उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-26] (निर्गमन २६:१५-३०) मिलापवाले तम्बू के लिए इस्तेमाल हुई चाँदी की कुर्सियों का आत्मिक महत्त्व

(निर्गमन २६:१५-३०)
“फिर निवास को खड़ा करने के लिये बबूल की लकड़ी के तख़्ते बनवाना। एक एक तख़्ते की लम्बाई दस हाथ और चौड़ाई डेढ़ हाथ की हो। एक एक तख़्ते में एक दूसरे से जोड़ी हुई दो दो चूलें हों; निवास के सब तख़्तों को इसी भाँति से बनवाना। निवास के लिये जो तख़्ते तू बनवाएगा उनमें से बीस तख़्ते तो दक्षिण की ओर के लिये हों; और बीसों तख़्तों के नीचे चाँदी की चालीस कुर्सियाँ बनवाना, अर्थात् एक एक तख़्ते के नीचे उसके चूलों के लिये दो दो कुर्सियाँ। निवास की दूसरी ओर, अर्थात् उत्तर की ओर के लिए बीस तख़्ते बनवाना; और उनके लिये चाँदी की चालीस कुर्सियाँ बनवाना, अर्थात् एक एक तख़्ते के नीचे दो दो कुर्सियाँ हों। निवास की पिछली ओर, अर्थात् पश्‍चिम की ओर के लिये छ: तख़्ते बनवाना। और पिछले भाग में निवास के कोनों के लिये दो तख़्ते बनवाना; और ये नीचे से दो दो भाग के हों, और दोनों भाग ऊपर के सिरे तक एक एक कड़े में मिलाये जाएँ; दोनों तख़्तों का यही रूप हो; ये दोनों कोनों के लिये हों। और आठ तख़्ते हों, और उनकी चाँदी की सोलह कुर्सियाँ हों; अर्थात् एक एक तख़्त के नीचे दो दो कुर्सियाँ हों। “फिर बबूल की लकड़ी के बेंड़े बनवाना, अर्थात् निवास के एक ओर के तख़्तों के लिये पाँच, और निवास के दूसरी ओर के तख़्तों के लिये पाँच बेंड़े, और निवास का जो भाग पश्‍चिम की ओर पिछले भाग में होगा, उसके लिये पाँच बेंड़े बनवाना। बीचवाला बेंड़ा जो तख़्तों के मध्य में होगा वह तम्बू के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचे। फिर तख़्तों को सोने से मढ़वाना, और उनके कड़े जो बेंड़ों के घरों का काम देंगे उन्हें भी सोने के बनवाना; और बेड़ों को भी सोने से मढ़वाना। और निवास को इस रीति खड़ा करना जैसा इस पर्वत पर तुझे दिखाया गया है।”
 

तम्बू के पटिए जहाँ परमेश्वर निवास करता था वह सोने से मढ़े हुए थे। तम्बू के प्रत्येक पटिए को सीधे खड़े रखने के लिए, परमेश्वर ने मूसा को दो चाँदी की कुर्सियां बनाने के लिए कहा था। प्रत्येक पटिए के निचे दो चाँदी की कुर्सियां लगाने का आत्मिक मतलब निम्नलिखित है। बाइबल में, सोना विश्वास को दर्शाता है जो कभी भी बदलता नहीं है। इन कुर्सियों को सोने से मढ़े पटिए के निचे लगाईं जाति थी जिसका मतलब है की परमेश्वर ने हमें दो उपहार दिए है जो हमारे उद्धार की निश्चितता देता है। दुसरे शब्दों में, उसका मतलब है की यीशु ने बपतिस्मा लेकर और अपना लहू बहाकर हमारे उद्धार को परिपूर्ण किया। 
चोखे सोने के समान इस विश्वास को प्राप्त करने के लिए जो हमें परमेश्वर के लोग बनने और उसके राज्य में हिस्सा लेने के लिए योग्य बनाते, हमें यीशु के बपतिस्मा और उसके क्रूस के लहू पर विश्वास करना जरुरी है। पानी और आत्मा का सुसमाचार जो परमेश्वर ने हमें हमारे पाप मिटाने के लिए दिया है वह विश्वास का उपहार है जो हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि हम हररोज पाप करते है और नरक में बंधे हुए है, इसलिए हम खुद के प्रयास, ताकत, या इच्छा से हमारे पाप को दूर नहीं कर सकते।
हमारे सारे पाप मिटाने के लिए, हमारे खुद के सामर्थ्य पर भरोषा करने के बजाए हमें केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए, और केवल तभी हम हमारे पापों से बच सकते है। हमारे लिए कृतज्ञता पर विश्वास करना सही है जो प्रभु ने हमें पानी और आत्मा के सत्य के द्वारा उद्धार के उपहार के रूप में दिया है। जब हम सुसमाचार के दो घटकों से बने उद्धार पर विश्वास करते है, और हमारे विश्वास को देखते है, तब परमेश्वर हमें अपनी सम्पूर्ण प्रजा बनाते है। इसलिए, यदि अभी भी आपके हृदय में कोई भी पाप है, तो आपको पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा सम्पूर्ण रीति से उद्धार पाना चाहिए जो परमेश्वर ने हमें बचाने के लिए अपने उपहार के रूप में दिया है।
इस संसार में रहते बहुत सारे लोग परमेश्वर की निज प्रजा बनना चाहते है। परमेश्वर की प्रजा बनने के लिए, सबसे पहले हमें परमेश्वर के वचन से प्रकाशित होना चाहिए और इस रीति से खुद की जाँच करनी चाहिए। फिर, हम देख पाएंगे की हम सब पापी है जिनके पास विरोध करने के लिए कुछ भी नहीं है फिर भले ही हमें हमारे पापों के लिए दण्ड दिया जाए। हम वो लोग है जो हरदिन व्यवस्था के विरुध्ध में पाप करते है। हमारा वास्तविक व्यक्तित्व ऐसा है की हम हमारे जीवन को अनैतिकता और पाप में व्याप्त करते है, और न्याय का इंतज़ार करते है। यदि ऐसा है तो हम कैसे परमेश्वर के लोग बन सकते है? इस प्रकार हम उद्धार के दो उपहार को प्राप्त करने की जरुरत को समझ पाए है जिसे परमेश्वर ने हमें अपनी निज प्रजा बनने के लिए दिया है। 
हमारे लिए, प्रभु उद्धारकर्ता है जिसने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से हमारे पापों को मिटाया है। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिया हुआ बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए हुए उसके लहू ने संपुर्ण रीति से हमें हमारे सारे पापों से बचाया है। यह दो तत्व हमारे उद्धार के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, कोई भी व्यक्ति इस सत्य पर विश्वास किए बिना परमेश्वर की प्रजा नहीं बन सकती।
परमेश्वर ने हमें दिए हुए उद्धार के इस दो उपहार के द्वारा हम वास्तव में उसकी प्रजा बन सकते है। हम परमेश्वर की संतान बने है उसका हमारे अच्छे कार्यो से कोई लेनादेना नहीं है। हमने उद्धार पाया है और हमारे सारे पापों से और दण्ड से छूटकारा पाया है वह केवल यीशु के बपतिस्मा और लहू बहाने के कार्यों के द्वारा सम्भव हुआ है। दुसरे शब्दों में, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हम परमेश्वर की संतान बने है। हमारा विश्वास सो चोखे सोने जैसा है वह इन उपहारों को प्राप्त करने के द्वारा स्थापित हुआ है।
मिलापवाले तम्बू को बनाते समय, परमेश्वर ने प्रत्येक पटिए के निचे दो चाँदी की कुर्सीया लगाई। यह सत्य हमें बताता है की यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आया, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यरदन नदी में बपतिस्मा लिया, और इन पापों को क्रूस तक लेजाने के द्वारा पाप का दण्ड सहा और उस पर मर गया। बपतिस्मा जो यीशु ने लिया था और लहू जो यीशु ने क्रूस पर बहाया था वह पाप की माफ़ी का उपहार है।
आपको और मुझे जो इस युग में जी रहे है उन्हें अपने पापी स्वभाव के बारे में जानना चाहिए। और जो लोग परमेश्वर के सामने खुद को जानते है उन्हें समझना चाहिए की क्योंकि प्रभु वास्तव में इस पृथ्वी पर आया था, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा उनके पापों को ले लिया था, और क्रूस पर मरा था, इसलिए उसने उन्हें उनके पाप और दण्ड से बचाया है। जब हम इस प्रकार उद्धार के उपहार पर विश्वास करते है और हमारे पापों की माफ़ी प्राप्त करते है, तब हम परमेश्वर के सामने उनकी खुद की संतान बनते है। क्योंकि प्रभु ने हमें अपने बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए हुए लहू के द्वारा बचाया है इसलिए हमने हमारे पापों से छूटकारा पाया है; यदि उसने ऐसा नहीं किया होता, तो फिर हम खुद से कभी भी पाप से मुक्त नहीं हो सकते थे। इसलिए, हमें विश्वास करना करना है और अंगीकार करना है की यह १०० प्रतिशत परमेश्वर का अनुग्रह है की आप और मैं परमेश्वर की प्रजा और धर्मी लोग बन पाए है।
मिलापवाले तम्बू की चाँदी की कुर्सियां हमें दिखाती है की हमारे पापों की माफ़ी पूर्ण रूप से परमेश्वर का उपहार है जिसे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा परिपूर्ण किया गया है। क्योंकि परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से हमें उद्धार का उपहार दिया है इसलिए हम विश्वास से पूरी तरह बचाए गए है। जो लोग मन के दिन है केवल वे ही नीला, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त करने के लिए योग्य है। जो लोग अपने आप के लिए दुखी होते है केवल वे लोग ही नरक के लिए नियोजित है, और वे लोग ही परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार के उपहार को प्राप्त कर सकते है। जो लोग नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य पर, पानी और आत्मा के उपहार पर विश्वास करता है जो परमेश्वर पिता ने यीशु मसीह के द्वारा दिया है, वे लोग परमेश्वर की संतान बनने के लिए अपने सारे पापों से उद्धार पा सकते है। जो लोग प्रभु के द्वारा दिए गए उद्धार के उपहार को प्राप्त करते है केवल वे लोग ही परमेश्वर की आशीष का आनन्द उठा सकते है। यह वो योग्यता है जो केवल उन लोगों के द्वारा प्राप्त की जा सकती है जो जानते है की वे नरक से बंधे हुए है और परमेश्वर से उसकी दया की मांग करते है। यही मामला है।
हम हमारे सारे पापों से बच गए है उसका कारण है उद्धार का उपहार जो परमेश्वर ने हमें दिया है। इसी लिए इफिसियों २:८ कहता है, “अनुग्रह से ही तुम्हारा उद्धार हुआ है।” हम परमेश्वर की संतान बने है क्योंकि हमने उद्धार के इस उपहार पर विश्वास किया है। तो फिर हमारे पास घमंड करने के लिए क्या है? घमंड करने की बात तो बहुत दूर रही, हम केवल परमेश्वर की स्तुति कर सकते है, अंगीकार कर सकते है की हमने खुद को नहीं बचाया लेकिन परमेश्वर ने बचाया है।
खुलकर कहू तो, यदि परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से नहीं बचाया होता तो हम कभी भी नहीं बच पाते। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में जो सत्य निहित है वह पानी और आत्मा के सुसमाचार के सामर्थ्य से बना है। यह उद्धार के सत्य को प्रगट करता है की यीशु मसीह इस पृथ्वी पर पैदा हुए, यूहना से यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा मनुष्यजाति के सारे पापों को एक ही बार में हमेशा के लिए खुद पर उठाया (मत्ती ३:१३-१७), क्रूस पर मरा, और मृत्यु से फिर जीवित हुआ। क्योंकि परमेश्वर ने हमें जिस अनुग्रह से बचाया है वह इतना सम्पूर्ण है इसलिए यह हमें जो देह और आत्मा में अपर्याप्त है उन्हें विश्वास के द्वारा सम्पूर्ण करने के लिए, परमेश्वर के राज्य के खम्भों की तरह ऊँचा उठाने के लिए, और हमें उसके राज्य के लोग में तबदील करने के लिए काफी है।
 

क्या आप यीशु पर विश्वास करने के बाद भी यह नहीं जानते है की आप कौन है?
 
इन दिनों, केबल या सेटेलाईट टीवी के द्वारा देखने के लिए सेंकडो चेनल उपलब्ध है। दिन में २४ घंटें कार्यरत यह चेनल अपने ख़ास कार्यक्रम को लाते है और निरंतर उसका प्रसारण करते है। इन चेनलो में, सबसे ज्यादा सफल विज्ञापन की ख़ास चेनल है, वयस्क लोगों की चेनल। ऐसे बहुत सारी वयस्क चेनले है जहाँ केवल चेनल बदलने से हर प्रकार की अश्लील सामग्री देखने के लिए उपलब्ध है। परिणाम स्वरुप, इस युग के बहुत सारे लोग इस प्रकार की अश्लील फ़िल्मों में लिप्त हो चुके है। उससे भी बुरी बात यह है की ऐसे लोग इस प्रकार के व्यभिचार के काम को पाप नहीं मानते।
हालाँकि, बाइबल मनुष्य के मन से निकलने वाले परस्त्रीगमन, व्यभिचार, और अश्लीलता को स्पष्ट रूप से पाप मनाता है (मरकुस ७:२१-२३)। तो फिर क्या हम सब पाप से भरे हुए नहीं है? परमेश्वर बार बार यह कहता है की हमारा वास्तविक स्वभाव पापी है, पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, इसलिए जब पाप बढ़ जाता है तब वह मृत्यु को लेकर आता है। लेकिन क्या हम वास्तव में इसका स्वीकार करते है? क्या हम अपनी आँखे बंद करके और अपने कानों को ढँक कर हमारे पापी स्वाभाव से भाग सकते है? हम अपने मन की कल्पना और विचारों से हर तरह के पाप करते है। कोई फर्क नहीं पड़ता की हम अपने आप इन पापों से दूर रहने के बारे में कह, और कोई फर्क नहीं पड़ता की ऐसा करने के लिए हम कितनी कोशिश करते है, वे सब व्यर्थ है। वास्तव में, हमारी देह ऐसी है की न केवल हम सम्पूर्ण संत बन सकते है जो दैहिक पापों को नहीं करता, लेकिन हमारे अन्दर ऐसा आकर्षण है जो बिना किसी अलगाव के पाप करता है। मनुष्यों की देह और हृदय पवित्र चीजो से बहुत दूर है, और यह सच्चाई है, उसके अलावा वे न केवल पाप के नजदीक रहना चाहते है लेकिन वे बड़े पाप को भी करना चाहते है। 
हम में से प्रत्येक व्यक्ति पाप और अपराध का ढेर है। इसलिए हम मूल रूप से अनैतिक है। जिस अश्लीलता की झलक हम देखते है वह लम्बे समय तक हमारे मन में चलता रहता है, और उसका बचा हुआ अवशेष हमारे मन को परेशान करता है। यह इसलिए है क्योंकि प्रत्येक मनुष्य का हृदय ओर कुछ नहीं लेकिन मूल रूप से पाप का ढेर है। इसलिए, हमें जो पाप का ढेर है उन्हें परमेश्वर के सामने इस प्रकार के अपराधों को कबूल कारण चाहिए। और हमारे लिए यह समझना बुध्धि का कार्य है की हम परमेश्वर के धर्मी कार्य के द्वारा नरक में बंधे हुए है और उससे हमारे उद्धार की माग करनी चाहिए। क्या नेपोलियन बोनापार्ट ने नहीं कहा था, “असंभव वो शब्द है जो मूर्खो की शब्दावली में पाया जाता है?” बहुत सारे मसीही लोग खुद की धार्मिकता को दिखाने की कोशिश करते है, जैसे की वे खुद अपने पाप को पाप करने से रोक सकते है। लेकिन यह परमेश्वर को बड़ी चुनौती देने जैसा है। ऐसा अवज्ञाकारी विश्वास उन लोगों को दुष्ट लोगों के रूप में छोड़ देता है जो परमेश्वर की धार्मिकता का स्वीकार करने को नकार देते है और उद्धार के प्रेम को भी नकार देते है जो उसने हमें दिया है।
क्या आप खुद को अच्छा मानते है? क्या आप खुद को ऐसा मानते है की आप दृढ है और अधर्म को किसी भी परिस्थिति में किसी भी रूप में सह नहीं सकते? क्या अप ऐसा सोचते है की आप परमेश्वर के सामने धर्मी है, केवल इसलिए क्योंकि आपने हरदिन अपने हृदय में परमेश्वर की व्यवस्था का पालन किया और अपने जीवन में उसे लागू किया? यदि कोई मनुष्य परमेश्वर के द्वारा उसे दिए गए उद्धार के अनुग्रह को नहीं जानता और उसका हृदय पापों से भरे होने के बावजूद भी धर्मी कार्य करने की कोशिश करता है वह दुष्ट मनुष्य की धार्मिकता से धर्मी बनने का पाखंड कर रहा है। ऐसे लोगों की अच्छाई उन्हें परमेश्वर के घर के खम्भे बनने के लिए योग्य नहीं बना सकती और वे केवल व्यर्थ पाप का ढेर है।
पूर्व एशिया के देशो में, बहुत सारे लोग जन्म से कन्फ्युशियास की शिक्षा को सिखाते है, और इसलिए वे इन शिक्षा को लागू करने के लिए बहुत कोशिश करते है। दूसरी ओर, पश्चिम में, कैथोलिक धर्म या प्रोटेस्टवाद ने प्रभाव डाला है, और बहुत सारे पश्चिमी लोग परमेश्वर की व्यवस्था का पालन करने की कड़ी कोशिश करते है। लेकिन उसका उदय कहाँ से हुआ है इस बात की परवाह किए बिना जब वे खुद को परमेश्वर के सामने रखते है और उन्हें उनका मूल स्वभाव दिखाया जाता है तब दोनों समूह जो कैथोलिक धर्म की शिक्षा के मुताबिक जीने की कोशिश कर रहे थे और जो परमेश्वर की आज्ञा पालन करके जीने की कोशिश कर रहे थे वे सब केवल पाप का ढेर और कुकर्म करनेवालों का बिज है। मनुष्य अधर्मी, दोष से भरे हुए, और कीचड़ और धुल से बने पापों का ढेर है। यहाँ तक की प्रतीत होना है की अच्छे लोग जिनके अच्छे कार्य उनकी स्वीकृति के लिए नहीं लेकिन उनके अच्छे हृदय से निकले है, और जो लोग अपने अच्छे कामों के लिए किसी भी प्रकार की प्रसंशा प्राप्त करना नहीं चाहते, वे इस तथ्य से भाग नहीं सकते की जब उनका मूल स्वरुप परमेश्वर के सामने प्रगट होता है, तब वे पाप का ढेर और कुकर्म करनेवालों का बिज है। क्योंकि मनुष्य की भलाई की हिमायत करना परमेश्वर के सामने बहुत बड़ा पाप है, इसलिए जब तक लोग अपने दण्ड को नहीं पहचानते और पानी और आत्मा के सुसमाचार का स्वीकार नहीं करते जो परमेश्वर का प्रेम है तब तक वे पाप के दण्ड से बच नहीं सकते। परमेश्वर के सामने, मनुष्य की कोशिश को अच्छाई के रूप में नहीं देखा जा सकता, धुल के जीतनी छोटी भी नहीं, और मनुष्य की इच्छा परमेश्वर के सामने केवल मलिन है। मनुष्यों का मूल स्वभाव कीचड़, लकड़ी और पीतल का है। मनुष्य उस प्रकार की लकड़ी के जैसा है जिसे परमेश्वर के घर के प्रवेश द्वार पर जब तक नहीं लगाया जा सकता जब तक उसे सोने से मढा न जाए। और परमेश्वर के द्वारा दिए गए उद्धार के अनुग्रह के बगैर, वे लोग पीतल से ज्यादा ओर कुछ नहीं है जो आग के न्याय का सामना करेंगे। यदि हम उद्धार के उपहार पर विश्वास नहीं करते की यीशु मसीह को हाथ रखने की विधि के द्वारा बपतिस्मा दिया गया था तो फिर हम पापी ही बने रहेंगे। उसी प्रकार, जो लोग यह नहीं जानते की वे परमेश्वर के सामने दुष्ट है और जिन्होंने उद्धार पाने के लिए उपहार को प्राप्त नहीं किया है, वे सच में दयनीय है।
हम परमेश्वर की धार्मिकता को जानते उससे पहले, मनुष्यों की धार्मिकता हमारे जीवन का मापदंड थी। जब मैं परमेश्वर के उद्धार के उपहार को नहीं जानता था और उसके वचनों पर विश्वास नहीं करता था तब मैं भी वैसा ही था। वास्तव में, मेरे पास खुद की कोई धार्मिकता नहीं थी, लेकिन फिर भी मैं अपने आप को अच्छा मनाता था। इसलिए मेरे बचपन से, कई बार ऐसा समय आया जब मैं अन्याय को सहन नहीं कर पाया और यहाँ तक की जो लोग मेरे मुकाबले की नहीं थे उनसे भी लड़ाई करता था। जीवन में मेरा सिध्धांत न्यायी और धर्मी रीति से जीवन जीना है, क्योंकि मैं केवल एक बार पीड़ा हुआ हूँ और एक बार ही मरुंगा। मेरे विचार थे, “मैं इस प्रकार केवल खाना खाते हुए व्यर्थ जीवन जीने के बजाए मर जाऊ। यदि जीवन ऐसा ही है, तो यदि मैं मर जाऊ या ५० साल तक ओर जीऊँ उसका कोई मतलब नहीं है। इस प्रकार जीना घिनोना है। किसी भी मतलब के बगैर किसी भी उदेश्य के बगैर जीना और किसी भी प्रकार के धर्मी कार्य न करपाना नरक के समान है। आख़िरकार, इसके अलावा नरक ओर क्या है? मनुष्य के लिए डुक्कर के नाई जीवन जीना, मरते दम तक केवल खाना और खुद की देह को तृप्त करना, अपमान का नरक है।” इस प्रकार, क्योंकि मैं खुद को परमेश्वर के सामने देखने में विफल हुआ, इसलिए मैं दंभ से भर गया। इसलिए मैंने खुद को दूसरों से अच्छा देखा और धर्मी जीवन जीने की बहुत कोशिश की।
लेकिन मैं परमेश्वर की धार्मिकता के सामने पाप के ढेर से ज्यादा कुछ भी नहीं हूँ। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूँ जो परमेश्वर की ६१३ धाराओं में से एक का भी पालन कर पाया हो। यह हकीकत की उसका पालन करने की मेरी इच्छा थी वह अपने आप में अधर्म है जो परमेश्वर के वचन के सामने विद्रोह करना है जो घोषित करता है की, “आप दुष्ट मनुष्य है जो पाप करता है और परमेश्वर के विरुध्ध में खड़ा होता है।” परमेश्वर के सामने मनुष्यों की सारी धार्मिकता केवल अधार्मिकता में तबदील होती है। सत्य यह है की मनुष्य धर्मी नहीं बन सकता। वास्तव में, वर्त्तमान युग आख़री युग है जिसकी प्रसिध्धता संस्कृति के पतन के द्वारा और दुष्टता, और पाप के द्वारा व्याप्त हो गया। इसका मतलब यह है की हमारी देह निरंतर पथभ्रष्ट और दुष्ट पापों के द्वारा प्रतिश्याय है, और हम वास्तव में इन पापों को हमारे जीवन में करते है। वास्तव में, हमारी देह हमेशा इन गंदे पापों के द्वारा प्रतिश्याय है, और उसमे किसी प्रकार की अच्छाई पाई नहीं जाती। 
 

हम अधर्मी और पाप से भरे हुए थे, लेकिन अब प्रभु ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा हमें हमारे सारे पापों से बचाकर हमें खुद की निज प्रजा बनाया है
 
हम सब अधर्मी थे, लेकिन उद्धार के उपहार के द्वारा, परमेश्वर ने हमारे जैसे लोगों को उनके पाप से बचाया है। पवित्र स्थान का प्रत्येक पटिया ४.५ मीटर ऊँचा और ६७५ मिलीमीटर चौड़ा था, जो बबूल की लकड़ी से बना हुआ सोने से मढ़ा गया था और आपवित्र स्थान की दीवार के रूप में लगाया गया था। प्रत्येक पटिए के निचे, पटिए को बनाए रखने के लिए चाँदी की दो कुर्सिया लगाईं गई थी। यहाँ चाँदी की कुर्सिया प्रगट करती है की परमेश्वर ने खुद आपको और मुझे बचाया है।
परमेश्वर ने हमें पाप से बचाया यह सत्य उसका प्रेम है, जिसके तहत यीशु इस पृथ्वी पर आए और हमारे पापों को लेने के लिए बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरने के द्वारा हमारे पापों का दण्ड सहा, इस तरह उसने हमें जगत के सारे पाप और दण्ड से बचाया है। उसने हमें जो उद्धार का उपहार दिया है उस पर विश्वास करने के द्वारा, हम नया जन्म प्राप्त कर पाए है। परमेश्वर ने हमें जो उद्धार का उपहार दिया है वह सोने की तरह शुध्ध है, इसलिए यह हमेशा के लिए न बदलने वाला है।
प्रभु ने हमें जो उद्धार दिया है वह यीशु के बपतिस्मा और लहू से बना हुआ है, और इसने पूरी तरह से और स्पष्ट रीति से हमारे सारे पापों को मिटा दिए है। प्रभु ने हमें हमारे सारे पपों से बचाया है इसलिए आप और में पूरी तरह से उन पापों से छूटकारा पा चुके है जो हमने अपने मन, अपने विचार, और हमारे वास्तविक कर्मों के द्वारा किए थे। परमेश्वर ने हमारे हृदय में जो उद्धार का उपहार दिया है उस पर विश्वास करने के द्वारा, हम उसके अमूल्य संत बन गए है। मिलापवाले तम्बू के प्रत्येक पटिए को बनाए रखनेवाले दो कुर्सियों के द्वारा, परमेश्वर ने हमें पानी और आत्मा के उद्धार के बारे में बताया है। परमेश्वर हमें कहता है की यह १०० प्रतिसत उसका अनुग्रह और उपहार है की हम उसकी संतान बने है।
यदि हम यीशु के बपतिस्मा और लहू पर हमारे विश्वास को हमसे निकाल दे, तो हमारे अन्दर कुछ भी नहीं बचेगा। हम सब ऐसे लोग थे जो पाप के लिए दण्ड के हकदार थे। हम केवल नाशवान है जो परमेश्वर की व्यवस्था के मुताबिक़ हमारी निश्चित मौत से पहले घबराते है, जिन्हें समझने और आग के न्याय के लिए विलाप करना था जो हमारा इंतजार करता है। इसलिए यदि हम पानी और आत्मा के सुसमाचार के बगैर जीवन जीते है तो हम कुछ भी नहीं है। ऐसे युग में जीवन जीते जो अब पाप से व्याप्त है, हमें कभी भी नहीं भूलना चाहिए की हमारे प्रारब्ध में केवल आग का न्याय हमारा इंतज़ार कर रहा है। हम ऐसे नाशवान लोग थे। हालाँकि, परमेश्वर का अनुग्रह हम पर आया क्योंकि उसने हमें पानी और आत्मा का उद्धार दिया है। मसीहा इस पृथ्वी पर आया, यूहन्ना से बपतिस्मा लिया, अपना लहू बहाया और क्रूस पर मरा, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार हमें हमारे सारे पाप, अधर्म, और सारे दण्ड से बचाया। पानी और आत्मा के इस सम्पूर्ण सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा, अब हम हमारे सारे पाप से बच गए है, और हम हमारे विश्वास से केवल परमेश्वर को धन्यवाद दे सकते है।
हालाँकि हम देह में, हमारे कार्य में, सेवकाई में अपर्याप्त है, और फिर भी मैं पूरी दुनिया में पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करता हूँ। हालाँकि यह युग भ्रष्ट है, लेकिन हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है इसलिए हम दुष्टता से स्वतंत्र होकर पूर्ण रूप से प्रभु की सेवा कर पाते है। हमारे मन में यह आया है वह हमारे खुद की समर्थ से नहीं है, लेकिन परमेश्वर ने हमें उद्धार का अनुग्रह दने के द्वारा पवित्रता दी है इसलिए। क्योंकि परमेश्वर ने हमें सम्पूर्ण रीति से पाप और दण्ड से बचाया है इसलिए हम इस उद्धार की सामर्थ्य को पा सके है, और यह पूरी तरह से इसकी वजह से है की हम पूर्ण रूप से प्रभु की सेवा कर पाते है। क्योंकि प्रभु ने पानी और आत्मा के द्वारा हमें हमारे सारे पापों से बचाया है, इसलिए मैं विश्वास करता हूँ की हम अपनी कमजोरी के बावजूद भी उसकी सेवा कर पाते है, और अब हमारे पाप, कमियाँ, और दोषों से बंधे हुए नहीं है।
यदि हमारे प्रभु का अनुग्रह नहीं होता तो हम पूरे संसार में सुसमाचार का प्रचार नहीं कर पाते। पूरी दुनिया में पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रसार करना और पूरी तरह से इस सुसमाचार की सेवकाई करना परमेश्वर के अनुग्रह के बगैर सम्भव नहीं है। १०० प्रतिशत परमेश्वर के उद्धार के अनुग्रह के द्वारा आप और मैं अपने विश्वास के जीवन को और इस सुसमाचार की सेवकाई करने के लिए योग्य बने है। हम विश्वास के द्वारा परमेश्वर के राज्य के खम्भे और इस राज्य के लोग बने है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें सोने के समान विश्वास दिया है, इसलिए अब हम परमेश्वर के घर में रह पाते है। इस युग में जब पूरी दुनिया पाप से ढँकी हुई है, और जब लोग पाप के द्वारा भ्रमित है, परमेश्वर को भूल गए है या दोष दे रहे है, तब हम शुध्ध पानी से साफ़ हुए है और शुध्ध बने है, और परिणाम स्वरुप हम शुध्ध पानी पिने और शुध्ध आत्मा से प्रभु की सेवकाई करने के योग्य बने है। इसलिए, इस आशीष के लिए मैं कितना धन्यवादित हूँ यह शब्द नहीं बयाँ कर पाएंगे।
वास्तव में हम इसी प्रकार विश्वास के द्वार धर्मी बने है। हम धर्मी कैसे बने है? जब हमारे अन्दर कोई अच्छाई नहीं है तो हम खुद को धर्मी कैसे कह पाते है? आपके और मेरे जैसे पापी व्यक्ति पापरहित कैसे बने? क्या आप अपने देह की धार्मिकता के द्वारा पापरहित और धर्मी बने है? देह के विचार, आपकी खुद की कोशिश, और आपके खुद के कार्य – क्या इन में से किसी ने भी आपको धर्मी व्यक्ति में तबदील किया है जिसके अन्दर कोई भी पाप नहीं है? क्या आप केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी बने है? क्या आप नीले बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए परमेश्वर के उद्धार पर अपने विश्वास के द्वारा धर्मी बने है? क्या आप पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा अपने उद्धार पर विश्वास किए बिना धर्मी बने हो जिसे मसीहा के द्वारा परिपूर्ण किया गया और परमेश्वर के वचन में प्रगट किया गया? आप इस तरह धर्मी नहीं बने है! संक्षेप में, केवल लाल कपड़े पर विश्वास करने के द्वारा हम कभी भी धर्मी नहीं बन सकते है।
क्योंकि यीशु मसीहा, हमारे उद्धारकर्ता ने हमारे पापों को मिटाने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के पापों को अपने कंधो पर उठाया, जिसमे जीवनभर के सारे पाप सम्मिलित है इसलिए हम विश्वास के द्वारा धर्मी बने है। जिस प्रकार पुराने नियम में जब पापी या महायाजक बलिपशु के सिर पर अपना हाथ रखते थे और वो पशु हमारे सारे पापों को स्वीकार करता था, उसी प्रकार नए नियम के समय में, यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठाया। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया (मत्ती ३:१५)। और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ऊँची आवाज में पुकार कर इस घटना की गवाही दी है, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” (यूहन्ना १:२९) इस बपतिस्मा को प्राप्त करने के बाद, यीशु अगले तिन साल हमारे उद्धार के लिए जीवित रहा, क्रूस पर चढ़ने के द्वारा हमारे सारे पाप और दण्ड की कीमत चुकाई और खुद की देह को परमेश्वर के हाथों में सोंपा, जिस प्रकार भेड़ अपने कुतरनेवाले के सामने जाति है, और हमें नया जीवन दिया।
क्योंकि यीशु मसिह ने यूहन्ना से प्राप्त बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को उठाया था इसलिए जब उसे रोमन सैनिको के द्वारा क्रूस पर चढ़ाया गया तब उसके दोनों हाथ और पैरों में किले ठोकी गई। क्रूस पर लटककर, यीशु ने अपने शरीर के सारे लहू को बहा दिया। और वह हमारे उद्धार के आख़री पड़ाव में आया और कहा, “पूरा हुआ” (यूहन्ना १९:३०)। इस प्रकार वह मरा, तिन दिनों के अन्दर वह मृत्यु से जीवित हुआ, स्वर्ग के राज्य में उठा लिया गया, और इस प्रकार हमें अनन्त जीवन देने के द्वारा वह हमारा उद्धारकर्ता बना। यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर जगत के पापों को अपने कंधो पर उठाकर, और अपने क्रूस, पुनरुत्थान, और स्वर्ग में उठाए जाने के द्वारा यीशु हमारा सम्पूर्ण उद्धारकर्ता बना।
 

केवल क्रूस के लहू पर के विश्वास और क्रमिक पवित्रता के सिध्धांत ने आपको आपके पापों से नहीं बचाया है
 
मसीहियों को जानना चाहिए की वे केवल यीशु के क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वारा अपने पापों से सम्पूर्ण उद्धार नहीं पा सकते। क्योंकि लोग हरदिन अपनी आँख और कार्य के द्वारा पाप करते है, इसलिए वे केवल क्रूस के लहू पर ही विश्वास करके अपने पापों को मिटा नहीं सकते। वर्त्तमान समय में लोगों के जीवन में जो व्यापक अपराध है जो वे अपने जीवन में करते है वह है यौन अनैतिकता। जैसे यौन अश्लीलता की संस्कृति पूरी दुनिया में फ़ैल रही है, वैसे ही यह पाप हमारी देह में गहराई से समाया हुआ है। बाइबल व्यभिचार न करने की आज्ञा देती है, लेकिन आज की वास्तविकता यह है की अपने आसपास किओ परिस्थितियों से घिरकर, कई लोग न चाहते हुए भी इस पाप को करते है। परमेश्वर ने घोषित किया है की जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका (मत्ती ५:२८), और इसलिए हरदिन हमारी आँख जो देखती है वह सब अश्लीलता है। इसलिए लोग हर मिनिट हर पल ऐसे दुष्ट पाप करते है। जब ऐसा है, तो वे कैसे पश्चाताप की प्रार्थना करने से पवित्र हो सकते है और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते है? कैसे वे धर्मी बन सकते है? जब वे अपने आप को लम्बे समय तक अनुशासित करते है और बूढ़े होकर किसी भी तरह पवित्र होते है तो क्या उनके हृदय धर्मी बन सकते है? क्या इनके चरित्र नम्र बने है? क्या वे अधिक धैर्यवान बने है? निसन्देह नहीं! उसके ठीक विपरीत हुआ।
जब लोग बूढ़े होते है, तब वे बहुत गुस्सेवाले और अधीर बन जाते है। जैसे बुढापा होरमोंस में बदलाव लाता है, और यहाँ तक की जो लोग पहले बहुत शांत रहते थे अब उनके लिए शांत रहना मुश्किल हो जाता है। और वे दूसरो के बारे में सोचने से पहले लगातार अपने बारे में सोचते है। जिस प्रकार उनकी देह की कार्यप्रणाली बिगड़ जाति है, उस प्रकार उनकी आत्मरक्षा की प्रवृत्ति बढ़ जाति है। इसलिए जब हम बूढ़े होते है, तब हम एक बच्चे के जैसे बन जाते है। जैसे एक कहावत है, जो बचपन में चार पैरो पर रेंगता था, वह जवान होने के बाद दो पैरो पर खड़ा होता है, और जब बूढा होता है तब तिन पैरो पर चलता है वह ओर कोई नहीं लेकिन मनुष्य है, और प्रत्येक व्यक्ति ऐसे ही है।
मसीही सिध्धान्तों के बिच “क्रमिक पवित्रता का सिध्धांत” प्रचलित है। यह सिध्धांत कहता है की जब मसीही क्रूस पर यीशु की मृत्यु पर लम्बे समय तक विश्वास करते है, हरदिन पश्चाताप की प्रार्थना करते है, और हरदिन प्रभु की सेवा करते है, तब वे धीरे धीरे पवित्र और शांत बनते है। यह दावा करता है की हमने जब यीशु पर विश्वास किया था उसके लम्बे समय बिताने के बाद, हम ऐसे व्यक्ति बनते है जिसका पाप से कोई लेनादेना नहीं है और जिसके कर्म धर्मी है, और जब मौत हमारे पास आती है, तब हम सपूर्ण रीति से पवित्र बनते है और इस प्रकार पूरी तरह से पापरहित बनते है। और यह ये भी सिखाता है की क्योंकि हमें हर समय पश्चाताप की प्रार्थना करनी है, इसलिए जैसे हमारे कपड़े धुलते है वैसे ही हमें हरदिन हमारे पाप को धोना है, और इसलिए जब हम अन्त में मरेंगे, तब हम ऐसे व्यक्ति बनकर परमेश्वर के पास जाएंगे जो सम्पूर्ण धर्मी है। बहुत सारे ऐसे लोग है जो इस प्रकार विश्वास करते है। लेकिन यह मनुष्यों के विचारों से बना एक परिकल्पित अनुमान है।
रोमियों ५:१९ कहता है, “क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।” यह भाग हमसे कहता है की हम सब एक मनुष्य के आज्ञा मानने से धर्मी बने है। जो आप और मैं नहीं कर पाए, वह यीशु मसीह ने प्राप्त किया जब वह व्यक्तिगत रूप से इस पृथ्वी पर आया। इस बात को ठीक तरह जानते हुए की आप और मैं खुद से पाप से स्वतंत्र नहीं हो सकते, यीशु ने हमारे बदले हमारे पाप को मिटाया, कुछ ऐसा जो न तो आप कर सके और न तो मैं कर सका। इस पृथ्वी पर आकर, बपतिस्मा लेकर, क्रूस पर चढ़कर, और मृत्यु से फिर से जीवित होकर, उसने आपको और मुझे बचाया है और एक ही बार में हमेशा के लिए हमें हमारे पापों से शुध्ध किया है।
परमेश्वर पिता की इच्छा का पालन करने के द्वारा, यीशु मसीह व्यक्तिगत तौर पर हमारे उद्धार को परिपूर्ण कर पाया, जिसे पापों की माफ़ी के नाम से भी जाना जाता है। मसीहा के रूप में परमेश्वर की इच्छा का पालन करके, यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के द्वारा, क्रूस पर की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा हमें उद्धार का अनुग्रह दिया है। इस प्रकार हमें उद्धार का उपहार देने के द्वारा, यीशु ने पाप की माफ़ी को सम्पूर्ण रीति से परिपूर्ण किया है। और अब, विश्वास के द्वारा हमने उद्धार के इस अनुग्रह को प्राप्त किया है, क्योंकि प्रभु ने पाप से हमारे उद्धार को सम्पूर्ण रीति से परिपूर्ण किया है जिसे हम हमारे कार्य और योग्यता से हभी हांसिल नहीं कर पाते।
बहुत सारे लोग यीशु ने लिए हुए बपतिस्मा पर विश्वास नहीं करते, लेकिन उसकी जगह लहू पर विश्वास करते है जो उसने क्रूस पर बहाया था और अपने खुद के कार्य के द्वारा पवित्र बनने का प्रयास करते है। दुसरे शब्दों में, भले ही यीशु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लेने के द्वारा सारे पापों को ले लिया, फिर भी लोग इस सत्य पर विश्वास नहीं करते। मत्ती का अध्याय ३ हमें कहता है की यीशु ने अपने सार्वजनिक जीवन में सबसे पहले जो किया वह था यूहन्ना से बपतिस्मा लेना। यह सत्य चारों सुसमाचार के द्वारा अभिप्रमाणित है।
यीशु ने मनुष्यजाति के प्रतिनिधि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेकर हमारे पापों को ले लिया, और फिर भी बहुत सारे ऐसे लोग है जो इस सत्य को अनदेखा करते है और इस पर विश्वास नहीं करते। ऐसे लोग यीशु के बपतिस्मा पर विश्वास किए बिना यीशु पर विश्वास करते है, और उत्साह से क्रूस के लहू की स्तुति करते है जो उसने बहाया था। क्रूस पर यीशु की मृत्यु के दुःख से वे अपनी भावनाओं को उत्तेजित करते है, अपनी स्तुति में हर प्रकार के शोर गुल करते है, चिलाते है, 
“मेमने के लहू में अद्भुत सामर्थ्य है; 
मेमने के लहू में चमत्कार करनेवाला अद्भुत सामर्थ्य है!” दुसरे शब्दों में, वे खुद की भावनाए, जोश और ताकत से परमेश्वर के पास जाने की कोशिश करते है। लेकिन आपको यह समझना चाहिए की जितना ज्यादा वे ऐसा करते है, उतना ही ज्यादा वे ढोंगी बनते जाते है, पवित्र होने का ढोंग करते है लेकिन वास्तव में उनके हृदय में गुप्तता से पाप संचित है।
जब यीशु मसीह पर विश्वास करने की बात आती है, तब यीशु की दो योग्य सेवकाई बहुत ही आवश्यक है। वे क्या है? उसमे से एक है की यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को उठाया, और दूसरी है, की यीशु ने जगत के पापों को क्रूस पर ले जाने के द्वारा और उस पर चढ़ने के द्वारा हमारे सारे पापों की कीमत चुकाई है। जो कोई भी यीशु की इन दोनों सेवकाई पर पूरी तरह से विश्वास करता है वह निश्चित ही धर्मी बन सकता है। यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर के उसके लहू दोनों पर हमारा विश्वास हमें परमेश्वर के घर में दृढ़ता से खड़े होने के लिए योग्य बनाता है। परमेश्वर के अनुग्रह से, हम वास्तव में उसके निर्दोष लोग बने है। यीशु के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा, हम सोने के समान शुध्ध विश्वास प्राप्त करते है जो कभी भी बदला नहीं जा सकता। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हम संत बने है जिन्होंने सम्पूर्ण पापों की माफ़ी के उद्धार को प्राप्त किया है।
 

धर्मशास्त्र का युग बनाम पानी और आत्मा के सुसमाचार का युग
 
प्रारंभ की कलीसिया के समय को छोड़ कर, ३१३ ए.डी. में मिलान के आदेश से लेकर, मसीहियत जिसमे वर्त्तमान मसीहियत भी सम्मिलित है, क्रूस का सुसमाचार फैला रही है जिसमे यीशु का बपतिस्मा निकाल दिया गया है। प्रारंभ के समय से लेकर ३१३ ए.डी. तक, जिसने मसीहियत को नए रोमा धर्म के रूप में प्रमाणित किया, मसीहियत पानी और आत्मा का सुसमाचार फैला रही थी, लेकिन बाद में रोमन केथोलिक कलीसिया ने धार्मिक प्रभुत्व हांसिल किया। उसके बाद शुरूआती १४ शताब्दी से, मनुष्य के बनाए हुए विचार को केंद्र में रखनेवाली और मनुष्यजाति के पुन:स्थापना की बुलाहट की संस्कृति की शुरुआत हुई, पहले उत्तर इटली के कुछ समृध्ध शहरों में शुरू हुआ। यह पुनर्जागरण काल था।
१६ शताब्दी तक, यह संस्कृति जो इटली तक सीमित थी वह पश्चिमी दुनिया में फैलाना शुरू हो गई, और विद्वान जिन्होंने मानववादी, मनुष्य के द्वारा निर्मित तत्व ज्ञान का अभ्यास किया था उन्होंने धर्मविज्ञान का अभ्यास शुरू किया। अपने विचार से बाइबल की व्याख्या करने के द्वारा उन्होंने मसीही सिध्धान्तों का निर्माण करना आरम्भ किया। लेकिन क्योंकि वे सत्य को नहीं जानते थे, इसलिए वे बाइबल को पूरी तरह से नहीं समझ सकते थे। इसलिए जो वे अपनी बुध्धि से नहीं समझ सकते थे, उन्हें वे अपने सांसारिक ज्ञान और विचार से सम्मिलित करने लगे, इस प्रकार उन्होंने खुद से मसीही सिध्धान्तों का निर्माण किया। इसी तरह केल्विनवाद, आर्मीनियनवाद, रूढ़िवाद, स्वतंत्र विचारवाद, नया धर्मविज्ञान, अपरिवर्तनवाद, तर्कवाद, आलोचनात्मक, रहस्यमय धर्मविज्ञान, धार्मिक बहुलवाद, छुटकारे का धर्मविज्ञान, और यहाँ तक की नास्तिक धर्मविज्ञान का उदय हुआ।
मसीहियत का इतिहास बहुत लंबा लगता है, लेकिन वास्तव में यह उतना लंबा नहीं है। प्रारम्भिक कलीसिया के ३०० साल तक, लोग बाइबल के बारे में सिख पाए, लेकिन बहुत जल्द मध्यकालीन युग आया, मसीहियत का अन्धकार युग। इस युग के दरमियान, साधारण व्यक्ति के लिए बाइबल पढ़ना सिर काटकर दण्ड देने के योग्य था। १७०० शताब्दी तक यह ज़ारी नहीं रहा जब धर्मविज्ञान की हवा चलने लगी और फिर जैसे जैसे धर्मविज्ञान जोशपूर्व बढ़ने लगा वैसे मसीहियत १८०० और १९०० में फलने फूलने लगी, लेकिन अब, कई सारे लोग रहस्यवादी सिध्धान्तों में गिर गए है, अपने खुद के अनुभव के आधार पर परमेश्वर पर विश्वास करते है।
लेकिन क्या यह सच्चाई है? जब आप इस रीति से विश्वास करते है, तब क्या आपके पाप वास्तव में दूर होते है? आप हरदिन पाप करते है। आप हरदिन अपने हृदय, विचार, कार्य और कमजोरियों से पाप करते है। तो फिर क्या आप केवल यीशु का लहू जो उसने क्रूस पर बहाया था उस पर विश्वास करके इन पापों को मिटा सकते हो? बपतिस्मा लेने के द्वारा यीशु ने हमारे पापों को अपने कन्धों पर उठाया था और क्रूस पर मरा था यह बाइबल आधारित सत्य है। फिर भी बहुत सारे ऐसे लोग है जो कहते है की केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करके और हरदिन पश्चाताप की प्रार्थना करके उनके पाप माफ़ किए जा सकते है। क्या ऐसी पश्चाताप की प्रार्थना करने से आपके हृदय और विवेक के पाप शुध्ध हुए है? यह असंभव है।
यदि आप मसीही है, तो फिर अब आपको इस सत्य के उद्धार को जानना चाहिए और विश्वास करना चाहिए, की यिहू मसीह इस पृथ्वी पर आए और यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर जगत के सारे पापों को ले लिया। इसके बावजूद, क्या आप अभी भी इस सत्य का अस्वीकार करते है, न इसे जानने की कोशिश करते है, और न ही विश्वास करने की? यदि ऐसा है, तो फिर आप यह नहीं कह सकते की आप वास्तव में यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करते है। यदि ये बात है, तो आप यीशु का मज़ाक उड़ाने, उसे नीचा दिखाने और उसके नाम को व्यर्थ में लेने का पाप कर रहे है। दुसरे शब्दों में, आप यीशु के नाम की निंदा और परमेश्वर का मज़ाक उड़ाने का पाप कर रहे है। यीशु हमारे पापों को दूर करने के लिए इस पृथ्वी पर आया, और उसके आने के उद्देश्य के साथ, उसने हमारे पापों को लेने के लिए बपतिस्मा लिया और जगत के इन पापों को उठाकर और क्रूस पर चढ़ने के द्वारा उसने उन सारे पापों के दण्ड को सहा।
फिर भी इस स्वर्गीय सत्य के बावजूद भू बहुत सारे लोग यीशु मसीह के इस उद्धार पर विश्वास नहीं करते, और परिणाम स्वरुप परमेश्वर के विरुध्ध में अक्षम्य पाप करते है। उद्धार के इस योजना से यीशु के बपतिस्मा को निकालकर जो यीशु मसीह के द्वारा परिपूर्ण किया गया था और जिस तरह ठीक लगे उस तरह विश्वास करने के द्वारा वे कभी भी उद्धार के अनुग्रह को प्राप्त नहीं कर सकते। फिर भी इन सारे सत्य के बावजूद भी बहुत सारे मसीही सच्चाई पर जैसा है वैसा विश्वास नहीं करते, जैसे की, यीशु ने हमारे सारे पापों को मिटा दिया है, लेकिन उसके बदले वे अपने ही विचार का अनुसरण करते है और दूषित सत्य पर विश्वास करते है। आजकल, लोगों के हृदय उनके गलत सैध्धान्तिक विश्वास की वजह से कठोर हो गए है, वे विश्वास करते है की उनके पाप केवल अकेले क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वारा मिटाए जाएंगे।
लेकिन परमेश्वर के द्वारा नियोजित उद्धार का उत्तर निम्नलिखित है: हम यीशु के बपतिस्मा, क्रूस पर उसकी मृत्यु, और उसके पुनरुत्थान पर विश्वास करने के द्वारा पाप की अनन्त माफ़ी प्राप्त कर सकते है। फिर भी बहुत सारे लोग बढ़ रहे है जो उद्धार के सत्य से यीशु के बपतिस्मा को निकालकर यीशु पर विश्वास करते है, गलतफहमी और गलत विश्वास का निम्नलिखित सूत्र अचल नियम है: “यिहू (क्रूस और उसका पुनरुत्थान) + पश्चाताप की प्रार्थना + अच्छे कार्य = क्रमिक पवित्रता के द्वारा प्राप्त उद्धार।” जो लोग इस तरह से विश्वास करते है वे केवल अपने होंठो से कहते है की उन्होंने अपने पाप की माफ़ी पाई है। हालाँकि, सत्य यह है की उनके हृदय ढेर सारे पापों से भरे हुए है जो अभी भी अनसुलझे है।
जो लोग केवल यीशु के क्रूस पर विश्वास करते है वे अन्त में ज्यादा पाप करेंगे। आप क्यों इस सत्य पर जैसा है वैसा विश्वास नहीं करते की यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा आपके सारे पापों को मिटाया है; लेकिन आप उसके बजाए मनुष्य निर्मित झूठे सिध्धांत पर विश्वास करते है और फिर भी आप यीशु पर विश्वास करने का दावा करते है? आपको यह वास्तविकता को समझना चाहिए की बबूल की लकड़ी से बने मिलापवाले तम्बू के प्रत्येक पटिए में दो चुल बहार की ओर लगाईं गई है, और उनके निचे पटिए को अपनी जगह बनाए रखने के लिए दो चाँदी की कुर्सिया लगाईं गई है। पानी और आत्मा का सुसमाचार (यीशु ने लिया हुआ बपतिस्मा और क्रूस का लहू) सम्पूर्ण सत्य है।
जब हम तम्बू के आँगन के द्वार को खोलते है और आँगन में प्रवेश करते है तब हम सबसे पहले होमबलि की वेदी और पीतल की हौदी को देखेंगे। होमबलि की वेदी किस प्रकार की जगह है? यह वो जगह है जहाँ होमबलि को अर्पण किया जाता है। यह वो जगह है जहाँ उस बलिपशु को अर्पण किया जाता है जिसने इस्राएल के लोगों के पापों का दण्ड उठाया है। हौदी किस प्रकार की जगह है? यह वो जगह है जहाँ देह को साफ़ किया जाता है। दुसरे शब्दों में, यह वो जगह है जहाँ पाप से दूषित हुए हृदय को साफ किया जाता है। जब हम विश्वास से इस प्रक्रिया से गुजरते है केवल तभी हम तम्बू का पर्दा खोल सकते है और परमेश्वर के घर में प्रवेश कर सकते है उससे पहले नहीं।
तम्बू के द्वार का पर्दा नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बना हुआ था। इसे बारीक सनी के कपड़े और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े को बुनकर बनाया गया था। परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए, हमें इस सत्य पर विश्वास करना ही चाहिए। हम केवल तब परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते है जब हमारे पास नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुई यीशु की सेवकाई पर विश्वास हो। यीशु इस पृथ्वी पर आया और नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े को परिपूर्ण किया। नीला कपड़ा यीशु के बपतिस्मा को दर्शाता है, और बैंजनी कपड़ा हमसे हमसे कहता है की यीश मसीह खुद परमेश्वर है। लाल कपड़ा हमसे कहता है की यीशु ने क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा हमारे पापों के सारे दण्ड को सहा।
क्या अभी भी आपके हृदय में पाप है? दुसरे शब्दों में, क्या आपके हृदय के केंद्र में अभी भी पाप है? यदि यीशु पर विश्वास करने के बावजूद भी आपके हृदय में पाप, तो फिर स्पष्ट रूप से आपके विश्वास के साथ कोई समस्या है। क्योंकि आप यीशु पर केवल एक धर्म की रीति से विश्वास करते है इसलिए आपका विवेक शुध्ध नहीं है और आप के अन्दर पाप है। लेकिन नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा परमेश्वर पर विश्वास करने से आप भी अपने विवेक को शुध्ध कर सकते है।
जो वास्तविकता आप समझ सकते है वह है की आपके हृदय में अभी भी पाप है जो अपनी बहुतायत में है। क्यों? क्योंकि जिन लोगों ने सच में यह समझा है की उन्होंने पाप किया है वे यह समझेंगे की वे इन पापों की वजह से नरक में बंधे हुए है, और जब वे ऐसा करते है तब अन्त में वे आत्मा में नम्र बनते ही और इस प्रकार सच्चे उद्धार के वचन को सुनने के योग्य बनते है।
यदि आप परमेश्वर से पाप की माफ़ी पाना चाहते है, तो आपका हृदय तैयार होना चाहिए। जिनके हृदय तैयार होते है वे परमेश्वर के सामने इस प्रकार कबूल करते है: “मैंने बहुत लम्बे समय तक यीशु पर विश्वास किया, लेकिन अभी भी मेरे हृदय में पाप है। क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है, इसलिए मैं नरक में डाला जाउंगा। परमेश्वर, मैं पापों की माफ़ी प्राप्त करना चाहता हूँ।” इस तरह, वे परमेश्वर के सामने अपने आप को सम्पूर्ण पापी समझते है। जो लोग परमेश्वर के वचन को समझते है, जो लोग विश्वास करते है की परमेश्वर केम्वचन जैसा कहता है वैसे ही परिपूर्ण हुआ है – यह ओर कोई नहीं लेकिन वे लोग है जिनके हृदय तैयार है। ऐसे लोग इस वचन को सुनेंगे, अपनी खुद की आँखों से वचन को देखेंगे और पुष्टि करेंगे, और ऐसा करने के द्वारा उन्हें समझमे आएगा, “अरे, मैंने अब तक गलत बात पर विश्वास किया। और अनगिनत लोग अभी भी यही गलती कर रहे है।” दुसरे लोग क्या कहेंगे इस बात की परवाह किए बिना पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा वे लोग निश्चित रूप से अपने सारे पापों की माफ़ी को प्राप्त करेंगे।
जब मैं सोचता हूँ की इस दुनिया में कितने लोग गलत विश्वास करते है, और कितने लोग गलत मार्ग में चल रहे है तब मेरे हृदय में बहुत पीड़ा होती है। भाइयों और बहनों, जिस सुसमाचार के द्वारा हमारे प्रभु ने हमें हमारे पापों से बचाया है उसे यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए उसके लहू के द्वारा परिपूर्ण किया गया है। यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को उठा लिया, क्रूस के लहू के द्वारा पाप के सारे दण्ड को सहा, और इस प्रकार हमें बचाया। इसलिए, हमें स्पष्ट रूप से विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर ने हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कापडे के सच्चे प्रगटीकरण पर विश्वास करनेवाला विश्वास देकर बचाया है। मैं इस सच्चाई के लिए बहुत ही आभारी हूँ की यीशु मसीह ने व्यक्तिगत तौर पर आपको और मुझे इस प्रकार बचाया है। आप और मै, जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है, वे हमेशा शान्ति में रहते है और हमारा हृदय कभी भी डगमगाता नहीं।
 

जिन लोगों ने अपने पापों से उद्धार पाया है उन्हें पानी औत्र आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा अपने विश्वास का बचान करना चाहिए
 
हालाँकि, यह जगत अनगिनत बुरे सिध्धान्तों से भरा हुआ है जो नया जीवन पाए हुए व्यक्ति के हृदय को भी व्यग्र और अशुध्ध कर सकता है। इसी लिए प्रभु यीशु ने हमें चेतावनी दी है, “देखो, फेरिसियों के खमीर और हेरोदेस के खमीर से चौकस रहो” (मरकुस ८:१५)। लेकिन हम यह भी नहीं बता सकते की कितनी खमीरवाली सिक्षाए पी जाति है, जो एक बार सुनने से ही लोगों के हृदय को अशुध्द करती है। हमें यह समझना चाहिए की कैसे यह दुनिया यौन अनैतिकता का सकेंत कर रही है। हम जो विश्वास करते है उन्हें यह जानना चाहिए की हम अब किस युग में जीवन जी रहे है और हमारे विश्वास का बचाव करना चाहिए। फिर भी जब हम ऐसे पापी संसार में जीवन जी रहे है, हमारे हृदय में अभेद सत्य है की प्रभु ने हमें पाप से बचाया है। गवाही के वचन जो हमारे न बदलनेवाले उद्धार की गवाही देते है वो है पानी और आत्मा का सुसमाचार। हमें सत्य पर विश्वास होना चाहिए जिसे न तो दुनिया के द्वारा हिलाया जा सके और न ही उसे रोक सके। 
इसं संसार की सारी चीजे सत्य की नहीं है। लेकिन उसके बजाए यह शैतान के झूठ से भरी हुई है। हालाँकि, परमेश्वर ने हमें कहा है की धर्मी जन जगत को जित लेगा। यह न बदलनेवाले सत्य के सुसमाचार पर उनका विश्वास है की धर्मी बुराई को जीतेगा और जगत पर जित हांसिल करेगा। भले ही हम अपर्याप्त है, फिर भी हमारे हृदय, हमारे विचार, और हमारी देह अभी भी परमेश्वर के घर में है और वह अभी भी विश्वास से उद्धार के सुसमाचार पर खड़ा है। हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर दृढ़ता से खड़े है जिसके द्वारा प्रभु ने हमें सम्पूर्ण तरीके से बचाया है। 
बबूल की लकड़ी के पटिए, जिन्हें तम्बू के दीवार के खम्भे और भाग के रूप में ऊँचे उठाए गए थे, वे सोने से मढ़े गए थे। और क्योंकि पटिए चाँदी की कुर्सियों पर खड़े थे इसलिए वे मजबूती से लगाए गए थे और कभी डगमगाए नहीं। उसी प्रकार, हम लोगों जो पानी और आत्मा से नया जन्म पाए हुए है उनका विश्वास भी कभी न बदलनेवाला है। जिस प्रकार बबूल की लकड़ी को जिस सोने से मढ़ा गया था वह कभी नहीं बदला, नाही सोने के समान हमारा विश्वास कभी डगमगाया, आपके और मेरे लिए, बबूल की लकड़ी जो केवल आग से जलाई जा सकती है, उसने हमें इस प्रकार सम्पूर्ण रीति से बचाया है।
इसके कारण, हम परमेश्वर के बहुत आभारी है। कोई फर्क नहीं पड़ता की यह दुनिया प्रचुर पाप से भरी हुई है, फिर भी हम धर्मीओं के हृदय में निर्दोष विवेक और विश्वास है जो सोने के जैसा चमकता है। हम सब धर्मी इस विश्वास के द्वारा ऐसा जीवन जी पाएंगे जो जगत को जित लेता है। प्रभु के वापिस लौटने के दिन तक, और यहाँ तक की हम उसके राज्य में है, फिर भी हम इस विश्वास की प्रसंशा करेंगे। हम हमेशा प्रभु की स्तुति करेंगे जिसने हमें बचाया है और हमारे परमेश्वर की स्तुति करेंगे जिसने हमें यह विश्वास दिया है।
हमारे सच्चे विश्वास को किसी भी परिस्थिति में हिलाया नहीं जा सकता क्योंकि यह चट्टान पर बना हुआ है। इसके बाद से, जब तक हम परमेश्वर के सामने खड़े नहीं होते तब तक इस पृथ्वी पर जीवन जीते हमारे साथ जो कुछ भी हो लेकिन हम विश्वास के द्वारा हमारे हृदय की रक्षा करेंगे। यहाँ तक की इस संसार में सब कुछ नाश हो जाए, और चाहे यह संसार पाप में डूब जाए, और यहाँ तक की यह संसार सदोम और अमोरा से भी बूरा बन जाए, हम इस संसार का अनुसरण नहीं करेंगे, लेकिन हम परमेश्वर पर विश्वास करेंगे, हम उसकी धार्मिकता की खोज करेंगे, और हम निरंतर यीशु के उद्धार की दो सेवकाई (यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु) का प्रसार करेंगे, जो परमेश्वर का सच्चा अनुग्रह है।
मैं परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा पूर्ण रूप से विस्मित हूँ, की कैसे हमने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास किया। हम किस प्रकार इस सुसमाचार को जान पाए और विश्वास कर पाए और हम किस प्रकार परमेश्वर के कार्य को कर पाए उसके लिए मैं बहुत ज्यादा आभारी हूँ। जिस प्रकार पानी और आत्मा का सुसमाचार परमेश्वर का अनुग्रह है जो उसने हमें मुफ्त में दिया है, इसलिए हम परमेश्वर को केवल हमारे विश्वास के द्वारा धन्यवाद दे सकते है और उसके वापिस लौटने के दिन तक इस सुसमाचार का प्रसार कर सकते है। 
हमें यह सत्य देने के लिए मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ।