उपदेश

विषय ९ : रोमियों (रोमियों की पत्री किताब पर टिप्पणी)

[अध्याय 8-3] ( रोमियों ८:९-११ ) मसीही कौन है?

( रोमियों ८:९-११ )
“परन्तु जब कि परमेश्‍वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है। यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया, तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी नश्‍वर देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है, जिलाएगा।” 
 
 
कोई व्यक्ति सच्चा मसीही है या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि परमेश्वर की आत्मा उसके भीतर रहती है या नहीं। चाहे व्यक्ति यीशु पर विश्वास करे या नहीं लेकिन यदि उसके हृदय में पवित्र आत्मा नहीं है तो वह मसीही कैसे हो सकता है? पौलुस हमें बताता है कि क्या हम यीशु में विश्वास करते हैं, यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है की क्या हम उस पर विश्वास करते हैं कि हमने परमेश्वर की धार्मिकता की खोज की है या नहीं। संतों के लिए आवश्यक सच्चा विश्वास वह विश्वास है जो उनमें आत्मा के निवास के लिए तैयार है। आप के अन्दर पवित्र आत्मा की उपस्थिति निर्धारित करेगी कि आप मसीही हैं या नहीं। 
इस प्रकार, पौलुस ने कहा, "अब यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं है तो वह उसका जन नहीं।" उसने कहा "किसी में।" इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह व्यक्ति सेवक है, सुसमाचार प्रचारक है, या पुनरुत्थानवादी है। यदि किसी के हृदय में पवित्र आत्मा नहीं है, तो वह व्यक्ति परमेश्वर का जन नहीं है। आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि आप परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते हैं जो आपको पवित्र आत्मा प्राप्त करने की ओर ले जाती है, तो आप एक पापी हैं जो नरक में जाने के लिए नियत है। इस प्रकार हम सभी को पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में चिंतित होना चाहिए जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता निहित है। 
यदि पवित्र आत्मा हम में वास करता है, तो इसका अर्थ है कि हम मसीह के बपतिस्मा में अपने विश्वास के द्वारा पाप के लिए मर चुके है। लेकिन नई प्राप्त हुई धार्मिकता के कारण हमारी आत्मा जीवित है। इसके अलावा, जिस दिन हमारे प्रभु फिर से आएंगे, तब हमारे नश्वर शरीर को भी जीवन मिलेगा। इसलिए हमें उसके बारे में सोचना चाहिए जिसने हमें पवित्र आत्मा दिया है।
यदि आपके पास वह विश्वास नहीं है जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करता है, तो आप मसीह के नहीं हैं। दूसरी ओर, यदि आपको परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास है, तो परमेश्वर का आत्मा आप में वास करता है। इस विश्वास के बिना, पवित्र आत्मा आप पर राज्य नहीं करेगा। इसलिए, यदि आपके पास छुटकारे का वचन नहीं है जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता निहित है, तो आप मसीह के नहीं हैं, भले ही फिर आपने प्रत्येक रविवार की सेवा में बाहरी रूप से प्रेरितों के विश्वास-कथन को स्वीकार किया हो और उसका पठन किया हो। यदि आप मसीह के नहीं हैं, तो आपकी आत्मा शापित हो जाएगी, और यह आपको अनन्त विनाश की ओर ले जाएगी, भले ही फिर आपने कितना भी अच्छा करने की इच्छा क्यों न की हो।