हीं सभों से मेरी भेंट लेना। और जिन वस्तुओं की भेंट उनसे लेनी है वे ये हैं; अर्थात् सोना, चाँदी, पीतल, नीले, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा, सूक्ष्म सनी का कपड़ा, बकरी का बाल, लाल रंग से रंगी हुई मेढ़ों की खालें, सुइसों की खालें, बबूल की लकड़ी, उजियाले के लिये तेल, अभिषेक के तेल के लिये और सुगन्धित धूप के लिये सुगन्धद्रव्य, एपोद और चपरास के लिये सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के लिये मणि। और वे मेरे लिये एक पवित्रस्थान बनाएँ कि मैं उनके बीच निवास करूँ । जो कुछ मैं तुझे दिखाता हूँ, अर्थात् निवास-स्थान और उसके सब सामान का नमूना, उसी के अनुसार तुम लोग उसे बनाना।”
 
 
गरीब जीवन
 
‘जीवन का गीत’ नाम की कविता में, हेनरी वेड्सवर्थ लॉन्गफेलो ने लिखा है, “मुझे मत समझाओ, ‘जीवन एक खाली सपना है!’”
हालाँकि, यदि आप सच में इसके बारे में सोचे, तो वास्तव में मनुष्य का जीवन बहुत ही गरीब है। हालाँकि प्रत्येक मनुष्य इस संसार में अकेले और अस्थायी जीवन जीने के बाद मिट्टी में मिल जाएगा, पृथ्वी आख़री पड़ाव नहीं है। पाप की वजह से प्रत्येक मनुष्य का आख़री पड़ाव नरक की पीड़ा होगी।
फिर भी लोग अपनी मौत को साधारण और कब्र से परे बना देते है। इस संसार में जीवन जीते, लोग बिना उद्देश्य के जीवन जीते है, नरक की ओर जा रहे है, परमेश्वर को मिलाने में अयोग्य है जिसने उन्हें बनाया है। यह जीवन है। लेकिन यदि जीवन में यही सब है, तो हम कितने गरीब और दयनीय है?
ऐसे जीवनों के लिए, मसीहा इंतज़ार कर रहा है। यदि लोगों को इस खुली दुनिया में लापरवाही बिना उद्देश्य के छोड़ दिया जाए और अँधेरे में कहू खो जाए, तो उनका अस्तित्व दयनीय और तुच्छ होगा। हम अपने आसपास के लोगों को देख कर यह समझ सकते है।
दुसरे दिन, जब में कार में था, तब मैंने एक बूढ़े व्यक्ति को देखा, जो तक़रीबन ६० साल का था, जो सड़क पर अकेला चल रहा था। वह मेरे पीछे चल रहा था, उसका सिर झुका हुआ था और उसके कंधे झुके हुए थे, चारो और वह अकेला था। जब मैंने हॉर्न बजाया, तब वह मुड़ा और मैंने देखा की उसका चहेरा दुःख से भरा हुआ था। इस बूढ़े व्यक्ति के हावभाव को देखकर, थोड़ी देर मैंने सोचा। यह बूढा व्यक्ति शायद महसूस कर रहा होगा की उसका जीवन कितना खाली है। शायद निराशा उसके खालीपन को ओर ज्यादा भरता होगा, उसे उसके जीवन की निरर्थकता को महसूस कराता होगा। केवल इस व्यक्ति का ही जीवन नहीं, लेकिन वास्तव में प्रत्येक व्यक्ति का जीवन सच में दयनीय है।
जैसे समय बीतता है, वैसे लोगों को समझ में नहीं आता की वे बूढ़े हो रहे है, जब तक की वे अपने शरीर पे झुर्रियों को ना देखे। उन में से कई लोगों ने अपने जीवन में कई कठिनाईयों का सामना किया है की उनके पास रुकने, मुड़ने का और वे कहाँ जा रहे है ये देखने का मौका नहीं। हालाँकि सारे मातापिता अपने बच्चे और परिवार के लिए जिए है और कठिन परिश्रम किया है, लेकिन जब वे बूढ़े होते है और उनके जीवन में कुछ भी नहीं बचता तब शब्द उनके दुःख को बयाँ नहीं कर सकते।
उनकी भावना से आगे बढ़कर, वे जल्द ही आँसुओ से अभिभूत हो गए। बहुत सारे समय के बिताने के बाद, और बहुत सरे साल गुजरने के बाद, अन्त में उनके पास पीछे देखना का मौक़ा है, और जब वे ऐसा करते है, तब वे केवल यह महसूस कर सकते है की इस उजड़े हुए दृश्यों को अपने स्वयं के प्रतिबिम्बों में कैसे देखा जा सकता है। जब सारे पत्ते गिर जाते है और जाड़े का सामना करते है, तब उन्हें समझ में आता है की उनका जीवन भी इसी तरह समाप्त हो जाएगा। निश्चित ही, वे पछताएंगे की यह जानने के लिए उन्हें बहुत समय लगा। जब वे प्रभु से मिले बिना जा रहे है तब ऐसे लोगों के पास कौनसी आशा है? ऐसे लोग जो प्रभु से मिले बिना ही जिनका अन्त होगा वे बहुत ही दयनीय है।
यदि मैं प्रभु से नहीं मिलता तो मैं भी दयनीय जीवन जीता। आपके बारे में क्या? यदि आप प्रभु से नहीं मिले है तो अभी आप कहाँ जा रहे है? इस दुनिया में ऐसे कई लोग है जो दुखी है क्योंकि वे प्रभु से मिलाने में अयोग्य है।
जब मैं ऐसे लोगों के बारे में सोचता हूँ तो मेरा दिल टूट जाता है की ऐसे कई सारे लोग है जिन्होंने अपने दुःख को आरक्षित करके रखा है। इन सारे सुवरों को अन्त तक अपने आप को खिलाना है, लेकिन हमारा जीवन इन सुवरों से अलग है, इसलिए हमें अनन्त भविष्य की ओर देखना है। बहुत सारे लोग पाश्चाताप के साथ अन्त का सामना करते है। हालाँकि वे जानते है की स्वर्ग का अनन्त राज्य है, वे समझते है की वे उसमे प्रवेश करने के योग्य नहीं है, इसलिए वे पापी बने रहते है। ऐसे कई सारे जीवन है जो पछतावे से भरे हुए है यह केवल मुझे उनके गंतव्य के लिए विलाप करवाता है।
जब हम इस जीवनों के बारे में सोचते है, की वे परमेश्वर के द्वारा तैयार की गई अच्छी जगह में जाने के योग्य नहीं है, और वे अपने जीवन का उद्देश्य परिपूर्ण किए बिना मर जाएंगे, तब हम केवल इन आत्मा के लिए रहम खा सकते है और विलाप कर सकते है। इसी लिए जीवन की तुलना कठिन समुन्दर के ऊपर जलयात्रा के साथ की गई है। जीवन को दर्शाते हुए, लोग कहते है की यह समुन्दर में जीने के बराबर है, मनुष्य की कड़वाहट की दुनिया में जीने का प्रयास करना, क्योंकि उनके जीवन से लेकर मृत्यु तक, उन्हें दुःख उठाना है, जीवन जीने के लिए संघर्ष करना है।
जब हम अपने आप को याद दिलाते है की जीवन ऐसा है, जब निश्चित रूप से हमें समझ आता है की लोग प्रभु से मिल पाए इसलिए मिलापवाले तम्बू के सत्य को समझाना बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्यों? क्योंकि बलिदान के अर्पण के द्वारा, परमेश्वर अपने घर के अन्दर इन पापी व्यक्ति को पाप से उद्धार देते है। मिलापवाला तम्बू जंगल में बनाया हुआ परमेश्वर का घर है। परमेश्वर के घर के अन्दर, परमेश्वर बलिदान के अर्पण के द्वारा परिपूर्ण हुए पाप की माफ़ी के अनुग्रह के द्वारा पापी से मिलता है। परमेश्वर हमें कहता है, “मैं तुझ से अपना घर बनावाऊंगा जहाँ मैं निवास करूंगा, और मैं इस मिलापवाले तम्बू के अन्दर दयासन पर तुमसे मिलूँगा।” केवल मिलापवाले तम्बू यानी परमेश्वर के घर के अन्दर व्यक्ति के पास परमेश्वर से मिलाने का मौका है।
मिलापवाले तम्बू के इस सत्य को दुनिया की किसी भी चीज से बदला नहीं जा सकता, और यह बहुत ही मूल्यवान है की उसे किसी भी कीमत पर खरीदा नहीं जा सकता। मैं विश्वास करता हूँ की हम जिनके पास मसीही विश्वास है वे यीशु मसीह पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते है, इस मिलापवाले तम्बू पर विश्वास का सही ज्ञान होना आशीष की ओर कदम बढ़ाना है।
 
 
हम हमारा आशीषित जीवन जीते है
 
जब मैं सोचता हूँ हमारी तरह कोई ओर भी है जो ऐसा आशीषित जीवन जी रहा है तब मेरा हृदय आनंदित विचारों से भर जाता है। हालाँकि जीवन दयनीय है, फिर भी कई लोग अपने गंतव्य के बारे में बेखबर होकर जीवन जीते है। लेकिन परमेश्वर चाहता है की वे समझे की उनका जीवन परमेश्वर के सामने कितना ज़िद्दी है, और उनके हृदय पश्चाताप करे। दूसरी तरफ, वे परमेश्वर के द्वारा मुफ्त में दिए गए सुसमाचार को सुने बिना और अपने हृदय में थोड़ी सी भी जगह बनाए बिना अपना जीवन जीने का प्रयास करते है।
निर्गमन हमें दस महामारी के बारे में बताता है जो परमेश्वर ने फारून के ऊपर डाली थी। कुल मिलाकर दस महामारी मिस्र देश के ऊपर डाली गई थी। परमेश्वर ने फारून को आदेश दिया था की वो परमेश्वर के लोग जो मिस्र में रहते है उसे जाने दे। उसने फारून को कहा था की यदि वह आदेश का पालन नहीं करेगा, तो वह उन पर दस महामारी भेजेगा। लेकिन फारून ने परमेश्वर की बात नहीं मानी, अपनी जिद्द में उसने परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानी, और परमेश्वर के वायदे के मुताबिक़ दस महामारी उस पर आई। फारून की जिद्द गलत थी। और उसने परमेश्वर की सज़ा को पाने के बाद इस्राएल के लोगों को स्वतंत्र किया उसका कारण भी यह था की वह शैतान के सकंजे में था। यह हम प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर पाई जाने वाली जिद्द को दर्शाता है।
हालाँकि, ऐसे लोग, परमेश्वर के तम्बू में रखी पापों की माफ़ी को पा सकते है, और उसके साथ विश्वास से जीवन जी सकते है। फिर भी यह लोग इतने ज़िद्दी है की वे अभी भी अपनी गदहे सी जिद्द की वजह से परमेश्वर के सत्य को नकारते है और उस पर विश्वास नहीं करते। इसी कारण ऐसे कई सारे लोग है जो सच्चे परमेश्वर से नहीं मिले है, अपने जीवन को पापी की तरह जी रहे है, और अन्त में उनका विनाश होता है। यह मुझे बहुत निराश करता है। बहुत सारे लोग परमेश्वर के सामने ज़िद्दी है।
क्योंकि ऐसे लोग थोड़ी देर के लिए स्वीकार करते हैं, जब वे कठिनाइयों का सामना करते हैं, लेकिन फिर ठीक उसी जगह पर जाते हैं जहां वे परमेश्वर की इच्छा को खारिज करने से पहले थे और एक बार फिर से उनके पुनरावर्ती तरीकों को फिर से शुरू करते हुए, वे दूसरी महामारी का सामना करेंगे। इस दूसरी महामारी के साथ, वे थोड़ा स्वीकार करते हैं। लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चलेगा, क्योंकि वे फिर से परमेश्वर का इनकार करना शुरू करेंगे और उसे चुनौती देंगे। और इसलिए वे अपनी तीसरी महामारी के अधीन हैं, उनके बाद चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, आठवें, और नौवें महामारी के बाद, जब तक वे अंतिम महामारी के बाद भी आत्मसमर्पण नहीं करते और नष्ट हो जाते हैं।
जब आखिरी महामारी आएगी, तो बहुत से ऐसे लोग होंगे जो मसीहा के लिए जो किया था, उस पर विश्वास न करने के लिए नरक की पीड़ा को सहन करेंगे। ऐसे लोगों का जीवन कितना मूर्ख है? यही कारण है कि हर किसी का जीवन इतना दयनीय है।
यद्यपि लोगों का परमेश्वर के समक्ष जीवन जीना केवल दयनीय है, फिर भी आपको यह महसूस करना चाहिए कि तम्बू में परमेश्वर से मिलना आपके लिए एक बहुत बड़ा आशीष है, और इस सच्चाई के साथ तम्बू के वचन पर वह बसता है। 
 
 
ऐसा अर्पण जो परमेश्वर हमसे चाहता है
 
परमेश्वर ने मूसा को सिनै पर्वत पर आने की आज्ञा दी और उसे अपनी पूरी व्यवस्था दी। सबसे पहले, उसने मूसा को दस आज्ञाएँ दीं: “तुम मुझे छोड़ किसी ओर को परमेश्वर नहीं कहोगे; तुम नाही मूर्ती बनाना और उसके सामने झुकेंगे; तुम मेरा नाम व्यर्थ नहीं लोगे; तुम सब्त को याद रखोगे और उसे पवित्र मानोगे; तुम अपने माता-पिता का सम्मान करोगे, तुम हत्या नहीं करोगे; तुम व्यभिचार नहीं करोगे; तुम चोरी नहीं करोगे; आप अपने पड़ोसी के खिलाफ झूठी गवाही नहीं देंगे; और तुम लोभ नहीं करोगे।" इसके अलावा, परमेश्वर ने उन्हें अन्य व्यवस्था के बारे में भी बताया जो कि इस्राएलियों को अपने रोजमर्रा के जीवन में पालन करनी थी: वे परमेश्वर की ६१३ आज्ञाए और व्यवस्था थी।
इन ६१३ आज्ञाओं में इस तरह के पहलुओं को शामिल किया गया था कि जब इस्राएली अपने पशुओं को खो दे, तब क्या करना चाहिए, जब किसी और के पशु एक गढ्ढे में गिर जाए, तब उन्हें अनाचार नहीं करना चाहिए, अगर उनके पास नौकर है तो उन्हें सातवें वर्ष पर मुक्त करना होगा, अगर उन्होंने अपनी महिला नौकर को अपने अकेले पुरुष नौकर के साथ शादी करवाई और एक बच्चा हुआ, तो उन्हें सातवें वर्ष पर पुरुष नौकर को खुद से जाने देना चाहिए, और इसी तरह आगे भी। परमेश्वर ने मूसा को ऐसे सभी नैतिक कानूनों के बारे में बताया जो इस्राएलियों को अपने रोजमर्रा के जीवन में परमेश्वर की दृष्टि में विश्वास के द्वारा पालन करना था।
तब परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह पहाड़ पर जाए, बड़ों को इकट्ठा करे और उनकी आज्ञाओं को घोषित करे। परमेश्वर के वचन को सुनकर, इस्राएल के लोग सभी सहमत हुए, और अपने लहू से कसम खाई कि वे इस प्रकार उसकी सभी आज्ञाओं को मानेंगे (निर्गमन २४:१-४)।
फिर, परमेश्वर ने एक ओर बार मूसा को पर्वत पर बुलाया, इस बार उसे मिलापवाले तम्बू को बनाने का आदेश दिया।
परमेश्वर ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से यह कहना कि मेरे लिये भेंट लाएँ; जितने अपनी इच्छा से देना चाहें उन्हीं सभों से मेरी भेंट लेना” (निर्गमन २५:२)। फिर उसने भेंट की सूचि बनाई: और जिन वस्तुओं की भेंट उनसे लेनी है वे ये हैं; अर्थात् सोना, चाँदी, पीतल, नीले, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा, सूक्ष्म सनी का कपड़ा, बकरी का बाल, लाल रंग से रंगी हुई मेढ़ों की खालें, सुइसों की खालें, बबूल की लकड़ी, उजियाले के लिये तेल, अभिषेक के तेल के लिये और सुगन्धित धूप के लिये सुगन्धद्रव्य, एपोद और चपरास के लिये सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के लिये मणि।
परमेश्वर ने इन भेंटो को लाने के लिए कहा उसके पीछे एक ठोस उद्देश्य था। यह उद्देश्य इस पृथ्वी पर परमेश्वर के चमकते हुए घर का निर्माण करना था, जहाँ कोई पाप नहीं है और जहाँ परमेश्वर को वास करना है, ताकि वह वहाँ इज़राइल के लोगों से मिले और उनके पापों को मिटाये। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि परमेश्वर ने उन्हें आज के चर्चों की तरह एक स्मारक का निर्माण करने के लिए पैसे लाने के लिए कहा था। आज के मसीही धर्म के झूठे भविष्यद्वक्ताओं को इस मार्ग के गलत होने का खतरा है जब वे अपनी खुद की वासनाओं को संतुष्ट करने के लिए अपने चर्च की इमारतों का निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके विपरीत, परमेश्‍वर ने इस्राएलियों से कहा कि वे इन भेंटो को लाएं ताकि वह उनका उपयोग अपने स्वयं के घर बनाने और बहुतायत से उन्हें आशीष देने के लिए करें। वास्तव में, परमेश्वर को यह भेंट प्राप्त करने का कारण हमें अपने पापों से मुक्ति दिलाना और हमें अपने न्याय से बचाना था। यह परमेश्वर के लिए था कि वह हमसे मिले, हम जो दयनीय जीवन जीते हैं, हमारे पापों को दूर करने के लिए, हमारे पापों को मिटाने के लिए, और हमें अपने लोग बनाने के लिए।
 
 
परमेश्वर ने जो भेंट लाने के लिए कहा था उसका छुपा हुआ आत्मिक अर्थ
 
हम आगे बढ़े उसके पहले, आइए हम थोडा समय परमेश्वर ने जो भेंट लाने के लिए कहा था उसके आत्मिक अर्थ के बारे में मनन करे। इसके बाद, उसके प्रकाश में हम अपने विश्वास को जांचेंगे। 
 
 
सोना चांदी, और पीतल
 
हमें सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि सोने, चांदी और पीतल का उपयोग कहां किया गया था। मिलापवाले तम्बू  में, सोने का इस्तेमाल पवित्र स्थान, परमपवित्र स्थान, और उनमें पाए जाने वाले सामानों में किया गया था, जिसमें दीवट, भेंट की रोटी की मेज, धूप की वेदी, दयासन और वाचा के सन्दूक शामिल है। सोना परमेश्वर के वचन में विश्वास को दर्शाता है। और चांदी उद्धार के अनुग्रह को संदर्भित करता है। यह बताता है कि हमें वह विश्वास होना चाहिए जो पूरी तरह से मसीहा द्वारा दिए गए उद्धार के उपहार में विश्वास करता है, और ऐसा विश्वास जो मानता है कि हमारे प्रभु ने हमारे हमारे सारे पाप अपने ऊपर ले लिए और हमारी जगह उसका न्याय हुआ था।
इसके विपरीत, पीतल का उपयोग मिलापवाले तम्बू के खंभे की कुर्सियां, उसके खूंटे, हौदी और होमबलि की वेदी के लिए किया गया था। सभी पीतल के बर्तनों को जमीन में गाड़ा या स्थापित किया जाना था। यह लोगों के पापों के फैसले को संदर्भित करता है, और पीतल हमें यह भी बताता है हमारे पापों के कारण व्यवस्था का पालन ना कर पाने की वजह से परमेश्वर के द्वारा हम पर दोष लगाया जाना चाहिए।
फिर, सोने, चाँदी और पीतल के आत्मिक अर्थ क्या हैं? वे परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार का उपहार प्राप्त करने में विश्वास की नींव का गठन करते हैं। बाइबल बताती है कि हम सभी पापी हैं जो पूरी तरह से व्यवस्था का पालन नहीं कर सकते है, इसलिए हम अपने पापों के कारण मरनेवाले हैं, और हमारी मृत्यु के बजाय प्रभु इस पृथ्वी पर आए और मिलापवाले तम्बू के अन्दर पापबलि बनकर अर्पण होकर हमारे दोष को अपने ऊपर उठा लिया।
अपने पापों की समस्या को हल करने के लिए, पापियों ने एक निर्दोष जानवर को तम्बू में लेकर आए और, बलि की व्यवस्था के अनुसार, उसके सिर पर हाथ रखकर अपने पापों को उस पर डाल दिया; उनके पापों को स्वीकार करने वाले बलि ने फिर अपना खून बहाया और मर गया। ऐसा करने से, इस्राएल के लोग, जो नरक (पीतल) से बंधे हुए थे, अपने पापों (चांदी) की माफ़ी प्राप्त कर सकते थे और विश्वास के (सोना) द्वारा पाप के दोष से बच सकते थे।
 
 
नीला, बैंजनी और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा
 
यहाँ अक्सर उपयोग की जाने वाली अन्य सामग्रियां हैं; नीला, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा। इन कपड़ो का इस्तेमाल मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार को बनाने के लिए, पवित्र स्थान का द्वार बनाने के लिए, और पवित्र और परमपवित्र स्थान को विभाजित करनेवाले परदे को बनाने के लिए किया गया था। ये चार सूत्र हमें सच्चाई बताते हैं कि जैसे उत्पत्ति ३:१५ में भविष्यवाणी की गई थी, कि प्रभु एक स्त्री की संतान के रूप में आएंगे, हमारे प्रभु वास्तव में इस धरती पर आएंगे और अपने बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ने के द्वारा पापियों को बचाएंगे, और यह कि परमेश्वर खुद हमें बचाएगा।
इन चार धागों का इस्तेमाल न केवल तम्बू के द्वारों के लिए किया गया था, बल्कि महायाजक के कपड़ों और तम्बू के पहले आवरण के लिए भी किया गया था। यह परमेश्वर की वाचा थी कि यीशु मसीह इस धरती पर आए और नीले, बैंजनी और लाल रंग के धागे के अपने कामों को पूरा करके हमें हमारे पापों से बचाए। और हमारे प्रभु ने वास्तव में इस वादे को निभाया और वास्तव में हमें दुनिया के पापों से बचाया है।
तम्बू के द्वार का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु नीला धागा है। मसीहा के रूप में इस धरती पर आने वाले यीशु मसीह को क्रूस पर क्यों मरना पड़ा? इसका कारण यह है कि उसे बपतिस्मा दिया गया था। नीला धागा यीशु के बपतिस्मा को संदर्भित करता है, बैंजनी धागा हमें बताता है कि यीशु राजा है, और लाल रंग का धागा उसके क्रूस और लहू को बहाने को दर्शाता है। नीले, बैंजनी, और लाल धागे और बटी हुई सनी का कपड़ा आवश्यक निर्माण सामग्री हैं, जो उद्धार का उपहार है जो यीशु मसीह ने हमें मसीहा के रूप में इस धरती पर आकर और हमारे सभी पापों को खुद पर ले कर दिया है।
इस दुनिया में बहुत से लोग केवल इस बात पर जोर देते हैं कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है, और मूल रूप से वह खुद परमेश्वर है। लेकिन परमेश्वर ने हमें स्पष्ट रूप से तम्बू के माध्यम से बताया है कि इस तरह की शिक्षाएं पूरी सच्चाई नहीं हो सकती हैं। 
प्रेरित पतरस १ पतरस ३:२१ में कहता है की, “उसी पानी का दृष्टांत भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठाने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मेल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुध्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।”
यह हमें इस बात की गवाही देता है कि यीशु मसीह ने अपने उद्धार के वादे को पूरा किया और अपने बपतिस्मा को प्राप्त करके पूर्ण विश्वास की नींव रखी, जो हमें बचाती है। हमारा मसीहा कौन है? मसीहा का मतलब उद्धारकर्ता है, हमें बता रहा है कि यीशु इस धरती पर आए थे, हमारे सभी पापों और दुनिया के सभी पापों को खुद पर लेने के लिए बपतिस्मा लिया था, और वास्तव में उन सभी को अपने बपतिस्मा के द्वारा खुद पर उठा लिया। 
परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से तम्बू के द्वार को बनाने के लिए इस्राएलियों से कहा। और हमारे प्रभु का उद्देश्य, जो राजाओं का राजा और स्वर्ग का परमेश्वर है, एक मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर आने के लिए इन नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की सच्चाई को परिपूर्ण करना था। हमारे प्रभु मनुष्य की देह में आए और मनुष्यजाति के प्रतिनिधि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया जो परमेश्वर की सारी धार्मिकता को पूरा करेगा।
यह पुराने नियम के बलिदान की पध्धति के बराबर था जो बलिदान के सिर पर महायाजक के हाथ रखने के द्वारा उनके सारे पाप उसके ऊपर चले जाते थे और उनकी जगह बलि पर दोष लगाया जाता था। दुसरे शब्दों में, पुराने नियम की बलिदान की पध्धति की तरह, यीशु मसीह नए नियम में सारे पापियों के पापों के लिए बलिदान बनाकर आया, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर चढ़ा, और इसतरह जगत के पापों के सारे दोष को सहा। यीशु ने परमेश्वर के बलिदान के मेमने के रूप में यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर नीले रंग के कपड़े के सत्य को परिपूर्ण किया। उसके बपतिस्मा के साथ, यीशु ने एक ही बार में मनुष्यजाति के पापों को अपने ऊपर उठाया।
अधिकांश मसीही इस तरह के लोगों में बदल गए हैं जो अन्य सांसारिक धर्मों के लोगों की तुलना में भी बदतर हैं क्योंकि वे नीले धागे, यीशु के बपतिस्मा के इस सत्य को जानने और विश्वास करने में असमर्थ हैं, और इसलिए एक ही बार में अपने पापों की माफ़ी प्राप्त नहीं की। जब मसीहियों के पास बपतिस्मा की सही व्याख्या नहीं है जो यीशु ने हमारे पापों को खुद पर लेने के लिए प्राप्त किया था, तो उनके विश्वास की नींव को शुरू से ही सही ढंग से नहीं रखा जा सकता है। 
सटीक होने के लिए, नीला धागा वह विधि और सत्य है जिसके द्वारा मसीहा इस पृथ्वी पर आया और हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया। और लाल धागा यीशु के लहू को दर्शाता करता है। यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया, उसका खून बहाया और क्रूस पर मर गया, क्योंकि हमारे सभी पाप उसके बपतिस्मा के माध्यम से उस पर डाले गए थे। यह इसलिए था क्योंकि यीशु ने यूहन्ना से प्राप्त बपतिस्मा के साथ हमारे पापों को स्वयं पर ले लिया था, इसलिए वह क्रूस पर मरा, और यह इस तथ्य के कारण था कि हमारे लिए क्रूस पर उनका बलिदान व्यर्थ नहीं था। यह इसलिए था क्योंकि यीशु मसीह ने मसीहा के रूप में अपने बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ाए जाने के द्वारा हमारे पापों के दोष को पूरी तरह उठाया था ताकि वह हमारे उद्धार को परिपूर्ण करे। 
बैंजनी धागे का अर्थ है कि यीशु मसीह परमेश्वर और राजाओं के राजा हैं। हालाँकि, यीशु मसीह राजाओं का राजा है (बैंजनी रंग का धागा), क्या उसने मनुष्यजाति के प्रतिनिधि, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा नहीं लिया था, और इसतरह उसने हमारे पापों को अपने ऊपर नहीं लिया (नीला धागा), यह माइने नहीं रखता की कितने दुःख और पीड़ा के साथ वह क्रूस पर मरा (लाल रंग का धागा), उसकी मृत्यु केवल व्यर्थ में होगी। बटी हुई सनी का कपड़ा हमें बताता है की भविष्यवाणी के वचन जो परमेश्वर ने पुराने नियम में कहे थे वह सभी नए नियम में परिपूर्ण हुए। 
 
 
आज की मसीहियत ने नीले कपड़े का अर्थ गवा दिया है
 
फिर भी आज की मसीहियत में चार कपड़ों में नीले कपड़े को नकारा है और परमेश्वर के वचन को खुद के तरीके से व्याख्या करते है – यह महान पाप के लिए दोष लगाया जाएगा।
मिलापवाले तम्बू के लिए इस्तेमाल हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी का कपड़ा हमें उद्धार की सच्छी बताता है, की हमें हमारे पापों से बचाने के लिए, यीशु मसीह हमारे मसीहा को मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आना पडा, और बपतिस्मा लेना पडा और क्रूस पर चढ़ना पडा। यीशु ने हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठा लिए।
यीशु ने हमारे पापों को अपने ऊपर कैसे लिया? उसने वह बपतिस्मा के द्वारा लिया जो उसने यूहन्ना से प्राप्त किया था। केवल हमारे पापों को अपने ऊपर उठाने की वजह से ही वह हमारे उद्धारकर्ता बन सकते थे। इसी लिए मिलापवाले तम्बू के द्वार को इन चार कपड़ो से बुना गया, क्योंकि वह हमें बताता है की यीशु, जो इस पृथ्वी पर आया, उसने बपतिस्मा लिया, क्रूस पर अपना लहू बहाया, और जो मृत्यु में से जीवित हुआ, वह खुद परमेश्वर है। 
जैसे, तम्बू के आँगन का द्वार इन नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बना था। यीशु उद्धार का द्वार है जो हमें स्वर्ग के राज्य में ले जाता है। यह द्वार नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बना हुआ द्वार है। यीशु पापियों का उद्धारकर्ता है। यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ना पर चढ़ना उनका उद्धार का उपहार है जिसने पापियों को उनके पापों से बचाया है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि आज का मसीही धर्म यीशु के बपतिस्मा को ठीक से समझने में विफल रहा है कि यह वास्तविक परमेश्वर का सामना करने में असमर्थ रहा है और इसके बजाय कई सांसारिक धर्मों में से एक में बदल गया है। जहां तक हमारे विश्वास का सवाल है, इसलिए, हमें पहले नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े की सच्चाई पर विश्वास की दृढ़ नींव रखनी चाहिए। विश्वास का यह आधार सच्चाई है कि हमारा प्रभु इस पृथ्वी पर आया और उसने आपको और मुझे दुनिया के पापों से अपने नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया। 
यीशु इस पृथ्वी पर आए और उद्धार का उपहार परिपूर्ण किया जिसने हमें हमारे सभी पापों से उनके बपतिस्मा और क्रूस के लहू से बचाया है। और अधिक विशिष्ट होने के लिए, यीशु मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया, अपने बपतिस्मा के द्वारा अपने आप पर दुनिया के पापों को ले लिया, क्रूस पर अपने लहू से हमारे सारे पापों का प्रायश्चित किया, और ऐसे क्रूस पर मरने के द्वारा हमारे पापों का दोष उसने उठाया। यह यीशु जिसने इस प्रकार हमें पानी और लहू के माध्यम से बचाया है (१ यूहन्ना ५:४-८) मूल रूप से सृष्टि के प्रभु हैं जिन्होंने हमें बनाया है, और वही जिसने हमें उद्धार का उपहार दिया है। यह यीशु जिसने हमें हमारे सभी पापों और दोष से बचाया है, हमारा सच्चा उद्धारकर्ता बन गया है। यह मिलापवाले तम्बू की निर्माण सामग्री हमें बता रही है।
वैसे ही, हमें इन सामग्रियों पर विश्वास करके अपने विश्वास को दृढ़ता से स्थापित करना चाहिए। इस यीशु पर विश्वास करने के लिए जो हमारा मसीहा और उद्धारकर्ता बनके आया, हमें अपने पूरे दिल से स्पष्टता से उसने लिए हुए बपतिस्मा पर विश्वास करना चाहिए, हमारे लिए उसने क्रूस पर उठाए सारे दोष पर विश्वास करना चाहिए, और मृत्यु में से उसके पुनरुत्थान पर विश्वास करना चाहिए। जिस उद्धारकर्ता ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए लहू के द्वारा हमें उद्धार का उपहार दिया है वह महज एक मनुष्य नहीं था, लेकिन वह सृष्टिकर्ता था जिसने मनुष्यजाति और ब्रह्मांड को बनाया था। हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में अपने विश्वास को कबूल करना चाहिए। ऐसे विश्वास के बगैर यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करना असंभव है।
क्या आपने कभी एक मूक शब्द गेम खेला है? यह खेल एक ऐसे व्यक्ति से शुरू होता है जिसे एक कार्ड दिया जाता है जिस पर एक वाक्य लिखा होता है। व्यक्ति पहले वाक्य को गुप्त रूप से पढ़ता है, और फिर केवल होंठों के आकार के साथ वाक्य को चुपचाप व्यक्त करता है। फिर, अगला व्यक्ति जो होठों को पढ़ता है, फिर उसे तीसरे व्यक्ति को देता है। यह व्यक्ति तब दूसरे व्यक्ति के होठों को पढ़ता है, और फिर इसे चौथे व्यक्ति पर उसी तरह से पारित करता है, जब तक कि अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच जाता। इस खेल का बिंदु अंतिम व्यक्ति को उस मूल वाक्य को सही ढंग से कहने के लिए है जिसे पहले पारित किया गया था। इस खेल के मज़ेदार होने का कारण यह है कि मूल वाक्य आसानी से विकृत हो जाता है। उदाहरण के लिए, यदि खेल को एक वाक्य के साथ शुरू किया था, जिसमें कहा गया था, "पंखा चालू करें," कुछ लोगों तक यह पहुचाने के बाद, यह पहले से ही बदलना शुरू हो जाता है। अंत में, अंतिम व्यक्ति यह भी कह सकता है, "गधे को दूर करो,” और एक पूरी तरह से अलग वाक्य के साथ समाप्त होता है। 
जिस तरह यह अंतिम व्यक्ति पूरी तरह से एक अलग वाक्य के साथ आता है, उसी तरह आज की मसीहियत में पूरी तरह से गलत विश्वास है, जैसे कि यह मूक शब्द गेम खेल रहा था। ऐसा क्यों है? यह इसलिए है क्योंकि यह नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े पर विश्वास की नींव रखने में विफल रहा है। आज की मसीहियत ने नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े के इस विश्वास पर अपनी नींव नहीं डाली है। जब विश्वास की नींव लड़खड़ा रही है, तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम यीशु पर कितना विश्वास करते हैं और हम उसकी शिक्षाओं को अपने जीवन में लागू करने की कितनी कोशिश करते हैं, हम बस ऐसा नहीं कर सकते।
जब परमेश्वर ने इस्राएलियों को मिलापवाला तम्बू बनाने के लिए भेंट लाने को कहा, तो उसने उनसे कहा कि पहले सोना, चाँदी और पीतल लाएँ, और फिर नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़ा लाएँ। ये निर्माण सामग्री हम सभी को दिखाती है कि यीशु ने यूहन्ना से प्राप्त अपने बपतिस्मा के द्वारा, मृत्यु तक क्रूस पर बहाए लहू के द्वारा, और अपने पुनरुत्थान के द्वारा हमें बचाया है।
नीले रंग के कपड़े का उपयोग न केवल मिलापवाले तम्बू के सारे द्वार के लिए किया जाता था, बल्कि महायाजक के बागे और तम्बू के आवरणों के लिए भी किया जाता था। यह वह सुसमाचार है जो हमें बता रहा है कि हमारे प्रभु इस धरती पर कैसे आए और कैसे उसने आपको और मुझे अपने पापों से बचाया है। वैसे ही, यह हमें बताता है कि विश्वास के ये चार बुनियादी घटक कितने महत्वपूर्ण हैं- यानी, नीला, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा - वास्तव में हमारे विश्वास के लिए है। इस वचन के आधार पर, हम सभी को अपने विश्वास की नींव दृढ़ता से रखनी चाहिए। तभी हम परमेश्वर में विश्वास कर सकते हैं और हमारे पाप की माफ़ी को प्राप्त कर सकते हैं, उसके सेवक बन सकते हैं, जो बाद में इस शब्द का प्रसार करते हैं, और, जब प्रभु लौटेंगे, तो ऐसे विश्वास के लोग बन जाएंगे तो परमेश्वर के सामने विश्वास से खड़े हो सकेंगे।
कोरिया में, यह सच है कि अभी भी चापलूसीवाद है जो किसी भी विदेशी को बेहतर मानता है। यह प्रवृत्ति मेरे देश के धर्मशास्त्रियों के बीच भी मौजूद है, जिन्होंने पश्चिमी धर्मशास्त्रियों ने परमश्वर के वचन पर अपनी बातों पर भरोसा करते हुए जो कहा है, उस पर बहुत भरोसा करते हैं। उन्हें इस अज्ञानता से मुक्त किया जाना चाहिए, और उन्हें वास्तव में परमेश्वर के वचन में विश्वास करना चाहिए, उस पर भरोसा करना और उस पर निर्भर रहना चाहिए, क्योंकि हमारे प्रभु के बपतिस्मा, उसके लहू का सत्य वास्तव में यह है की वह खुद परमेश्वर है, जो मूल रूप से हमारे उद्धार का द्वार बना है।
जैसे प्रेरित पतरस ने अंगीकार किया है, “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है,” (मत्ती १६:१६) यदि आप परमेश्वर पर विश्वास करते है, और यदि आप विश्वास करते है की प्रभु हमें हमारे पापों से बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आए, तो फिर आप को यह भी जानना और विश्वास करना चाहिए की प्रभु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठाने के द्वारा, क्रूस पर मरने के द्वारा, और मृत्यु से जीवित होने के द्वारा हमारा सच्चा परमेश्वर बना है। हमारे प्रभु का बपतिस्मा और क्रूस पर का लहू सच्चे विश्वास की नींव है जो हमें उद्धार का उपहार प्राप्त करने में योग्य बनाता है। यदि हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर परमेश्वर के वचन के मुताबिक विश्वास नहीं कर सकते, तो फिर हम उसे सच्चा विश्वास कैसे कह सकते है?
 
 
व्यवस्था आनेवाली अच्छी चीज का प्रतिबिम्ब है
 
मिलापवाले तम्बू के निर्माण सामग्री हमें दिखाती है कि हमारा प्रभु मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया था, अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को उठाया, अपने क्रूस के साथ हमारे पापों दोष को सहा, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और ऐसे वह हमारा उद्धारकर्ता बना। नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़ो के साथ, हमारे प्रभु ने पुराने नियम में वादा किया था कि वह हमें उद्धार का उपहार देगा। जिस ने हमें यह वाचा दी थी, वह कोई और नहीं, बल्कि यीशु मसीह था, जो राजाओं का राजा था, जिन्हें पापियों की खातिर बपतिस्मा दिया गया और सूली पर चढ़ाया गया। दूसरे शब्दों में, यह परमेश्वर मसीहा के रूप में हमारे पास आया। इस तरह, हमें इस सच्चाई को पूरी तरह से जानकर और विश्वास करके अपने विश्वास की नींव रखनी चाहिए। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करके, हम सभी को उद्धार का उपहार प्राप्त करना चाहिए।
सोना, चाँदी, और पीतल भी मिलापवाले तम्बू के लिए उपयोग की गई सामग्री थी। ये सामग्रियां हमारे विश्वास की नींव को दर्शाती हैं। हमारे पापों के कारण परमेश्वर के सामने हम नरक में डाल दिए गए होते। लेकिन ऐसे लोगों के रूप में, हमारे परमेश्वर ने हममें से जो विश्वास करते हैं, उन्हें उद्धार का उपहार दिया है। सारी मनुष्यजाति के लिए बलिदान के अर्पण के रूप में, यीशु मसीह को यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा दिया गया था, क्रूस पर चढ़ाया गया था, और इस तरह हमें हमारे पापों से पूरी तरह से बचाया गया था। हमारे लिए नरक से बचने का कोई रास्ता नहीं था, क्योंकि हम केवल यह जानते थे कि हम अपने पापों के लिए दोषी थे, और यह नहीं जानते थे कि हम कैसे विश्वास कर सकते हैं जो हमारे सभी पापों को दूर कर देता है। लेकिन परमेश्वर में उद्धार का उपहार था। वह यीशु इस पृथ्वी पर आया, उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों का स्वीकार किया, क्रूस पर मर गया, और इस तरह हमारे पापों और दोष की सभी समस्याओं का समाधान हो गया - यह उद्धार का उपहार है।
हम अपने विश्वास के द्वारा अपने पापों से बच गए हैं, यह विश्वास करते हुए कि परमेश्वर ने हमारे उद्धार के अपने काम को पूरा किया है और हमें इस उद्धार का उपहार दिया है। यही कारण है कि परमेश्वर ने सोने, चांदी और पीतल के विश्वास को लाने के लिए कहा, क्योंकि उसने उद्धार का उपहार देकर पूरी तरह से उन लोगों को बचा लिया है जो नरक के लिए नियोजित थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे प्रभु ने पृथ्वी पर आकर, हमारे सारे पापों को अपने ऊपर उठाकर, और परमेश्वर के सामने हमारे सारे दोषों को सहन करने के द्वारा हमें बचाया है। 
यीशु मसीह अब हमारा सम्पूर्ण उद्धारकर्ता बन गया है। इसलिए हमें अपने विश्वास के साथ उनके उद्धार के उपहार में दृढ़ता से खड़े होना चाहिए, क्योंकि नीले, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा विश्वास का उपहार है। परमेश्वर नहीं चाहता कि हम बिना कुछ जाने-समझे आँखे बंद करके विश्वास करे।
 
 
बकरी का बाल, लाल रंग से रंगी मेढ़ो की खाले, सुइयों की खाले
 
यह मिलापवाले तम्बू के आवरण को बनाने के लिए इस्तेमाल होता था। पहला आवरण नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बना हुआ था, जिसके ऊपर बकरी के बाल से बने आवरण को रखा गया था। उसको लाल रंग से रंगी मेढ़ो की खाल से ढँका गया था, और अन्त में सबसे ऊपर सुइयों की खाल रखी गई थी।
मिलापवाले तम्बू के सबसे ऊपर रखा गया आवरण सुइयों की खाल से बना था। इससे मिलापवाले तम्बू के सबसे ऊपर यह काले रंग की सुइयों की खाल दिखाई देती थी। सुई समुन्दर की मछली है। इसके खाल का नाप इंसान के जितना या उससे थोड़ा छोटा होता है, और खाल जलरोधक होती है। इसी लिए मिलापवाले तम्बू के सबसे ऊपर के आवरण के लिए सुइयों की खाल इस्तेमाल होती थी। इसके कारण, मिलापवाले तम्बू की बाहरी दिखावट इतनी प्रभावशाली नहीं थी और देखने में इतनी अच्छी नहीं थी। यह हमें बताती है की जब यीशु हमारे लिए इस पृथ्वी पर आए, तब वह ऐसे ही नम्र रूप से आए, उसकी दिखावट उतनी अच्छी नहीं थी।
लाल रंह से रंगी मेढ़ो की खाल हमें बताती है की यीशु इस पृथ्वी पर आएगा और हमारे लिए बलिदान होगा, जब की बकरी के बाल हमसे बताते है की वह बलिदान के अर्पण के रूप में बपतिस्मा लेकर हमें बचाएगा और ऐसे वह हमारे पापों को अपने ऊपर स्वीकार करेगा, और क्रूस पर बलिदान होगा।
दुसरे शब्दों में, मिलापवाले तम्बू की यह सामग्री हमारे विश्वास के मूल तत्व है। यह सत्य विश्वास को बनाने वाली सामग्री है जिसे भूला नहीं जा सकता। हमें उद्धार का उपहार देने के लिए, यीशु मसीह हमारे लिए बलिदान का अर्पण बनके इस पृथ्वी पर आए। पुराने नियम में, परमेश्वर ने इस्राएलियों की पापों की माफ़ी के लिए बलिदान की पध्धति स्थापित की: निष्कलंक पशु का बलिदान (बकरी, भेड़, या बैल) उसके ऊपर हाथ रखने की रीति से इस्राएलियों के पापों का स्विउकार करता था, और उनकी जगह उसे मारा जाता था, उसका लहू बहाया जाता था, और उसे जलाया जाता था, और इसतरह उन्हें उनके सारे पापों से बचाया जाता था। 
यीशु मसीह बलिदान के मेमने के रूप में इस धरती पर आए और हमारे पापों को स्वयं उनके बपतिस्मा के माध्यम से स्वीकार किया, अर्थात्, हाथ रखने के द्वारा। जिस तरह बलि के सिर पर हाथ रखकर इस्राएलियों के पापों को उसके ऊपर डाला जाता था और उसकी बलि चढ़ाकर उसका लहू बहाया जाता था और होमबलि की वेदी पर जलाया जाता था, उसी प्रकार, यीशु मसीह ने भी बपतिस्मा लेकर और क्रूस पर मरने के द्वारा हमारे पापों के दोष को सहा था, और इसतरह हमें जगत के पापों से बचाया था।
जैसे बलिदान के अर्पण का लहू होमबलि की वेदी के सींगो पर लगाने से न्याय की पुस्तक में लिखे नाम को मिटाया जाता था, इसी तरह यह यीशु का बपतिस्मा और उसका बहाया हुआ लहू है जिसने हमारे अनन्त प्रायश्चित को परिपूर्ण किया और जगत के सारे पापों को मिटा दिया। इसी तरह, मिलापवाले तम्बू की सारी सामग्री हमें यीशु मसीह और उसकी सेवकाई के बारे में बताते है, वह बताते है की उसने हमें जगत के पापों से बचाया है। पुराने नियम से लेकर नए नियम तक, वचन जिससे यीशु ने हमें जगत के सारे पापों से बचाया था, वह किसी भी दोष से मुखत है।
आज के कई मसीही यह नहीं मानते हैं कि यीशु मसीह इस धरती पर हमारे बलिदान के रूप में आए और हमारे पापों को अपने बपतिस्मे के साथ स्वयं ले लिया, लेकिन वे इसके बजाय केवल क्रूस पर उनकी मृत्यु में बिना शर्त विश्वास करते हैं। इस तरह की मसीहियत नीले रंग के कपड़े को छोड़कर केवल लाल और बैंजनी रंग के कपड़े से बुने गए तम्बू के आँगन का एक नियमविहीन द्वार है। उनके पास केवल गलत विश्वास है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बने आवरण की कोई आवश्यकता नहीं देखता है, और इसके बजाय उनका मानना है कि सभी को केवल दो आवरण की जरुरत है जो लाल रंग से रंगे मेढ़े की खाल और सुइयों की खाल से बना है।
जब हम दुनिया भर में चित्रित मिलापवाले तम्बू के कई चित्रों को देखते हैं, तो उनमें से अधिकांश को इस तरह से चित्रित किया जाता है कि हम नीले कपड़े का मामूली निशान भी नहीं पा सकते हैं। क्योंकि जिन लोगों ने इन चित्रों को चित्रित किया है, वे पानी और आत्मा के सुसमाचार से अनजान हैं, उनके चित्रों में मिलापवाले तम्बू के आँगन का द्वार लाल और सफेद रंगों में कवर किया गया है। लेकिन इस तरह का विश्वास कभी भी परमेश्वर के सामने सही विश्वास नहीं हो सकता है। 
तम्बू के आँगन के द्वार के लिए जो कपड़ा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था, वह नीला कपड़ा था, उसके बाद बैंजनी रंग का कपड़ा, फिर लाल रंग का कपड़ा और उसके बाद सफेद कपड़ा। इसलिए जब हम आँगन के द्वार की ओर देखते है, , तो इन चारों रंगों को एक बार में देखना चाहिए। लेकिन क्योंकि इस दुनिया में बहुत सारे लोग हैं, जिनका विश्वास यीशु के बपतिस्मा के किसी भी ज्ञान से पूरी तरह से रहित है, उन्होंने तम्बू के सारे रंगों को नकार कर केवल दो संगो से तम्बू के आँगन के द्वार को बनाया है। 
ऐसा करने से, वे बहुत से लोगों को धोखा दे रहे हैं, जिनके पास पहले से ही परमेश्वर का सीमित ज्ञान है और वह उनके वचन से काफी अनजान हैं। ये सब झूठे भविष्यवक्ता हैं। इन लोगों का जिक्र करते हुए, यीशु ने खुद उन लोगों को उन पौधों के रूप में दर्शाया है जिन्हें शैतान ने गेहू के साथ बोया था (मत्ती १३:२५)। दूसरे शब्दों में, वह वे लोग हैं जो मिलापवाले तम्बू के आँगन के द्वार के चित्र से नीले कपड़े को छोड़कर झूठ फैलाते हैं। यही कारण है कि इतने सारे लोग यीशु के प्रति विश्वास करते हुए भी पापी हैं, और यीशु में विश्वास के बावजूद वे अपने पापों के कारण अपने विनाश के लिए नियोजित हैं।
 
हमारे विश्वास की नींव मजबूती से खड़ी होनी चाहिए। जब यह सब विश्वास के एक आधारहीन आधार पर धराशायी हो जाए तो आपकी आत्माओं के लिए धार्मिक जीवन की लंबी अवधि का नेतृत्व करने का क्या फ़ायदा होगा? गलत विश्वास पल भर में ही निचे गिर जाएगा। कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा घर कितना सुंदर है, अगर हम इस घर को विश्वास की नींव पर ना बनाए तो क्या अच्छा होगा? भले ही आपने कितनी भी लगन से परमेश्वर की सेवा की हो, अगर आपके विश्वास की नींव में खोट है, तो आपने केवल रेत पर अपना घर बनाया है; जब तूफ़ान आते हैं, हवाएँ उठती हैं, और बाढ़ें आती हैं, तब यह सब एक ही बार में गिर जाएगा।
लेकिन उस विश्वास का क्या जिसका आधार ठोस हो? यह कभी नहीं गिरता, चाहे वह हिल जाए। परमेश्वर ने हमें बताया कि नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की चट्टान पर बना एक घर कभी भी नीचे नहीं गिरेगा। वास्तव में मामला यही है। चट्टान का विश्वास क्या है? यह वो विश्वास है जो नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करता है। विश्वास का ऐसा घर बनाने वालों का विश्वास कभी नहीं टूटेगा। यही कारण है कि हमारे विश्वास के लिए एक दृढ़ और ठोस आधार होना महत्वपूर्ण है। प्रभु ने हमारे लिए जो किया है उसे समझे बिना यदि हम विश्वास करे तो ऐसा विश्वास झूठे धर्म के विश्वास में तबदील हो जाएगा, जो परमेश्वर को पसंद नहीं है।
 
 
बबूल की लकड़ी, तेल, और मसाले 
 
तम्बू के स्तंभ, होमबलि की वेदी, और पटिया और पवित्र स्थान की वस्तुए बबूल की लकड़ी से बनी थी। बाइबल में लकड़ी का अर्थ आमतौर पर इंसानों से है (न्यायियों ९:८-१५,  मरकुस ८:२४)। यहाँ लकड़ी हमारे मानव स्वभाव को भी दर्शाती है; यह बबूल की लकड़ी खंभे बनाने के लिए भी इस्तेमाल हुई थी, होमबलि की वेदी, और मिलापवाला तम्बू खुद हमें बताता है कि जैसे बबूल के पेड़ की जड़ें हमेशा जमीन के नीचे दबी रहती हैं, वैसे ही हमारा मूल स्वभाव हर समय पाप करने का है। लोगों को यह स्वीकार करना चाहिए कि वे हमेशा अधर्म और पाप करते है।
ठीक उसी समय, बबूल की लकड़ी यीशु मसीह की नम्रता को भी दर्शाता है। मसीहा जो मनुष्य देह में आया था उसने जगत के सारे पापों को उठाया था, और मनुष्यजाति के लिए उसने न्याय का सामना किया था। वह खुद परमेश्वर था, और इसलिए, संदूक, अर्पण की रोटी की मेज, धूप वेदी, और मिलापवाले तम्बू के पटिये बबूल की लकड़ी से बने थे और सोने से मढ़े हुए थे।
प्रकाश के लिए तेल और अभिषेक के तेल और धूप के लिए मसाले हमारे विश्वास को दर्शाते है जो हम यीशु मसीह को अर्पण करते है। यीशु मसीह वह मसीहा है जिसने आपको और मुझे बचाया है। "यीशु" नाम का अर्थ "वह है जो अपने लोगों को उनके पापों से बचाएगा," और "मसीह" नाम का अर्थ है "अभिषिक्त व्यक्ति", इसलिए यह हमें बताता है की यीशु मसीह स्वयं परमेश्वर है और स्वर्ग का महायाजक है जिसने हमें बचाया है। परमेश्वर की इच्छा का पालन करते हुए, हमारे प्रभु मनुष्य देह में इस धरती पर आए, बपतिस्मा लिया, हमारे खातिर क्रूस पर खुद को बलिदान किया, और इस तरह हमें उद्धार का उपहार दिया। यीशु द्वारा निभाई गई महायाजक की भूमिका जिसने हमें उद्धार दिया है, वास्तव में बहुत ही सुन्दर कार्य है।
 
 
सुलैमानी मणि और दुसरे मणि को महायाजक के एपोद और चपरास में लगाना था
 
बारह अलग-अलग कीमती पत्थरों का उल्लेख यहां किया गया है जो कि महायाजक के एपोद और चपरास में लगाए जाने थे। महायाजक ने सबसे पहले अंगरखा पहना, फिर नीले रंग का जामा पहना, फिर जामे के ऊपर एपोद पहना। फिर चपरास को एपोद के ऊपर रखा गया जो बलिदान की विधि के दौरान पहना जाता था, और इस चपरास के ऊपर बारह कीमती पत्थर लगे हुए थे। इससे हमें पता चलता है कि महायाजक की भूमिका इस्राएल के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया के अन्य सभी लोगों को अपने मन में शामिल करना था, परमेश्वर के सामने जाना था और उन्हें बलिदान का अर्पण चढ़ाना था। 
यीशु, स्वर्ग के अनन्त महायाजक ने भी दुनिया के सभी जातियों को अपने मन में रखा था, अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सरे पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए और हमारी जगह खुद का बलिदान देने के लिए उन्होंने अपना इनकार किया, और इस तरह उन्होंने परमेश्वर पिता के लिए लोगों को पवित्र किया। जिन बारह कीमती पत्थरों को चपरास पर रखा गया था, वे इस दुनिया के सभी राष्ट्रों को दर्शाता हैं, और महायाजक जो उन्हें पहनाते हैं, वे यीशु मसीह का उल्लेख करते हैं जिन्होंने इसी तरह दुनिया के सभी राष्ट्रों को बचाया और गले लगाया है।
तो यह वो भेंट थी जो हमारे परमेश्वर ने इस्राएलियों को मिलापवाला तम्बू बनाने के लिए लाने को कहा था। परमेश्वर ने उन्हें इन भेंटो से तम्बू यानी की उनका निवास स्थान बनाने के लिए कहा उसका भी एक आत्मिक अर्थ है। इस्राएल के लोग हमेशा पाप करते थे, क्योंकि वे व्यवस्था का पालन नहीं कर पाए जो परमेश्वर ने उन्हें दी थी। इसलिए परमेश्वर ने मूसा के द्वारा उन्हें मिलापवाला तम्बू बनाने और उन्हें बलिदान की पध्धति देने को कहा, जिसके द्वारा तम्बू के अन्दर बलिदान अर्पण करने से उन्हें पापों की माफ़ी दी जाएगी। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर ने इस्राएलियों की भेंट स्वीकार करके उनके सारे पापों को मिटा दिया, और बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ उन्हें बलिदान अर्पण करने के लिए कहा। इस तरह परमेश्वर इस्राएल के लोगों के साथ मिलापवाले तम्बू में निवास करते थे।
हालाँकि, इस पृथ्वी पर बहुत सारे ऐसे मसीही है जो, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास नहीं करते। जब परमेश्वर ने उन्हें सोना, चांदी, और पीतल लाने के लिए कहा, तो उन्होंने इस भेंट में निहित सत्य पर विश्वास क्यों नहीं किया?
क्या हम सभी अपने पापों के कारण नरक में नहीं थे? क्या आपने मसीहियत में दुनिया के कई धर्मों में से एक धर्म के रूप में विश्वास नहीं किया था क्योंकि आपने खुद को कभी भी नरक में जाने के लिए स्वीकार नहीं किया है? यदि इस तरह से आपने अभी तक विश्वास किया है, तो आपको पश्चाताप करना चाहिए और नीले, बैंजनी, और स्कारलेट कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की ओर वापिस मुड़ना चाहिए। और आपको परमेश्वर की सख्त आज्ञाओं के सामने कबूल करना चाहिए की आप पापों का ढेर है, और आप इन पापों की वजह से नरक के लिए नियोजित है, और आपको पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए। 
अब, आपको सच्चाई के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, कि जब आप नरक के लिए नियोजित थे, तब भी हमारे प्रभु मसीहा के रूप में इस धरती पर आए थे, अपने बपतिस्मा के द्वारा आपके पापों को अपने ऊपर उठाया, इस पापों को क्रूस तक लेकर गए और अपना लहू बहाने के द्वारा अपना बलिदान दिया, और इसतरह आपको और मुझे हमारे पाप और दोष से बचाया। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास किए बिना, हम कभी भी अपने पूर्ण विश्वास की नींव नहीं रख सकते।
 
 
हमें हमारे विश्वास की नींव के बारे में सोचना चाहिए
 
परमेश्वर हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास रखने के लिए कहता है; हमें अपने आप से पूछना चाहिए की क्या हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में विश्वास करते है या फिर नीले कपड़े को छोड़ केवल बैंजनी और लाल कपड़े में प्रगट हुए सत्य पर विश्वास करते है।
हमें खुद की ओर देखना है और जाचना है की हम परमेश्वर पर गलत विश्वास तो नहीं करते जो हमारे लिए मुनासिब है। जब परमेश्वर ने हमें नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा लाने को कहा तब हमने कही उनको काले रंग का कपड़ा तो नहीं दिया? “परमेश्वर, आपने जो कपड़ा माँगा था वह मुझे तम्बू के लिए व्यर्थ लगा। वह बारिस के साथ गल जाएगा, और वह देखने में और यहाँ तक लाने में तकलीफ़देह था। उसके बजाए यह नायलोन का कपड़ा इस्तेमाल कीजिए। मैं दावा करता हूँ की यह कम से कम ५० साल तक चलेगा, और यदि अच्छी तरह संभाला तो १०० साल तक भी चलेगा। और यदि आप इसे जमीं में गाड़ देंगे, तो यह २०० साल तक गलेगा नहीं। क्या यह अद्भुत नहीं है?
क्या यह कोई संयोग से नहीं है जो हम परमेश्वर से कह रहे है? हमें अपनी ओर भी देखना चाहिए और जाचना चाहिए की कही हम भी परमेश्वर पर ऐसा अंध विश्वास तो नहीं कर रहे। और यदि हमारा विश्वास ऐसा है, तो हमें अभी ही पाश्चाताप करना चाहिए। दुसरे शब्दों में हमें वापस मुड़ना चाहिए।
हम में से कई सारे ऐसे है जो खुद को अच्छा मसीही मानते है, लेकिन करीब से देखने पर, उनका ज्ञान और विश्वास दोनों गलत है।
 
 
रहस्यवाद जो आज की मसीहियत में प्रबल है
 
रहस्यवाद वह है जिस पर मसीही लोग सबसे अधिक विश्वास करते हैं। इन लोगों को पता नहीं है कि परमेश्वर का वचन वास्तव में क्या कह रहा है। क्योंकि वे सत्य के वचन को नहीं जानते हैं जो कि मसीहा ने उन्हें दिया है, वे अपनी भावनाओं के अनुसार प्रभु पर विश्वास करते हैं और उनका अनुसरण करते हैं। और वे आश्वस्त हैं कि ऐसी भावनाएँ सच्चाई की हैं। क्योंकि वे खुद से परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, और ईमानदारी से अपनी भावनाओं का अनुसरण करते हैं जो वे अपनी प्रार्थनाओं में समझते हैं, वे वास्तव में परमेश्वर में सच्चा विश्वास नहीं पहचान सकते।
इस तरह, परमेश्वर पर अपनी भावनाओं के अनुसार विश्वास करना जो एक व्यक्ति के स्वयं के विचारों में व्यापक रूप से उतार-चढ़ाव करते हैं, रहस्यवाद का विश्वास है। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं, वे उन भावनाओं की अगुवाई करते हैं जो उन्हें तब मिलती हैं जब वे उपवास करते है, स्तुति करते हैं, जब वे विश्वास करते हैं, जब वे भोर की प्रार्थना करते हैं, जब वे प्रार्थना करने के लिए पहाड़ पर जाते हैं, जब वे पाप करते हैं, जब वे पश्चाताप की प्रार्थना करते हैं, विगेरे – ये लोग सभी रहस्यवादी हैं। दूसरे शब्दों में, किसी की भावनाओं को पकड़कर विश्वास का जीवन जीना नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े का विश्वास नहीं है, जिसके बारे में मसीहा ने कहा था।
शायद आज के ९९.९ प्रतिशत मसीही ऐतिहासिक रूप से रहस्यवादी हैं। दूसरे शब्दों में, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है, कि प्रारंभिक चर्च को छोड़कर, सारे मसीही लोग रहस्यवाद का पालन करते रहे हैं। जिन लोगों के पास नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े का विश्वास नहीं है, वे यह सोचकर बहक जाते हैं कि उनकी अपनी भावनाएं किसी तरह एक विश्वास है। वे अपनी प्रार्थनाओं में परमेश्वर को देखने और मिलने का दावा करते हैं, और हमें बताते हैं कि जब भी वे स्तुति करते हैं, तो उन्हें कितना अद्भुत लगता है।
वे कहते है, “हम इस स्तुति की सभा में इकठ्ठा हुए थे, और हमने एक साथ अपने हाथ उठाए और अपने पापों का पश्चाताप किया। हमने क्रूस पकड़ा है और कुछ विधियाँ की है, और हमारे दिल में आग जाल उठी थी, और मसीह हमें प्यारा लगने लगा था। मसीह ने जो खून बहाया था उसके लिए हमने अपने दिल में बहुत धन्यवाद दिया। अब हम और भी दृढ़ता से विश्वास करते है की प्रभु ने हमारे सरे पाप धो दिए है, अब और हमें समझ आया है की क्यों उसने अपना लहू बहाया। हमें वह अनुभव बहुत ही पसंद आया।” लेकिन जब वह भावना एक दिन कम ही, तब उन्होंने कहा, “लेकिन वे सारी भावना अब सुख चुकी है, और अब हमारे दिल में पाप है।” इस प्रकार का विश्वास और कुछ नहीं लेकिन रहस्यवाद है।
व्यक्ति के संस्था और संप्रदाय के अन्तर की परवाह किए बिना, प्रत्येक मसीही को विश्वास की जरुरत है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर विश्वास करता हो। जो लोग नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर विश्वास नहीं करते उन सभी का विश्वास रहस्यवादी है। यह लोग परमेश्वर को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास नहीं देते लेकिन नायलोन कपड़े का विश्वास देते है। दुसरे शब्दों में वे अपने रहस्यवादी विश्वास को लेकर परमेश्वर के पास आते है, ऐसा कुछ जिसकी ओर परमेश्वर देखता भी नहीं है।
क्या अपने कभी घात पर नाव को बाँधने के लिए इस्तेमाल होती मोटी रस्सी को देखा है? रहस्यवादी लोग परमेश्वर को ऐसी सामग्री देते है। जब हमारे प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा लाने के लिए कहा है, कुछ लोग ऐसी मोटी रस्सी लेकर परमेश्वर के पास जाते है, उसे कहते है, “प्रभु, इस विश्वास को स्वीकार करो!” और कुछ लोग लोहे की चेन लेकर जाते है जो बड़े जहाजों को बाँधने के लिए इस्तेमाल होता है। इस लोहे की चेन का बण्डल लेकर वे उसे प्रभु के चरणों में अर्पण करते है और कहते है की इसे स्वीकार करो।
लेकिन प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े को लाने के लिए कहा है। उसने हमें लोहे की चेन लाने के लिए नहीं कहा है। फिर भी बहुत सारे लोग उनको जो अच्छा लगता है या फिर जो आसान होता है वह लेकर जाते है। हालाँकि लोग परमेश्वर के पास लोहे की चेन, रस्सी, नायलोन कपड़ा, या दाखरस लेकर जाते है, फिर भी परमेश्वर केवल नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े को ही स्वीकार करते है। परमेश्वर ने इस बात को स्थापित किया है की वह केवल नीले, बैंजनी और लाल कपड़े के विश्वास का ही स्वीकार करेंगे। वैसे ही, हमें भी केवल नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के विश्वास को ही परमेश्वर के सामने लेकर जाना चाहिए।
 
 
मसीहा किसी भी अर्पण का स्वीकार नहीं करता
 
इस्राएलियों को भी सोना, चांदी, पीतल, और बारह कीमती पत्थरों को एपोद और चपरास में परमेश्वर के पास ले जाना था। फिर भी कुछ लोग हैं जो परमेश्वर को तांबा या लोहा लेते हैं। क्या यीशु एक रीसाइक्लिंग डंप चला रहा है, जैसे कि वह सभी प्रकार की चीजों को स्वीकार करेगा? बिलकूल नही!
यीशु कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो किसी भी प्रकार के कचरे को स्वीकार करता है। वह एक रीसाइक्लिंग डंप नहीं चलाता है, की आप जो भी बेकार सामान लाते हैं उसे वह स्वीकार करे। यीशु वह मसीहा है जो हम पर नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े की दया करना चाहता है जो हमारे पापों को क्षमा करता है, और जो हमें उसका सच्चा प्यार देना चाहता है। यही कारण है कि यीशु को प्रेम का राजा कहा जाता है। हमारा चरवाहा वास्तव में प्रेम का राजा है। यीशु वास्तव में हमारे सच्चे मसीहा हैं। इस मसीहा ने विश्वास को निर्धारित किया है कि वह हमसे कुछ विशेषताओं को परिभाषित करता है, जो बिल्कुल आवश्यक है। जब हम इस विश्वास के साथ परमेश्वर के सामने जाते हैं, तो वह हमें वही देगा जिसका उसने हमसे वादा किया है।
फिर भी हम देखते है की कुछ लोगों का विश्वास मसीहा के प्रति उनके झूठे ज्ञान पर आधारित है, कुछ ऐसे लीग है जो वर्णन से परे ज़िद्दी है। वे फारून के समान ज़िद्दी है जिसने परमेश्वर के सामने अपने तरीके को पकड़ के रखता है। जब मूसा ने उससे कहा, “यहोवा ने अपने आप को प्रगट किया है; उसके लोग को जाने दे,” फारून ने प्रत्युत्तर दिया, “यह यहोवा कौन है?”
जब परमेश्वर के अस्तित्व का वर्णन उसके सामने किया गया, तब उसे निश्चित रूप से तुरंत समर्पण करना चाहिए था और अपनी जिद्द का नुकशान और फायदा देखकर उससे बिनती करनी चाहिए थी। यदि फिर भी वह विश्वास नहीं करता और अपनी जिद्द पर अड़ा रहता, तो उसने शायद कुछ समय तक उसे पकड़ा रहा होता, लेकिन कुछ महामारियों के बाद उसको हार मान लेनी चाहिए थी। फारून के लिए यह कितना मूर्खतापूर्ण और दयनीय था की उसके देश को मेंढको से भरनेवाली महामारी के बाद भी उसने परमेश्वर के वचन का अनादर किया और अपनी जिद्द पर अड़ा रहा?
केवल मेंढक ही नहीं, लेकिन कुटकियों की महामारी भी फारून के महल में आई थी। दाए या बाए, जहा भी व्यक्ति मुड़ता वहाँ चारो ओर मिस्र देश कुटकियो से भरा हुआ था, और फिर भी फारून ने समर्पण नहीं किया। यदि सब जगह कुटकियों से भरी हुई हो तो कैसे कोई जी सकता है? ऐसी परिस्थिति में, उसे समझना चाहिए था, “क्योंकि मैंने परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानी, इसलिए वह मुझे दिखा रहा है की असली राजा कौन है। शायद मैं पृथ्वी पर मेरे साम्राज्य का राजा हो सकता हूँ, लेकिन मैं उसकी तुलना में कुछ भी नहीं। हालाँकि मैं पृथ्वी के सबसे महान राज्य का राजा हूँ, और हालाँकि मेरे पास पूरी दुनिया पर सामर्थ्य है, लेकिन परमेश्वर मुझ से भी ज्यादा सामर्थी है, और उसने मेरी अनाज्ञाकारीता की वजह से यह महामारियों को भेजा है।” इस तरह उसे समर्पण करना चाहिए था।
फारून के लिए बुध्धिमानी यह होती की उसने जब देखा की उसकी जिद्द की कीमत क्या है तब उसे तुरंत समर्पण करना चाहिए था। फ़रून चाहे कितना भी सामर्थी हो, लेकिन अगर निष्कर्ष यह निकलता है की परमेश्वर के सामने खड़े रहने का अब कोई रास्ता नहीं बचा है, तब उसे समर्पण करना चाहिए था, और कहना था, “ठीक है, परमेश्वर, आप पहला स्थान लीजिए; मैं दूसरा स्थान लूंगा।” लेकिन क्योंकि फारून ने यह बिनती करने से नकार दिया, इसलिए उसका पूरा देश और लोग कुटकियों की महामारी का भोग बने।
इसके कारण, कोई भी मिस्री कुछ भी नहीं कर पाया। जब सारे लोग कुटकियों का भोग बने, तब कोई भी कुटकियों से पीछा छुडाने के बजाए ओर कुछ कैसे करता? ये सारे मिस्री हाथ में मशाल लेकर कुटकियों से पीछा छुडाने के लिए यहाँ वहाँ भाग रहे है यह कल्पना हम कर सकते है, शायद उन्होंने इस चक्कर में अपने घर को भी जला दिया होगा, और जलती हुई कुटकियों की बदबू से पूरा गाँव भर गया होगा।
ऐसी चीजें हैं जो मनुष्य कर सकता है, और कुछ चीजें हैं जो मनुष्य नहीं कर सकता है। क्योंकि परमेश्वर आयोजन का परमेश्वर है, यह वो परमेश्वर है जो जीवन और मृत्यु, खुशी और दुःख, और आशीष और शाप का संचालन करता है। जब ऐसा होता है, तो अपने आप में विश्वास रखने और परमेश्वर के खिलाफ खड़े होने की कोशिश करने के बजाय, हम सभी को तर्कसंगत रूप से सोचना चाहिए और अपनी जिद को छोड़ने के लिए तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। आपस में, हम एक ही तरह से जोर दे सकते हैं और दूसरों पर हावी होने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन जब मसीहा के साथ व्यवहार करते हैं, तो यह संभव नहीं है।
हमें यह सोचना चाहिए कि वास्तव में हमें जैसे व्यक्ति के रूप में परमेश्वर के सामने होना चाहिए। हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या हमें परमेश्वर के खिलाफ पकड़ बनानी चाहिए या क्या हमारे हृदय वास्तव में कोमल और नम्र होने चाहिए। और हमें निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए कि हम सभी को परमेश्वर के सामने नम्र होना चाहिए। मनुष्यों के सामने, हम अपनी जिद पकड़ सकते हैं और कई बार इसके परिणामों का सामना कर सकते हैं, लेकिन परमेश्वर के आगे, हमारे हृदय बिल्कुल नम्र होने चाहिए।
"परमेश्वर, मैंने गलत किया है" - जो यह स्वीकार करते हैं वे ही सही रास्ता चुनते हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें उनके शापित जीवन से बचाया जा सकता है। उन लोगों के लिए जिन्होंने अपने पापों के कारण परमेश्वर को छोड़ दिया था, उनके लिए परमेश्वर को गले लगाने का एक ही तरिका है वह है पानी और आत्मा के द्वारा नया जन्म लेना। जब इस तरह के जीवन इस दुनिया के जंगल में फल-फूल रहे हैं, बिना किसी उद्देश्य के खाली और बंजर भूमि के चारों ओर उमड़ रहे है, तब केवल मुठ्ठी भर धुल में लौटने के अलावा हम अपने जीवन से क्या उम्मीद कर सकते है?
हमारे लिए जो धूल में वापस लौटने वाले है और आग की झील में डाले जाने वाले है उनके लिए बचने का एक ही रास्ता है, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना और ऐसे पापों की माफ़ी प्राप्त करना। यह हताश और आशाहीन जीवन के लिए है जो परमेश्वर के खिलाफ खड़े होने और परमेश्वर के सामने उसके उद्धार के प्रेम के खिलाफ अपने पाप को फिरसे दोहराने के कारण विनाश के लिए नियोजित थे। इसलिए, हम सब को यह उद्धार पाना चाहिए।
कोई भी व्यक्ति नश्वर होने के बावजूद भगवान को चुनौती कैसे दे सकता है? जब परमेश्वर हमें ऐसे अर्पण लाने के लिए कहता है तब हमें उसके वचन का पालन करना चाहिए। उपरोक्त मुख्य भाग को देखते हुए, जहाँ परमेश्वर हमें बताता है कि हमें उसके लिए कौन से अर्पण लाने की आवश्यकता है, हम सभी को यह एहसास होना चाहिए, "आह, इस प्रकार का विश्वास परमेश्वर हमसे माँग रहा है।”
महायाजक के चपरास पर, बारह मूल्यवान पत्थर लगे हुए थे। और न्याय की चपरास के निचे, ऊरीम और तुम्मीम को लगाया गया था, जिसका मतलब है प्रकाश और परिपूर्णता, ताकि महायाजक इस्राएल की संतानों के लिए उचित न्याय कर सके।
यह कुछ ओर नहीं लेकिन सच्चाई को दर्शाता है की केवल परमेश्वर के सेवक ही उनके अन्दर निवास करते पवित्र आत्मा के प्रकाश और परमेश्वर के वचन के द्वारा विश्वास के अपने आत्मिक संतानों के ऊपर न्याय कर सकता है।
अब हम सब को यह समझना चाहिए की परमेश्वर के सामने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का सत्य ही सच्चा सत्य और सच्चा प्रकाशन है। यह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का सत्य सच्चा उद्धार है जो हमें जीवन देता है, और इसके अलावा, ओर कुछ हमें उद्धार नहीं दे सकता। यह सब परमेश्वर के वचन के ऊपर आधारित है, स्पष्ट और सच्चा।
 
 
मिलापवाले तम्बू की सारी सामग्री पाप से मनुष्य के उद्धार के साथ सम्बंधित है
 
फिर भी मूर्खता की वजह से, लोग अभी भी विश्वास करने से इनकार करते हैं। तब उनका क्या होगा? वे कभी भी बचाए नहीं जाएंगे। परमेश्वर के आगे हमें अपनी अपनी मूर्खता को भी दूर करना चाहिए। और हमें अपने दिल को खाली करना चाहिए। हमें परमेश्वर के सामने अपने विचारों और जिद को छोड़ देना चाहिए, और उसके बजाय उसके वचन को मानना चाहिए और उसे अपना हृदय देना चाहिए। हमें अपने स्वयं के पुराने तरीकों पर चलते हुए, कभी भी परमेश्वर के खिलाफ नहीं होना चाहिए। हम अन्य लोगों के सामने ऐसा कर सकते हैं, लेकिन मसीही के रूप में, हम केवल परमेश्वर के सामने, ऐसा नहीं कर सकते। और फिर भी मूर्ख लोग परमेश्वर के खिलाफ खड़े होते हैं और अन्य मनुष्यों के आगे नम्र बनते हैं। यही उनकी परेशानी है। हमें परमेश्वर के सामने नत मस्तक झुकना चाहिए और स्वीकार करना चाहिए की परमेश्वर ने हमसे जो कुछ भी कहा है वह सच है।
और हमें नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े पर विश्वास और भरोसा करना चाहिए। विश्वास परमेश्वर के वचन पर भरोसा करता है। जब हम अपने आप को परमेश्वर के चरणों में झुकाते हैं, उसके सामने अपनी सारी परेशानियों को कबूल करते है, और उसकी मदद माँगते है, तब निश्चित रूप से परमेश्वर उत्तर देंगे। फिर हमें धन्यवाद के साथ उसने जो किया है, उसे स्वीकार करना चाहिए। यही विश्वास है। उसके बाद जब हम परमेश्वर के सामने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की बजाए कुछ ओर लाए, जैसे की मछली पकड़ने की जाली या लोहे की चेन तो कितना बुरा होगा? परमेश्वर के सामने कुछ बेकार कपड़े लेकर आना और उससे कहना की, “यह मेरा खुद का विश्वास है। इस तरह मैं मजबूती से विश्वास करता हूँ। ख़ास तौर पर इस विश्वास को मैंने पकड़ के रखा है,” – यह विश्वास नहीं है, लेकिन परमेश्वर के सामने ,मूर्ख बनना है।
व्यक्ति को मसीहा के सामने अपनी जिद्द छोड़नी चाहिए। दुसरे शब्दों में, व्यक्ति को परमेश्वर के सामने अपनी इच्छा को त्यागना चाहिए। हम सभी को परमेश्वर के सामने खुद को पहचानना चाहिए। परमेश्वर हमें क्या कहता है और हमारे बारे में क्या फैसला करता है उसके आधार पर हमें समझना चाहिए। यही मसीहियों का सच्चा विश्वास है। परमेश्वर के वचन के मुताबिक़ विश्वास और अनुसरण करना विश्वासयोग्य व्यक्ति का स्थान और हृदय है। यह है जो हमें परमेश्वर के सामने याद रखना है।
निश्चित रूप से हम, व्यक्ति के सफलता पर गर्व करे, एक दुसरे से तुलना करे, एक दुसरे से मुकाबला करे, और एक दुसरे को चुनौती दे। हालाँकि परमेश्वर के सामने यह सब बेकार है, मनुष्यों के बिच में यह ऐसा है जिसके बारे में हमारे पास कम चुनाव है फिर भी हम इस में निरंतर कार्यरत रहते है।
यहाँ तक की कुत्ते का बच्चा भी अपने स्वामी को पहचानता है, और अपने स्वामी के आधीन होकर उसकी आज्ञा मनाता है। दुसरे शब्दों में, कुत्ते भी अपने स्वामी को पहचानते है, उनकी आवाज को पहचानते है, और केवल अपने स्वामी के पीछे चलते है। जब कुत्तों को उनके स्वामी के द्वारा फटकार लगाईं जाति है, तब वे अपनी गलती को समझते है, आज्ञाकारिता में अपना सिर झुकाते है, और कुछ अनोखे करतब करके वे अपने स्वामी से अनुग्रह पाकर उनके पास वापस लौटने की कोशिश करते है। जब जानवर यह करते है, और मनुष्य अपनी खुद की सोच का विश्वास लेकर परमेश्वर को निरंतर चुनौती देते है। दुसरे शब्दों में, वे अपने खुद के मार्ग और सोच पर चलाकर निरंतर परमेश्वर से जुड़े रहते है।
नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ो से परमेश्वर ने मनुष्यजाति का सारा पाप दूर किया है, और उसने हमें जो कुछ भी कहा है वो प्रभु के कार्य पर विश्वास करने के लिए कहा है। फिर भी लोग परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानते और उसे चुनौती देते है।
परमेश्वर ने हमें अपने सारे पाप उसके पास लाने के लिए कहा है, और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से उसे दूर करके, उसने हमें पापों की माफ़ी दी है। जब परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास लेकर आने के लिए कहा, तब लोग अभी भी इस पर विश्वास नहीं करते, और वे खुद के स्वामी को चुनौती देते है। यह लोग शापित होंगे।
जब वे मसीहा के पास उस विश्वास को लेकर आते है जो वो नहीं चाहता, तब वह क्रोधित होता है। वे निरंतर परमेश्वर के सामने ज़िद्दी होते रहते है और उससे कहते है, “मैं अपने विश्वास को यहाँ तक लेकर आया हूँ। मेरी सराहना कीजिए की बहुत अच्छा किया!” क्या परमेश्वर उनकी सराहना करेगा क्योंकि उन्होंने अपने विश्वास का पालन किया है, जब की वास्तव में उनका विश्वास पूरी तरह से बेकार है?
ऐसा समय होता है जब हमारे जीवन में जिद्द की जरुरत होती है। लेकिन गलत विश्वास की जिद्द परमेश्वर के सामने बेकार है। परमेश्वर ने  नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ो का इस्तेमाल करके हमारे पापों को दूर किया। बाइबल यह नहीं कहती की उसने केवल बैंजनी कपड़े का इस्तेमाल किया, या उसने केवल लाल कपड़े का इस्तेमाल किया था, ना ही उसने लोहे की चेन का इस्तेमाल किया था, ना ही उसने नायलोन कपड़े का इस्तेमाल किया था क्योंकि उसका कोई उल्लेख नहीं है। परमेश्वर के घर के अन्दर, और उद्धार की उसकी व्यवस्था के अन्दर जो उसने हमें दी है, उसमे मसीहा हमसे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के विश्वास की उम्मीद करता है।
जो यीशु मसीह पर विश्वास करते है और उनका अनुसरण करते है उन्हें मसीही दर्शाया गया है। हालाँकि, कई सारे ऐसे लोग है जो यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने के बावजूद भी जिनका नया जन्म नहीं हुआ है, जिन्होंने पापों की माफ़ी नहीं पाई है, और जिनके पाप नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास नहीं है – ये केवल साधारण मसीही है जो नरक के लिए नियिजित है, क्योंकि वे खुद के तरीके से विश्वास करते है। परमेश्वर ऐसे लोगों को छोड़ देगा, क्योंकि वे केवल धार्मिक है मसीही नहीं है।
कम से कम परमेश्वर के सामने, हम सभी को ईमानदार होना चाहिए, और खुद को पहचानना चाहिए जैसे हम वास्तव में हैं। हर पल, हर मिनट और सेकण्ड, हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हम अपने पापों के कारण नरक के लिए नियोजित थे। मसीहा के सामने, हम सभी को नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े का विश्वास होना चाहिए। ऐसा मानना ही सही बात है। और जब भी हम कबूल करते हैं, तो हमें खुद को याद दिलाना चाहिए कि मसीहा ने हमारे लिए क्या किया है, कि हमें पाप से छुडाने के लिए उसने बपतिस्मा लिया और क्रूस पर चढ़ाए जाने के द्वारा हमारे पापों के लिए उसका न्याय हुआ, और हर बार हमें हमारे उद्धार को पहचानता है। यह वह विश्वास है जो परमेश्वर हमसे चाहता है।
जब तक हम वो नहीं करते जो मसीहा हमसे चाहता है तब तक हम परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि जैसे वह नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा हमारा अनन्त उद्धारकर्ता बना है, वैसे परमेश्वर ने हमारे लिए जो किया है उस पर हमेशा विश्वास करना है। जैसे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का विश्वास सच्चा है, वैसे ही हम जो हरदिन पाप करते है उसकी माफ़ी के लिए इसकी ज्यादा जरुरत है।
 
 
यदि हम परमेश्वर को अपने प्रयासों का फल दे तो क्या वह प्रसन्न होगा?
 
यदि हम परमेश्वर को इस संसार की चीजे देते, तो न केवल हम परमेश्वर का क्रोध अपने ऊपर लाते, लेकिन हम परमेश्वर को चुनौती देने की वजह से बहुत बड़ा पाप भी करते। ऐसा विश्वास विश्वासघात करना है, क्योंकि यह परमेश्वर के खिलाफ में है। इस संसार की कोभी चीज चाहे वो कितनी भी कीमती क्यों न हो, वह कभी भी परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकती। परमेश्वर के लिए इस संसार की भौतिक चीजे लाना कभी भी सही विश्वास नहीं है जो परमेश्वर के द्वारा प्रशस्त किया गया हो। भले ही सांसारिक रीति से वह कितना भी कीमती क्यों न हो, परमश्वर ऐसी भौतिक चीजे ग्रहण नहीं करता। हमारे पास ऐसे विश्वास होना चाहिए जो परमेश्वर वास्तव में हमसे चाहता है, और हमें उसे यह विश्वास देना चाहिए।
हमारा विश्वास एक ऐसा विश्वास होना चाहिए जो परमेश्वर के वचन पर भरोसा करता है जैसा कि वह है, एक ऐसा अर्पण जो परमेश्वर के द्वारा माँगा गया है। हर बीते पल के साथ, हमें यह भी पहचानना चाहिए कि परमेश्वर ने हमारे लिए क्या किया है, और हमें अपनी स्वयं की दुर्बलताओं और अपर्याप्तताओं को भी स्वीकार करना चाहिए। हमें उस बहुतायत की आशीष को याद रखना चाहिए जो परमेश्वर ने हमें दी है, और हमें ठीक से जानना चाहिए और विश्वास करना चाहिए कि उसने हमारे लिए क्या किया है, कि वह अपनी इच्छा से हमसे मिला है। 
हमें रहस्यवाद के सभी विश्वासों को दूर करना चाहिए, और हमें केवल उस विश्वास पर भरोषा करना चाहिए जो परमेश्वर द्वारा कहे गए वचन पर विश्वास करता है। इस विश्वास का अर्पण है जो हमें परमेश्वर को देना चाहिए। जब हम परमेश्वर को सही विश्वास का अर्पण देते हैं केवल तभी वे प्रसन्न होंगे, हमसे मिलेंगे, और हमारे विश्वास को स्वीकार करेंगे। और यह तब होता है जब हम ऐसा करते हैं कि परमेश्वर हमें वह सारी आशीष देता है जो उसने हमारे लिए निर्धारित और तैयार की है।
जब हम वचन पर चलते हैं, तो हमें इस बात को सोचना चाहिए, “परमेश्वर वास्तव में हमसे कैसा विश्वास चाहता है? वह किस तरह की प्रार्थना है जो वह चाहता है?” हमें तब एहसास होता है कि परमेश्वर जो प्रार्थना हमसे चाहता है, वह और कोई नहीं बल्कि विश्वास की प्रार्थना है। हमारा प्रभु हमसे वह प्रार्थनाएँ चाहता है जो नीले, बैंजनी, और लाल रंग के कपड़े के उद्धार के विश्वास की प्रार्थना है। परमेश्वर जो हमसे चाहता है, वह विश्वास के भीतर की धन्यवाद की प्रार्थना है; वह कभी भी हमारे खुद के किसी भी चीज को स्वीकार नहीं करेगा जिसे हम उसे देने की कोशिश करते हैं या उसके चरणों में अर्पण करते हैं। हम सभी को यह एहसास होना चाहिए कि हमें ऐसा कभी नहीं करना चाहिए।
परमेश्वर हमें बताता है, "नहीं, नहीं, यह विश्वास नहीं है जो मैं तुमसे चाहता हूँ। मैंने तुम्हारे लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर चढ़ा। मैंने तुम्हारे सारे पापों को दूर करने के लिए बपतिस्मा लिया। इसका कारण यह है कि क्रूस पर इन पापों के लिए न्याय को सहन कर मरने से पहले यह पापों को अपने ऊपर उठाना था। मैं तुम्हारा उद्धारकर्ता हूं, लेकिन मैं आपका परमेश्वर भी हूँ। मैं राजाओं का राजा हूं, लेकिन क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ इसलिए मैं इस पृथ्वी पर आया और सब कुछ परिपूर्ण किया। मैं चाहता हूं कि तुम मुझ पर सच में विश्वास करो, आपके हृदय में मेरे अधिकारों को पहचानो, और पूरे दिल से कबूल करो की मैं तुम्हारा परमेश्वर हों।” इस इरादे के साथ परमेश्वर हमें नीला, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा दिया है। और यह वह विश्वास है जो परमेश्वर हमसे चाहता है।
हमारे पास वास्तव में नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े का विश्वास होना चाहिए। आप शायद सोच सकते हैं, “ठीक है, यह अभी भी काफी ठीक है। मैं अभी भी काफी ठीक हूं, और चीजें ठीक चल रही हैं। यदि यह टूटा नहीं है, तो इसे ठीक क्यों करें? मुझे इस तरह से वास्तव में विश्वास क्यों करना है? क्या मैं इस तरह या उस तरह से विश्वास करू, तो क्या वे सभी समान नहीं हैं?" नहीं, वे एक समान नहीं हैं! यदि आपके दिल में इस के अलावा दूसरा विश्वास है, तो आप बिल्कुल बचाए नहीं गए हैं। क्योंकि इस तरह के दिलों में पाप अभी भी पाया जाता है, इसलिए आपको अपने दिलों में इस विश्वास पर वापस लौटना चाहिए जो वास्तव में पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता है।
जो लोग सच्चे सुसमाचार में विश्वास करते हैं और जो लोग नहीं करते उन के हृदय के बिच बहुत बड़ा अन्तर है। परमेश्वर यह जानता है, और हम जिन्होंने नया जन्म पाया है वे भी जानते है। जब आप अपने आप को जानेंगे तो आपको वापस लौटना होगा। “परमेश्वर, मैं वास्तव में पापी हूँ। कृपा करके मुझे बचा लीजिए।" जब आप इस तरह अपने हृदयों को मोदते है और उद्धार की तलाश करते है, तब परमेश्वर अपनी सच्चाई के साथ आपको मिलेंगे।
 
 
हमारे प्रभु ने हमें सारे पापों से बचाया है
 
हमारे प्रभु ने हमारे लिए बपतिस्मा लिया और हमारे लिए क्रूस पर मरा। जैसे मत्ती ३ में लिखा है, यह है जो परमेश्वर ने हमारे लिए किया है। हम इस पर विश्वास करते है। इसके लिए हम उसका धन्यवाद करते है। जब यीशु ने बपतिस्मा लिया, तब हमारे सारे पाप उसक ऊपर डाले गए। जब उसे क्रूस पर चढ़ाया गया, वह इसलिए क्योंकि उसने हमारे सारे पाप अपने ऊपर उठा लिए थे। केवल हमारे पापों के लिए नहीं लेकिन पूरी दुनिया के पापों के लिए उसका न्याय हुआ।
जब हमारा प्रभु हमें मिलापवाला तम्बू बनाने के लिए अर्पण लाने के लिए कहता है, या जब भी वह हमसे कुछ कहता है, तब वह क्रम के हिसाब से आगे बढ़ता है। वह हमेशा हमसे कहता है, "मुझे नीले, बैंजनी और लाल रंग का कपड़ा लाकर दो।" नीला कपड़ा हमेशा पहले आता है। और वह बटी हुई सनी के कपड़े के बारे में हमसे कहता है, जो हमें परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने के बारे में कहता है। क्रूस के लहू में विश्वास करना और फिर यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास करना पहली नज़र में ठीक लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में गलत है। यह इसलिए क्योंकि यीशु ने पहले बपतिस्मा लिया था क्योंकि वह अपना लहू क्रूस पर बहा सके। मैं आपसे फिर कह रहा हूं कि पहले क्रूस के लहू और फिर उसके बपतिस्मा में विश्वास करना कभी ठीक नहीं है। परमेश्वर कभी भी ऐसे विश्वास की अनुमति नहीं देता।
एक मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आकर, जब हमारा प्रभु 30 साल का हो गया, तो उसने सबसे पहले हमारे सभी पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए बपतिस्मा लिया। ऐसा करने के बाद, फिर वह जगत के इन पापों को क्रूस पर ले गया, उसके क्रूस के साथ उसका न्याय किया गया, और फिर मरे हुओं में से जी उठा, इसतरह वह हमारा उद्धारकर्ता बन गया। इस प्रकार, हमें यह विश्वास करना चाहिए कि प्रभु ने हमारे लिए उस क्रम के अनुसार किया है जिसमें उसने अपने कार्यों को परिपूर्ण किया। इस तरह से हमें विश्वास करना चाहिए। तभी हमारा विश्वास पूरा हो सकता है, जो न तो कभी भ्रमित हो सकता है, न कभी हिलाया जा सकता है। और जब हम दूसरों को सुसमाचार सुनाते हैं, तो हमें उसी के अनुसार करना चाहिए। दूसरे शब्दों में, हमें उस अनुसार विश्वास करना चाहिए जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है, जो उसने हमारे लिए तैयार करके रखा है।
परमेश्वर आपसे कैसा अर्पण लाने के लिए कह रहा है? क्या उसने आपको नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े का विश्वास लेन के लिए नहीं कहा? क्या आपके पास यह विश्वास है? क्या आप इसके विपरीत विश्वास नहीं करते? “मैं चाहे इस रीति से विश्वास करू या उस रीति से, कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं अभ भी विश्वास करता हूँ, और यही काफी है। मैं पहले लाल कपड़े पर विश्वास करता हूँ, फिर नीले कपड़े पर, और फिर बैंजनी कपड़े पर।” यदि आप इस तरह से विश्वास करते है, तो फिर आपको फिर से विश्वास करने की जरुरत है। प्रभु कभी भी आपके इस विपरीत विश्वास को स्वीकार नहीं करेगा।
हमारा परमेश्वर न्याय और सच्चाई का परमेश्वर है। इसलिए, वह झूठे विश्वास को अनुमति नहीं देता। जब विश्वास का अनुक्रम बदल जाता है तब वह स्थिर नहीं रह पता, इसलिए परमेश्वर चाहकर भी इस विश्वास को अनुमति नहीं दे सकता। जैसे की हम घर को बनाने के बाद उसकी नींव को नहीं रह सकते, क्योंकि यीशु ने अपने बपतिस्मा से हमारे सारे पापों को उठा लिया इसलिए वह क्रूस पर अपने आप को चढ़ा सका। 
इसलिए हमें इस बात पर विश्वास करना चाहिए कि प्रभु ने हमें क्या कहा है। यह सही विश्वास के लिए आधारशिला रखना है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें सही, न्यायपूर्ण और सच्चे तरीके से बचाया है, हम उसके आदेश को अपने दम पर नहीं बदल सकते। यदि हम यीशु के बपतिस्मा से पहले क्रूस के रक्त में विश्वास करते हैं, तो यह विश्वास केवल गलत है। और पाप अभी भी उन लोगों के दिलों में पाया जाता है जो ऐसा मानते हैं, क्योंकि उनके पापों को उनके विश्वास के उल्टे क्रम के कारण धोया नहीं गया था। यह वास्तव में अद्भुत है। इसके अलावा और कोई भी आश्चर्यजनक सत्य नहीं है।
मसीहा से पहले, हम में से कई लोग केवल यीशु के क्रूस के लहू पर विश्वास करते थे। हम विश्वास करती थे की, “यीशु ने मेरे सभी पापों को स्वीकार कर लिया और क्रूस पर अपना लहू बहाकर न्याय को सहा। इसलिए हम पूरी तरह से बच गए हैं। हमारा उद्धार मसीह से हुआ जो हमारे लिए क्रूस पर मर गया। जो कोई भी इस पर विश्वास करता है वह अब बच गया है।” तब हमें यीशु के बपतिस्मा का मूल अर्थ पता चला। इसलिए हमारे पहले, गलत विश्वास के ऊपर, हमने सिर्फ सच्चाई के विश्वास को जोड़ा। फिर क्या हुआ? हमारे पाप वास्तव में दूर नहीं हुए। क्योंकि इस तरह का विश्वास केवल बौद्धिक और सिद्धांतवादी है, यह हमारे दिलों का वास्तविक और सच्चा विश्वास नहीं हो सकता है। 
यदि आपका विश्वास इस तरह है, तो आपको जल्दी से इसे बदल देना चाहिए। सबसे पहले, आपको स्पष्ट रूप से स्वीकार करना होगा कि आपका विश्वास सही नहीं है। और फिर, आपको एक ही बार में अपने विश्वास की नींव को नवीनीकृत करना होगा। आपको बस इतना करना है की अनुक्रम को फिर से बदलना है। “इस पृथ्वी पर आने के बाद, जब यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु ने यरदन नदी में बपतिस्मा लिया, तब उसने मेरे सरे पापों को उठाया। ऐसा इसलिए है क्योंकि यीशु ने जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए बपतिस्मा लिया, और जब जगत के सारे पाप यीशु पर डाले गए, तब मेरे पाप भी यीशु पर डाले गए थे। और फिर, उसने मेरे सभी पापों की कीमत चुकाने के लिए उसन क्रूस पर अपना लहू बहाया।" इस तरह से आपको विश्वास करना चाहिए। 
“कौन परवाह करता है कि मैं इस तरह से या उस तरह से विश्वास करता हूँ? मायने यह रखता है कि मैं प्रभु के इन चार सेवकाई पर विश्वास करता हूँ। इस अनुक्रम पर इतना अड़ियल और जिद क्यों?” क्या आप अभी भी इस दृष्टिकोण से चिपके हुए हैं? फिर आपको इसे अपने हृदय में उतारना चाहिए। सत्य: यीशु बपतिस्मा लेने के बाद ही क्रूस पर मरा। और यह सच्चाई है जिस पर आपको विश्वास करना चाहिए।
पवित्र आत्मा कभी भी अन्याय को स्वीकार नहीं करता है। परमेश्वर पवित्र आत्मा हमारे विश्वास को तभी स्वीकार करता है जब हम विश्वास करते हैं कि मसीहा ने इस धरती पर हमारे लिए जैसा किया है वैसा ही है। पवित्र आत्मा यह नहीं कहता है, “इसलिए आप यीशु के इन चारों कार्यों में विश्वास करते हैं। आमीन। चाहे आप सही तरीके से या किसी उल्टे क्रम में विश्वास करते हैं, चाहे आप इस तरह से विश्वास करते हैं या उस तरह, अगर आप किसी भी तरह से विश्वास करते हैं तो ठीक है। आमीन। ठीक है, तुम मेरी संतान हो।”
यीशु मसीह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार इस पृथ्वी पर आए और उसने पिता की आज्ञा के अनुसार किया। इस तरह उन्होंने इस पृथ्वी पर अपना 33 साल का जीवन जिया। इस धरती पर आकर, उसने बपतिस्मा लेकर, क्रूस पर चढ़कर और फिर से जीवित होकर हमारे उद्धार के अपने काम को पूरा किया, और फिर स्वर्ग में चढ़ गया। और उसने हमारे लिए पवित्र आत्मा भेजा।
परमेश्वर पवित्र आत्मा हम में से उन लोगों के दिलों में बसता है जिन्हें पाप की माफ़ी मिली है, और वह उन लोगों के विश्वास को स्वीकार करते हैं जो मानते हैं कि पेशवर ने उनके लिए जैसा किया है वैसा ही है। यही कारण है कि हम अपने विचारों के अनुसार कभी विश्वास नहीं कर सकते। हालाँकि आप और मैं वास्तव में यीशु पर विश्वास करते हैं, क्या आप किसी भी मौके पर, विपरीत अनुक्रम में विश्वास नहीं करते हैं? यदि ऐसा है, तो आपको फिर से सही तरीके से विश्वास करना चाहिए।
जब आप ऐसा करते हैं, तो पवित्र आत्मा आपके दिलों में काम करता है। भले ही हमारे अन्दर कमियाँ है, पवित्र आत्मा हमारे दिलों को स्थिर रखता है, वह हमारे साथ है, और जब हम उसके सामने आते हैं, तो वह हमें अपना अनुग्रह देते है। पवित्र आत्मा हमें शक्ति देता है। वह हमें ताकत देता है। वह हमें सुकून देता है। वह हमें आशीष देता है। वह हमसे एक उज्जवल भविष्य का वादा करता है। और हम में से जो लोग विश्वास करते हैं, वह हमें विश्वास से विश्वास की ओर ले जाता है ताकि हम अनन्त राज्य में प्रवेश करने के लिए योग्यता गवां न दे। 
प्रभु ने हमारे लिए क्या किया है, या जब वह हमें अर्पण लाने के लिए कहता है तब हमें यह विश्वास करने की जरुरत है – वह है, हमें विश्वास करना चाहिए की उसने हमें पानी और आत्मा से बचाया है। तम्बू के अंदर की सभी वस्तुएं महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे सभी निरंतर हमें पानी और आत्मा से नया जन्म पाने के रहस्य के बारे में बताती है। दूसरे शब्दों में, तम्बू की बहुत सी चीजो के द्वारा परमेश्वर हमें एक बात बताना चाहते है – पानी और आत्मा का सुसमाचार। 
 
 
हमारे विश्वास के लिए, इसकी नींव बहुत ही महत्वपूर्ण है
 
यदि हम पहले विश्वास के आधार को मज़बूत किए बिना विश्वास के घर का निर्माण करते हैं, तो जितना अधिक हम यीशु पर विश्वास करते हैं, उतने ही अधिक हम पाप करते है, उतनी अधिक पश्चाताप की प्रार्थना करनी चाहिए, और हम उतने ही अधिक पाखंडी पापी बनते हैं। लेकिन जब हम उद्धार के उपहार पर विश्वास करते हैं, कि हमारे प्रभु ने हमें अपने नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुए सनी के कपड़े के द्वारा बचाया है, तो हम सब परमेश्वर की सम्पूर्ण संतान बन सकते है। इसलिए, हम सभी को नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में विश्वास करना चाहिए, और इस तरह हमें परमेश्वर की संतान बनना चाहिए।
जिनके विश्वास की नींव सम्पूर्ण है, उनके खुद की कमियों के बावजूद वे हमेशा अपने याजकीय पद को उज्ज्वल प्रकाश में ले जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में, वे याजकीय पद के ऐसे सभी कार्यों को पूरा कर सकते हैं, जो वास्तव में इस दुनिया के सभी लोगों को उनके मन में शामिल करते हैं, उनके पापों के निवारण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, और परमेश्वर के समक्ष इस सुसमाचार की सेवा करते हैं। 
इसके विपरीत, जिनके लिए विश्वास की नींव स्पष्ट नहीं है, उनके लिए जितना समय बितता है, उतना ही वे पाखंडी बन जाते हैं। वे दुष्ट हो जाते हैं। वे अधिक पाखंडी धर्मवादी बन जाते हैं। जैसा कि हमारे प्रभु ने हमें बताया कि हम पेड़ को उसके फलों से जान सकते है, ऐसे लोग द्वारा पैदा किए गए फल सभी घृणित, गंदे और पाखंडी होते हैं। हालांकि, हम में से जिन्होंने नया जन्म पाया है वे पाखंडी नहीं है। वे सभी सत्य हैं। हालांकि उनकी अपनी कमियां हैं, फिर भी वे वास्तव में ईमानदार हैं। वे अपनी कमजोरियों और गलत कामों को पहचानते हैं, और वे हमेशा तेज रोशनी के बीच रहते हैं। क्योंकि हमारे प्रभु ने हमारे सभी पापों को दूर करने के लिए बपतिस्मा लिया और क्रूस पर चढ़े, और इस तरह उन्होंने हमारे सारे पाप दूर किए, इस सत्य पर विश्वास करने के द्वारा हम हमारे पापों की माफ़ी पाते है। क्योंकि हमारे विश्वास की नींव ठोस है, हालाँकि हम अपर्याप्त हैं, हालाँकि हम पाप करते हैं, और यद्यपि हम कमजोर हैं, हमारे जीवन अभी भी उज्ज्वल हैं, क्योंकि हमारे हृदय हमेशा पापरहित हैं। हमारी कमियों के कारण हम भटक सकते हैं, लेकिन क्योंकि हम वास्तव में पापरहित हैं, इसलिए हम दूसरों को और खुद को विनाश की ओर नहीं लेकर जाते। यद्यपि हम अपर्याप्त हैं, फिर भी हम उस मार्ग पर चलते हैं जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है, हम क्रमानुसार आगे बढ़ाते है और सुसमाचार की सेवा भी करते है। यह सब संभव हो गया है क्योंकि यीशु ने हमें पूरी तरह से बचाया लिया है।
यदि यीशु मसीह, हमारे मसीहा, और हमारे उद्धारकर्ता ने हमें इस तरह चार कपड़ो के द्वारा पूर्णरूप से नहीं बचाया होता, तो हम कभी भी नहीं बच सकते थे। क्योंकि उसने हमें बचाया है इसलिए हम बच गए हैं, और इसके कारण हम विश्वास करते है, सुसमाचार फैलाते है, और हमारे विश्वास के द्वारा हम परमेश्वर की स्तुति करते है। हमारे विश्वास के द्वारा हम परमेश्वर का धन्यवाद करते है, हमारे विश्वास के द्वारा हम उसकी सेवा करते है, और हमारे विशवास के द्वारा हम उसका अनुसरण करते है। यह वह है जो हम अब बन गए हैं। दूसरे शब्दों में, अब हम ऐसे बन गए है जो अपने विश्वास से परमेश्वर को प्रसन्न करते है। हम ऐसे बन गए है जिसके विश्वास की नींव मजबूती से खड़ी है।
जिनके विश्वास की नींव ठीक रीति से नहीं राखी गई है उन्हें उसे फिर से रखना चाहिए। इसी लिए इब्रानियों ६:१-२ कहता है, “इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्भ की बातों को छोड़कर हम सिद्धता की ओर आगे बढ़ते जाएँ, और मरे हुए कामों से मन फिराने, और परमेश्‍वर पर विश्‍वास करने, और बपतिस्मों और हाथ रखने, और मरे हुओं के जी उठने, और अन्तिम न्याय की शिक्षा रूपी नींव फिर से न डालें।” 
यह मार्ग हमें क्या बताता है? यह हमें स्पष्ट रूप से जानने और पुष्टि करने के लिए कहता है, और दृढ़ता से ऐसे प्रश्नों की नींव रखता है जैसे: "यीशु ने बपतिस्मा क्यों लिया था?" "क्या यह बपतिस्मा पुराने नियम के हाथ रखने का प्रतिबिम्ब है?" "क्या हम फिर से जियेंगे?" और, "अनन्त न्याय क्या है?" यह हमें सम्पूर्ण विश्वास रखने के बारे में और शुरू से ही मजबूती से अपनी नींव रखने के बारे में बताता है, ताकि हम न तो हिलें और न ही इन चीजों के द्वारा फिर से अपनी नींव रखने को मजबूर हो सकें। वह विश्वास जो नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में विश्वास करता है, वह संपूर्ण विश्वास है जो मानता है कि हमारे प्रभु ने हमारे उद्धार को परिपूर्ण किया है। हमें विश्वास की इस नींव पर दृढ़ता से खड़े रहना चाहिए, और हमें वहां से दौड़ना चाहिए। हमें विश्वास की दौड़ को दौड़ना चाहिए।
कुछ लोग इब्रानियों के ऊपर के भाग की व्याख्या करते हुए कहते है कि हम फिर से यह नहीं कह सकते कि हमारे पाप यीशु पर उसके बपतिस्मा के द्वारा उस पर डाले गए थे, और यह भाग हमें बता रहे हैं कि हमें फिर से विश्वास की नींव बनाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन क्या परमेश्वर ने हमें विश्वास की नींव को फिर से बनाने के लिए कहा होता अगर यह पहले से ही ठीक बनी होती? यह भाग हमें बताता है कि जिनके पास विश्वास की सही नींव नहीं है, उन्हें इस नींव को रखना चाहिए, और जिनके पास विश्वास की सही नींव है, उन्हें इसे और भी अधिक दृढ़ और ठोस बनाना चाहिए, और आगे बढ़ना चाहिए।
 
हमें बचाने के लिए, परमेश्वर ने मूसा को तम्बू बनाने और अपने लोगों से अर्पण ग्रहण करने की आज्ञा दी। इस्राएल के लोगों को, उसने अपने लिए सोना, चाँदी और पीतल लाने की आज्ञा दी; नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा, और बटी हुई सनी का कपड़ा, और बकरी के बाल; लाल रंग से रंगी हुई मेढ़े की खाल, सुइयों की खाल, और बबूल की लकड़ी। जिस तरह इन सामग्रियों को रखा गया है, हमारे प्रभु ने वास्तव में आपको और मुझे दुनिया के पापों से छूडाकर हमें उद्धार का उपहार दिया है। इस तरह, परमेश्वर ने वास्तव में इस्त्रााएलियों से कहा था कि वे इन भेंटों को उनके पास लाएँ, तम्बू का निर्माण करें, अपनी बलि प्रथा को स्थापित किया, और उन इस्राएलियों के पापों को क्षमा किया जिन्होंने बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ बलिदान अर्पण किया था।
 
 
नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करने के द्वारा हमारा विश्वास सम्पूर्ण होता है जो यीशु मसीह के द्वारा हमारे उद्धार की परिपूर्णता की भविष्यवाणी के बारे में बताता है
 
यदि हम, यीशु मसीह के द्वारा परिपूर्ण किए गए सत्य पर विश्वास करने में विफल हो गए, तो हम हमारे विश्वास की नींव को मजबूती से नहीं रख सकते, हमारा विश्वास निरंतर अस्थिर रहेगा। ज्ञान, अहसास, और सत्य के बगैर की हमारे प्रभु ने हमें सम्पूर्ण तरीके से बचाया है, तब तक हम अपने प्रयासों से हमारे उद्धार को पाने की कोशिश करेंगे। ऐसा विश्वास सम्पूर्ण नहीं, लेकिन झूठा है।
आइए हम इब्रानियों १०:२६-३१ की ओर बढ़े: “क्योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं। हाँ, दण्ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा। जब मूसा की व्यवस्था का न माननेवाला, दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है, तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्ड के योग्य ठहरेगा, जिसने परमेश्‍वर के पुत्र को पाँवों से रौंदा और वाचा के लहू को, जिसके द्वारा वह पवित्र ठहराया गया था, अपवित्र जाना है, और अनुग्रह के आत्मा का अपमान किया। क्योंकि हम उसे जानते हैं, जिसने कहा, “पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूँगा।” और फिर यह, कि “प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।” जीवते परमेश्‍वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है।”
भाग हमें बताता है कि अगर हम सच्चाई का ज्ञान प्राप्त करने के बाद जानबुच कर पाप करते हैं, तो अब पापों के लिए बलिदान नहीं है, लेकिन केवल न्याय है। यहाँ, जो लोग सच्चाई का ज्ञान प्राप्त करने के बाद जानबुच के पाप करते हैं, वे उन लोगों को संदर्भित करते हैं जो पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानने के बावजूद भी विश्वास नहीं करते। हमें इस सच्चाई पर विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर ने हमें अपने नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा बचाया है, कि उसने हमें सोना, चांदी और पीतल से बचाया है, और उसने तम्बू की छत का आवरण, नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े, बकरी के बाल, लाल रंग से रंगी मेढ़े की खाल, और सुइयों की खाल से बनाया है। हम सभी को इन बातों को स्पष्ट रूप से जानना चाहिए और दृढ़ता से अपने विश्वास की नींव रखनी चाहिए। 
हमारे प्रभु ने हमसे वादा किया था की वह हमें सम्पूर्ण रीति से बचाएगा, और जब समय आया, तो उसने हमारे पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए बपतिस्मा दिया, क्रूस पर मर गया, मृत्यु में से जीवित हुआ, और इस तरह वास्तव में हमें पूरी तरह से बचा लिया। इसलिए हमें इस यीशु मसीह पर विश्वास करने के कारण पूरी तरह से बचा लिया गया है जिसने हमारे उद्धार की नींव रखी।
लेकिन जो लोग यह सच्चाई को जानते है और फिर भी इस पर विश्वास करने से इनकार करते है वे निश्चित रूप से जब न्याय का दिन आएगा तब परमेश्वर के न्याय का सामना करेंगे। उनकी देह की मृत्यु नहीं होगी लेकिन हमेशा के लिए दुःख उठाएगी। बाइबल हमें बताती है की उनके लिए केवल क्रोध है, जैसे की दर्शाया गया है वैसे नरक में उनका दुःख आगा के समान होगा (मरकुस ९:४९)। यह हमें बताता है की उनका केवल न्याय होगा, और क्रोध से उनका विनाश होगा।
जब व्यवस्था का पालन करने में असफल होने से न्याय होगा, तो उन लोगों के लिए कितना बड़ा न्याय होगा जो परमेश्वर के पुत्र द्वारा दिए गए उनके उद्धार में विश्वास नहीं करते हैं? यही कारण है कि हम सभी को यीशु मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करना चाहिए, प्रभु जो इस पृथ्वी पर मनुष्य देह में आया, जिसने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को अपने ऊपर उठा लिया, जो जगत के पापों को क्रूस तक लेकर गया और क्रूस पर चढ़ने के द्वारा पापों का दोष सहा, जो मृत्यु में से जीवित हुआ, और जो अभी जीवित है।
 
 
इसलिए हमारे विश्वास की नींव ठोस होनी चाहिए
 
क्यों परमेश्वर ने मूसा को तम्बू बनाने के लिए कहा? जब हम तम्बू बनाने के लिए इस्तेमाल हुई प्रत्येक सामग्री को देखते है, तो हम देख सकते हैं कि वे सभी इस सच्चाई को प्रकट करते हैं कि यीशु मसीह मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पाप उठा लिए, जगत के इन पापों को क्रूस तक लेकर गया और उस पर मरा, मृत्यु में से फिर से जीवित हुआ, स्वर्ग में उठाया गया, और परमेश्वर पिता के सिंहासन के दाहिने बैठ गया, और अब हमारा अनंतकाल का परमेश्वर बन गया है। इसके द्वार से लेकर खम्भों तक और उनकी पीतल की कुर्सियाँ तक, मिलापवाले तम्बू की सारी चीजे हमें सुसमाचार के सत्य को दिखाती है। दुसरे शब्दों में, सम्पूर्ण पुराना नियम, हमें यीशु मसीह के बपतिस्मा, उसके क्रूस पर चढ़ाने के बारे में, उसकी पहचान के बारे में, और उसके उद्धार के कार्य के बारे में बताता है।
पुराने नियम से नए नियम तक, क्योंकि यीशु मसीह ने हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में कहा है – अर्थात् नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी का कपड़ा - जो इस पर विश्वास करते हैं वे जब भी मौक़ा मिलता है तब नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के बारे में बात करते है। क्योंकि वे अक्सर प्रचार करते है और सुनते है, इसलिए हम यह भूल जाते है की यह सत्य कितना अनमोल है। लेकिन यह सच कितना महत्वपूर्ण है? जैसे कि यदि हम सोने और चाँदी की बहुतायत वाले सुलैमान के शासन में जीवन जी रहे होते जहा उन्हें पत्थरों की तरह इस्तेमाल किया जाता था, क्योंकि हम परमेश्वर की कलीसिया में हरदिन वचन के सत्य को सुनते है, हो सकता है की एक समय हम उद्धार को हलके में ले। लेकिन आपको यह याद रखना होगा: यह सच्चाई परमेश्वर की कलीसिया के बहार सुनने को नहीं मिलता और इस उद्धार के बगैर कोई भी नहीं बच सकता, ना ही विश्वास की नींव को ठोस तरीके से रख सकता है।
जिस विश्वास के साथ आप और मैं बच गए हैं वह इस सच्चाई में विश्वास करना है कि हमारे प्रभु ने हमें पूरी तरह से नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा हमें बचाया है और हमारे विश्वास की नींव को ठोस बनाया है। मुझे एक बार फिर से कहना होगा कि हम सब को अपने हृदय में इस पर विश्वास करना चाहिए। परमेश्वर ने हमें वादा किया है, और जैसा कि उन्होंने वादा किया था, वह एक स्त्री के बीज के रूप में इस पृथ्वी पर आए (उत्पत्ति ३:१५), अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पाप अपने ऊपर उठा लिए, क्रूस पर हमारे सारे पापों का दोष उठाया, मृत्यु में से जीवित हुए, और ऐसे उसने हमें सम्पूर्ण रीति से बचाया। क्योंकि यह इतना सरल सत्य है की यह आसानी से बताया और समझा जा सकता है, हर हरदिन इस सुसमाचार को पूरे संसार में प्रचार कर सकते है। निसन्देह, अभी भी ऐसे कई दयनीय लोग है जो इस सत्य को नहीं जानते। हालाँकि, उन लोगों से भी अधिक दयनीय वे लोग है जो परमश्वर की कलीसिया में रहने के बावजूद भी इस सत्य को नहीं जानते।
भले ही आपने वास्तव में अपने पापों की माफ़ी मिल गई हो, फिर भी आपके विचार बुरे हो सकते हैं, लेकिन कम से कम आपका हृदय बहुत नम्र है। लेकिन जो पाखंडी लोग है वे ऐसे नहीं है, वे खुद को बाहरी रूप से नम्र बनाने की कोशिश करते है, लेकिन वे भीतर से ऐसे लोग होते है जो परमेश्वर को और लोगों को धोख़ा देते है। आपको और मुझे विश्वास की नींव मजबूती से रखनी चाहिए। और इस उद्धार पर जो हमारे प्रभु ने मजबूती से स्थापित किया है, उस पर हमें परमेश्वर के सामने दृढ़ता से खड़ा चाहिए।
 
 
विश्वास जो मिलापवाले तम्बू के तत्व की तरह मज़बूती से खड़ा रहता है
 
परमेश्वर ने हमें मिलापवाले तम्बू को बनाने के लिए ऐसे अर्पण लाने के लिए कहा था। आपको और मुझे हम सब को ऐसे विश्वास के व्यक्ति बनना चाहिए जो विश्वास करते है की यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आए और इसतरह हमें आत्मिक रीति से बचाया। हमें मिलापवाले तम्बू को बनाने वाली सामग्री की तरह परमश्वर के सामने मजबूती से खड़ा रहना चाहिए। क्या आप विश्वास करते है? क्या वास्तव में आपके पास ऐसा विश्वास है? परमेश्वर की कलीसिया के द्वारा, पानी और आत्मा के सुसमाचार को अभी भी प्रचार किया जाता है। क्योंकि यह विश्वास की सच्ची नींव है, मैं इसके बारे में ज्यादा जोर नहीं दे सकता।
इस जगत की बहुत सारी कलीसिया और संस्थाए इस सत्य के बारे में अनजान है की यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा सारे पाप अपने ऊपर डाल दिए, और इसके विपरीत केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करते है। यहाँ तक की इस परिस्थिति में भी हमारे प्रभु ने हमें सत्य को ढूँढने की अनुमति दी है। यीशु को क्रूस पर लटका दिया गया क्योंकि उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यरदन नदी में बपतिस्मा लिया। यह इसलिए था क्योंकि उसके बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पाप उसके ऊपर डाले गए थे इसलिए उसको क्रूस पर लटकाया गया और छेदा गया।
वैसे ही, केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी पाने का दावा करनेवाले व्यक्ति का विश्वास गलत है, फिर भले वे कितने ही धार्मिक क्यों ना हो, लेकिन वो चकना चूर हो जाएगा। भले ही चाहे कितना जोर से वे भीड़ को यीशु पर विश्वास करने के बारे में प्रचार करे, लेकिन उनका खुद का विश्वास, जो केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करता है, केवल पश्चाताप की प्राथना अर्पण करता है, और जो उनके खुद के पाप की समस्या को नहीं सुलजा सकता, वह दोषपूर्ण नींव पर बनाया गया है जो सिर्फ बारिस आने से, हवा चलने से, और बाढ़ आने से ढह जाएगा।
मैंने खुद यीशु पर विश्वास करने के १० सालो तक यीशु के बपतिस्मा के बारे में नहीं सुना था। हालाँकि, यीशु मुझे सत्य के वचनों के साथ मिले, और मैं पानी और आत्मा से नया जन्म पा सका। अब, मुझे पता है कि पूरी दुनिया में बहुत से लोग हैं जो सच्चाई की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने उसे नहीं पाया हैं। मैं उन सभी से बात करना चाहता हूँ, ताकि वे पानी और आत्मा की सच्चाई को सुन सकें, और इसलिए कि वे अपने हृदय में इस पर विश्वास करके अपने पापों की माफ़ी प्राप्त कर सकें। 
नया जन्म पाने से पहले आप भी अपने धार्मिक जीवन को जी रहे थे। उस समय, आपने शायद नीले, बैंजनी और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के बारे में नहीं सुना था। इतना ही नहीं, आपने शायद पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में भी नहीं सुना होगा, और जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब हमारे पाप उसके ऊपर डाले गए थे।
मसीहियों के लिए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करना महत्वपूर्ण है। जब विश्वास की नींव नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से राखी जाति है केवल तभी हम दृढ़ता से खड़े रह पाते है। यदि आपने अभी तक विश्वास नहीं किया है, तो अभी भी देर नहीं हुई है – आपको केवल अब विश्वास करना है। जब आप इस प्रकार विश्वास करते हैं केवल तभी आप पूर्ण रीति सड़े बच सकते है, अपने विश्वास की नींव को मजबूती से रख सकते है, और अपने विश्वास को इस नींव के ऊपर स्थापित कर सकते है।
 
 
जो लोग परमेश्वर की कलीसिया में है उन्हें अपने विश्वास की ठोस नींव रखनी चाहिए
 
मत्ती २४:४० कहता है, “उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा।” जब हम सभी परमेश्वर की एक ही कलीसिया में एक समान सत्य पर विश्वास करने का और एक समान सुसमाचार का प्रचार करने का दावा करते है, तो फिर यदि बाद में हम में से कुछ लोग पीछे छूट जाए तो कितना दुःखद होगा? 
क्योंकि परमेश्वर का वचन बौद्धिक और विनम्र है, विश्वास को किसी पर जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता है। जब आप इस प्रकार परमेश्वर के वचन को विनम्रता से सुनते हैं, तो आपको अपने पूरे दिल से उस पर विश्वास करना चाहिए, आपके मन में यह जानना चाहिए की आप वास्तव में परमेश्वर के वचन को सुन रहे हैं। जब इस्राएल के लोगों ने सुना कि मूसा ने उन्हें क्या कहा है, तो उन्होंने इसे उसके अपने शब्दों के रूप में नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन के रूप में माना। इसी तरह, जब आपको परमेश्वर के वचन के बारे में बताया जाता है, तो आपको यह देखने की आवश्यकता है कि क्या आप परमेश्वर के इस वचन के अनुसार वास्तव में विश्वास करते हैं या नहीं। आपको शांत मन के साथ वचन पर विचार करने की आवश्यकता है, और फिर उस पर विश्वास करें जो वास्तव में यह आपको बताता है। 
बाइबल बिरीया के विश्वासियों को परमेश्वर के वचन के प्रति उनके निष्पक्ष नजरिये के बारे में प्रशस्त करता है। बिरीया के विश्वासी, “थिस्सलुनीके के यहूदियों से भले ठगे, और उन्होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रतिदिन पवित्रशास्त्रों में ढूँढते रहे की ये बाते योंहीं है की नहीं” (प्रेरितों १७:११)। संक्षिप्त में, जैसे उन्हें सिखाया गया था वैसे ही उन्होंने परमेश्वर के वचन में तर्कसंगत रूप से विश्वास किया।
सच्चा विश्वास तर्कसंगत और निष्पक्ष दिमाग से आता है जो वचन की खोज करता है। क्या इससे कोई मतलब होगा कि आप को अपनी इच्छा के विरुद्ध विश्वास करने के लिए मजबूर किया जाए? यहाँ तक कि अगर किसी को किसी और पर विश्वास करने के लिए मजबूर किया जाए, तो यह वास्तव में पूरी तरह से व्यर्थ होगा, इस तरह व्यक्ति को मजबूर करके विश्वास करने के लिए कहा जाए तो यह जरूरी नहीं की वह विश्वास करेगा। परमेश्वर के सामने, सब कुछ उस बात पर निर्भर करता है की व्यक्ति अपनी इच्छा से क्या विश्वास करता है। यदि किसी को बार बार एक ही कहानी कहने पर भी वह विश्वास नहीं करता तो उसके लिए नरक में जाने के अलावा ओर कोई रास्ता नहीं है। 
इसलिए, दुनिया भर के हर पापी हमारी दया का हकदार है, लेकिन अगर परमेश्वर की कलीसिया की एक छत के निचे रहने के बावजूद भी हममें से कुछ लोग उसके वचन पर विश्वास नहीं करते हैं, तो वह तो ओर भी दयनीय है। हममें से उन लोगों से अधिक दयनीय कोई कैसे हो सकता है जो हमारे साथ परमेश्वर की कलीसिया में होने के बावजूद नरक में उसका अन्त हो?
यीशु के बारह चेले थे, और उनमें से केवल यहूदा को विश्वास नहीं था कि यीशु मसीहा और उद्धारकर्ता था। इसलिए यहूदा ने हमेशा यीशु को गुरु कहा। एक समय पतरस भी यीशु को गुरु कहा करता था, लेकिन वह फिर विश्वास में आया और उसने कबूल किया की, “प्रभु, तू मसीहा और परमेश्वर का पुत्र है। तू परमेश्वर का पुत्र है, उद्धारकर्ता जो मेरे पापों को दूर करने के लिए आया। तू उद्धार का परमेश्वर है।” 
दूसरे शब्दों में, पतरस का विश्वास यहूदा से अलग था। जब यहूदा ने यीशु को धोखा दिया और उसे बेच दिया, तो उसने खुद को लटका दिया और मर गया। हालाँकि यहूदा अन्य ग्यारह चेलो के साथ रहा था, अंत में, वह यह पहचानने में विफल रहा कि यीशु मसीह वास्तव में कौन था, और इस तरह नरक में उसका अन्त हुआ। इसके विपरीत, बहुत सारी कमियाँ होने के बावजूद भी पतरस को यीशु मसीह को पहचानने और अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने के द्वारा बचाया गया था।
इसी तरह, उद्धार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति अपने हृदय में सत्य को जानता है और विश्वास करता है या नहीं। जब व्यक्ति सत्य को नहीं जानता तो वह उस पर विश्वास भी नहीं कर सकता। हालाँकि, अगर लोग सच्चाई को जानने के बावजूद भी उस पर विश्वास नहीं करते, तो वे ओर भी अधिक सज़ा को पाएंगे (लूका १२:४८)। यही कारण है कि परमेश्वर हमें कहता है की हमारे विश्वास की नींव मजबूत और सही होनी चाहिए।
 
 
हमारा विश्वास कैसा है?
 
क्या अब हमारे विश्वास की नींव मजबूत हो गई है? क्या यह ठोस है? क्या आप विश्वास करते हैं कि प्रभु ने निश्चित रूप से आपको बचाया है? पानी और आत्मा के द्वारा, हमारे प्रभु ने हमें निश्चित रूप से बचाया है। यह कोई अजीब बात नहीं है जो कि केवल हमारा संप्रदाय सिखा रहा है, लेकिन यह वो बात है जो परमेश्वर ने पुराने नियम में वादा किया था और यीशु ने वास्तव में नए नियम में जो पूरा किया है - वह यह है कि मसीह ने वास्तव में हमें कैसे बचाया है। 
यीशु राजाओं का राजा है (बैंजनी कपड़ा) जो मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया, अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के पापों को अपने ऊपर उठाया (नीला कपड़ा), इन पापों को क्रूस तक ले गया आर क्रूस पर चढ़ा (लाल कपड़ा), मृत्यु से जीवित हुआ, और इस तरह हमें बचाया। उसने वादा किया कि वह पुराने नियम में ऐसा करेगा, और उसने नए नियम में इस वादे को पूरा करके हमें बचाया है। क्या आप विश्वास करते हैं? इसके अलावा और कोई भी विश्वास की ठोस नींव नहीं है।
दुनिया भर में करोड़ों मसीही हैं, और फिर भी उनमें से ज्यादातर लोगों के विश्वास की नींव कमज़ोर है। अभी उपलब्ध मसीही किताबों के द्वारा हम यह पता लगा सकते है की लोगों का विश्वास सही है या नहीं। इन पुस्तकों के लेखक मसीही समुदायों के अगुवे हैं, और उनकी किताबों को पढ़कर, हम यह पता लगा सकते हैं कि उन्हें सच्चाई का सही ज्ञान है या नहीं। अगर इनमें से सिर्फ एक अगुवा भी सत्य को जानने के बावजूद भी सत्य से अनजान है, तो ऐसे अगुवे का अनुसरण करनेवाले सारे लोग नरक के लिए नियोजित है। दुःखद वास्तविकता यह है कि शायद लाखो में एक व्यक्ति को ही सच्चाई पता है। इसी लिए हममें से कुछ लोग जो सत्य को जानते हैं, उन्हें पूरे विश्व में सुसमाचार का प्रसार करना है।
परमेश्वर हमारे द्वारा काम करता है। आप और मैं सुसमाचार का प्रचार करने से बच नहीं सकते, पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार नहीं करना परमेश्वर के सामने बहुत बड़ा पाप करने के समान है। वास्तव में, यदि हम विश्वास से सही मायने में पालन नहीं करते, तो हम वास्तव में परमेश्वर के आगे बड़ा पाप करेंगे। यह लोगों को नरक भेजने का पाप है क्योंकि हम जानते हैं कि हम इसे रोक सकते हैं; यह माफ़ ना किया जानेवाला पाप है क्योंकि हमारे जैसे लोग जो सत्य को जानते हुए भू अपने मुँह को बांध रखते है इसलिए लोग नरक में जाते है।
यदि हम हमें दिया हुआ कार्य परिपूर्ण नहीं करेंगे, तो यह लोग हमारा विरोध करेंगे, क्योंकि यह हमारा अनिवार्य कार्य है। बाइबल हमें यह कहके चेतावनी देती है की, “परन्तु यदि पहरुआ यह देखने पर कि तलवार चलनेवाली है नरसिंगा फूँककर लोगों को न चिताए, और तलवार के चलने से उनमें से कोई मर जाए, तो वह तो अपने अधर्म में फँसा हुआ मर जाएगा, परन्तु उसके खून का लेखा मैं पहरुए ही से लूँगा” (यहजकेल ३३:६)। हमने जिन्होंने पहले जाना और पहले विश्वास किया उन्हें पहरेदार यह कार्य आगे ले जाना चाहिए।
मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ की उसने हमें यह सुसमाचार दिया और हमें सच्चाई जानने के लिए सक्षम बनाया। मैं उन्हें और भी धन्यवाद देता हूं जब मुझे एहसास होता है कि हम इस दुनिया में कुछ गिने चुने लोग हैं जो इस सच्चाई को जानते हैं और इस सुसमाचार पर विश्वास करते हैं। हमने पूरी दुनिया में कई पादरी और विश्वासियों को पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार किया है, लेकिन हर रोज हमने इस तथ्य की पुष्टि की है कि कोई भी ऐसा नहीं था जो इस सुसमाचार को वास्तव में जानता था और विश्वास करता था। हमारे द्वारा, पानी और आत्मा की सच्चाई के सुसमाचार के प्रचारक दुनिया भर में उभर रहे हैं। हमारी तरह, उनके पास भी, विश्वास की ठोस नींव हैं, और इस ठोस विश्वास का प्रसार करते है। 
यदि ऐसे कई लोग हैं जो सुसमाचार का प्रसार कर रहे हैं, तो शायद हम चैन की साँस ले सकते है और हमारे सुसमाचार के प्रचार में थोड़ा आराम कर सकते हैं, लेकिन, दुःख की बात यह है कि इस दुनिया में अभी तक इतने सारे लोग नहीं हैं जो इस सत्य को जानते है और विश्वास करते है। कई लोगों ने दुनिया के इतिहास में सुधार की उपलब्धियों को ज्यादा आंका है। जब हम इसकी विस्तार से जाँच करते हैं, तो हम यह पता लगा सकते हैं कि सुधारवादियों ने सुधार के दौरान बाइबिल के विश्वास की नींव के पहले पड़ाव को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था, और इसके बाद जो कुछ हुआ वह भी गलत था। इन बाद की गलतियों को सुधारने के बावजूद, पहला पड़ाव अभी भी गलत है, यह अभी भी त्रुटिपूर्ण है; उसी रूप से मसीहियत का इतिहास फिर से लिखा जाना चाहिए।
मैं आशा करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि आप सभी अपनी आस्था के ठोस आधार पर परमेश्वर के सम्मुख खड़े होंगे, और विश्वास की इस नींव पर, आप सच्चे सुसमाचार की सेवा के लिए अपना जीवन व्यतीत करेंगे। जब आप सुसमाचार के लिए जीते हैं, तो आपका दिल स्वाभाविक रूप से आनंद से भर जाएगा। जब कोई सुसमाचार के लिए जीवन जीता है, तो उसका दिल आत्मिक बन जाता है। और जैसा कि पवित्र आत्मा आपके दिल और कार्यो में उसे भर देता है, वे सभी आनन्द से छलक जाएंगे। 
लेकिन यदि आप सुसमाचार के लिए नहीं जिएंगे लेकिन पापों की माफ़ी पाने के बाद और पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानने के बाद भी अपने देह की इच्छा को पूरा करेंगे, तो फिर आपका जीवन जीना व्यर्थ होगा, खोखला जीवन। 
हमें यह बहुमूल्य सुसमाचार, और मुफ्त में हमें उद्धार देने के लिए मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ। यह मेरी प्रार्थना अहि और आशा है की आप एक बार और अपने विश्वास की जाँच करेंगे, और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा सम्पूर्ण उद्धार के उपहार को प्राप्त करेंगे।