उपदेश

विषय ९ : रोमियों (रोमियों की पत्री किताब पर टिप्पणी)

[अध्याय 10-1] अध्याय १० का परिचय

क्या ऐसे लोग हैं जो अपनी धार्मिकता का अनुसरण करते हुए पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करते हैं? पवित्रशास्त्र कहता है कि ऐसे लोग, परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास नहीं करने और अपनी धार्मिकता का अनुसरण करने की वजह से परमेश्वर के विरुद्ध हो जाते हैं। ये लोग क्या करेंगे?
क्या परमेश्वर ने सारी मनुष्यजाति को अपना उद्धार जो की परमेश्वर की धार्मिकता है देने की और यीशु मसीह को इस्राएलियों के द्वारा भेजने की योजना बनाई थी? बेशक उसने योजना बनाई थी! यीशु हर पापी को उसके पापों से बचाना चाहते थे इसलिए वह इस धरती पर आए, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा लिया, क्रूस पर चढ़ाया गया, और मृत्यु से पुनरुत्थित हुआ। दूसरे शब्दों में, वह उन सभी को बचाने के लिए आया था जो उस पर विश्वास करते हैं। 
परमेश्वर पिता ने इस्राएलियों को उनके पापों से बचाने के लिए यीशु मसीह को उनके पास भेजा, और फिर भी इस्राएलियों ने यीशु, परमेश्वर की धार्मिकता को ग्रहण नहीं किया। इसके बजाय, वे अपनी धार्मिकता की खोज के प्रति आसक्त थे। फिर भी, वे उसे अपने लोगों के मसीहा और अपनी आत्माओं के उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने में असमर्थ हैं।
पौलुस ने कहा कि कुछ लोग हैं जो परमेश्वर के द्वारा भेजे गए हैं और उनके माध्यम से सुंदर सुसमाचार सुना जा सकता है। परमेश्वर द्वारा भेजे गए परमेश्वर के सेवकों से सुना गया सुसमाचार वह सुसमाचार है जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता है। आप इस मौके को छोड़ नहीं सकते। केवल परमेश्वर के सेवकों द्वारा प्रचारित पानी और आत्मा के इस सुसमाचार को सुनकर, जो उसकी धार्मिकता को जानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं, आप विश्वास कर सकते हैं कि परमेश्वर ने आपको पापों की क्षमा और उसकी धार्मिकता दी है।
पानी और आत्मा का सुसमाचार दुनिया का सबसे अच्छा और सबसे सुंदर समाचार है। यह अच्छी और खूबसूरत खबर है जिसने पापियों को उनके पापों से बचाया है। यह सुंदर समाचार लोगों की आत्माओं को भर देता है क्योंकि परमेश्वर के द्वारा दिया गया पानी और आत्मा का सुसमाचार आत्माओं के लिए सच्चा भोजन है।
परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए छुटकारे के सुंदर सुसमाचार में सभी के पापों को क्षमा करने की सामर्थ है। पानी और आत्मा के सुसमाचार में हमारे पापों की क्षमा के द्वारा हमारे मन में शांति प्रदान करने की आशीष की सामर्थ है।
परमेश्वर की व्यवस्था पर केन्द्रित, इस्राएली अपनी धार्मिकता का अनुसरण करने में व्यस्त थे। क्योंकि उन्होंने सोचा था कि व्यवस्था के प्रति उनकी आज्ञाकारिता के साथ उनकी अपनी धार्मिकता प्रचुर मात्रा में है, उन्होंने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार नहीं किया। वे व्यवस्था के कामों की खोज में इतने उत्सुक थे कि वे परमेश्वर की धार्मिकता को भी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। वे अब भी प्रभु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने में विफल रहे और अपनी धार्मिकता का अनुसरण करने की कोशिश कर रहे थे।
क्या पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि इस्राएली अपनी धार्मिकता स्थापित करने के लिए परमेश्वर की धार्मिकता के विरुद्ध हो गए? उन इस्राएलियों के बारे में बोलते हुए जो व्यवस्था के प्रति आसक्त थे, पौलुस ने उनके विश्वासों को यह कहते हुए फटकार लगाई, "क्योंकि हर एक विश्वास करनेवालों के लिए धार्मिकता के निमित मसीह व्यवस्था का अन्त है" (रोमियों १०:४)। 
एक विधि सम्मत विश्वास जो स्वयं की धार्मिकता का अनुसरण करता है वह परमेश्वर के सामने सही विश्वास नहीं है। जबकि इस्राएली केवल पुराने नियम की व्यवस्था का पालन करने में व्यस्त थे, वे यह समझने में विफल रहे कि यीशु, जो परमेश्वर की धार्मिकता बन गया, उसे उनका उद्धारकर्ता बनना था और इसके बजाय वे उसके विरुद्ध हो गए। अपने जोश में यह दावा करते हुए कि वे चुने हुए लोग थे जिन्हें परमेश्वर का वचन दिया गया था और जो इसका पालन करने वाले थे, इस्राएलियों ने एक ऐसी जाति के रूप में अपना अन्त कर दिया जो परमेश्वर की धार्मिकता के विरुद्ध हो गई थी।
 

क्या आप खुद की धार्मिकता को स्थापित करने के प्रयास में है?

व्यवस्था के लिए इस्राएलियों के उत्साह के साथ समस्या यह थी कि उनकी लालसा अपनी धार्मिकता स्थापित करने में थी। उनकी अपनी धार्मिकता के कारण, हमारे प्रभु द्वारा स्थापित परमेश्वर की धार्मिकता को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया था।
इस्राएलियों के विधि सम्मत विश्वास का परिणाम यह हुआ कि वे परमेश्वर की धार्मिकता के विरुद्ध हो गए; इस प्रकार, उन्होंने अभी भी यह महसूस नहीं किया था कि यह परिणाम कितना अपरिवर्तनीय रूप से विनाशकारी होगा। व्यवस्था के कार्य की खोज से उन्हें क्या लाभ या फ़ायदा हुआ? परमेश्वर के वचन का पालन करने का उनका जुनून केवल परमेश्वर की धार्मिकता को जानने और उस पर विश्वास करने में बाधाओं के रूप में समाप्त हुआ। एक बार फिर, हमें यह समझना चाहिए कि जिन लोगों के पास व्यवस्था की सही समझ नहीं है, उनका "उत्साह" ही उन्हें अंत में परमेश्वर की धार्मिकता के विरुद्ध जाने के लिए प्रेरित करेगा।
पवित्रशास्त्र हमें स्पष्ट रूप से बताता है कि, हर कोई जो विश्वास करता हैउनके लिए यीशु धार्मिकता के लिए व्यवस्था का अंत बन गया। हमारे प्रभु ने जगत के सभी पापों को अपने बपतिस्मा और क्रूस पर लहू बहाने के साथ, इस्राएलियों और अन्यजातियों दोनों के पापों को शुद्ध करने के लिए परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया। इस प्रकार, पानी और आत्मा का सुसमाचार जिसमें परमेश्वर की धार्मिकता निहित है न कि व्यवस्था वह सभी पापियों के लिए रेगिस्तान में एक झरने के सामान बन गया है। यह पानी और आत्मा का सुसमाचार है जिसने हमारे पापों को मिटा दिया है और हमें सच्चा पवित्रीकरण प्रदान किया है। पानी और आत्मा के सुसमाचार के अलावा संसार के सभी पापी कईसे अपने हृदयों में सच्चा पवित्रीकरण पा सकते हैं?
यहाँ रोमियों की पुस्तक में, पौलुस हमें बताता है कि परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास किए बिना स्वयं की धार्मिकता स्थापित करना एक गंभीर पाप है। हम अन्यजातियों के लिए किस प्रकार का सुसमाचार एक सुंदर सुसमाचार होता? यह वह सुसमाचार है जिसने हमें बताया है कि हमारे प्रभु यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सभी पापों को उठा लिया।
यह सुसमाचार मत्ती ३:१३-१७ में दर्ज किया गया सुसमाचार है, जो यीशु के जगत के पापों के उठाने की गवाही देता है: “उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। परन्तु यूहन्ना यह कह कर उसे रोकने लगा, “मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?” यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिए आकाश खुल गया, और उसने परमेश्‍वर के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते देखा। और देखो, यह आकाशवाणी हुई : “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।” इस रीती से यीशु ने यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेकर जगत के सारे पापों को अपने ऊपर उठाया।
पौलुस ने उन विधिवादियों को, जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते थे, फटकार लगाते हुए कहा, “स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा? (अर्थात् मसीह को उतार लाने के लिए)” (रोमियों १०:६)। दूसरे शब्दों में कहें तो यह प्रश्न पूछता है, "कौन केवल व्यवस्था का पालन करने से अपने पापों से मुक्ति पा सकता है?" पौलुस के प्रश्न का उद्देश्य इस बात को रेखांकित करना था कि व्यवस्था का पालन करने से कभी भी पाप से मुक्ति नहीं मिलेगी। दूसरे शब्दों में, वह हमें बता रहा है कि पाप से छुटकारा पाने के लिए हम कुछ भी नहीं कर सकते।
पौलुस अक्सर अपनी पत्रियों में परमेश्वर की धार्मिकता के बारे में बात करता था। सच्चे विश्वास के लिए पौलुस का उत्तर रोमियों १०:१० में पाया जाता है, जहाँ कहा गया है, "क्योंकि धार्मिकता पर मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है।" पौलुस द्वारा प्रचारित सुसमाचार वह सुसमाचार था जो हमें बताता है कि हम अपने प्रभु के बपतिस्मा और क्रूस पर उसके लहू में विश्वास करके परमेश्वर की धार्मिकता प्राप्त कर सकते हैं, जिसके द्वारा परमेश्वर की यह धार्मिकता प्रकट होती है। हमें विश्वास करना चाहिए कि प्रभु ने हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार दिया है, और यह कि उन्होंने इस सुसमाचार में विश्वास करने वालों को सच्ची, मन की शांति की अनुमति दी है।
 

सच्चा विश्वास परमेश्वर के वचन को सुनने के द्वारा आता है

सच्चे विश्वास के बारे में पौलुस हमें क्या बताता है? रोमियों १०:१७ कहता है, "अत: विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है।" दूसरे शब्दों में, सच्चा विश्वास तब आता है जब हम वह सुसमाचार सुनते हैं जो परमेश्वर के सेवक परमेश्वर के वचन से प्रचार करते है, जिसके द्वारा परमेश्वर बोलता है। 
सच्चे विश्वास का हमारा दृढ निश्चय परमेश्वर के वचन को सुनने से आता है, और इसलिए सच्चे विश्वास के लोग होने के लिए, हमें परमेश्वर वचन को सुनना और उस पर विश्वास करना चाहिए। केवल परमेश्वर के वचन को सुनने से ही हम सच्चे विश्वास का पालन कर सकते हैं और इससे ही हमारे विश्वास बढ़ सकते हैं। इस कारण परमेश्वर ने हमारे पास अपने सेवक भेजे हैं, जो परमेश्वर की धार्मिकता का प्रचार करते हैं।
जब हम पानी और आत्मा के सुसमाचार पर विश्वास करते है जो परमेश्वर के द्वारा मनुष्यजाति को दिया गया है, तो हम पापों की क्षमा प्राप्त कर सकते हैं और अपने दिलों में आराम कर सकते हैं। पाप से मुक्ति केवल परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने से ही संभव है, जिससे हम अपने मन की शांति पाएंगे।
क्या हमें यह नहीं बताया गया है कि हमारे प्रभु की धार्मिकता हमारे आँसू पोंछ देगी और हमें हमारे सभी दुखों और कष्टों से छूटकारा दिलाएगी? निसंदेह दिलाएगी। परमेश्वर के द्वारा दिए गए पानी और आत्मा के सुसमाचार की धार्मिकता पर विश्वास करने से हमारे सब दुख दूर हो जाएंगे। पानी और आत्मा का सुसमाचार संसार का सबसे सुन्दर समाचार और परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्ति है।
परमेश्वर ने हमारे प्रभु को, जिसने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया, इस्राएलियों के पास भेजा, परन्तु खुद की धार्मिकता का अनुसरण करते हुए, उन्होंने उसकी ओर मुड़ने से इनकार कर दिया। तो फिर, परमेश्वर ने क्या किया? परमेश्वर ने इस्राएलियों की इर्ष्या भड़काने के लिए, परमेश्वर ने अन्यजातियों को विश्वास करने के लिए सुसमाचार दिया जो परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्ती है। तो क्या परमेश्वर ने अन्यजातियों को पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने का मौका दिया? वास्तव में, परमेश्वर ने उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार में विश्वास करने का मौका तब भी दिया जब उन्होंने न तो उसे खोजा, और न ही उसे बुलाया, और इस्राएलियों की तुलना में उसकी आराधना बहुत कम की। 
यही कारण है कि अन्यजाति उसकी धार्मिकता की पूर्ति के सुंदर समाचार में विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की सन्तान बनने में सक्षम हुए। यही कारण है कि पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि इस्राएल के बाहर परमेश्वर की धार्मिकता का सम्मान और महिमा की गई थी।
कितने लोग, वास्तव में हमें पानी और आत्मा का सुसमाचार देने के लिए प्रभु का धन्यवाद करते हैं जिसने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया है? हमारे प्रभु ने पानी और आत्मा के सुन्दर सुसमाचार के द्वारा संसार के सब पापों को दूर किया है। फिर भी, बहुत से ऐसे मसीही हैं जो इस सत्य में विश्वास नहीं करते हैं। तो क्या हम में कोई ऐसी धार्मिकता है जिसे हम परमेश्वर के सामने रख सकें? नहीं, हमारे पास नहीं है! फिर, हम विश्वास क्यों नहीं करते? क्या इसलिए कि हम नहीं जानते कि वह सुसमाचार क्या है जिसने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया है? परन्तु इस सुसमाचार को जानना सरल है!
हम भी उसी प्रकार के लोग हैं, जो इस्राएलियों की तरह हमारी अपनी धार्मिकता का अनुसरण करते, परन्तु परमेश्वर ने पानी और आत्मा का सुन्दर सुसमाचार देकर हमें हमारे सब पापों से बचाया। हम प्रभु का धन्यवाद करते है की उसने हमें विश्वास करने के लिए पानी और आत्मा का सुसमाचार दिया जो परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्ती है।
 

ऐसा मत कहना, “स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा?”

वचन ६ कहता है, "परन्तु जो धार्मिकता विश्वास से है, वह यों कहती है, ‘तू अपने मन में यह न कहना की स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा?' (अर्थात मसीह को उतार लाने के लिए)।” हमारा छुटकारे और सच्चाई के सुसमाचार की सेवा करना हमारे कामों के द्वारा नहीं, बल्कि पानी और आत्मा के सुसमाचार में हमारे विश्वास के द्वारा संभव हुआ है। यदि सत्य में हमारे विश्वास के कारण परमेश्वर की धार्मिकता पूरी नहीं होती, तो हम पापियों के अलावा और कुछ नहीं होते, जो विधिवादियों के रूप में अपनी धार्मिकता का अनुसरण करते हुए, केवल परमेश्वर को परेशान करते। 
जिस प्रकार परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने से हमारा उद्धार हुआ, उसी प्रकार हम भी इस धार्मिकता में विश्वास करके अपने प्रभु के लिए जी सकते हैं। हमें अपने जीवन को जारी रखने की सामर्थ परमेश्वर की धार्मिकता में हमारे विश्वास से आती है, क्योंकि इस धार्मिकता के बारे में हमारा ज्ञान पानी और आत्मा के सुसमाचार में हमारे विश्वास से उत्पन्न हुआ था।
क्या छुटकारा पाने वालों के लिए परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास के अलावा कोई सच्चाई है? ऐसी कोई नहीं है। मसीही धर्म का सार विश्वास पर केंद्रित है, और यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि परमेश्वर की धार्मिकता मसीही धर्म के बारे में है। जो लोग धर्मी बन गए हैं वे इस धार्मिकता में अपने विश्वासों के द्वारा जीवित रह सकते हैं और सुसमाचार का प्रचार कर सकते हैं। तो क्या वे जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, उन्हें भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है? करना पड़ता हैं। लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास के द्वारा, वे सभी मुसीबतों को दूर कर सकते हैं, क्योंकि वे विश्वास करते हैं और भरोसा करते हैं कि परमेश्वर उनकी समस्याओं का ध्यान रखेंगे। इस तरह के विश्वास परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास से उत्पन्न होते हैं। 
उन अन्य धर्मों के बारे में क्या जिनमें परमेश्वर की धार्मिकता शामिल नहीं है? क्या वे सभी गलत प्रकार के विश्वास हैं, जो मानवीय कर्मों पर आधारित हैं? निसंदेह, वे गलत हैं। परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास किए बिना यीशु पर विश्वास करने वालों का विश्वास सच्चा विश्वास नहीं है।
क्या आपको और मुझे पहले परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास किए बिना हमारे पापों से छुटकारा मिल सकता है? क्या हम परमेश्वर में अपने विश्वासों के द्वारा उसकी धार्मिकता में विश्वास किए बिना जी सकते हैं? ऐसा संभव नहीं होगा। धर्मी लोगों की प्रभु की सेवा करने की सामर्थ पवित्र आत्मा की सामर्थ से आती है, जो उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता में उनके विश्वास के लिए उपहार के रूप में दी गई है। क्या आप इस दुनिया में केवल अपनी ताकत या अपनी सांसारिक संपत्ति के साथ रह सकते हैं? क्या आप वाकई इन बातों से मन की शांति पा सकते हैं?
हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके शांति से सुसमाचार की सेवा कर सकते हैं। जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा करते हैं उनके पास विश्वास, साहस, सामर्थ और शांति है। धर्मी लोग जो पानी और आत्मा के सुसमाचार की सेवा नहीं करते जो की परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्ति हैं, उनके पास न तो शांति है और न ही साहस। क्या धर्मी लोगों के मन को शांति की आवश्यकता है? हाँ उन्हें हैं। उन्हें न केवल पानी और आत्मा के सुसमाचार को फैलाने के लिए, बल्कि अपने जीवन को पूरी तरह से जीने के लिए भी शांति की आवश्यकता है। 
क्या आपका मन शांत है? यदि आप केवल अपने लिए जीते हैं, तो आपके मन में शांति बढ़ने का कोई कारण नहीं होगा। जब आपको देह में जीते हुए देह की आवश्यकताओं को पूरी करने की जरुरत है तो फिर आपको ओर अधिक शांति या विश्वास की आवश्यकता क्यों होगी? लेकिन यदि आपको परमेश्वर की सेवा करनी है, तो आपके मन में शांति भी बढ़नी चाहिए। उस सुसमाचार की सेवा करने के लिए जिसने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा किया है, आपका विश्वास और शांति अवश्य ही बढ़ेगी।
जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता के सुसमाचार में विश्वास करते हैं, वे दुनिया भर में अपनी शांति फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। क्योंकि यह केवल व्यक्तिगत चिंताओं का विषय नहीं है, बल्कि यीशु मसीह द्वारा दी गई मन की शांति को सभी तक फैलाने की आवश्यकता है, हमें पूरी दुनिया में परमेश्वर की धार्मिकता के सुसमाचार का प्रचार करने की आवश्यकता है। परमेश्वर की शांति अभी भी दूसरों के लिए, साथ ही हमारे लिए भी आवश्यक है। इस शांति को दूसरों तक फैलाने की कोशिश में हमें परमेश्वर से ओर अनुरोधों की आवश्यकता है। जब हम परमेश्वर की धार्मिकता का प्रसार करने के लिए जीते हैं, तो हमारे मन की शांति निश्चित ही बढ़ेगी, और हम अपने जीवन के स्पष्ट और बहुमूल्य उद्देश्य को पाएंगे। 
यदि आप परमेश्वर द्वारा दी गई सच्ची शांति सीखना चाहते हैं, तो आपको उस सुसमाचार को जानने और उस पर विश्वास करने की आवश्यकता है जिसने परमेश्वर धार्मिकता को पूरा किया है। आपको अपने लिए मन की शांति का अनुभव करने की आवश्यकता है जिसे परमेश्वर ने आपके लिए तैयार किया है।
आपने अब तक अच्छी तरह से परमेश्वर की सेवा की है, लेकिन जब तक आप उनकी उपस्थिति में बुलाए नहीं जाते, तब तक आपको उनकी अच्छी सेवा करते रहने की आवश्यकता है, ताकि अन्य लोग आपकी शांति में हिस्सा ले सकें। जब आप परमेश्वर की धार्मिकता में अपने विश्वास के साथ शांति के लिए पहुँचते हैं, तो वे विश्वासी जो छुटकारे के लिए आपके नक्शेकदम पर चल रहे हैं, वे भी दूसरों की शांति के लिए जी सकते हैं। 
जो अपने विश्वास में नए हैं वे विश्वास के क्षेत्र में नौसिखिए हैं और इसे समझने की उनकी क्षमता सीमित हैं। लेकिन जब हम अपने विश्वासों के अनुसार जीते हैं, तो हमारे पीछे वाले लोग, हालाँकि इसमें कुछ समय लग सकता है, अंततः उन्हें समझ में आ जाएगा कि कैसे छुटकारा पाए हुए लोग हमारे विश्वास के नक्शेकदम पर चलते हुए अपना जीवन शांति से जीते हैं। 
क्या आपको यह सिखाना मुश्किल लगता है कि जो आपकी अगुवाई में चल रहे हैं, उन्हें विश्वास से कैसे जीना है? ऐसी शिक्षा का जीवन रातों-रात नहीं मिलता। इससे पहले कि आप उन्हें शांति से जीने के लिए आवश्यक विश्वास की ओर ले जा सकें, इसमें बहुत लंबा समय लग सकता है। लेकिन समय के साथ, जिन्हें परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के द्वारा छुड़ाया गया है, वे अन्त में विश्वास के लोगों के रूप में शांति से रहना सीखेंगे, ठीक वैसे जैसे कि परमेश्वर की सेवा करने वाले पहले के विश्वासियों ने हममें से जो लोग आगे है उन लोगों से सीखकर अपने मन में परमेश्वर की शांति पाई।
आप और मैं, हम सभी को परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास के द्वारा जीना चाहिए। धर्मी लोगों को वचन में अपने विश्वासों से जीना चाहिए। हमारा वर्तमान और भविष्य दोनों का जीवन विश्वास से निर्धारित होना चाहिए। पवित्रशास्त्र हमसे पूछता है, "और वे प्रचारक बिना कैसे सुने?" (रोमियों १०:१४)। क्योंकि हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, हमें संसार को सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। विश्वास के द्वारा, हम उन सभी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं जिनका सामना हम सुसमाचार का प्रचार करते समय करेंगे।
धर्मी लोगों के जीवन जो विश्वास से नहीं जीते हैं, वे वो हैं जिन्होंने अपने मन की शांति खो दी है। परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने से लोग अपने मन की शांति प्राप्त कर सकते हैं। जब हम परमेश्वर के वचन और सभी चीजों के लिए उसकी धार्मिकता में विश्वास करते हैं, तो हमें हमारी शांति दी जाएगी। 
आपको परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करके अपनी शांति और विश्वास में मजबूती से खड़ा होना चाहिए। आपको परमेश्वर की स्तुति भी करनी चाहिए, क्योंकि प्रभु ने आपको अपनी धार्मिकता और शांति के छुटकारे से जीने की अनुमति दी है। परमेश्वर में विश्वास के साथ, जिस से आपको शांति मिली है, आप सुसमाचार का प्रचार करते हुए अपना जीवन व्यतीत करें।
क्या हम रोमियों की पुस्तक से यह सीख पाए हैं कि परमेश्वर की धार्मिकता कितनी सिद्ध है? रोमियों की पुस्तक विस्तार से बताती हैं कि परमेश्वर की यह धार्मिकता क्या है। परमेश्वर की जिस धार्मिकता की हम बात करते हैं, वह मानव-निर्मित धार्मिकता नहीं है लेकिन केवल परमेश्वर की धार्मिकता है। 
     परमेश्वर की धार्मिकता हमें हमारे सभी पापों से बचाने के लिए सिद्ध और पर्याप्त है। अपने बपतिस्मा के माध्यम से जगत के सभी पापों को अपने ऊपर ले कर, यीशु ने पूर्णता में उन सभी को दूर किया। हम यीशु मसीह पर विश्वास कर सकते हैं यह इस तथ्य के कारण है कि परमेश्वर की धार्मिकता सिद्ध है। चूँकि परमेश्वर की इस धार्मिकता ने हमें हमारे सभी पापों से पूरी तरह से बचा लिया है, इसलिए हमारे लिए उस सुसमाचार पर विश्वास करना बहुत ही आवश्यक है जिसने परमेश्वर धार्मिकता को पूरा किया है।
परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके, हम उसकी प्रशंसा, धन्यवाद और स्तुति करते हुए अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं। लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके ही उसकी पवित्रता में वास कर सकते हैं। इस धार्मिकता में विश्वास करके, हमारे मन शुद्ध होते हैं, हम परमेश्वर की स्तुति कर सकते हैं, और हमारा जीवन उसकी महिमा के लिए जीया जा सकता है। 
यदि परमेश्वर की धार्मिकता सिद्ध नहीं होती, तो हम अपने पापों से मुक्त नहीं हो पाते। यद्यपि हमारे मूल पाप को यीशु में विश्वास करने के द्वारा क्षमा किया गया हो सकता है, उसके बाद प्रतिदिन हमारे द्वारा किए गए प्रत्येक पाप के लिए पश्चाताप की दैनिक प्रार्थना की आवश्यकता होगी। 
लेकिन जब हमने पानी और आत्मा के सुसमाचार में प्रकट परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने के द्वारा छुटकारा पाया, तब हम समझ सके कि परमेश्वर की यह धार्मिकता पूर्ण थी। यही कारण है कि मैं इस तथ्य के लिए असीम रूप से आभारी हूँ कि परमेश्वर की धार्मिकता विश्वासयोग्य और अनंत काल के लिए परिपूर्ण है। क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें उन सभी संभावित पापों से छुड़ाया है जो हम अपने जीवन काल में कर सकते थे, हम उसकी धार्मिकता में विश्वास करके पाप से बच सकते हैं।
जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता की तुलना हमारी मानवीय गंदगी से नहीं करते हैं, वे उसकी धार्मिकता पर विश्वास नहीं कर सकते क्योंकि वे यह नहीं जानते कि यह कितनी बड़ी है। यहाँ तक कि सबसे सिद्ध व्यक्ति भी परमेश्वर की धार्मिकता की तुलना में कुछ भी नहीं है, और यही कारण है कि हम उसकी धार्मिकता में विश्वास करते हैं और इस तरह हमें उसकी पवित्रता में रहने की अनुमति दी जाती है। दूसरे शब्दों में, हम ऐसे लोग बन जाते हैं जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने और उसमें रहने के द्वारा उसकी महिमा करते हैं। 
हमें अपने हृदयों में परमेश्वर की धार्मिकता की सही समझ रखने की आवश्यकता है-अर्थात, हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें हमारे पापों से पूरी तरह और सम्पूर्ण रीती से मुक्त कर दिया है। क्या हम जीवन भर अनगिनत पाप नहीं करते? तो फिर, परमेश्वर ने उस धार्मिक कार्य को कैसे किया जिसने हमें ऐसे अनगिनत पापों से छुड़ाया है? उसने हमारे शरीर की समानता में इस पृथ्वी पर आकर, यूहन्ना द्वारा बपतिस्मा लेकर, क्रूस पर मरकर, और मृत्यु से पुनरुत्थित होकर हमारे सभी पापों को उठाकर-संक्षेप में, परमेश्वर की सभी धार्मिकता को पूरा करके इसे परिपूर्ण किया।
हर कोई, जवान और बूढ़ा, अमीर और गरीब, सामर्थी और कमजोर, हर कोई पाप करता है। फिर किसने हमें संसार के इन सब पापों से बचाया? यह यीशु मसीह थे, जिन्होंने परमेश्वर की धार्मिकता को पूरा करके हमें हमारे सभी पापों से छुड़ाया। परमेश्वर ने यीशु को हमारे सभी पापों को पूरी तरह से उठाने और उन्हें पूरी तरह से समाप्त करने के लिए भेजा, यही परमेश्वर की धार्मिकता है। 
इसके अलावा और कुछ भी परमेश्वर की धार्मिकता नहीं है जिसने हमें हमारे सभी पापों से बचाया है। परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें संसार के सभी पापों से एक ही बार में छुड़ाया है। क्या उसकी धार्मिकता पूरी तरह से और सम्पूर्ण रीती से सिद्ध नहीं है? हम इसे प्रेम कहते हैं जो परमेश्वर ने हमें दिया है, जो न केवल हमारे जीवन के लिए, लेकिन अनंत काल तक, परमेश्वर की धार्मिकता के लिए रहेगा। 
जैसा कि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने घोषणा की, जब उसने यीशु को बपतिस्मा देने के अगले दिन देखा, "देखो! परमेश्वर का मेम्ना जो जगत का पाप उठा ले जाता है!” (यूहन्ना १:२९)। जैसा कि जब यूहन्ना ने पहले यीशु को बपतिस्मा देने से इनकार कर दिया तब उससे कहा था, "अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीती से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है" (मत्ती ३:१५)। इन पद्यांश का क्या अर्थ है? उनका मतलब इस सच्चाई से कम नहीं है कि यीशु का बपतिस्मा और क्रूस पर उनकी मृत्यु ही परमेश्वर की धार्मिकता है। जब हम कमजोर होते है और परमेश्वर की महिमा से रहित होते है तब परमेश्वर की यह धार्मिकता हमें छोड़ नहीं देती है। 
हम केवल परमेश्वर की स्तुति कर सकते हैं और इस प्रचुर प्रेम के लिए उसकी महिमा कर सकते हैं जिसने हमें बचाया है और हमें उसकी धार्मिकता में रहने की अनुमति दी है। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, वे जीवन भर उसकी धार्मिकता के लिए जीवन जीते है। हमारे लिए इंसान या दुनिया की तुलना में परमेश्वर पर भरोसा करना ज्यादा बेहतर है। एक सुंदर जीवन एक ऐसा जीवन है जो पाप से पूर्ण मुक्ति के इस सुसमाचार का प्रचार करता है। यही कारण है कि हमें परमेश्वर की धार्मिकता को पूरी तरह से जानना और उसमें विश्वास करना चाहिए।
जिन लोगों ने पापों की क्षमा प्राप्त की है, वे इस बात की गवाही देंगे, "यीशु ने यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर मेरे सब पापों को उठा लिया है! और वह मेरे स्थान पर जगत के सब पापों के लिए दण्डित किया गया!” जब हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, तो हम केवल ऐसी आशीषों के लिए उनका धन्यवाद कर सकते हैं।
जब आप अपनी निर्बलताओं के कारण ठोकर खाते हो, शरीर के कारण पाप में पड़ते हो, या जब आप अपने पापों के कारण निराश और शर्मिंदा होते हो, तो परमेश्वर की उस धार्मिकता की ओर देखो, जिसने आपको चंगा किया है। क्या परमेश्वर की धार्मिकता ने हमें धर्मी भी नहीं बनाया? क्या यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को पूरी तरह से दूर नहीं किया? क्या उसके छुटकारे ने हमें हमारे सभी पापों से नहीं बचाया, जिसमें वे पाप भी शामिल हैं जिन्हें हम भविष्य में करेंगे? 
जब हम विश्वास करते हैं कि यीशु मसीह ने हमें पूरी तरह से और सम्पूर्ण रीती से बचाया है केवल तभी हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं। जब हम परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, तभी हम धर्मी ठहरते हैं। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, वे उसकी धार्मिकता के निमित्त बन सकते हैं। परमेश्वर की धार्मिकता की सिध्धता पूर्ण है। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहकर अपनी खुद की धार्मिकता का अनुसरण करते है, वे केवल मूर्ख हैं जो परमेश्वर के द्वारा शापित होने के लिए अपने ही विनाश पर बैठे है।
 

पौलुस जो कहता है उस पर ध्यान दीजिए, “उनको परमेश्वर के लिए धून रहती है, परन्तु बुध्धिमानी के साथ नहीं”

यदि हम परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहते हैं तो हम विश्वास का जीवन कैसे जी सकते हैं, कैसे छुटकारा पा सकते हैं, और परमेश्वर के लोग कैसे बन सकते हैं? जो लोग व्यवस्था का पालन करते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि उनके पाप उनके विनाश की ओर ले जाएंगे और वे आभारी होंगे कि परमेश्वर की धार्मिकता ने उन्हें पूरी तरह से बचा लिया है। यीशु हमारा उद्धारकर्ता बन गया है, हम उस पर विश्वास करते हैं, और हम उसकी महिमा करते हैं क्योंकि हम परमेश्वर की धार्मिकता को जानते हैं और उसमें विश्वास करते हैं। केवल परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने से ही हम उसकी सन्तान और पापरहित बनते हैं, और अनन्त जीवन प्राप्त करते हैं। जो लोग यीशु में विश्वास करने का दावा करते हैं और विश्वासयोग्य जीवन जीते हैं, फिर भी वे परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहते हैं, वे शापित होंगे।
पौलुस ने रोमियों में गवाही दी कि इस्राएलियों ने परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहते हुए अपनी धार्मिकता को स्थापित करने की कोशिश की, और ऐसा करने के द्वारा, परमेश्वर की धार्मिकता की अवज्ञा की। उन्हें भी परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करना चाहिए। 
हमें विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर ने हमें जगत के पापों से छुड़ाया है। हमारे सारे पाप संसार के इन पापों में सम्मिलित हैं। वे सभी परमेश्वर की धार्मिकता की पूर्ति के साथ दूर हो गए हैं। क्या आप इस सच्चाई में विश्वास करते हैं?
 

“क्योंकि हर एक विश्वास करनेवाले के लिए धार्मिकता के निमित मसीह व्यवस्था का अन्त है”
 
परमेश्वर की धार्मिकता व्यवस्था का अंत है। इसका कारण यह है कि यीशु मसीह ने अपने बपतिस्मा और क्रूस पर चढ़ाए जाने के द्वारा जगत के सभी पापों को अपने ऊपर ले कर व्यवस्था की सभी आवश्यकताओं का उत्तर दिया। 
निश्चय ही पाप का परिणाम मृत्यु है, फिरभी लिखा है कि परमेश्वर की धार्मिकता व्यवस्था का अंत है। क्यों? इसका कारण यह है कि परमेश्वर पिता ने मनुष्यजाति के सभी पापों को अपने ऊपर उठाने के लिए बपतिस्मा लेने, क्रूस पर मरने, और मृत्यु से जीवित होने के लिए अपने एकलौते पुत्र को इस पृथ्वी पर भेजा।
अपने ह्रदय से परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करना और व्यवस्था की धार्मिकता का पालन करना दो अलग-अलग चीजें हैं। क्या आपने अपने कर्मों से पापों की क्षमा प्राप्त की? क्या आपने अपने अच्छे कर्मों से अपना उद्धार प्राप्त किया है? इस दुनिया के अन्य सभी धर्म सिखाते हैं कि अपने पापों से छूटकारा पाने का तरीका अच्छे कर्म करना है। उदाहरण के लिए, बौध्ध धर्म में पाप की समझ सिखाती है कि आप अपने वर्तमान जीवन में अच्छे कर्म करके अपने पिछले जीवन के पापों को दूर कर सकते हैं। क्या आपको यह बात ठीक लगती है? 
एक व्यक्ति केवल एक बार पैदा होता है और केवल एक बार मरता है, और उसके बाद न्याय होगा। क्योंकि हर कोई इस दुनिया में केवल एक बार पैदा होता है और उसके बाद परमेश्वर के पास लौटता है, कोई भी व्यक्ति जीवन के दूसरे चक्र में पृथ्वी पर नहीं लौट सकता। यही कारण है कि लोगों को इस पृथ्वी पर रहते हुए परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके छुटकारा पाना चाहिए। कर्म के बारे में यह बौद्ध शिक्षा कैसी बकवास है?
यह विश्वास करना कि हम अपने पापों से मुक्त हो गए हैं, परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करना है। परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करना केवल उसकी धार्मिकता पर विश्वास करना है, हमारे अपने कार्यों में नहीं। तो फिर, परमेश्वर के विश्वास की धार्मिकता कैसे बोलती है? जैसा कि रोमियों की पुस्तक में दर्ज है, यह इस तरह से बोलता है, "तू अपने मन में यह मत कहना कि स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा?” ऐसा इसलिए है क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता व्यक्ति के ह्रदय में विश्वास करने से मिलती है, ना की किसी प्रकार की शारीरिक सामर्थ के द्वारा। 
परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करने के द्वारा हम परमेश्वर की सन्तान और पापरहित लोग बन जाते हैं जो अनन्त जीवन प्राप्त करते हैं। क्योंकि हम अपने पापों का समाधान स्वयं नहीं कर सकते, चाहे हम कितने भी अच्छे कार्य करें, हमारे प्रयास केवल परमेश्वर के सामने अधिक पापों के रूप में समाप्त होते हैं। यही कारण है कि हमें अपने आप में इस तरह के विश्वासों को त्यागना चाहिए और इसके बजाय धर्मी परमेश्वर में उसकी धार्मिकता का अनुसरण करने के लिए विश्वास करना चाहिए। कुछ लोग पूछते हैं, "क्या हम केवल यीशु पर विश्वास करने से नहीं बच सकते, भले ही हम परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान हों? क्या यह नहीं लिखा है कि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा?” लेकिन उद्धार केवल यीशु के नाम को पुकारने से नहीं मिलता है, लेकिन परमेश्वर की धार्मिकता को जानने और पूरी तरह से विश्वास करने से मिलता है।
 

जो कोई भी परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास करता है वह लज्जित न होगा

वचन ११ कहता है, "जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।" इस पद्यांश का अर्थ क्या है? जो कोई उस पर विश्वास करता है, उसे लज्जित नहीं होना पड़ता क्योंकि वह परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करता है। "जो कोई उस पर विश्वास करता है" यह बात परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने वाले को दर्शाता है।
    इस भाग के बारे में क्या, "जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा"? (रोमियों १०:१३)। इसका अर्थ यह है कि जो लोग पानी और आत्मा के सुसमाचार को जानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं, वे यीशु को उद्धारकर्ता परमेश्वर के रूप में मानते हैं। जैसा कि हमने परमेश्वर की धार्मिकता के माध्यम से अपना उद्धार प्राप्त किया, हम विश्वास करते हैं कि इस सत्य में विश्वास करने के द्वारा हमें छूटकारा दिया गया है। 
दुसरे शब्दों में, इस विश्वास के बिना चाहे हम कितनी भी बार यीशु का नाम व्यर्थ में पुकारें, हम अपने पापों से नहीं बचेंगे। क्योंकि पवित्रशास्त्र समग्र रूप से यीशु में परमेश्वर की धार्मिकता की बात करता है, केवल प्रभु का नाम लेने से हमें हमारा छुटकारा नहीं मिलेगा।
बाइबल हमें शुरू से ही परमेश्वर की धार्मिकता के बारे में बताती है। जैसा कि उत्पत्ति की पुस्तक में लिखा है, परमेश्वर ने जीवन के वृक्ष और भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को अदन की वाटिका में रखा और आदम और हव्वा से कहा कि वे ज्ञान के वृक्ष का फल न खाएं। परमेश्वर ने जो किया वह उनसे उसके वचन में उनके विश्वास की मांग करने के लिए था। परमेश्वर ने इसे अलग तरह से बताते हुए, उन्हें अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए जीवन के वृक्ष से खाने के लिए कहा।
परमेश्वर का वचन कहता है, "धर्मीजन विश्वास से जीवित रहेगा।" हम भी, अपने पूरे जीवनकाल में परमेश्वर की धार्मिकता में अपने विश्वास के द्वारा जीते हैं - जब हमने पहली बार उद्धार प्राप्त करने के लिए उस पर विश्वास किया था तबसे जब हमने उद्धार प्राप्त किया तब तक, और अन्त में, जब तक हम परमेश्वर के राज्य में नहीं पहुँच जाते। 
इस दुनिया में कई मसीही कहते हैं कि यीशु में विश्वास करने से पाप से मुक्ति मिलती है, लेकिन वास्तव में उनमें से बहुत से लोग अपने पापों से मुक्त नहीं होते हैं क्योंकि वे परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहते हैं। जब लोग परमेश्वर की धार्मिकता को जाने बिना यीशु पर विश्वास करेंगे तो उसका क्या परिणाम होगा? ऐसे लोग बाहरी संकेत दिखा सकते हैं कि वे अपनी आराधना और प्रार्थना के माध्यम से अच्छे विश्वासी हैं। परन्तु क्योंकि वे परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान हैं, वे केवल धर्म के अभ्यासी, साथ ही साथ छूटकारा न पाए हुए पापियों के रूप में ही रहेंगे।
मसीही समुदाय और इस्राएल दोनों में से बहुत से लोग परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान हैं और इस प्रकार परमेश्वर की धार्मिकता का पालन नहीं कर रहे हैं। जो लोग यीशु पर विश्वास करते हैं, फिर भी परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते हैं, वे इसी धार्मिकता पर मुहर लगाते हैं। जब तक वे परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान रहते हैं, तब तक परमेश्वर के सामने अच्छे काम करने, बड़ी भेंट देने, या अपने स्वयं के अन्य कार्य करने से यह धार्मिकता प्राप्त नहीं होती है। 
जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, वे इसमें विश्वास करते हैं, चाहे वे किसी भी परिस्थिति में हों, और इस प्रकार परमेश्वर की महिमा के लिए स्तुति और धन्यवाद का जीवन जीते हैं। हममें से जो परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, हमारी कमियाँ जितनी अधिक प्रकट होती हैं, उतनी ही अधिक परमेश्वर की धार्मिकता हमारी आत्माओं के सामने चमकती है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप में भी ऐसी जागृति आए।
हमारी देह में किसी भी तरह का धर्म है तो क्या हम परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकते हैं? बिलकूल नही! परमेश्वर की धार्मिकता के अतिरिक्त और कुछ भी हम में धर्मी नहीं है। चूँकि परमेश्वर ने अपनी धार्मिकता से हमें हमारे पापों से पूरी तरह से बचाया है, इसलिए हम इस धार्मिकता में विश्वास करते हैं और उसकी प्रशंसा करते हैं। उसकी धार्मिकता ने हमें हमारे पापों से पूरी तरह बचा लिया है।
जब आप अपने जीवन में अंधेरे कोनों का सामना कर रहे हों, तो कर्म-उन्मुख विश्वास में न पड़ें, बल्कि अपनी परिस्थितियों की परवाह किए बिना, हमेशा परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करें। परमेश्वर की धार्मिकता अनंत काल के लिए सिद्ध है। इस दुनिया में हर किसी को परमेश्वर की धार्मिकता को जानना चाहिए, और उन्हें पानी और आत्मा के सुसमाचार का पालन करके उस पर विश्वास करना चाहिए। चूँकि बहुत से लोग जो यीशु में विश्वास करने का दावा करते हैं, वे अभी भी केवल व्यवस्था की धार्मिकता से जीते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे परमेश्वर की धार्मिकता को जानते हैं।
पौलुस यह कहकर समाप्त करता है कि परमेश्वर का सुसमाचार उसकी धार्मिकता को पूरा करता है। परमेश्वर के सच्चे सुसमाचार के ज्ञान के बिना, कोई भी उसकी धार्मिकता की व्याख्या नहीं कर सकता है। जब ऐसे लोगों से कहा जाए की परमेश्वर की धार्मिकता का अर्थ क्या है उसके बारे में चर्चा करे, तो ऐसे लोग कह सकते है, "यीशु मेरा उद्धारकर्ता है जो क्रूस पर मरा, मृत्यु से जी उठा, और मुझे मेरे पापों से बचाया।" लेकिन वे यह भी जोड़ेंगे कि उन्हें अपने रोज़मर्रा के पापों के लिए पश्चाताप की प्रार्थना करनी चाहिए, और सिद्ध होने के लिए, उन्हें क्रमिक रूप से पवित्र होना चाहिए।
परमेश्वर की धार्मिकता को जानने के लिए आपको पहले स्वयं को जानना होगा। यदि आप स्वयं को और परमेश्वर की धार्मिकता दोनों को जानते हैं, तो आपके पास उसकी धार्मिकता में विश्वास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, क्योंकि आप समझेंगे कि परमेश्वर की धार्मिकता आपकी तुलना में कितनी ऊँची, बड़ी और विस्तृत है। लेकिन अगर आप परमेश्वर धार्मिकता को नहीं जानते हैं, तो आप अपनी धार्मिकता का अनुसरण करने के लिए प्रेरित होंगे। जो लोग अपनी धार्मिकता से ग्रस्त हैं, वे परमेश्वर की धार्मिकता का पालन नहीं करते हैं, क्योंकि वे केवल अपने स्वयं की धार्मिकता का अनुसरण करना चाहते है।
इससे पहले कि हम उस पर विश्वास करें और उसके लिए धन्यवाद दें, हमें परमेश्वर की धार्मिकता को जानना चाहिए। परमेश्वर की धार्मिकता को जानकर, हम विश्वास कर सकते हैं कि यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया और क्रूस पर मर गए। यदि हम अपने अच्छे कर्मों से धर्मी ठहराए जा सकते हैं, तो हमें परमेश्वर की धार्मिकता से उद्धार की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन जब हमें पता चलता है कि यह संभव नहीं है, तो हम उसकी धार्मिकता की और भी अधिक सराहना कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमें बचाया, जो अच्छे कर्मों के आधार पर हमारा जीवन नहीं जी सके।
क्या आपके विचार और कर्म सभी अच्छे हैं? बिलकूल नही। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे पास बहुत सी कमियाँ हैं, इसलिए परमेश्वर ने अपनी धार्मिकता से हमें पूरी तरह से बचा लिया है। चूँकि परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करने से हमारा उद्धार हुआ है, इसलिए हम इस संसार में उन सभी को परमेश्वर की धार्मिकता का प्रचार करना चाहते हैं जो इसे नहीं जानते हैं।
जो स्वयं को नहीं जानता वह दूसरों में दोष ढूंढता है और उनके बारे में बुरा बोलता है। परन्तु यदि वह परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास रखता है, तो उसे गर्व से इस धार्मिकता का प्रचार करना चाहिए, और अपनी धार्मिकता पर घमण्ड नहीं करना चाहिए। परन्तु जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास नहीं करते, वे उसकी धार्मिकता की निंदा करने का पाप करते हैं। परमेश्वर उनके पापों के लिए उनका न्याय करेगा।
परमेश्वर ने अपने पुत्र को इस पृथ्वी पर भेजा और आपको उसकी धार्मिकता दी है। जैसे-जैसे हम अंतिम दिन के करीब पहुँचते हैं, हमें एक-दूसरे से इस बात पर बहस नहीं करनी चाहिए कि व्यवस्था की धार्मिकता बेहतर है या बदतर। जो लोग परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करते हैं, उन्हें अपने शरीर की परवाह नहीं करनी चाहिए, बल्कि परमेश्वर की धार्मिकता में विश्वास करके केवल परमेश्वर का आभारी होना चाहिए।
आइए हम अपने परमेश्वर का धन्यवाद करें जिसने हमें अपनी धार्मिकता से पूरी तरह बचाया है। क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता ने आपके सब पापों को क्षमा कर दिया है, आप उन लोगों की तरह न बने जो अपनी धार्मिकता का अनुसरण करते हुए परमेश्वर के विरुद्ध हो जाते हैं।