उपदेश

विषय ९ : रोमियों (रोमियों की पत्री किताब पर टिप्पणी)

[अध्याय 4-1] रोमियों अध्याय ४ का परिचय

रोमियों ४:६-८ में पौलुस परमेश्वर के सामने धन्य लोगों के बारे में बात करता है। एक व्यक्ति जो वास्तव में परमेश्वर के सामने धन्य है, वह वो है जिसके अधर्म कामों कोमाफ़ किया गया हैं और जिनके पाप ढँक गए हैं। इसलिए पौलुस घोषणा करता है की, "धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए" (रोमियों ४:८)। 
फिर पौलुस ने इब्राहम को एक धन्य व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। बाइबल में इब्राहम को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, पौलुस बताता हैं कि सच्चा और धन्य विश्वास क्या है। यदि इब्राहीम के अपने काम उसे धर्मी ठहराते तो उसके पास कुछ घमंड करने के लिए होता, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। परमेश्वर की धार्मिकता जो उसने प्राप्त की वह केवल परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करने से ही संभव थी।
बाइबल दर्शाती है कि जिस विश्वास से कोई व्यक्ति धर्मी और धन्य हो सकता है, वह इब्राहीम के विश्वास की तरह ही परमेश्वर के वचनों पर का विश्वास है। इस अध्याय में, प्रेरित पौलुस इस बारे में बात करता है कि कैसे कोई परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करके अपने हृदय में परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकता है।
ऐसा कोई नहीं है, जो पृथ्वी पर रहते हुए कभी पाप नहीं करता। इसके अलावा, हम लोग उतना पाप करते हैं जितना कि आकाश को ढँकने वाले घने बादल। यशायाह में लिखा है कि हमारे पाप और अपराध घने बादलों के समान हैं (यशायाह ४४:२२)। इसलिए, पूरी मनुष्यजाति में से कोई भी ऐसा नहीं है जो यीशु मसीह की धार्मिकता में विश्वास किए बिना परमेश्वर के न्याय से बच सकता है।
यीशु ने जो बपतिस्मा लिया उसने और क्रूस पर उसके लहू ने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया। सब पाप करते हैं; नया जन्म पाए हुए और नया जन्म न पाए हुए दोनों अपनी देह के द्वारा पाप करते है। इसके अलावा, हम ऐसे पाप करते हैं जिनके बारे में हम जानते भी नहीं हैं, और इसलिए उन पापों के लिए हमारा न्याय होना तय है। 
इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर किसी व्यक्ति के पास जरा सा भी पाप है तो उसे परमेश्वर के न्याय के सामने मरना ही पड़ता है। बाइबल में कहा गया है कि पाप की मजदूरी मृत्यु है (रोमियों ६:२३), और इसलिए, हमें परमेश्वर की व्यवस्था को समझना और उस पर विश्वास करना चाहिए। हमें अपने मन और कर्मों से किए गए पापों की कीमत चुकानी होगी, और जब हम पाप की सारी मजदूरी चुका देंगे, तभी पाप की समस्या का समाधान होगा। दूसरी ओर, चाहे हम कितनी भी कोशिश कर लें, यदि हम अभी भी पाप की कीमत नहीं चुकाते हैं, तो पाप के न्याय का मुद्दा समाप्त नहीं होगा। हमें जो जानना चाहिए वह यह है कि एक व्यक्ति जो यीशु में विश्वास करता है और फिर भी पाप करता है, उसे उसके स्वयं के पापों के लिए न्याय किया जाएगा।
हम इस दुनिया में रहते हैं जो सभी प्रकार के पापों से भरी हुआ है: बड़े और छोटे, कथित और अगम्य, स्वेच्छा से और अनिवार्य रूप से। हमें केवल इस तथ्य को स्वीकार करना है की परमेश्वर की व्यवस्था, “पाप की मजदूरी मृत्यु है” के अनुसार हमें मृत्यु दण्ड मिल सकता है।
यदि कोई अपने सभी पापों को ढँकना चाहता है, तो उसे परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके पाप की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए, जो पानी, लहू और पवित्र आत्मा से आती है। जिसने परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके पाप की माफ़ी प्राप्त कर ली है, वह लगातार परमेश्वर की स्तुति का बलिदान चढ़ाने में सक्षम है और उसके पास उचित योग्यता है, क्योंकि परमेश्वर ने अपने बपतिस्मा और लहू द्वारा सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया है। चूँकि हमारे प्रभु ने पहले ही अपने बप्तिस्मा, लहू और पुनरुत्थान के द्वारा जगत के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया था, जिसमें मेरे बादल जैसे पाप भी शामिल थे, इसलिए हम प्रभु के सामने धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमें अनन्त जीवन दिया है। 
यदि यीशु मसीह ने यर्दन में यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेकर और क्रूस पर मरकर सभी पापों को अपने ऊपर नहीं लिया होता, तो हम नरक में जाकर पाप की मजदूरी की कीमत चुकाते। यदि उसने हमारे पापों को पूरी तरह से नहीं मिटाया है तो हम उसकी स्तुति कैसे कर सकते हैं? यदि हमारा ह्रदय पाप से भरा होगा तो क्या जब भी हम अपने पवित्र परमेश्वर के सामने आते हैं, तो हमारे लिए परमेश्वर के नाम की स्तुति करना संभव होगा? हमारे ह्रदय में अभी भी पाप होने के बावजूद भी क्या हम वास्तव में उसकी धार्मिकता के लिए स्तुति का बलिदान चढ़ा सकते है और कह सकते है की, "उसने हमारे सभी पापों को क्षमा कर दिया है?” नहीं। 
लेकिन अब, हम उसकी धार्मिकता में उसकी स्तुति कर सकते हैं। यह सब इसलिए संभव हुआ है क्योंकि हम परमेश्वर की धार्मिकता के उपहार में विश्वास करते हैं, जिसे हमने पहना है।
 

पौलुस ने कहा की परमेश्वर ने जो कार्य किया है उस पर विश्वास करने के द्वारा हमने धार्मिकता को प्राप्त किया है

“इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्‍त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्‍वर के निकट नहीं। पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्‍वर पर विश्‍वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।” काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्‍क समझा जाता है। परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्‍तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्‍वास करता है, उसका विश्‍वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है” (रोमियों ४:१-५)। 
 
यहाँ, पौलुस समझाता है कि इब्राहीम को एक उदाहरण के रूप में लेने के द्वारा कैसे धर्मी ठहराया जा सकता है। किसी व्यक्ति के लिए अपने काम का योग्य वेतन प्राप्त करना उचित है। हालाँकि, यह पूरी तरह से परमेश्वर का उपहार है और यह हमारे कार्यों की मजदूरी नहीं है कि हम परमेश्वर के सामने कोई भाला कार्य किए बिना या सम्पूर्ण जीवन जिए बिना नया जन्म प्राप्त करने के द्वारा धर्मी बन सकते है। 
प्रेरित पौलुस ने कहा, “काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्‍क समझा जाता है।” यह इस बारे में बात करता है कि कैसे एक पापी ने यीशु मसीह के बपतिस्मा और उसके बलिदान के लहू के द्वारा पाप से मुक्ति प्राप्त की। यह उद्धार उन सभी के लिए पाप की माफ़ी के लिए एक धन्य उपहार के रूप में दिया गया था जो परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करते हैं। 
एक पापी का उद्धार परमेश्वर की धार्मिकता द्वारा दिया गया बिना शर्त उपहार है। जो एक पापी के रूप में जन्मा है उसके पास पाप करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, और उसके पास परमेश्वर के सामने अंगीकार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है कि वह अनिवार्य रूप से एक पापी है। ऐसे पापी के पाप केवल इसलिए नहीं मिट सकते क्योंकि वह कुछ प्रचलित मसीही सिद्धांतों पर विश्वास करके पश्चाताप की प्रार्थना करता है। 
एक पापी परमेश्वर के सामने अपनी धार्मिकता के बारे में घमण्ड नहीं कर सकता। “हम सब के सब अशुध्द मनुष्य के से है, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़े के सामान है” (यशायाह ६४:६)। इसलिए, एक पापी के पास परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, जो हमारे प्रभु के यरदन नदी में बपतिस्मा लेने और क्रूस पर उनकी मृत्यु के द्वारा पूरी हुई थी। केवल तभी परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास के द्वारा व्यक्ति के सभी पापों को माफ़ किया जा सकता है। परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने के लिए एक पापी और कुछ नहीं कर सकता। आपके पापों की माफ़ी केवल परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके ही प्राप्त की जा सकती है।
सभी पापी यीशु मसीह के बपतिस्मा और क्रूस पर उनके लहू के माध्यम से उसकी धार्मिकता को पाने में सक्षम हैं। इसलिए, यह परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास है जो पापी के लिए पाप से मुक्ति प्राप्त करना संभव बनाता है। यह सच है। यह परमेश्वर की धार्मिकता का उपहार है।
 

प्रेरित पौलुस इस बारे में बात करता है की पापी अपने सारे पापों से किस प्रकार उद्धार प्राप्त कर सकता है

पौलुस इसे एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में अब्राहम का उपयोग करके समझाता है। “काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्‍क समझा जाता है।” प्रेरित पौलुस कह रहा है कि एक निश्चित प्रकार के वैध कार्य करने से कोई परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त नहीं कर सकता है। परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है की हम आत्मिक खतने के उसके धर्मी वचन पर विश्वास करे। 
परमेश्वर की धार्मिकता वह सत्य है जिसे मानवीय प्रयासों या कर्मों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर की धार्मिकता का उपहार निम्नलिखित था: आप और मैं वे लोग थे जो अनन्त विनाश में प्रवेश करने के लिए नियत थे, लेकिन हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा के माध्यम से सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया, जो यूहन्ना द्वारा यर्दन नदी में दिया गया था। फिर वह उन सब पापों को उठाकर क्रूस तक गया, जहाँ उसने अपने लहू से सारे पापों की कीमत चुकाई। इस तरह यीशु ने परमेश्वर की सब धार्मिकता को पूरा किया। उसके सभी धर्मी कार्यों ने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया जिसने पापियों को अनन्त मृत्यु से बचाया।
 

जो लोग परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते है वे परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त कर सकता है!
 
वचन ५ कहता है, “परन्तु जो काम नहीं करता वरन भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिए धार्मिकता गिना जाता है।” 
इस भाग में, प्रेरित पौलुस एक उदाहरण के रूप में 'अधर्मी' का उपयोग करके परमेश्वर की धार्मिकता का मार्ग बताता है। 'अधर्मी' वे हैं जो न केवल परमेश्वर से नहीं डरते बल्कि जीवन भर कठोर पाप भी करते हैं। परमेश्वर के वचन जो कहते हैं कि सभी लोग 'पाप के ढेर' के रूप में पैदा हुए थे, निश्चित रूप से सही हैं। इसके अलावा, यह भी सही है कि मनुष्यजाति का वास्तविक स्वरूप यह है कि जब तक वे परमेश्वर का न्याय प्राप्त नहीं करते तब तक उनके पास पाप करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। हालाँकि, यदि परमेश्वर हमें, अधर्मीयों को पापरहित कहता है और हमारे विश्वासों को धार्मिकता के लिए जिम्मेदार ठहराता है, तो परमेश्वर की धार्मिकता के अलावा और क्या इसे संभव बना सकता है?
हमारा परमेश्वर हम अधर्मियों से बात करता: दुनिया के सभी पापों को लेने के लिए प्रभु को स्वयं पुराने नियम के अंतिम महायाजक यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से यर्दन नदी में बपतिस्मा लेना पडा। उसे अपने वचन को पूरा करने के लिए हमारे पापों की कीमत का भुगतान क्रूस पर अपना लहू बहाने के द्वारा करना पडा, "पाप की मजदूरी मृत्यु है।" क्या आप विश्वास करते हैं कि यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और क्रूस के लहू के द्वारा हमारे सभी पापों की मजदूरी को परमेश्वर की धार्मिकता से चुकाया? परमेश्वर उन लोगों के विश्वास का हिसाब रखता है जो उसकी धार्मिकता में विश्वास करते हैं। यह कोई अविनेय आग्रह नहीं है बल्कि परमेश्वर की निष्पक्ष धार्मिकता से बना एक तथ्य है।
इसलिए, जो व्यक्ति जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करता है उसे पिता परमेश्वर कहते हैं, "सही है, आप मेरी प्रजा हो। आप मेरी धार्मिकता में विश्वास करते हो। अब आप मेरी संतान है। आप पापरहित हो। क्यों? क्‍योंकि मैं ने अपने पुत्र के बपतिस्‍मा और उसके लहू के द्वारा आपके सारे पापों को उसके ऊपर डालकर आपको पापरहित बनाया है! उसने आपके पापों की कीमत भी अपने लहू को बहाकर चुकाई है ठीक इस वचन के मुताबिक़, 'पाप की मजदूरी तो मृत्यु है।' वह आपके लिए मृत्यु से जीवित हुआ। इसलिए, वह आपका उद्धारकर्ता और परमेश्वर है। क्या आप इस पर विश्वास करते हैं?" 
"हाँ मैं विश्वास करता हूँ।" फिर वह आगे कहेगा, “मैं ने अपनी वह धार्मिकता तुझे दी है, जो मेरे पुत्र के धर्मी कामों से परिपूर्ण हुई है। अब आप मेरी संतान बन गए है, मैंने मेरे पुत्र के पानी और लहू से आपको गोद लिया है।" 
सारी मनुष्यजाति परमेश्वर के सामने अधर्मी है। हालाँकि, हमारे प्रभु यीशु ने अधर्मी के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया – हमने जो पहले किए थे उन्हें और हम जो भविष्य में करनेवाले है उन दोनों पापो को – यूहन्ना द्वारा दी गए बपतिस्मा से एक ही बार में। इसके अलावा, परमेश्वर ने उन सभी लोगों को अपनी धार्मिकता दी औउर उन्हें उन्हें अपने पापों से बचाया जो परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करते हैं। “क्योंकि तुम सब उस विश्‍वास के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्‍वर की सन्तान हो। और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है” (गलाती ३:२६-२७)। अब प्रश्न यह है कि क्या हम वास्तव में अपने हृदय से परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते हैं या नहीं। यदि हम विश्वास करते हैं तो हम धर्मी हो जाते हैं, परन्तु यदि हम नहीं करते हैं, तो हम परमेश्वर की धार्मिकता को खो देते हैं।
    
 
यहाँ तक की परमेश्वर की द्रष्टि में जो अधर्मी है...

यहाँ तक कि जो लोग अधर्मी है उनसे भी परमेश्वर ने वायदा किया था की यदि वे विश्वास करे की यीशु ने यर्दन नदी में बपतिस्मा लेने के द्वारा जगत के सारे पाप ले लिए थे तो परमेश्वर की धार्मिकता उनकी हो सकती है। परमेश्वर ने वास्तव में प्रत्येक विश्वासी को अपनी धार्मिकता प्रदान की है। जो कोई भी परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करता है उसे इस जगत के सभी पापों से उद्धार मिलता है। हमारे पिता परमेश्वर ने अपनी धार्मिकता में उन विश्वासियों से कहा की वे उनकी संतान है। "हाँ, अब आप पापरहित है। मेरे पुत्र यीशु ने आपको आपके सभी पापों से बचाया। आप धर्मी हैं। आप अपने सभी पापों से बचाए गए हैं।" 
भले ही हम अधर्मी हैं, परमेश्वर हम पर अपनी धार्मिकता की मुहर लगा देता है ताकि यह पुष्टि हो सके कि हम धर्मी हैं। परमेश्वर की धार्मिकता अनंतकाल की है। प्रभु यीशु ने वास्तव में पूरी मनुष्यजाति के लिए सही काम किया है। इस दुनिया के सभी लोग परमेश्वर की धार्मिकता के द्वारा जगत के सारे पाप्पों से बचे है। परमेश्वर अपनी धार्मिकता में उनके विश्वासों को देखकर अधर्मियों की आत्माओं को पापरहित मानते हैं। "धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए," क्योंकि उसने विश्वास के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता की आशीष प्राप्त की है।
परमेश्वर हमसे पूछता है, "क्या आप धर्मी हैं?" तब, हम इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि हम परमेश्वर की दृष्टि में अधर्मी हैं। जब हम इस तथ्य को स्वीकार करते हैं, तो हम आभारी होते हैं कि यीशु ने पापियों के लिए बपतिस्मा लिया, क्रूस पर अपना लहू बहाया, और यह कि यह परमेश्वर की धार्मिकता थी जिसने जगत के पापों को अपने ऊपर ले लिया; हमारे अपने प्रयास नहीं। हालाँकि, यदि हम सोचते हैं कि हम ऐसे लोग हैं जो व्यवस्था का पालन अच्छी तरह से कर सकते हैं, तो हम कभी भी उसके आभारी नहीं हो सकते और न ही उसकी धार्मिकता में विश्वास कर सकते हैं।
व्यक्ति जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करता है जो "अधर्मियों को धर्मी ठहराती है," वह उपहार के रूप में परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त करने के लिए आता है। परमेश्वर की धार्मिकता उन लोगों को उपहार के रूप में दी जाएगी जो यीशु मसीह के छुटकारे और न्याय में विश्वास करते हैं, लेकिन जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते हैं, उनके लिए परमेश्वर की सभी आशीषें और अनुग्रह बंद रहेंगे।
यहाँ तक कि एक नया जन्म पाए हुए धर्मी व्यक्ति के लिए भी, परमेश्वर की धार्मिकता जो यीशु द्वारा स्थापित की गई थी, दिन-प्रतिदिन आवश्यक है, क्योंकि हम भी जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, वे लोग हैं जो इस जगत में रहते हुए हर दिन पाप करते है। इसलिए, हमें खुद को हर दिन परमेश्वर की धार्मिकता के आनंदमय समाचार को याद दिलाने की आवश्यकता है, कि यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू के द्वारा सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया। हर बार जब हम आनंद के समाचार सुनते हैं, तो यह हमारी आत्मा को तरोताजा कर देता है और हमारे दिलों को अत्यधिक सामर्थ से पुष्ट करता है। क्या अब आप इस सन्दर्भ को समझते हैं, "परन्तु जो काम नहीं करता वरन भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिए धार्मिकता गिना जाता है"? यह वचन इस जगत के सभी लोगों से बात करता है।
बाइबल अब्राहम के उदाहरण के द्वारा विस्तार से बताती है कि कैसे कोई परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकता है। हालाँकि, यह कहा गया था कि एक व्यक्ति "जो काम करता है" वह परमेश्वर के उद्धार के लिए आभारी होने के बजाय, परमेश्वर का सामना करता है। एक व्यक्ति "जो काम करता है" वह परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करता है और इस प्रकार, वह आभारी नहीं है। वचन ४ कहता है कि जो व्यक्ति अपने लिए अच्छे कर्म करके स्वर्ग जाने की कोशिश करता है, उसे परमेश्वर की धार्मिकता की आवश्यकता नहीं होती है। 
क्यों? क्योंकि वह अच्छे कर्म करके और अपने लिए प्रतिदिन पश्चाताप की प्रार्थना करके अपने पापों को धोने की कोशिश करता है इसलिए वह परमेश्वर की धार्मिकता को नहीं पाता है। ऐसा व्यक्ति परमेश्वर की धार्मिकता को पूरी तरह से स्वीकार नहीं करना चाहता क्योंकि वह स्वेच्छा से अपने स्वयं के धर्मी कार्यो को त्याग नहीं करता है। लेकिन, पश्चाताप की प्रार्थनाओं के माध्यम से, वह रोते और उपवास करते हुए अपनी आत्मा के उद्धार को प्राप्त करने का प्रयास करता है। इसलिए, परमेश्वर की धार्मिकता केवल उन्हें दी जाती है जो वास्तव में उसके धर्मी वचनों पर विश्वास करते हैं।
    
 
काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं!

"परन्तु जो काम नहीं करता वरन भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिए धार्मिकता गिना जाता है" (रोमियों ४:५)।
भाइयों, यह पवित्रशास्त्र उस व्यक्ति से संबंधित है जो परमेश्वर को स्वीकार करता है और जो अब्राहम की तरह ही परमेश्वर के वचनों में विश्वास करता है। हम उद्धार के परमेश्वर पर विश्वास करते हैं जिन्होंने अधर्मियों को बचाया। इस जगत में दो तरह के मसीही विश्वासी हैं। वचन ४ में, एक "काम करने वाले" व्यक्ति के बारे में लिखा है, और ऐसा व्यक्ति परमेश्वर के उद्धार को उपहार के रूप में नहीं, बल्कि ऋण के रूप में मानता है। क्योंकि ऐसे लोग यीशु में विश्वास करने के बाद परमेश्वर के सामने अपने धर्मी कार्यों के लिए पहचाने जाना चाहते हैं, वे परमेश्वर की धार्मिकता के उद्धार को अस्वीकार करने के लिए उपयुक्त हैं। आपको क्या लगता है कि परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने के लिए आपके किस प्रकार के बलिदान की आवश्यकता है?
यदि आप अपने अच्छे कर्मों को धारण करके परमेश्वर के सामने चलते हैं, तो आप परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त न करके सिर्फ पापी बन जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि पवित्रता का सिद्धांत, जिसका अधिकांश मसीही समर्थन करते हैं, उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता के उपहार का विरोध करके परमेश्वर के शत्रुओं में बदल कर, उन्हें अधिक से अधिक धर्मी कार्य करने के लिए प्रेरित करता है? बाइबल यह नहीं बताती कि हम धीरे-धीरे परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकते हैं। न ही यह कहती है कि हम अपने कार्यों से परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त कर सकते हैं। 
'मानवीय कार्यों' के समर्थक सिखाते हैं कि आप पश्चाताप की प्रार्थनाओं के माध्यम से पवित्र हो सकते हैं। वे कहते हैं कि यदि आप शुद्ध और धर्मी जीवन जीते हैं तो आप अधिक धर्मी हो सकते हैं और यदि आप मरते दम तक पवित्रता से जीते हैं तो आपको बचाया जा सकता है, भले ही यीशु मसीह ने आपके पापों को समाप्त कर दिया हो। 
हालाँकि, परमेश्वर की धार्मिकता मानवीय कर्मों के साथ असंगत है। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता का विरोध करते हैं, वे शैतान के सहयोगी बन जाते हैं। क्योंकि ऐसे व्यक्ति प्रभु की धार्मिकता को अस्वीकार करते हैं, वे प्रभु के सामने पाप की माफ़ी प्राप्त नहीं कर सकते। 
भाइयो, हम 100% अधर्मी थे। हालाँकि, वास्तविकता यह है कि बहुत से लोग परमेश्वर की धार्मिकता को गलत समझते हैं और इसलिए विश्वास के गलत रास्ते पर चल रहे हैं। चूँकि बहुत से लोग सोचते हैं कि वे कुछ हद तक अच्छे हैं इसलिए वे परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते हैं। उनका मानना है कि खुद से पश्चाताप की प्रार्थना करने से उनके दैनिक और भविष्य के पापों को माफ़ किया जा सकता है। ये लोग मानते हैं कि उनमें कम से कम कुछ मात्रा में अच्छाई है, इसलिए वे परमेश्वर की धार्मिकता की खोज और विश्वास किए बिना अपने अच्छे कामों को आगे बढ़ाते हैं।
किस प्रकार का व्यक्ति धर्मी बन सकता है? जो लोग पश्चाताप की प्रार्थना करने में अच्छे नहीं हैं वे धर्मी बन सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को अंगीकार की प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है। मुझे आशा है कि आप मुझे इस भाग के बारे में गलत नहीं समझेंगे। मैं बाद में 'धर्मियों के जीवन' के मुद्दे से निपटूंगा। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता का विरोध करते हैं, वे कुछ अच्छे कर्म करने, उपवास की प्रार्थना करने या पवित्र जीवन जीने के बारे में सोचते हैं। 
हालाँकि, केवल वे जो जानते हैं कि उनके कार्य अपर्याप्त हैं, वे अपने हृदय में पाप की माफ़ी के यीशु के उपहार को प्राप्त करके एक पापी की स्थिति से धर्मी बन सकते हैं। केवल एक चीज जो हमें करनी चाहिए वह है परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करना और यह जानना कि हमारी अपनी धार्मिकता में घमण्ड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हमें परमेश्वर के सामने जो स्वीकार करना है, वह है, "हे परमेश्वर! हमने ऐसे पाप किए हैं। हम पापी हैं जो मरते दम तक पाप करते रहेंगे।” केवल यही एक चीज है जिसे हमें ईमानदारी से स्वीकार करना चाहिए। और केवल दूसरी चीज जो हमें करनी है वह यह है कि हमें विश्वास करना है की यीशु मसीह ने अपनी धार्मिकता को पूरी तरह से पूरा किया। 
परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके, प्रत्येक पापी अपने सभी पापों से पूरी तरह से उद्धार प्राप्त कर सकता है। हम यीशु मसीह की धार्मिकता में विश्वास के द्वारा स्तुति करते हैं, क्योंकि हम जो पाप के बीच में नाश होने वाले थे, उन्होंने सभी पापों से उद्धार प्राप्त किया है।
 

वास्तव में कौन धन्य व्यक्ति है?

परमेश्वर के सामने धन्य व्यक्ति कौन है? बाइबल एक धन्य व्यक्ति को निम्नलिखित रूप में परिभाषित करती है। "धन्य हैं वे, जिनके अधर्म के काम क्षमा हुए, और जिनके पाप ढांपे गए।" भले ही व्यक्ति परमेश्वर की दृष्टि में कोई अच्छा काम नहीं कर पाया है, अक्षम और दुर्बल है, या परमेश्वर की व्यवस्था के सभी या कुछ हिस्सों का पालन करने में सक्षम नहीं है, परमेश्वर ने पाप की माफ़ी का आशीष उन विश्वासियों को दिया है जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास रखते हैं, जिन्होंने यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर लहू के द्वारा हमारे सभी पापों को मिटा दिया है। इस प्रकार के लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं और परमेश्वर के सामने सबसे अधिक धन्य हैं, क्योंकि उन्होंने अनगिनत लोगों में से उसके सामने विशेष आशीष प्राप्त किया है। हमने परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके अपने सभी पापों से उद्धार प्राप्त किया है। हम विश्वास करते हैं कि परमेश्वर ने ऐसा कहा है। क्या हमारे पास परमेश्वर के ऐसा कहने के बावजूद भी उसके वचनों में जोड़ने के लिए और कुछ है? नहीं, हम नहीं करते।
इस जगत में ऐसे कई लोग हैं जो अभी भी अपने अच्छे कामों से उद्धार पाने की कोशिश करते हैं, भले ही वे स्वीकार करते हैं कि यीशु उनका उद्धारकर्ता है।
क्या पाप से परमेश्वर के उद्धार के सत्य को पूरक करने के लिए और कुछ है, जो कहता है कि यीशु ने यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लिया, क्रूस पर लहू बहाया और मृत्यु के बाद पुनर्जीवित हो गया? नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।
हालाँकि, आज के मसीही परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के बारे में बहुत भ्रमित हैं। लोग जानते हैं कि वे यीशु में विश्वास करके उद्धार प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन दूसरी ओर, वे अभी भी अपने उद्धार के लिए यह आवश्यक समझते हैं कि उन्हें धीरे-धीरे पवित्र होना चाहिए, सदाचारी जीवन जीना चाहिए, और एक बार जब वे यीशु में विश्वास करना शुरू करते हैं, तो परमेश्वर के वचनों के साथ व्यवस्था का पालन करना चाहिए। इस प्रकार लोग बहुत ही व्याकुल है।
भले ही वे जो कहते हैं वह धर्मियों के समान लगता है, यह उस विश्वास से दूर है जो परमेश्वर की धार्मिकता को जानता और मानता है। एक व्यक्ति प्रभु में अच्छी तरह से कैसे विश्वास कर सकता है? यह तभी संभव है जब हम पानी और पवित्र आत्मा के वचनों में निर्मल विश्वास रखते हैं जिसमे परमेश्वर की धार्मिकता सम्मिलित है और इस प्रकार, हमारे सभी पापों से उद्धार प्राप्त करना है। परमेश्वर का सत्य हमें उसके बपतिस्मा और क्रूस पर लहू में हमारे विश्वास के द्वारा सभी पापों से उद्धार प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता विशुद्ध रूप से प्रकट होती है। 
हमें क्रमिक पवित्रीकरण, बिना शर्त चुनाव और नाममात्र के न्यायसंगति, या झूठे विश्वासों पर बेतुके मसीही सिद्धांतों को दूर करना चाहिए, जो कहते हैं कि सूअर का मांस न खाने, या सब्त के दिन का पालन करने से उद्धार प्राप्त होता है। हमें इस तरह की बकवास करने वालों से दूर रहना चाहिए। उनकी बातों का कोई निष्कर्ष या सही उत्तर नहीं है।
भाइयो, क्या यह सही विश्वास है या नहीं कि हम कुछ भी अच्छा किए बिना परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके पाप से उद्धार प्राप्त करते हैं? हाँ, यही सच्चा विश्वास है।─ परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने के लिए हमने किस प्रकार के कार्य किए हैं? क्या हमने परमेश्वर के सामने कोई अच्छा काम किया है? नहीं।─ क्या हम अपने विचारों में भी अपने आप में परिपूर्ण हैं? नहीं, हम नहीं हैं।─ तो क्या इसका यह मतलब है कि हमें अपनी पसंद के अनुसार जीना चाहिए? नहीं।─ क्या हमें उसकी संतान होने के लिए व्यवस्था के अनुसार सदाचार से जीना चाहिए? नहीं।─ इसका अर्थ है कि हमें केवल परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने, पाप की माफ़ी प्राप्त करने और पवित्र आत्मा को सही विश्वास के माध्यम से उपहार के रूप में प्राप्त करने के द्वारा ही परमेश्वर की सच्ची संतान बनना चाहिए।
लोगों के लिए अच्छा जीवन जीना बिल्कुल असंभव है। हालाँकि, यदि कोई व्यक्ति काम नहीं करता है, यदि वह अभी भी यीशु द्वारा दी गई धार्मिकता में विश्वास करता है, तो वह एक धन्य व्यक्ति है जिसे सभी पापों से बचाया गया है। प्रत्येक व्यक्ति मूल रूप से एक अच्छा जीवन जीने में असमर्थ होता है। इसलिए, परमेश्वर ने हमारे साथ सहानुभूति व्यक्त की और यीशु को इस जगत में भेजा, उसे यूहन्ना बप्तिस्मा देनेवाले के द्वारा बप्तिस्मा दिया गया, ताकि वह जगत के पापों को अपने ऊपर ले सकें। यीशु को पापों को क्रूस पर ले जाने और पाप की समस्या का समाधान करने के लिए बनाया गया था।
पूर्वी कहावतों में एक कहावत है, "दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन बलिदान करना चाहिए।" जब कोई किसी व्यक्ति को डूबने से बचाकर डूबता है, तो वे उसके बलिदान के लिए उसकी प्रशंसा करते हैं। भाइयो, इसका मतलब यह है कि डूबते हुए व्यक्ति को बचाना स्वाभाविक है, लेकिन हम इसके बारे में बहुत अधिक सोचते हैं। 
यहां एक और पुरानी कहावत है, 'इंगवा-उंगबो'। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अच्छा जीवन जीता है, तो उसे भविष्य में आशीष मिलेगी, लेकिन अगर वह बुरा व्यवहार करता है तो उसे दंडित किया जाता है। भाइयों, क्या वास्तव में कोई ऐसा व्यक्ति है जो किसी अन्य व्यक्ति के लिए स्वतंत्र रूप से अपनी जान दे देता है? विषमलैंगिक प्रेम के मामले में भी, पुरुष और महिलाएं एक-दूसरे से प्यार करते हैं और उनकी परवाह करते हैं क्योंकि यह उनके पसंद के अनुकूल है। इस तरह, सभी लोग मूल रूप से अहंकारी होते हैं। 
इसलिए, परमेश्वर कहते हैं कि मनुष्यों के भीतर कोई गुण नहीं हो सकता है और हमें ध्यान से जाँच करनी चाहिए कि क्या हम वास्तव में उसकी धार्मिकता पर भरोशा करते हैं और विश्वास करते हैं, जिसने हमारे सबसे बुरे पापों को भी समाप्त कर दिया है, भले ही हमने किसी भी प्रकार का अच्छा कार्य न किया हो। हमारे परमेश्वर ने हमें जो धार्मिकता दी है उस पर विश्वास करके हमें अपने सभी पापों से उद्धार प्राप्त करना चाहिए।      
    
 
आपको सारे अधर्मी कार्यो के पापों की माफ़ी प्राप्त करनी चाहिए

परमेश्वर के सामने अधर्म के कार्य क्या हैं? हमने परमेश्वर की दृष्टि में जितने भी बुरे काम किए हैं, वे सब अधर्म के काम हैं।
आप और मैं कैसे परमेश्वर के सामने अपने पापों को ढँक सकते हैं? क्या एक मोटा बुलेटप्रूफ कवर हमारे पापों को ढँक सकती है? या क्या १ मीटर मोटा लोहे का कवच, जो सबसे मजबूत धातु से बना है, परमेश्वर की दृष्टि में हमारे पापों को ढँक सकता है? भाइयों, जब भी हम अच्छे कर्म करते हैं, तो क्या वे हमारे द्वारा परमेश्वर के सामने किए गए पापों और दोषों को ढँक लेते हैं? नहीं, मनुष्यजाति के अच्छे कर्म आत्म-सांत्वना से ज्यादा कुछ नहीं हैं। अच्छे कर्म करके अपनी अंतरात्मा को तसल्ली देकर परमेश्वर के न्याय से कोई नहीं बच सकता। 
"धन्य हैं वे... जिनके पाप ढँक गए हैं।" बाइबिल में यही कहा गया है। भाइयों, यदि हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने ढकना चाहते हैं, तो ऐसा करने का एकमात्र तरीका परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करना है जिसके द्वारा उसने हमें बचाया। परमेश्वर की इस धार्मिकता में यीशु मसीह का इस जगत में आना बपतिस्मा लेना, हमारे पापों को अपने ऊपर लेना, और क्रूस पर उनकी मृत्यु शामिल है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यीशु ने बपतिस्मा लेकर जगत के पापों को अपने ऊपर ले लिया और क्योंकि उसने क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा न्याय प्राप्त किया। यह परमेश्वर की धार्मिकता है। जब कोई उसकी धार्मिकता में विश्वास करता है तो सभी पाप धुल जाते हैं।
भले ही कोई व्यक्ति अपने अच्छे कर्मों से अपने पापों को छिपाने की कोशिश करे, लेकिन यह परमेश्वर के सामने किसी काम का नहीं है। यह केवल यीशु के बपतिस्मा और लहू के धर्मी कार्य हैं जो आपके और मेरे पापों को ढँक सकते हैं। हमारा न्याय होना था, हमें नष्ट किया जाना था, और हमारे पापों के कारण परमेश्वर के उग्र क्रोध को प्राप्त करके नरक में जाना था, लेकिन यीशु इस जगत में आए और यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा लेने और क्रूस पर मरने के द्वारा हमारे लिए परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया। आपको इस पर विश्वास करना चाहिए। हम अपने पापों को परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास के द्वारा ढँक सकते हैं। क्यों? क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता ने उसके बपतिस्मा और लहू बहाने के द्वारा जगत के सभी पापों की कीमत पहले ही चूका दी है। आप और मैं इस सत्य पर विश्वास करके अपने पापों को ढँक सकते हैं।
किस प्रकार का व्यक्ति धन्य है? ऐसे विश्वास वाला व्यक्ति धन्य होता है। “धन्य हैं वे, जिनके अधर्म के काम क्षमा हुए, और जिनके पाप ढांपे गए; क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिस पर यहोवा पाप का दोष न लगाए।” इस प्रकार का विश्वास रखने वाला व्यक्ति सुखी और धन्य होता है। क्या आप और मैं इस तरह का विश्वास रखते हैं? एक सच्चा धन्य व्यक्ति वह है जिसने परमेश्वर के वचनों को लिया है कि यीशु मसीह ने हमें पानी और पवित्र आत्मा के द्वारा बचाया है और उसे अपने ह्रदय में रखा है। जो व्यक्ति यीशु मसीह को उसके पानी और लहू के साथ अपने ह्रदय में ग्रहण करता है और यीशु मसीह के भीतर वास करता है, वह वास्तव में एक धन्य व्यक्ति है।
विश्वास से, हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने वालों को अद्भुत उद्धार प्राप्त हुआ है, जिसमें मानवीय विचार या गुण का ज़रा भी अंश नहीं है। केवल एक सच्चा धन्य व्यक्ति ही इस विश्वास में विश्वास करता है, इसे अपने ह्रदय में रखता है और सच्चे सुसमाचार का प्रचार कर सकता है। 
भाइयो, कभी भी अपने स्वयं के कुछ पुण्य कर्मों को उनकी कृपा में जोड़कर परमेश्वर की संतान बनने या पापों से उद्धार पाने की कोशिश मत करो! क्या आप सदाचारी हैं? यदि कोई अच्छा बनने की कोशिश करता है तो यह अहंकार है, भले ही वह वास्तव में अच्छा नहीं है और सोचता है कि वह बन सकता है। यदि एक गरीब व्यक्ति को एक अरबपति से उपहार के रूप में एक बड़ा हीरा मिलता है, तो गरीब व्यक्ति को केवल "धन्यवाद" कहने की आवश्यकता होती है। वही परमेश्वर की धार्मिकता के लिए भी है।
रोमियों अध्याय ४ उन लोगों के बारे में बात करता है जिन्हें परमेश्वर ने आशीष दी थी। ऐसे लोगों को परमेश्वर की धार्मिकता वाले सुसमाचार के वचनों में विश्वास करने के द्वारा सभी पापों से बचाया गया है। 
मैं आशा करता हूँ की यह आशीष आपकी हो जाए।