उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-24] (निर्गमन ३८:१-७) होमबलि की वेदी बबूल की लकड़ी से बनी थी और सोने से मढ़ी गई थी

(निर्गमन ३८:१-७)
“फिर उसने बबूल की लकड़ी की होमवेदी भी बनाई; उसकी लम्बाई पाँच हाथ और चौड़ाई पाँच हाथ की थी; इस प्रकार से वह चौकोर बनी, और ऊँचाई तीन हाथ की थी। उसने उसके चारों कोनों पर उसके चार सींग बनाए, वे उसके साथ बिना जोड़ के बने; और उसने उसको पीतल से मढ़ा। और उसने वेदी का सारा सामान, अर्थात् उसकी हांड़ियों, फावड़ियों, कटोरों, काँटों, और करछों को बनाया। उसका सारा सामान उसने पीतल का बनाया। और वेदी के लिये उसके चारों ओर की कंगनी के तले उसने पीतल की जाली की एक झंझरी बनाई, वह नीचे से वेदी की ऊँचाई के मध्य तक पहुँची। उसने पीतल की झंझरी के चारों कोनों के लिये चार कड़े ढाले, जो डण्डों के खानों का काम दें। फिर उसने डण्डों को बबूल की लकड़ी का बनाया और पीतल से मढ़ा। तब उसने डण्डों को वेदी के किनारों के कड़ों में वेदी के उठाने के लिये डाल दिया। वेदी को उसने तख़्तों से खोखली बनाया।”
 

प्रत्येक पापी कोई होमबलि की वेदी के पास बलिदान का अर्पण लाना पड़ता था

इस्राएल के लोगों के बिच में से किसी भी पापी को अपने पापों के लिए, तम्बू के पास बलिदान का अर्पण लाना पड़ता था, उसके सिर पर अपने हाथ रखने के द्वारा अपने पापों को उसके ऊपर डालना पड़ता था, उसका लहू बहाना पड़ता था, और फिर उस लहू को याजक को सोंपना पड़ता था। फिर सेवा करनेवाला याजक बलिदान के इस लहू को होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कता था, उसकी चरबी और मांस को वेदी पर रखता था, और फिर परमेश्वर के लिए सुंगध के रूप में उसे आग से जलाता था। यहाँ तक की महायाजक को भी अपने पापों की माफ़ी पाने के लिए होमबलि की वेदी के सामने बलिदान के सिर पर अपने हाथ रखने पड़ते थे और अपने पाप उसके ऊपर डालने पड़ते थे। यह प्रायश्चित का बलिदान था जो होमबलि की वेदी पर चढ़ाया जाता था जिसे बबूल की लकड़ी से बनाया गया था और पीतल से मढा गया था, और पापों की माफ़ी का यह बलिदान केवल हाथ रखने और लहू बहाने के द्वारा ही चढ़ाया जाता था। 
यहाँ तक की जगत की उत्पत्ति से पहले ही परमेश्वर ने हाथ रखने और लहू बहाने के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को अपने पापों से छुडाने के लिए उद्धार के मार्ग की योजना बनाई थी। हमारे उद्धार की योजना करने के बाद, परमेश्वर पिता को अपने एकलौते बेटे को इस पृथ्वी पर भेजना पड़ा, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेना पडा, और क्रूस पर उसका लहू बहाना पडा। इसी लिए यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के पापों का स्वीकार किया, जो पुराने नियम के हाथ रखने के बराबर था। और जगत के सारे अपपों का दण्ड सहने के लिए, यीशु ने उन सारे पापों को अपने कंधो पर उठाया और हमारी जगह क्रूस पर अपना लहू बहाया। 
पीतल से मढ़ी होमबलि की वेदी हमें सिखाती है की परमेश्वर निश्चित तौर पर मनुष्य के हृदय की पटरी पर लिखे सारे पापों का दण्ड देगा। इसलिए प्रत्येक पापी को बलिदान के अर्पण के सिर पर अपने हाथ रखने के द्वारा इन पापों को उसके ऊपर डालना पड़ा और उसका गला काटकर उसका लहू बहाना पडा, और याजक को उस पशु के लहू को होमबलि की वेदी के सींगो पर चढ़ना पडा। इस तरह, पीतल से मढ़ी होमबलि की वेदी हम सबको यह जानकारी देती है की यीशु ने हमारे सारे पापों को उठाया, और इस प्रकार हमारी जगह इन सारे पापों के दण्ड को उसने क्रूस पर सहा। 
 

होमबलि की वेदी का महत्त्व
 
जब कभी भी बलिदान का पशु परमेश्वर को अर्पण किया जाता था, तब उसके शरीर को छोटे छोटे टुकड़ों में काटा जाता था और आग से जलाने के लिए उसे होमबलि की वेदी पर रखा जाता था, और मनोहर खुशबु के तौर पर परमेश्वर को चढ़ाया जाता था। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया और हमारे पापों के लिए हमारी जगह क्रूस पर चढ़ा यह देखकर परमेश्वर पिता प्रसन्न हुए। पिता परमेश्वर प्रसन्न हुए की निर्दोष यीशु ने खुद को सारे पापियों के लिए अनन्त काल के अर्पण के रूप में बलिदान किया। 
होमबलि की वेदी पर अर्पण किया गया बलिदान दिखाता है की परमेश्वर ने कैसे प्रत्येक पापी को अपने पापों से बचाया है, उसके साथ साथ, वह यह भी दिखाता है की कैसे परमेश्वर ने प्रत्येक पापों को निराकृत किया। अलग तरीके से देखे तो, होमबलि की वेदी मनुष्यजाति के सारे पाप और दोषों से उसके उद्धार को प्रगट कराती है। यह हमें दिखाती है की प्रत्येक पापी को आग की झील में और नरक की गन्धक में डाला जाना चाहिए; और ये हमें यह भी दिखाती है की प्रत्येक पापी अपने पापों से छूटकारा पा सकता है। इस तरह, जिस किसी के अन्दर भी पाप है उसे नरक की आग में डालना चाहिए, और इसलिए प्रत्येक पापी को परमेश्वर की दया को प्राप्त करना चाहिए।
होमबलि की वेदी पर रखे गए प्रत्येक बलिदान के पशु ने पापियों के अपराधों को स्वीकार किया था और उसके लिए उसका न्याय भी हुआ था। दुसरे शब्दों में, बलिदान के पशु ने खुद पर हाथ रखवाने के द्वारा दुसरे लोगों के पापों का स्वीकार किया था और उसकी जगह खुद के लहू को बहाया था। उसने उन पापों के दण्ड को सहा था जो पापियों को सहने थे। तम्बू के अन्दर होमबलि का अर्पण हमें सिखाता है की यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों का स्वीकार किया और हमारी जगह खुद के लहू को बहाया।
तम्बू के अन्दर प्रत्येक पात्र हमें दिखाते है की परमेश्वर ने हमारे लिए कैसे पाप की माफ़ी को परिपूर्ण किया। इसलिए, आपको अपने उद्धार की स्पष्ट रेखा खींचने के लिए, आपके पास तम्बू के पात्र में प्रगट हुए सत्य पर सच्चा विश्वास होना चाहिए। तो फिर आप अपने उद्धार की सीमा कैसे खिंच सकते है? आपको नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में छिपे उद्धार के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार की स्पष्ट रेखा खींचनी चाहिए। जिन लोगों के पास ऐसा विश्वास है केवल वेही परमेश्वर की धार्मिकता में प्रवेश कर सकते है और योग्य रीति से अपने विश्वास को जी पाते है।
परमेश्वर ने बलिदान का अर्पण तैयार किया जो पापियों के पापों के लिए प्रायश्चित करे ताकि वे पवित्र स्थान में प्रवेश कर सके। और महायाजक ने सारे पापियों उनके पापों से बचाने के लिए उनकी जगह खुद प्रायश्चित के बलिदान का अर्पण किया। परमेश्वर ने पानी और आत्मा के सुसमाचार में अपने बेटे यिस्शु मसीह के द्वारा उद्धार के वायदे को परिपूर्ण किया। इसलिए हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए और हमारे विश्वास को जीना चाहिए। क्या अब आप पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है? आपको अपने सारे पापों से बचने के लिए, पूरे हृदय से पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए। पापों की सच्ची माफ़ी केवल तभी प्राप्त की जा सकती है जब आपके पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा जो गवाही देता है वह पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास जो। वास्तव में, पुराने नियम के तम्बू में दिखाया गया नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुआ उद्धार का विश्वास नए नियम में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार में निहित है। क्या आप पानी और आत्मा के सुसमाचार का समर्थन करते है? या फिर आप उस सुसमाचार का समर्थन करते है जो केवल क्रूस के लहू को महत्त्व देता है? क्या आप उस सुसमाचार पर विश्वास करते है जो घोषणा कराती है की यीशु मसीह ने हमारे लिए बपतिस्मा लिया और अपना लहू बहाया?
पुराने नियम के युग में, तम्बू की बलिदान की प्रथा परमेश्वर के उद्धार की वाचा थी जो उसने हमें वायदा किया था की वह हमें जगत के पापों से बचाएगा। परमेश्वर ने तम्बू के द्वार के लिए इस्तेमाल हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा अपने उद्धार की योजना को प्रगट किया है। जो कोई भी इस द्वार से तम्बू में प्रवेश करना चाहता है उन्हें इस सामग्री में प्रगट हुए सत्य पर विश्वास करना था। इस तरह, परमेश्वर ने तम्बू के बलिदान से, बलिदान के सिर पर हाथ रखने और इस प्रकार विश्वास से अपने पाप उसके ऊपर पारित करने और उसके लहू को परमेश्वर को अर्पण करने के द्वारा इस्राएल के लोगों को अपने पापों से उद्धार पाने की अनुमति दी। पानी और आत्मा का सुसमाचार एक मापदंड है जिसके द्वारा पापों की माफ़ी प्राप्त की जा सकती है, और इसतरह केवल वे लोग ही परमेश्वर की प्रजा थे जो ठीक तरीके से इस सुसमाचार को समझते और विश्वास करते थे, जब की बाकी लोगों को अभी भी परमेश्वर की प्रजा बनना था। ऐसा इसलिए क्योंकि तम्बू के आँगन के द्वार के लिए इस्तेमाल हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुआ सत्य नए नियम का पानी और आत्मा का सुसमाचार है।
हमारे प्रभु ने यूहन्ना अध्याय ३ में नीकुदेमुस से कहा, “जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तब तक वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।” हम सब के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है हम सब यहाँ उस पानी को समझे जो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु ने प्राप्त किए हुए बपतिस्मा को दर्शाता है। यदि हम पानी और आत्मा के सुसमाचार को समझते है केवल तभी हम विश्वास से परमेश्वर की सेना में आ सकते है। 
 

प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए की वह अपने पापों की वजह से अपरिहार्य रूप से दण्ड पाएगा
 
जैसे मरकुस ७:२१ और आगे वर्णन किया गया है, वैसे प्रत्येक व्यक्ति के हृदय से बारह पाप निकलते है। सबसे पहले, मनुष्य के बुरे विचार परमेश्वर के सामने पाप है। और हत्या, व्यभिचार, चोरी, लोभ, दुष्टता, अभिमान, और मूर्खता भी पाप है। मनुष्य के हृदय के बुरे विचार वास्तव में पाप का स्त्रोत है जो परमेश्वर की पवित्रता को भंग करता है। यहाँ तक की परमेश्वर ने आदम को अपने स्वरुप में अनन्त काल के लिए बनाया था, लेकिन आदम ने परमेश्वर के विरुध्ध पाप किया, और इसके परिणाम स्वरुप, हम सब आदम के वंशज भी पापी के रूप में पैदा हुए, जो परमेश्वर के दण्ड से बच नहीं सकते। क्योंकि हम सब पहले मनुष्य आदम के वंशज के रूप में पैदा हुए है, इसलिए पाप करना और परमेश्वर की पवित्रता को भंग करना हमारे स्वभाव में है, हमारे विचार और कार्य दोनों में; और इसलिए हम जब तक मर नहीं जाते उस दिन तक पाप करते है। वास्तव में, सारे मनुष्य मूल रूप से स्वाभाविक तौर पर अपनी सोच में बुरे है, और वे दुर्बल प्राणी भी है जो आसानी से शैतान से धोख़ा खाते है जो निरंतर परमेश्वर की पवित्रता को चुनौती देता है।
परमेश्वर ने कहा था की मनुष्य के हृदय से बुरे विचार निकलते है। प्रत्येक मनुष्य मरकुस अध्याय ७ में दर्शाए गए हत्या से व्यभिचार, चोरी, लोभ, परस्त्रीगमन, मूर्खता, और विगैसे सारे पापों से भरा हुआ दुष्ट पापी है। प्रत्येक मनुष्य का मूल स्वभाव बुरे विचारों से भरा हुआ है। और अनगिनत लोग अपनी खुद की धार्मिक भक्ति से परमेश्वर की पवित्रता को चुनौती देते है। इसलिए हम सब को परमेश्वर के द्वारा हमारे पापों की वजह से दण्ड प्राप्त करना था। इसी लिए दिन प्रति दिन मिलापवाले तम्बू के अन्दर होमबलि की वेदी के ऊपर निरंतर बलिपशु को जलाया जाता था। तम्बू का आँगन वास्तव में जलाते हुए मांस और लकड़ी के धुओं से महकता रहता था। 
 

हमें पीतल की हौदी के पानी से अपनी गंदगी को साफ़ करना चाहिए
 
पुराने नियम के याजक को प्रत्येक दिन जलाते हुए मांस और काले धुएँ की गंध से घिरा हुआ रहना पड़ता था। इसलिए उनके लिए साफ़ होना असंभव था, क्योंकि उनके चहरे धुएँ से काले पद गए थे और उनकी देह मेल से ढँकी हुई थी। इसी लिए उन्हें तम्बू के आँगन में हौदी की जरुरत थी, ताकि वे खुद को साफ़ कर सके। याजकों को हरदिन पीतल की हौदी के पानी से अपने मेल को साफ़ करना पड़ता था। 
तम्बू के अन्दर पीतल की हौदी निर्देश कराती है की नए नियम के दिनों में यीशु यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को साफ़ करेगा। पुराने नियम के याजक तम्बू के अन्दर पीतल की हौदी के पानी से अपनी देह को साफ़ करते थे यह यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है, जो उद्धार के कार्य के उतना ही महत्वपूर्ण था जितना क्रूस पर उसका लहू का बहाना था। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यीशु ने जो बपतिस्मा लिया था वह हमारे पापों को साफ़ करने के लिए वास्तव में महत्वपूर्ण था, जिसके बगैर कोई भी व्यक्ति शुध्ध नहीं हो सकता था। वास्तव में, याजक अपनी पवित्रता को कायम रख पाए क्योंक वे तम्बू की पीतल की हौदी के पास जा पाए और तम्बू के अन्दर सेवकाई करते दौरान जो गंदगी उनकी देह पर लगी थी उसे साफ़ कर पाए। 
याजक पीतल की हौदी में अपनी गंदगी को साफ़ करता था यह दर्शाता है की मनुष्य को अपने पापी स्वभाव का अंगीकार करना चाहिए और समझना चाहिए की प्रत्येक व्यक्ति अपने पापों की वजह से परमेश्वर से दण्ड पाएगा और नाश होगा। जब आप परमेश्वर के सामने अंगीकार करते है की आप अपने पापों के कारण दण्ड पाएंगे और हमेशा के लिए नरक की आग में डाल दिए जाएंगे तब आपके लिए उद्धार का मार्ग खोला जाता है। आप परमेश्वर की उपस्थिति में केवल एक ही तरीके से आ सकते है और वह है अपने पापों का अंगीकार करना और उद्धार के सच्चे सत्य पर विश्वास करना जो यीशु ने आपके लिए परिपूर्ण किया है। वास्तव में मसीहा इस पृथ्वी पर आपको और मुझे संसार के सारे पापों से बचाने के लिए आया था; उसने वास्तव में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर हमारे सारे पापों को सहा; और वास्तव में उसने क्रूस पर हमारी जगह दण्ड सहा। यह है पानी और आत्मा के सुसमाचार का सत्य, और यह उद्धार का वो परिहार्य सत्य है जिस पर हमें विश्वास करना चाहिए। 
प्रत्येक मनुष्य मन में बुरे विचार रखता है, और इसलिए लोगों के अन्दर दूसरों को तकलीफ देने की, उन्हें दुःख पहुचाने की, और यहाँ तक की उनकी हत्या करने की दुष्ट इच्छाए होती है। आपको समझना चाहिए की मनुष्य कितने दुष्ट और भ्रष्ट है। तो फिर मनुष्य इतने दुष्ट क्यों है? क्योंकि वे स्वभाव से साँप के वंशज है, जो हमेशा बुरे विचार करते है और और हमेशा पाप करते है। क्योंकि मनुष्य हर समय बारह प्रकार के पाप करता है, इसलिए वे एक बम की तरह है जो कभी भी फट सकता है। वास्तव में, वे हर समय दुष्टता करते है, निरंतर एक दुसरे से झूठ बोलते है, एक दुसरे से चोरी करते है, व्यभिचार और परस्त्रीगमन करते है, परमेश्वर की महिमा की निंदा करते है, और मूर्खता और पागलपन करना पसंद करते है। स्वबाव से दुष्कर्म करनेवालों के वंशज के रूप में, मनुष्य हमेशा दुष्ट विचार करता है और अपने जीवनभर परमेश्वर की पवित्रता को चुनौती देता है। 
 

हम परमेश्वर की दृष्टि में कितने दुष्ट है?
 
स्वार्थी होना प्रत्येक मनुष्य के स्वभाव में वंश परंपरागत है। वैज्ञानिक कहते है की मनुष्य के अन्दर सेंकडो ट्रिलियन जिवकोश है, और यह प्रत्येक जिवकोश इतना स्वार्थी है की यह दुसरे जिवकोश को स्वीकार नहीं करते। इसलिए मनुष्य पूरी रीति से स्वार्थी है। क्योंकि प्रत्येक मनुष्य को आनुवंशिक रूप से स्वार्थी बनाया गया है, इसलिए कोई भी व्यक्ति इस संसार में जीवित नहीं रह सकता यदि उन्हें सामाजिक नियमो के द्वारा नियंत्रित न किया जाए। मनुष्य इतना स्वार्थी है की वह इस नियमों के बगैर, एक दुसरे की हत्या कर देते। यह उनके पारस्परिक अस्तित्व की बात है इसलिए उन्होंने सहस्तित्व के नियम की स्थापना की है। इस तरह सामाजिक नीति नियम अस्तित्व में आए। सामाजिक नीति नियम मनुष्य की विनाशक प्रवृत्ति को रोकने और सहकारिता के वातावरण को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे। संक्षेप में, क्योंकि मनुष्य बहुत ही दुष्ट और भ्रष्ट है इसलिए उनके बर्ताव को नियंत्रित करने के लिए और उनकी दुष्ट प्रवृत्ति को रोकने के लिए सामाजिक नीति नियम को बनाया गया। जीतनी ज्यादा दुष्टता इस संसार में बढाती जाएगी उतनी ही ज्यादा सामजिक नियम और क़ानून को बनाने की जरुरत होगी। 
यदि आप वास्तव में यीशु मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करना चाहते है और परमेश्वर की उपस्थिति में आना चाहते है, तो सबसे पहले आपको समझना होगा की आप मूल रूप से स्वभाव से दुष्ट है, अंगीकार करे की आप नरक में बंधे हुए दुष्ट पापी है, और फिर पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करे। आपको यीशु मसीह की धार्मिकता पर विश्वास करना चाहिए और इस प्रकार अपने पापों की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए। यद्यपि परमेश्वर पवित्र है, मनुष्य पूरी तरह से दुष्ट है, और इसलिए वे हर समय पाप करते है। भले ही उनको परमेश्वर के स्वरुप में बनाया गया है, लेकिन वे पवित्रता की निंदा करनेवाले लोग है। इसी लिए मनुष्य केवल तब उद्धार पा सकता है जब वे यीशु मसीह के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर पूरे मन से विश्वास करे। आप अपने उद्धार तक केवल तब पहुँच सकते है जब आप यीशु मसीह की धार्मिकता की खोज करे, उसे समझे, और उस पर विश्वास करे। आपको परमेश्वर की धार्मिकता की खोज करनी चाहिए और उसके अनुग्रह पर विश्वास करना चाहिए, उससे कहना चाहिए, “प्रभु, मैं अंगीकार करता हूँ की मैं हमेशा दुष्ट हूँ। मैं हर समय निर्बलताओं से भरा हुआ हूँ। मैं निरंतर पाप करता हूँ, और इसलिए नरक में दण्ड पाने के हकदार हूँ। इसी लिए पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा दिया गया आपका उद्धार मेरे लिए अनिवार्य है। मैं विश्वास करता हूँ की आपने मुझे पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा बचाया है।” जो लोग अपनी निर्बलता और दुष्टता का अंगीकार करते है केवल वेही यीशु मसीह की धार्मिकता पर विश्वास कर सकते है।
कहा जाता है की सोक्रेटिस शौचालय की दीवार पर लिखे एक बदलेख के द्वारा प्रेरित हुआ, जिस पर लिखा था, “खुद को जाने!” इस साधारण बात ने सोक्रेटिस के मन में गहरी छाप छोड़ दी। इसलिए, जब कभी भी सोक्रेटिस ऐसे व्यक्ति को देखता जो धर्मी और ज्ञानी बनने का ढोंग करता है, तब वे उस व्यक्ति को यह कहने के द्वारा समझाता था, “पहले खुद को जानो!” केवल यह एक साधारण वाक्य सोक्रेटिस को महान तत्वज्ञानी बनाने के लोइए काफी था जिसे आज भी याद किया जाता है। 
आपके लिए अपना पापी स्वभाव पहचानना कितना महत्वपूर्ण है इस बात को मैं पूरी तौर से नहीं बता सकता, यह जान लीजिए की इन पापों की कीमत के रूप में अप को नरक में डाल दिया जाएगा, और अपने पूरे मन से इस बात को अंगीकार करे। जब तक आप इस बात को नहीं समझते की आप परमेश्वर के सामने कितने दुष्ट पापी है और आप सीधे नरक की ओर आगे बढ़ रहे है तब तक आप परमेश्वर की धार्मिकता को वास्तव में समझ नहीं सकते। इस तरह, प्रत्येक व्यक्ति को सबसे पहले खुद के पापों के परिणाम का अंगीकार करना चाहिए। होमबलि की वेदी बबूल की लकड़ी से बनाई गई थी, और उसकी बाहरी सतह पीतल से मढ़ी हुई थी। यह निर्देश कराती है की प्रत्येक व्यक्ति का अपने पापों की वजह से न्याय होगा, और प्रत्येक पापी नरक में जाने से बच नहीं सकते। लेकिन जो लोग जानते है की वे खुद से कितने असहाय है वे यीशु की धार्मिकता का आदर करते है और उसके प्रेम पर विश्वास करते है। 
आइए लूका १८:१०-१४ की ओर बढ़ाते है, “दो मनुष्य मन्दिर में प्रार्थना करने के लिये गए; एक फरीसी था और दूसरा चुंगी लेनेवाला। फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यों प्रार्थना करने लगा, ‘हे परमेश्‍वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि मैं दूसरे मनुष्यों के समान अन्धेर करनेवाला, अन्यायी और व्यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेनेवाले के समान हूँ। मैं सप्‍ताह में दो बार उपवास रखता हूँ; मैं अपनी सब कमाई का दसवाँ अंश भी देता हूँ।’ “परन्तु चुंगी लेनेवाले ने दूर खड़े होकर, स्वर्ग की ओर आँखें उठाना भी न चाहा, वरन् अपनी छाती पीट-पीटकर कहा, ‘हे परमेश्‍वर, मुझ पापी पर दया कर!’ मैं तुम से कहता हूँ कि वह दूसरा नहीं, परन्तु यही मनुष्य धर्मी ठहराया जाकर अपने घर गया; क्योंकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।”
यीशु के समय में फरीसी अपने बाहरी दिखावट को लेकर बहुत ही धार्मिक थे, वे प्रत्येक लोगों को धार्मिक रीति के मुताबिक जीवन जीने के बारे में सिखाते थे। लेकिन क्या उन्होंने कभी भी कोई चोरी या व्यभिचार नहीं किया था? नहीं, ऐसा नहीं है! भले ही फरीसी बहार से परमेश्वर के जन होने का दिखावा करते थे, लेकिन जब कोई भी उनकी तरफ नहीं देख रहा होता था, तब वे दुसरे लोगों की तुलना में ओर भी ज्यादा और गन्दा पाप करते थे। फिर भी इसके बावजूद, वे खुद को भ्रमित करते थे की वे पापरहित है, और वे अपने आसपास ले लोगों की नज़र में परमेश्वर का जन होने का ढोंग करते थे। निश्चित रूप से ऐसे लोग सबसे दुष्ट पापी है जो परमेश्वर की पवित्रता को चुनौती देते है। 
चुंगी लेनेवाले व्यक्ति की प्रार्थना फरीसी की प्रार्थना से अलग थी। यह सारे लोगों के लिए स्पष्ट था की चुंगी लेनेवाला व्यक्ति पापी था। वास्तव में, जब वे परमेश्वर के पास आया, तब वह अपना सिर उठाकर आसमान की ओर भी नहीं देख पाया, लेकिन उसके बजाए उसने अपनी छाती को पिटा और अंगीकार किया, “परमेश्वर, मेरे ऊपर दया करे, क्योंकि मैं पापी हूँ!” फिर परमेश्वर ने चुंगी लेनेवाले मनुष्य की दया की विनती सुनी, और उसने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास किया इसलिए परमेश्वर ने उसे उसके सारे पापों से बचाया। उसके विपरीत, फरीसी परमेश्वर की दृष्टि में बुरे काम करनेवाले के रूप में प्रगट हुआ। यह फरीसी नहीं लेकिन चुंगी लेनावाला व्यक्ति था जो परमेश्वर के द्वारा उसकी धार्मिकता के लिए स्वीकार किया गया।
हमारे कार्यों को प्रगट करने के द्वारा नहीं लेकिन केवल हमारे हृदय से परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करने के द्वारा ही हमने पाप की माफ़ी पाई है। क्योंकि हमारे कार्य परमेश्वर की पवित्रता के बगैर के होते है, इसलिए हम हर समय पाप करते है। और इसलिए हम सब हमारे पापों के लिए आग से दण्ड पाने के हकदार है, ठीक वैसे जैसे बलिदान के पशु को इस्राएल के लोगों के पापों के लिए होमबलि की वेदी पर जलाया जाता था। इसलिए हमें परमेश्वर के सामने अंगीकार करना चाहिए की हम कितने पापी है और केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा हम हमारे पाप और दण्ड से बचे है।
जब हम पीतल से मढ़े होमबलि की वेदी से उठती आग और धुएँ को देखते है, तब हम परमेश्वर की दृष्टि में देख सकते है की हम खुद अपने पापों के लिए नरक की आग में बंधे हुए पापी है। आप में से प्रत्येक व्यक्ति को यह वास्तविकता को समझना चाहिए। केवल तभी आप यीशु मसीह के बपतिस्मा और उसके लहू बहाने पर विश्वास करने के द्वारा अपने पाप और पाप के दण्ड से छूटकारा पा सकते है। यीशु मसीह आपको आपके पापों से उद्धार देता है, लेकिन आप तब तक इस उद्धार को सच्चाई और उत्साह पूर्वक नहीं ढूंढ सकते जब तक आप परमेश्वर के सामने यह अंगीकार नहीं करते की आप सम्पूर्ण दुष्ट है और अपने पापों के लिए दण्ड पाने योग्य है। और जब आप अपने पूरे हृदय से इस उद्धार पर विश्वास करते है केवल तभी आप अपने उद्धार को पा सकते है, अपने सारे पाप और उसके दण्ड से स्वतंत्र हो सकते है, और परमेश्वर के प्रेम को स्वीकार कर सकते है। लेकिन जिस तरह दर्शाया गया है, वैसे आप उद्धार के सत्य पर विश्वास करे उसके पहले आपको यह समझना चाहिए की आपकी सच्ची प्रामाणिकता परमेश्वर के सामने आपके पापी स्वभाव और निर्बलताओं को अंगीकार करता है। जो व्यक्ति अपने पापी स्वभाव का अंगीकार करता है केवल वही व्यक्ति वास्तव में परमेश्वर की पवित्रता और उसके न्याय को पहचान सकता है। दुसरे शब्दों में, आप यीशु के बपतिस्मा और लहू पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी केवल तभी प्राप्त कर सकते है जब आप पहले यह अंगीकार करते है की परमेश्वर पूर्ण रूप से न्यायी, प्रामाणिक, और सच्चा है, और आप परमेश्वर की दृष्टि में पूर्ण रूप से अन्यायी, गंदे, और दुष्ट है। 
उसके बदले यदि आप फरीसी की तरह पाखंडी है जो खुद को परमेश्वर के सामने धर्मी मानते थे, तो फिर आपको यहाँ यह समझने की जरुरत है की आप बड़ी मुसीबत में है। परमेश्वर की दया प्राप्त करने के बजाए आप परमेश्वर के द्वारा तिरस्कृत होंगे। इसके विपरीत, यदि आप चुंगी लेनेवाले व्यक्ति के जैसे है तो फिर आप अंगीकार कर सकते है की आप वह पापी है जो अपने पापों की वजह से नरक के दण्ड से बंधा हुआ है, और इस नम्र स्वीकार के बदले में आप परमेश्वर की दया प्राप्त कर सकते है। वास्तव में, जो लोग चुंगी लेनेवाले की तरह नम्र है वे सारे लोगों के पाप परमेश्वर ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा मिटा दिए है और अपने एकलौते बेटे यीशु मसीह को भेजने के द्वारा उन्हें बचाया है। 
यद्यपि इस जगत में अनगिनत लोग है, जिन्हें मुख्य दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: वे जिन्होंने पाप की माफ़ी प्राप्त की है और वे जिन्होंने अभी तक प्राप्त नहीं की है। पहले प्रकार के लोग वे है जो सम्पूर्ण रीति से अपनी दुष्टता और नरक में जाने की नियति का अंगीकार करते है, और परिणाम स्वरुप वे परमेश्वर की दया प्राप्त करने की इच्छा रखते है। ऐसे लोगों ने यीशु मसीह के उद्धार पर विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी को प्राप्त किया है। वे परमेश्वर को सत्यता से स्वीकार करते है और उसकी पवित्रता, न्याय, और विश्वासयोग्यता पर विश्वास करते है। इसके विपरीत, दुसरे प्रकार के लोग न केवल अपने पाप की माफ़ी को प्राप्त करने से इनकार करते है लेकिन वे परमेश्वर के खिलाफ भी खड़े होते है, क्योंकि वे न तो विश्वास करते है की यीशु मसीह उनके उद्धारकर्ता है और न ही ये अंगीकार करत है की वे खुद पापी है। आपको विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा आपके सारे पापों को साफ़ किया है। केवल वे लोग अपने उद्धार तक पहुँच सकते है जिनकें पास ऐसा दृढ विश्वास है। 
पीतल से मढ़ी होमबलि की वेदी हमें दिखाती है की भले ही हम हमारे पापों के लिए परमेश्वर के द्वारा नरक में जाने के लिए दण्डित है, फिर भी हमने अपने प्रभु के बपतिस्मा और उसके क्रूस पर चढ़ाए जाने पर विश्वास करने के द्वारा हमारे पापों को मिटा दिया है। लेकिन आप यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करने का दावा करे और अपने अपने विश्वास का अंगीकार करे उसके पहले, आपको यह अंगीकार करना चाहिए की अप अपने द्वारा किए गए अनगिनत पापों की वजह से परमेश्वर के द्वारा दण्ड के योग्य है, ठीक वैसे जैसे बलिपशु पीतल से मढ़ी होमबलि की वेदी पर जलाया जाता था। यदि आप पहले अपने पापी स्वभाव का अंगीकार करते है केवल तभी आप यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू को अपने उद्धार के रूप में समझ सकते है और विश्वास कर सकते है, और केवल तभी आप परमेश्वर की प्रजा बन सकते है।
 

केवल यीशु के लहू पर विश्वास काफी नहीं है
 
आप में से कुछ लोग सोचते होंगे, “क्यों रेव. जोंग बार बार यह कह रहे है की मुझे अपने पापी स्वभाव का अंगीकार करना चाहिए, जब की मैं सच में यीशु पर विश्वास करता हूँ? यह सही है की मेरे अन्दर थोड़े दोष है लेकिन मैं इतना पापी नहीं हूँ की मुझे मेरे पापों के बदले परमेश्वर से दण्ड प्राप्त कारण पड़े। मुझे नहीं लगता की मेरे प्रत्येक विचार, प्रत्येक उद्देश्य, और प्रत्येक कार्य इतने पापी है की मुझे दण्ड मिले।” यदि आप अभी ऐसा सोच रहे है तो फिर आपको समझना चाहिए की फरीसी की तरह बहुत बड़ी गलती कर रहे है। आप खुद को इसतरह का उदार आंकलन देने के द्वारा बहुत बड़ी गलती कर रहे है। 
बाइबल स्पष्ट रूप से दर्शाती है की पाप की मजदूरी मृत्यु है। परमेश्वर की दृष्टि में प्रत्येक पाप एक समान है, भले ही वह बड़ा हो या छोटा हो। परमेश्वर की दृष्टि में यदि किसी व्यक्ति के अन्दर पाप है, भले ही फिर वह छोटे से छोटा क्यों न हो, वह इस पाप की वजह से दण्ड पाएगा और नरक में डाला जाएगा। आपका पाप कितना बड़ा या छोटा है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आप पवित्र परमेश्वर की दृष्टि में दुसरे पापियों की तरह ही है। 
ऐसा क्यों है? क्योंकि परमेश्वर खुद पवित्र है, और इसलिए आप अपने पाप के बारे में क्या सोचते है उसकी परवाह किए बिना वह किसी भी पाप को बर्दाश्त नहीं कर सकता। क्योंकि परमेश्वर बिना किसी भेद के प्रत्येक पाप का न्याय करता है। 
जब हम प्रामाणिकता से परमेश्वर के सामने हमारे जीवनों को प्रगट करते है, तब कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता की उसने केवल थोड़े ही पाप किए है। यदि आप कहते है की आपने केवल थोड़े पाप किए है, तो हो सकता है की आप संसार के मापदंड के मुताबिक़ खुद को धार्मिक व्यक्ति बता रहे है। लेकिन यह आप केवल इसलिए कह रहे है क्योंकि परमेश्वर के न्याय और दण्ड के विषय में आपका पूर्वग्रह बिलकुल गलत है, जैसे की आपको बिलकुल अन्दाजा नहीं है की परमेश्वर कितने सख्त है। दुसरे शब्दों में, आप परमेश्वर के मापदंड की बजाए खुद के मापदंड से खुद का आकलन कर रहे है, और इसलिए आप गंभीर गलती कर रहे है। इसलिए आपको फिर से एक बार परमेश्वर की व्यवस्था के सामने खुद को जाँचना चाहिए, और खुद से पूछना चाहिए, “मैं परमेश्वर की दृष्टि में कैसा हूँ? जब परमेश्वर मेरे सामने देखते है तब क्या मैं उस व्यक्ति के समान लगता हूँ जो दण्ड के योग्य है? क्या मैंने अनगिनत पाप नहीं किए है जो मुझे हर समय नरक में भेजेगा?” इस तरह, आपको परमेश्वर के सामने खुद की जाँच करनी चाहिए और स्पष्ट रूप से यह समझना चाहिए की आप खुद पापी है जो अपने पापों के कारण नरक की आग में डाले जाने के लिए नियोजित है।
आपके लिए यह समझना बहुत ही आवश्यक है की जो कुछ भी जो विश्वास से नहीं किया जाता वह परमेश्वर के सामने पाप है (रोमियों १४:२३), आप खुद ऐसे पाप निरंतर करते है, और इसलिए आप इन पापों के लिए दण्ड को पाएंगे। केवल इसके बाद ही आप उद्धार के सत्य को समझ सकते है और यह समझ सकते है की प्रभु ने आप जैसे दुष्ट पापी को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा बचाया है, और अभी इसी समय आप पापों की माफ़ी को प्राप्त कर सकते है। 
जैसा की हम परमेश्वर के वचन की ओर देखते है जो मिलापवाले तम्बू का विस्तार पूर्वक वर्णन करते है, तब हम निम्नलिखित बात का अंगीकार करते है: “प्रभु, वास्तव में हम सब अपने पापों की वजह से दण्ड के लिए नियोजित है, क्योंकि हम हर समय पाप करते है। लेकिन फिर भी, आपने अपने बपतिस्मा और अपने लहू को बहाने के द्वारा हमें हमारे सारे पापों से और दण्ड से सम्पूर्ण तरीके से छुडाया है। आपके पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने क द्वारा ही हमने हमारे सारे पाप और दण्ड से उद्धार पाया है। वास्तव में हम सब नरक में डाले जाने के लिए नियोजित थे। लेकिन आपका धन्यवाद, हम आपके द्वारा स्थापित बलिदान की पध्धति के द्वारा हमारे सारे पापों से बचाए गए है। हम विश्वास करते है की यह उद्धार का उपहार है जो आपने हमें दिया है। इस अद्भुत अनुग्रह के सामने हम केवल यही कर सकते है की हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करे और हमारा सारा धन्यवाद परमेश्वर को दे।” 
इस संसार में अभी भी अनगिनत ऐसे लोग है जो अभी तक मसीह की धार्मिकता के पास नहीं आ पाए। बहुत सारे लोग अभी भी उद्धार के सत्य से अनजान है, और यह नहीं समझते की परमेश्वर ने प्रत्येक पापी को नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा जगत के पापों से बचाया है। इन लोगों को ये नहीं पता है की वे कितने दुष्ट है, और वे खुद अपने पापों की वजह से दण्ड के लिए नियोजित है। यद्यपि उन्होंने हर समय अनगिनत पाप किए है और वे अपने पापों की वजह से दण्ड को पाएंगे, फिर भी वे यह नहीं समझते की वे खुद दुष्ट पापी है, और वे खुद को धोख़ा देते है। इसके अतिरिक्त, वे गलती से ऐसा सोचते है की वास्तव में वे परमेश्वर के सामने अच्छे कार्य कर रहे है, और वे अपनी धार्मिकता दिखाने के लिए उतावले है। जब वे परमेश्वर के पास पहुँचते है, तब वे परमेश्वर की धार्मिकता के बदले खुद की धार्मिकता को दिखाने के लिए जिजकते नहीं है। खुद के पाखंडी गर्व में, वे सोचते है की उनके अन्दर पाप होने के बावजूद भी वे नरक में नहीं जाएंगे। उन्होंने पूर्ण रूप से यह स्वीकार कर लिया है की वे कभी भी नरक में नहीं जाएंगे, वे खुद के बारे में सोचते है की उन्होंने थोड़े से ही पाप किए है इसलिए उन्हें केवल इन पापों के लिए पाप की माफ़ी प्राप्त करने की आवश्यकता है। 
वास्तव में इस संसार में ऐसे बहुत सारे मसीही है जो सोचते है की यद्यपि वे यीशु पर विश्वास करते है, फिर भी उनके अन्दर थोड़े पाप रह जाते है, और इन पापों को केवल पश्चाताप की प्रार्थना करने से ही साफ़ किए जा सकते है; और वे किसी भी तरह पवित्र हो जाएंगे; और अन्त में वे सभी स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे। बहुत सारे मसीहियों को निश्चितता है की भले ही वे पापी बने रहे, फिर भी परमेश्वर उनका न्याय नहीं करेगा क्योंकि वे यीशु पर विश्वास करते है। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता की कितने लोग इस तरह का अंगीकार करते है, वे सारे लोग नरक की जलती हुई आग के लिए नियोजित है। यदि आप सोचते है की मिलापवाले तम्बू के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए उद्धार के रहस्य को जाने बिना ही आप नरक में जाने से बच जाएंगे, या फिर आप यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास किए बिना केवल यह विश्वास करते है की यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया, तो आपका विश्वास दोषपूर्ण और अपूर्ण ही। इस तरह, यदि आप किसी भी तरह यीशु मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते हुए सोचते है की पापी होने के बावजूद भी आप नरक में नहीं जाएंगे, तो फिर वास्तव में आप परमेश्वर की पवित्रता को चुनौती दे रहे है। नरक खासतौर पर ऐसे अभिमानी लोगों के लिए बनाई गई है जो यह विश्वास नहीं करते की वे परमेश्वर के न्याय का सामना करेंगे।
यह ऐसी दुःखद घटना है की बहुत सारे पापी मूर्ख बने हुए है की वे यह भी नहीं समझते की वे सीधे नरक की ओर आगे बढ़ रहे है। लेकिन जिस प्रकार बाइबल कहती है, “इसलिए की सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है” (रोमियों ३:२३), इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नरक में डालना चाहिए क्योंकि सब ने पाप किया है। परमेश्वर की महिमा ओर कुछ नहीं लेकिन खुद यीशु मसीह है, जो पानी और आत्मा से आया था। यद्यपि अनगिनत लोग यीशु पर विश्वास करने का दावा करते है, फिर भी उनमें से ज्यादातर अभी भी बिना उद्धार पाए है क्योंकि वास्तव में वे लोग यह नहीं समझते है की यीशु पानी, लहू और आत्मा से आया था। यदि अप न तो यीशु मसीह को जानते है और ना ही विश्वास करते है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा आया तो फिर आप अभी अभी आपके पापों से साफ़ नहीं हुए, और इसलिए आप परमेश्वर के वौभावशाली घर में प्रवेश नहीं कर सकते। और यदि आप परमेश्वर के घर में प्रवेश नहीं कर सकते, तो फिर इसका मतलब यह है की आप परमेश्वर के राज्य में हिस्सा लेने से बहुत दूर है, और अन्त में आपको नरक में डाल दिया जाएगा।
इसलिए, यदि आप यीशु मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करनेवाले व्यक्ति है या नहीं, यदि आप वास्तव में नया जन्म पाए हुए व्यक्ति नहीं है, तो फिर आपको यह अंगीकार करना चाहिए की आप अपने पापों के कारण नरक में बंधे हुए है और यीशु मसीह पर योग्य रीति से विश्वास करना चाहिए। परमेश्वर की व्यवस्था स्पष्टता से यह निर्देश कराती है की पाप की मजदूरी मृत्यु है, और आपको इस दैवीय व्यवस्था का स्वीकार करना चाहिए और किसी भी तरह के विरोध के बगैर इस पर विश्वास करना चाहिए। यदि आप इस बात का स्वीकार करते है की आप अपने पापों के कारण सीधे नरक की ओर आगे बढ़ रहे है केवल तभी आप परमेश्वर के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास कर सकते है। पाप की माफ़ी परमेश्वर का उद्धार का उपहार है, और यह उपहार केवल उन लोगों को दिया गया है जो यीशु के बपतिस्मा, क्रोस पर उसकी मृत्यु, और उसके पुनरुत्थान पर विश्वास करते है। 
हमारे पापों से हमारा उद्धार और छूटकारा हमारे खुद के द्वारा नहीं हुआ है, लेकिन यह हमारे लिए परमेश्वर का उपहार है। हममें से कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छासे इस पृथ्वी पर पैदा नहीं हुआ है, लेकिन यह परमेश्वर है जो हमें अपनी संतान बनाने के लिए इस पृथ्वी पर जन्म लेने की अनुमति देता है। यह जानने के बाद की परमेश्वर हमें केवल तभी उद्धार देता है जब हम यीशु के बपतिस्मा, क्रूस पर उसकी मृत्यु, और उसके पुनरुत्थान पर विश्वास करे, इसलिए हम में से प्रत्येक व्यक्ति को इस सत्य पर विश्वास करना चाहिए।
परमेश्वर की स्थापित व्यवस्था होने के द्वारा जो घोषित करती है की पाप की मजदूरी मृत्यु है, परमेश्वर ने हमें हमारे प्रभु यीशु मसीह में हमें अनन्त जीवन देनी की योजना बनाई थी। परमेश्वर ने बबूल की लकड़ी से होमबलि की वेदी बनाने का आदेश दिया, उसे पीतल से मढा गया, और उस पर आग जलाई गई। यह निर्देश देता है की पाप की मजदूरी मृत्यु है, और प्रत्येक पाप का हमेशा के लिए न्याय होगा। ऐसे परमेश्वर के द्वारा स्थापित व्यवस्था को हमारे द्वारा न तो तोड़ा जा सकता है और न ही बदला जा सकता है। इसी लिए हमें यह अंगीकार करना चाहिए की हम खुद निसहाय पापी है और विश्वास से उद्धार के सत्य को हमारे हृदय में स्वीकार करना चाहिए। परमेश्वर ने जिस व्यवस्था की स्थापना और परिपूर्णता की है उस प्रत्येक व्यवस्था को स्वीकार करना और विश्वास करना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है। 
यदि आपके आप तम्बू के बारे में सही समझ और सच्चा विश्वास है, तो फिर परमेश्वर न केवल आपको आपके सारे पाप और इन पापों के दण्ड से बचाएगा, लेकिन वह आप के ऊपर अपनी सारी आशीष भी उंडेल देगा। हालाँकि, यदि आप अपने पाप को गंभीरता से लेने के बारे में नकार करते है, और सोचते है की आपने शायद ही कोई पाप किया है और आपने कभी भी गंभीर पाप नहीं किया है, या फिर सोचते है की आपने जो थोड़े पाप किए है वे आपके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के सामने कुछ भी नहीं है, तो फिर आपकी आत्मा परमेश्वर के क्रोध की हकदार है। 
यीशु मसीह खुद परमेश्वर है, और यदि आप मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करे और प्रभु के द्वारा परिपूर्ण की गई परमेश्वर की धार्मिकता पर्व भरोषा करे तो आप अपने सारे पापों से स्वतंत्र हो सकते है; और पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा एक बार अपने सारे पापों से स्वतंत्र होने के बाद, आप निश्चित ही हमेशा के लिए परमेश्वर में निवास कर सकते है। 
मिलापवाले तम्बू की बलिदान की पध्धति में छिपे उद्धार के सत्य के द्वारा हमें हमारे सारे पाप और मृत्यु से बचाने के लिए मैं अपना सारा धन्यवाद यीशु मसीह को देता हूँ।