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關於基督教信仰的常見問題解答

話題 4:讀者的經常提問及解答

4-3. अपने दावा किया है की बपतिस्मा का मतलब है “पापों को पारित करना।” क्या इसका बाइबल से कोई आधार है?

यीशु ने कहा, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है” (मत्ती ३:१५)। यहाँ, प्राचीन ग्रीक में “सब धार्मिकता” ‘दिकाइओसुने’ है जिसका मतलब है सबसे उचित तरीके से। इसका मतलब है यीशु मसीह ने सबसे उचित रीति असे पूरी मनुष्यजाति को बचाया।
यहाँ, हमें सोचने की जरुरत है की व्यवस्था के बलिदान की पध्धति के मुताबिक़ स्वयं को पाप-बलि के रूप में अर्पण करने के लिए यीशु को क्या करने की जरुरत है। वह व्यवस्था का नाश करने के लिए नहीं आया, लेकिन व्यवस्था को पूरा करने के लिए आया था। उसने मत्ती ५:१७ में कहा है की, “यह न समझो की मैं व्यवस्था या भविष्यवक्ताओं की पुस्तकों को लोप करने आया हूँ, लोप करने नहीं, परन्तु पूरा करने आया हूँ।”
इसलिए, यीशु के लिए यह आवश्यक था की वह हाथ रखने की रीति से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से बपतिस्मा ले और जैसे हारून महायाजक ने प्रायश्चित के दिन इस्राएलियों के वार्षिक पापों को बकरी के सिर पर हाथ रखने के द्वारा उसके ऊपर डाला था वैसे ही जगत के सारे पाप अपने ऊपर उठाए। यह अनन्त वाचा थी (लैव्यव्यवस्था १६:३४)।
पिता की अनन्त वाचा का पालन करने के लिए, यीशु, पुत्र, को यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के द्वारा बपतिस्मा दिया गया, जो हारून महायाजक का वंश और जगत का सबसे महान व्यक्ति था (लूका १:५, मत्ती ११:११)। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को यीशु के सिर पर हाथ रखकर जगत के सारे पापों को उसके सिर पर डालना पडा क्योंकि वह मनुष्यजाति के प्रतिनिधि के रूप में पृथ्वी का महायाजक था।
इसी लिए यूहन्ना १:६-८ में इस तरह लिखा है, “एक मनुष्य परमेश्‍वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिसका नाम यूहन्ना था। वह गवाही देने आया कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्‍वास लाएँ। वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।” यशायाह ५३:६ भी कहता है, “यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।” इसी लिए परमेश्वर ने अपने दूत यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को यीशु के छह महीने पहले भेजा। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने कहा, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है,” (यूहन्ना १:२९) उसके दुसरे दिन उसने यीशु को बपतिस्मा दिया।
पुराने नियम में, पापी के प्रायश्चित के लिए निर्दोष बलिदान और उसके ऊपर हाथ रखना और उसका लहू लेने के लिए उसको मारना आवश्यक था। इसलिए यीशु के लिए यह उचित था, जो परमेश्वर के पुत्र के रूप में पवित्र और निर्दोष था की यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से हाथ रखने के द्वारा वह बपतिस्मा प्राप्त करे और परमेश्वर की वाचा के मुताबिक़ सब धार्मिकता को पूरा करने के लिए क्रूस पर चढ़े।
पवित्रशास्त्र पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखा गया है, इसलिए हम उसे केवल हमारे दैहिक विचारों से नहीं समझ सकते। इसलिए हमें पवित्र आत्मा के प्रकाशन से उसके छिपे हुए अर्थ को ढूँढना है, जो आत्मिक अर्थ है। इसी लिए पौलुस कहता है, “शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है” (२ कुरिन्थियों ३:६)। उसका मतलब है की हमें शब्द के अनुसार विश्वास नहीं करना है, लेकिन शब्दों के पीछे छिपे मतलब को समझना है।
और यशायाह ३४:१६ कहता है, “यहोवा की पुस्तक से ढूँढ़कर पढ़ो : इनमें से एक भी बात बिना पूरा हुए न रहेगी; कोई बिना जोड़ा न रहेगा। क्योंकि मैं ने अपने मुँह से यह आज्ञा दी है और उसी की आत्मा ने उन्हें इकट्ठा किया है।”
परमेश्वर ने इस प्रकार नहीं कहा है: “यीशु ने अपने बपतिस्मा के द्वारा जगत के सारे पापों को प्राप्त किया है।” हालाँकि, उसने यही सत्य पवित्रशास्त्र के द्वारा कहा है और उन अंधों से इसे छिपा दिया है जिनके अन्दर पवित्र आत्मा नहीं है। जब हम कहते है, “मम्मी,” तब हमारा मतलब होता है की उसने मुझे जन्म दिया है और अब तक मुझे पाला है। “मम्मी” शब्द के बहुत सारे छिपे हुए मतलब है भले ही यह केवल एक शब्द है। वैसे ही, “सब धार्मिकता” का आत्मिक मतलब है की यीशु ने परमेश्वर की व्यवस्था के मुताबिक़ सबसे उचित तरीके से सारे पापों को सहा। हमें इस छिपे हुए आत्मिक मतलब को समझना है।
यदि लोग कहते है की उसने क्रूस पर सारे पापों को ले लिया, तो क्या ऐसा कोई वचन है जो ठीक इसी रीति से बताता है? मुझे आशा है की यह उत्तर आपके लिए मददगार होगा।
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