उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-25] (निर्गमन ३०:१-१०) धूप वेदी वो स्थान था जहाँ परमेश्वर अपना अनुग्रह प्रदान करता था 

(निर्गमन ३०:१-१०)
“फिर धूप जलाने के लिये बबूल की लकड़ी की वेदी बनाना। उसकी लम्बाई एक हाथ और चौड़ाई एक हाथ की हो, वह चौकोर हो, और उसकी ऊँचाई दो हाथ की हो, और उसके सींग उसी टुकड़े से बनाए जाएँ। और वेदी के ऊपरवाले पल्‍ले और चारों ओर के बाजुओं और सींगों को चोखे सोने से मढ़ना, और इसके चारों ओर सोने की एक बाड़ बनाना। और इसकी बाड़ के नीचे इसके आमने-सामने के दोनों पल्‍लों पर सोने के दो दो कड़े बनाकर इसके दोनों ओर लगाना, वे इसके उठाने के डण्डों के खानों का काम देंगे। डण्डों को बबूल की लकड़ी के बनाकर उनको सोने से मढ़ना। और तू उसको उस परदे के आगे रखना जो साक्षीपत्र के सन्दूक के सामने है, अर्थात् प्रायश्‍चित्त वाले ढकने के आगे जो साक्षीपत्र के ऊपर है, वहीं मैं तुझ से मिला करूँगा। और उसी वेदी पर हारून सुगन्धित धूप जलाया करे; प्रतिदिन भोर को जब वह दीपक को ठीक करे तब वह धूप जलाए, और गोधूलि के समय जब हारून दीपकों को जलाए तब धूप जलाया करे, यह धूप यहोवा के सामने तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में नित्य जलाया जाए। उस वेदी पर तुम किसी अन्य प्रकार का धूप न जलाना, और न उस पर होमबलि और न अन्नबलि चढ़ाना; और न उस पर अर्घ देना। हारून वर्ष में एक बार इसके सींगों पर प्रायश्‍चित्त करे; और तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में वर्ष में एक बार प्रायश्‍चित्त के पापबलि के लहू से इस पर प्रायश्‍चित्त किया जाए; यह यहोवा के लिये परमपवित्र है।”
 

यदि हम पवित्र स्थान यानी की परमेश्वर के घर के अन्दर कदम रखते तो सबसे पहले हम दीवट, भेंट की रोटी की मेज, और धूप वेदी को देखते। धूप वेदी को परमपवित्र स्थान के प्रवेश द्वार के सामने रखा गया था, जहाँ प्रायश्चित का ढकना था, दीवट और भेंट की रोटी की मेज के पास। इस धूप वेदी की लम्बाई और चौड़ाई दोनों एक हाथ थी, जब की उसकी ऊँचाई दो हाथ थी। बाइबल के अन्दर, एक हाथ का मतलब तक़रीबन आज के समय के ४५-४० सेंटीमीटर। इसलिए धूप वेदी कुछ हद तक छोटा समकोणीय थी, जिसका नाप तक़रीबन ५० सेंटीमीटर लंबा और चौड़ा और उंचाई १०० सेंटीमीटर थी। और होमबलि की वेदी की तरह, धूप वेदी के चारों कौनो पर सींग लगे हुए थे। बबूल की लकड़ी से बनी धूप वेदी पूरी तरह से सोने से मढ़ी हुई थी। 
 

पवित्र स्थान के अन्दर जो धूप वेदी है उसके चार सींग है
 
जब महायाजक साल में एक बार प्रायश्चित का बलिदान अर्पण करता था, तब उसे बलिदान के पशु जिसने इस्राएल के लोगों के साल भर के पापों को सहन किया था उसके लहू को मिलापवाले तम्बू के आँगन में रखे होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कना पड़ता था। इसी तरह, महायाजक को इस लहू को धूप वेदी के सींगो पर भी छिड़कना पड़ता था। जैसे यह लहू परमेश्वर को अर्पण किया गया था, इसलिए वह इस्राएल के लोगों के पाप की समस्या को हल करता था जो उन्हें परमेश्वर के पास जाने से रोकते थे। हम में से प्रत्येक व्यक्ति ने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पाई है, और नए नियम के वर्त्तमान युग में, हमारा यह विश्वास सारी बाधाओं को दूर करता है जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में प्रार्थना करने के लिए आते है। यहाँ तक की इस संसार में जीवन जीते हुए धर्मी व्यक्ति भी पाप करता है। हालाँकि, क्योंकि हम यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू के बलिदान पर पुराने नियम की बलिदान की पध्धति के प्रतिबिम्ब के रूप में विश्वास करते है, इसलिए हम अभी भी परमेश्वर के सामने आ सकते है और निडरता पूर्वक प्रार्थना कर सकते है। 
यहाँ तक की धर्मी व्यक्ति भी इस दुनिया में किए हुए अपने पापों की वजह से परमेश्वर की उपस्थिति में आपने से संचोक का अनिभव कर सकता है, लेकिन आज के समय में, वे पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा निडरता से परमेश्वर के पास आ सकते है। जैसे की हम यीशु मसीह के पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है, इसलिए भले ही हमारी देह और मन अभी भी कमज़ोर है लेकिन फिर भी हम परमेश्वर के पास आ सकते है। वह इसलिए क्योंकि हम पहले ही पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे विश्वास के द्वारा धर्मी बने है, और प्रभु ने पहले ही तम्बू के द्वार में प्रगट हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के सत्य के द्वारा हमें हमारे सारे अपराधों से एक ही बार में हमेशा के लिए छूटकारा दिया है। इसलिए हमें हमेशा पानी और आत्मा के सुसमाचार पर मनन करना चाहिए। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिए अपने बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए अपने लहू के द्वारा एक ही बार में हमेशा के लिए हमारे उद्धार को परिपूर्ण किया है, और जो लोग इस उद्धार पर विश्वास करते है और जो लोग नहीं करते उनके विश्वास के बिच मूल अन्तर है। धर्मी जन पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता है। इसी लिए वे किसी भी संकिच के बिना परमेश्वर से प्रार्थना करते है, क्योंकि वे विश्वास करते है की यीशु ने अपने बपतिस्मा से एक ही बार में हमेशा के लिए उनके पापों को ले लिया है और क्रूस पर उनके लिए अपना लहू बहाया है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को विश्वास करना चाहिए की यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा उनके सारे पापों को ले लिया है, और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा उसने उन पापों का दण्ड सहा है। केवल तभी कोई व्यक्ति याजक बन सकता है और परमेश्वर के सामने अपने और दूसरों के लिए प्रार्थना कर सकता है। परमेश्वर ने हमें इस जगत के सारे पापों से बचाया है यह विश्वास करना ही सच्चा मसीही विश्वास है, और इस विश्वास का आधार है पानी और आत्मा का सुसमाचार।
पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा, हम सब लोग तम्बू के द्वार के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए उद्धार के सत्य को ढूंढ सकते है। और इस सुसमाचार के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा हम सब परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते है। इअलिए मैं आपको विश्वास करने के लिए कहता हूँ की यीशु मसीह की धार्मिकता आपका उद्धार है, की उसने आपके सारे पापों को उठाया, और आपके सारे पापों के लिए उसने क्रूस पर दण्ड सहा। फिर आप अपने सारे पापों से स्वतंत्र हो जाएंगे। केवल परमेश्वर की वाचा के सुसमाचार पर यानी की पानी और आत्मा के सुसमाचार के वचन पर विश्वास करने के द्वारा ही आप पापों की माफ़ी प्राप्त कर सकते है, धर्मी संत बन सकते है, और परमेश्वर से सच्चा विश्वास होने की स्वीकृति प्राप्त कर सकते है। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा जब आप एक बार अपने उद्धार तक पहुँच जाते है, तब सबसे पहले आपको परमेश्वर के उद्धार के कार्य के लिए उससे प्रार्थना करनी है, अर्थात्, पूरी दुनिया में पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रसार। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करनेवाले धर्मी विश्वासी इस तरह परमेश्वर से प्रार्थना करते है ताकि वे परमेश्वर की कलीसिया के द्वारा इस दुनिया में उजियाला फैलाए, जो परमेश्वर के पवित्र स्थान की दीवट है। परमेश्वर की कलीसिया की सेवकाई को साथ देने के लिए और पूरी दुनिया में सुसमाचार का प्रसार करने के लिए विश्वास हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। परमेश्वर के सेवक के द्वारा प्रचार किए गए बहुमूल्य वचन को सुनने और विश्वास करने के द्वारा दुनिया के सारे लोग पापों की माफ़ी प्राप्त कर सकते है और विश्वास में बढ़ सकते है।
यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में आपका विशवास पानी और आत्मा के सुसमाचार पर आधारित होना चाहिए। और अपने सारे पापों से उद्धार पाए हुए धर्मी संत की तरह, आपको धूप वेदी के पास आना चाहिए और पवित्र स्थान में प्रायश्चित के ढकने के सामने खड़ा रहना चाहिए। यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? यह इसलिए क्योंकि आपको निरंतर परमेश्वर के अनुग्रह की जरुरत है। धूप वेदी वो जगह है जहाँ हम परमेश्वर को प्रार्थना अर्पण करते है, क्योंकि यहाँ धूप संतों की प्रार्थना को दर्शाता है (प्रकाशितवाक्य ५:८)। जब भी हम धूप वेदी के पास आते है और परमेश्वर को प्रार्थना करते है तब हम परमेश्वर के अनुग्रह को पहन लेते है। पवित्र स्थान की धूप वेदी हमें दिखाती है की विश्वास से परमेश्वर को प्रार्थना करना परमेश्वर के अनुग्रह को पाने का रास्ता है। इसी लिए हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करनेवाले विश्वासी निरंतर धूप वेदी के पास आते है और विश्वास से परमेश्वर को प्रार्थना करते है, ताकि हम बार बार परमेश्वर के अनुग्रह को पहन सके।
 

धूप वेदी वो जगह है जहाँ हम परमेश्वर से मदद माँगते है
 
यद्यपि हमने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी पाई है, फिर भी हमें हमारे बाकि के जीवन के लिए परमेश्वर की मदद की जरुरत है। क्योंकि हमारे लिए परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़ने के लिए और इस दुनिया के प्रकाश के रूप में फल लाने के लिए परमेश्वर का अनुग्रह हमेशा अनिवार्य है। इसलिए हमारे लिए परमेश्वर को प्रार्थना करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, और उससे कहे ही, “प्रभु, मेरी मदद करे। मुझे विश्वास दीजिए। मुझे देह और आत्मा दोनों में मजबूत बानाइए। मेरे विश्वास को मजबूत करी ताकि वे कभी भी डगमगाए नहीं। इस संसार का अनुसरण करनेवाली मेरी सारी इच्छाओं को निकल दीजिए। मेरी सारी दुष्ट इच्छाओं को दूर करे।” परमेश्वर चाहते है की हम धर्मी लोग धूप वेदी के पास आए, उसके सामने घुटने टिकाए, और इस तरह उससे प्रार्थना करे ताकि हम सारी चीजो में उसके अनुग्रह को पा सके और देह और आत्मा दोनों में उसके अनुग्रह को प्राप्त कर सके। इसी लिए सारे धर्मी जन के धूप वेदी के पास निरंतर प्रार्थनामय जीवन जीना बहुत जरुरी है। 
यद्यपि हम धर्मी लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पाए है और हमारे सारे पापों से उद्धार पाए है, फिर भी हमारे लिए परमेश्वर को प्रार्थना करके हमारे हरदिन के जीवन में उसके अनुग्रह को प्राप्त करना बहुत जरुरी है। यह इसलिए क्योंकि भले ही हम धर्मी लोगों ने पाप की माफ़ी पाई है, लेकिन फिर भी जब तक हम निरंतर परमेश्वर के अनुग्रह को नहीं प्राप्त करते, तब तक हम जीवन के सकरे मार्ग पर चल नहीं सकते जो प्रभु चाहता है की हम सब अनुसरण करे। जब धर्मी जन परमेश्वर से प्रार्थना करता है तब वे अनुग्रह के ऊपर अनुग्रह प्राप्त करता है। और याक केवल तभी सम्भव है जब हम परमेश्वर की कलीसिया के साथ जुड़े रहे और उसके वचन का पालन करे। अलग तरीके से देखे तो, धर्मी जन तब परमेश्वर के अनुग्रह को पहनता है जब वे परमेश्वर की कलीसिया के साथ एकता में उसके अच्छे कार्य को आगे बढाए। जैसे दर्शाया गया है, महायाजक साल में एक बार बलि पशु के लहू को लेकर धूप वेदी के सींगो पर लगाता था। यह सूचित करता है की जब कभी भी हम धर्मी लोग परमेश्वर के सामने आते है, जब हमें हमारे विश्वास का अंगीकार करना चाहिए और उससे कहना चाहिए, “प्रभु, आप मेरे उद्धारकर्ता है। अप दैवीय महिमा का त्याग करके मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आए; आपने बपतिस्मा लेने के द्वारा मेरे सारे पापों को ले लिया; और आपने मेरी जगह खुद का लहू बहाया और मुझे बचाया।” जब हमारे पास ऐसा मजबूत विश्वास हो की परमेश्वर हमारे खुद के परमेश्वर और उद्धारकर्ता है केवल तभी हम उसके अनुग्रह को प्राप्त कर सकते है। वह वो परमेश्वर है जिसने हमें हमारे सारे पाप और दण्ड से बचाया है। जब हम इस मजबूत विश्वास से परमेश्वर को प्रार्थना करते है जब हम परमेश्वर के अनुग्रह को पहनते है।
 

हम हमारी प्रत्येक प्रार्थना में एक ओर बार हमारे उद्धार की पुष्टि कर सकते है
 
यह हमारी प्रार्थना में है की हम एक बार ओर हमारे विश्वास की पुष्टि कर सकते है की परमेश्वर हमारे खुद का परमेश्वर है। अलग तरीके से देखे तो, हम परमेश्वर के अनुग्रह के सिंहासन के सामने घुटने टिकाने के लिए मजबूर है क्योंकि हमने पूरी तौर से इस बात को स्वीकार किया है की परमेश्वर निश्चित ही हमें आशीष देगा। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारा विश्वास हमें सुनिश्चितता देता है की जब कभी भी हम परमेश्वर से प्रार्थना करे तब वह हमारी सारी प्रार्थनाओं का उत्तर देगा। परमेश्वर धर्मी जन की प्रत्येक प्रार्थनाओं को सुनता है और उन सब को आशीष देता है। इसलिए, जब कभी हम परमेश्वर से प्रार्थना करे, तब हमें निम्नलिखित तरीके से उसके अनुग्रह पर मनन करना चाहिए: “प्रभु, मैं आपकी धार्मिकता पर विश्वास करता हूँ। मैं जानता हूँ की मेरा जीवन कमजोरियों से भरा हुआ है। यद्यपि मैं आपकी इच्छा के मुताबिक जीने की इच्छा रखु, फिर भी मेरे अन्दर बहुत सारी निर्बलाताए है। लेकिन प्रभु, मैं यह भी जानता हूँ की आप मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आए, आपने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा मेरे सारे पापों को ले लिया, मेरी जगह आपने क्रूस पर मृत्यु सही, और इस प्रकार आप मेरे उद्धारकर्ता बने। आप मेरे मसीहा और मेरे उद्धार के परमेश्वर है। इसलिए में अपने पूरे हृदय से विश्वास करता हूँ की आप मुझ पर अपनी आशीष उन्ड़ेलेंगे, क्योंकि आप मेरे प्रभु है।” 
इस तरह, जब कभी भी हम परमेश्वर के अनुग्रह को पाने के लिए प्रार्थना करते है, तब सबसे पहले हमें उसके अनुग्रह पर मनन करना चाहिए और उस पर विश्वास करना चाहिए। फिर हमारे पास परमेश्वर से हमारी सारी जरुरत के लिए मदद माँगने की निडरता आ जाति है, और वह हमसे कहता है, “हाँ, तुम वास्तव में मेरी अपनी संतान हो। तुम्हारा विश्वास अटल है इसलिए मैं वास्तव में तुम्हारा परमेश्वर हूँ और तुम वास्तव में मेरी अपनी प्रजा जो। इसलिए मैं आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर दूंगा और हमेशा तुम्हें आशीष दूंगा। मैं तुम्हें प्रायश्चित के ढकने पर मिला करूंगा। मैं तुम्हारी प्रार्थना से देख सकता हूँ की मुझ पर तुम्हारा विश्वास दृढ है, और तुमने अपना सारा विश्वास मिझ अकेले पर रखा है, और तुम अपने पूरे हृदय से विश्वास करते हों की मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ। इसलिए मैं तुम्हारी सारी प्रार्थनाओं को सुनूंगा ताकि इस जगत के लोग जान पाए की मैं वास्तव में तुम्हारा परमश्वर हूँ।” 
इस तरह, यह तब होगा जब हम प्रभु के उद्धार पर विश्वास करेंगे जिसे परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में दिया है और अपनी आशीषो के द्वारा दिखाया है। हम हमारे सारे पापों से बच गए है यह पूरी कहानी का अन्त नहीं है; उसके विपरीत, यदि हमने वास्तव में हमारे सारे पापों से छूटकारा पाया है, तो हमें विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर की आशीषों की शुरुआत हो गई है। इसलिए परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करने के द्वारा हम हरदिन उसके अनुग्रह को पहनते है। केवल तभी हम धार्मिक जीवन का अनुसरण कर पाएंगे। इसी लिए जब कभी भी हमारे मन में ऐसा कुछ होता है जो हमें चिंता में डालता है तब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते है, कहते है, “प्रभु, कृपया मेरी मदद करे। कृपया अपनी कलीसिया की मदद करे। आपकी कलीसिया को अभी आपके कार्य को आगे बढाने के लिए आपके मदद की बहुत जरुरत है।” यहाँ तक की जब सांसारिक चीजो की बात आती है, तब यदि कोई भी चिंता या प्रार्थना आपके मन में आते है, तब हमें धूप वेदी के पास आना चाहिए और विश्वास से अनुग्रह के सिंहासन के सामने प्रार्थना करनी चाहिए। तब हम देखेंगे की परमेश्वर सारी चीजो के लिए हमें अपने अनुग्रह में ढँक रहे है। 
यहाँ आपको यह याद रखना चाहिए की धूप वेदी वो जगह है जहाँ हम परमेश्वर से अनुग्रह प्राप्त करते है। हम संतो को किसी ओर कारण के लिए नहीं लेकिन परमेश्वर के अनुग्रह को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। दुसरे शब्दों में, हम परमेश्वर की आशीष पाने के लिए उससे प्रार्थना करते है। अब जब हम विश्वास के द्वारा बचाए गए है तो यदि हम अपना बचा हुआ सारा जीवन परमेश्वर के वायदे वचन पर विश्वास करके और उसकी आशीषों को प्राप्त करके जीना चाहते है तो यह हमारे लिए बहुत ही अनिवार्य है की हम परमेश्वर से प्रार्थना करे। इस तरह, धूप वेदी हमारे लिए परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए है।
जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते है तब सबसे बड़ी रुकावट जिसका हम सामना करते है वह है पाप। इस संसार में ऐसा कोई भी नहीं है जो निष्कलंक जीवन जी रहा है। इसलिए, जब हम परमेश्वर के सामने आकर प्रार्थना करने की कोशिश करते है, तब सबसे पहला संकोच का स्त्रोत हमारे पाप है। इसी लिए एक बार ओर उद्धार के सत्य पर मनन करना और हमारे विश्वास को नया करना हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है की प्रभु ने पहले ही हमारे सारे पाप तम्बू के द्वार के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से मिटा दिए है। दुसरे शब्दों में, हमें दृढ़ता से विश्वास करना चाहिए की यीशु मसीह, खुद परमेश्वर, इस पृथ्वी पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में आए, बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को उठाया, और इन सारे पापों के लिए दण्ड सहा; और इसलिए हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता का धन्यवाद करे की हम पहले से ही हमारे सारे पापों से मुक्त हो गए है। जब हमारे पास ऐसा विश्वास होगा केवल तभी हम परमेश्वर से उसका अनुग्रह और आशीष मांग सकते है। केवल तभी हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते है की वह हमें आशीष दे। यह हमें सिख देने के लिए था, प्रभु के उद्धार के कार्य को याद दिलाने के लिए था, की साल में एक बार बलि पशु के लहू को धूप वेदी के सींगो पर छिड़का जाता था। 
 

जो व्यक्ति को अपने सारे पापों की माफ़ी की निश्चितता है केवल वही निडरतापूर्वक परमेश्वर से प्रार्थना कर सकता है
 
जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते है, तब हम बिना संकोच उससे हमारी सारी जरुरत के विषय में मांग सकते है, उसे हमारे पिता या उद्धारकर्ता कह कर बुला सकते है। हम इस तरीके से उसे बुला सकते है क्योंकि परमेश्वर वास्तव में हमारा पिता, हमारा प्रभु, और हमारा उद्धारकर्ता है। दुसरे शब्दों में, हमें परमेश्वर को विविध नामों से बुलाने और उसे प्रार्थना करने के लिए संकोच नहीं करना चाहिए क्योंकि वह न केवल हमारा सृष्टिकर्ता है लेकिन उद्धारकर्ता भी है। 
इसी तरह हम सब को परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए: “प्रभु, मुझे मेरे सारे पापों से बचाने के लिए आपका धन्यवाद। मुझे वास्तव में आपकी आशीष और आपके मदद की जरुरत है। इसलिए प्रभु मेरी मदद करे और मार्ग में मेरे प्रत्येक कदमों को जाँचे। मैंने कुछ चीजे अच्छी तरह से की है, लेकिन मैंने बहुत सारी गलती भी की है, और अभी भी मेर अन्दर कुछ चिंताए है। मैं वह सब आपके हाथों में सोंपता हूँ, प्रभु। मैं चाहता हूँ की आप मेरी मदद करे और मेरे मार्ग में मेरा मार्गदर्शन करे। मुझे खोई हुई आत्माओं के पास लेकर चलिए ताकि में उन्हें आपके सुसमाचार का प्रचार कर पाऊं और आपके लिए बहुत सारे आत्मिक फल लाऊ। उनके हृदय को खोल दे और उनके हृदय की भूमि पर हल चलाइए ताकि मैं सुसमाचार के बिज बो सकूँ। मैं चाहता हूँ की आप अपनी कलीसिया को भी मजबूती से पकड़ के रखे और अपने सेवकों के ऊपर अपनी दृष्टि बनाए रखे। उन सब को आशीष दे ताकि पानी और आत्मा के सुसमाचार को लाभकारी ढंग से प्रचार किया जा सके। होने दे की यह सुसमाचार पूरी दुनिया में फ़ैल जाए। आपके सेवकों को आपकी रक्षा की जरुरत है, और इसलिए मैं चाहता हूँ की आप उन्हें अपनी दृष्टि तले बनाए रखे। प्रभु मुझे आशीष दे, और मेरे परिवार को आशीष दे। मेरे बच्चों को आशीष दे। संतों को भी आशीष दे। मसीह में मेरे सारे साथी भाई और बहनों को आशीष दे। होने दे आपकी आशीष प्रचुर हो, ताकि आपकी कलीसिया के बहार खड़े अविश्वासी भी बचाए जाए।” जब हम इस तरह प्रार्थना करते है और हमारी आशा और सपने परमेश्वर के हाथों में सोंप देते है तब वो निश्चित ही हमारी प्राथना का उत्तर देगा और हमें आशीष देगा। इसी तरह हम प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की प्रचुर आशीष को प्राप्त कर सकते है। और इसी तरह हम हरदिन उसके अनुग्रह को प्राप्त कर सकते है। 
परमेश्वर उन लोगों का परमेश्वर है जो उसकी धार्मिकता पर विश्वास करते है। वो उन लोगों का परमेश्वर है जो दृढ़ता से पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है। इसलिए परमेश्वर कभी भी अपने विश्वासी पर अपना अनुग्रह बरसाने में विफल नहीं होता जो निडरता से अपने दृढ विश्वास के द्वारा अनुग्रह के सिंहासन के पास आते है और उसके अनुग्रह और आशीष को माँगते है, और कहते है, “प्रभु, मैं विश्वास करता हूँ की आप मेरे परमेश्वर है। मैं विश्वास करता हूँ की आप मेरे उद्धारकर्ता है। मेरी मदद करे, प्रभु!”
मेरे साथी विश्वासी, मैं इस बात पर जोर नहीं डाल सकता की हम सब के लिए यह समझना कितना महत्वपूर्ण है की जगत के हमारे पापों से हमारा उद्धार कहानी का अन्त नहीं है, लेकिन हमें बिना रुके परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए। यदि परमेश्वर के द्वारा आपकी प्रार्थना का उत्तर नहीं मिलता या फिर आप यह भी नहीं जानते की प्रार्थना कैसे करनी है, तो फिर आपको क्रमश: अपने विश्वास की जाँच करनी चाहिए और सोचना चाहिए की वास्तव में आपके लिए प्रभु क्या है। प्रभु के साथ आपके संबंध की स्पष्ट समाज बहुत ही महत्वपूर्ण है। दुसरे शब्दों में, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए की आपका विश्वास मजबूत नींव पर है, पूरे हृदय से यह समझना और विश्वास करना चाहिए की प्रभु आकाश और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता है; वह आपको बचाने के लिए मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आया; उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर आपके पापों को ले लिया; उसने आपकी जगह क्रूस पर दण्ड सहा; वह तिन दिनों में फिर से मृत्यु से जीवित हुआ; और वह आज भी आपके जीवित उद्धारकर्ता के रूप में ज़िंदा है। अब आप ने उद्धार पाया है, प्रभु आपका चरवाहा और आप उसकी भेड़ बने है। इसलिए आपको कोई संदेह नहीं होना चाहिए की आप जब कभी भी परमेश्वर से मदद मांगेगे तो वह आपको उत्तर देगा।
 

दिन और रात प्रार्थना करना हमारा कर्तव्य है
 
हम में से जिन्होंने विश्वास से प्रभु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया है और विश्वासयोग्यता से दिन और रात परमेश्वर से प्रार्थना करते है वे इस संसार में अपने पूरे जीवनभर उसके प्रचुर अनुग्रह और आशीष को प्राप्त करेंगे। उसके विपरीत, हम में से जो लोग किसी कारण से प्रार्थना नहीं करते, चाहे भले ही वे आडम्बर से यह सोचते है की उनके बिना मांगे भी परमेश्वर उनकी सारी जरूरते पूरी करेगा, या फिर परमेश्वर के वचन पर उनके विश्वास की कमी है, वे लोग परमेश्वर की आशीष को प्राप्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनकें विश्वास में धूप वेदी की कमी है। यदि आप सोचते है की आपके बिना प्रार्थना किए ही परमेश्वर आपको वह सब कुछ देगा जो आप चाहते है केवल इसलिए की आप विश्वास करते है की वो परमेश्वर है तो आपका विश्वास अनुपयुक्त है। यदि यह सच होता, तो पवित्र स्थान में कोई धूप वेदी नहीं होनी चाहिए थी। क्या आपको लगता है की परमेश्वर ने उचाट में धूप वेदी को बनाया है? नहीं, बिलकुल नहीं! हारून और याजक हर सुबह और हर शाम चार प्रकार के धूप से धूप वेदी को जलाते थे। फिर जैसे जलता हुआ धूप फैलता था वैसे मीठी सुंगध पूरे पवित्र स्थान को भर देती थी। यह वास्तव में अद्भुत सुगंध है जो हमें निडरता से परमेश्वर के सामने आने के लिए योग्य बनाती है। इस धूप में परमेश्वर के सामने हमारी निर्बलताओं को ढँकने का प्रभाव भी था। उदाहरण के तौर पर, महायाजक को साल में एक बार परमपवित्र स्थान में जाने से पहले उसे धूप से भरना पड़ता था, यह सुनिश्चित करना पड़ता था की धूप का बादल प्रायश्चित के ढकने को ढंके जो साक्षी के संदूक के ऊपर था नहीं तो उसकी मौत हो जाती (लैव्यव्यवस्था १६:१२-१३)।
मेरे साथी विश्वासी, जब कभी भी हम परमेश्वर के पास जाते है, तब हमारे अन्दर इस वास्तविकता पर दृढ विश्वास होना चाहिए की हमने पहले ही पाप की माफ़ी प्राप्त कर ली है, परमेश्वर अब हमारा परमेश्वर है, और जब भी हम उससे प्रार्थना करेंगे तब वह हम पर अपना अनुग्रह उन्ड़ेलेगा। जब हम इस प्रकार इस दृढ विश्वास के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में आते है और निडरता से उसके अनुग्रह के सिंहासन के सामने खड़े होते है, तब हम न केवल दण्ड का सामना नहीं करेंगे, लेकिन हम परमेश्वर के अनुग्रह को पहनेंगे। परमेश्वर दया का परमेश्वर है जिसका प्रचुर अनुग्रह हम सब को दिया गया है। 
 

धूप वेदी के साथ जो कड़े लगाए गए थे वे भी सोने से बनाए गए थे
 
परमेश्वर के पवित्र स्थान में धूप वेदी समकोणीय समान्तर बनी हुई थी (छह बाजूवाला एक पोलिहेड्रोन) जिसका नाप तक़रीबन ५० सेंटीमीटर लंबा और १०० सेंटीमीटर चौड़ा और ऊँचा था, और वेदी के दोनों ओर दो सोने की कड़ियाँ भी लगाईं गई थी। फिर इन दोनों कड़ियों में दो डंडे लगाए गए। यह डंडे भी बबूल की लकड़ी से बनाए गए थे और सोने से मढ़े गए थे। यद्यपि धूप वेदी तुलनात्मक रूप से छोटी थी, लेकिन उसे दो लोगों के द्वारा उठाया जाता था। हालाँकि उसकी लम्बाई और चौड़ाई केवल ५० सेंटीमीटर थी और उसकी उंचाई १०० सेंटीमीटर थी इसलिए उसे केवल एक व्यक्ति के द्वारा उठाया जा सकता था, लेकिन तम्बू के बाकी पात्रों की तरह, इसकी अनुमति नहीं थी। यह सूचित करता है की हम धर्मी लोगों को जिस प्रकार यीशु ने कहा है वैसे एकता में प्रार्थना करनी चाहिए, “फिर मैं तुम से कहता हूँ, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिए एक मन होकर उसे माँगें, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है, उनके लिए हो जाएगी” (मत्ती १८:१९)। 
धूप वेदी के वे डंडे भी हमें यह दिखाते है की हम नया जन्म पाए हुए लोगों को हमारी प्रार्थनाओं से परमेश्वर की सेवकाई करनी चाहिए। हमारी विश्वास की प्रार्थना भी हमारे लिए प्रभु की सेवा करने का माध्यम है। अब जब हमने हमारे सारे पापों से नया जन्म पाया है, इसलिए हम विभिन्न तरीके से परमेश्वर और उसकी कलीसिया की सेवा कर सकते है, चाहे फिर वो हमारी प्रार्थना से हो या हमारी स्वैच्छिक सेवा हो। जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करते है, तब हम केवल हमारे लिए ही प्रार्थना नहीं करते, लेकिन हम परमेश्वर के कार्य, उसकी कलीसिया, उसके सदस्य, और ख़ास तौर पर सुसमाचार के प्रसार के लिए प्रार्थना करते है। दुसरे शब्दों में, हमारी प्रार्थना न केवल हमें परमेश्वर के अनुग्रह के सिंहासन के सामने हमें खड़ा होने की अनुमति देता है लेकिन वह हमें परमेश्वर की धार्मिकता की सेवकाई करने के लिए भी अनुमति देती है। एकता में प्रार्थना करने की वजह से हम परमेश्वर के राज्य की सेवा कर सकते है। जब हम हमारे साथी भाई बहनों के लिए, कलीसिया के लिए, खोई हुई आत्माओं के लिए, परमेश्वर के राज्य की बढ़ोतरी के लिए, और परमेश्वर की धार्मिकता की सेवकाई के लिए प्रार्थना करते है तब हम परमेश्वर की सेवा करते है। इसी लिए यह हमारे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है की हम पवित्र स्थान में धूप वेदी के पास परमेश्वर की सेवकाई करते याजकों तात्पर्य को समझे। हमें इस विश्वास के द्वारा परमेश्वर से प्रार्थना करनी ही चाहिए। जिस तरह हम परमेश्वर और उसके लोगों की सेवकाई के लिए वचन का प्रचार करते है, उसी तरह हमें परमेश्वर और उसके लोगों की सेवकाई के लिए उससे प्रार्थना भी करनी चाहिए। यह हम सब का कर्तव्य है की हम हर सम्भव तरीके से परमेश्वर की सेवा करे।
आपके लिए पवित्र मसीही जीवन जीने और परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य है परमेश्वर और उसकी धार्मिकता पर विश्वास करना। यह केवल विश्वास के द्वारा ही है की आप परमेश्वर के वचन का प्रचार करते है, उससे प्रार्थना करते है, पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रसार करते है, और परमेश्वर और उसकी धार्मिकता की सेवा करते है। परमेश्वर की सेवा करने के लिए हम जो कुछ भी करते है वह विश्वास से करना चाहिए। जब तक आप परमेश्वर की इच्छा का स्वीकार नहीं करते तब तक आप पवित्र जीवन नहीं जी सकते। मैं पूरी तौर से इस बात पर जोर नहीं दे पा रहा हूँ की यह कितना महत्वपूर्ण है की हम परमेश्वर की सेवा करने के लिए उससे प्रार्थना करे। जब कभी भी संत अपनी कलीसिया में इकठ्ठा होते है, हमारे भाइयों से लेकर हमारी बहाने और संडे स्कूल के हमारे बच्चे भी, उन्हें सबसे पहले परमेश्वर की सेवा करनी चाहिए। हमें परमेश्वर के वचन की रोटी बाँटने के लिए इकठ्ठा होना चाहिए। और हमें परमेश्वर की धार्मिकता की सेवा भी करनी चाहिए। जब हम नया जन्म पाए हुए लोग एकता से प्रार्थना करते है तब हमारी प्रार्थना मीठी सुगंध के रूप में परमेश्वर के पास ऊपर जाती है, और कहते है, “प्रभु, आपकी कलीसिया को, आपके सेवको को, और दुनियाभर की कलीसिया के आपके संतों को थामे रह और उन्हें आशीष दे। उनकी आत्माओं और हृदयों को आशीष दे, और उन्हें आशीषित विश्वास दे। उन सारी आत्माओं को बचाए जो अभी तक खोई हुई है।” प्रार्थनाओं की इस मीठी सुंगंध का आनद उठाते, परमेश्वर हमें उत्तर देंगे और आशीष देंगे। हम उससे हमारी प्रार्थना में जो कुछ भी माँगते है उसका उत्तर देता है। इसी का मतलब है प्रार्थना से परमेश्वर की सेवा करना, और मैं आप सबको समझता हूँ की आप अपनी प्रार्थनाओं में अपनी जरुरत के बदले परमेश्वर के कार्य को याद रखे। 
जब की सारे संतों के लिए प्रार्थना करने की जरुरत है, इसलिए यदि आप किसी भी तरीके से दुसरे लोगों से ज्यादा समय तक प्रार्थना कर सकते है, भले ही आप निवृत्त हो या बीमार हो, आपको परमेश्वर की कलीसिया, उसके सेवक, और उसके संतों के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यह गृहिणी के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। यह पैसे की तागी की वजह से नहीं है की हम परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते। आप बिना पैसे के परमेश्वर की सेवकाई कर सकते है। अप जितना चाहे उतना अपने विश्वास के द्वारा पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवकाई कर सकते थे। जिस प्रकार धूप वेदी को दो व्यक्तिओं के द्वारा अपने कंधे पर उठाने के लिए उसके दोनों तरफ कड़ियों में दो डंडे लगाए गए थे, इसलिए जो लोग गरीब है वे यदि परमेश्वर की कलिस्या के साथ जुड़ते है केवल तभी अपनी विश्वास की प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की सेवा कर सकते है। उसी प्रकार जो लोग धनवान है वे अपनी भौतिक चीजों से परमेश्वर की सेवा कर सकते है। ये मत कहिए की, “मैं अपनी नौकरी में बहुत व्यस्त हूँ इसलिए परमेश्वर की सेवकाई के लिए समय नहीं निकाल सकता। मेरे पास समय नहीं है।” प्रत्येक धर्मी व्यक्ति अपने विश्वास के द्वारा परमेश्वर और उसकी इच्छा की सेवा कर सकते है, चाहे फिर वो उसकी भेंट, प्रार्थना, या सुसमाचार के प्रचार के द्वारा हो। हम सब प्रभु की इच्छा की सेवकाई करने के लिए पर्याप्त है, यदि हमारे अन्दर ऐसा करने की इच्छा है तो। और यदि हम नया जन्म पाए हुई लोग इच्छा रखे तो परमेश्वर की आशीष भी प्राप्त कर सकते है।
 

परमेश्वर हम सब को जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है उन्हें आशीषित करता है
 
प्रभु हमारा चरवाहा है। प्रभु के साथ हमारा रिश्ता इतना घनिष्ठ है की कोई भी व्यक्ति या कुछ भी हमें उससे अलग नहीं कर सकता।
आइए मत्ती २६:२६-२८ की ओर मुड़े: “जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष माँगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया , और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।”
“यीशु” नाम का मतलब है उद्धारकर्ता या मसीहा, और हम यह घोषित करने के लिए उसे हमारा प्रभु कहते है की वह हमारा परमेश्वर और स्वामी है। हमारा प्रभु यीशु हम सब को छुडाने के लिए इस पृथ्वी पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में आया। परमेश्वर खुद मनुष्य की देह में इस पृथ्वी पर आए। और क्रूस पर मरने से ठीक पहले, हमारे प्रभु ने आख़री भोजन तैयार किया, अपने चेलों को इकठ्ठा किया, और उन्हें रोटी और दाखरस दिए, और उन्हें कहा, “रोटी ले और उसे खाए; यह मेरी देह है। इस कटोरे को ले और उसमे से पाई। यह वाचा का मेरा लहू है, जिसे बहुतेरे लोगों की पापों की माफ़ी के लिए बहाया गया है।” इसका मतलब है की परमेश्वर ने हमारे उद्धारकर्ता के रूप में इस पृथ्वी पर आकर हमें बचाया, और व्यक्तिगत रूप से पानी और आत्मा के द्वारा अपने वायदा किए हुए वचन को परिपूर्ण किया ठीक वैसे जैसे पुराने नियम में भविष्यवाणी की गई थी। इस पृथ्वी पर हमारे उद्धारकर्ता के रूप में आकर, हमारे प्रभु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा इस जगत के सारे पापों को स्वीकार किया। फिर उसने क्रूस पर अपनी देह सोंप दी, और इस प्रकार जगत के सारे व्यक्ति के दण्ड को सहा। और उसने मृत्यु से जीवित होकर हमें नया जीवन दिया है।
धूप वेदी पर छिड़का जानेवाला बलि पशु का लहू यीशु मसीह की शारीरिक मृत्यु को दर्शाता है। उसी प्रवृति से, अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठाने के बाद, यीशु मसीह ने हमारे लिए खुद को क्रूस पर बलिदान किया और अपना लहू बहाया। इस बलिदान को धन्यवाद जिसके द्वारा हमने उद्धार पाया है। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे विश्वास के कारण हम हमारे उद्धार तक पहुँच पाए है। यह किसी अंधे और गलत विश्वास के द्वारा नहीं है की हम हमारे सारे पापों से बचाए गए है, लेकिन यह केवल यीशु, खुद परमेश्वर के हमारे उद्धारकर्ता के रूप में इस पृथ्वी पर आने से, बपतिस्मा लेकर हमारे सारे पाप खुद पर उठाने, और हम सब के लिए अपना कीमती लहू बहाने के द्वारा हुआ है। 
उस प्रकार परमेश्वर ने हमारा उद्धार परिपूर्ण किया है, जो तम्बू के द्वार के परदे के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में निहित है। यहाँ बैंजनी कपड़ा सूचित करता है की राजाओं का राजा मनुष्य बना। यह हमें सिखाता है की यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों का स्वीकार किया और हमारी जगह अपना लहू बहाकर हमारे पापों की कीमत चुकाई। इस प्रकार प्रभु हमारा उद्धारकर्ता बना। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर का विश्वास वो विश्वास है जो हमें प्रभु भोज में हिस्सा लेने के लिए योग्य बनाता है। जब यीशु ने अंतिम भोज के लिए तैयारी की, तब उसने केवल रोटी ही नहीं लेकिन दाखरस को भी तैयार किया; और उसने अपने चेलों को दोनों में से खाने और पिने के लिए कहा। यहाँ रोटी यीशु की देह को दर्शाती है, जो सूचित कराती है की हम पापियों को बचाने के लिए परमेश्वर खुद मनुष्य बना। रोटी यह भी सूचित कराती है की यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा, यीशु ने खुद की देह पर हमारे सारे पापों को ले लिया। दूसरी ओर, दाखरस लहू के जीवन और उद्धार को दर्शाता है जो यीशु ने क्रूस पर हमारी जगह बहाया। 
इसलिए, जब कभी हम पवित्र प्रभु भोज में हिस्सा ले, तब हम सबके लिए यह अनिवार्य है की हम सब के पास यह दृढ विश्वास हो की परमेश्वर खुद हमें बचाने के लिए मनुष्य देह में इस पृथ्वी पर आए, उसने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया, उसने क्रूस पर हमारी जगह दण्ड सहा, और इस प्रकार उसने हमें बचाया और हमारा व्यक्तिगत उद्धारकर्ता बना। दुर्भाग्यवश, हालाँकि, ज्यादातर मसीही सटीक कारण नहीं जानते की क्यों यीशु मसीह ने प्रभु भोज की स्थापना की और उसके दुबारा आगमन तक हमें उसका पालन करने के लिए कहा। आपको अपने विश्वास के जीवन को हलके में नहीं लेना चाहिए। यदि आप खुद अब तक इस बात से सुनिश्चित नहीं है की यीशु आपका उद्धारकर्ता है, तो फिर आपको पवित्र प्रभु भोज में यीशु की रोटी और दाखरस लेने से पहले इसके बारे में लंबा सोचना चाहिए। भावुक होने के बजाए, सावधानी से सोचे और दृढ़ता से अपने आप को पूछे की वास्तव में प्रभु आपका प्रभु है या नहीं। 
परमेश्वर आपका और मेरा परमेश्वर है। उसने आपके और मेरे पूर्वजों को बनाया था। और उसने हमें इस पृथ्वी पर पैदा होने की अनुमति दी है। यह परमेश्वर ओर कोई नहीं लेकिन यीशु है। और यीशु, खुद परमेश्वर, हमारे खुद के उद्धारकर्ता के रूप में इस पृथ्वी पर आया। हमें बचाने के लिए हमारे उद्धारकर्ता के रूप में इस पृथ्वी पर आकर, उसने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया। फिर वह विश्वासयोग्यता से हमारे यह प्रत्येक पापों को क्रूस तक लेकर गया, और क्रूस के दण्ड को सहा जो केवल अपराधी के लिए था, ताकि हम हमारे पापों के लिए दण्ड का सामना न करे। इस तरह प्रभु ने हमें हमारे सारे दण्ड से बचाया। 
यदि आप केवल एक पल के लिए भी पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में सोचे तो आप उद्धार के इस सत्य को आसानी से समझ सकते है। जगत के सारे पापों से बचने का मतलब है पानी और आत्मा के सुसमाचार पर हमारे हृदय में विश्वास करना। मैं विश्वास करता हूँ की प्रभु ने अपने पानी और लहू के द्वारा मुझे मेरे सारे पापों से बचाया है। ऐसा कुछ भी नहीं है जो मैंने खुद मेरे उद्धार के लिए किया हो। जब यीशु इस पृथ्वी पर आया, जब उसने बैतलहम की छोटी चरनी में जन्म लिया, तब मैं वहाँ नहीं था, न ही मैं किसी भी रूप या प्रकार से मौजूद था और ना ही मैंने परमेश्वर से मुझे बचाने के लिए कहा था। लेकिन मेरे उद्देश्य का विचार किए बिना प्रभु को मनुष्य के देह में इस पृथ्वी पर आना पडा, केवल मुझे बचाने के लिए। मैं पूर्ण रूप से विश्वास करता हूँ की मुझे बचाने के लिए यीशु को इस पृथ्वी पर आना पडा, बपतिस्मा लेना पडा, और क्रूस पर अपना लहू बहाना पडा।
परमेश्वर पिता ने जगत से ऐसा प्रेम किया की उसने अपना एकलौता बेटा दे दिता। परमेश्वर खुद प्रत्येक मनुष्यों को बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आया। और उसने वास्तव में आपको और मुझे हमारे सारे पापों से बचाया, और वह आपका और मेरा उद्धारकर्ता बना। हमें हमारे उद्धार तक पहुँच ने के लिए केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने की जरुरत है, जो खुद परमेश्वर है, और हमारे हृदय के अन्दर उद्धार के कार्यों का स्वीकार करना है जो उसने हमारे लिए किए है। जो लोग अपनी खुद की सामर्थ्य से पूरी तरह थक चुके है, जिन्होंने खुद की कोशिशो को छोड़ दिया है, और जो लोग अपने पापों की माफ़ी और उद्धार के लिए परमेश्वर पर भरोषा रखते है केवल ऐसे लोग ही परमेश्वर से अनुग्रह प्राप्त कर सकते है। बहरहाल, यह आपको अपनी सोच में समझ से परे लगता हो, लेकिन वास्तव में खुद परमेश्वर ने हमें छुडाने के लिए हमारे उद्धार को परिपूर्ण किया है। इसलिए परमेश्वर के उद्धार के कार्य पर विश्वास करने के अलावा हमारे पास करने के लिए ओर कुछ नहीं नही। 
 

अपने आपको पूरी रीति से परमेश्वर को सोंप दे
 
यह आपके लिए बहुत ही अनिवार्य है की आप खुद को परमेश्वर को सोंप दे। परमेश्वर ने आपके लिए क्या किया उसके बारे में सोचे। परमेश्वर खुद मनुष्य बना। और परमेश्वर ने यह केवल आपको और मुझे बचाने के लिए किया। उसके अतिरिक्त, यीशु, जो खुद परमेश्वर है, उसने हमारे सारे पापों को लेने और उन्हें मिटाने के लिए बपतिस्मा लिया। यीशु क्रूस पर भी चधाम और क्रूस पर हमारे लिए अपना कीमती लहू भी बहाया। इस प्रकार उसने हमारी जगह दण्ड सहा, केवल हमारे प्रत्येक पाप की कीमत चुकाने के लिए, हमारे डब्ड से हमें छुडाने के लिए, और हमारे लिए न्याय से बचने को सम्भव बनाने के लिए। और फिर वह हमें अनन्त जीवन में वापिस लाने के लिए तिन दिनों में मृत्यु से जीवित हुआ। 
और अब, वह परमेश्वर पिता के सिंहासन के दाहिनी ओर बैठा है और हम सब को देख रहा है। वह देख रहा है की कौन अपना सब कुछ उसके यानी की खुद परमेश्वर और उद्धारकर्ता के हाथों में सोंपने के लिए तैयार है, और कौन पूरे हृदय से उस पर विश्वास करता है। जिन्होंने यीशु को प्राप्त किया है वे वो लोग है जिन्होंने अपना सबकुछ परमेश्वर को सोंप दिया है। वे विश्वास करते है की प्रभु ने उन्हें सम्पूर्ण तरीके से बचाया है। वे जानते है की उन्होंने अपने उद्धार के लिए खुद किछ नहीं किया है। उन्हें विश्वास है की यह केवल परमेश्वर का प्रेम है की उसने उन्हें तम्बू के द्वार में के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए उद्धार के सत्य के द्वारा बचाया है। और ऐसे सारे लोग जिन्होंने अपने आप को सम्पूर्ण रीति से परमेश्वर को सोंप दिया है, और जिन्होंने अपने हृदय में परमेश्वर और उसके वचन का स्वीकार किया है उन्हें परमेश्वर ने अपनी संतान बनने का अधिकार दिया है। 
इसलिए मैं चाहता हूँ की आप सब पवित्र प्रभु भोज में हिस्सा ले उससे पहले उद्धार के इस सत्य के बारे में स्पष्ट समझ प्राप्त करे। यीशु ने जो बपतिस्मा लिया था वह हमारे सारे पापों को उठाने और उनके लिए प्रायश्चित करने के लिए था। यीशु की शारीरिक मृत्यु आपको और मुझे हमारे सारे पापों से बचाने के लिए थी। इस प्रकार हमारे सारे पपोंज को उठाने के बाद, यीशु मृत्यु तक क्रूस पर चढ़ा, हमारी जगह उसने अपना सारा लहू बहाया, और इस प्रकार हमें पाप के न्याय से मुक्त करने और हमें धर्मी बनाने के लिए उसने दण्ड सहा। 
हम सभी को पवित्र स्थान में रहने और प्रार्थना करने के लिए, परमेश्वर ने हमें अपना अनुग्रह देने के लिए धूप वेदी दी है। यह वो जगह है जहाँ हम परमेश्वर से अनुग्रह प्राप्त कर सकते है। इसलिए मैं आप प्रत्येक व्यक्ति को सलाह देता हूँ की आप सम्पूर्ण रीति से खुद को परमेश्वर के हाथों में सोंप दे। 
हाल्लेलूयाह!