उपदेश

विषय ९ : रोमियों (रोमियों की पत्री किताब पर टिप्पणी)

[अध्याय 8-12] ( रोमियों ८:३१-३४ ) हमारा विरोधी कौन हो सकता है?

( रोमियों ८:३१-३४ )
“अत: हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा? परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।”
 

रोमियों ८:३१-३४ में, पौलुस पानी और आत्मा के सुसमाचार को सारांशित करके और अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने के द्वारा मसीह के विश्वासियों के अविभाज्य प्रेम की गवाही देता है। यह भाग विश्वास की उंचाई पर पहुंचे उद्धार के महान आनंद की घोषणा करता है। 
रोमियों ८:३१ में पौलुस ने कहा, “अत: हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” पौलुस की तरह, हमने अनुभव किया है कि समय के साथ पानी और आत्मा का सुसमाचार फैलता है और हमारी कमजोरियों के प्रकट होने के साथ-साथ उद्धार का और भी बड़ा सुसमाचार बन जाता है। जितना अधिक हम पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा करते हैं, उतना ही अधिक हम विश्वास और आनंद से भर जाते हैं।
पौलुस ने उस सुसमाचार को, जिसमें उसने विश्वास किया था, "मेरा सुसमाचार" कहा है (२ तीमुथियुस २:८)। पौलुस ने जिस सुसमाचार की गवाही दी वह कोई और नहीं बल्कि यीशु के बपतिस्मा और लहू में विश्वास था। 
"मेरा सुसमाचार" जिसका पौलुस ने प्रचार किया, वह क्रूस के सुसमाचार को संदर्भित नहीं करता है जिसमें धार्मिक लोग विश्वास करते हैं, लेकिन पानी और आत्मा का सुसमाचार जो उस आशीष की घोषणा करता है कि यीशु ने एक बार और हमेशा के लिए मनुष्यजाति के सभी पापों को दूर कर दिया। 
इस सुसमाचार ने पौलुस को बहुत साहसी व्यक्ति बनाया। जब से उसने पापों की क्षमा प्राप्त की, परमेश्वर की धार्मिकता ने उसका हृदय भर दिया और इस प्रकार उसका हृदय भी पवित्र आत्मा से भर गया। उसने जीवन भर पानी और आत्मा के सुसमाचार की गवाही देने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। पानी और आत्मा के सुसमाचार में मनुष्यजाति के पापों को एक ही बार में दूर करने की सामर्थ और अधिकार है। 
तो फिर, कौन पानी और आत्मा के सुसमाचार विरुद्ध होने का साहस कर सकता है जिस पर पौलुस विश्वास करता था? कोई नहीं! रोमियों ८:३१ हमें बताता है, “अत: हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” इस संसार में उन लोगों के विरुद्ध कौन हो सकता है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं? जब परमेश्वर ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा मनुष्यजाति को संसार के पापों से बचाया, तो कौन उनकी सामर्थ को तुच्छ जान सकता है? न तो वे जो केवल नाम मात्र यीशु पर विश्वास करते हैं और न ही स्वयं शैतान उन लोगों से लड़ सकता हैं या जीत सकटा हैं जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं। 
 

परमेश्वर ने हमें एक ही बार में धर्मी ठहराया

रोमियों ८:२९-३० कहता है, “क्योंकि जिन्हें उसने पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों, ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। फिर जिन्हें उसने पहले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी; और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है; और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।”
यह हमें बताता है कि परमेश्वर पिता ने मसीह में सभी पापियों को बचाने की योजना बनाई और उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार के माध्यम से बुलाया, उनके पापों को एक ही बार में धोकर उन्हें अपनी सन्तान बनाया। जब हमारे प्रभु ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा सभी पापियों को उनके पापों से छुड़ाया, तो कौन उनके द्वारा किए गए कार्यों के विरुद्ध हो सकता है? 
जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहराए गए हैं, उनके विरुद्ध कौन हो सकता है और उन पर विजय प्राप्त कर सकता है? यह बकवास है। आपको पता होना चाहिए कि जो कोई भी उनके खिलाफ है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करके धर्मी हो गए हैं, वे लोग स्वयं परमेश्वर के अलावा किसी और के खिलाफ नहीं है। आपको हर कीमत पर अपने सभी पापों से बचने के लिए पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना चाहिए। यदि आपके मन और हृदय में आप सत्य के सुसमाचार के विरुद्ध हैं, तो आपको अपने पापों से नहीं बचाया जा सकता है, और आपको नरक में दण्डित किया जाएगा। 
 

जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है उनके खिलाफ कोई नहीं जा सकता

“अत: हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” (रोमियों ८:३१) यह कि परमेश्वर हमारे लिए है, इस तथ्य का प्रतिनिधित्व करता है कि उसने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा हमारे सभी पापों को दूर किया और हमें बचाया। तो फिर, उन लोगों के विरुद्ध कौन हो सकता है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा अपने पापों से छुटकारा पा चुके हैं, और कौन कह सकता है कि ऐसा विश्वास गलत है? यह व्यर्थ का एक बेकार कार्य होगा। परमेश्वर ने उन लोगों के विश्वास को मंज़ूरी दी है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं। 
कोई इसे कैसे चुनौती दे सकता है? यीशु ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर अपने लहू के द्वारा संसार के सभी पापों को उठा लिया। कौन कह सकता है कि इसमें विश्वास करने वाले गलत हैं? कोई नहीं! 
रोमियों ६:३ में पौलुस ने कहा, "क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया?” पौलुस का मतलब था कि वह यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करता था, जिसके माध्यम से उसके सभी पाप यीशु पर पारित हो गए थे और शुद्ध हो गए थे, और जिसके द्वारा पौलुस की मृत्यु हो गई थी और यीशु के साथ पुनर्जीवित किया गया था। 
गलातियों ३:२७ भी हमें यह बताता है, "और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।" यह भाग हमें बताता है कि यीशु ने अपने बपतिस्मा के साथ जगत के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया, इन पापों के लिए वह क्रूस पर चढ़ाया गया, और पुनरुत्थित किया गया था, केवल हमें यह आशीष देने के लिए कि जो लोग इस सत्य में विश्वास करते हैं वे परमेश्वर की सन्तान बने। पौलुस का विश्वास इस विश्वास पर आधारित था कि उसने यीशु में बपतिस्मा लिया था, उसके साथ क्रूस पर मरा था, और उसके साथ पुनरुत्थित किया गया था। इसलिए, एक बार जब आप यीशु के बपतिस्मा में विश्वास कर लेते हैं, तो आपके सभी पाप शुद्ध हो जाते हैं और आप मसीह के साथ पुनरुत्थित होकर परमेश्वर की सन्तान बन जाते हैं। 
"और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।" दूसरे शब्दों में, जो लोग यह विश्वास करते हैं कि यीशु इस संसार में आया था और जगत के पाप उठाने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया था, वे यीशु में बपतिस्मा लेते हैं। इसके अलावा, वे यह भी विश्वास करते हैं कि वे यीशु के साथ क्रूस पर मरे, और उनके विश्वास से वे उसके साथ पुनरुत्थित हुए। 
इसलिए, जो कोई भी यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करता है, वह अपने पापों से बच जाएगा। ठीक वैसे ही जैसे यीशु परमेश्वर का पुत्र है, जो लोग मसीह के बपतिस्मा और लहू में विश्वास करने के द्वारा अपने पापों से छुटकारा पा लेते हैं, वे परमेश्वर की सन्तान बन जाएंगे। "और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है, उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।" जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, तो हम परमेश्वर की सन्तान बनने के लिए मसीह की धार्मिकता को पहिन लेते हैं। 
पौलुस ने यीशु के बपतिस्मा के बारे में बात की क्योंकि उसने पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा एक महान आशीष प्राप्त की। परन्तु बहुतों को अभी तक परमेश्वर से ऐसी आशीष प्राप्त नहीं हुई है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार के साथ आती है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि पौलुस ने जिस सुसमाचार का प्रचार किया वह क्रूस पर लहू का सुसमाचार था, लेकिन सच्चाई यह है कि उसने पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास किया और उसका प्रसार किया, जो यीशु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू को जोड़ती है। . 
तो फिर, यीशु के अनुयायी आज पानी और आत्मा के इस सुसमाचार से अनजान क्यों हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रारंभिक कलीसिया के समय में प्रचारित पानी और आत्मा का सुसमाचार समय के साथ बदल गया है। प्रारंभिक कलीसिया के समय में, सभी विश्वासियों ने पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास किया और प्रचार किया। 
हालाँकि, समय के साथ, सुसमाचार को बदल दिया गया और केवल मसीह के लहू के रूप में प्रचारित किया गया, जबकि उसके बपतिस्मा को तेजी से नजरअंदाज कर दिया गया। यह बताता है कि क्यों, अब भी, बहुत से लोग केवल क्रूस पर लहू में विश्वास करते हैं, जो प्रारंभिक कलीसिया के समय के सच्चे सुसमाचार से विचलित होता है। 
इन लोगों में अभी भी पाप है। वे पानी और आत्मा के सुसमाचार से अनजान हैं, जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट होती है, और इस तरह, वे अभी भी पापी हैं, और वे अभी भी परमेश्वर की इस धार्मिकता के खिलाफ खड़े हैं फिर भले ही वे कहते हैं कि वे यीशु में विश्वास करते हैं।
आत्मिक दृष्टि से अंधा व्यक्ति क्या देख सकता है? अंधा व्यक्ति हाथी को छूकर समझने की कोशिश कर सकता है। एक अंधा व्यक्ति हाथी के पैर को छू कर कह सकता है की वह एक खम्भे जैसा है, और फिर दूसरा अंधा व्यक्ति उसकी नाक को छू कर कह सकता है कि यह कुछ लंबा है, क्योंकि इससे पहले किसी ने हाथी को नहीं देखा है। इसी तरह, आत्मिक रूप से अंधा व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार की महानता के बारे में बात नहीं कर सकता। 
इसलिए, जो पानी और आत्मा की आशीष को नहीं जानते, वे उसका प्रचार नहीं कर सकते। जिसने देखा है वह आसानी से समझ सकता है कि व्यक्ति क्या समझाने की कोशिश करता है, लेकिन एक अंधा व्यक्ति इसे वास्तव में कभी नहीं समझ पाएगा। 
लोग जन्म से ही पापी होते हैं। क्योंकि हम जन्म से ही आत्मिक रूप से पापी थे, हम पानी और आत्मा के सुसमाचार की सच्चाई को नहीं जानते। जो लोग केवल क्रूस पर लहू में विश्वास करते हैं, उन्होंने अपने दम पर मसीही धर्म का एक नया संस्करण बनाया है। उनके पाप कैसे धुल सकते है जब वे दावा तो करते हैं कि वे यीशु में विश्वास करते हैं और फिर भी केवल क्रूस पर लहू में विश्वास करते हैं? समय बीतने के साथ और अधिक पापो का ढेर बन जाएगा। 
जो लोग केवल यीशु के लहू पर उद्धार के रूप में विश्वास हैं वे वो हैं जो अभी तक आत्मिक रूप से जागृत नहीं हुए हैं। परन्तु यीशु हमें यूहन्ना ३:५ में स्पष्ट रूप से कहता हैं, "जब तक कोई पानी और आत्मा से न जन्मे, वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।" इसलिए हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना चाहिए ताकि परमेश्वर की सन्तान बनने और उसके राज्य में प्रवेश करने की महिमा प्राप्त हो सके। 
क्योंकि पौलुस पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करता था, इसलिए उसने विश्वास से कहा, "यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोध कौन कर सकता है?" (रोमियों ८:३१) जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार को नहीं जानते, क्या वे परमेश्वर की सन्तान के विरुद्ध हो सकते हैं? वे परमेश्वर की सन्तान के विरुद्ध हो सकते है, परन्तु वे उन पर कभी विजय नहीं पा सकते। जो लोग केवल क्रूस पर लहू में विश्वास करते हैं, वे उन लोगों पर विजय प्राप्त नहीं कर सकते जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं। 
जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता के विरुद्ध हैं वे केवल परमेश्वर के शत्रु बन सकते हैं और इस प्रकार उनकी आशीष कभी प्राप्त नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति पानी और आत्मा के सुसमाचार पर जिसमे परमेश्वर की धार्मिकता प्रगट हुई है उस पर विश्वास किए बिना उद्धार प्राप्त नहीं कर सकता है या ऐसा विश्वास प्राप्त नहीं कर सकता जो उसे स्वर्ग में लेकर जा सके। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे इस प्रकार झूठे सुसमाचार पर विजय प्राप्त कर सकते हैं और सच्चे सुसमाचार की ओर लौट सकते हैं। परमेश्वर की सन्तान जगत और शैतान पर जय पा सकते है।
कुछ लोग यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू को स्पष्ट रूप से नहीं समझते हैं, और उनकी गलतफहमी उन्हें झूठे विश्वास की ओर ले जाती है। यदि आप क्रूस पर लहू में विश्वास करते हैं लेकिन यीशु के बपतिस्मा के सुसमाचार में विश्वास करके पापों की क्षमा प्राप्त करने के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं, तो आपका विश्वास गलत है। 
जो परमेश्वर के सामने पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे ही उसकी धार्मिकता को प्राप्त करेंगे और सच्चा विश्वास रखेंगे। परमेश्वर हमें बताता है कि जो लोग केवल क्रूस पर उसके पुत्र के लहू में विश्वास करते हैं, वे गलत हैं। जो लोग उसकी धार्मिकता में विश्वास नहीं करते हैं वे पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते और उसे पहचान ते नहीं हैं, लेकिन जो लोग उसकी धार्मिकता में विश्वास करते हैं, वे यह भी विश्वास करते हैं कि क्रूस पर मसीह के लहू और उसके बपतिस्मा दोनों ने उनके पापों को दूर कर दिया। 
हमें अपनी जिद को दूर करना होगा। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार को अस्वीकार करते हैं, वे इस बात पर जोर देते हैं कि उनकी झूठी मान्यताएँ सत्य हैं। जो केवल लहू में विश्वास करते हैं, वे परमेश्वर की धार्मिकता पर आधा विश्वास करते है। केवल वे जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें ही पूरा विश्वास है, और वे ही अकेले परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करते है और उसे प्राप्त करते है (मत्ती ३:१५, ११:११)।
केवल लहू पर विश्वास करने वालों की लिखी किताबें कागज को रद्दी में रही हैं। एक बार धर्मशास्त्रियों द्वारा जिन सिद्धांतों की चर्चा की गई थी, उन्हें अब ईसाइयों द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया है, लेकिन पानी और आत्मा के सुसमाचार पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है। यह सत्य प्रेरिटन के युग से अस्तित्व में है और कभी नहीं बदलेगा। परमेश्वर का वचन हमेशा के लिए मौजूद है, लेकिन जो लोग केवल लहू में विश्वास करते हैं, उन्हें लोगों की यादों से मिटा दिया जाता है। क्या कारण है? ऐसा इसलिए है क्योंकि लहू, जिसमें परमेश्वर की आधी ही धार्मिकता है, वह पापियों पर अपने आप कोई प्रभाव नहीं डालता। 
सच कहूँ तो, आज अधिकांश लोग, चाहे वे मसीही हों या गैर-मसीही, बहुत सारे पाप करते हैं। केवल लहू में विश्वास करके इन सभी पापों को कैसे क्षमा किया जा सकता है? वे सिद्धांत जो क्रूस पर केवल लहू पर जोर देते हैं, लोगों को सिखाते हैं कि जब भी वे पाप करें तो क्षमा के लिए प्रार्थना करें, लेकिन वे अपने पापों की क्षमा प्राप्त करने के लिए कब तक प्रार्थना कर सकते हैं? वे चाहे कुछ भी कहें, वे पापों की क्षमा प्राप्त नहीं कर सकते। 
क्या यीशु इस जगत में आया और बिना बपतिस्मा लिए ही मरते दम तक लहू बहाया? आप जानते हैं कि यह सच नहीं है। यीशु इस जगत में आया और बपतिस्मा लेकर सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया (मत्ती ३:१५)। क्रूस पर लहू बहाने से पहले यूहन्ना ने उन्हें बपतिस्मा दिया था, जिससे उसे क्रूस पर चढ़ाने की अनुमति मिली। इस तरह यीशु ने सब धार्मिकता को पूरा किया। यदि आप उस बपतिस्मा में विश्वास करते हैं जो यीशु ने यूहन्ना से प्राप्त किया था, तो आपको प्रतिदिन अपने पापों की क्षमा प्राप्त करने के लिए उसकी दया के लिए रोने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करें और पूर्ण उद्धार प्राप्त करें।
यीशु को जगत के सभी पापों को अपने कंधों पर लेने के लिए बपतिस्मा दिया गया था और जगत के पापों के लिए एक ही बार हमेशा के लिए न्याय करने के क्रूस पर चढ़ाया गया था। यीशु के बपतिस्मा और उसके लहू में विश्वास करके ही उद्धार प्राप्त किया जा सकता है। 
 

क्या यीशु ने हमें ऐसा उद्धार दिया है जो हमने किए हुए पापों से बड़ा है?

यीशु द्वारा दिया गया छुटकारा उन सभी पापों से कहीं अधिक है जो हमने किए हैं और करेंगे। यदि यीशु का बपतिस्मा और उसका लहू मनुष्यजाति के पापों से बड़ा नहीं होता, तो हम न तो उद्धारकर्ता के रूप में यीशु पर विश्वास कर सकते थे और न ही छुटकारा प्राप्त कर सकते थे। हालाँकि, प्रभु की भलाई इतनी महान है कि उन्होंने अपने बपतिस्मा के द्वारा एक ही बार में जगत के पापों को दूर कर लिया। 
इसी तरह, स्वर्ग का द्वार खुला है, लेकिन कोई भी इस द्वार में पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास किए बिना प्रवेश नहीं कर सकता है। आप उन लोगों के खिलाफ हो सकते है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, लेकिन आप परमेश्वर के भयानक न्याय से नहीं छिप सकते। इसलिए, ऐसा मत सोचिए कि आप यीशु के बपतिस्मा और लहू के विश्वास पर जित हाँसिल कर सकाते है, जिसके माध्यम से परमेश्वर की धार्मिकता पूरी हुई थी। 
बहुत से लोग जो पानी और आत्मा के सुसमाचार के विरोध में थे, वे प्रेरित पौलुस के भी विरुद्ध थे। परन्तु कोई यह न कह सका कि पानी और आत्मा का सुसमाचार जिस पर पौलुस विश्वास करता था, वह गलत था। उन्होंने केवल यह स्वीकार किया कि यीशु परमेश्वर का पुत्र और उनका उद्धारकर्ता था। 
रोमियों ८:३२ हमें बताता है, “जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा?” परमेश्वर पिता ने अपने इकलौते पुत्र को जगत में भेजा और उसके बपतिस्मा के द्वारा उसने जगत के सभी पापों को सहन किया, क्रूस पर मर गया, और हमें हमारे पापों से छुडाने ने के लिए मृत्यु में से फिर से जीवित हुआ।
हमें जगत के पापों से बचाने और हमें परमेश्वर की सन्तान बनाने के लिए, जैसा कि यीशु था, परमेश्वर पिता ने हमें अपना एकलौता पुत्र दिया। परमेश्वर ने उन सभी को जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते है, उन्हें अपनी सन्तान बनाने और आशीषित और धर्मी बनाने के लिए, उसने अपने एकलौते पुत्र को बपतिस्मा लेने के लिए भेजा। परमेश्वर ने योजना बनायी थी की वह सारी मनुष्यजाति को अपनी स्वर्गीय आशीषे और पानी और आत्मा का सुसमाचार प्रदान करेगा। इन आशीषों में से एक है पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करके उसकी सन्तान बनना। 
“जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा?” (रोमियों ८:३२) यहाँ “सब कुछ” परमेश्वर के उपहार को दर्शाता है। कौनसा उपहार? जिन्होंने यीशु को ग्रहण किया और उसके नाम पर विश्वास किया उनको परमेश्वर ने अपनी सन्तान होने का अधिकार दिया - अर्थात, वे जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें परमेश्वर की सन्तान बनाया गया है। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे निष्पाप हैं। वे धर्मी हैं और वास्तव में परमेश्वर की पवित्र सन्तान हैं। 
जो लोग इन सब में विश्वास करके परमेश्वर की सन्तान बनते हैं, उन्हें हज़ार वर्ष के राज्य और स्वर्ग के राज्य का उपहार दिया जाएगा। धर्मी लोग स्वर्ग की सभी महिमा प्राप्त करने के लिए धन्य हैं। 
“हमें सब कुछ देगा” इसका अनुवाद कुछ लोग पवित्र आत्मा देने के रूप में करते है। वे सोचते हैं, "क्या इसका यह अर्थ है कि एक बार जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं, तो पवित्र आत्मा हमें अलग से दिया जाता है?" यह सच नहीं है क्योंकि जब आप पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, तो आप एक ही समय में अपने पापों की माफ़ी और पवित्र आत्मा प्राप्त करते हैं। पवित्र आत्मा पापी हृदय में निवास नहीं कर सकता। पवित्र आत्मा हमारे पास उसी क्षण आता है जब हमारे सभी पाप माफ़ हो जाते हैं।
विश्वासियों के लिए पवित्र आत्मा प्राप्त करने से कहीं अधिक ओर भी कुछ है। परमेश्वर के उपहार तब तक समाप्त नहीं होते जब तक कि सभी स्वर्गीय आशीषें हमें नहीं दे दी जातीं। इस जगत में, लोग सोचते हैं कि चंगाई, अन्यभाषा में बोलना, और भविष्यवाणी करना उपहार हैं, लेकिन इस भाग में वर्णित उपहार उन सभी स्वर्गीय चीजों को संदर्भित करते हैं जो हमारे पिता के पास हैं। उपहारों के द्वारा, पौलुस उन सभी चीजों के बारे में बात कर रहा है जो परमेश्वर अपनी सन्तानों को देता है जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है।
परमेश्वर ने कहा कि जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें वह सभी अच्छी चीजें उपहार के रूप में देगा। परमेश्वर ने पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने वालों को नया जन्म प्राप्त करने का उपहार दिया। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें परमेश्वर एक उपहार के रूप में स्वर्ग की सभी चीजें देता है। मसीही व्यक्ति इस दुनिया में रहते हुए बहुत कष्ट झेलते हैं लेकिन जब परमेश्वर का राज्य आएगा, तो वे स्वर्ग की महिमा से संपन्न होंगे।
 

ऐसा मत कहिए की आपको बिना किसी कारण चुना गया है

रोमियों ८:३३-३४ कहता है, “परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्‍वर ही है जो उनको धर्मी ठहरानेवाला है। फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।”
“परमेश्‍वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा?” क्या अप उन पर दोष लगा सकते है जिन्हें परमेश्वर ने पानी और आत्मा के सुसमाचार के द्वारा बचाया है? बिलकूल नही!
धर्मशास्त्रियों ने केल्विन को यह कहते हुए उद्धृत किया कि कुछ लोग बिना शर्त चुने गए थे जबकि दुसरे लोग नहीं। हालाँकि, हमें परमेश्वर की उपस्थिति में "बिना शर्त" शब्द का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से, वे साबित करते हैं कि वे परमेश्वर को बिल्कुल भी नहीं जानते हैं, और यह कि उनका सिद्धांत झूठा है। बिना शर्त चयन का अर्थ है कि परमेश्वर बिना किसी कारण के कुछ लोगों से प्रेम करता है और बिना कारण के दूसरे लोगों से घृणा भी करता है। हम कैसे कह सकते हैं कि परमेश्वर धर्मी है जब वह कुछ लोगों से प्रेम करता है और दूसरों से घृणा करता है? यह हमारा परमेश्वर नहीं है। हमारा परमेश्वर मसीह में सभी मनुष्यजाति से प्रेम करता है और उनकी परवाह करता है।
यहाँ, वचन ३२ में कहा गया है, “जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा?” सारी मनुष्यजाति को बचाने के लिए परमेश्वर ने हमें अपना पुत्र दिया। उसके माध्यम से, परमेश्वर ने हमें विश्वास दिलाया कि उसने हमारे सभी पापों को पानी और लहू के वचन के द्वारा दूर कर दिया है। वचन ३३ में लिखा है, "परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा?" यहाँ, शब्द "परमेश्वर के चुने हुए" का अर्थ यह नहीं है कि परमेश्वर बिना शर्त कुछ लोगों को चुनता है। परमेश्वर उन लोगों को चुनता है जो यीशु मसीह के बिना नहीं रह सकते हैं और जिन्हें उनकी अपनी धार्मिकता के बिना परमेश्वर की अपनी धार्मिकता के कपड़े पहनाए जा सकते हैं। 
वे लोग जिन्हें परमेश्वर की धार्मिकता के द्वारा चुना जाता है, वे वो हैं जो विश्वास करते हैं और इस सच्चाई में आशारा लेते हैं कि यीशु इस धरती पर आए, बपतिस्मा लिया, और हमारे सभी पापों को दूर करने के लिए क्रूस पर बलिदान दिया। वे वही हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, वह परमेश्वर जिसने उन्हें जगत के पापों से बचाया और उन्हें अपनी धार्मिकता के कपड़े पहनाए। 
तो फिर कौन धर्मियों पर दोष लगा सकता है? कोई नहीं! कोई नहीं कह सकता कि हमारा विश्वास गलत है। कोई भी उन लोगों का न्याय नहीं कर सकता जो अपने पापों से बचाए गए हैं और पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की सन्तान के रूप में चुने गए हैं। जो लोग केवल क्रूस के लहू में विश्वास करते हैं, वे न तो यह कह सकते हैं कि जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते हैं, वे झूठे हैं, और न ही परमेश्वर के सामने उन पर दोष लगा सकते हैं। 
कुछ लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता को पहिने हुए लोगों को गलत समझते हैं। लेकिन क्या यह सही है? नहीं! परमेश्वर की उपस्थिति में धर्मी होने के लिए चुने गए लोगों के विश्वास को कभी भी किसी के द्वारा गलत तरीके से नहीं आंका जा सकता है।
कौन कह सकता है कि जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं वे पापी हैं और गलत तरीके से उनके विश्वासों का न्याय करते हैं? हम लंबे समय से पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करते रहे हैं, जिसमें दुनिया के सभी लोगों के लिए परमेश्वर की धार्मिकता प्रकट हुई है। 
परन्तु किसी ने हम पर पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार करने का दोष नहीं लगाया। कुछ ही ऐसे थे जिन्होंने हमें केवल क्रूस के लहू के विश्वास को स्वीकार करने के लिए कहा। यहाँ तक कि वे यह भी नहीं कह सकते थे कि पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करना गलत है। 
पानी और आत्मा का सच्चा सुसमाचार वह सुसमाचार है जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता समाहित है। यही सच्चा सुसमाचार है, और अन्य सभी सुसमाचार अपूर्ण हैं। प्रेरित पौलुस, जिसने पानी और आत्मा के सुसमाचार का प्रचार किया, उसने कहा कि इस सच्चे सुसमाचार के अलावा कोई और सुसमाचार कभी नहीं हो सकता है, और उसने जोर देकर कहा, “परन्तु यदि हम, या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो शापित हो। जैसा हम पहले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूँ कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो शापित हो” (गलातियों १:८-९)।
कोई यह नहीं कह सकता कि पानी और आत्मा का सुसमाचार बाइबल की दृष्टि से गलत है। जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास नहीं करते, वे इसके विरुद्ध हैं। यदि आप विश्वास करते हैं कि परमेश्वर द्वारा दिया गया पानी और आत्मा का सुसमाचार झूठा है, तो आगे बढ़ो और परमेश्वर का विरोध करो। हमें भी अधूरे झूठे सुसमाचारों के खिलाफ लड़ना है जो केवल क्रूस के लहू पर जोर देते हैं। यीशु पहले अपने बपतिस्मा के द्वारा खुद पर हमारे पापों को लिए बिना बिना क्रूस पर कैसे चढ़ाया जा सकता था? 
 

ऐसा मत कही की जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है उनके अन्दर पाप है

"दोष लगाने" का अर्थ है किसी मुकदमे पर निर्णय मांगना। केवल एक ही है जो उन लोगों पर दोष लगा सकता है जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वह है कुकर्मी। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास है, तो उनके विश्वास का गलत न्याय कौन कर सकता है? कौन कह सकता है कि वे गलत हैं? कोई नहीं, क्योंकि परमेश्वर ही उन्हें धर्मी ठहराता है। पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करने वालों पर कोई भी पाप करने का आरोप नहीं लगा सकता। 
"परमेश्वर ही है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है" (रोमियों ८:३३)। पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वासियों को पापरहित कौन घोषित कर सकता है? केवल परमेश्वर कर सकते हैं। वह अपनी धार्मिकता से घोषणा करता है कि पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वासी धर्मी हैं। 
"धर्मी" उन लोगों पर लागू नहीं होता जिनके पास अभी भी पाप है, लेकिन यह उन पर लागू होता है जिनके पापों को वास्तव में क्षमा कर दिया गया है, जिससे वे "पापरहित और धर्मी" बन गए। जब परमेश्वर कहता है कि जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे पापरहित हैं, तो कौन यह कहने का साहस कर सकता है कि वे गलत हैं और उनमें परमेश्वर की धार्मिकता नहीं है? इस दुनिया में कोई धर्मशास्त्री ऐसा नहीं कह सकता। 
आज का मसीही धर्म पवित्रता के सिद्धांत द्वारा भ्रष्ट हो गया है जो धार्मिक पवित्रता प्राप्त करने का प्रयास करता है। इंग्लैंड में एक धर्मशास्त्री, पूछने के बाद, "क्या परमेश्वर की कलीसिया पवित्र है?" दावा किया कि परमेश्वर की कलीसिया में भी खामियां हैं। स्पष्ट रूप से, यह धर्मशास्त्री न तो पानी और आत्मा के सुसमाचार के बारे में जानता था और न ही उसे परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास था। 
परन्तु परमेश्वर की कलीसिया में प्रत्येक विश्वासी पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करता है और पूरी तरह से पापरहित है। यद्यपि वह शरीर में कमजोर हो सकता है, फिर भी उसके पास परमेश्वर की सिद्ध और निर्दोष धार्मिकता है। 
क्या परमेश्वर की कलीसिया में हर कोई पाप रहित है? हाँ! कलीसिया एक ऐसा स्थान है जहां विश्वासी जो पवित्र हैं और बिना पाप के है वे मसीह में एकत्रित होते हैं। यदि विश्वासियों के पास पाप है, तो वे परमेश्वर की सन्तान नहीं हैं। किस बात ने उन्हें पवित्र किया? बेशक, यह पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास है जिसने उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त करने के द्वारा पापरहित बनाया है। धर्मशास्त्री ने कहा कि यहां तक कि परमेश्वर की कलीसिया में भी खामियां है क्योंकि वह पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास नहीं करता था या उसे जानता भी नहीं था।
कौन यह कहने का साहस करता है कि पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वासी पापी हैं? यह परमेश्वर है जिसने उन्हें 'धर्मी' बनाया। क्या हम, जो पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, केवल इसलिए पाप कर सकते है क्योंकि हम कमजोर हैं? हम निश्चित रूप से नहीं कर सकते! तो क्या इसका यह अर्थ है कि जब हम पाप करते हैं तब भी हमारे पास कोई पाप नहीं है? हाँ, हमारे पास कोई पाप नहीं है! यही कारण है कि हमें पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने की आवश्यकता है। लोग जानबूझकर पाप करने का इरादा नहीं रखते हैं, बल्कि उनकी कमजोरियों के कारण पाप करते है। 
बहुत कम लोग हैं जो वास्तव में पाप करने का इरादा रखते हैं; लगभग सभी अधर्म मनुष्य की कमजोरियों के कारण होते हैं। जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते हैं, उनके मन में पाप नहीं होता, क्योंकि उनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है। हम पाप रहित हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमारे सभी पापों को अपनी धार्मिकता से दूर कर दिया है। यही कारण है कि बाइबल कहती है, "यह परमेश्वर ही है जो धर्मी ठहराता है।" यह परमेश्वर है जो घोषणा करता है कि पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वासी पाप रहित हैं क्योंकि उनके पास उसकी धार्मिकता है। पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने के द्वारा हम अपने सभी पापों से मुक्त हुए हैं। 
यदि यीशु ने हमारे भविष्य के पापों को भी दूर नहीं किया होता, तो हम अपने पापों से कैसे छुटकारा पा सकते थे और हम कैसे कह सकते थे कि हम पापी नहीं हैं? यदि हम, परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के बाद, पाप करते हैं और पाप में जीते हैं, तो क्या यह हमें पर्याप्त रूप से अपवित्र नहीं करता है, या हमारे छुटकारे को अयोग्य नहीं ठहराता है, और इस प्रकार हमें फिर से नरक में नहीं ले जाता है? जवाब है ना! यदि हमारा उद्धार आत्म-पवित्रीकरण से होता है, तो संसार में किसका उद्धार हो सकता है? किसीका नहीं! कोई भी व्यक्ति देह में सिद्ध जीवन नहीं जी सकता है और आज्ञाओं को पूरी तरह से पालन करने के द्वारा पवित्र नहीं किया जा सकता है। इसलिए बाइबल कहती है, "कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं" (रोमियों ३:१०)।
 

स्वभाव से, मनुष्य अपने कर्मो से कभी भी परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त नहीं कर सकता

परमेश्वर ने अपने इकलौते पुत्र को भेजा, जिसे यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने बपतिस्मा दिया था, और उसे जगत के पापों से सभी मनुष्यजाति को बचाने के लिए क्रूस पर चढ़ा दिया गया। जो पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते हैं, वे अपने विश्वास से धर्मी हो गए हैं। इसलिए इस संसार में भी धर्मी लोग हो सकते हैं। इब्राहीम भी परमेश्वर के वचन में विश्वास करने के द्वारा विश्वास का पिता बना।
भले ही कई मसीही कहते हैं कि वे न्यायिकरण के सिद्धांत के माध्यम से परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त कर सकते हैं, वे वास्तव में इससे अनजान हैं। परमेश्वर की धार्मिकता क्या है? यह मानवीय धार्मिकता से बहुत अलग है। परमेश्वर की धार्मिकता किस सुसमाचार में प्रकट होती है? पानी और आत्मा के सुसमाचार में परमेश्वर की यह धार्मिकता प्रगट हुई है। यदि हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास किए बिना उसे अस्वीकार करते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम परमेश्वर के विरुद्ध खड़े हैं।
पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास किए बिना किसी को भी पाप से बचाया नहीं जा सकता है या परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त नहीं की जा सकती है। क्या कोई परमेश्वर की धार्मिकता का ज़रा भी विरोध कर सकता है? मैं लंबे समय से पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास और प्रचार करता रहा हूँ, लेकिन मैंने कभी किसी को नहीं देखा जो इस सुसमाचार के खिलाफ खड़ा हो सके। परमेश्वर के वचन के आधार पर कोई भी पानी और आत्मा के सुसमाचार के खिलाफ नहीं हो सकता क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता का यह सुसमाचार हमें हमारे पापों का सम्पूर्ण छुटकारा देता है।
 

कौन उन पर दोष लगा सकता है जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है?

आइए हम रोमियों ८:३४ पढ़े। “फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।” क्या परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करनेवाले व्यक्ति पर कोई भी पाप का दोष लगा सकता है? कोई भी नहीं लगा सकता।
क्या कोई पानी और आत्मा के सुसमाचार के विश्वासियों पर, जो विश्वास के द्वारा अपने पापों से छुड़ाए गए हैं, पापी होने का दोष लगा सकते है? नहीं! "फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा?" कौन कह सकता है कि परमेश्वर की धार्मिकता के विश्वासी पापी हैं? 
पाप की मजदूरी मृत्यु है। यदि आपके ह्रदय में पाप है, तो आप नरक में जाने वाले हैं। परमेश्वर लोगों का न्याय करता है क्योंकि उनमें पाप है। परन्तु जिनके पाप परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के कारण दूर हो गए हैं, उनका न्याय परमेश्वर नहीं करता, क्योंकि अब उनके पास न्याय करने के लिए कोई पाप नहीं है। जब परमेश्वर स्वयं उन लोगों का न्याय नहीं करता जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, तो उन पर दोष लगाने का साहस कौन कर सकता है? यदि यीशु मसीह में एक विश्वासी पाप के साथ है, तो वह पापी है और परमेश्वर द्वारा उसका न्याय और निंदा की जाएगी। पापियों का उनके हृदयों में पापों के लिए परमेश्वर द्वारा न्याय किया जाएगा और अन्य लोगों द्वारा उनका अस्वीकार किया जाएगा। परन्तु यदि कोई मसीह में विश्वासी पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करता है और परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त करता है, तो वह व्यक्ति परमेश्वर के सामने पापरहित है और कोई भी उस व्यक्ति पर दोष नहीं लगा सकता। न ही ऐसे लोगों के विवेक में पाप होता है।
“फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है जो मर गया वरन् मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्‍वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।” यीशु, परमेश्वर का पुत्र, हमें परमेश्वर की धार्मिकता देने के लिए पृथ्वी पर आया, हमारे सभी पापों को सहन करने के लिए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा प्राप्त किया, क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए मर गया, और हमारा उद्धारकर्ता बनने के लिए मृतकों में से फिर से जी उठा। वह अब परमेश्वर के दाहिने हाथ पर बैठा है और हमारे उद्धारकर्ता के रूप में हमारे लिए विनती करता है।
पवित्र आत्मा उन लोगों के लिए भी प्रार्थना करता है जिनके पास परमेश्वर की धार्मिकता है। यीशु हमारे लिए स्वर्ग में प्रार्थना करते हैं। पवित्र आत्मा भी, हमारे लिए पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता है, लेकिन एक अलग तरीके से, जब भी हम अपने ह्रदय में कमजोर होते हैं, तो "ऐसी आहें भर भरकर, जो बयान से बहार है” वह प्रार्थना करता है। 
पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने वालों के ह्रदय में परमेश्वर की धार्मिकता कितनी सिद्ध है? परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्णता हमें बताती है कि पानी और आत्मा का सुसमाचार भी निर्दोष और सिद्ध है।