उपदेश

विषय ११ : मिलापवाला तम्बू

[11-32] ( निर्गमन २९:१-१४ ) महायाजक के अभिषेक के लिए पापबलि

( निर्गमन २९:१-१४ )
“उन्हें पवित्र करने को जो काम तुझे उन के साथ करना है कि वे मेरे लिये याजक का काम करें, वह यह है : एक निर्दोष बछड़ा और दो निर्दोष मेढ़े लेना, और अख़मीरी रोटी, और तेल से सने हुए मैदे के अख़मीरी फुलके, और तेल से चुपड़ी हुई अख़मीरी पपड़ियाँ भी लेना। ये सब गेहूँ के मैदे के बनवाना। इनको एक टोकरी में रखकर उस टोकरी को उस बछड़े और उन दोनों मेढ़ों समेत समीप ले आना। फिर हारून और उसके पुत्रों को मिलापवाले तम्बू के द्वार के समीप ले आकर जल से नहलाना। तब उन वस्त्रों को लेकर हारून को अंगरखा और एपोद का बागा पहिनाना, और एपोद और चपरास बाँधना, और एपोद का काढ़ा हुआ पट्टा भी बाँधना; और उसके सिर पर पगड़ी को रखना, और पगड़ी पर पवित्र मुकुट को रखना। तब अभिषेक का तेल ले उसके सिर पर डालकर उसका अभिषेक करना। फिर उसके पुत्रों को समीप ले आकर उनको अंगरखे पहिनाना, और उनके अर्थात् हारून और उसके पुत्रों की कमर बाँधना और उनके सिर पर टोपियाँ रखना; जिससे याजक के पद पर सदा उनका हक रहे। इस प्रकार हारून और उसके पुत्रों का संस्कार करना। “तब बछड़े को मिलापवाले तम्बू के सामने समीप ले आना। हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने अपने हाथ रखें, तब उस बछड़े को यहोवा के सम्मुख मिलापवाले तम्बू के द्वार पर बलि करना, और बछड़े के लहू में से कुछ लेकर अपनी उंगली से वेदी के सींगों पर लगाना, और शेष सब लहू को वेदी के पाए पर उंडेल देना, और जिस चरबी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं, और जो झिल्‍ली कलेजे के ऊपर होती है, उनको और दोनों गुर्दों को उनके ऊपर की चरबी समेत लेकर सब को वेदी पर जलाना। परन्तु बछड़े का मांस, और खाल, और गोबर, छावनी से बाहर आग में जला देना; क्योंकि यह पापबलि होगा।”
 

आज हम महायाजक के अभिषेक के बारे में देखेंगे। यहाँ परमेश्वर ने मूसा को हारून और उसके बेटों को किस रीति से अभिषेक करना है वह विस्तारपूर्वक बताया है। वचन ९ में लिखे ‘पवित्र करना’ शब्द का मतलब यहाँ अलग करना, तैयार करना, समर्पित करना, या सन्मानित करना है। दुसरे शब्दों में, अभिषेक का मतलब है की पवित्र होना और परमेश्वर को समर्पित होना। इसलिए, “महायाजक के रूप में अभिषेक पाना” मतलब “महायाजक का अधिकार और काम देने के लिए अलग करना”। परमेश्वर ने हारून और उसके बेटों को महायाजक और याजकीय पद का अधिकार दिया, जो उन्हें अपने लोगों के लिए पापों की माफ़ी प्रस्तुत करने के लिए योग्य बनाता था। 
परमेश्वर ने मूसा को आदेश दिया की वह हारून को महायाजक के वस्त्र पहनाए और उसके सिर पर पगड़ी बांधे, और उसके बेटों को अंगरखा पहनाए। उसके बाद हारून को महायाजक के तौर पर और उसके बेटों को याजक के तौर पर अभिषेक करने के लिए, उन्हें अपने अभिषेक के लिए एक निर्दोष बछड़ा और दो निर्दोष मेढ़े लेने है। महायाजक का सबसे मुख्य काम यह था की वो प्रायश्चित के दिन पूरे इस्राएल के पापों के लिए पापबलि चढ़ाए। और ऐसा करने के लिए, सबसे पहले हारून और उसके बेटों को खुद के पापों को साफ करना था, और इसी लिए अपने अभिषेक के दिन उन्हें सबसे पहले अपने लिए पापबलि को अर्पण करना पड़ता था। 
यहाँ हमें यह समझना है की परमेश्वर के द्वारा स्थापित बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ महायाजक को भी पशु को मारने से पहले बलिदान के अर्पण के सिर पर हाथ रखना पड़ता था। सात दिनों तक महायाजक को अपने पवित्रीकरण के लिए होमबलि के साथ साथ ऐसे हिलाने की भेंट और उठाई हुई भेंट को पापबलि के रूप में अर्पण करना पड़ता था।
जिस प्रकार महायाजक खुद के लिए और अपने घराने के लिए बलिदान अर्पण करता था, उसी प्रकार उसे इस्राएलियो के सारे पाप बलि के ऊपर पारित करने के लिए उसके सिर पर हाथ रखना पड़ता था और उसके लहू को बहाना पड़ता था। क्योंकि परमेश्वर के लिए उनके महायाजक के रूप में कार्य करने के लिए उन्हें अपने लोगों के पापों की माफ़ी के लिए बलि किस प्रकार अर्पण करनी है वह विस्तृत रूप से सीखना जरुरी था। महायाजक खुद के पापों को साफ़ करने के लिए सबसे पहले खुद के लिए पापबलि अर्पण करता था उसका मतलब है की उसे सिखाया गया था की अपने लोगों के लिए किस प्रकार बलि अर्पण करे – अर्थात्, बलि के सिर पर हाथ रखने, उसके लहू को बहाने और उस लहू को होमबलि की वेदी पर रखने और बाकि के लहू को भूमि पर बहाने के द्वारा भी।
यहाँ, महायाजक को यह याद रखना पड़ता था की अपने और अपने लोगों के पाप पारित करने के लिए उसे बलि के सिर पर हाथ रखना जरुरी था। जैसे निर्गमन २९;१२-१२ में बताया गया है, “तब बछड़े को मिलापवाले तम्बू के सामने समीप ले आना। हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने अपने हाथ रखें, तब उस बछड़े को यहोवा के सम्मुख मिलापवाले तम्बू के द्वार पर बलि करना, और बछड़े के लहू में से कुछ लेकर अपनी उंगली से वेदी के सींगों पर लगाना, और शेष सब लहू को वेदी के पाए पर उंडेल देना।” 
महायाजक और उसके बेटों को आदेश दिया गया था की उन्हें अनिवार्य रूप से बैल या बलि के अर्पण के सिर पर अपने हाथ रखने है। क्योंकि जब महायाजक हारून और उअके बेटें बलि के अर्पण पर अपने हाथ रखते थे, तब उनके सारे पाप उस बलि के ऊपर पारित हो जाते थे। क्योंकि हाथ रखने के द्वारा यह बलि का अर्पण महायाजक और उसके बेटों के पापों का स्वीकार करता था, इसलिए उसका खून बहाना पड़ता था और मरना पड़ता था। इसके बाद, महायाजक उसका लहू बहता था, उस लहू को होमबलि के सींगो पर रखता था, और बचा हुआ लहू भूमि पर बहा देता था। उसे पशु की सारी चरबी, और गुर्दों के पास की सारी चरबी लेकर उसे वेदी पर जलाना था। 
यदि आम लोगों में से किसी ने भी पाप किया हो और उसके लिए अनजाने में पापों के प्रायश्चित के लिए पापबलि अर्पण करना भूल जाए तो उसे पापबलि के रूप में उसने किए हुए पापों के लिए बकरी के निर्दोष मादा बच्चे को अर्पण करना था। “और वह अपना हाथ पापबलिपशु के सिर पर रखे, और होमबलि के स्थान पर पापबलिपशु का बलिदान करे। और याजक उसके लहू में से अपनी उंगली से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगों पर लगाए, और उसके सब लहू को उसी वेदी के पाए पर उंडेल दे। और वह उसकी सब चरबी को मेलबलिपशु की चरबी के समान अलग करे, तब याजक उसको वेदी पर यहोवा के निमित्त सुखदायक सुगन्ध के लिये जलाए; और इस प्रकार याजक उसके लिये प्रायश्‍चित्त करे, तब उसे क्षमा मिलेगी” (लैव्यव्यवस्था ४:२९-३१)। 
हाथ रखना और बलि का लहू बहाना परमेश्वर के द्वारा स्थापित बलिदान पध्धति का अनिवार्य भाग था। यहाँ तक की जगत की उत्त्पति से पहले ही परमेश्वर ने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में छिपे सत्य के द्वारा हमारे पापों की माफ़ी के लिए यीशु मसीह में योजना बनाई थी। परमेश्वर ने इस्राएल के लोगों को वायदा किया था की जब कभी भी वे होमबलि अर्पण करेंगे तब वह उनसे मिलेगा। निर्गमन २९:४२ में लिखा है, “तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी में यहोवा के आगे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर नित्य ऐसा ही होमबलि हुआ करे; यह वह स्थान है जिसमें मैं तुम लोगों से इसलिये मिला करूँगा कि तुझ से बातें करूँ।” प्रतिदिन सुबह और शाम को याजक जो होमबलि अर्पण करते थे वह वो अर्पण था जो पूरी पीढ़ी तक चढ़ाना था यहाँ तक हमें भी चढ़ाना है, इस्राएल के आत्मिक लोग जिन्होंने पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी पाई है। परमेश्वर हमें हक़ रहा है की वह इस अर्पण के द्वारा हमसे मिला करेगा।
 

महायाजक के द्वारा दिए गए होमबलि का क्या मतलब है?

क्योंकि बलिपशु उस पर हाथ रखने वाले प्रत्येक पापियों के अपराधों का स्वीकार करता था, इसलिए उनकी जगह उसे मरना पड़ता था और जलने के द्वारा दण्ड सहना पड़ता था। परमेश्वर बलिदान की पध्धति के इस पापबलि के द्वारा हमसे यह चाहते है की हम अंगीकार करे, “क्योंकि मैंने परमेश्वर के सामने पाप किया है, इसलिए मुझे पाप का दण्ड मिलना चाहिए।” परमेश्वर के उद्धार के नियम के अनुसार हमें हमारे पापों को साफ़ करने के लिए, बलिपशु के सिर पर अपने हाथ रखने है, उसके लहू को बहाना है, होमबलि की वेदी के सींगो पर यह लहू रखना है, और बचा हुआ लहू भूमि पर उंडेल देना है, होमबलि की वेदी पर उसकी देह को जलाना है, और इस प्रकार परमेश्वर की धार्मिकता के अनुग्रह के अनुसार पापों की माफ़ी प्राप्त करनी है। 
सबसे पहले, हमें परमेश्वर के सामने हमारे हृदय और कार्य दोनों के द्वारा किए हुए पापों का अंगीकार करना है। और हमें यह पहचानना है की हम इन पापों के दण्ड से बच नहीं सकते। लेकिन परमेश्वर के संपुर्ण उद्धार के लिए उसको धन्यवाद करना भी हमारे लिए कम है। परमेश्वर ने हमें इतना प्रेम किया की उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया। यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पापों को ले लिया और क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा उन पापों की कीमत चुकाई ताकि जो कोई भी उस पर विश्वास करे उसका नाश न हो लेकिन अनन्त जीवन पाए। 
बलिदान की पध्धति में यह जरुरी है की बलिपशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा उसको अर्पण किया जाए और उसका लहू बहाया जाए। यह विश्वास के उस सबूत को दर्शाता है जो हमारे सारे पापों को माफ़ करता है, और इसलिए हमें इस पर विश्वास करना चाहिए। प्रत्येक पापी को बलिपशु के सिर पर हाथ रखने का मतलब है की अपने पाप उस पर पारित करना। यहाँ तक की जब महायाजक पापबलि को अर्पण करता था तब उसे भी यह अंगीकार करना पड़ा था, “परमेश्वर के सामने मैंने ऐसे पाप किए है, और इसलिए मुझे मृत्यु दण्ड मिलना चाहिए।” लेकिन यह विश्वास करने के द्वारा की परमेश्वर ने हमें पाप से छुडाने के लिए अर्पण दिया है, और परमेश्वर ने हमें इस अर्पण पर विश्वास करने के द्वारा छूटकारा प्राप्त करने के योग्य बनाया है, हम उद्धार प्राप्त कर सकते है।
परमेश्वर ने कहा, “मैं तुमसे यहाँ मिला करूँगा।” उसने यह केवल महायाजक को ही नहीं कहा था, लेकिन सारे साधारण मनुष्य को भी कहा था, मतलब की परमेश्वर हम सब को पाप की माफ़ी देगा और इस प्रकार हमें अपनी प्रजा बनाएगा। तो फिर परमेश्वर हमें किस प्रकार मिला? क्योंकि परमेश्वर के पास हमारे उद्धार की योजना है, इसलिए वह केवल उन लोगों से मिलेगा जो परमेश्वर के द्वारा स्थापित बलि प्रथा के अनुसार पापबलि को अर्पण करता है। क्योंकि परमेश्वर अच्छी तरह से जानता है की मनुष्य जन्म से पापी है और वे पाप से बंधे हुए भी है, इसलिए वह उद्धार की बलि प्रथा में प्रगट हुए अपनी दया के अनुसार हमारे सारे पाप साफ़ करना चाहता है, और इस प्रकार हमें अपनी संतान बनाएगा। इसी लिए परमेश्वर ने बलि प्रथा की स्थापना की जिसके द्वारा इस्राएल के अनगिनत लोग बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पापों को उसके ऊपर पारित कर पाए।
जिस पध्धति के द्वारा इस्राएल के लोग बलि पशु पर अपने पापों को पारित करते थे वह था “हाथों को रखना।” इस्राएल के लोगों ने अनगिनत बार परमेश्वर के नियमों को तोड़ा था और सब प्रकार के पाप किए थे। लेकिन क्योंकि वे इस “हाथ रखने” की पध्धति के द्वारा अपने सारे अपराध बलि पशु के सिर पर डालते थे, इसलिए वे अपने सारे पापों को साफ करने के लिए योग्य थे। इसके द्वारा परमेश्वर उन इस्राएलियों के साथ रहे जो उस पर विश्वास करते थे, उनके परमेश्वर बने, उन्हें अपनी निज प्रजा बनाया, उनकी अगवाई की, और उन्हें स्वर्ग की आशीषे और साथ ही साथ पृथ्वी की भी बहुतायत की आशीष दी। यह सारी चीजे तम्बू की बलिदान की पध्धति पर उनके विश्वास के द्वारा सच हुई।
तम्बू की बलिदान की पध्धति के सारे पहलू परमेश्वर के द्वारा स्थापित किए गए थे, और इस्राएल के लोग बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ बलि पशु के सिर पर अपने हाथ रखने के द्वारा अपने सारे पाप उसके ऊपर पारित कर सकते थे और अपने सारे पापों से शुध्ध हो सकते थे। क्योंकि परमेश्वर ने हाथ रखने और लहू बहाने की बलिदान की पध्धति पर विश्वास करनेवाले अपने पास हुए लोगों को अपने पापों से शुध्ध होने के लिए योग्य बनाया था इसलिए जो लोग इस सत्य पर विश्वास करते थे वे पवित्र परमेश्वर के साथ चल सकते थे। हाथ रखने और लहू बहाने के द्वारा दिए हुए बलिदान के बगैर परमेश्वर उनके साथ नहीं बसता क्योंकि परमेश्वर के द्वारा दिया गया यह उद्धार का नियम उचित बलिदान के द्वारा स्थपि था – पाप बलि के सिर पर हाथ रखना और उसका लहू बहाना। इसलिए, हम सबको यह पहचाना चाहिए और विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर के द्वारा दिया गया पापों से उद्धार बलि पशु के सिर पर हाथ रखने और उसके लहू बहाने दोनों से बनाता है।
याजकों को प्रयेक सुबह और शाम को होमबलि अर्पण करनी पड़ती थी। उन्हें यह करना पड़ता था क्योंकि सुबह अपने पापों के लिए होमबलि अर्पण करने के बाद, वे दिन भर बहुत सारे ओर पाप करते थे, और इसलिए शाम को फिर से होमबलि अर्पण करने के द्वारा अपने पाप पारित कारण उनके लिए जरुरी था। होमबलि जो प्रत्येक दिन अर्पण की जाति थी वह इस्राएलियों को विश्वास की याद दिलाती थी की यीशु इस पृथ्वी पर आएगा, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के पापों को उठाएगा, क्रूस पर मरेगा, और इस प्रकार समग्र दुनिया के पापों को मिटाएगा। उसी रूप से, हमें भी प्रतेक सुबह और शाम को विश्वास का अर्पण देना चाहिए, क्योंकि हम दिनभर बहुत सारे पाप करते है। पुराने नियम में दिया गया यह विश्वास का अर्पण नए नियम के समय में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा यीशु ने बपतिस्मा लिया और अपना लहू बहाया उस पर विश्वास करने के द्वारा हृदय को शुध्ध करने जैसा ही है।
परमेश्वर पिता हमसे तब मिलते है जब वह हमारे हृदय में यह विश्वास को देखते है जो यह विश्वास करता है की यीशु हमारे उद्धारकर्ता ने हमारे सारे पापों को मिटाया है। पुराने नियम की बलि प्रथा के अनुसार, यीशु परमेश्वर के समय में इस पृथ्वी पर आए और नए नियम की शुरुआत में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा हमारे सारे पापों का स्वीकार किया (मत्ती ३:१५)। इसी लिए यीशु ने कहा, “यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के दिनों से अब तक स्वर्ग के राज्य में बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवान उसे छीन लेते हैं” (मत्ती ११:१२)। इस सुसमाचार के सत्य पर विश्वास करने के द्वारा, हम हमारे सारे पापों से स्वतंत्र हो पाए है और उससे सम्पूर्ण रूप से शुध्ध हो पाए है। 
यीशु इस पृथ्वी पर आया इस सत्य को ध्यान न देनेवाले लोग अनगिनत पाप करते है, और हम मसीही, यीशु को जानने से पहले और बाद में भी बहुत सारे पाप करते है। लेकिन यीशु मसीह इस पृथ्वी पर आए, और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने और क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा उसने जगत के सारे पापों को साफ़ किया है। इसलिए, जब परमेश्वर ने कहा है की वह होमबलि के द्वारा इस्राएल के लोगों से मिला करेगा, इसका मतलब है की परमेश्वर उनसे मिलेगा जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करता है। परमेश्वर उन लोगों से प्रेम करता है जो इस प्रकार विशवास करते है की उसने नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से उनके सारे पापों को मिटा दिया है। लेकिन वह निश्चित रूप से उन लोगों को प्रेम नहीं करता जो इस सत्य को नकारते है।
इस नए नियम के युग में, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हम परमेश्वर से मिल सकते है। पुराने नियम के समय में, व्यक्ति नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े में प्रगट हुए सत्य पर विश्वास करने के द्वारा पापों की माफ़ी को प्राप्त करता था। हाथों को रखना और लहू बहाना – इन दोनों बातो को मिलाकर सम्पूर्ण सुसमाचार बनाता है। पुराने नियम की भविष्यवाणी परमेश्वर के उद्धार को विस्तृत रूप से बताती है, और नया नियम उन भविष्यवाणी की परिपूर्णता है और वायदा किए हुए सुसमाचार का पूरा होना है। इसलिए, इब्रानियों १:१-२ में लिखा है, “पूर्व युग में परमेश्‍वर ने बापदादों से थोड़ा थोड़ा करके और भाँति-भाँति से भविष्यद्वक्‍ताओं के द्वारा बातें कर, इन अन्तिम दिनों में हम से पुत्र के द्वारा बातें कीं, जिसे उसने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि की रचना की है।” 
यीशु राजाओं का राजा और सामर्थी परमेश्वर है, लेकिन यह परमेश्वर मनुष्य देह धारण करके इस पृथ्वी पर आया, बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार हमारे सारे पापों को साफ़ किया और हमें पाप के सारे दण्ड से बचाया। इस सुसमाचार पर विश्वास करने से जिसके द्वारा परमेश्वर ने हमें धर्मी बनाया है, हम सम्पूर्ण बन सकते है। अब हमारे लिए हमारे पापों की माफ़ी पाना सम्भव है, जिसे हम बड़े आग्रह से ढूंढ रहे थे। हम बेतहाशा हमारे पापों से शुध्ध होना चाहते थे, और परमेश्वर ने बलि प्रथा के हाथ रखने और लहू बहाने के द्वारा एक ही बार में हमेशा के लिए उन्हें मिटा दिया – अर्थात्, यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू बहाने के द्वारा, पानी और आत्मा के वास्तविक पहलू (१ यूहन्ना ५:६-८)। जब हम विश्वास करते है की परमेश्वर ने सम्पूर्ण तरीके से हमारे सारे पापों को मिटा दिया है तब परमेश्वर हमें अपनी निज प्रजा बनाता है और हमसे मिलता है। 
 

हाथ रखने की विधि का महत्त्व

लैव्यव्यवस्था १:१-४ में लिखा है, “यहोवा ने मूसा को बुलाकर मिलापवाले तम्बू में से उससे कहा, “इस्राएलियों से कह कि तुम में से यदि कोई मनुष्य यहोवा के लिये पशु का चढ़ावा चढ़ाए, तो उसका बलिपशु गाय-बैलों अथवा भेड़-बकरियों में से एक का हो। “यदि वह गाय-बैलों में से होमबलि करे, तो निर्दोष नर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर चढ़ाए कि यहोवा उसे ग्रहण करे। वह अपना हाथ होमबलिपशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिये प्रायश्‍चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा।” 
यहाँ वचन ४ की ओर ध्यान दे जो कहता है, “वह अपना हाथ होमबलिपशु के सिर पर रखे, और वह उसके लिये प्रायश्‍चित्त करने को ग्रहण किया जाएगा।” दुसरे शब्दों में, परमेश्वर प्रसन्नतापूर्वक अर्पण तब ग्रहण करता है जब पापी बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के बाद अपनी होमबलि को अर्पण करता है। किसके सिर पर पापियों के हाथ रखे जाने चाहिए? बलि पशु के सिर पर। केवल इस पध्धति के द्वारा, परमेश्वर ने वायदा किया है की वह इस्राएल के लोगों के सारे पाप मिटाएगा। इसलिए पुराने नियम में यह बलि पशु का सिर था जिसके ऊपर हाथ रखे जाते थे, लेकिन नए नियम के बारे में क्या? नए नियम के समय में बलिदान का सच्चा अर्पण कौन है? यह ओर कोई नहीं लेकिन पूरी मनुष्यजाति का उद्धारकर्ता यीशु मसीह है। समग्र मनुष्यजाति के पापों को मिटने के लिए यीशु मसीह ही केवल एकमात्र बलिदान का अर्पण है। केवल एक मनुष्य के द्वारा सारे लोग पापी बने, और केवल यीशु मसीह के द्वारा ही सारे मनुष्य अपने सारे पापों से शुध्ध हो सकते है और अनन्त जीवन प्राप्त कर सकते है।
विश्वास के द्वारा, हमें यीशु के सिर पर हमारे हाथ रखने चाहिए और हमारे सारे पाप उसके ऊपर पारित करने चाहिए। दुसरे शब्दों में, हमें सच्चे विश्वास से उसके सीए पर हमारे हाथ रखने चाहिए क्योंकि परमेश्वर बड़ी प्रसन्नता से इस बलिदान के अर्पण को स्वीकार करेगा। यीशु ने मत्ती ११:१२ में कहा है की केवल बलवान परमेश्वर के राज्य को छीन लेते है। क्योंकि हाथ रखने की विधि हमें अपने पाप बलिदान के अर्पण के ऊपर पारित करने के लिए योग्य बनाता है, इसलिए परमेश्वर विश्वास के इस बलिदान को बड़ी प्रसन्नता से ग्रहण करता है। क्योंकि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु मसीह के सिर पर अपने हाथ रखे थे, और मनुष्यजाति के सारे पाप उसके ऊपर डाल दिए थे, इसलिए जो व्यक्ति यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसकी मृत्यु दोनों पर पूरे हृदय से विश्वास करता है उसे ही परमेश्वर पापों से शुध्ध होने और पापों के दण्ड से बचने की योग्यता देता है। यीशु मसीह ने लिए हुए बपतिस्मा पर विश्वास करने के द्वारा हम हमारे पापों को उसके ऊपर पारित कर सकते है। 
परमेश्वर ने इस्राएलियों को बलि प्रथा दी, और यह यीशु मसीह के द्वारा अपनी देह से दिए गए बलिदान की परछाईं थी। दुसरे शब्दों में, यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और क्रूस के लहू द्वारा बलि प्रथा में किए गए वायदे को परिपूर्ण किया है। हमारे प्रति उसके बहुतायत के प्रेम की वजह से, परमेश्वर ने हमें अपने एकलौते पुत्र यीशु मसीह देने के द्वारा हमारा उद्धार किया। प्रत्येक लोगों के लिए यह समय है की वे यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस पर के बहाए हुए उसके लहू पर विश्वास करने के द्वारा उद्धार प्राप्त करे। 
सर्वज्ञानी परमेश्वर ने सृष्टि की रचना से पहले ही अपने सम्पूर्ण उद्धार की योजना बनाई थी, और अपने समय अनुसार उसे सम्पूर्ण रीति से परिपूर्ण किया। यह उद्धार की इस योजना के अनुसार था की यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले का जन्म यीशु के छः महीने पहले हुआ। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला सारे मनुष्यों में सबसे बड़ा था। जैसे खुद यीशु ने कहा है, “जो स्त्रियों से जन्मे हैं, उनमें से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से कोई बड़ा नहीं हुआ” (मत्ती ११:११), दुसरे शब्दों में, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, मनुष्यजाति का प्रतिनिधि था। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला परमेश्वर का सेवक था जो मूसा, एलियाह, और यशायाह भविष्यवक्ताओं से भी बड़ा था। बहुत सारे लोग यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को केवल ऐसा व्यक्ति मानते है जो जंगल में सन्यासी का जीवन जीता था। लेकिन वास्तव में उसे परमेश्वर के मनुष्यजाति के प्रतिनिधि के रूप में भेजा गया था। वास्तव में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला इस जगत में सारे लोगों से बड़ा था। वह हारून महायाजक के घराने से था (लूका १:५-७)। जिस प्रकार राजा राजकीय परिवार में पैदा हुए थे, उसी प्रकार यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, आखरी महायाजक भी हारून महायाजक के घराने में पैदा हुआ था, और मनुष्यजाति के प्रतिनिधि के रूप में उसने मनुष्यजाति के पापों को यीशु पर पारित करने के लिए उसे यरदन नदी में बपतिस्मा दिया था। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला इस पृथ्वी पर सबसे बड़ा है। लेकिन कुछ ऐसे लोग है जो इस बात पर विश्वास न करते हुए यह पूछते है, “बाइबल में ऐसा कहा लिखा है की यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला महायाजक है?”
मुझे स्पष्ट प्रमाण के साथ उन्हें उत्तर देने दे की वास्तव में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला समग्र मनुष्यजाति का प्रतिनिधि और महायाजक है, क्योंकि परमेश्वर के वचन में लिखा है: “यूहन्ना तक सारे भविष्यद्वक्‍ता और व्यवस्था भविष्यद्वाणी करते रहे। और चाहो तो मानो कि एलिय्याह जो आनेवाला था, वह यही है” (मत्ती ११:१३-१४)। परमेश्वर ने मलाकी ४:५ में वायदा किया है की वह एलियाह को भेजेगा। और खुद यीशु ने कहा है की आनेवाला एलियाह ओर कोई नहीं लेकिन यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला है। क्योंकि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला हारून के वंश में पैदा हुआ था इसलिए उसने महायाजक के कार्य को परिपूर्ण किया।
पुराने नियम में, जब पापी बलि पशु के सिर पर अपने हाथ रखने के द्वारा अपने पाप उसके ऊपर पारित करता था, उसके बाद बलि पशु के लहू को बहाकर उसे मार दिया जाता था और आग से जलाया जता था। कोई भी व्यक्ति अपने पापों से छूटकारा पाना चाहता था तो उसे बिना किसी असफलता के बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पाप उसके ऊपर पारित करने पड़ते थे। और, प्रायश्चित के दिन, महायाजक हारून को बलिदान के अर्पण के सिर पर हाथ रखने के द्वारा इस्राएलियों के साल भर के पाप उसके ऊपर पारित करने पड़ते थे। यहाँ भी, हाथ रखना महत्वपूर्ण था, और इसका मतलब है यदि आत्मिक रूप से कहे तो, पापों को पारित करना। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु के बपतिस्मा के द्वारा हमारे सारे पाप उसके ऊपर पारित किए, और इस बपतिस्मा के द्वारा यीशु ने जगत के सारे पापों का स्वीकार किया और फिर क्रूस पर अपना लहू बहाया। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने और इस प्रकार हमारे सारे पापों को उठाने और क्रूस पर अपना लहू बहाने और मृत्यु से से फिर जी उठाने के द्वारा यीशु मसीह हमारा संपुर्ण उद्धारकर्ता बना।
इस्राएल के लोगों ने भी इस तरह बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा परमेश्वर को बलिदान अर्पण किया। जब इस्राएल के लोग परमेश्वर के विरुध्ध पाप करते थे और पापी बनते थे, तब उनके लिए परमेश्वर को उचित तरीके से पापबलि चढ़ाने के लिए बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पाप उसके ऊपर पारित करने पड़ते थे। बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के बाद उसे मार कर चढ़ाया गया उचित बलिदान परमेश्वर बड़ी प्रसन्नता से स्वीकार करता था। क्योंकि इस्राएल के लोगों ने बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पाप उसके ऊपर पारित किए थे इसलिए परमेश्वर उनसे मिला करता था। क्योंकि बलि पशु ने अपने सिर पर हाथ रखवाने के द्वारा उनके पापों का स्वीकार किया था और उनके पापों के लिए दण्ड सहा था इसलिए जो कोई भी व्यक्ति इस बलिदान में दर्शाए गए परमेश्वर के अनुग्रह पर विश्वास करते हुए उनके पास आता था उनसे परमेश्वर मिला करता था। इसी लिए परमेश्वर ऐसे बलि पशु को प्रसन्नता से स्वीकार करते थे। वह इतना दयालु है की वह किसी को भी नरक में नहीं भेजना चाहता।
इस प्रकार, यीशु मसीह ने लिया हुआ बपतिस्मा और क्रूस पर बहाया गया उसका लहू दोनों हमें हमारे पापों से शुध्ध करते है। क्योंकि जगत के सारे पापों को मिटाने के लिए यीशु मसीह ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया इसलिए उसे क्रूस पर मरना पड़ा और हमारे पापों के लिए न्याय को सहना पडा। क्योंकि हमारे सारे पापों को लेने के लिए यीशु ने बपतिस्मा लिया और क्रूस के दण्ड को सहा इसलिए वह हमें पापों से छूटकारा दे पाया और स्वतंत्र कर पाया। इसलिए, उसके बपतिस्मा और लहू बहाने के दण्ड पर विश्वास करने के द्वारा हम धर्मी के रूप में नया जन्म प्राप्त कर सकते है और यीशु मसीह से मिल सकते है। संक्षेप में, यीशु के धर्मी कार्य, पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा हम सब पवित्र परमेश्वर से मिल सकते है। यीशु मसीह उन लोगों का अनन्त उद्धारकर्ता बना है जो इस सत्य पर विश्वास करते है।
हमें पवित्र परमेश्वर से मिलना चाहिए। नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े के द्वारा आए उद्धारकर्ता यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा हम विश्वास से परमेश्वर के साथ मुलाक़ात कर सकते है। जो लोग परमेश्वर से मिलना चाहते है उन्हें उसके वचन को सुनना चाहिए और परमेश्वर के द्वारा दी गई बलि प्रथा पर विश्वास करना चाहिए जो हाथ रखने और लहू बहाने के द्वार बनी है। यदि वे अपने दिमाग से इसे पूरी तरह न समझ पाए और इसके बारे में थोड़ा सा भी संदेह हो, तो उन्हें परमेश्वर के वचन को खोलना चाहिए और खुद के लिए इसे सुनिश्चित करना चाहिए। और उन्हें विश्वास करना चाहिए की परमेश्वर का वचन जो कहता है वह सही है।
हमें हमारे विचारों से परमेश्वर पर विश्वास नहीं करना चाहिए। उसके बजाए, हमें परमेश्वर के सत्य के वचन पर मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, हमें इस असल सुसमाचार को दुसरे सुसमाचार से पहचानना चाहिए। हमें केवल हमारे विचारों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, खुद की समझ और सिख पर आधार नहीं रखना चाहिए। आपके कोई भी विचार कभी सही नहीं हो सकते। मनुष्य परमेश्वर के सामने इतने कमज़ोर, ज़िद्दी, और कठोर है की वे सबसे पहले खुद की धार्मिकता और विचारों को महत्त्व देते है और परमेश्वर के विचारों को पीछे छोड़ देते है। परमेश्वर के सामने हमारे हृदय को खोलना और उसके वचन पर विश्वास करना ही जीवन और आशीषों की ओर सही रास्ता है।
जब महायाजक पवित्र होने के लिए अपने पापबलि के रूप में बैल कोप अर्पण करता था, तब परमेश्वर ने उसे कहा की वो जिस चरबी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं उसे, और जो झिल्‍ली कलेजे के ऊपर होती है उसे, उनको और दोनों गुर्दों को उनके ऊपर की चरबी समेत लेकर सब को वेदी पर जलाए। परन्तु बछड़े का मांस, और खाल, और गोबर, छावनी से बाहर आग में जला दे। महायाजक ने ठीक उसी तरह बलिदान अर्पण किया जैसे परमेश्वर ने मूसा को कहा था। जब होमबलि दी गई, महायाजक निर्दोष भेड़ को भी बलिदान के अर्पण के तौर पर लाया और उसके सिर पर अपने हाथ रखे। अपने और अपने घराने के लिए, सुबह और शाम महायाजक और उसके बेटे ऐसे ही बलिदान के ऊपर हाथ रखते थे, उसके गले को कटते थे और उसका लहू बहते थे, और इस लहू को होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कते थे। फिर वे उसके अशुध्द भाग जैसे की उसके गोबर और सिर को छावनी के बहार जलाते थे, लेकिन चरबी वाले हिस्से को होमबलि के ऊपर जलाते थे। महायाजक के पवित्रीकरण के दौरान दी जाने वाली होमबलि भी इसी तरह अर्पण की जाति थी।
ख़ास तौर पर, महायाजक के पवित्रीकरण के दौरान, बलि पशु की सारी चरबी को परमेश्वर के लिए जलाई जाति थी। परमेश्वर जलती हुई चरबी की सुगंध से प्रसन्न होते थे यह अपने आप में दर्शाता है की यह परमेश्वर के वचन और उसके द्वारा स्थापित की गई बलि प्रथा के मुताबिक़ था जिसके द्वारा परमेश्वर हमें नया जन्म देता है। दुसरे शब्दों में, यहाँ चरबी परमेश्वर पवित्र आत्मा को दर्शाती है। परमेश्वर ने हमें बलि प्रथा दी, और उसने हमें इस बलि प्रथा के अनुसार बलि पशु के सिर पर हाथ रखवाए, उसे मारा, और होमबलि की वेदी पर उसे जलाने के द्वरा उसे अर्पण किया। जब परमेश्वर के द्वारा स्थापित बलि प्रथा के मुताबिक़ और उस पर विश्वास के द्वारा बलिदान चढ़ाया जाता है केवल तभी परमेश्वर उसे प्रसन्नता से ग्रहण करता है। 
निर्गमन २९:१० में लिखा है, “तब बछड़े को मिलापवाले तम्बू के सामने समीप ले आना। हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने अपने हाथ रखें।” यह परमेश्वर की आज्ञा थी। इसके अलावा, महायाजक के पवित्रीकरण के दौरान उसके द्वारा पहले गए वस्त्र यानि की एपोद को पाँच कपड़ो से बुना जाता था – अर्थात्, उसे सोने, नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना जाता था। यहाँ सोने का कपड़ा विश्वास के बारे में बताता है। नीला कपड़ा यीशु मसीह ने लिए हुए बपतिस्मा को दर्शाता है, जो पुराने नियम के हाथ रखने के जैसा ही है; बैंजनी कपड़ा हमसे कहता है की यीशु परमेश्वर का पुत्र, खुद परमेश्वर और उद्धारकर्ता है; और लाल कपड़ा यीशु ने दिए हुए बलिदान को दर्शाता है; और बटी हुई सनी का कपड़ा परमेश्वर के वचन को दर्शाता है जिसने हमें पापरहित बनाया है। सोने का कपड़ा विश्वास को प्रगट करता है जो यह विश्वास करता है की परमेश्वर ने हमारे सारे पापों को मिटा दिया है और हमारे हृदय को बर्फ़ के नाई श्वेत किया है। हमारे पास यह विश्वास होना चाहिए, विश्वास करे की परमेश्वर ने यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू बहाए जाने के द्वारा हमारे सारे पापों को मिटा दिया है। हमें यीशु मसीह पर ठीक उसी रीति से विश्वास करना है जैसे परमेश्वर ने हमें कहा है, उसने जिस प्रकार हमारे सारे पापों को मिटाया उसके अनुसार। परमेश्वर ने बलि प्रथा को जिस तरह स्थापित किया और जिस तरह यीशु मसीह के द्वारा जिसने बलि प्रथा को परिपूर्ण किया उसके द्वारा हमारे पापों नको मिटाया उसके अनुसार हमें परमेश्वर पर विश्वास करना चाहिए। 
कई लोग कहते है, “आप क्यों इस तरह से उस पर विश्वास नहीं करते? आप क्यों नकचढ़े है? यह इस लिए क्योंकि आपका व्यक्तित्व विस्तार उन्मुख है और आप हर समय निर्विवाद रहना चाहते है, लेकिन मेरा व्यक्तिव्य भिन्न है, और इसलिए मैं दोनों पर विश्वास करता हूँ क्योंकि विरोधी राय भी सही हो सकता है। क्या परमेश्वर उन लोगों को ही स्वीकार करेगा जो आपकी तरह विश्वास करते है? यदि मैं कहू की, मैं किसी भी तरह से परमेश्वर पर विश्वास करता हूँ तो क्या इतना काफी नहीं है?” यदि आप इस तरह से विश्वास करते है, तो परमेश्वर आपसे प्रसन्न नहीं होंगे। वो सच्चाई का परमेश्वर है। परमेश्वर ने हमें किसी अथिर और अनिश्चित तरीके से नहीं बचाया। परमेश्वर चमकता हुआ उजियाला है जिसके वचन दो धारी तलवार से भी चोखे है। वह ऊरीम और तुम्मीम के साथ नुआउ करता है, जिसका मतलब है की उसने हमें प्रकाश और सम्पूर्णता से बचाया है।
परमेश्वर अग्रिम माइक्रोस्कोप से भी ज्यादा सटीक है जो छोटे से छोटे नाप को भी पहचान सकता है। वह कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो हमारे किसी भी तरह विश्वास करने के बावजूद भी हमारे उद्धार को स्वीकार करे। क्योंकि परमेश्वर सच्चाई है, वह सबकुछ जानता है, हमारे छिपे हुए विचारों से लेकर हमारी भावना तक, हमारे हृदय से लेकर हमारे कार्यो के पाप तक, हमने किए हुए पहले के पाप से लेकर भविष्य में हम जो पाप करनेवाले है उस तक, छिपा और प्रगट हुआ सबकुछ जानता है। इसी लिए परमेश्वर ने तय किया की वह हाथ रखने और लहू बहाने दोनों के द्वारा ऐसे सारे पापों को मिटा देगा, और इसी लिए हमें निश्चित तौर पर परमेश्वर के द्वारा स्थापित बलि प्रथा के मुताबिक़ परमेश्वर के उद्धार पर विश्वास करना है।
प्रभु ने कहा है की हमें बलि पशु के सिर पर अपने हाथ रखने है, और फिर वह उसे प्रसन्नता से स्वीकार करेगा। जब कोई पापी बलि पशु के सिर पर अपने हाथ रखता है, उसके बाद उसे इस पशु को मार कर उसके लहू को निकालना था और उसे होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कना पड़ता था। यहाँ, सींगो पर लहू छिड़कने का मतलब है पापों को मिटाना जो न्याय की पुस्तक में दर्ज है (प्रकाशितवाक्य २०:१२-१५)। इसके बाद, बचे हुए लहू को भूमि पर उंडेलना पड़ता था। इसका मतलब है की उसका हृदय पाप से शुध्ध हो चूका है। 
आपके और मेरे लिए, यीशु मसीह ने बपतिस्मा लिया, क्रूस पर मरा, मृत्यु सड़े फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार हम सब को उद्धार दिया। सारे महा याजको के पास भी हमारी तरह ही विश्वास था। वर्त्तमान समय में आपके और मेरे पास जो विश्वास है वह महायाजको के पास जो विश्वास था उससे भिन्न नहीं है। क्योंकि महायाजक के लिए भी नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े पर उसके विश्वास के द्वारा ही वे अपनी याजकीय सेवा परिपूर्ण कर सकते थे, और इसी विश्वास के द्वारा ही आप और मैं धर्मी बने है। क्योंकि हमने इस विश्वास के द्वारा पापों की माफ़ी पाई है जो विश्वास करता है की परमेश्वर के द्वारा हमें उद्धार मिला है इसलिए अब हम उससे मिल सकते है, उसकी मदद मांग सकते है, उसकी निज प्रजा के रूप में अपना जीवन जी सकते है, और हमारी याजकीय सेवा परिपूर्ण करते हुए हम पापियों को सुसमाचार प्रसार कर सकते है। 
 

प्रारम्भिक महायाजक और बलिदान की पध्धति परमेश्वर के द्वारा नियुक्त किए गया था

महायाजक और बलि प्रथा परमेश्वर के द्वारा स्थापित किए गए थे। इसलिए, प्रारम्भिक महायाजक वही करते थे जो परमेश्वर उन्हें करने के लिए कहते थे, और ऐसा करने के द्वारा वह अपने लोगों के पापों की माफ़ी के अपने याजकीय काम को परिपूर्ण करता था। तो फिर स्वर्ग के महायाजक के रूप में यीशु मसीह ने किस प्रकार हमारे पापों को मिटाया? सांसारिक बलिदान के अर्पण का इस्तेमाल करने के बजाए, उसने बलिदान के अर्पण के रूप में खुद का ही निर्दोष शरीर लिया और हमारे सारे पाप उस पर डाल दिए। यीशु ने यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लेने के द्वारा मनुष्यजाति के पापों को उठाया, अपना लहू बहाया और क्रूस पर मर गया, मृत्यु से फिर जीवित हुआ, और इस प्रकार हमें जगत के सारे पापों से बचाया। यश प्रेम कितना अद्भुत है, और कितना अनोखा है यह उद्धार!
क्या आप यह कर सकते है? किसी ओर व्यक्ति के खातिर, क्या आप उस व्यक्ति के पापों को उठा सकते है और उसकी जगह मृत्यु तक क्रूस पर चढ़ सकते है? असंभव! इसके अलावा, आपका शरीर उचित बलिदान के लिए योग्य नहीं है, क्योंकि यह निर्दोष नहीं है। निसन्देह, ऐसे कुछ लोग है जिन्होंने भले के लिए धर्मी कार्य किए है – उदाहरण के लिए अपने देश के लिए। भले ही ऐसंकोई हो जो यह कर सकता है, फिर भी मनुष्य के द्वार किया हुआ सबकुछ व्यर्थ है, क्योंकि वे खुद अपने पाप की समस्या को भी हल नहीं कर सकते, तो दूसरों को पाप से कैसे बचा सकते है। परमेश्वर का पवित्र पुत्र यीशु मसीह के अलावा ऐसा ओर कोई नहीं है जो मनुष्यजाति को पाप से बचा सकता है। बाइबल हमें बताती है की यीशु मसीह को छोड़ इस स्वर्ग के नीछे ओर कोई नाम हमें नहीं दिया गया जिससे हम उद्धार पा सके (प्रेरितों ४:१२)।
बहरहाल, क्या आप के बिच में कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस प्रकार सोचता है, “मैं यह करने के लिए सक्षम हूँ। मैं किसी ओर व्यक्ति के लिए अपने अप को समर्पित करने के लिए योग्य हूँ, और आगे, मैं किसी ओर व्यक्ति के लिए खुद को बलिदान करने के लिए योग्य हूँ?” ऐसे बलिदान और समर्पण सराहनीय है, ऐसा अच्छा कार्य धीरे धीरे भुला दिया जाता है। इब्रानियों १३:९ हमसे कहता है, “नाना प्रकार के विचित्र उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्तुओं से जिन से काम रखनेवालों को कुछ लाभ न हुआ।” हमारा हृदय परमेश्वर से कौनसी समृध्धि और लाभ प्राप्त करेगा? यह उद्धार का परमेश्वर का प्रेम है जो हमारे हृदय को अपने अनुग्रह से भरता है। शारीरिक रूप से किसी व्यक्ति से मदद प्राप्त करना हमारे अनन्त जीवन के लिए कुछ भी नहीं है। जब हम फिर से स्वस्थ होंगे तब हम ऐसी मदद को भूल जाएंगे। 
सोक्रेटिस, कन्फ़्युज़िअस, और सिध्धार्थ को जगत के महान संत के रूप में माना जाता है। हालाँकि, क्या यह संत आपके उद्धारकर्ता बन सकते है? क्या सिध्धार्थ आपको पाप से शुध्ध कर सकता है? उसमे से कोई नहीं कर सकता। जब कोई भी मनुष्य अपने एक भी पाप की समस्या को सुलझा नहीं सकता तो फिर मनुष्यजाति का उद्धारकर्ता कौन बन सकता है। यहाँ तक की महायाजक भी अपने लोगों के पापों को नहीं मिटा सकता था। इस्राएल के लोगों के पाप केवल तभी शुध्ध होते जब वे परमेश्वर के द्वारा दी गई बलि प्रथा पर विश्वास करते और बलि प्रथा के मुताबिक बलिदान अर्पण करने के द्वारा अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त करते – अर्थात्, बलि पशु के सिर पर हाथ रखने के द्वारा अपने पाप उसके ऊपर पारित करना, उसके लहू को होमबलि की वेदी के सींगो पर छिड़कना और बचे हुए लहू को भूमि पर उंडेल देना, और होमबलि की वेदी पर उसकी चरबी को जलाना। 
सांतवे महीने के १०वे दिन साल भर के पापों की माफ़ी पाने के लिए, महायाजक को परमेश्वर के सामने बलि पशु के सिर पर हाथ रखना पड़ता था और इस प्रकार उस पर पापों को पारीर करना पड़ता था, परमपवित्र स्थान में उसके लहू को लेकर जाना पड़ता था, और प्रायश्चित के ढकने की पूर्व में उसे छिड़कना पड़ता था – अर्थात्, जिस दिशा से उसने प्रवेश किया उस ओर। जब वह सात बार लहू को छिड़कता था, तब उसके अंगरखे की कोर में बंधी सोने की घंटियाँ बजती थी। (यह सोने की घंटियाँ नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े से बुने अनार के बिच में लटकती हुई थी।) जब कभी भी वह चलता या लहू को छिड़कता तब तब घंटियों की आवाज सुनाई देती थी। यह आवाज सुसमाचार को दर्शाती है, सामर्थी सुसमाचार जो हमारे पापों को मिटाती है। जिस तरह महायाजक खुद के मुताबिक़ अर्पण बलिदान करने के द्वारा नहीं लेकिन परमेश्वर ने स्थापित किए हुए विधान के मुताबिक़ बलिदान अर्पण करने के द्वारा अपने लोगों को पापों की माफ़ी दिलाता था, वैसे ही नए नियम के युग में, यीशु मसीह ने इस पृथ्वी पर आकर, बपतिस्मा लेकर, क्रूस पर मरकर, और फिर मृत्यु से जीवित होने के द्वारा आपको और मुझे बचाया है। यीशु मसीह भी हमें केवल तभी धर्मी बना सका जब उसने खुद के द्वारा स्थापित उद्धार के नियम के मुताबिक़ अपने कार्य को परिपूर्ण किया।
जो कोई भी वास्तविक तौर पर नया जन्म पाना चाहता है वह केवल तभी अपने पापों की माफ़ी प्राप्त कर सकता है जब खुले मन से परमेश्वर के वचन को सुनने के लिए तैयार हो, अर्थात्, ‘बिरिया के लोगों’ की आत्मा की तरह। जो लोग असहमत है वे इस सत्य पर विश्वास नहीं कर सकते और अपने पापों की माफ़ी को प्राप्त नहीं कर सकते चाहे भले ही कितनी बार भी उनके सामने परमेश्वर के वचन को प्रचार क्यों न किया जाए; वे सबसे मूर्ख है। कैसे कोई परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचन पर विश्वास नहीं कर सकता? मनुष्य का ज्ञान वास्तव में कितना बड़ा है? वह परमेश्वर के वचन की बुध्धि से कई गुना छोटा है। भले ही चाहे वे खुद की उपलब्धियों के बारे में घमंड करे और परमेश्वर के वचन पर विश्वास करने से मना करे। ऐसे लोगों की तरह मूर्ख व्यक्ति को ढूँढना बड़ा कठिन है।
भाइयों और बहनों, दुनिया तेजी से बदल रही है। टेकनोलोगी भी बड़ी तेजी से विक्सित हो रही है ओर कहा जाता है की मनुष्य का प्रतिरूपण बनाना भी लगभग सम्भव है। नास्तिकता भी फ़ैल रही है, और धर्म का युग अब जा रहा है। हालांकि, भले ही यह दुनिया ओर भी ज्यादा कठोर बन जाए, लेकिन हम नया जन्म पाए हुए लोग परमेश्वर के राजकीय याजक के तौर पर विश्वास योग्यता से सेवा करेंगे। अब, अधर्मीपन के बहाव के बावजूद पानी और आत्मा का सुसमाचार पूरी दुनिया में तेजी से प्रसार हो रहा है। केवल हम ही है जो समय के बहाव के खिलाफ जा सकते है। 
मैं विश्वास करता हूँ की पानी और आत्मा का सुसमाचार, बलि प्रथा के मुताबिक़ परमेश्वर के द्वारा दिया गया उद्धार, ओर ज्याद बढेगा और आने वाले भविष्य में पूरी दुनिया में फ़ैल जाएगा। हम जो आज के याजक है वे खुद के लिए और दुनिया भर की सारी आत्माओं के लिए प्रार्थना करेंगे और इस सुसमाचार की गवाही देते हुए हमारे जीवन को जिएंगे। मैं विश्वास करता हूँ की जब हम विश्वास से जिएंगे, तब हम ऐसे व्यक्ति बन जाएंगे जो परमेश्वर के साथ चल सकता है और सुसमाचार के प्रसार के महान कार्य को पाएंगे। जब हम इस अन्त के समय में परमेश्वर को प्रसन्न करनेवाले कार्य को ढूँढते है और परिपूर्ण करते है, तो मैं विश्वास करता हूँ की सुसमाचार का कार्य दुनिया के कोने कोने में प्रगति करेगा, जिस तरह हवा के साथ फूलों की मधुर खुशबू बहती है। 
परमेश्वर ने हमें उसकी सेवा करने और उसकी सेवकाई में जोड़ने के लिए हमें याजक के तौर पर पवित्र किया इसलिए मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ।