उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-23] (निर्गमन २७:९-१९) मिलापवाले तम्बू के आँगन के खम्भे

(निर्गमन २७:९-१९)
“फिर निवास के आँगन को बनवाना। उसके दक्षिण की ओर के लिये बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े के परदे हों, उसकी लम्बाई सौ हाथ की हो; एक किनारे पर इतना ही हो। और उनके लिए बीस खम्भे बनें, और इनके लिये पीतल की बीस कुर्सियाँ बनें, और खम्भों के कुन्डे और उनकी पट्टियाँ चाँदी की हों। और उसी प्रकार आँगन के उत्तर की ओर की लम्बाई में भी सौ हाथ लम्बे परदे हों, और उनके लिए भी बीस खम्भे और इनके लिये भी पीतल के बीस खाने हों; और उन खम्भों के कुन्डे और पट्टियाँ चाँदी की हों। फिर आँगन की चौड़ाई में पश्‍चिम की ओर पचास हाथ के परदे हों, उनके लिए खम्भे दस और खाने भी दस हों। पूरब की ओर आँगन की चौड़ाई पचास हाथ की हो। आँगन के द्वार की एक ओर पन्द्रह हाथ के परदे हों, और उनके लिए खम्भे तीन और खाने तीन हों; और दूसरी ओर भी पन्द्रह हाथ के परदे हों, उनके लिए भी खम्भे तीन और खाने तीन हों। आँगन के द्वार के लिये एक परदा बनवाना, जो नीले, बैंजनी और लाल रंग के कपड़े और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े का कामदार बना हुआ बीस हाथ का हो, उसके लिए खम्भे चार और खाने भी चार हों। आँगन के चारों ओर के सब खम्भे चाँदी की पट्टियों से जुड़े हुए हों, उनके कुन्डे चाँदी के और खाने पीतल के हों। आँगन की लम्बाई सौ हाथ की, और उसकी चौड़ाई पचास हाथ की, और उसके कनात की ऊँचाई पाँच हाथ की हो, उसकी कनात बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े की बने, और खम्भों के खाने पीतल के हों। निवास स्थान के भाँति भाँति के बर्तन और सब सामान और उसके सब खूँटे और आँगन के भी सब खूँटे पीतल ही के हों।”

यह भाग मिलापवाले तम्बू के आँगन के खम्भे, परदे, लटकते हुए सफ़ेद बटी हुई सनी के कपड़े, पट्टिया, कुण्डी, पीतल की कुर्सियां, और पीतल के कुंडे को दर्शाता है। तम्बू वो जगह है जहाँ परमेश्वर निवास करता है। समकोणीय आँगन का नाप तक़रीबन ४५ मीटर (उत्तर और दक्षिण की ओर) से २२.५ मीटर (पूर्व और पश्चिम की ओर) था। मिलापवाला तम्बू अपने आप में छोटा सा ढाँचा था जिसकी छत चार आवरणों से बनाई गई थी। इसके विपरीत मिलापवाले तम्बू का आँगन खुले मैदान की तरह बड़ा था। 
आँगन के खम्भों की ऊँचाई २.२५ मीटर, और उसके बाड़े को लकड़ी के ६० खम्भे और द्वार को छोड़ तीनो ओर बटी हुई सनी के लटकते हुए कपड़े से बनाया गया था। बाड़े को इन लकड़ी के खम्भों से बनाया गया था, उसके ऊपर चाँदी के कुंडे और पीतल की किर्सिया लगाईं गई थी। चाँदी के कुंडे के ऊपर चाँदी के दो खूंटे लगाए गए थे, और प्रत्येक खम्भे के सहारे के लिए इन खूंटो के साथ चाँदी की पट्टियों को जोड़ा गया था। भूमि पर पीतल के खूंटों के साथ इन चाँदी की पट्टियों को जोड़ा गया था, इस तरह खम्भों को सुरक्षित किया गया था। 
 

मिलापवाले तम्बू के खम्भों में कौन सा आत्मिक अर्थ प्रगट हुआ है?
 
तम्बू के आँगन के खम्भे हमें क्या कहते है? वे हमें स्पष्ट रूप से कहते है की यीशु मसीह ने हम सब को हमारे जगत के पापों से बचाया है। तम्बू के आँगन के लकड़ी के खम्भे आपको और मुझे दर्शाते है – अर्थात, प्रत्येक नया जन्म पाए हुए संत को। तो फिर आँगन के खम्भों के निचे लगी पीतल की कुर्सिया हमें क्या बताती है? वे हमें बताती है की हम हमारे पापों की वजह से दण्ड को सहने वाले थे ये वास्तविकता के बावजूद परमेश्वर ने हमें हमारे सारे पापों से बचाया है। 
दूसरी ओर, चाँदी के खूंटो से बंधे लकड़ी के खम्भे हमें बताते है की परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सुसमाचार के द्वारा सरे पापियों को उनके पाप और अपराध से बचाने के द्वारा हमें उद्धार का उपहार दिया है। इन चाँदी के कुण्डों के ऊपर लगाए गए चाँदी के खूंटे, और इन खूंटो से जोड़ी गई चाँदी की पट्टिया और भूमि के पीतल के खूंटे भी हमें बताते है की हालाँकि हम हमारे पाप के कारण अपरिहार्य मृत्यु का सामना कर रहे थे तब हमारे प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के सत्य के द्वारा हमें पाप की माफ़ी का उपहार दिया – अर्थात्, उद्धार के सुसमाचार के द्वारा।
इस तरह, तम्बू के आँगन के खम्भे हमें दिखाते है की प्रभु ने इस पृथ्वी पर आकर, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर, और पाप के सारे दण्ड को सहकर, और क्रूस पर अपने बहुमूल्य लहू से खुद का बकिदान देने के द्वारा हमें हमारे सारे पापों से बचाया है। दुसरे शब्दों में, वे हमें पाप की माफ़ी का उपहार दिकाते है, की प्रभु ने हमें हमारे पापों से सम्पूर्ण रीति से बचाया है और हमें परमेश्वर के लोग बनाया है। तम्बू के आँगन के चारो ओर स्थापित लकड़ी के खम्भे हमें बताते है की हमारे प्रभु ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े की सेवकाई के द्वारा एक ही बार में हमेशा के लिए सारे पापियों को जगत के सारे पापों से बचाया है, अर्थात्, बपतिस्मा लेने के द्वारा और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा। क्योंकि यह सत्य निश्चित है, इसलिए मैं इसके लिए आभारी हूँ और पूरे विश्व में इसे फैला रहा हूँ।
 

खम्भों के निचे की पीतल की कुर्सियां
 
इस बाड़े के ऊपर खड़े खम्भों की कुर्सिया पीतल से बनी हुई थी, जब की खम्भों के ऊपर के कुंडे और उसके खूंटे, और पट्टिया चाँदी से बने हुए थे।
मरकुस ७:२१-२२ कहता है, “क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, 22लोभ, दुष्‍टता, छल, लुचपन, कुदृष्‍टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।” हम में से प्रत्येक व्यक्ति हमारे हृदय में यह सारे पापों को लेकर पैदा हुए है। इसी लिए परमेश्वर हमसे कहता है की हमारे पतन तक हम इन सारे पाप को करते हुए हमारा जीवन न्जिएँगे, और हम खुद की मदद नहीं कर सकते लेकिन इसी तरह पाप में जीवन जिएंगे। और यदि हम इन वाचानोक को जैसा है वैसा ही स्वीकार करते है, तब हम इस बात का स्वीकार करते है की हमारा मूल स्वभाव पापी है इसलिए हम हमारे पापों के दण्ड को नकार नहीं सकते। 
फिर भी हमारे प्रभु ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से हम जैसे दुष्ट लोगों को हमारे सारे सारे पापों से बचाया। क्योंकि हमारे प्रभु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया, इसलिए वह जगत के पापों को क्रूस तक लेकर गया और उन सारे पापों का दण्ड सहा। इस तरह यीशु ने हमें हमारे सारे पापों से बचाया है। 
हम इस के लिए परमेश्वर का पर्याप्त धन्यवाद नहीं कर सकते! यही वो उद्धार है जो हम नरक में बंधे हुए थे फिर भी हमारे प्रभु ने हमें हमारे सारे पापों से छुडाया है, इस संसार की सबसे कीमती, आशीषित और बहुमूल्य भेंट। हम प्रभु के सामने हमारे सिर को झुकाकर, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा हमें बचाने वाले सुसमाचार पर विश्वास करके उसका धन्यवाद देने के अलावा हम कुछ नहीं कर सकते। तम्बू के आँगन के खम्भों को बनाने के लिए इस्तेमाल हुई सामग्री के द्वारा, परमेश्वर हमें दिखा रहा है की हमारे प्रभु का उद्धार संपुर्ण सत्य है जिसे अब पूरा करने की कोई जरुरत नहीं नही।
तम्बू को बनाने वाली सारी सामग्री के रहस्य को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा सुलझाया गया है। उद्धार का रहस्य वो सत्य है जिसे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के बिना सुलझाया नहीं जा सकता। तम्बू के बलिदान की पध्धति के समेत सारे रहस्य इन नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में छिपे हुए है।
मूल रूप से, वास्तव में, आप और मैं परमेश्वर के सामने ऐसे मनुष्य थे जो अपने पापों के कारण नरक में बंधे हुए थे। सच कहूं तो, हम अभी भी पाप कर रहे है, लेकिन फिर भी प्रभु ने हमें अपने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से पापों की माफ़ी दी है, और उद्धार के इस उपहार पर विश्वास करने के द्वारा, हम पाप की माफ़ी को प्राप्त करते है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें हमारे सारे पापों से सम्पूर्ण रीति से छुडाया है ताकि कम उसकी संतान बन सके और उसके राज्य की महिमा और वैभव का आनन्द उठा सके। परमेश्वर ने हमें दिए हुए उद्धार के अलावा, नया जन्म पाई हुई उसकी संतान बनने का ओर कोई रास्ता नहीं है। क्योंकि हमारे प्रभु ने हमें सारे पापों से बचाया है इसलिए हम उसका धन्यवाद करते है।
हम खुद क्या है इस बात से हम अनजान थे, हम हमारे खुद के मापदंड के अनुसार हम हमारे पाप की गंभीरता को नापते थे। लेकिन हमने कुछ प्रकार के पाप किए है या नहीं किए ये माइने नहीं रखता, क्योंकि हम हमारे कार्यो से नहीं लेकिन जन्म से नरक में बंधे हुए पापी है। फिर भी, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा हमारे प्रभु ने हम जैसे लोगों को उनके सारे पापों से बचाया है। जैसे प्रभु ने पुराने नियम के समय में वायदा किया था, उसी प्रकार वायदे के वचन के अनुसार उसने हमारे पापों को ले लिया, इन पापों को क्रूस तक लेकर गया, क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा हमारे सारे पापों की कीमत चुकाई, और इस प्रकार हमें हमारे सारे पापों से बचाया और हमें उद्धार का उपहार दिया। इस प्रकार आपने और मैंने यीशु पर विश्वास करने के द्वारा हमारे सारे पापों से उद्धार के उपहार को प्राप्त किया।
 

क्यों सफ़ेद सनी के कपड़े को मिलापवाले तम्बू के खम्भों के ऊपर लटकाया गया था?
 
तम्बू के आँगन के चारो ओर ६० खम्भे लगाए गए थे, और उन सब को लटकते हुए बटी हुई सनी के कपड़े से ढँका गया था। यह लटकता हुआ कपड़ा हमसे कहता है की भले ही हम सब पाप के धब्बे के साथ अशुध्द प्राणी थे, और हमारे पापों की वजह से हमें नरक में डाला जाए इस हकीकत के बावजूद हमारे प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा शुध्ध किया। दुसरे शब्दों में, लटकता हुआ कपड़ा हमसे कहता है की यीशु मसीह ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमें एक ही बार में हमारे सारे पापों से साफ़ किया। 
जब यीशु इस पृथ्वी पर आये और सारी मनुष्यजाति के प्रतिनिधि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया, तब जगत के सारे पाप यीशु पर चले गए। इस प्रकार जगत के सारे पापों का स्वीकार करने के बाद, फिर यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया और पापों के दण्ड को सहने के लिए अपना लहू बहाया, और फिर वह मृत्यु से फिर जीवित हुआ। और मृत्यु से जीवित होने के द्वारा, अब वह हमारा उद्धारकर्ता बना है। यही है उद्धार का उपहार जिसे हमारे प्रभु ने अपनी नीली, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े की सेवकाई के द्वारा परिपूर्ण किया है; और यही है हमारे परमेश्वर का प्रेम जिसने हमें हमारे सारे पापों से शुध्ध किया है और परमेश्वर के लोग बनने के लिए हमें निर्दोष और सारे अपराधों के रहित बनाया है। हमें उद्धार का यह उपहार देने के द्वारा, हमारे प्रभु ने इस सत्य पर विश्वास करनेवाले हम लोगों को परमेश्वर की निज प्रजा में तबदील किया है।
तम्बू के खम्भों के ऊपर लटकता हुआ सफ़ेद बटी हुई सनी का कपड़ा हमसे परमेश्वर की पवित्रता के बारे में कहता है, लेकिन यह हमारी पवित्रता के बारे में भी कहता है, सच्चे विश्वासी की पवित्रता। लिहाजा, यदि हम परमेश्वर की संतान बनना चाहते है, तो हमें भी हमारे सारे पापों से शुध्ध होना चाहिए और यीशु की नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े की सेवकाई पर विश्वास करने के द्वारा पवित्र बनना चाहिए। परमेश्वर हमसे कहता है, “इसलिए तुम पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ” (लैव्यव्यवस्था ११:४५), लेकिन हम कैसे अपने कार्यों के द्वारा पवित्र बन सकते है? क्योंकि हम चाहे कितनी भी कोशिश करे लेकिन पाप करना बंद नहीं कर सकते, इसलिए हम खुद के प्रयासों से कभी भी पवित्र नहीं बन सकते। लेकिन नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से हमारे प्रभु ने आपके और मेरे जैसे लोगों को सम्पूर्ण शुध्ध किया है। इस तरह आप और मैं सपूर्ण तरीके से परमेश्वर की निज प्रजा बने है। परमेश्वर की धार्मिकता के सुसमाचार पर विश्वास करने और हमारे सारे पापों से शुध्ध होकर पवित्र बनने के अलावा ओर कोई रास्ता नहीं है।
 

पीतल की कुर्सिया और पीतल के कुंडे
 
चाँदी के कुंडे को खम्भे के ऊपर लगाया गया था। और चाँदी के खूंटे और पट्टियों को भी खम्भों को एक दूसरो से जोड़ने के लिए बनाए गए थे। प्रत्येक खम्भे को पीतल की कुर्सी में लगाया गया था। और पीतल के खूंटी की जोड़ी तम्बू के खम्भे को ऊपर से लेकर निचे तक भूमि से जोड़े रखती थी। 
यह हमें दिखाता है की भले ही हम हमारे पापों की वजह से नरक में डाले जानेवाले थे, फिर भी परमेश्वर ने हमें उद्धार का उपहार दिया जिसने हमें हमारे सारे पापों से छुडाया और हमें अपनी पवित्र प्रजा बनाया। क्योंकि परमेश्वर ने अपने उद्धार के अनुग्रह के द्वारा हमें अपनी पवित्र प्रजा बनाया था, इसलिए हम परमेश्वर के अनुग्रह के लिए उसकी स्तुति करते है और धन्यवाद देते है। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के सत्य के वचन के द्वारा परमेश्वर पर विश्वास करते हुए, हम केवल परमेश्वर की स्तुति ही नहीं करते, लेकिन हम इस वचन को फैलाते भी है।
क्या कोई ऐसा दिन है जब हम पाप नहीं करते? ऐसा कोई दिन नहीं है। यहाँ तक की हम जो परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पाए हुए है वे भी हरदिन पाप करते है। अगर कोई हमशे थोड़ा सा भी विपरीत या हमारा दोस्त नहीं है तो हम तुरंत ही ऐसे व्यक्ति को श्राप देते है। मान लीजिए की जब आप गाडी चला रहे है और कोई तुरंत ही आकर आप के बगल से गुजरता है और आपका अकस्मात् होनेवाला हो, तो क्या आप उस असावधान वाहन चालाक पर गुस्सा नहीं होंगे? अरे हाँ! शायद मैं बड़ी आवाज में हॉर्न बजाकर उस लापरवाह वहां चालक को श्राप दूंगा। लेकिन क्या ऐसा करना सही है? ऐसा करना निश्चित ही सही नहीं है, लेकिन समस्या यह है की हम ऐसे प्राणी है जो हर समय पाप करते रहते है। 
हम ऐसे प्राणी है जो अपनी दुर्बलता के कारण नरक के लिए नियोजित है। हालाँकि, परमेश्वर ने हमें, “अपने शरीर में से होकर हमें अभिषेक किया है” (इब्रानियों १०:२०)। यह पूरी रीति से परमेश्वर का उपहार है जिसे पिता परमेश्वर की इच्छा के अनुसार यीशु मसीह के द्वारा परिपूर्ण किया गया है। 
परमेश्वर ने हमें उद्धार का कौन सा उपहार दिया है? उसने हमें हमारे पापों से उद्धार का उपहार दिया है, जिसे तम्बू के चार कपड़ो के द्वारा परिपूर्ण किया गया है – नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा। तो फिर हम कैसे परमेश्वर की स्तुति नहीं कर सकते? जब हमने वास्तव में यह उद्धार का उपहार प्राप्त किया है तो कैसे सच्ची शान्ति हमारे हृदय में नहीं आ सकती? हमारा उद्धार सोना या चाँदी से नहीं खरीदा जा सकता, या फिर यह भोर के कोहरे के समान नहीं है जो प्रगट होने के बाद कुछ ही देर में अदृश्य हो जाएगा, लेकिन हमने अनन्त काल के लिए और सम्पूर्ण तरीके से उद्धार पाया है। परमेश्वर पापियों से बहुत प्रेम करता है की उसने उन्हें मुफ्त के उपहार के रूप में अपना उद्धार दिया है, और इस उपहार में उसने हम विश्वासियों को अपनी धार्मिकता दी है।
तम्बू के आँगन के बाड़े की सामग्री में, सारी कुर्सिया और खूंटे जो भूमि को छूते है उन्हें पीतल से बनाय गया है। लेकिन खम्भे के सबसे ऊपर लगे कुंडे चाँदी से बनाए गए है। यह सारी बात हमें दिखाती है की हम मूल रूप से नरक में बंधे हुए है इस के बावजूद भी हम प्रभु के द्वारा दिए गए उद्धार के उपहार के द्वारा परमेश्वर की संतान बने है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति ने उसके वचन पर विश्वास करने के द्वारा इस उपहार को प्राप्त किया है। इसके बाद हमारे पापों से हमने जो उद्धार पाया है उसकी निश्चितता कितनी है? यह वो उपहार है जो परमेश्वर ने हमें दिया है, और यह हमारा निश्चित उद्धार और आशीष है जिसे कभी भी बदला नहीं जा सकता। क्योंकि हम जानते है की हम परमश्वर का पर्याप्त धन्यवाद नहीं कर सकते। 
आप और मैं हमारे सारे पापों से उद्धार पाए है यही परमेश्वर का निश्चित उपहार है। हमारा उद्धार अपूर्ण नहीं है जो हमारी दुर्बलता प्रगट होने पर अदृश्य हो जाता है। आपके और मेरे जैसे दुष्ट पापी के लिए हमारा प्रभु इस पृथ्वी पर आया और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा हमें उद्धार का उपहार दिया। उसी रूप से, जो कोई भी इस सत्य पर विश्वास करता है वह अनन्त काल के लिए उद्धार पाटा है। क्योंकि पापियों के लिए हमारे प्रभु का उद्धार इतना सम्पूर्ण है, और उसने हमारी देह की सारी दुर्बलताओं, कमजोरी, और दोषों को लेने के द्वारा उसने हमें सम्पूर्ण बनाया है ताकि पाप के साथ हमारा कोई लेनादेना न रहे। जो लोग नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को स्पष्ट रीति से जानते है और विश्वास करते है वे हमेशा के लिए सम्पूर्ण तरीके से बचाए गए है।
यदि ऐसा है, तो परमेश्वर ने हमें जो उद्धार का उपहार दिया है वह कितना कीमती और बहुमूल्य है? मैं इस उद्धार के उपहार के लिए सच में धन्यवादित हूँ, क्योंकि इसने हमारे हृदय को बहुत आराम दिया है और हमें बहोत आशीष दी है। हमारा प्रभु हमारे हृदय में आराम देता है। इसी लिए उसने कहा है, “हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे हुए लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा” (मत्ती ११:२८)। मैं परमेश्वर का बहुत ही आभारी हूँ क्योंकि उसने मुझे मेरे सारे पापों से छुटकारे का अनुग्रह दिया है। 
मैं विश्वास करता हूँ की केवल में ही नहीं लेकिन आप सब भी परमेश्वर के लिए बहुमूल्य है। परमेश्वर ने आपको और मुझे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के सुसमाचार से बचाया है। परमेश्वर कहता है की उसने उद्धार का यह उपहार उन सब को दिया है जो इस वचन पर विश्वास करता है, मैं सोचता हूँ और विश्वास करता हूँ की आप अब भी परमेश्वर के लिए बहुत ही मूल्यवान है।
हाल ही में, जैसे की हम हमारी सामर्थ्य से परे परमेश्वर के कार्य के लिए महेनत कर रहे है, तब ऐसा समय भी आया था जब हम पूरी तरह से थक चुके थे। इसलिए, मैं साथ में भोजन करने के द्वारा मेरे सहकर्मियों को थोड़ा आराम और उत्साह देना चाहता हूँ। लेकिन मैं अच्छी तरह से जानता हूँ की हम देह की तसल्ली से कभी भी आराम नहीं प्राप्त कर सकते। इसके बदले हमें परमेश्वर ने हमें जो उद्धार का उपहार दिया है जो हमारी सच्ची तसल्ली है उसे याद करने के द्वारा आराम पाना चाहिए, और इसकी शान्ति से दुनिया अनजान है। हम परमेश्वर के द्वारा हमारे हृदय में दी गई आत्मिक आशीष के द्वारा आराम पाते है। क्योंकि हमने परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार के उपहार में इतनी महान आशीष को पाया है, इसलिए हमारे हृदय में शान्ति और आशीष है जिससे यह दुनिया अनजान है।
परमेश्वर ने आप में से प्रत्येक व्यक्ति को उद्धार का उपहार दिया है, इस संसार में पाई जानेवाले सारे उपहारों में सबसे उत्तम। कुछ ऐसे भी लोग है जो अपने धार्मिक भक्ति के द्वारा पापरहित होने का दावा करते है, हालाँकि वे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के सत्य पर विश्वास नहीं करते, इसलिए उनकी भक्ति थोड़े समय में ही गायब हो जाएंगी। उनके अपने विचारों से प्राप्त की हुई उनकी शान्ति भोर के कोहरे के समान अदृश्य हो जाएगी जब थोडा सा भी पाप या थोड़ी सी भी मुसीबत उनके सामने आएगी। 
लेकिन जो लोग प्रभु के द्वारा दिया गया नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के उद्धार पर विश्वास करते है वे जितना ज्यादा मुसीबत का सामना करते है उतनी ही ज्यादा उनकी मन की शान्ति निखरती है। भले ही हम रौंदे गए है, चोट लगी है और दुखी है, फिर भी परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार के द्वारा हमारे हृदय से सम्पूर्णता और आभार फूट कर निकलता है। हम वो लोग है जो पूरी तरह बचाए गए है, जो कभी भी मिस्र की ओर वापस नहीं लौटेंगे, और ना ही हमारे पाप और दण्ड का कभी सामना करेंगे। परमेश्वर ने हम लोगों को जो उद्धार के उपहार को जानते और विश्वास करते है उन्हें आशीष दी है ताकि हम निरंतर हमारे विश्वास के द्वारा उनका धन्यवाद करते रहे। इसलिए हम हमारे विश्वास के द्वारा परमेश्वर का द्जन्यवाद करते है।
क्योंकि मैंने परमेश्वर से नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का उद्धार पाया है और क्योंकि वह मुझे प्रेम करता है, मुझे आशीष दी है, और मुझे यह बहुमूल्य सुसमाचार का प्रचार करने के लायक बनाया है इसलिए मैं उसका पर्याप्त धन्यवाद नहीं कर सकता, क्योंकि मैं जानता हूँ की मैं उसके लायक नहीं हूँ। भले ही मैं हरदिन परमेश्वर को धन्यवाद दूं, लेकिन उसने मुझे सुसमाचार के लिए जीने के योग्य बनाया इसलिए मैं उसका पर्याप्त धन्यवाद नहीं कर सकता। मैं हमेशा उसका धन्यवाद करता रहूँगा। जब मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ क्योंकि उसने मुझे उद्धार का उपहार दिया है, और जब में अपने धन्यवादित हृदय की भावना व्यक्त करता हूँ, तब मुझे पता चलता है की मेरे शब्द और भावनाए कितनी अपर्याप्त है। 
हम वो लोग है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के रूप में प्रगट हुए सुसमाचार पर विश्वास करते है। आपके खातिर यीशु इस पृथ्वी पर पैदा हुआ, ३० साल की उम्र में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा आपके सारे पापों को खुद पर उठाया, इन पापों को क्रूस तक लेकर गया, अपना लहू बहाया और मर गया, मृत्यु से जीवित हुआ, अभी वह पिता परमेश्वर के सिंहासन के दाहिनी ओर बैठा है। इस यीशु मसीह ने उन लोगों को उद्धार का उपहार दिया है जो इसे विश्वास से ग्रहण करते है। जब तक हम इस विश्वास का विश्वासघात नहीं करते, तब तक हमने जो उद्धार प्राप्त किया है वह मिटाता नहीं है। कोई फर्क नहीं पड़ता की हमारे कौनसी कमजोरी है, और कोई फर्क नहीं पड़ता की हम कितनी गलती करते है, हम उद्धार के उपहार के द्वारा उनकी निज प्रजा बन गए है।
 

मिलापवाले तम्बू के आँगन के खम्भों पर लटकता हुआ बटी हुई सनी का सफ़ेद कपड़ा
 
थोड़ी देर के लिए लटकते हुए सफ़ेद बटी हुई सनी के कपड़े की ओर देखने की कल्पना करे। लटकता हुआ सफ़ेद सनी का कपड़ा नायलोन के कपड़े से नहीं बना है, लेकिन उन्हें बटी हुई सनी के सफ़ेद कपड़े से बुना गया है। यदि आप लटकते हुए सफ़ेद सनी के कपड़े को निर्जन स्थान में रखेंगे तो वह कुछ ही समय में खराब हो जाएगा। तो फिर क्या परमेश्वर ने यह जाने बिना की यह कुछ ही समय में ख़राब हो जाएगा, बिना वजह इस लटकते हुए सफ़ेद कपड़े को रखा था? उसने इस्राएलियों से सफ़ेद सनी के कपड़े को उन लोगों को दिखाने के लिए लटकाने को कहा था जो विश्वास से इस उपहार को स्वीकार करते है। यह हमें स्पष्ट रीति से जानने और हमारे हृदय में मोहर लगाने के लिए था की उसने इस प्रकार हमें हमारे सारे पापों से पूर्ण रूप से बचाया है और शुध्ध किया है। 
परमेश्वर ने इस्राएलियों को सफ़ेद सनी के कपड़े को लटकाने के लिए कहा था। यह सूचित करता है की हमें लटकते हुए सफ़ेद कपड़े में प्रगट हुए उसके सम्पूर्ण उद्धार को देखने और विश्वास करने के द्वारा हमेशा उसकी स्तुति करनी चाहिए और धन्यवाद देना चाहिए। लटकते हुए इस सफ़ेद सनी के कपड़े के द्वारा, परमेश्वर ने हमें उद्धार का सम्पूर्ण उपहार दिया है। उसके द्वारा हमें दिया गया उद्धार इस सफ़ेद सनी के कपड़े के समान है।
हम वास्तव में गंदे और दुष्य लोग है पाप के कारण नरक में बंधे हुए है। हमें एक ही दिन में हमारे मन के कपड़े को कई बार धोना चाहिए। फिर भी परमेश्वर ने हमारे हृदय को सम्पूर्ण श्वेत किया है। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर ने हम जैसे लोगों को सम्पूर्ण बनाया है। परमेश्वर का सामर्थ्य कितना महान और अदभूत है की उसने हम जैसे दुष्ट, गंदे लोगों को जो आसानी से बुरे बन जाते है उन्हें अपनी पवित्र प्रजा में तबदील कर दिया। 
आज आप और मैं जो इस पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है उन्होंने परमेश्वर से उद्धार के इस सम्पूर्ण उपहार को प्राप्त किया है। हम वो लोग है जिनके हृदय के पाप सम्पूर्ण तरीके से साफ़ हुए है और अब हम हिम के नाई श्वेत बन गए है। 
क्या अभी भी आप के हृदय में पाप है? बिलकुल नहीं! ओर कोई नहीं लेकिन आपका हृदय सफ़ेद, शुध्ध सनी के कपड़े के समान बना है जो तम्बू के आँगन के खम्भों पर लटका हुआ है। आप और मैं इस प्रकार सम्पूर्ण शुध्ध हुए है। हम हमारे पापों की वजह से दण्ड के हकदार है इस वास्तविकता के बावजूद भी हमें उद्धार दिया गया है। हमारा उद्धार हमारी खुद की भलाई या विश्वासयोग्यता से नहीं आया, लेकिन परमेश्वर के अनुग्रह से आया है जिसने हमें अपनी सामर्थ्य दी है जैसे तम्बू के खम्भों के पीतल के कुंडे को उनके चाँदी के खूंटो से चाँदी के पट्टियों के द्वारा जोड़ा गया था। हालाँकि हम नरक और दण्ड से बंधे हुए थे, फिर भी परमेश्वर ने हमें अपने उद्धार के उपहार को दिया है यह विश्वास करने के द्वारा हम सब उसके उद्धार पाए हुए लोग बने है। यह तम्बू के आँगन के बाड़े में प्रगट हुआ सत्य है।
तम्बू के ६० खम्भे हमें जो सच्चे विश्वासी है उन्हें दर्शाते है। दुसरे शब्दों में, यह प्रत्येक खम्भे हम में से प्रत्येक व्यक्ति को दर्शाता है। हम ऐसे लोग थे जो न तो परमेश्वर के लोग बन सकते थे ओर ना ही उसके घर में प्रवेश कर सकते थे, और फिर भी परमेश्वर ने हम जैसे व्यर्थ लोगों को अपने उद्धार का उपहार दिया। वह इस पृथ्वी पर आया, उद्धार के उपहार को परिपूर्ण किया, हमें सत्य का यह उपहार दिया, और जब हमने इस सत्य के उपहार को जाना और विश्वास किया तब उसने हमें अपनी निज प्रजा बनाया जिन्हें सम्पूर्ण तरीके से बचाया गया और जो कभी भी शापित नहीं होंगे। 
यह कितनी अद्भुत आशीष है? तम्बू के आँगन के खम्भों के जैसे, हम खुद से अकेले खड़े नहीं रह सकते लेकिन गिर जाएंगे। फिर भी हम हमारे सारे पापों से बचने के बाद भी नहीं गिरे क्योंकि हम सब विश्वासी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करते है और उसके अनुग्रह के तले एक दुसरे के साथ जुड़े हुए है। हमें सबसे पहले विश्वास करना चाहिए की भले ही हम नरक में बंधे हुए व्यर्थ लोग थे, लेकिन फिर भी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा प्रभु ने हमें हमारे सारे पापों से शुध्ध किया है और इस प्रकार व्यक्तिगत रूप से हमारे सारे दण्ड को सहने के द्वारा हमें सम्पूर्ण तरीके से बचाया है। और यह इस विश्वास के द्वारा है की हम किसी भी समय परमेश्वर के सामने खड़े हो सकते है, उसकी आराधना कर सकते है, उसकी सेवकाई कर सकते है, और हमेशा उद्धार के उपहार के लिए उसका धन्यवाद करते है।
एक समय ऐसा था जब हम हमारी देह की दुर्बलता के कारण ठोकर खाते थे। भले ही हम विश्वास करे की हम हमारे सारे पाप और दण्ड से बचाए गए है, फिर भी हमारे उद्धार के बाद ऐसा समय आता है जब हम थक जाते है, और सोचते है की हम क्यों इस प्रकार जीवन जी रहे है। भले ही हम ऐसे समय में देह के विचारों से परेशान होते है, लेकिन क्यों हमें उद्धार पाने के बाद परमेश्वर से अलग नहीं होना चाहिए और हमारे दृढ विश्वास को छोड़ना नहीं चाहिए उसका कारण है की जब हम पीछे देखते है की हम वास्तव में कौन थे, तब हम उद्धार के उपहार और परमेश्वर के दिए हुए छुटकारे के लिए ज्यादा आभारी बनते है।
इस लिए हम हमारे विश्वास पर ज्यादा मजबूती से खड़े रह सकते है। हम अपनी निष्फलता से विश्वास के द्वारा फिर खड़े हो सकते है, सुसमाचार को धन्यवाद। हालाँकि हम हर समय दुर्बलताओं से भरे हुए है, फिर भी हम परमेश्वर को उसके सम्पूर्ण उद्धार के लिए धन्यवाद दे सकते है। हम कभी भी घमंड नहीं कर सकते, लेकिन हमें उसका धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि उसने उद्धार के इस उपहार के द्वारा हमें अपनी संतान बनाया है, हम उसके सामने दृढ़ता से खड़े रह सकते है, और विश्वासयोग्यता से याजक का कार्य आगे बढ़ा सकते है। हमें जो अटल और हमारे विश्वास में दृढ बनाता है वह ओर कुछ नहीं लेकिन वह हकीकत है की हमने उद्धार का महान उपहार और परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त किया है जो परमेश्वर ने हमें दिया है। यदि हम अपने मूल स्वभाव को जानते है, तो हम पाप की माफ़ी का स्वीकार करेंगे जो परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल और बटी हुई सनी के कपड़े के वचन के द्वारा दिया है और उसकी सेवकाई करेंगे। 
जब हम यह जाने और विश्वास करने के द्वारा इसे अपने हृदय में स्वीकार करते है की यह कितना आभारी है, तब हमारे विश्वास को हिलाया नहीं जा सकता। यह दृढ बनता है। कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग हमारी ओर किस प्रकार का भ्रम डालते है, और कोई फर्क नहीं पड़ता की वे हमारे सामने इस बात को ग्रहण करते है की वे क्रूस कीमती लहू पर विश्वास करने के द्वारा मर गए है और सम्पूर्ण बने है, लेकिन हमारे विश्वास को हिलाया नहीं जा सकता। हालाँकि हमारा मूल स्वभाव दुष्ट है, लेकिन निश्चित सत्य पर विश्वास करने के द्वारा की प्रभु ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया, हम झूठ के सामने निडरता से लड़ सकते है और हम हमारे विश्वास पर दृढ खड़े रह सकते है। 
इस तरह, हम झूठ का सामना कर सकते है, हम यह कहने के द्वारा झूठ का सामना कर सकते है, “क्या? हम केवल क्रूस के कीमती लहू पर विश्वास करने के द्वारा बचाए गए है? यदि हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से प्राप्त उद्धार में से किसी भी चीज को निकाल देते है तो हमारे लिए अभिमान करने के लिए कुछ नहीं है। यह किस प्रकार का बकवास है?” 
लेकिन यदि हम परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार से अलग होते है, तो हम जैसे है वैसे खुद को नहीं देख सकते और उसके परिणाम स्वरुप हम आत्म विश्वासी और घमण्डी बन जाते है, और अन्त में दुष्ट बन जाते है। हम जैसे है उसी रूप से खुद को देखने के द्वारा हम ओर भी ज्यादा परमेश्वर के अनुग्रह को प्राप्त करते है। इस तरह हम उसकी आज्ञा का पालन करते है जो इस प्रकार है, “सदा आनन्दित रहो। 17निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो। 18हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्‍वर की यही इच्छा है” (१ थिस्सलुनीकियों ५:१६-१८)। 
हम परमेश्वर के सामने दृढ़ता से खड़े रह सकते है क्योंकि हम विश्वास करते हैं की प्रभु ने हमारे लिए सारे दण्ड को सहा, जैसे की प्रत्येक खम्भा चाँदी की पट्टियों से मंडित था और और पीतल के कुंडे से बंधा हुआ था। उसी रूप से, जब हम ठोकर खाते है, तब हम फिर से चाँदी की पट्टियों के द्वारा सहारा पाते है जो हमें थामे रखती है। जैसे प्रत्येक चाँदी की पट्टियां खूंटों से जुडी हुई थी और कुंडे खम्भों को थामे हुए थे, इस प्रकार क्योंकि हमारा हृदय पहचानता है की हम वास्तव में कौन है, और क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह है जिसने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया है, इसलि हम गिरते नहीं। इसके कारण, हम सीधे खड़े रह पाते है, ना दाई ओर ना तो बाई ओर हिलाते है। 
परमेश्वर ने हमें जो उद्धार का सम्पूर्ण उपहार दिया है उसके कारण, और परमेश्वर की धार्मिकता के कारण, ना तो हम अपने मुँह के बल या उलटे गिरते है और ना ही हम बगल में गिरते है, लेकिन पीतल की कुर्सियों के ऊपर दृढ़ता के साथ खड़े रहते है। पीतल की कुर्सिया संकेत कराती है की हम मूल रूप से नरक में नाश होनेवाले थे। हम अपरिहार्य दण्ड से बचाए गए है यह याद करने के द्वारा हम हमेशा परमेश्वर को हमारा धन्यवाद दे सकते है, और विश्वास के साथ दृढ और सुरक्षित खड़े रह सकते है। 
पानी और आत्मा का सुसमाचार उद्धार का अद्भुत सत्य है। यह किसी भी धर्मविद्या की सेमिनरी या दुनिया की किसी भी स्कूल से दीक्षा में नहीं पाई जा सकती। और इसके कारण यह सत्य का आधार और मूल है; इसलिए जो धर्मविद्या नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनिं के कपड़े के सत्य को नहीं जानती वह केवल रेट पर बनाए हुए घर की तरह है जो अन्त में गिर जाएगा। आपके सच्चे विश्वास की नींव मार्बल के चट्टान की तरह मजबूत होनी चाहिए।
 

धर्मविद्या क्या है?
 
मोटे तौर से, दो प्रवाह है जो धर्मविद्या को विभाजित करता है: इश्वर केन्द्रीय धर्मविद्या और मानव केन्द्रित धर्मविद्या, इन दोनों में से किसी एक को या दोनों को प्रत्येक सेमिनरी में सिखाया जाता है। सीधे शब्दों में कहे तो, वचन पर आधारित विश्वास इश्वर केन्द्रीय है, जब की मनुष्य के विचार वाले वचन मानव केन्द्रित है। मानव केन्द्रित धर्मविद्या इस बात पर महत्त्व नहीं देती की वास्तव में बाइबल क्या कहती है, लेकिन उनके विद्वतापूर्ण स्तर इस बात से मजबूत होते है या टीका होते है की कौनसे अधिकृत विद्वान ने क्या कहा और कौन उसका पालन कर रहा है। इसलिए, मानव केन्द्रित धर्मविद्या कभी भी उचित धर्मविद्या के रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती।
आम तौर पर, धर्मविद्या पढ़ने वाले लोग विवाद करते है की केवल उनके खुद के धर्मविद्या के दृष्टिकोण सही है। उदाहरण के तौर पर, अभी भी ऐसे बहुत सारे लोग है जो सेवंथ दे एड्वांटिस्ट की कलीसिया में हिस्सा लेते है जो केवल सब्त के दिन को ज्यादा महत्त्व देते है। दूसरी ओर, प्रिस्बीटेरियन कलीसिया, केवल काल्विनवाद के “कहलाए जाने वाले” पाँच मुद्दों का समर्थन करते है। दुसरे उदाहरण में, अर्मिनियनवाद तर्क प्रस्तुत करता है की हालाँकि परमेश्वर ने हमें बचाया है, फिर भी मनुष्यजाति को इस वास्तविकता पर विश्वास करना चाहिए। कुछ मायनों में, अर्मिनियनवाद को धर्मविद्या के दृष्टिकोण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है जो बाइबल को मनुष्य के दृष्टिकोण से व्याख्यायित करते है। 
इसके विपरीत, जब हम काल्विनवाद के पाँच मुद्दों को देखते है, तब हम ढूंढ सकते है की इसका विश्वास कुछ हद तक इश्वर केन्द्रीय है लेकिन भाग्यवाद सम्बन्धी भी है। क्यों? क्योंकि काल्विनवाद अपने पूर्वनिर्धारण और चुनाव के सिध्धांत को सत्य के रूप में समर्थन करता है, और तर्क प्रस्तुत करता है की, “आपका जन्म होने से पहले ही कुछ लोग परमेश्वर के द्वारा उसकी प्रजा के रूप में चुन लिए गए थे, जब की दुसरे लोगों को उसके चुनाव के लिए छोड़ दिया गया था।” इस प्रकार के अहितकारी दावे परमेश्वर के वचन के द्वारा स्वीकार नहीं किए जा सकते। 
इसलिए जब हम कहलाए जाने वाले इन दोनों रूढ़िवादी सिध्धान्तों की तुलना करते है, तब हमें पता चलता है की वास्तव में वे दोनों सत्य से बहुत अलग है। निसंदेह, कुछ मामलों में वे सत्य के बहुत करीब होते है, लेकिन आज ज्यादातर संस्थाओं के मसीही सिध्धांत बाइबल के सत्य से बहुत दूर है। निसन्देह, उनके सिध्धान्तों में कुछ बाइबल से मेल खाते है, लेकिन उनकी बुनियादी सिक्षा परमेश्वर के वचन के मुकाबले मिथ्या है। और इसी लिए हमें इस प्रकार के मिथ्या सिध्धान्तों को सीखना छोड़ देना चाहिए।
 

पाप से हमारी माफ़ी परमेश्वर की ओर से उपहार है
 
जो लोग वास्तव में परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते है, उन लोगों को परमेश्वर ने उद्धार अपने उपहार के रूप में दिया है। 
तम्बू की आंगन के बाड़े को ६० लकड़ी के खम्भों से बनाया गया था। इन खम्भों के सबसे ऊपर, चाँदी के कुंडे लगाए गए थे, और उनके निचे के भाग में पीतल की कुर्सिया लगाईं गई थी। प्रत्येक खम्भे को चाँदी की पट्टियों से एक दुसरे के साथ जोड़ा गया था और पीतल के खूंटे से बाँधा गया था जो जमीं के साथ जुड़ा हुआ था। लकड़ी के खम्भों को हर पाँच हाथ की दूरी या २.२५ मीटर की दूरी पर लगाया गया था, और उनके ऊपर बटी हुई सनी के सफ़ेद कपड़े को लटकाया गया था। 
जिस तरह खम्भों को पीतल के खूंटे से मजबूती के साथ बाँधा गया था, और चाँदी की पट्टियों के द्वारा एक दुसरे के साथ जोड़ा गया था, इसलिए बटी हुई सनी के सफ़ेद कपड़े को अपनी जगह से निकाला नहीं जा सकता था। जिस तरह बटी हुई सनी के सफ़ेद कपड़े को इन खम्भों पर मजबूती से बाँधा गया था, इसलिए लटकते हुए कपड़े को हिलाना असंभव था क्योंकि वह चारो ओर से मजबूती से बंधा हुआ था। 
लटकता हुआ बटी हुई सनी का सफ़ेद कपड़ा परमेश्वर की धार्मिकता को दर्शाता है। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें मजबूत विश्वास के लोग बनाया है जिन्हें कभी भी हिलाया नहीं जा सकता, क्योंकि परमेश्वर के अपरिहार्य अनुग्रह के द्वारा उसके उद्धार पर हमारा विश्वास स्थिर है। परमेश्वर ने हमें अपने उपहार के रूप में यह सम्पूर्ण उद्धार दिया है। हम कितने आभारी है! इस तरह आप और मैं विश्वास क द्वारा बचाए गए थे।
इसके विपरीत, जब मैं संसार में आज के मसीहियों को देखता हूँ, तब मैं उन्हें बेहूदा, हँसी के पात्र, और खेदजनक पाता हूँ। मैं उनसे दुखी और परेशान हूँ क्योंकि मैं देखता हूँ की उनके पास मसीहियत के प्रारम्भिक सच्ची समस्या के बारे में सच्चा ज्ञान नहीं है, जब की वे परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते है और उसके वचन के फैलाने का दावा करते है। 
हाल ही मै, बहुत लोग चिंता करते थे की ज्यादातर हमारे उच्च विद्यालय के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के बारे में कमज़ोर होते जा रहे है। वास्तव में, जो विद्यार्थी मूल सिध्धांत को नकार रहे है वे पढाई में उपलब्धि हांसिल नहीं कर सकते। इसलिए, महाविद्यालय के विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में प्रशिक्षित करने के लिए और उन्हें कार क्षेत्र के लिए तैयार करने के लिए, यूनिवर्सिटी को तह निश्चित करना चाहिए की वे ओर ज्यादा अग्रिम ज्ञान को प्रस्तुत करे उससे पहले ये सुनिश्चित करे की उनके पास प्रारम्भिक विषयों के बारे में समझ हो। स्पष्ट रूप से, यह कोशिश हर बार कारगर साबित नहीं होती। 
इस कहानी को लाने के पीछे मेरा करण था की मैं यह वर्णन करू की  जिस तरह संसार के ज्ञान में उसकी मूल समझ के बिना कोई तरक्की नहीं होती, उसी प्रकार परमेश्वर पर विश्वास भी ठोस नींव के बगैर अटका हुआ है। सच्चा विश्वास वो है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करता है। इस मूल विश्वास के बगैर, बाकी सारी चीजे व्यर्थ है। यद्यपि लोग शुरुआत में आनन्द कर सकते है और परमेश्वर के प्रति ज्यादा निष्ठावान हो सकते है, और कहते है की वे यीशु पर विश्वास करने के कारण पापरहित बने है, लेकिन जब थोड़ा सा समय बितता है, तब वे अपनी खुद की धार्मिकता को खो देते है, उनका आंनंद हवा में उड़ जाता है, वे अपना सारा सामर्थ्य गवा देते है, और अन्त में वे परमेश्वर पर अपने विश्वास का त्याग करते है क्योंकि उनके पाप अभी भी उनके हृदय में है। यह सारी घटना मसीही विश्वास के मूल ज्ञान के अभाव के कारण होती है।
क्या अप में से कोई विकलांग है? जिन लोगों के पैरों में समस्या होती है उनके लिए सबसे कठिन समय वो होता है जब वे सीढियों को चढ़ने की कोशिश करते है। जब वे सीढियों को चढ़ने में संघर्ष करते है, तब यदि कोई उनकी मदद करे तो क्या वह आभारी कार्य नहीं होगा? फिर भी कुछ ऐसे विकलांग है जो गुस्सा होते है और कहते है, “मुझे अकेला छोड़ दीजिए। मैं खुद से यह कर सकता हूँ।” आम तौर पर, विकलांग लोगों को ज्यादा आत्म सन्मान होता है और कभी कभी वे ज़िद्दी भी बन जाते है। जब उनके शरीर के हिस्से विकलांग हो जाते है, तब उनका दिमाग भी विकलांग बन जाता है। परिणाम स्वरुप, हीनभावना, हार का भाव, और नुकशान की भावना के द्वारा उनका हृदय कठोर हो जाता है। इसी लिए उनमे से कुछ लोग दूसरों की मदद नहीं लेते, लेकिन इसके मूल उद्देश्य को बिगाड़ देते है। 
वास्तव में उन्हें अपनी विकलांगता की वजह से हीनभावना रखने की जरुरत नहीं है। हो सकता है उन्हें उसके द्वारा जहमत उठानी पड़े लेकिन वह होना कोई पाप नहीं है। लेकिन यदि वे अपनी विकलांगता से निकलने वाले विकृत विचारों में पड़े रहेंगे और इन बुरी भावना को अनुमति देंगे की वे ओर अनगिनत हीनभावना को जन्म दे, तो वे वास्तव में अपने हृदय से भी विकलांग हो जाएंगे। यदि आप विलाग व्यक्ति है, तो आपको केवल आप जैसे है वैसे ही खुद को पहचानना है, जब आपको मदद की जरुरत पड़े तब मदद मांगे, और जब आप खुद से खड़े रह सके तब खड़े रहिए।
जब कभी भी ऐसा कुछ होता है जो मैं नहीं जानता या मुझे किसी मदद की जरुरत होती है, तब मैं दूसरों से विनती करता हूँ और मदद मांगता हूँ। मैं खुद की कमी के कारण दूसरों की मदद मांगता हूँ। और जब कोई व्यक्ति इसके बारे में जनता है तो वह वर्णन करता है और मेरी मदद करता है, और बाद में मै उस व्यक्ति को धन्यवाद देता हूँ। यद्यपि हमारी देह में दुर्बलताए है, लेकिन ऐसी कोई वजह नहीं है की वे हमारे हृदय को विकलांग बनाए। इसलिए, हमें अपनी दुर्बलताओं को जानना है, हमारे प्रभु के पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना है, अर्थात्, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े का उद्धार जिसने हमारी दुर्बलताओं को सम्पूर्ण किया है और हमें सुसमाचार की सेवकाई करने के योग्य बनाया है। और यह हमारे प्रभु का सुसमाचार है जिसकी वजह से हम घमंड करते है और अपना धन्यवाद देते है। क्योंकि हमने हमारे विश्वास से परमेश्वर के द्वारा दिया गया उद्धार का उपहार प्राप्त किया है, इसलिए अब हमें उसको धन्यवाद देना है। हम इस उद्धार के उपहार में आराम कर सकते है, एक दुसरे से प्रेम कर सकते है, और एक साथ जुड़ सकते है।
क्योंकि आजके बहुत सारे मसीही अपने विश्वास के मूल सिध्धांत में कमज़ोर है इसलिए सारी दिशाओं में भटक रहे है। हमारे प्रभु ने अपने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा हमें बचाया है। केवल इस को जानने और इस पर विश्वास करने के द्वारा हमने उद्धार का उपहार प्राप्त किया है और हम सम्पूर्ण बने है। हम सब [पहले नरक में बंधे हुए थे, फिर भी क्योंकि परमेश्वर ने हमें उद्धार का सम्पूर्ण उपहार देकर हमें बचाया है इसलिए हम उसकी सम्पूर्ण संतान बने है। क्योंकि हमने अब हमारे विश्वास के द्वारा उद्धार के उपहार को प्राप्त किया है, इसलिए यदि हम यह विश्वास करने के द्वारा हमारा जीवन जिए की हम परमेश्वर के लोग है, और इस विश्वास से बंधे रहे, तो हम सफलता से प्रभु में हमारे विश्वास के द्वारा जी सकते है।
वास्तव में मेरा नया जन्म होने के बाद, मेरे हृदय में दो नए बदलाव हुए, इनमें से किसी को भी मैंने पहले अनुभव नहीं किया था। पहले, दूसरों के लिए मेरा प्रेम पाखंड था, मैं उनसे बिना शर्त का प्रेम करता हूँ ऐसा ढिंग करता था जब की में वास्तव में अपने हृदय में उनसे नफ़रत करता था। लेकिन अब, मैं अपने पूरे हृदय से दूसरों को प्रेम करता हूँ। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने उद्धार का सम्पूर्ण उपहार दिया है, और ल्योंकी उसका सुसमाचार बहुमूल्य है, इसलिए जो कोई भी इस पर विश्वास करता है वह मेरी नज़र के सामने भला और प्रिय होता है। यदि मैं उनसे प्रेम न करने का प्रयास करूँ फिर भी उन्हें प्रेम करता हूँ।
दूसरा बदलाव पहले से विपरीत है, मैं दूसरों की भावनाओं के प्रति भावुक बना हूँ। पहले, जब कोई भी व्यक्ति ऐसा काम करता था जो मैं बरदास्त न कर सकू, तो फिर वह व्यक्ति कौन है उसकी परवाह किए बिना, मैं उसको फटकार लगाता था। लेकिन अब मुझे पता चला है की मुझे प्रत्येक व्यक्ति की कमजोरी को देखने की जरुरत है और उनके प्रति मेरे व्यवहार में सावधानी बरतने की जरुरत है, जब उन्हें परिरक्षण की जरुरत पड़े तब उन्हें परिरक्षण देना है और जब फटकार लगाने की जरुरत पड़े तब फटकार लगाना है। जिन लोगों के अन्दर दुर्बलताए या निर्बलाताए होती है वे आसानी से अपने हृदय में कठोर भी हो जाते है, और इसलिए मैं उनकी दुर्बलताओं के प्रति ज्यादा सचेत बना हूँ, ऐसा समय भी था जब मुझे छिप कर उनकी मदद करनी थी और ऐसा समय भी था जब मुझे उनकी मदद करने की जरुरत नहीं थी जब की उन्हें मेरी बहुत जरुरत होती थी। मैं इन चीजो के बारे में सचेत हुआ हूँ क्योंकि लोग बहुत ही कमज़ोर प्राणी है, लेकिन सभी समय के दौरान, मैं अभी भी मेरे विश्वास में निडर और मजबूत हूँ।
ऐसा समय भी होता है जब हमें दुसरे लोगों को डांटना नहीं है क्योंकि वे बहुत ही कमज़ोर है, लेकिन ऐसा समय भी होता है जब हमें सहन करने की बजाए उन्हें डांटना होता है। इसी लिए हम उनकी जरुरत के प्रति ज्यादा सचेत बने है, लेकिन जब विश्वास की ओर देखते है; तब उनके प्रति हमारा विश्वास निश्चित, सम्पूर्ण, सच्चा, और मजबूत होता है। यदि हम दैहिक दृष्टिकोण से हमारी परिस्थिति को देखे, तो हम केवल चिंता करने के बारे में देखते है। क्योंकि हम पहले बहुत ही कमज़ोर और अपर्याप्त थे, इसलिए यदि हम हमारी कमज़ोर देह के बारे में चिंता करना शुरू करे तो एक दिन भी बिना चिंता किए नहीं गुजरेगा। लेकिन यदि हम परमेश्वर के दिए हुए सम्पूर्ण विश्वास के ऊपर खड़े रहेंगे, तो हमारी सारी चिंताए मिट जाएगी, और जिस प्रकार यीशु ने हम जैसे अपर्याप्त और दोषी लोगों को अपने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बचाया है और हमें अपने अच्छे कार्यो के लिए पात्र के रूप में बनाया है, इसलिए विश्वास के इस प्रोत्साहन की वजह से हम मजबूत बनते है। 
हमारे हृदय का प्रोत्साहन प्रभु के द्वारा दिए गए उद्धार के सम्पूर्ण उपहार से आता है; बाकी सारे प्रोत्साहन जो देह से निकलते है वे अस्थायी है। निसन्देह, इसका मतलब यह नहीं है की देह की तसल्ली महत्वपूर्ण नहीं है हालाँकि कभी कभी हमें हमारे भाई और बहन को दैहिक रीति से तसल्ली देनी पड़ती है। 
हालाँकि, स्पष्ट बात यह है की जैसे हम खुद कमज़ोर है, इसलिए यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आए और हमें सम्पूर्ण तरीके से बचाया। बाइबल हमें बताती है की जब लाज़र की मृत्यु हुई यह देखकर उसकी बहाने मार्था और मरियम और उनके पडोशी रोने लगे, यीशु भी रोया। दुसरे शब्दों में, उन पर यीशु को तरस आया क्योंकि लोगों का उनके पापों की वजह से मरना कितना बुरा था। लेकिन क्योंकि हमारा प्रभु पिता की इच्छा के मुताबिक़ आया था, उसने कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ” (यूहन्ना ११:२५), और उन लोगों को बचाया अपने पापों की वजह से मर गए थे। वह हमें आत्मा और देह दोनों में तसल्ली देता है।
आपके और मेरे पास भी आत्मा और देह दो पक्ष है। इसलिए जब हम देह में कठिन समय से गुजरते है, तब हमें देह में तसल्ली पाने की जरुरत होती है। हमें देह में आत्मिक रीति से तसल्ली पाने की भी जरुरत है, और हमारे पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े का विश्वास भी होना चाहिए। इस प्रकार, परमेश्वर ने हमें दिए हुए उद्धार के उपहार को जानकर आनन्द मानाने के द्वारा, उद्धार के इस उपहार को बनाए रखने के द्वारा, और एक बार फिर से खुद को यह याद दिलाने के द्वारा की हम वो लोग है जिन्होंने उद्धार का उपहार पाया है, हमारा हृदय मसीह में आनन्द मनाता है। इस प्रकार हम परमेश्वर को महिमा देते है।
परमेश्वर ने हम प्रत्येक लोगों को तम्बू के खम्भों की तरह विश्वास में मजबूत किया है, और हमें विश्वास से जीने के लिए कहा है। इसलिए यदि देह की निर्बलता हरदिन आए, तब हम अपने हृदय की गहराई में यह अनुभव कर सकते है की परमेश्वर का उद्धार कितना मूल्यवान है, यह  समझमे आता है की हम दण्ड के योग्य थे। आप भी अब तम्बू के आँगन के बाड़े में प्रगट हुए इस उद्धार के सत्य को समझ सकते है।
अब आप भी पूर्व में रखे तम्बू के आँगन के द्वार को खोल सकते है और उसमे प्रवेश कर सकते है। जब आप तम्बू के आँगन के इस द्वार को खोलते है और उसमे प्रवेश करते है, वहाँ ऐसा कुछ रखा है जिससे आप सबसे पहले गुजरते है। यह क्या होगा? यह ओर कुछ नहीं लेकिन होमबलि की वेदी है। 
जब आप विश्वास से होमबलि की वेदी से गुजरते है, वहाँ एक पीतल की हौदी राखी है, और जब आप इस हौदी को पार करते है, तब आप अन्त में परमेश्वर के घर में प्रवेश करते है, जो मिलापवाला तम्बू है। जब विश्वास से इसकी ओर देखते है तो यह सारी चीज आसानी से सम्पन की जा सकती है। यद्यपि पहले तम्बू का वचन गूढ़ लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह आपके और मेरे लिए समझने में आसान है क्योंकि हम जिनकी विश्वास की नींव मजबूत है वे विश्वास के सच्चे सिध्धांत की ओर देखते है जिसे हमने पहले ही पाया है। क्योंकि परमेश्वर का उद्धार बहुमूल्य है, इसलिए उसने तम्बू की विधि के द्वारा सब को समझने के लिए आसान बनाया है। लेकिन कोई भी व्यक्ति अपने खुद के विचारों से तम्बू के वचन का गलत व्याख्यान करे उसे रोकने के लिए, परमेश्वर ने इसे उन लोगों की आँखों से अनदेखा रखा है जिन्होंने अभी भी नया जन्म नहीं पाया है। इसलिए, यहाँ तक की धर्मविज्ञानिओं के लिए भी यदि उनके पास विश्वास का मूल सिध्धांत नहीं है तो उनमे से कोई भी तम्बू के आँगन के द्वार को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से क्यों बुना है इसके आत्मिक मतलब के बारे में कभी नहीं बोल पाएंगे, क्योंकि परमेश्वर ने ऐसे झूठे लोगों से इस सत्य को छिपाकर रखा है। 
नीला कपड़ा यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिए हुए बपतिस्मा को दर्शाता है। हाथ रखने की रीति से लिए हुए अपने बपतिस्मा के द्वारा, उसने हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया। लाल कपड़ा उसके बलिदान की मृत्यु को दर्शाता है जो यीशु मसीह ने हमारे सारे पापों के लिए क्रूस पर मृत्यु तक अपना लहू बहाया। बैंजनी कपड़ा प्रगट करता है की यीशु खुद परमेश्वर है। बटी हुई सनी का कपड़ा उद्धार का वचन है जिसके द्वारा उसने, खुद परमेश्वर ने हम पूरी मनुष्यजाति को वायदा किया था। जिन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म नहीं पाया वे सत्य के बारे में नहीं बोल सकते जो परमेश्वर ने ठीक इसी तरह तम्बू के द्वार में प्रगट किया है।
परमेश्वर ने मनुष्यजाति के आरम्भ से ही वायदा किया था, अर्थात्, आदम और हव्वा से और उनके सारे सेवको को, “तुम्हें बचाने के लिए, मैं पानी, लहू और आत्मा के द्वारा तुम्हारे पास आऊंगा, और मैं तुम्हें बचाऊंगा।” इस वचन के मुताबिक़, यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आया, बपतिस्मा लिया, अपना लहू बहाया और मरा, और इस प्रकार हमें बचाया। बटी हुई सनी का कपड़ा परमेश्वर के वायदे का वचन है, और यह वचन की परिपूर्णता भी है। नीला, बैंजनी, और लाल कपड़ा हमें यीशु के बपतिस्मा के बारे में बताते है, की वह हमारा परमेश्वर है, और उसने जगत के सारे पापों को उठाके और क्रूस पर लहू बहाकर हमारे दण्ड को सहा है। और वे हमें कहते है की यीशु ने मृत्यु से जीवित होकर हमें बचाया है। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े का यह सत्य उद्धार का अनन्त सत्य है जिसके बारे में किसी असमति की अनुमति नहीं है।
आपको और मुझे परमेश्वर ने उद्धार का उपहार दिया है। खम्भों के सबसे ऊपर चाँदी के कुंडे लगाए गए थे। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए की हम वो लोग है जिन्होंने परमेश्वर से उद्धार के उपहार को प्राप्त किया है। इस उपहार को प्राप्त करने के करण हम धर्मी, पापरहित, और परमेश्वर के लोग बने है, परमेश्वर के इस उपहार के अलावा हमारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके बारे में हम घमंड करे। यदि कोई एक ऐसी चीज है जिसके बारे में हम घमंड कर सकते है, तो वह केवल यह है की हम परमेश्वर की संतान बने है जिनके पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े का विश्वास है। यह केवल इसलिए सम्भव हुआ है क्योंकि यीशु मसिह ने हम सब को हमारे सारे पापों से पानी और आत्मा के बहुमूल्य सुसमाचार के द्वारा बचाया है। इसलिए, हमें इस विश्वास के द्वारा जीना चाहिए, विश्वास करना चाहिए की हम सम्पूर्ण बने है क्योंकि परमेश्वर ने हमें उद्धार का उपहार दिया है और इस उपहार के द्वारा हम परमेश्वर की निज प्रजा बने है। आक और कल, हमें हमेशा इस विश्वास के द्वारा जीवन जीना चाहिए।
मैं विश्वास करता हूँ की यह समय मिलापवाले तम्बू के विषय में वचन प्रसार करने का उचित समय है। पहले ऐसा समय था जब लोग हजार वर्षो के राज्य के पहले के रेप्चर के नियम के बारे में अस्पष्ट थे जिसका कोई मतलब नहीं था, लेकिन परमेश्वर ने हमें इस समय के उचित ठहराया है की हम प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के वचन का प्रचार करे और इस प्रकार बहुत सारे लोगों को अपने गलत विश्वास को छोड़कर और सच्चा विश्वास हांसिल करने के योग्य बनाए। इसी तरह, आजके युग में, यह बहुत जरुरी है की हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के विश्वास का प्रचार करे। 
क्योंकि हमने परमेश्वर से उद्धार का उपहार प्राप्त किया है, इसलिए मैं विश्वास करता हूँ की उध्दार के इस उपहार का प्रसार करना सबसे आनन्द दायक कार्य है। 
मैं अपना सारा धन्यवाद परमेश्वर को देता हूँ।