उपदेश

विषय ९ : रोमियों (रोमियों की पत्री किताब पर टिप्पणी)

[अध्याय 8-5] ( रोमियों ८:१२-१६ ) परमेश्वर की धार्मिकता में चलना

( रोमियों ८:१२-१६ )
“इसलिये हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं कि शरीर के अनुसार दिन काटें, क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रियाओं को मारोगे तो जीवित रहोगे। इसलिये कि जितने लोग परमेश्‍वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्‍वर के पुत्र हैं। क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो, परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिससे हम हे अब्बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं। आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्‍वर की सन्तान हैं।”
 

प्रेरित पौलुस एक ऐसा व्यक्ति जिसने परमेश्वर से उद्धार प्राप्त किया था, उसने कहा की नया जन्म पाए हुए विश्वासी को शरीर के अनुसार नहीं, लेकिन आत्मा के अनुसार जीना चाहिए। विशेष रूप से, पौलुस ने कहा कि यदि हम, जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है, शरीर के अनुसार जीवन जिए, तो हम मर जायेंगे, परन्तु यदि हम आत्मा के अनुसार जीवन जिए, तो हम जीवित रहेंगे। इसलिए हमें इस सत्य पर विश्वास करना चाहिए। तो फिर, जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, उन्हें कैसे जीना चाहिए? क्या उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता या शरीर की अभिलाषा के अनुसार जीवन जीना चाहिए? उन्हें पता होना चाहिए कि क्या सही है और अपने शरीर को परमेश्वर के धार्मिक कार्यों के लिए खुद को समर्पित करने के लिए अनुशासित करना चाहिए।
 

अपरिहार्य दायित्व

पौलुस ने दावा किया कि हमारा दायित्व है कि हम आत्मा के अनुसार रहें, न कि हमारे पापी स्वभाव के कारण क्योंकि हम मसीही लोग परमेश्वर के क्रोध से बच गए हैं और उनकी धार्मिकता की ओर आए है। इससे पहले कि हम परमेश्वर की धार्मिकता से अवगत होते और उस पर विश्वास करते, हम आत्मा के अनुसार नहीं जी सकते थे। लेकिन अब जब हम परमेश्वर की धार्मिकता को जानते हैं और उसमें विश्वास करते हैं, तो हम अपने हृदय, विचार, प्रतिभा, शरीर और समय को परमेश्वर के धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर सकते हैं। हमें परमेश्वर की धार्मिकता का प्रचार करने और उसके धर्मी कार्यों को करने में अपने आप को उपकरण के रूप में उपयोग करना चाहिए।
 

देह के अनुसार जीवन जीना

यदि आप मसीह में हैं और आप आत्मा के द्वारा नहीं लेकिन अपने पापी स्वभाव से जीवन जीते है, तो बाइबल कहती है कि आप सब अविश्वासियों की तरह नाश होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि भले ही आप एक नया जन्म प्राप्त किए हुए मसीही है, लेकिन आप वास्तव में परमेश्वर की धार्मिकता के अनुसार नहीं जीते हैं। यदि आपको एक सच्चा मसीही बनना है, तो आपको अब देह के द्वारा नहीं, लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता से जीना चाहिए, क्योंकि आप परमेश्वर की धार्मिकता की सेवा करने के लिए नियत हैं क्योंकि आप उसमें विश्वास करते हैं। इसके बावजूद यदि आप केवल शरीर के अनुसार जीते है, तो आपकी आत्मा मर जाएगी। हालाँकि, यदि आप परमेश्वर की धार्मिकता के अनुसार जीते हैं, तो आप हमेशा के लिए शांति से रहेंगे। 
 

परमेश्वर के पुत्र

“इसलिये कि जितने लोग परमेश्‍वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्‍वर के पुत्र हैं” (रोमियों ८:१४)।
जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, उन्होंने पवित्र आत्मा को उपहार के रूप में प्राप्त किया है, और पवित्र आत्मा उनकी अगुवाई करता है। ये "परमेश्वर के पुत्र" हैं। "परमेश्वर के पुत्रों" में पवित्र आत्मा वास करता है। इसलिए, जिनके पास पवित्र आत्मा नहीं है, वे परमेश्वर के नहीं हैं। परमेश्वर का अनुसरण करने का प्रारंभिक बिंदु उसकी धार्मिकता में विश्वास के साथ शुरू होता है। परमेश्वर की सन्तान बनना पानी और आत्मा के सुसमाचार के वचन पर विश्वास करने से शुरू होता है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर की संतान बनना परमेश्वर की धार्मिकता के सुसमाचार में विश्वास करने से शुरू होता है। इसका अर्थ है कि आप परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके उसके परिवार के सदस्य बन जाते हैं और यह कि परमेश्वर ने आपको आपके पापों से बचाने के लिए अपनी धार्मिकता दी है। 
जब नीकुदेमुस, यहूदियों का सरदार यीशु से मिलने आया, तब यीशु ने उससे कहा की जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर की सन्तान नहीं बन सकता। निकुदेमुस ने उससे कहा, “मनुष्य जब बूढा हो गया, तो कैसे जन्म ले सकता है?” (यूहन्ना ३:४)। यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्‍वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। अचम्भा न कर कि मैं ने तुझ से कहा, ‘तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।’ हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है” (यूहन्ना ३:५-८)।
यीशु ने कहा कि जो पानी और आत्मा से पैदा नहीं हुआ, वह नए सिरे से जन्म लेने का अर्थ नहीं समझ सकता। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से  लिए हुए यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर बहाए हुए लहू पर का विश्वास उन लोगों को परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है जो उसके धर्मी कार्य पर विश्वास करते है। जो लोग सुसमाचार के वचन में विश्वास करते हैं वे पवित्र आत्मा को उपहार के रूप में प्राप्त करने में सक्षम हैं। पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करके कोई भी व्यक्ति परमेश्वर की धार्मिकता तक पहुँच सकता है। हर कोई जो परमेश्वर की धार्मिकता को स्वीकार करता है वह परमेश्वर की सन्तान बन सकता है। जो परमेश्वर लोग बनते हैं, वे हमारे भाई-बहन हैं। 
 

आत्मा आप ही गवाही देता है की हम परमेश्वर की सन्तान है

“क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो, परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिससे हम हे अब्बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं। आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्‍वर की सन्तान हैं” (रोमियों ८:१५-१६)।
केवल दो तरीके हैं जिनसे हम इस बात की गवाही दे सकते हैं कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। पहला, परमेश्वर की धार्मिकता जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में प्रकट होती है, उसने हमें परमेश्वर की सन्तान बना दिया है; और दूसरा, पवित्र आत्मा हमारे पास आता है। पवित्र आत्मा पानी और आत्मा के सुसमाचार के भीतर कार्य करता है। परमेश्वर ने इन सभी चीजों की योजना बनाई थी। पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना स्वयं में गवाही है जो हमें बताता है कि हम परमेश्वर की सन्तान बन गए हैं। जो परमेश्वर की धार्मिकता को जानकर और उस पर विश्वास करके परमेश्वर की सन्तान बन गए हैं, उनके पास “अब्बा,” हे पिता कहकर परमेश्वर से प्रार्थना करने का अधिकार है। 
आइए हम तार्किक रूप से सोचने की कोशिश करें। जिसके हृदय में पाप है, वह परमेश्वर को अपना पिता कैसे कह सकता है? पिता परमेश्वर ने कभी भी पापी को अपनी सन्तान के रूप में नहीं रखा है, और पापी ने कभी भी पिता के रूप में परमेश्वर की सेवा नहीं की है। आपको अपने अंदर झांकना चाहिए और देखना चाहिए कि कहीं आप भी ऐसी गलती तो नहीं कर रहे हैं। जो पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर की सन्तान होने की गवाही देते हैं, वे वो हैं जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं। हमें परमेश्वर की धार्मिकता के बारे में गहराई से सोचना चाहिए।​