उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-31] ( निर्गमन २८:१५-३० ) न्याय की चपरास

( निर्गमन २८:१५-३० )
“फिर न्याय की चपरास को भी कढ़ाई के काम का बनवाना, एपोद के समान सोने, और नीले, बैंजनी और लाल रंग के और बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े की उसे बनवाना। वह चौकोर और दोहरी हो, और उसकी लम्बाई और चौड़ाई एक एक बित्ते की हो। और उसमें चार पंक्‍ति मणि जड़ाना। पहली पंक्‍ति में तो माणिक्य, पद्मराग और लालड़ी हों; दूसरी पंक्‍ति में मरकत, नीलमणि और हीरा : तीसरी पंक्‍ति में लशम, सूर्यकांत और नीलम; और चौथी पंक्‍ति में फीरोज़ा, सुलैमानी मणि और यशब हों; ये सब सोने के खानों में जड़े जाएँ। और इस्राएल के पुत्रों के जितने नाम हैं उतने मणि हों, अर्थात् उसके नामों की गिनती के अनुसार बारह नाम खुदें, बारहों गोत्रों में से एक एक का नाम एक एक मणि पर ऐसे खुदे जैसे छापा खोदा जाता है। फिर चपरास पर डोरियों के समान गूँथे हुए चोखे सोने की जंजीर लगवाना; और चपरास में सोने की दो कड़ियाँ लगवाना, और दोनों कड़ियों को चपरास के दोनों सिरों पर लगवाना। और सोने के दोनों गूँथे जंजीरों को उन दोनों कड़ियों में जो चपरास के सिरों पर होंगी लगवाना; और गूँथे हुए दोनों जंजीरों के दोनों बाकी सिरों को दोनों खानों में जड़वा कर एपोद के दोनों कन्धों के बंधनों पर उसके सामने लगवाना। फिर सोने की दो और कड़ियाँ बनवाकर चपरास के दोनों सिरों पर, उसकी उस कोर पर जो एपोद के भीतर की ओर होगी लगवाना। फिर उनके सिवाय सोने की दो और कड़ियाँ बनवाकर एपोद के दोनों कन्धों के बंधनों पर, नीचे से उसके सामने और उसके जोड़ के पास एपोद के काढ़े हुए पट्टे के ऊपर लगवाना। और चपरास अपनी कड़ियों के द्वारा एपोद की कड़ियों में नीले फीते से बाँधी जाए, इस रीति वह एपोद के काढ़े हुए पट्टे पर बनी रहे, और चपरास एपोद पर से अलग न होने पाए। जब जब हारून पवित्रस्थान में प्रवेश करे, तब तब वह न्याय की चपरास पर अपने हृदय के ऊपर इस्राएलियों के नामों को लगाए रहे, जिससे यहोवा के सामने उनका स्मरण नित्य रहे। और तू न्याय की चपरास में ऊरीम और तुम्मीम को रखना, और जब जब हारून यहोवा के सामने आए, तब तब वे उसके हृदय के ऊपर हों, इस प्रकार हारून इस्राएलियों के लिए यहोवा के न्याय को अपने हृदय के ऊपर नित्य लगाए रहे।”
 

आइए अब हम हमारे ध्यान को चपरास की ओर लगाते है जिसके द्वारा महायाजक इस्राएल के लोगों का न्याय करता था। उपरका भाग हमें कहता है की न्याय की चपरास को कपड़े से चौकोर और दोहरे नाप से बनाया था और उसकी लम्बाई और चौड़ाई एक एक बित्ते की थी। इस कपड़े को सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को एकसाथ मिलाकर बुना गया था। इस कपड़े के ऊपर चार पंक्ति में बारह कीमती मणि लगाए गए थे। परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा था की वह उरीम और तुम्मीम को भी न्याय की चपरास पर लगाए। यहाँ उरीम और तुम्मीम का मतलब है ‘प्रकाश और संपूर्णता।’ 
 

महायाजक के न्याय का मापदंड

जैसा की हम जानते है, हर फैसले को सम्बंधित मानकों और नियमो और विनियमों के साथ मामले पर विचार करने के बाद सज़ा दी जाति है। तो फिर महायाजक किस आधार पर अपने लोगों का न्याय करता था? उसे अपनी चपरास के उरिम और तुम्मीम के द्वारा न्याय करना था, अर्थात्, ‘प्रकाश और सम्पूर्णता।’ उसे न्याय करने के लिए योग्य बनानेवाला बुनियादी विश्वास न्याय की चपरास को बनाने के लिए इस्तेमाल हुए पाँच कपड़ों में प्रगट हुआ सत्य था। दुसरे शब्दों में, यह उस विश्वास पर आधारित था जो सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बने सत्य पर विश्वास करता था जिससे महायाजक इस्राएल के सारे लोगों का न्याय करता था।
अलग तरीके से देखे तो, महायाजक का न्याय करने का मापदंड सत्य था, जो चपरास को बनाने के लिए इस्तेमाल हुए सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुआ ‘प्रकाश और सम्पूर्णता’ है। पाँच कपड़ों में प्रगट हुए सत्य पर विश्वास करने के द्वारा, महायाजक इस्राएल के सारे लोगों के लिए न्याय के अधिकार तक पहुँच सकता था; चाहे वे आत्मिक रीति से सही हो या गलत। 
चपरास को प्रत्येक महायाजक के हृदय के ऊपर रखा जाता था, और उसके अन्दर उरिम और तुम्मीम को रखा जाता था। यह दर्शाता है की महायाजक के हृदय के अन्दर प्रकाश और सम्पूर्णता का सत्य मजबूती से सथापित है की वह हमेशा इस्राएल के लोगों की अगुवाई करेगा और उनका न्याय करेगा की उनका विश्वास सही है या नहीं, वे परमेश्वर की पध्धति के मुताबिक़ अर्पण चढाते है या नहीं, और वे आज्ञाओं का पालन करते है या नहीं।
आज, हम, परमेश्वर के याजक को भी यही मानक धारण करना है और इस युग के लोगों का न्याय करना है। हमें भी उसी निष्कर्ष तक पहुँचना है की यदि लोग चपरास के लिए इस्तेमाल हुए पाँच कपड़े पर विश्वास करते है, तो फिर वे परमेश्वर के सामने जगत का प्रकाश बन सकते है, और यदि वे विश्वास नहीं करते तो उनको दण्ड दिया जाए। 
कुछ लोग यह बहस करते हुए इस वचन के साथ असहमत होगे की पहाड़ की छोटी पर पहुँचाने के दुसरे ओर भी रास्ते हो सकते है। पर्वतारोही यह कहेंगे, “आपने पिछली बार सबसे आसान रास्ता चुना था, लेकिन मैं इस पहाड़ को जितने के लिए पूर्व की ओर का सबसे कठिन रास्ता लूँगा।” निश्चित ही, जब पहाड़ को चढ़ने की बात अति है, तब ऐसे दुसरे रास्ते सम्भव है। हालाँकि, जब आत्मिक स्तर की बात आती है, जब किसी भी तरह का समजौता सम्भव नहीं है। केवल एक ही मानक है जो परमेश्वर ने स्थापित किया है। हमें परमेश्वर के सामने जगत की ज्योति बनने के लिए, हमारे पास बहुत सारे तरीके नहीं है, लेकिन केवल एक ही रास्ता है: यह रास्ता है सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए चमकते उद्धार के सत्य सत्य पर विश्वास करना, जो चपरास और एपोद की सामग्री है, और इस प्रकार हम हमारे पाप की माफ़ी प्राप्त कर सकते है और परमेश्वर की निज संतान बन सकते है। 
जगत की ज्योति बनने के लिए कोई ओर रास्ता नहीं है लेकिन यह विश्वास करना है की परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से हमारे पापों को मिटाया है और हमें धर्मी बनाया है। महायाजक के द्वारा पहने गए वस्त को बनाने की सामग्री के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा ही केवल पापी धर्मी बन सकता और अपूर्ण सम्पूर्ण बन सकता है। उसी तरह, जब हमारा न्याय होता है की हम परमेश्वर के सामने उद्धार पाए हुए है या नहीं, तब हमारा न्याय पानी और आत्मा के सुसमाचार के वचन के आधार पर होता है जो सत्य की प्रकाशित ज्योति बना है।
यदि हम चाहते है की परमेश्वर के सामने हमारा सही न्याय हो की हम स्वर्ग में जाएंगे की नरक में, तो हमारे पास यह विश्वास होना चाहिए जो न्याय की चपरास को बनाने की सामग्री को जानता और विश्वास करता है। हमारे लिए दुसरे लोगों को देखने और इस योग्य बनने की वे पानी और आत्मा के सत्य पर पूरे हृदय से विश्वास करते है की नहीं, सबसे पहले हमें खुद पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करना चाहिए। हमें यह पहचानना चाहिए की सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुआ सत्य यथार्थ है जो हमें पाप की माफ़ी के बारे में सही न्याय तक पहुचने के लिए योग्य बनाता है, और यही सत्य है जो सही न्याय की गवाही देता है। क्या आप अब इसे समझ सकते है?
तो फिर वो कौन है जो आज पाप की माफ़ी पर सही न्याय को प्रस्तुत कर सकता है? यह यीशु मसीह है, स्वर्ग का अनन्त महायाजक। यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के द्वारा मनुष्यजाति के सारे पापों को खुद की देह पर ले लिए, और क्रूस पर मरने और मृत्यु से फिर जीवित होने के द्वारा उसने हमेशा के लिए हमें जगत के पापों से छुडाया है। इसलिए, जोई कोई भी इस सत्य के मुताबिक़ यीशु मसीह पर विश्वास करता है वह राजमान्य याजक बन सकता है और लोगों को सही तरीके से न्याय करने का प्रकाश प्राप्त कर सकता है। अब, हम जो नया जन्म पाए हुए है उनके पास परमेश्वर के दिए हुए मानक यानी की पानी और आत्मा के सुसमाचार के मुताबिक़ उद्धार न पाए हुए लोगों का न्याय करने का कार्य है। और हमें उच्च न्यायाधीश यीशु मसीह के सामने यह कार्य बड़ी विश्वास योग्यता के साथ करना है।
कुछ ऐसे लोग है जिन्हें हम आत्मिक याजक के द्वारा प्रस्तुत किया गया न्याय पसंद नहीं है। वे हमारे खिलाफ में खड़े होते है और कहते है, “आप परमेश्वर नहीं है! आप केवल मेरी तरह एक कमज़ोर मनुष्य है, आप कैसे यह तय कर सकते है की मैंने मेरे पापों की माफ़ी पाई है या नहीं पाई? पापियों का सही न्याय केवल परमेश्वर के द्वारा ही प्रस्तुत किया जाता है! आप होते कौन है? मेरा उद्धार हुआ है या नहीं यह न्याय करने की आपकी हिम्मत कैसे हुई? यह केवल परमेश्वर जानता है। क्या आप परमेश्वर है? क्या आपको ऐसा लगता है की आप दूसरों से बहेतर है?” 
आत्मिक याजकों का फैसला त्रुटिरहित है उसका कारण यह है की उन्हें परमेश्वर के द्वारा ऐसा अधिकार दिया गया है। जब परमेश्वर का याजक यह फैसला करता है की क्या सही और क्या गलत, तब हमें इस न्याय पर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि यह सही न्याय है। जैसे डॉक्टर मरीज की बिमारी का पता लगाते है, उसी रूप से आत्मिक याजक आत्मा की जांच करते है और फैसला करते है की क्या वह अभी भी पापी है या धर्मी बना है। 
नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के विश्वास को मानने के द्वारा हम आत्मिक याजक बन सकते है। यह आत्मिक याजक वो है जिन्होंने अपने पापों से माफ़ी पाई है और सत्य के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की ओर से पवित्र आत्मा पाया है। जो लोग इस प्रकार याजक बने है वे पापी और धर्मी के बिच पहचान कर सकते है। क्योंकि हमने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए सुसमाचार को सुनने और विश्वास करने के द्वारा पाप की माफ़ी पी है इसलिए अब हम पापियों को चंगा करने और उन्हें यीशु मसीह की ओर अगवाई करने के लिए समर्थ है।
 

जब लोग आपके याजकीय पद को चुनौती देते है तब आपको बहादुरी दिखानी है

पापी खुद के विचारों में धर्मी के द्वारा प्रस्तुत किए गए न्याय के सामर्थ्य को कम करने की कोशिश करते है। हालाँकि, और भी बुरा यह है की शायद हम भी नया जन्म पाने के बाद भी खुद के याजकीय पद से आश्वस्त नहीं हो सकते। जब हम नया जन्म पाए हुए लोग दूसरों का न्याय करते है, तब हमारे लिए यह सोचना सम्भव है की, “क्या मैं अभिमानी नहीं बन गया? क्या मैं यहाँ गलती नहीं कर रहा?” लेकिन यहाँ कुछ भी गलत नहीं है, जो लोग आत्मिक रूप से परमेश्वर के याजक बने है केवल वे ही आत्मिक न्याय को सही रीति से कर सकते है। इसलिए, जब लोग न्याय करने के हमारे अधिकार को चुनौती देते है तब हमें हिम्मतवान बनना चाहिए। यीशु ने अपने चेलों को यह अधिकार दिया है और कहा है, “जिनके पाप तुम क्षमा करो, वे उनके लिए क्षमा किए गए है; जिनके तुम रखो, वे रखे गए है” (यूहन्ना २०:२३)। जो लोग आत्मिक याजक बने है वे दूसरों को उस सुसमाचार के द्वारा अगुवाई दे सकते है जिसके द्वारा उन्होंने पापों की माफ़ी पाई है।
पूरे संसार में, कई सारे ऐसे संत है जिन्होंने हमारी साहित्यिक सेवकाई के द्वारा पापों की माफ़ी पाई है। पाप की इस माफ़ी के साथ साथ परमेश्वर ने उन्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ्य भी दी है ताकि वे भी आत्मिक रूप से दूसरों को पहचान सके की उन्होंने पापों की माफ़ी पाई है या नहीं। जो लोग यह जानते है की सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा उन्हें क्या कह रहा है उनके पास दूसरो का न्याय करने का सामर्थ्य है। इन याजको के द्वारा, परमेश्वर ने लोगों को उनके पाप और दण्ड से बचाया है। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हम आत्मिक रूप से परमेश्वर की संतान बन पाए है।
परमेश्वर की संतान बनने के बाद, हम आत्मिक याजक बनत है, और इसलिए हमारे पास उन दोनों प्रकार के लोगों का न्याय करने का अधिकार है जिन्होंने पापों की माफ़ी पाई है जिन्होंने नहीं पाई। हमें निसंकोच होकर पापोयों को यह कहना चाहिए की वे अपने पापों के कारण नरक की ओर आगे बढ़ रहे है और उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के दवाराव उनके पापों की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए। हमें अपने साथी विश्वासियों का भी न्याय करना चाहिए जो पहले ही पानी और आत्मा से नया जन्म पा चुके है ताकि हम सही रास्ते पर उनको अगुवाई दे सके। 
आपको ऐसा नहीं सोचना चाहिए की यह हमारे यानी की नया जन्म पाए हुए लोगों के लिए उन पापियों का न्याय करना गलत है जिन्होंने अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त नहीं किया है। दुसरे शब्दों में, आपको यह नहीं सोचना चाहिए की आपके लिए ऐसे पापी लोगों का न्याय करना गलत है। उसके विपरीत, हम आत्मिक याजकों के रूप में हमेशा अपने सिने पर न्याय की चपरास लेकर चलते है, इसलिए हमें हमारे कार्य को ओर भी ज्यादा प्रबलता से परिपूर्ण करना चाहिए। दूसरी सारी चीजो को एक तरफ रखते हुए, हमें परमेश्वर की ओर से इन पापियों को नरक का दण्ड देना चाहिए। फिर जाके यह पापी आत्मि याजकों के न्याय को परमेश्वर के न्याय के रूप में पहचानेंगे, इस न्याय का स्वीकार करेंगे, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए पापों की माफ़ी को साफ़ करने के परमेश्वर के अनुग्रह पर विश्वास करेंगे, और फिर वे अपने सारे पापों से उद्धार पाएंगे। इसी लिए यदि न्याय विश्वास से प्रस्तुत किया जाए, तो फिर यह सही न्याय है।
तो फिर हम किस मानक के द्वारा यह जान सकते है की दूसरों ने पापों की माफ़ी पाई है या नहीं? हम इस बात को सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े पर विश्वास करनेवाले भरोशे के आधार पर पहचान सकते है। अलग तरीके से देखे तो,  हम आत्मिक याजक पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा दूसरों का न्याय कर सकते है: यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया, क्रूस पर मरा, दफनाया गया और फिर मृत्यु से जीवित हुआ, और इस प्रकार हमारे सारे पापों को साफ़ किया और उन सारे पापों के दण्ड को सहा। जो लोग इस सत्य पर विश्वास करते है वे वो लोग है जिन्होंने पापों की माफ़ी पाई है, और जो लोग इस प्रकार विश्वास नहीं करते वे पापी के जैसे दण्ड को प्राप्त करने के योग्य है।
धर्मी के लिए न्याय का मानक – अर्थात्, उन्होंने आत्मिक तौर पर पूरे मन से जीवन जिया है या नहीं – भी इस बात पर आधारित है की उन्होंने कितनी अच्छी तरीके से पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा की है। बहरहाल, सारे न्याय के लिए एक ही प्रश्न मुख्य मानक के लिए समसे ज्यादा महत्वपूर्ण है की क्या व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता है या नहीं। जो व्यक्ति परमेश्वर के सामने इस असल सुसमाचार पर विश्वास नहीं करता वह पापी बना रहता है। कोई भी व्यक्ति यदि अपने विश्वास से पुराने नियम के चारों कपड़ो में से किसी एक को भी निकाल देता है – अर्थात्, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़ा और बटी हुई सनी का कपड़ा – वह हमेशा अपने पापों से उद्धार पाए बिना रहेगा, क्योंकि परमेश्वर के उद्धार के लिए इन चारो कपड़ों का विश्वास अनिवार्य है। 
आजके मसीहियों के बिच में, ऐसे बहुत सारे लोग है जो कहते है की वे केवल क्रूस पर के यीशु के लहू पर विश्वास करने के द्वारा नया जन्म पा चुके है। जो विश्वासी केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करता है उनके विश्वास का न्याय करते हुए हम निष्कर्ष निकाल सकते है की उनका विश्वास अपर्याप्त है क्योंकि उनके विश्वास से नीले कपड़े (यीशु का बपतिस्मा) को बहार निकाल दिया गया है। क्या यीशु जब क्रूस पर मारा तब उसने मनुष्यजाति के पापों को ले लिया था? यीशु के लिए क्रूस पर चढ़ना, अपना लहू बहाना, और क्रूस पर मरना यह इस लिए सम्भव हुआ क्योंकि उसने पहले ही यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यरदन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों को खुद पर ले लिया था। अगर यीशु ने यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा नहीं लिया होता, तो जगत के सारे पाप कैसे उस पर पारित होते? क्योंकि यीशु मसीह के बपतिस्मा के द्वारा हमारे पाप उसकी देह ऊपर पारित किए गए इसलिए मसीह ने हमारे उद्धार को परिपूर्ण करने के लिए जगत के सारे पापों को अपने कंधो पर उठाया, क्रूस पर चढ़ा, और मरते दम तक अपना लहू बहाया। 
यीशु को क्रोस पर चढ़ाया गया क्योंकि जब उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लिया तब उसने मनुष्यजाति के पापों का स्वीकार किया था। लेकिन अपने बपतिस्मा के लिए, वह हमारे पापों को कैसे ले सकता था? पिता परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने के लिए वह क्रूस पर कैसे चढ़ सकता है? दुसरे शब्दों में, यदि यीशु मसीह ने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को उठाया नहीं होता तो वह कैसे क्रूस पर मर सकता था? क्या ऐसा नहीं है? यदि यीशु मसीह ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा नहीं लिया होता तो आपके सारे पाप आज भी आपके हृदय के साथ चिपके हुए होते। यदि यीशु मसीह की देह ने जगत के पापों को नहीं लिया होता, तो फिर हमारी जगह पर क्रूस पर मरने के लिए उसके पास क्या कारण था?
 

पानी और आत्मा के सुसमाचार की अज्ञानता के कारण उठे हुए प्रश्न

ऐसे कुछ लोग है जो ऐसा पूछ सकते थे, “यदि यह सच है की यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे पापों को ले लिया है, तो फिर इसका मतलब है की यीशु की देह पर पाप थे, और यदि ऐसा है तो, किस प्रकार पापी यीशु पापियों का उद्धारकर्ता बना?” 
यह निराश करनेवाला प्रश्न पानी और आत्मा के सुसमाचार की अज्ञानता की वजह से उठता है। जब यीशु ने बपतिस्मा लिया तब उसने अपनी देह पर मनुष्यजाति के पापों को उठाया। दुसरे शब्दों में, उसने जगत के पापों को अपनी आत्मा के ऊपर नहीं लिया था। बपतिस्मा लिए हुए यीशु का दैवीय स्वभाव सम्पूर्ण रीति से पवित्र था। उसने केवल अपनी देह में बपतिस्मा लिया था, इसलिए उसने जगत के पापों को केवल अपनी देह पर उठाया। क्योंकि यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया इसलिए वह क्रूस पर चढ़ा और हमारे पापों के लिए दण्ड सहा, क्रूस पर अपना लहू बहाया और मर गया। यीशु ने खुद इस संसार में कोई भी पाप नहीं किया था (२ कुरिन्थियों ५:२१)। लेकिन क्योंकि यीशु मसीह ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के बाद जगत के पापों को खुद पर ले लिया इसलिए जगत के यह पाप उसकी खुद की देह पर डाले गए। यदि ऐसा नहीं होता तो, यीशु मसीह कभी भी हमारा उद्धारकर्ता नहीं बनाता।
मैं ऐसे अनजान लोगों से यह कहना चाहता हूँ की यीशु ने क्रूस पर जगत के पापों को अपने ऊपर नहीं लिया था। मैं आपको फिर यह कहता हूँ: “यीशु क्रूस पर मरा क्योंकि उसने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यरदन नदी में बपतिस्मा लेकर जगत के पापों को खुद पर ले लिया था।” यदि यह सच नहीं है तो यीशु के पास जगत के पापों को उठाने का ओर कोई मौक़ा नहीं था। यद्यपि यीशु सारे पापियों के लिए बलिदान का मेम्ना बना, लेकिन मूलरूप से कहू तो, उसके हृदय में कोई भी पाप नहीं था। ऐसा नहीं है की यीशु के अन्दर उसके जन्म से ही पाप थे, लेकिन उसके बजाए, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा उसने जगत के पापों का स्वीकार किया जो उसकी देह पर डाले गए। इस रीति से यीशु जगत के सारे पापों के लिए उचित अर्पण बना। दुसरे शब्दों में, क्योंकि यीशु ने बपतिस्मा लेने के द्वारा मनुष्यजाति के पापों को ले लिया, इसलिए उसे अपना लहू बहाना पडा, क्रूस पर मरना पडा। आख़िरकार, वह मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार वह हमारा उद्धारकर्ता बना। ऐसा करने के द्वारा, उसने पाप के सारे दण्ड को सहा। इसलिए, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करनेवाले भरोषे के द्वारा, यदि आपके हृदय में अभी भी पाप है तो आपको अपने पापों से उद्धार पाना चाहिए।
 

भ्रष्ट मसीहियत का इतिहास

प्रारम्भिक कलीसिया के युग में, यीशु के बपतिस्मा और क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वारा पौलुस और पतरस और प्रारम्भिक संत आत्मिक याजक के रूप में कार्य कर पाए। ऐतिहासिक रूप से कहूँ तो, प्रारम्भिक कलीसिया और कलीसिया के फाधर के युग के बितने के बाद पानी और आत्मा के सुसमाचार के भ्रष्ट होने की शुरुआत हुई, और A.D. ३१३ में मिलान के आदेश ने इस बुरे हाल को बढ़ावा दिया। मैं विश्वास करता हूँ की इस भ्रष्टाचार के कारण आज मसीही पापी कूद रहे है। तब से, नामधारी मसीहियों का एक समूह खड़ा हुआ है, और वे केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वार ही पापों की माफ़ी पाने का दावा करते है। तब से लेकर आज तक, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुआ सुसमाचार की गवाही नहीं दी गई लेकिन उसे छिपाया गया। यह बेचैन करनेवाला सत्य है की ऐसे बहुत सारे मसीही पापी खड़े हुए है जो मसीहियत को केवल इस जगत के धर्म के रूप में मान रहे है।
जब हम आजके मसीहियों का विश्वास के आधार पर न्याय करते है जिसने हमें आत्मिक याजक बनने के लिए योग्य बनाया है, तब हम देख सकते है की उनमे से कई सारे लोगों ने पापों की माफ़ी देनेवाले उद्धार को गलत समझा है। हम देख सकते है की आज की मसीहियत के सारे संस्थाओं के विश्वास के कथन एक दूसरों से मिलते जुलते है। वे केवल अपने संस्था के नाम के साथ अलग है; जब उनके विश्वास की बात आती है, तब वे सब यह सोचते है की उन्होंने केवल क्रूस के लहू पर विश्वास करने के द्वारा ही छूटकारा पाया है। लेकिन उनके हृदय को पापों की माफ़ी नहीं मिली है। वे पानी और आत्मा के सुसमाचार से अनजान होने के बावजूद भी खुद को अच्छा मसीही मानते है। हम देख सकते है की भले ही ये लोग यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में मानते हो और क्रूस के लहू पर विश्वास करते हो, वे आज भी केवल पश्चाताप की प्रार्थना की धून में है, क्योंकि वे अभी भी उस सत्य को नहीं जानते जो उन्हें अपने पापों को साफ़ करने के योग्य बनाता है। दुसरे शब्दों में, ऐसे कई लोग है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार के सामर्थ से अभी भी अनजान है और फिर भी अपने पाप धोने की कोशिश करते है।
इसी लिए हम एक बार ओर इस पूरे संसार के लोगों को पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रसार कर रहे है। क्योंकि पूरी दुनिया में लोग यीशु के यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से लिए हुए बपतिस्मा के बारे में अनजान है, इसलिए हमें लगा की हमें तम्बू को बनाने के लिए इस्तेमाल हुई सामग्री नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। हम सब लोग संसार के लोगों को यह प्रचार करते है की यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के पापों को उठाया इसलिए उसने क्रूस पर चढ़ने और मरने के द्वारा सारे पापों का दण्ड सहा। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार को नहीं जानते उन्हें यह प्रचार करना हमारा काम है। इसलिए हमें महसूस हुआ की उन्हें यह असल सुसमाचार सुनने का मौक़ा देना चाहिए ताकि वे विश्वास कर सके।
कुछ देशों में, मसीही विश्वास का इतिहास १,००० या २,००० साल पुराना है। लेकिन यह स्पष्ट है की बहुत सारे मसीहियों को पानी और आत्मा केव सुसमाचार के बारे में समझ नहीं है। जब हम तम्बू में प्रगट हुए सुसमाचार के सत्य के आधार पर उनका न्याय करे, तो उनमे बहुत सारे ऐसे लोग भी है जिन्हें यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में फिर से विश्वास करना पडेगा। मैं यहाँ पर यह कहना चाहता हूँ की वे चाहे कितने भी लम्बे समय से यीशु पर विश्वास करते हो, लेकिन यदि अभी भी उन्होंने पापों की माफ़ी नहीं पाई है तो फिर हमें उन्हें फिर से यीशु पर सही तरीके से विश्वास करने की ओर लेकर जाना चाहिए। हमें तुरंत ही उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में सिखाना चाहिए। प्रेरित पौलुस के पास भी हमारे जैसी ही सोच थी, वह कहता है, “यदि मैं सुसमाचार सुनाऊँ, तो मेरे लिए कुछ घमण्ड की बात नहीं; क्योंकि यह तो मेरे लिये अवश्य है। यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊँ , तो मुझ पर हाय!” (१ कुरिन्थियों ९:१६)। 
 

यीशु मसीह परमेश्वर है जो सारे पापियों को बचाने के लिए मनुष्य की देह में आया

कुछ लोग यीशु परमेश्वर का पुत्र और उनका उद्धारकर्ता है यह विश्वास करते हुए भी विश्वास नहीं करते की यीशु परमेश्वर है। वे यीशु की बैंजनी कपड़े की सेवकाई पर विश्वास नहीं करते। वास्तव में ऐसे लोगों का नाश होगा, क्योंकि उनके हृदय में ऐसा विश्वास नहीं है जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सम्पूर्ण सत्य पर विश्वास करता हो और इसलिए उन्होंने पापों की माफ़ी नहीं पाई है। जो लोग वास्तव में अपने हृदय में विश्वास नहीं करते की प्रभु ने उनके सारे पापों को मिटा दिया है उनके हृदय में पवित्र आत्मा नहीं है क्योंकि उनके पास वो वचन नहीं है जो उनके पापों के साफ़ होने की गवाही देता हो। 
जब हम यीशु को हमारा “प्रभु” कहते है, तब यहाँ “प्रभु” शब्द का मतलब हैं स्वामी, यह दर्शाता है की हम विश्वास करते है की यीशु खुद परमेश्वर है। परमेश्वर का यह पुत्र भी खुद पर्मेश्व्कार है। इसको समझाने के लिए, मैं अकसर निम्नलिखित उपमा का प्रयोग करता हूँ। जब मनुष्य गर्भ धारण करता है तब वह दुसरे मनुष्य को जन्म देता है। जब कुत्ते जैम देते है तो वे पिल्लो को जन्म देते है। दुसरे शब्दों में, जिस प्रकार भिन्न भिन्न प्रकार और प्रजातियाँ है, वैसे ही परमेश्वर पिता ने केवल एक पुत्र को ही जन्म दिया है, और वह भी परमेश्वर है (भजन संहिता २:७)। वह खुद अपने पाप में परमेश्वर के तुली है (फिलिप्पियों २:६), लेकिन उसने खुद को शून्य कर दिया और हमारी तरह मनुष्य बना। हमें पाप से बचाने के लिए, वह इस पृथ्वी पर आया, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और, हमारे सच्चे उद्धारकर्ता के रूप में, उसने हमें उद्धार का सच्चा विश्वास दिया है।
हालाँकि, ऐसे बहुत सारे लोग है जो इस बात का नकार करते है की यीशु परमेश्वर है। विद्यालयों में, वे खुले आम सिखाते है की यीशु चार संतों में से एक है जो प्राचीन समय में प्रगट हुए थे। ऐसा अभिप्राय कलीसिया के फाधर से शुरू हुआ है। भले ही उन्होंने अपने पूर्वज से सच्चे सुसमाचार को सुना था, उनमे से कुछ लोग अपने विश्वास में इतने दृढ थे की वे शहीद हो गए, लेकिन कुछ लोगों ने यीशु की दैवियता को नकार दिया। कलीसिया के कुछ फाधर ने साहित्य भी लिखे जो इस बात को बताते थे की यीशु परमेश्वर का पुत्र है लेकिन वह खुद परमेश्वर नहीं है।
हाल ही में, बहुत सारे धर्म विज्ञानीयों ने धार्मिक अनेकता को प्रोत्साहित करना शुरू किया है। उनके दावे है की लोग मसीहियत से अलग धर्म पर विश्वास करने के बावजूद भी पापों से उद्धार प्राप्त कर सकता है और स्वर्ग में प्रवेश कर सकता है। कैथोलिक उनमें प्रथम है जो इस प्रकार के मत को खुले आम घोषित करता है। ऐसे नामधारी मसीही इस बात को प्रोत्साहित करते है उसका कारण यह है की वे खुद लोग इस बात पर विश्वास नहीं करते की यीशु खुद परमेश्वर और सृष्टिकर्ता है। वे उस पर वचन के आधार पर विश्वास करना चाहते है, लेकिन वे इस सच्चे विश्वास को झूठी सिक्षा के बल पर नहीं मान सकते। वे मूर्ख लोग है जो बालू पर अपना घर बनाते है (मत्ती ७:२६)। उन्हें दुसरे धर्मों से सब कुछ सिखाना पसंद है। उदाहरण के तौर पर, कुछ पश्चिमी कलीसिया हप्ते में एक बार बौध्द मनन के कार्यक्रम का अनुसरण करते है। मानववादी दृष्टिकोण से देखे तो, ऐसा कार्यक्रम सुन्दर और उन्नतिशील लगता है। लेकिन जो कोई भी यह विश्वास नहीं करता की यीशु खुद परमेश्वर है वे पाप से उद्धार नहीं पा सकते। 
आपके बारे में क्या? आप कैसे विश्वास करते है? गलातियों १:१-३ में लिखा है, “पौलुस की–जो न मनुष्यों की ओर से और न मनुष्य के द्वारा, वरन् यीशु मसीह और परमेश्‍वर पिता के द्वारा, जिसने उसको मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है– और सारे भाइयों की ओर से जो मेरे साथ हैं, गलातिया की कलीसियाओं के नाम : परमेश्‍वर पिता और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।” परमेश्वर ने आदि में अपने वचन के द्वारा आकाश और पृथ्वी की रचना की। वचन आदि से था, और यह वचन खुद परमेश्वर था। इसलिए, संसार को यीशु मसीह के द्वारा रचा गया है, वचन का देहाधारण (१ यूहन्ना १:१, यूहन्ना १:१०)। इसका मतलब है की यीशु मसीह ओर कोई नहीं लेकिन खुद परमेश्वर है, वचन का परमेश्वर। यीशु मसीह सृष्टिकर्ता है जिसने इस ब्रह्मांड की रचना की है और उद्धारकर्ता है जो हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आया। हमारे लिए केवल यह विश्वास करना सही है की यह यीशु मसीह खुद परमेश्वर है जिसने स्वर्ग की महिमा का त्याग किया और व्यक्तिगत रूप में मनुष्य के देह में इस पृथ्वी पर आया।
अपने सेवकों के द्वारा, खुद परमेश्वर ने मसीहा के आने के बारे में भविष्यवाणी की थी, और इन भविष्यवाणी के मुताबिक़ मसीहा कुवारी मरियम के गर्भ में आया और मनुष्य की देह में जन्म लिया। अर्थात्, जिसका गर्भधारण हुआ और जिसने मनुष्य के शरीर के द्वारा जन्म लिया वह खुद परमेश्वर है। और जब वह ३० साल का हुआ, तब स्वर्ग के महायाजक के रूप में उसने बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पाप और पूरी मनुष्यजाति के पापों को खुद के ऊपर ले लिया। फिर वह क्रूस पर मरा, मृत्यु से जीवित हुआ, और इस प्रकार उसने हमें हमारे पापों से सम्पूर्ण रीति से बचाया। दुसरे शब्दों में, यीशु हमारा सच्चा और अनन्त उद्धारकर्ता बना।
अपने मौलिक रूप में, यीशु खुद परमेश्वर है जो परमेश्वर पिता के तुल्य है। हमारे लिए, यह यीशु जो मौलिक रूप से परमेश्वर पिता के तुली है वह वही परमेश्वर है। यीशु मसीह का पिता भी हमारे लिए परमेश्वर है, इसलिए यीशु मसीह भी परमेश्वर है। क्यों? क्योंकि जगत को उसके द्वारा रचा गया, और उसके द्वारा हमें भी मनुष्य के रूप में बनाया गया। परमेश्वर उत्पत्ति १:२६ में कहता है, हम मनुष्य को आने स्वरुप के अनुसार अपनी समानता में बनाए।” जब परमेश्वर ने मनुष्य को अपनी समानता में बनाया, तब यीशु मसीह वहाँ था। वही है जिसने हमें बनाया है। वही है जिसने हमें बनाया है और वही है जिसने हमें पाप से बचाया है। क्योंकि यीशु मसीह ने हमें उद्धार दिया है, और क्योंकि वह खुद परमेश्वर है, इसलिए हम उस पर हमारे उद्धार के प्रभु के रूप में विश्वास करते है। उसी रूप से, आपको और मुझे भ्रमित नहीं होना है, लेकिन हमारे हृदय में हमें प्रभु परमेश्वर पर विश्वास करना है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा उद्धारकर्ता के रूप में आया।
ऐसे बहुत सारे लोग है जिनके हृदय पापी होने के बावजूद भी वे दावा करते है की वे परमेश्वर की संतान है। क्या उनके हृदय पापी होने के बावजूद भी वे परमेश्वर के लग बन सकते है? क्या उनके हृदय पापी होने के बावजूद भी वे स्वर्ग में जा सकते है? निश्चित ही नहीं! कोई फर्क नहीं पड़ता की वे मसीही है या नहीं; यदि उन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार से अनजान होने की वजह से पापों की माफ़ी नहीं पाई है तो उनमे से कोई भी स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर सकता। फिर भी पूरी दुनिया के मसीही समुदाय में, ऐसे बहुत सारे लोग है जिसके पास ऐसा विश्वास है।
तो फिर ऐसे लोगों को कौन पानी और आत्मा का सही सुसमाचार प्रसार करेगा? हमें – अर्थात्, आप और मैं – उनके लिए सही न्याय करना चाहिए और उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। तम्बू में प्रगट हुआ विश्वास ऐसा विश्वास नहीं है जो केवल एक या दो बार प्रचार किया जाना चाहिए और फिर छोड़ देना चाहिए। यह सच्चे उद्धार का सत्य है जिसे प्रभु के वापिस आने के दिन तक निरंतर प्रचार करना चाहिए। 
क्या आप इस पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानते है जो आपको पापों की माफ़ी प्राप्त करने के लिए यिग्य बनाता है? यदि लोगों के अन्दर पाप है, तो फिर वे परमेश्वर की संतान नहीं है। उनके पास ऐसा विश्वास होना चाहिए जो उद्धार के सुसमाचार के सत्य पर विश्वास करता हो जो तम्बू की सामग्री के लिए इस्तेमाल हुए नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुआ था। हमें जगत के अन्त तक पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। क्या आप भी पानी और आत्मा के सुसमाचार को प्रचार करने में शर्मिदा है? पुराने दिनों में, जब परमेश्वर ने अपने सेवकों से कहा, “जाओ और भविष्यवाणी करना चालु रखो”, और उन्होंने निरंतर ऐसा किया, और जब परमेश्वर ने यशायाह से कहा, “जा नंगा होकर भविष्यवाणी कर,” तब वह गया और उसने नंगा होकर भविष्यवाणी की (यशायाह २०:२-५)। जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार को तम्बू में जिस तरह प्रगट हुआ है उसी प्रकार लोगों को प्रचार करते है तब वे परमेश्वर के क्रोध से बच सकते है। इसी लोए हमें निरंतर सुसमाचार का प्रसार करना चाहिए।
आपके बारे में क्या? क्या आपके हृदय में वास्तव में विश्वास के वचन है जो आपको सच्चा उद्धार देते है? जब जगत के लोगों के पास पापों की माफ़ी के वचन नहीं और अभी भी शैतान से रिश्ता रखते है, तब आप कैसे चुपचाप बैठ सकते है? आप केवल ऐसे बैठे नहीं रह सकते। इस पूरी दुनिया में हमारे सहयोगी है। वे स्पष्ट रूप से पाप की माफ़ी के सुसमाचार पर विश्वास करते है, पानी और आत्मा का सुसमाचार। उनमें से कुछ लोगों ने हमारे सामने अंगीकार किया है की जब उन्होंने अपने सहकर्मियों को पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार किया तब उन्हें सताया गया। वे पानी और आत्मा के सुसमाचार के विरोधियों के सामने हिम्मतवान बने और कहा, “आप परमेश्वर के लोग नहीं है क्योंकि अभी भी आप के हृदय में पाप है। आप पानी और आत्मा के सुसमाचार पर अपने अविश्वास के गंदे पाप के कारण नरक के लिए आगे बढ़ रहे है। अब मैं आपको “भाई” कहकर नहीं बुला सकता, भले ही तुम मुझे ‘अपना भाई’ कहो, क्योंकि मैं आपकी तरह अब पापी नहीं हूँ।
हमें उन्हें ऐसा करने के लिए अगवाई नहीं करनी चाहिए, लेकिन उनके अन्दर जो पवित्र आत्मा है वह उनकी अगवाई करेगा की उन्हें क्या करना है। आपको अभित्रस्त होने की कोई जरुरत नहीं है, क्योंकि आपके हृदय के अन्दर पानी और आत्मा का सुसमाचार है जो दूसरो का न्याय करने के लिए आपके लिए मानक तैयार करेगा। दूसरों की पापों की माफ़ी को सही तरीके से पहचानने की आपकी योग्यता तम्बू में प्रगट हुए सुसमाचार के सत्य पर विश्वास करने के कारण आपको मिली है। हमें सत्य पर हमारे विश्वास के साथ परमेश्वर के सामने खड़ा होना चाहिए की नीले, बैंजनी, और लाल यह तीनो कपड़ो के द्वारा प्रभु ने हमें हमारे सारे पापों से बचाया है और हमें धर्मी बनाया है।
 

आइए हम उद्धार के सही मापदंड का इस्तेमाल करे

हम परमेश्वर के वचन को ‘अधिनियम’ कहते है। ‘अधिनियम’ शब्द हिब्रू शब्द कानेह और ग्रीक शब्द केनोन से आया है, दोनों शब्द मापदंड को दर्शाते है। जब हमें किसी वस्तु को नापने की जरुरत पड़ती है, तब हम उसे सही तरीके से नापने के लिए मापक या मापदंड का इस्तेमाल करते है। उसी रूप से, जब हमें किसी व्यक्ति के आत्मिक स्तर को नापने की जरुरत पड़ती है, अर्थात्, व्यक्ति ने नया जन्म पाया है या नहीं पाया, तब हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के मापदंड से उस व्यक्ति की जांच करनी चाहिए। अपने मापकसे ग्राहक के नाप को नापते हुए दरजी की तरह, हमें भी यह जांच करनी चाहिए की क्या वह व्यक्ति पाप से उद्धार पाया हुआ है या नहीं। इसे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य के द्वारा किया जाता है। दुसरे शब्दों में, परमेश्वर के इस वचन के आधार पर हमें व्यक्ति के विश्वास के सारे पहलू को देखना चाहिए और स्पष्ट रूप से अन्तर करना चाहिए की क्या इसके दायरे में है और क्या दायरे के बहार है।
खास तौर पर, हमें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के मापदंड के द्वारा हमारे विश्वास की जाँच करनी चाहिए, अर्थात्, पानी और आत्मा का सुसमाचार। यदि कोई व्यक्ति केवल बैंजनी और ला कपड़े के यीशु पर ही विश्वास करता है, तो उसके विश्वास को कलीसिया के राजकीय याजक के रूप में परमेश्वर के द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता। जो कोई भी अपने पापों से माफ़ी पाना चाहते है उन्हे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में प्रगट हुए उद्धार के पूर्ण सत्य पर विश्वास करना चाहिए। हम सब को यह विश्वास करना चाहिए की यीशु सरे मनुष्यों को पाप से बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आया, बपतिस्मा लेने के द्वारा सारे पापों को खुद पर ले लिया, क्रूस पर मरा, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार हमारा उद्धारकर्ता बना। हम प्रत्येक के पास सही न्याय का स्तर होना चाहिए। यह परमेश्वर के वचन पर आधारित है ताकि हम यह फैसला कर सके की लोग पापी है या धर्मी है। हम यह हमारे खुद के ज्ञान और भावना और आचरण के आधार पर नहीं कर सकते। यह कार्य आत्मिक याजकों को अपने लोगों के लिए पापार्पण चढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
अब इस युग में, आपको और मुझे जगत के सरे लोगों का न्याय सही मानक के साथ करना है। सारे लोगों के लिए समान मानक लागू होगा, हमारे बच्चे, पत्नियाँ, पति, पिता और माता, ससुरालवाले और पौते। हमें परमेश्वर के वचन के द्वारा दूसरों के विश्वास को जाँचना चाहिए। जो लोग याजक बन चुके है उन्हें न्याय के मापदंड को प्रत्येक व्यक्ति के हृदय पर रखना चाहिए। “क्या आप यीशु के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े को जानते और उस पर विश्वास करते है? यदि आप इस प्रकार विश्वास करते है, तो आपका उद्धार हो चुका है, लेकिन यदि नहीं करते, तो आपका उद्धार नहीं हुआ है।” हमारे लिए स्पष्ट न्याय को प्रस्तुत करना ही सही कार्य है।
यदि महायाजक ने पहले ऐसा ही किया है तो, फिर हमें भी आजके आत्मिक याजक के रूप में ऐसा ही करना चाहिए। यदि हम महायाजक के रूप में हमें जो करना है वह नहीं करते, तो फिर हम कभी भी परमेश्वर की फटकार से बच नहीं सकते। कुछ लोग कहते है, “सुसमाचार फैलाने का यह सही रास्ता नहीं है! यदि हम सब आपकी तरह सुसमाचार प्रचार करे, तो कौन उस पर विश्वास करेगा?” 
धर्म विज्ञान में, ‘सुसमाचार की कला’ नाम का एक पाठ्यक्रम है। यह किस प्रकार सुसमाचार प्रचार करना है उसके बारे में मार्गदर्शन देता है। बहुत पहले, ‘मित्रता सुसमाचार प्रचार’ शब्द प्रत्येक प्रचारक के होंठो पर था। इनके अनुयायि अभी भी सिखाते है की जब हम लोगों को सुसमाचार प्रचार करने की कोशिश करते है, तब हमें सबसे पहले उनसे दोस्ती करनी चाहिए और फिर धीरे धीरे उन्हें कलीसिया में लाना चाहिए। वे सही थे। वे यह भी कहते थे की जब लोग उनके सुसमाचार प्रचार की कोशिश के चलते यीशु पर विश्वास करने का फैसला करते थे, तब वे यीशु को प्राप्त करवाने के लिए कही जानी वाली पश्चाताप की प्रार्थना करवाते थे, ताकि मसीह उस व्यक्ति के हृदय में आ सके और वह उद्धार प्राप्त कर सके। 
लेकिन इस प्रयास का आखिरी परिणाम क्या था? क्या इसके बाद लोगों के हृदय से पाप निकल जाता था? ऐसा नहीं है। वे कलीसिया जाते है, लेकिन फिर भी उनके हृदय में पाप है – दुसरे शब्दों में, नया व्यक्ति केवल मसीहियत का नया धार्मिक वृत्तिक बन जाता है। ऐसा करने से लोग यीशु पर विश्वास करते है, फिर वे दशांश और धन्यवाद की भेंट देने लगते है। अन्त में, भले ही वे मसीही बने है, लेकिन वे परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकते, क्योंकि अभी भी उनके हृदय में पाप है। 
वे हमसे कहते है की सुसमाचार करने की हमारी पध्धति गलत है, और कहते है, “आप किसी व्यक्ति से केवल मुलाक़ात करने के बाद कैसे कह सकते है की उसके अन्दर पाप है या नहीं? आप कैसे उद्धार की समस्या को तुरंत उठा सकते है, उन्होंने उद्धार पाया है या नहीं पाया उसका न्याय प्रस्तुत कर सकते है, जब की आप उन्हें जानते भी नहीं है?” निसन्देह, वे क्या कहते है उस पर हमें ध्यान देना चाहिए, क्योंकि जिस आत्मा को हम बचाना चाहते है उसका व्यक्तित्व कुछ ऐसा हो सकता है जिसे हमारे शब्दों के द्वारा चोट पहुचाई जा सकती है। लेकिन जल्दी या बाद में, हमें हमारे संपर्क में आए हुए अविश्वासियों को उद्धार का सुसमाचार सुनाना चाहिए। कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हमारा कितना करीबी दोस्त है, जब की हमें जल्दी या बाद में सुसमाचार का प्रचार करना है, तो हम विश्वास से सुसमाचार का प्रचार करने का मौक़ा गवा नहीं सकते। क्यों? यह इसलिए क्योंकि यदि अन्त में हम उन्हें इस सत्य के बारे में नहीं बताते तो हम सही तरीके से सुसमाचार का प्रचार नहीं करते।
इसलिए, उनके साथ हमारी सुसमाचार प्रचार की वार्तालाप में चाहे शुरू में या अन्त में हमें उनसे यह प्रश्न पूछना चाहिए, “क्या आपके हृदय में पाप है?” यदि उत्तर हाँ है, तो हमें उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। निसन्देह, हमारी प्रतीत होनेवाली आक्रमकता के लिए हमें उनके द्वारा फटकार लगाईं जा सकती है। लेकिन हम आत्मिक याजक है इसलिए, हमें यह याद रखना चाहिए की प्रत्येक लोगों को पानी और आत्मा के सुसमाचार प्रचार करना हमारा महत्वपूर्ण कार्य है।
 

एक प्रभु, एक बपतिस्मा, और एक परमेश्वर

हमने हमारे सारे पापों से माफ़ी पाई है, और हमारे जीवन का उद्देश्य पूरे जगत में सुसमाचार का प्रसार करना है। जब की हमें भी सुसमाचार प्रचारक की तरह पानी और आत्मा के सुसमाचार को प्रचार करने का कार्य दिया गया है, इसलिए हम साथ मिलकर काम करते है। हम ऐसा क्यों कर रहे है? क्योंकि हम एक ही परमेश्वर पर विश्वास करते है, हमने एक समान अनन्त जीवन को पाया है, और हम एक समान महिमा का आनन्द उठाते है। हम सब लोग एक दुसरे से भिन्न है, हम सबका अपना अपना व्यक्तित्व और चरित्र है, लेकिन हमने खुद को अलग किया और एक दुसरे के साथ जोड़ा उसका कारण है की हम केवल परमेश्वर के लिए जीवन जीते है। 
परमेश्वर ने उन लोगों के हृदय के ऊपर न्याय की चपरास रखी है जो आजके याजक बने है। और चपरास को बाँधा गया, “और चपरास अपनी कड़ियों के द्वारा एपोद की कड़ियों में नीले फीते से बाँधी जाए, इस रीति वह एपोद के काढ़े हुए पट्टे पर बनी रहे, और चपरास एपोद पर से अलग न होने पाए” (निर्गमन २८:२८)। यह भाग फिर से एक ओर बार इस बात पर जोर देता है की हमारे द्वारा किए गए सारे न्याय में यीशु का बपतिस्मा कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए, प्रेरित पौलुस भी यह कहने के द्वारा यीशु के बपतिस्मा के महत्त्व को बताता है, “एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। एक ही प्रभु है, एक ही विश्‍वास, एक ही बपतिस्मा” (इफिसियों ४:४-५)। 
चाहे लोगों की आत्मा ने उद्धार पाया हो या न पाया हो लेकिन हमारी यह जिम्मेदारी है की हम इस आधार पर लोगों का न्याय करे की वे पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है या नहीं करते। और जिन्हें अभी भी पापों की माफ़ी प्राप्त करना बाकी है, हमें उन्हें सुसमाचार सुनाना चाहिए, और जिन्होंने पापों की माफ़ी पाई है, हमें उनका स्वीकार करना चाहिए और वे अपने विश्वास में वृध्धि पैर इसलिए उनकी मदद करनी चाहिए। जब हमने पापों की माफ़ी प्राप्त की है तो क्या यह हमारे लिए सही होगा या गलत की हम आत्मिक रीति से न्याय की चपरास पहने? अलग तरीके से देखे तो, क्या हमारे लिए यह उचित है की हम किसी व्यक्ति के लिए उद्धार के सही न्याय को नकारे? यह सही नहीं है। हमें पूरे संसार में प्रत्येक लोगों को पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए जिन्होंने अभी भी उद्धार नहीं पाया है।
 

तो, क्या हम अपनी देह में सम्पूर्ण है?

जब हम पापियों का न्याय करते है, तब हम उनके कर्मो का न्याय नहीं करते। उसके बजाए, हम इस सच्चे सुसमाचार और परमेश्वर की धार्मिकता के आधार पर उनकी जांच करते है। उनके लिए सच्चा प्रकाश क्या है? पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की संतान बनना उनके लिए सच्चा प्रकाश है। परमेश्वर की संतान जगत की ज्योति है। तो फिर क्या इसका मतलब यह है की जिन्होंने पाप की माफ़ी पी है वे अपने कर्मों में सम्पूर्ण है? निसन्देह, उनके हृदय में वे सम्पूर्ण है। लेकिन उनकी देह में वे पूरी तरह अपर्याप्त है। 
हमारी देह में हम सब स्वार्थी, दुष्ट, अपर्याप्त और कमज़ोर है, लेकिन परमेश्वर के सामने हम उसके सम्पूर्ण लोग है। जिन लोगों के कार्य अपर्याप्त है लेकिन वे पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विशवास करते है तो क्या वे परमेश्वर की संतान है या नहीं? हम जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है वे परमेश्वर की संतान है जिनका उद्धार आत्मिक रीति से सम्पूर्ण है। दुसरे शब्दों में, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर विश्वास करनेवालों के कार्य सम्पूर्ण नहीं है, लेकिन उनका उद्धार सम्पूर्ण है। क्योंकि हमें बचानेवाला विश्वास सम्पूर्ण है, इसलिए हम परमेश्वर के अनुग्रह में एक दुसरे के साथ संगती कर सकते है। और क्योंकि हम नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के साथ हमारे सही फैसले तक पहुंचे है, इसलिए हमारा विश्वास और न्याय कभी भी दोषपूर्ण नहीं हो सकते।
परमेश्वर ने हमें न्याय के इस मापदंड को याजकों के हृदय पर रखने के लिए कहा है। हमें जगत के सारे लोगों को अपने हृदय में ग्रहण करना चाहिए। हमें उनकी आत्मा का स्वीकार करना चाहिए, उनके लिए प्रार्थना करनी चाहिए, और वास्तव में उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। इसी लिए हमारे हृदय में न्याय की चपरास हमेशा होनी चाहिए। और आज और कल, हमें हर पापी को पापी के रूप में न्याय करना चाहिए ताकि हम उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार कर सके।
यह मेरी इच्छा है की विश्वास का यह सत्य आपके हृदय में भी पाया जाए। यदि यह सत्य आपके हृदय में है, इसका मतलब है की सबका न्याय करने का अधिकार आपको दिया गया है। सत्य के इस वचन पर विश्वास करे। इस तरह हमेशा परमेश्वर के वचन के आधार पर अपने न्याय को रखे, और हर समय इस पर विश्वास करे और अपने पूरे हृदय से पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रसार करे।
हर रोज, मैं अपने हृदय में इस न्याय की चपरस को याद करता हूँ, परमेश्वर के सामने सब न्याय करता हूँ, और निरंतर सुसमाचार का प्रसार करता हूँ। वास्तव में, दोहराव सुसमाचार प्रचार करने का प्रभावशाली तरिका है। हम कितने मामूली लोग है! शिक्षाविद् दावा करते है की दोहराव के द्वारा दी गई शिक्षा सबसे पारंपरिक और प्रभावशाली है। एक भाषाविद ने एक बार कहा था की एक बच्चा एक शब्द को हजार बार दोहरा कर उसे सही तरीके से बोल सकता है। उसी तरह, जब हम निरंतर और दोहराकर पानी और आत्मा के वचन का प्रसार करते है तब वह हमारे हृदय पर छप जाता है। मैंने बार बार सुसमाचार के इस सत्य को लिखा ताकि जब लोग हमारी किताब को पढ़े तब वे नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के स्पष्ट सत्य को समझ सके, और उस पर विश्वास कर सके। इसलिए हम निरंतर इस सुसमाचार के सत्य का प्रचार करते है। 
भाइयों और बहनों, हम संतों को अपना विश्वास एक दूसरों के साथ अंगीकार करना चाहिए। जब हम एक दुसरे के साथ हमारे विश्वास का अंगीकार करते है और परमेश्वर के अनुग्रह को बाँटते है, तब वास्तव में हमारे हृदय एक दुसरे के साथ संगती कर सकते है, और यदि हमारे अन्दर कोई गलत ज्ञान या गलतफहमी हो तो उसे सुधार जा सकता है। और यह इसके द्वारा है की हम आत्मिक रीति से बढ़ सकते है। जैसे हमारा विश्वास बढ़ता है, वैसे विश्वास का हमारा जीवन भी आगे बढ़ता है। हमने कितनी बार गलत सोचा है? हमारा पहले का कितना ज्ञान त्रुटिपूर्ण था? और इसमें से कितना वास्तव में केवल सैध्धान्तिक था? पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानने से पहले के हमारे सारे विश्वास सैध्धान्तिक थे।
प्रेरित पौलुस ने कहा है की जो कोई भी सुसमाचार को छोड़ दुसरे सुसमाचार का प्रचार करता है उस पर दोष लगाया जाएगा (उत्पत्ति १:९)। पौलुस ने यह भी कहा है की परमेश्वर के सत्य के अलावा बाकी सब व्यर्थ है। हालाँकि, आजकी मसीहियत में, जो लोग अपनी मसीहियत के व्यर्थ ज्ञान के बारे में घमंड करता है वही सामर्थी बनाता है। 
क्योंकि हम जो नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के द्वारा बचे गए है वे एक दुसरे के साथ संगती करते है, इसलिए हम हृदय से एकसाथ जुड़ सकते है। और हम इस पानी और आत्मा के सुसमाचार से लज्जित नहीं है, क्योंकि इस सत्य ने हमें नरक के अनन्त दण्ड से छुडाया है। उसके बजाए, हम बिना किसी जिजक के नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े में छिपे सुसमाचार के सत्य को पूरी दुनिया में प्रचार कर सकते है। यह कार्य हमें बहुत जल्दी करना है।
जब पहली बार मुझे समझ आया की यह पानी और आत्मा का सुसमाचार ही एकमात्र सत्य है, तब मैं बहुत चकित हुआ, “अरे, ये यह है! ये यह है और अब तक मैंने इसे जाना नहीं था। क्या पूरे संसार के मसीही यह जानते है? क्या धर्म विज्ञानी इसके बारे में बात करते है? मैं आशा करता हूँ की धर्म विज्ञानियों में कोई ऐसा होगा जो इसे जानता था और इसके बारे में बात की होगी। इसलिए मैंने मसीहियत में सारे धर्म विज्ञानियों की जाँच की लेकिन मुझे उनमे पानी और आत्मा के सुसमाचार का कोई भी सुराग नहीं मिला, वह सब व्यर्थ था। 
इसलिए इस सुसमाचार के सत्य को जानने के बाद मेरी सबसे पहली प्रार्थना यह थी: “प्रभु, मैं इस पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ की आपने बपतिस्मा लेने के द्वारा मेरे सारे पापों को ले लिया, क्रूस पर मरे, मृत्यु से फिर जीवित हुए, और अब आपने मुझे बचाया है। लेकिन प्रभु, इस पूरे जगत के लोग इस सत्य को अभी भी नहीं जानते है। मुझे पूरी दुनिया में इस सुसमाचार का प्रसार करने दे। मुझे अनुमति दीजिए की मैं आपके सुसमाचार को जैसा है वैसे ही प्रचार कर सकू।” 
यह एक अद्भुत आशीष है की मैं आपसे मिल पाया हूँ, मेरे साथी कर्मचारी। परमेश्वर के वचन को न सुननेवाले और उस पर विश्वास न करनेवाले हजार लोगों से मिलाने से अच्छा है की कुछ ऐसे लोगों से मिले जो सच्चाई को ढूंढ रहे है और परमेश्वर की खोज में है, उन्हें नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े के सत्य का प्रचार करे, और उस पोअर विश्वास करे और इस प्रकार उनके साथ सेवा करे। आप सब लोग परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते है इसलिए मैं परमेश्वर का बहुत आभारी हूँ!
सच में, इस दुनिया में थोड़े लोग है जो आपकी और मेरी तरह आनंदित है। इस दुनिया में ऐसे कितने लोग है जिनके पास हमारी तरह सच्चा भाई है? यह सारी चीजे सत्य के परमेश्वर की ओर से आती है। जब परमेश्वर ने हमें कीमती उद्धार दिया, और जब परमेश्वर ने हमें कीमती याजकीय पद दिया, तो हम कैसे उसके सुसमाचार के लिए कार्य नहीं कर सकते, हम कैसे पापियों का न्याय नहीं कर सकते, और कैसे हम पनिया उर आत्मा के सुसमाचार का प्रचार नहीं कर सकते? जब हम सुसमाचार का प्रसार करते है, तो हम कैसे पापों की माफ़ी पाए हुए लोगों को माफ़ी न पाए हुए लोगों से अलग नहीं करा सकते? जब परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की रचना की तब उसने उजियाले को अँधेरे से अलग किया, उसी तरह हम भी स्पष्ट रूप से पापियों को धर्मियों से अलग करते है। जब हम सत्य को झूठ के साथ मिला देते है तब परमेश्वर प्रसन्न नहीं होता। और इसलिए वह कहता है, “अपनी दाख की बारी में दो प्रकार के बीज न बोना, ऐसा न हो कि उसकी सारी उपज, अर्थात् तेरा बोया हुआ बीज और दाख की बारी की उपज दोनों अपवित्र ठहरें। बैल और गदहा दोनों संग जोतकर हल न चलाना। ऊन और सनी की मिलावट से बना हुआ वस्त्र न पहिनना” (व्यवस्थाविवरण २२:९-११)। इसी लिए हमें पापियों को अलग करना है, और उनके लिए स्पष्ट न्याय करना है।
अब उनके लिए इस पर सत्य के रूप में विश्वास करने का समय है जिन्होंने परमेश्वर के वचन को सुना है भले ही फिर यह उन्हें पसंद न आए। जो लोग परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते है वे परमेश्वर के अनुग्रह में जगत की ज्योति बनते है, लेकिन जो लोग विश्वास नहीं करते वे अँधेरे से बच नहीं सकते। क्योंकि हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है इसलिए हम ऊरीम और तुम्मीम बने है, अर्थात्, ‘प्रकाश और सम्पूर्णता।’ हम ऐसे लोग बन गए है जो परमेश्वर में पाप से सम्पूर्ण उद्धार पाए हुए है। 
क्या आप पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वार सम्पूर्ण रीति से परमेश्वर की संतान बने है? अब हम राजकीय याजक का कार्य करते हुए अपने जीवन को जी रहे है, सारा धन्यवाद यीशु मसीह को जो इस जगत का राजाओं का राजा बना। हमें उद्धार का यह सुसमाचार देने के लिए मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ। मैं प्रार्थना करता हूँ की जब तक हम इस पृथ्वी पर है तब तक परमेश्वर हमें राजकीय याजक के सारे कार्य सफल रीति से करने के लिए हमें योग्य बनाए।
हाल्लेलूयाह! मैं हमेशा हमारे परमेश्वर की स्तुति करता हूँ।